Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
कार लोन लेते समय
कार का मूल्य समय के साथ घटता है जबकि लोन का ब्याज चलता रहता है, इसलिए बड़ा डाउन पेमेंट और छोटी अवधि (3–5 साल) आम तौर पर कुल लागत घटाते हैं। ऑन-रोड कीमत (बीमा, रजिस्ट्रेशन सहित) के हिसाब से कुल कीमत डालें और प्रोसेसिंग फ़ीस भी गिनें।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), with i = annual rate ÷ 12 ÷ 100 and n = years × 12 months; the schedule is run month by month (interest = balance × i, rest of the EMI repays principal), with the optional yearly prepayment taken off the balance at the end of each year. Car loan: loan = price − down payment. Education loan: simple interest during the course and moratorium is either paid during the course or added to the principal. Processing fee = fee % × loan, shown separately.
EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = साल × 12 महीने; भुगतान तालिका महीने-दर-महीने चलती है (ब्याज = बैलेंस × i, EMI का बाक़ी हिस्सा मूलधन चुकाता है), और वैकल्पिक सालाना प्रीपेमेंट हर साल के अंत में बैलेंस से घटता है। कार लोन: लोन = क़ीमत − डाउन पेमेंट। एजुकेशन लोन: कोर्स और मोरेटोरियम के दौरान साधारण ब्याज, जो या तो कोर्स के दौरान चुकाया जाता है या मूलधन में जुड़ जाता है। प्रोसेसिंग फ़ीस = फ़ीस % × लोन, अलग से दिखती है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Use the on-road price (insurance, registration included) for realistic numbers; interest rates depend on the lender, the car and your credit profile. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। सही अंदाज़े के लिए ऑन-रोड क़ीमत (बीमा, रजिस्ट्रेशन समेत) डालें; दर कर्ज़दाता, गाड़ी और आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल पर निर्भर है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
लोन = कार की ऑन-रोड कीमत − डाउन पेमेंट। डाउन पेमेंट जितना बड़ा, लोन, EMI और ब्याज तीनों उतने छोटे।
कार की क़ीमत समय के साथ घटती है जबकि ब्याज चलता रहता है, इसलिए छोटी अवधि आम तौर पर समझदारी भरी रहती है।
कार की असली लागत = डाउन पेमेंट + EMI की कुल रकम + प्रोसेसिंग फ़ीस। शोरूम की क़ीमत इसका हिस्सा भर है।
ब्याज दर और फ़ीस उदाहरण हैं। अपने कर्ज़दाता की ताज़ा शर्तें उसी से लें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
अर्जुन: पेज की शुरुआती संख्याओं वाली कार
अर्जुन ₹10,00,000 की ऑन-रोड कार पर 20% डाउन पेमेंट देता है। दर 9.5% (उदाहरण), अवधि 5 साल, फ़ीस 1%।
डाउन पेमेंट
₹2,00,000
लोन की रकम
₹8,00,000
मासिक EMI
₹16,801
कुल ब्याज
₹2,08,089
प्रोसेसिंग फ़ीस
₹8,000
कार की असली कुल लागत (डाउन + वापसी)
₹12,16,089
₹10 लाख की कार पर कुल लगभग ₹12.16 लाख जाते हैं। इस हिसाब में बीमा नवीनीकरण और ईंधन जैसे चलने के ख़र्च शामिल नहीं हैं।
पूजा: 10% या 30% डाउन पेमेंट?
पूजा उसी ₹10 लाख की कार (9.5%, 5 साल, फ़ीस 1% उदाहरण) पर दो डाउन पेमेंट तौलती है।
10% डाउन (₹1 लाख)
लोन ₹9 लाख, EMI ₹18,902, ब्याज ₹2,34,101
30% डाउन (₹3 लाख)
लोन ₹7 लाख, EMI ₹14,701, ब्याज ₹1,82,078
EMI का अंतर
₹4,201 प्रति माह
कुल ब्याज का अंतर
₹52,023
अतिरिक्त ₹2 लाख पहले देने से लगभग ₹52,000 ब्याज बचता है। पर इतनी नक़दी देने के बाद भी आपातकालीन निधि बची रहनी चाहिए।
विवेक: 3, 5 या 7 साल की अवधि
विवेक ₹8 लाख का लोन (9.5% उदाहरण दर) तीन अवधियों में तौलता है।
3 साल
EMI ₹25,626, ब्याज ₹1,22,549
5 साल
EMI ₹16,801, ब्याज ₹2,08,089
7 साल
EMI ₹13,075, ब्याज ₹2,98,316
3 के बजाय 7 साल लेने पर
EMI ₹12,551 कम, ब्याज ₹1,75,767 ज़्यादा
7 साल में EMI आधी रह जाती है, पर 7 साल बाद कार काफ़ी पुरानी होगी जबकि आप तब भी ब्याज दे रहे होंगे।
₹10 लाख की कार, 9.5% उदाहरण दर, 5 साल: डाउन पेमेंट का असर
₹10 लाख की कार, 9.5% उदाहरण दर, 5 साल: डाउन पेमेंट का असर
डाउन पेमेंट
लोन (₹)
मासिक EMI (₹)
कुल ब्याज (₹)
0%
10,00,000
21,002
2,60,112
10%
9,00,000
18,902
2,34,101
20%
8,00,000
16,801
2,08,089
30%
7,00,000
14,701
1,82,078
40%
6,00,000
12,601
1,56,067
50%
5,00,000
10,501
1,30,056
फ़ीस इस तालिका में शामिल नहीं है। हर 10% डाउन पेमेंट पर EMI लगभग ₹2,100 घटती है।
हर ₹1 लाख के लोन पर मासिक EMI (उदाहरण दरों पर, ₹ में)
हर ₹1 लाख के लोन पर मासिक EMI (उदाहरण दरों पर, ₹ में)
ब्याज दर
3 साल
4 साल
5 साल
6 साल
7 साल
8.5%
3,157
2,465
2,052
1,778
1,584
9.5%
3,203
2,512
2,100
1,827
1,634
10.5%
3,250
2,560
2,149
1,878
1,686
12%
3,321
2,633
2,224
1,955
1,765
अपने लोन का मोटा अंदाज़ा: लोन (लाख में) × तालिका की संख्या।
त्वरित संदर्भ: कार लोन का हिसाब
त्वरित संदर्भ: कार लोन का हिसाब
डाउन पेमेंट
कीमत × डाउन पेमेंट %
लोन की रकम
कीमत − डाउन पेमेंट
EMI का सूत्र
P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = कुल महीने
कार की असली कुल लागत
डाउन पेमेंट + मूलधन + कुल ब्याज + प्रोसेसिंग फ़ीस
कौन-सी कीमत डालें
ऑन-रोड कीमत: रजिस्ट्रेशन, बीमा आदि समेत, केवल शोरूम की कीमत नहीं
अवधि कैसे डालें
साल और "अतिरिक्त महीने" मिलाकर, जैसे 4 साल 6 महीने
प्रीपेमेंट
पेज हर साल के अंत में तय रकम बैलेंस से घटाता है और बचा ब्याज व जल्दी बंद होने का समय बताता है
इस पेज में क्या नहीं
कार का मूल्य-ह्रास, ईंधन, बीमा नवीनीकरण, रखरखाव, पुरानी कार की बिक्री का भाव
Car Loan EMI Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
कार ख़रीदते समय आम सवाल होता है: "गाड़ी की कीमत इतनी है, मैं इतना पैसा अभी दे सकता हूँ, बाक़ी लोन से हो जाए तो महीने की किस्त कितनी बनेगी?" Car Loan EMI Calculator इस सवाल के लिए बना है। बाक़ी लोन calculators से इसका फ़र्क़ यह है कि यहाँ आप सीधे लोन की रकम नहीं डालते। आप कार की ऑन-रोड कीमत और डाउन पेमेंट का प्रतिशत डालते हैं, और calculator ख़ुद निकालता है कि बैंक से कितना कर्ज़ लेना पड़ेगा।
इसके बाद वह EMI, कुल ब्याज, प्रोसेसिंग फ़ीस और कुल वापसी की रकम बताता है। साथ ही आपके डाउन पेमेंट की रकम भी अलग पंक्ति में दिखती है, ताकि आप समझ सकें कि गाड़ी के लिए आपकी जेब से पहले कितना जाएगा और बाद में कितना।
ध्यान दें: कार का मूल्य हर साल घटता है, पर लोन का ब्याज चलता रहता है। इसलिए कार लोन में बड़ा डाउन पेमेंट और कम अवधि अक्सर कुल लागत घटाने में मदद करते हैं। यह calculator आपको यही फ़र्क़ संख्या में दिखाता है।
किसके काम का है
जो परिवार पहली कार ख़रीद रहा है और डाउन पेमेंट बनाम EMI का संतुलन बनाना चाहता है।
वेतनभोगी व्यक्ति जिसे दो मॉडलों के बीच चुनना है और देखना है कि महँगे मॉडल पर कितनी अतिरिक्त EMI आएगी।
जो किसी डीलर के "इतनी आसान किस्त" वाले प्रस्ताव को अपने हिसाब से जाँचना चाहता है।
जो सेकंड-हैंड कार के लिए लोन देख रहा है और छोटी अवधि चाहता है।
छोटे व्यवसाय वाले, जिन्हें टैक्सी या डिलीवरी वाहन के लिए किस्तों का अंदाज़ा चाहिए (पर वाणिज्यिक लोन की शर्तें अलग हो सकती हैं)।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर सात स्लाइडर हैं।
कार की कीमत, ऑन-रोड (₹): ₹2 लाख से ₹3 करोड़ तक, ₹50,000 के कदम में, शुरुआती ₹10 लाख। यहाँ एक्स-शोरूम नहीं, ऑन-रोड कीमत डालें। ऑन-रोड कीमत में रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स और बीमा जुड़े होते हैं, इसलिए वही असली खर्च है। (डीलर के कोटेशन में यह रकम सामान्यतः अलग से लिखी होती है।)
डाउन पेमेंट (कीमत का %): 0% से 90%, शुरुआती 20%। यह वह हिस्सा है जो आप अपनी तरफ़ से देंगे।
ब्याज दर (% सालाना): 7% से 16%, 0.1 के कदम में, शुरुआती 9.5%। बैंक या NBFC की दर आपकी आमदनी, क्रेडिट स्कोर और कार के मॉडल पर निर्भर करती है।
लोन की अवधि (साल): 0 से 8 साल, शुरुआती 5।
अतिरिक्त महीने (साल के ऊपर): 0 से 11, ताकि आप 3 साल 6 महीने जैसी अवधि डाल सकें।
प्रोसेसिंग फ़ीस (लोन का %): 0% से 3%, शुरुआती 1%। यह फ़ीस कार की पूरी कीमत पर नहीं, बल्कि उस लोन की रकम पर लगती है जो कीमत में से डाउन पेमेंट घटाकर बचती है।
हर साल अतिरिक्त प्रीपेमेंट (₹): ₹0 से ₹10 लाख, ₹5,000 के कदम में।
अगर आप डाउन पेमेंट इतना बढ़ा दें कि वह पूरी कीमत के बराबर हो जाए, तो calculator संदेश देता है कि लोन की ज़रूरत ही नहीं।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर मासिक EMI और अवधि दिखती है। उसके नीचे की पंक्तियाँ:
आपका डाउन पेमेंट: कीमत × डाउन % से निकली रकम।
लोन की रकम: कीमत में से डाउन पेमेंट घटाकर।
कुल ब्याज: पूरी अवधि का ब्याज।
प्रोसेसिंग फ़ीस: लोन की रकम का प्रतिशत।
कुल वापसी (मूलधन + ब्याज + फ़ीस): यह बैंक को जाने वाली कुल रकम है। इसमें आपका डाउन पेमेंट शामिल नहीं है। गाड़ी की असली कुल लागत जानने के लिए इसमें डाउन पेमेंट अलग से जोड़ें।
प्रीपेमेंट से बचा ब्याज और लोन इतना जल्दी बंद: प्रीपेमेंट डालने पर दिखते हैं।
पाई चार्ट मूलधन, ब्याज और फ़ीस का अनुपात बताता है। दो चार्ट (साल-दर-साल मूलधन बनाम ब्याज, और बकाया बैलेंस) और एक तालिका भी है। चूँकि कार लोन छोटा होता है, पहले दो-तीन सालों में ही बैलेंस तेज़ी से घटता दिखता है।
अच्छा संकेत: कुल ब्याज कार की कीमत के 15-20% के भीतर रहे। अगर ब्याज ही कीमत के एक-तिहाई के आसपास पहुँच रहा हो, तो या तो अवधि बहुत लंबी है या डाउन पेमेंट बहुत कम।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
डाउन पेमेंट की गुंजाइश तय करें
डाउन पेमेंट अपनी इमरजेंसी बचत से न दें। बचत का एक हिस्सा इमरजेंसी फंड में रहना चाहिए। डाउन पेमेंट और EMI के बीच ऐसा संतुलन खोजें जिसमें दोनों निभें।
अवधि छोटी रखने की कोशिश करें
कार का मूल्य जैसे-जैसे घटता है, लंबा लोन पुरानी गाड़ी की क़ीमत से ज़्यादा बकाया बना सकता है। इसलिए 3-5 साल की अवधि पर पहले देखें, और केवल ज़रूरत हो तो आगे बढ़ें।
दो मॉडल, एक तुलना
दोनों मॉडल की कीमतें बारी-बारी से डालें और "कुल वापसी + डाउन पेमेंट" की तुलना करें। अक्सर मॉडल का अंतर EMI में छोटा लगता है पर कुल लागत में बड़ा निकलता है।
गाड़ी के चलाने का खर्च भी जोड़ें
EMI के अलावा पेट्रोल/डीज़ल, बीमा का नवीनीकरण, सर्विस, पार्किंग और टोल भी आते हैं। इन सबको मिलाकर तय करें कि कार का कुल मासिक बोझ बजट में आता है या नहीं। विकल्प के लिए EV vs Petrol Calculator भी देखा जा सकता है।
प्रीपेमेंट आज़माएँ
सालाना बोनस मिलता हो तो प्रीपेमेंट स्लाइडर में डालें। पर पहले यह पूछ लें कि लोन पर प्रीपेमेंट या फ़ोरक्लोज़र शुल्क कितना है।
तालिका और चार्ट से क्या सीखें
साल-दर-साल की तालिका में हर पंक्ति में चुकाया गया मूलधन, चुकाया गया ब्याज और साल के अंत का बैलेंस होता है। कार लोन में ब्याज का हिस्सा पहले साल में सबसे बड़ा होता है और फिर हर साल घटता जाता है। अगर आप 4 साल का लोन डालें तो चौथे साल की किस्तों में ब्याज बहुत छोटा रह जाता है, क्योंकि तब तक बैलेंस काफ़ी घट चुका होता है। बकाया बैलेंस वाला चार्ट एक ढलान की तरह दिखता है; ढलान जितनी तेज़ हो, लोन उतना जल्दी हल्का होता है।
इस तालिका का एक व्यावहारिक इस्तेमाल यह है कि आप यह सोच सकें कि "तीसरे साल के अंत में अगर मैं गाड़ी बेचना चाहूँ तो बैंक का कितना बकाया चुकाना होगा?" तालिका में उस साल की आख़िरी पंक्ति का बैलेंस वही संख्या है। फिर उसकी तुलना गाड़ी की संभावित पुनर्विक्रय क़ीमत से करें। अगर बकाया बैलेंस उस कीमत से ज़्यादा लगे, तो अवधि कम करने या डाउन पेमेंट बढ़ाने पर विचार करें।
एक और छोटा उदाहरण: मान लीजिए सुनीता और रवि एक सेकंड-हैंड सेडान के लिए ₹6 लाख की ऑन-रोड कीमत पर 30% डाउन पेमेंट रखते हैं। लोन ₹4.2 लाख बनता है। वे 3 साल 6 महीने की अवधि चुनते हैं, यानी 3 साल और 6 अतिरिक्त महीने। इस तरह छोटे-छोटे बदलाव से वे अपनी जेब के हिसाब की EMI खोज सकते हैं। यह इसी calculator की "अतिरिक्त महीने" वाली सुविधा से संभव है, जो आम साल-आधारित स्लाइडर से नहीं होता।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
एक्स-शोरूम कीमत डालना। इससे लोन और EMI कम दिखते हैं, पर ऑन-रोड खर्च के बाद वास्तविक रकम ज़्यादा निकलती है।
"शून्य डाउन पेमेंट" को सस्ता समझना। बिना डाउन पेमेंट के पूरा खर्च लोन में चला जाता है और ब्याज उसी पर लगता है।
लंबी अवधि को "छोटी EMI" मानकर चुनना। EMI घटती है पर कुल ब्याज बहुत बढ़ता है।
बीमा और एक्सटेंडेड वारंटी को लोन में जुड़वाना। इन पर भी ब्याज देना पड़ता है।
कार को निवेश समझना। कार एक उपयोग की चीज़ है जिसका मूल्य समय के साथ घटता है, बढ़ता नहीं।
फ़्लैट दर पर "कम ब्याज" वाले विज्ञापन। फ़्लैट दर घटती दर से कहीं महँगी पड़ती है। यह calculator घटते बैलेंस वाला है।
i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100; n = साल × 12 + अतिरिक्त महीने।
EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1)।
महीने-दर-महीने: ब्याज = बैलेंस × i; किस्त का बाक़ी हिस्सा मूलधन। अगर प्रीपेमेंट डाला है तो हर 12वें महीने के बाद वह बैलेंस से घटता है और किस्त वही रहती है।
फ़ीस = P × फ़ीस %. कुल वापसी = P + कुल ब्याज + फ़ीस।
मान्यता: दर पूरी अवधि में तय रहेगी, फ़ीस आपकी जेब से अलग दी जाएगी, और बीमा या अन्य शुल्क इसमें नहीं हैं।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए अमित एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और ₹12 लाख की ऑन-रोड कीमत वाली हैचबैक लेना चाहते हैं। बैंक 9% दर और 1% फ़ीस पर 4 साल का लोन दे रहा है। वे 25% डाउन पेमेंट रखते हैं।
कुल वापसी ≈ ₹10,84,034। डाउन पेमेंट जोड़ें तो कार की कुल लागत लगभग ₹13,84,034, यानी ऑन-रोड कीमत से करीब ₹1.84 लाख अधिक।
अब बदलाव देखें:
डाउन पेमेंट 10%/25%/40% करें (वही 4 साल, 9%): लोन ₹10.8 लाख/₹9 लाख/₹7.2 लाख, EMI ≈ ₹26,876/₹22,397/₹17,917, और कुल ब्याज ≈ ₹2,10,041/₹1,75,034/₹1,40,027। हर 15% अतिरिक्त डाउन पेमेंट पर लगभग ₹35,000 ब्याज बचता है।
अवधि 7 साल (₹9 लाख लोन, 9%): EMI ≈ ₹14,480, पर कुल ब्याज ≈ ₹3,16,334। यानी 4 साल की तुलना में EMI लगभग ₹7,917 कम, पर ब्याज लगभग ₹1.41 लाख ज़्यादा। कुल वापसी ≈ ₹12,25,334।
दर बदलें (₹9 लाख, 4 साल): 8.5% पर EMI ≈ ₹22,183 और ब्याज ≈ ₹1,64,807; 10.5% पर EMI ≈ ₹23,043 और ब्याज ≈ ₹2,06,066। यानी आधे प्रतिशत का फ़र्क़ भी हज़ारों रुपये में दिखता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
कार का बीमा, रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स और एक्सेसरीज़ का खर्च इसमें अलग से नहीं जुड़ता; आप इन्हें ऑन-रोड कीमत में पहले जोड़कर डालें।
पुरानी कार की एक्सचेंज वैल्यू का हिसाब नहीं है; अगर आप पुरानी कार बेचकर डाउन पेमेंट में लगा रहे हैं तो उसे डाउन पेमेंट के प्रतिशत में बदलकर डालें।
बैंक के वास्तविक शुल्क, GST और देरी के शुल्क शामिल नहीं हैं।
ब्याज दर पूरी अवधि में स्थिर मानी गई है।
यह नहीं बताता कि बैंक या NBFC आपको कितना लोन या कौन-सी दर देगा।
कार के पुनर्विक्रय मूल्य का अनुमान भी इसमें नहीं है।
यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश, टैक्स, कर्ज़ या कानूनी सलाह नहीं है, और नतीजे अनुमान हैं। लोन लेने से पहले बैंक या NBFC की शर्तें ध्यान से पढ़ें।
6 काम की बातें याद रखें
1
ऑन-रोड कीमत ही डालें
शोरूम की कीमत में रजिस्ट्रेशन और बीमा नहीं होते। अधूरी कीमत डालने से लोन और EMI कम दिखेंगे।
2
डाउन पेमेंट बड़ा, पर बचत ख़ाली नहीं
ज़्यादा डाउन पेमेंट ब्याज घटाता है, पर आपातकालीन निधि न खाली करें। गाड़ी के बाद के ख़र्च भी बजट में रखें।
3
अवधि छोटी रखें
कार का मूल्य हर साल घटता है। लोन की अवधि जितनी छोटी, उतना कम समय आप "कार से ज़्यादा लोन" की स्थिति में रहते हैं।
4
EMI के अलावा चलने का ख़र्च जोड़ें
ईंधन, बीमा, रखरखाव और पार्किंग का मासिक ख़र्च EMI के ऊपर आता है। कुल मिलाकर देखें कि बजट सँभलता है या नहीं।
5
फ़ीस और ऑफ़र को गिनें
कम दर के साथ ऊँची फ़ीस या अनिवार्य बीमा-पैकेज हो सकता है। कुल वापसी की लाइन से ऑफ़र की सही तुलना होती है।
6
खरीदने से पहले सस्ते विकल्प भी देखें
थोड़ी सस्ती या पुरानी गाड़ी लेने पर EMI और ब्याज दोनों घटते हैं। लेने से पहले ज़रूरत और विकल्प तौल लें।
आम तौर पर 3–5 साल। लंबी अवधि में EMI कम होती है पर कुल ब्याज बढ़ता है, और गाड़ी की क़ीमत भी तब तक घट चुकी होती है।
जितना ज़्यादा दे सकें उतना अच्छा, क्योंकि लोन और ब्याज कम होते हैं। 20% एक आम शुरुआत है।
कुछ मामलों में ऑन-रोड कीमत के बड़े हिस्से तक लोन मिल जाता है, पर यह कर्ज़दाता और आपकी प्रोफ़ाइल पर निर्भर है। 0% डाउन पेमेंट डालने पर पेज यह मान लेता है और नतीजा दिखाता है, मंज़ूरी की गारंटी नहीं।
तब लोन बहुत छोटा रह जाता है और EMI भी। डाउन पेमेंट 100% हो तो पेज बता देता है कि लोन की ज़रूरत ही नहीं है।
शोरूम की कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स, बीमा और कभी-कभी एक्सेसरीज़ व शुल्क। डीलर से पूरी ऑन-रोड कीमत का ब्यौरा माँगें।
हाँ, बीमा हर साल नवीनीकृत होता है और यह EMI से अलग ख़र्च है। इस पेज में आगे के बीमा-ख़र्च नहीं गिने गए।
पुरानी कार पर आम तौर पर दर ऊँची और अवधि छोटी होती है। यहाँ दर और अवधि अपनी शर्तों के हिसाब से डाल लें; गणित वही रहता है।
कर्ज़दाता की नीति, आपका क्रेडिट इतिहास, आमदनी, डाउन पेमेंट और अवधि। इसी कारण यहाँ की दर सिर्फ़ उदाहरण है।
नहीं। कार का बाज़ार भाव हर साल घटता है, पर पेज इसे नहीं जानता। इसे अपने अंदाज़े से अलग देखें।
नहीं। पेज सिर्फ़ ख़रीद और लोन का हिसाब करता है। चलने का ख़र्च अलग से जोड़ें।
आपका डाउन पेमेंट जोड़कर लोन की कुल वापसी (मूलधन + ब्याज + फ़ीस)। पेज में "आपका डाउन पेमेंट" और "कुल वापसी" की पंक्तियाँ मिलाकर यह देख सकते हैं।
यह कर्ज़दाता और लोन के प्रकार पर निर्भर है। कई कर्ज़दाता शुल्क लेते हैं। पेज प्रीपेमेंट शुल्क नहीं जोड़ता, इसलिए शुल्क जानकर बचे ब्याज से तुलना करें।
यह कर्ज़दाता की नीति है। पेज मान लेता है कि किस्तें पूरे महीनों के हिसाब से चलती हैं, इसलिए बैंक की संख्या से थोड़ा अंतर हो सकता है।
नहीं। कुछ ख़ास स्थितियों (जैसे कुछ इलेक्ट्रिक वाहन योजनाओं) में प्रोत्साहन मिल सकता है, पर नियम बदलते हैं। उन्हें अलग से जाँचकर कीमत में घटाकर डालें।
कुछ स्थितियों में ब्याज और मूल्य-ह्रास को कारोबारी ख़र्च माना जा सकता है। यह पेज कर नहीं गिनता; कर-विशेषज्ञ से पूछें।
यह पेज एक-सी दर मानता है। अधिकतर कार लोन तय दर पर होते हैं, पर अगर आपका लोन बदलती दर पर है तो अलग-अलग दरें डालकर देखें।