बेचने पर टैक्स कितना?

Capital Gains Tax Calculator

शेयर, म्यूचुअल फंड, ज़मीन-मकान या सोना बेचने पर capital gains tax कितना बनेगा — रखने की अवधि, grandfathering, indexation और छूट के साथ (FY 2026-27)।

  • Short-term या Long-term
  • छह तरह की संपत्ति
  • grandfathering और indexation
  • धारा 82 / 86 / 85 की छूट
  • surcharge और 4% cess
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहअल्पकालीन और दीर्घकालीन लाभ पर दरें अलग होती हैं, इसलिए होल्डिंग की अवधि मायने रखती है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

Capital Gains Tax कैसे निकलता है?

कोई संपत्ति बेचने पर जो मुनाफ़ा होता है (बिक्री की क़ीमत − ख़र्च − ख़रीद की लागत), उसे पूँजीगत लाभ (capital gain) कहते हैं। संपत्ति कितने समय रखी गई, उसके हिसाब से लाभ short-term या long-term माना जाता है और दर अलग लगती है। Short-term लाभ पर कहीं 20% की तय दर है, तो कहीं आपके income-tax slab की दर। यहाँ आप संपत्ति का प्रकार, ख़रीद/बिक्री की क़ीमत और अवधि डालकर दरें, लागू धारा और कर देख सकते हैं।

नया Income-tax Act 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू है, इसलिए धारा का नया नंबर पहले और पुराना (1961 Act) नंबर कोष्ठक में दिखाया गया है।

FY 2026-27 के नियम जो यह calculator इस्तेमाल करता है तारीख़: Oct 2026

FY 2026-27 के नियम जो यह calculator इस्तेमाल करता है तारीख़: Oct 2026
संपत्तिLong-term तब बनता है जब रखने की अवधि इससे ज़्यादा होShort-term gain पर करLong-term gain पर कर
Listed equity शेयर / equity-oriented म्यूचुअल फंड12 महीने20% — धारा 196 [111A]12.5% — धारा 198 [112A] (साल में पहले ₹1,25,000 की छूट)
डेट / निर्दिष्ट म्यूचुअल फंड, मार्केट-लिंक्ड डिबेंचर, अनलिस्टेड बॉन्डकोई भी अवधिSlab दर, हमेशा short-term माना जाता है — धारा 76 [50AA]—
अन्य listed प्रतिभूतियाँ (बॉन्ड, गोल्ड ETF आदि)12 महीनेSlab की दर — धारा 67 [45]12.5% — धारा 197 [112]
अनलिस्टेड शेयर24 महीनेSlab की दर — धारा 67 [45]12.5% — धारा 197 [112]
ज़मीन और इमारत24 महीनेSlab की दर — धारा 67 [45]12.5% — धारा 197 [112]; 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन/इमारत: यह दर या indexation के साथ 20%, जो कम हो
फ़िज़िकल सोना / गहने, secondary-market SGB24 महीनेSlab की दर — धारा 67 [45]12.5% — धारा 197 [112]

दरें और सीमाएँ दर्शाई गई तारीख़ की हैं और बजट / वित्त अधिनियम से बदल सकती हैं। नीचे दिए आधिकारिक स्रोतों पर ताज़ा नियम ज़रूर देखें।

Please check the official website · कृपया आधिकारिक वेबसाइट देखें: Income Tax Department (e-filing portal) · Income-tax Act 2025 — s.196 [111A] short-term equity · Income-tax Act 2025 — s.197 [112] long-term gains · Income-tax Act 2025 — s.198 [112A] long-term equity · Income-tax Act 2025 — s.76 [50AA] specified mutual funds / debentures · Exemptions available from capital gains

इन बातों का ध्यान रखें
  • यह calculator 87A (नई धारा 156) की rebate नहीं गिनता — special-rate पूँजीगत लाभ पर उसका लागू होना साफ़ नहीं है।
  • Basic exemption limit से कम आय वाला निवासी व्यक्ति/HUF बाक़ी कमी की रकम इन लाभों में से घटा सकता है (नियम देखें) — यहाँ नहीं जोड़ा गया है।
  • Surcharge आपकी कुल आय पर निर्भर है; यहाँ आप ख़ुद प्रतिशत भरते हैं (डिफ़ॉल्ट 0)। Special-rate पूँजीगत लाभ पर surcharge की ऊपरी सीमा है — नियम देखें।
  • नुक़सान (loss) होने पर कर शून्य दिखता है; loss को set-off / carry-forward करने के नियम अलग हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

We first decide whether the gain is short-term or long-term from the months you held the asset and the holding period set for that asset type. Gain = sale price − transfer expenses − cost (and improvement cost). For listed equity bought before 1 Feb 2018 the cost can be raised to the 31 Jan 2018 value (grandfathering). For land/buildings bought before 23 Jul 2024 we compare 12.5% without indexation with 20% on the indexed gain and take the lower tax. Exemptions you enter reduce the long-term gain; the Rs 1.25 lakh exemption applies to listed-equity long-term gains; tax = taxable gain × rate, plus surcharge you enter and 4% cess.

पहले संपत्ति के प्रकार की तय अवधि और आपके रखे महीनों से तय होता है कि लाभ short-term है या long-term। लाभ = बिक्री की क़ीमत − हस्तांतरण ख़र्च − लागत (और सुधार का ख़र्च)। 1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे listed equity में लागत 31 जनवरी 2018 के मूल्य तक बढ़ सकती है (grandfathering)। 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन/इमारत में बिना indexation 12.5% और indexation वाले लाभ पर 20% की तुलना करके कम कर लिया जाता है। आपके भरे exemption long-term लाभ घटाते हैं; ₹1.25 लाख की छूट listed-equity के long-term लाभ पर है; कर = कर-योग्य लाभ × दर, साथ में आपका भरा surcharge और 4% cess।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. This is an illustrative calculation for FY 2026-27 using the rates and limits listed on this page as of the date shown. It does not include the s.156 [87A] rebate, surcharge unless you enter it, loss set-off or carry-forward, the basic-exemption shortfall adjustment, brokerage or STT, or the detailed conditions of the s.82 [54], s.86 [54F] and s.85 [54EC] exemptions. Rules, section numbers and eligibility change — please check the official Income Tax Department website and confirm with a qualified tax professional. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह FY 2026-27 का केवल उदाहरण-स्वरूप हिसाब है, जो इस पेज पर दर्शाई तारीख़ तक की दरों और सीमाओं पर आधारित है। इसमें धारा 156 [87A] की rebate, surcharge (जब तक आप न भरें), loss का set-off/carry-forward, basic-exemption की कमी का समायोजन, brokerage या STT, और धारा 82 [54], 86 [54F] व 85 [54EC] की विस्तृत शर्तें शामिल नहीं हैं। नियम, धारा संख्याएँ और पात्रता बदलती रहती हैं — कृपया आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें और योग्य कर-विशेषज्ञ से पुष्टि करें। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • लाभ = बिक्री की क़ीमत − हस्तांतरण ख़र्च − ख़रीद लागत (और सुधार का ख़र्च)। रखने की अवधि से तय होता है कि वह short-term है या long-term।
  • संपत्ति का प्रकार बदलते ही अवधि और दर बदल जाती है: listed equity, डेट फ़ंड, अन्य listed, अनलिस्टेड शेयर, ज़मीन-इमारत, सोना।
  • पेज FY 2026-27 के लिए इस साइट की दरें और सीमाएँ इस्तेमाल करता है और धाराएँ नई संख्या के बाद पुरानी संख्या कोष्ठक में दिखाता है।
  • rebate, नुकसान का set-off/carry-forward, brokerage और STT इसमें नहीं हैं। यह उदाहरण-स्वरूप हिसाब है, कर-सलाह नहीं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

अशोक: listed equity में long-term लाभ (पेज की शुरुआती संख्याएँ)

अशोक ने ₹5,00,000 के listed शेयर / equity फ़ंड 30 महीने रखकर ₹10,00,000 में बेचे। हस्तांतरण ख़र्च शून्य, surcharge 0%।

वर्गीकरण
Long-term (12 महीने से ज़्यादा रखा)
लाभ
₹5,00,000
साल की छूट
− ₹1,25,000
कर लगने वाला लाभ
₹3,75,000
दर
12.5%
कर
₹46,875
4% cess
₹1,875
कुल कर
₹48,750
लाभ पर प्रभावी दर
9.75%
हाथ में आई रकम
₹9,51,250

₹5 लाख के लाभ पर कुल कर ₹48,750 बना, यानी प्रभावी दर लगभग 9.75%। ₹1.25 लाख की छूट ने कर काफ़ी घटाया।

मालती: जल्दी बेचने की क़ीमत

मालती ने ₹3,00,000 के शेयर 8 महीने रखकर ₹3,80,000 में बेचे। surcharge 0%।

वर्गीकरण
Short-term (8 महीने)
लाभ
₹80,000
दर
20%
कर
₹16,000
4% cess
₹640
कुल कर
₹16,640
लाभ पर प्रभावी दर
20.8%

अगर वही लाभ 12 महीने से ज़्यादा रखने के बाद आता, तो ₹80,000 साल की ₹1.25 लाख वाली छूट के भीतर रहकर कर-मुक्त होता। अवधि से बड़ा फ़र्क़ पड़ता है।

विजय: मकान बेचना, indexation की तुलना

विजय ने 2012-13 में ₹30,00,000 में प्रॉपर्टी ख़रीदी (23 जुलाई 2024 से पहले) और 2026-27 में ₹1,00,00,000 में बेची (रखने की अवधि 24 महीने से ज़्यादा)। पेज की "23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी" वाली पसंद चालू, CII 200 और 384।

बिना indexation लाभ
₹70,00,000, कर 12.5% = ₹8,75,000
indexed लागत
₹57,60,000
indexation के साथ लाभ
₹42,40,000, कर 20% = ₹8,48,000
पेज कम कर वाला चुनता है
indexation के साथ: ₹8,48,000
4% cess
₹33,920
कुल कर
₹8,81,920
अगर ₹20 लाख 54EC bonds में लगाए
कुल कर ₹4,65,920

यहाँ दोनों रास्तों में बहुत कम अंतर रहा (₹27,000), पर पेज हमेशा कम वाला दिखाता है। पात्रता और शर्तें अपने कर-सलाहकार से पक्की करें।

पेज के नियम (FY 2026-27): संपत्ति, अवधि और दर

पेज के नियम (FY 2026-27): संपत्ति, अवधि और दर
संपत्तिLong-term तब, जब रखा होShort-term gain पर करLong-term gain पर कर
Listed equity शेयर / equity फ़ंड12 महीने से ज़्यादा20% (धारा 196 [111A])12.5% (धारा 198 [112A]); साल में पहले ₹1.25 लाख की छूट
डेट / निर्दिष्ट म्यूचुअल फ़ंड, market-linked debenture, अनलिस्टेड बॉन्डहमेशा short-term माना जाता हैSlab दर (धारा 76 [50AA])लागू नहीं
अन्य listed प्रतिभूतियाँ (बॉन्ड, गोल्ड ETF आदि)12 महीने से ज़्यादाSlab दर (धारा 67 [45])12.5% (धारा 197 [112])
अनलिस्टेड शेयर24 महीने से ज़्यादाSlab दर12.5% (धारा 197 [112])
ज़मीन और इमारत24 महीने से ज़्यादाSlab दर12.5%; 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी पर (निवासी व्यक्ति / HUF) indexation के साथ 20% का विकल्प, जो कम हो
फ़िज़िकल सोना / गहने, secondary-market SGB24 महीने से ज़्यादाSlab दर12.5% (धारा 197 [112])

सारी दरें पेज के "नियम" से हैं और बजट / वित्त अधिनियम से बदल सकती हैं। ऊपर 4% cess अलग से जुड़ता है।

Listed equity का long-term लाभ: कर कितना (₹1.25 लाख की छूट, 12.5%, 4% cess, surcharge 0%)

Listed equity का long-term लाभ: कर कितना (₹1.25 लाख की छूट, 12.5%, 4% cess, surcharge 0%)
लाभकर लगने वाला लाभकुल कर (cess समेत)लाभ पर प्रभावी दर
₹1,00,000₹0₹00%
₹1,25,000₹0₹00%
₹2,00,000₹75,000₹9,7504.88%
₹5,00,000₹3,75,000₹48,7509.75%
₹10,00,000₹8,75,000₹1,13,75011.38%
₹25,00,000₹23,75,000₹3,08,75012.35%

छूट पूरे साल में एक बार है। अगर इस साल पहले भी ऐसे लाभ दर्ज हुए हैं तो पेज के "अन्य धारा 198 के लाभ" में डालें।

त्वरित संदर्भ: पूँजीगत लाभ का कर

त्वरित संदर्भ: पूँजीगत लाभ का कर
लाभबिक्री की क़ीमत − हस्तांतरण ख़र्च − (ख़रीद की क़ीमत + सुधार का ख़र्च)
अवधि गिननारखने के महीने तय सीमा से ज़्यादा हों तो long-term, वरना short-term
Grandfathering1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे listed equity में लागत 31 जनवरी 2018 के मूल्य तक बढ़ सकती है (पेज में वैकल्पिक खाना)
Indexation की तुलनासिर्फ़ ज़मीन / इमारत, 23 जुलाई 2024 से पहले की ख़रीद; 12.5% और 20% (indexed लाभ) में जो कम हो
छूट के खानेधारा 82 [54] मकान में निवेश, 86 [54F] शुद्ध रकम मकान में लगाना, 85 [54EC] bonds (₹50 लाख तक)
Surcharge और cesssurcharge आप ख़ुद भरते हैं (डिफ़ॉल्ट 0)। cess 4%, (कर + surcharge) पर।
नुकसान होने परपेज कर शून्य और "यह नुकसान है" दिखाता है
इस पेज में क्या नहींधारा 156 [87A] rebate, नुकसान का set-off/carry-forward, basic exemption की कमी का समायोजन, brokerage / STT

Capital Gains Tax Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

जब आप शेयर, म्यूचुअल फंड, ज़मीन-मकान या सोना बेचते हैं और बिक्री की क़ीमत ख़रीद की क़ीमत से ज़्यादा होती है, तो यह मुनाफ़ा "पूँजीगत लाभ" (capital gain) कहलाता है और उस पर आयकर लग सकता है। यह calculator एक सवाल का जवाब देता है: "इस बिक्री पर लगभग कितना capital gains tax बनेगा, और बिक्री की रकम में से कर काटकर मेरे हाथ में कितना बचेगा?"

पेज संपत्ति का प्रकार, रखने की अवधि, लागत और बिक्री की रकम के आधार पर पहले तय करता है कि लाभ short-term है या long-term, फिर उस प्रकार पर लागू दर लगाता है, छूटें घटाता है और अंत में cess जोड़कर कुल कर दिखाता है। साथ में यह भी बताता है कि यह नतीजा किस धारा के तहत आया।

पेज पर संख्याएँ FY 2026-27 के लिए इस calculator में माने गए नियमों पर आधारित हैं और पेज पर "तारीख़" के साथ दिखाई जाती हैं। कर की दरें, सीमाएँ और धाराओं के नंबर बजट या वित्त अधिनियम से बदल सकते हैं, इसलिए आख़िरी निर्णय से पहले आयकर विभाग की वेबसाइट पर ताज़ा नियम ज़रूर देख लें।

किसके काम का है

  • जिसने कुछ साल पहले शेयर या equity mutual fund लिए थे और अब बेचकर पैसा निकालना चाहता है।
  • जो परिवार अपनी पुरानी ज़मीन या मकान बेचने की सोच रहा है और जानना चाहता है कि कितना कर देना होगा।
  • जिसने विरासत या तोहफ़े में सोना पाया है और उसे बेचना चाहता है।
  • वे लोग, जो ITR भरने से पहले मोटा अंदाज़ा लगाना चाहते हैं कि इस साल की बिक्री पर कितना कर बनेगा।
  • जो यह देखना चाहते हैं कि कुछ महीने और रुककर बेचने से long-term बन जाने पर कितना कर बचता है।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

यह पेज बाक़ी calculators से ज़्यादा विस्तृत है। फ़ील्ड ये हैं।

  • संपत्ति का प्रकार: एक ड्रॉप-डाउन, जिसमें listed equity शेयर या equity-oriented fund, डेट/निर्दिष्ट म्यूचुअल फंड और डिबेंचर, अन्य listed प्रतिभूतियाँ, अनलिस्टेड शेयर, ज़मीन और इमारत, और फ़िज़िकल सोना हैं। यह चुनाव ही तय करता है कि long-term कब माना जाएगा और दर क्या होगी।
  • ख़रीद की क़ीमत (₹): आपने संपत्ति कितने में ख़रीदी।
  • बिक्री की क़ीमत (₹): आप उसे कितने में बेच रहे हैं या बेची।
  • हस्तांतरण ख़र्च (₹): ब्रोकरेज, स्टांप, क़ानूनी ख़र्च या दलाली जैसे बिक्री से सीधे जुड़े ख़र्च।
  • रखने की अवधि (महीने): 0 से 360 महीने। यहाँ पूरे महीने गिनकर डालें।
  • सुधार का ख़र्च (₹), वैकल्पिक: संपत्ति में किए गए बड़े सुधार का ख़र्च। न हो तो 0।
  • 31 जनवरी 2018 का मूल्य (₹), वैकल्पिक: सिर्फ़ 1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे listed equity या equity म्यूचुअल फंड के लिए (grandfathering)।
  • प्रॉपर्टी 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी (toggle): ज़मीन-इमारत के लिए indexation वाला तुलनात्मक तरीक़ा चालू करने के लिए। चालू होने पर ख़रीद, बिक्री और सुधार के वित्त वर्ष भी चुनने होते हैं।
  • आपके slab की दर (%) और surcharge (%): जहाँ लाभ पर slab दर से कर लगता है वहाँ slab काम आता है। surcharge आप ख़ुद भरते हैं; पेज पर डिफ़ॉल्ट 0 है।
  • इस साल पहले से दर्ज अन्य धारा 198 [112A] के लाभ (₹): अगर आप इस साल पहले भी equity में long-term लाभ बुक कर चुके हैं।
  • रिहायशी मकान में दोबारा निवेश (धारा 82 [54]), मकान में लगाई गई बिक्री की शुद्ध रकम (धारा 86 [54F]) और 54EC बॉन्ड में निवेश (धारा 85 [54EC]): पुनर्निवेश से मिलने वाली छूटों के लिए तीन वैकल्पिक बॉक्स।
ध्यान दें: धाराओं के नंबर नए Income-tax Act 2025 के हैं और कोष्ठक में पुराने 1961 Act के नंबर दिए गए हैं। छूटों की शर्तें और समय-सीमाएँ अलग-अलग हैं, उन्हें आधिकारिक स्रोत से ही जाँचें।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

ऊपर सबसे बड़ा आँकड़ा "कुल कर (cess समेत)" है, और उसके नीचे लिखा होता है कि लाभ short-term है या long-term और कौन-सी धारा लागू हुई। अगर बिक्री पर नुक़सान हुआ है, तो पेज कर नहीं दिखाता, सिर्फ़ यह बताता है कि यह नुक़सान है।

नीचे की पंक्तियों में आप पूरी चेन देख सकते हैं।

  1. वर्गीकरण: short-term या long-term, और इसके लिए कितने महीने से ज़्यादा रखना ज़रूरी है। डेट फंड जैसी संपत्तियों में लाभ हमेशा short-term माना जाता है, इसलिए वहाँ अवधि का फ़र्क़ नहीं पड़ता।
  2. बिक्री की क़ीमत − हस्तांतरण ख़र्च: शुद्ध बिक्री रकम।
  3. इस्तेमाल की गई लागत: ख़रीद और सुधार का जोड़। indexation या grandfathering लगा हो तो यहाँ बदली हुई लागत दिखती है।
  4. पूँजीगत लाभ (या नुक़सान)।
  5. छूट: मकान या बॉन्ड वाली और equity की सालाना छूट, अगर लागू हो।
  6. कर-योग्य लाभ, इस्तेमाल की गई दर, कर, surcharge, cess और कुल कर।
  7. प्रभावी दर: कुल कर को लाभ से भाग देकर, जो बताती है कि मुनाफ़े का वास्तव में कितना हिस्सा कर में गया।
  8. कर के बाद हाथ में रकम: शुद्ध बिक्री रकम में से कुल कर घटाकर।

साथ में एक पाई चार्ट है, जो दिखाता है कि बिक्री की क़ीमत कहाँ-कहाँ बँटी: लागत, ख़र्च, कर और आपके पास बचा मुनाफ़ा।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

बेचने से पहले रखने की अवधि जाँचें

अगर आपने शेयर 11 महीने से रखे हैं, तो रखने की अवधि का स्लाइडर 11 और 13 पर रखकर देखें। सिर्फ़ कुछ दिन के इंतज़ार से कर में कितना फ़र्क़ आता है, यह दिख जाएगा। हालाँकि बाज़ार की क़ीमत इस बीच बदल भी सकती है, इसलिए केवल कर के लिए इंतज़ार का निर्णय सोच-समझकर लें।

छूटों का असर देखें

ज़मीन-इमारत बेचने के मामले में मकान या बॉन्ड में पुनर्निवेश की राशि बदलकर देखें कि कर कैसे घटता है। पर इन छूटों की शर्तें (समय-सीमा, मकान की श्रेणी, सीमा) जटिल हैं, इसलिए केवल calculator पर भरोसा न करें।

"कर के बाद हाथ में रकम" को लक्ष्य से मिलाएँ

अगर बिक्री से मिले पैसे से बेटी की फ़ीस या नया घर लेना है, तो कुल बिक्री रकम नहीं, कर के बाद वाली रकम से बजट बनाएँ।

अलग-अलग संपत्ति के लिए अलग रन

अगर आप शेयर और सोना दोनों बेचते हैं, तो हर संपत्ति के लिए अलग से calculator चलाइए और कुल कर जोड़ लीजिए।

ITR से पहले जाँच

यह अंदाज़ा आपको ITR भरते समय सही अनुमान रखने में मदद करता है, पर ITR भरते समय broker का capital gains statement और असली दस्तावेज़ ही आधार रखें।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "कर तभी लगता है जब पैसा बैंक खाते में आए": कर बिक्री पर बने लाभ पर लगता है, पैसा कहाँ रखा है उस पर नहीं।
  • सारे म्यूचुअल फंड को एक जैसा मान लेना: equity-oriented फंड और डेट फंड का कर अलग है।
  • ख़रीद का सही दिन न जानना: रखने की अवधि ख़रीद की तारीख़ से गिनी जाती है। SIP में हर किस्त की अपनी ख़रीद तारीख़ होती है।
  • हस्तांतरण ख़र्च और सुधार ख़र्च भूल जाना: इन्हें न जोड़ने से लाभ ज़्यादा दिखेगा और कर भी ज़्यादा।
  • नुक़सान को बेकार समझना: नुक़सान को कुछ नियमों के तहत आगे ले जाया जा सकता है। यह calculator इसकी गणना नहीं करता, पर इसका ज़िक्र ज़रूर आधिकारिक साइट पर देखें।
  • सारी छूटें अपने आप मान लेना: हर छूट की शर्तें हैं, और इस calculator में वे केवल रकम के रूप में लगाई जाती हैं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
  • पहले तय होता है कि लाभ long-term है या नहीं: रखने की अवधि चुनी हुई संपत्ति की सीमा से ज़्यादा हो तो long-term। इस calculator में listed equity और अन्य listed प्रतिभूतियों के लिए 12 महीने, और अनलिस्टेड शेयर, ज़मीन-इमारत और फ़िज़िकल सोने के लिए 24 महीने माने गए हैं।
  • लाभ = (बिक्री − हस्तांतरण ख़र्च) − (ख़रीद + सुधार का ख़र्च)।
  • Listed equity में long-term और 31 जनवरी 2018 का मूल्य भरा हो, तो लागत वह मानी जाती है जो ख़रीद क़ीमत और (31 जनवरी 2018 के मूल्य तथा बिक्री क़ीमत में से जो कम हो) में अधिक हो।
  • ज़मीन-इमारत में अगर आपने "23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी" चुना है, तो पेज दोनों तरीक़ों से कर निकालता है: बिना indexation एक सीधी दर पर, और indexation के साथ दूसरी दर पर। जिसमें कर कम हो वही दिखाया जाता है। Indexed लागत = ख़रीद × (बिक्री वर्ष का CII ÷ ख़रीद वर्ष का CII), और सुधार के लिए उसी तरह उसके वर्ष के CII से।
  • Long-term में पुनर्निवेश की छूटें घटाई जाती हैं, फिर listed equity के long-term लाभ पर सालाना छूट घटती है (इस साल पहले दर्ज लाभ घटाने के बाद)।
  • इसके बाद कर = कर-योग्य लाभ × दर। दरें इस calculator में संपत्ति के अनुसार माने गए हैं: listed equity में short-term पर 20% और long-term पर 12.5%, सालाना ₹1.25 लाख की छूट के साथ। ज़मीन-इमारत, अनलिस्टेड शेयर और सोने में long-term पर 12.5% माना गया है, जबकि इन संपत्तियों में short-term लाभ पर slab दर लगती है। डेट/निर्दिष्ट फंड पर slab दर। ये मान चुनी हुई तारीख़ तक के हैं और बदल सकते हैं।
  • Surcharge = कर × आपका भरा प्रतिशत, और cess = (कर + surcharge) का 4%।

पेज यह नहीं करता: धारा 156 [87A] की rebate नहीं लगती, loss का set-off और carry-forward नहीं होता, और basic exemption की कमी का समायोजन शामिल नहीं है।

एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: equity में long-term लाभ

मान लीजिए रूपा नाम की एक शिक्षिका ने कुछ listed शेयर ₹3,20,000 में ख़रीदे थे और 40 महीने बाद ₹7,45,000 में बेचती है। ब्रोकरेज आदि ₹1,500 लगता है। उसने इस साल कोई और long-term equity लाभ नहीं कमाया।

  1. शुद्ध बिक्री = 7,45,000 − 1,500 = ₹7,43,500।
  2. लाभ = 7,43,500 − 3,20,000 = ₹4,23,500। 40 महीने रखा, यानी long-term।
  3. सालाना छूट ₹1,25,000 के बाद कर-योग्य लाभ = ₹2,98,500।
  4. 12.5% पर कर = ₹37,312.50।
  5. cess 4% = ₹1,492.50, कुल कर = ₹38,805।
  6. प्रभावी दर = 38,805 ÷ 4,23,500 ≈ 9.16%।
  7. कर के बाद हाथ में रकम ≈ ₹7,04,695।

अगर रूपा इस साल पहले ही ₹80,000 का equity long-term लाभ दर्ज कर चुकी होती, तो छूट में सिर्फ़ ₹45,000 बचते। तब कर-योग्य लाभ ₹3,78,500 होता और कुल कर लगभग ₹49,205 बनता।

उदाहरण 2: short-term लाभ

एक विद्यार्थी ने ₹1,50,000 के शेयर ख़रीदे और 8 महीने बाद ₹1,80,000 में बेच दिए। 12 महीने से कम रखने से यह short-term है। लाभ ₹30,000 पर 20% के हिसाब से कर ₹6,000 और cess ₹240, कुल ₹6,240 बनता है। यहाँ सालाना ₹1.25 लाख की छूट लागू नहीं होती, क्योंकि वह long-term लाभ के लिए है।

उदाहरण 3: पुरानी ज़मीन और indexation की तुलना

कल्पना कीजिए कि एक परिवार ने वित्त वर्ष 2014-15 में ₹28,00,000 में एक प्लॉट ख़रीदा और 2026-27 में ₹46,00,000 में बेचा, ख़र्च ₹46,000। शुद्ध बिक्री ₹45,54,000।

  • बिना indexation: लाभ = 45,54,000 − 28,00,000 = ₹17,54,000, 12.5% पर कर ₹2,19,250।
  • Indexation के साथ: CII 240 (2014-15) और 384 (2026-27) लेकर indexed लागत = 28,00,000 × 384 ÷ 240 = ₹44,80,000। लाभ = ₹74,000, 20% पर कर ₹14,800।
  • कम कर वाला तरीक़ा indexation का है। cess के बाद कुल कर = ₹15,392।

यानी इस उदाहरण में प्लॉट के दाम महँगाई के लगभग बराबर बढ़े थे, इसलिए indexation वाला तरीक़ा बहुत सस्ता पड़ा। दाम बहुत ज़्यादा बढ़े हों तो अक्सर बिना indexation वाला तरीक़ा कम कर देता है। यही कारण है कि पेज दोनों दिखाता है।

उदाहरण का सबक: संपत्ति के प्रकार, रखने की अवधि और ख़रीद के समय के आधार पर एक ही रुपये का लाभ बहुत अलग कर में बदल सकता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह एक समय में एक बिक्री का अंदाज़ा देता है। एक वित्त वर्ष में कई बिक्री पर set-off और carry-forward नहीं करता।
  • धारा 156 [87A] की rebate और basic exemption की कमी का समायोजन नहीं करता।
  • Surcharge आपको ख़ुद भरना होता है; इसकी स्लैब ख़ुद नहीं पहचानता।
  • STT, ब्रोकरेज के कर और अन्य शुल्क नहीं जोड़ता, सिवाय उसके जो आप हस्तांतरण ख़र्च में भरें।
  • नियम बदलते हैं और अनेक विशेष स्थितियाँ (विरासत, तोहफ़ा, अप्रवासी भारतीय, विदेशी संपत्ति) अलग तरह से लागू हो सकती हैं।
  • यह एक अनुमान है और कर-रिटर्न का विकल्प नहीं है।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • LTCG Tax Harvesting Calculator: equity के long-term लाभ की सालाना छूट का उपयोग समझने के लिए।
  • Cost Inflation Index Calculator: indexed लागत अलग से निकालने के लिए।
  • Income Tax Calculator: अपनी कुल आय पर कर का अंदाज़ा।
  • Mutual Fund Returns Calculator: बेचने से पहले फंड का रिटर्न देखने के लिए।
  • Stamp Duty Calculator: संपत्ति की ख़रीद-बिक्री पर लगने वाले ख़र्च के लिए।
  • Advance Tax Calculator: बड़ी बिक्री के बाद अग्रिम कर की योजना।

यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी है, कर या क़ानूनी सलाह नहीं है। कर के नियम और दरें बदल सकती हैं, इसलिए आयकर विभाग की वेबसाइट या किसी योग्य कर सलाहकार से पुष्टि करें।

6 काम की बातें याद रखें

1
संपत्ति का प्रकार सही चुनें

अवधि और दर संपत्ति के प्रकार से तय होती है। डेट फ़ंड और शेयर को एक ही खाने में न डालें।

2
12 या 24 महीने की सीमा पर महीने गिनें

लाभ long-term बनने में महीने मायने रखते हैं। कितने महीने हुए, यह ख़रीद और बिक्री की सही तारीख़ से देखें।

3
साल की छूट का हिसाब रखें

listed equity के long-term लाभ की ₹1.25 लाख की छूट साल भर में एक बार है। पहले की बिक्री के लाभ पेज में अलग खाने में डालें।

4
ख़र्च और सुधार का रिकॉर्ड रखें

हस्तांतरण ख़र्च और सुधार का ख़र्च लाभ घटाते हैं। रसीदें संभालकर रखें।

5
छूट की शर्तें पहले पढ़ें

धारा 82, 86 और 85 की समय-सीमा और पात्रता अलग हैं। पेज का खाना भर देना शर्त पूरी होने की गारंटी नहीं है।

6
बड़े सौदे से पहले पेशेवर से पुष्टि

नियम, धाराएँ और दरें बदलती हैं। बड़ी बिक्री से पहले आधिकारिक वेबसाइट और योग्य कर-विशेषज्ञ से पुष्टि करें।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

FY 2026-27 के नियमों के अनुसार listed equity और equity-oriented fund में 12 महीने से ज़्यादा रखने पर long-term लाभ पर 12.5% कर लगता है, पर साल के पहले ₹1.25 लाख के लाभ पर छूट है। 12 महीने या उससे कम रखने पर short-term लाभ पर 20% कर है। साथ में 4% cess जुड़ता है। दरें बदल सकती हैं, इसलिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।

ज़मीन-मकान में 24 महीने से ज़्यादा रखने पर लाभ long-term होता है और दर 12.5% (बिना indexation) है। 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी संपत्ति पर निवासी व्यक्ति/HUF के लिए 12.5% (बिना indexation) और 20% (indexation के साथ) में से जो कम कर आए, वह चुनने का विकल्प है — यह calculator दोनों की तुलना करता है।

अप्रैल 2023 के बाद ख़रीदे "specified mutual fund" (जिनमें 35% से कम equity है), market-linked debenture और कुछ unlisted bond का लाभ कितने भी समय बाद बेचें, short-term माना जाता है और आपके income-tax slab की दर से कर लगता है; indexation नहीं मिलता।

कुछ शर्तों के साथ long-term लाभ को रहने के मकान में लगाने पर धारा 82 [54] या 86 [54F] की छूट, और ज़मीन-मकान के लाभ को तय bonds में (₹50 लाख तक) लगाने पर धारा 85 [54EC] की छूट मिल सकती है। शर्तें और समय-सीमा अलग हैं, इसलिए योग्य कर-विशेषज्ञ से पुष्टि करें।

पेज आपके डाले महीनों की गिनती लेता है और देखता है कि वह संपत्ति के प्रकार की तय सीमा (12 या 24 महीने) से ज़्यादा है या नहीं। सीमा के बराबर महीने long-term नहीं गिने जाते, उससे ज़्यादा चाहिए।

बिक्री से जुड़े सीधे ख़र्च जैसे brokerage, स्टांप, क़ानूनी ख़र्च। ये बिक्री की क़ीमत से घटाए जाते हैं।

संपत्ति में किए इज़ाफ़े या सुधार, ख़ासकर प्रॉपर्टी में। यह लागत में जुड़कर लाभ घटाता है। ऐसा कुछ न हो तो 0 रखें।

सिर्फ़ तब, जब listed equity या equity फ़ंड 1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदा हो। तब पेज 31 जनवरी 2018 का मूल्य लेकर देखता है कि लागत बढ़ेगी या नहीं। बाक़ी मामलों में 0 रखें।

तब पेज इसे नुकसान बताता है और कर शून्य दिखाता है। नुकसान का set-off या आगे ले जाने के नियम अलग हैं, जो पेज में नहीं हैं।

जहाँ लाभ पर आपके income-tax slab की दर से कर लगता है, जैसे डेट फ़ंड या short-term अनलिस्टेड शेयर। बाक़ी जगह यह इस्तेमाल नहीं होता। अपनी असली slab दर ख़ुद डालें।

क्योंकि surcharge आपकी कुल आय पर निर्भर है, जो पेज को पता नहीं। डिफ़ॉल्ट 0 है; लागू हो तो प्रतिशत ख़ुद भरें।

इस वित्त वर्ष में पहले से दर्ज listed equity के long-term लाभ। वे ₹1.25 लाख की छूट का हिस्सा पहले ही ले चुके होते हैं, इसलिए इस सौदे के लिए छूट कम बचती है।

पेज में secondary-market SGB "फ़िज़िकल सोना" वाले खाने में (24 महीने) है, जबकि गोल्ड ETF "अन्य listed प्रतिभूतियाँ" में (12 महीने)। अपने साधन के अनुसार सही खाना चुनें।

नहीं। पेज के नोट के अनुसार special-rate पूँजीगत लाभ पर इसके लागू होने का मामला साफ़ नहीं है, इसलिए इसे शामिल नहीं किया गया।

पेज के नोट के अनुसार ऐसे निवासी व्यक्ति / HUF के लिए बाक़ी कमी की रकम इन लाभों में से घटाने का नियम है। वह समायोजन पेज में नहीं जुड़ा है, इसलिए असली कर इससे कम हो सकता है।

नहीं। पेज ख़रीद-बिक्री वाली संपत्तियों के लिए है। derivatives या intraday का वर्गीकरण और कर अलग है और पेज उन्हें नहीं सँभालता।

नहीं। brokerage हस्तांतरण ख़र्च में आप ख़ुद डालें। STT जैसे शुल्क पेज अलग से नहीं गिनता।

पेज में इस सौदे के लिए ₹50 लाख तक की ऊपरी सीमा रखी है, और वह सिर्फ़ ज़मीन / इमारत के long-term लाभ पर है। असली शर्तें और समय-सीमा आधिकारिक स्रोत में देखें।

पेज के नियम-बॉक्स में दरों की तारीख़ और स्रोत-लिंक दिखते हैं। बजट या वित्त अधिनियम से दरें बदलें तो इस साइट के मान भी बदले जाते हैं; फिर भी आधिकारिक वेबसाइट पर ताज़ा नियम ज़रूर देखें।

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