दो लोन, एक सही चुनाव

Loan Comparison & Prepayment Planner

दो या तीन loan ऑफ़र को आमने-सामने रखें: EMI, कुल ब्याज, fees और असली लागत — फिर prepayment का असर देखें।

  • तीन ऑफ़र आमने-सामने
  • EMI और कुल ब्याज
  • फीस जोड़कर कुल लागत
  • असरदार दर (फीस समेत)
  • सालाना prepayment का असर
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहसिर्फ़ ब्याज दर नहीं, प्रोसेसिंग फ़ीस और अवधि जोड़कर कुल ख़र्च की तुलना करें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

For each offer: EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1) with i = annual rate ÷ 12 ÷ 100; total interest comes from running the loan month by month (interest = balance × i); total cost = interest + upfront fee. Effective rate = the yearly rate at which the EMIs repay the amount actually received after the fee, found by repeated halving (IRR). The optional yearly prepayment is applied at the end of every 12th month. The offer with the lowest total cost is marked best.

हर ऑफ़र के लिए: EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100; कुल ब्याज लोन को महीने-दर-महीने चलाकर निकलता है (ब्याज = बैलेंस × i); कुल लागत = ब्याज + शुरुआती फ़ीस। प्रभावी दर = वह सालाना दर जिस पर EMI फ़ीस काटकर असल में मिली रकम को चुका दें, जो बार-बार आधा करने की विधि (IRR) से निकाली जाती है। वैकल्पिक सालाना prepayment हर 12वें महीने के अंत में लगता है। सबसे कम कुल लागत वाला ऑफ़र "बेहतर" चिह्नित होता है।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026

Compare the full cost, not just the EMI. A lower EMI over a longer tenure usually means more total interest. Processing fees, insurance pushed with the loan, floating-rate resets and prepayment charges all change the real cost; the "effective rate" here folds in the fee only. Confirm every number in the sanction letter. Not financial advice.
सिर्फ़ EMI नहीं, पूरी लागत देखें। लंबी अवधि पर कम EMI का मतलब आम तौर पर ज़्यादा कुल ब्याज। Processing fee, loan के साथ थमाया गया बीमा, floating दर में बदलाव और prepayment charge असली लागत बदल देते हैं; यहाँ "असरदार दर" में सिर्फ़ fee जोड़ी गई है। हर अंक sanction letter में जाँचें। यह वित्तीय सलाह नहीं है।

Loan चुनते समय क्या देखें?

  • कुल ब्याज — वही रकम, वही दर, पर 15 के बजाय 20 साल चुनने से ब्याज काफ़ी बढ़ जाता है; EMI का अंतर अक्सर छोटा दिखता है।
  • Fees — processing fee, legal/valuation charges, बीमा। 0.5% fee भी बड़े loan पर हज़ारों होती है।
  • Floating बनाम fixed — floating home loan पर individual के लिए prepayment charge आम तौर पर नहीं होता; fixed-rate पर हो सकता है।
  • Prepayment की छूट — जिस loan में हर साल थोड़ा extra भरने की आज़ादी हो, वह लंबे समय में सस्ता पड़ सकता है — नीचे planner में देखें।
संक्षेप में
  • हर ऑफ़र के लिए EMI, कुल ब्याज, फीस, कुल लागत (ब्याज + फीस) और फीस जोड़कर असरदार दर दिखती है। सबसे कम कुल लागत वाले पर ★ लगता है।
  • कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं। लंबी अवधि पर EMI घटती है, पर कुल ब्याज कई गुना बढ़ सकता है।
  • ऑफ़र C वैकल्पिक है। उसकी दर 0 रखने पर वह तुलना से बाहर रहता है।
  • Prepayment planner हर साल के अंत में एक अतिरिक्त रकम डालकर देखता है कि हर ऑफ़र कितना जल्दी ख़त्म होगा। सारी संख्याएँ उदाहरण हैं, सैंक्शन लेटर से मिलाएँ।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

राहुल: कम दर लंबी अवधि बनाम ज़्यादा दर छोटी अवधि

राहुल ₹40,00,000 का लोन देख रहा है। ऑफ़र A: 8.5%, 20 साल, फीस ₹10,000। ऑफ़र B: 8.25%, 25 साल, फीस ₹25,000। (पेज की शुरुआती संख्याएँ, सब उदाहरण)

A की EMI
₹34,713
B की EMI
₹31,538
A का कुल ब्याज
₹43,31,103
B का कुल ब्याज
₹54,61,402
A की कुल लागत
₹43,41,103 ★
B की कुल लागत
₹54,86,402
अंतर
₹11,45,299
असरदार दर A, B
8.88%, 8.65%

B की EMI ₹3,175 कम है और दर भी कम, पर पाँच साल ज़्यादा चलने से कुल लागत ₹11 लाख से ज़्यादा बढ़ी। असरदार दर कम दिखने के बावजूद अवधि निर्णायक रही।

सीमा: एक ही अवधि, कम दर पर ज़्यादा फीस

सीमा ₹30,00,000 के लोन पर 20 साल की अवधि के दो ऑफ़र देखती है। ऑफ़र A: 8.75%, फीस ₹15,000। ऑफ़र B: 8.6%, फीस ₹30,000। (उदाहरण दर)

A की EMI
₹26,511
B की EMI
₹26,225
A की कुल लागत
₹33,77,717
B की कुल लागत
₹33,23,972 ★
अंतर
₹53,745
असरदार दर A, B
9.18%, 9.10%

B की फीस दुगुनी है, फिर भी कम दर के कारण कुल लागत कम रही। फीस का असर ब्याज की बचत से तौलकर देखना चाहिए, अकेली फीस से नहीं।

इमरान: कार लोन, कम दर पर लंबी अवधि का जाल

इमरान ₹8,00,000 का कार लोन देखता है। ऑफ़र A: 9.5%, 5 साल, फीस ₹4,000। ऑफ़र B: 9%, 7 साल, फीस ₹12,000। (उदाहरण दर)

A की EMI
₹16,801
B की EMI
₹12,871
A का कुल ब्याज
₹2,08,089
B का कुल ब्याज
₹2,81,186
A की कुल लागत
₹2,12,089 ★
B की कुल लागत
₹2,93,186
अंतर
₹81,097

B की EMI ₹3,930 कम है, पर दो साल ज़्यादा चलने से लगभग ₹81,000 ज़्यादा देने पड़ेंगे। मासिक बजट तंग हो तो EMI कम रखना ठीक है, पर कीमत जानकर।

अवधि बदलने का असर (₹40,00,000, 8.5% उदाहरण दर, कोई फीस नहीं)

अवधि बदलने का असर (₹40,00,000, 8.5% उदाहरण दर, कोई फीस नहीं)
अवधि (साल)EMIकुल ब्याज
10₹49,594₹19,51,313
15₹39,390₹30,90,125
20₹34,713₹43,31,103
25₹32,209₹56,62,725
30₹30,757₹70,72,354

EMI घटने की रफ़्तार धीमी है, जबकि कुल ब्याज लगभग सीधी रेखा में बढ़ता है। 20 से 30 साल करने पर EMI केवल ₹3,956 कम हुई।

फीस का असर (₹40,00,000, 8.5%, 20 साल)

फीस का असर (₹40,00,000, 8.5%, 20 साल)
फीसकुल लागत (ब्याज + फीस)असरदार दर
₹0₹43,31,1038.84%
₹10,000₹43,41,1038.88%
₹40,000₹43,71,1038.99%
₹1,00,000₹44,31,1039.22%

असरदार दर यहाँ सालाना चक्रवृद्धि रूप में दिखता है, इसलिए फीस शून्य होने पर भी वह मूल ब्याज दर से थोड़ा ऊँचा आता है।

त्वरित संदर्भ: ऑफ़र की तुलना के सूत्र

त्वरित संदर्भ: ऑफ़र की तुलना के सूत्र
EMIP × i × (1 + i)^n ÷ ((1 + i)^n − 1), i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
कुल ब्याजलोन को महीने-दर-महीने चलाकर: ब्याज = बैलेंस × i
कुल लागतकुल ब्याज + शुरुआती फीस
असरदार दरवह दर जिस पर EMI फीस घटाकर असल में मिली रकम चुका दे (IRR)
Prepaymentहर 12वें महीने के अंत में तय अतिरिक्त रकम, EMI वही रहती है
सबसे सस्ता ऑफ़रजिसकी कुल लागत सबसे कम हो
ऑफ़र Cदर 0 रखने पर तुलना में नहीं गिना जाता
इस पेज में क्या नहींबदलती दर, बीमा का खर्च, कर लाभ, प्रीपेमेंट शुल्क और GST जैसे छुपे शुल्क।

Loan Comparison & Prepayment Planner क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

जब आप होम लोन, कार लोन या कोई और बड़ा कर्ज़ लेने जाते हैं, तो दो-तीन बैंक या NBFC आपको अलग-अलग ऑफ़र देते हैं। एक की ब्याज दर थोड़ी कम होती है पर processing fee ज़्यादा। दूसरे की EMI कम दिखती है क्योंकि अवधि लंबी है। तीसरा कहता है कि "बस 0.25% कम दर है"। इनमें से असल में सस्ता कौन है, यह देखकर तय करना आसान नहीं होता।

Loan Comparison & Prepayment Planner इसी उलझन के लिए है। इसमें आप एक ही loan रकम पर तीन ऑफ़र तक (ऑफ़र A, B और C) डालते हैं, हर ऑफ़र के लिए दर, अवधि और fees अलग रखते हैं, और calculator बताता है कि हर ऑफ़र की EMI क्या होगी, कुल ब्याज कितना बनेगा, fees जोड़ने के बाद कुल लागत क्या होगी और सबसे सस्ता कौन-सा है। इसके नीचे एक prepayment planner भी है: अगर आप हर साल कुछ अतिरिक्त रकम चुकाएँ, तो हर ऑफ़र कितना जल्दी ख़त्म होगा और कितना ब्याज बचेगा।

इस calculator का मुख्य सवाल है: "वही रकम लेने के लिए कौन-सा ऑफ़र मेरी जेब से कुल मिलाकर सबसे कम पैसा निकालेगा, और extra भुगतान से मैं क्या बचा सकता हूँ?"

किसके काम का है

  • पहली बार होम लोन लेने वाला जोड़ा, जिसे दो बैंकों की sanction offer मिली हैं और EMI के बजाय कुल लागत देखनी है।
  • वह परिवार जो 15 साल या 20 साल में उलझा है: EMI कम चाहिए या कुल ब्याज कम, यह निर्णय साफ़ दिखाने के लिए।
  • दुकानदार या छोटा कारोबारी, जिसे कारोबार के लिए loan चाहिए और जिसे दो NBFC में processing fee का फ़र्क़ बड़ा लग रहा है।
  • पहले से loan चला रहे लोग, जो जानना चाहते हैं कि हर साल बोनस का कुछ हिस्सा prepayment में लगाने से loan कितने साल पहले ख़त्म होगा।
  • वे लोग जो बैंक के "सिर्फ़ ₹X प्रति लाख EMI" वाले पिच से बचकर पूरी लागत देखना चाहते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

इस पेज पर सारे इनपुट slider के रूप में हैं। आप slider खिसकाकर या बग़ल के डिब्बे में सीधे संख्या लिखकर बदल सकते हैं।

  • Loan रकम (₹): जितना आप लेना चाहते हैं। यह सभी ऑफ़र के लिए एक ही है, ताकि तुलना बराबरी की हो। पेज की सीमा ₹1 लाख से ₹5 करोड़ तक है।
  • ऑफ़र A / B / C — ब्याज दर (% सालाना): sanction letter या बैंक के quote में लिखी दर। ऑफ़र C को छोड़ना हो तो इसे 0 रहने दें, तब वह तुलना में गिना ही नहीं जाता। कम से कम एक दर डालना ज़रूरी है, वरना पेज संदेश देता है।
  • ऑफ़र A / B / C — अवधि (साल): 1 से 30 साल। हर ऑफ़र की अवधि अलग हो सकती है, और यही अक्सर EMI के अंतर की असली वजह होती है।
  • ऑफ़र A / B / C — प्रोसेसिंग फीस और चार्जेज (₹): शुरुआत में कटने वाली कुल रकम: processing fee, legal या valuation शुल्क, और अगर आप गिनना चाहें तो loan के साथ जुड़ा बीमा। यह रकम रुपये में लिखें, प्रतिशत में नहीं। अगर बैंक कहता है "1% processing fee", तो ₹30 लाख के loan पर ₹30,000 लिखें (GST अलग से लगता हो तो उसे भी जोड़ें)।
  • Prepayment planner: हर साल अतिरिक्त भुगतान (₹): आप हर साल कितना अलग से चुकाना चाहेंगे। शुरुआती मान ₹1,00,000 है; 0 कर दें तो prepayment वाला हिस्सा बंद हो जाता है। पेज के संकेत के अनुसार यह भुगतान हर ऑफ़र पर साल 1 से लगता है और EMI वही रहती है।
ध्यान दें: तुलना तभी ईमानदार होगी जब सारी चीज़ें बैंक के काग़ज़ से लें। मौखिक वादे नहीं, sanction letter या key fact statement की संख्याएँ डालें।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

ऊपर एक हेडलाइन कार्ड दिखता है: "कुल मिलाकर सबसे सस्ता" ऑफ़र, उसकी EMI, अवधि और कुल लागत के साथ। उसके नीचे एक संदेश बताता है कि कुल लागत में कौन-सा ऑफ़र सबसे सस्ता है, और अगर किसी और ऑफ़र की EMI कम है तो यह भी जोड़ता है कि "भले ही उसकी EMI कम है, लंबी अवधि ब्याज बढ़ाती है।"

फिर पंक्तियाँ आती हैं:

  • हर ऑफ़र की EMI, और सबसे कम EMI वाली पंक्ति अलग रंग में।
  • सबसे कम कुल लागत (ब्याज + fees) और उसका ऑफ़र।
  • सबसे महँगे ऑफ़र से अंतर: यानी सस्ते और महँगे ऑफ़र के बीच कुल फ़र्क़ रुपयों में। बड़े फ़ैसले में यही संख्या अक्सर आँखें खोलती है।
  • Prepayment के साथ: सबसे सस्ते ऑफ़र का loan अतिरिक्त भुगतान के साथ कितने साल और महीने में ख़त्म होगा।

एक पाई चार्ट सबसे सस्ते ऑफ़र का बँटवारा दिखाता है: मूलधन, ब्याज और fees। एक बार चार्ट हर ऑफ़र की कुल लागत की तुलना करता है, जिसमें सस्ता ऑफ़र हरे रंग में और बाकी लाल रंग में होते हैं।

"आमने-सामने" तालिका

यह तालिका सबसे उपयोगी हिस्सा है। हर ऑफ़र की एक पंक्ति है और ये कॉलम हैं: दर और अवधि, EMI, कुल ब्याज, फीस, कुल लागत, असरदार दर, और Prepayment के साथ। सबसे सस्ते ऑफ़र के आगे सितारा (★) लगता है।

  • कुल ब्याज: पूरी अवधि में बैंक को दिया जाने वाला कुल ब्याज, बिना कोई extra भुगतान माने।
  • कुल लागत: कुल ब्याज + शुरुआती fees। यही असली तुलना की संख्या है।
  • असरदार दर: fee जोड़ने के बाद की असली दर का अनुमान। यह इस विचार पर टिकी है कि fee कटने से आपके हाथ में loan की पूरी रकम नहीं पहुँचती, पर EMI पूरे loan पर बनी रहती है, इसलिए वास्तविक लागत बताई गई दर से थोड़ी ऊँची होती है।
  • Prepayment के साथ: हर ऑफ़र पर "X साल Y महीने · ₹Z की बचत", यानी loan कितने समय में ख़त्म होगा और कितना ब्याज बचेगा।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • पहले अवधि बराबर रखकर देखें। तीनों ऑफ़र में अवधि समान करके पहले देखें कि सिर्फ़ दर और fee का असर क्या है। फिर अवधि अलग करें और देखें कि लंबी अवधि कितना जोड़ती है।
  • Fees को हल्के में न लें। ₹30 लाख पर 0.5% का अंतर ₹15,000 है। देखिए कि कम दर वाला ऑफ़र अपनी ज़्यादा fee की भरपाई कितने साल में करता है।
  • Prepayment का आँकड़ा 0 और अलग-अलग रकमों पर आज़माएँ, जैसे ₹25,000, ₹50,000 और ₹1 लाख। अक्सर शुरुआती कुछ हज़ार रुपये का extra भी अवधि में महीनों काट देता है।
  • तालिका और चार्ट दोनों देखें। तालिका संख्याएँ देती है, चार्ट अनुपात का अहसास।
  • ऑफ़र C को "आदर्श" चुनौती की तरह रखें। भले ही आप उसे नहीं लेंगे, एक छोटी अवधि का ऑफ़र रखने से दिखता है कि जल्दी चुकाने की क़ीमत और फ़ायदा क्या है।
  • नतीजा सेव या शेयर करना हो तो पेज के सेव/शेयर विकल्प से एक पंक्ति का सार बनता है।
उदाहरण: अगर दो ऑफ़र की कुल लागत में सिर्फ़ ₹40,000 का फ़र्क़ हो (₹30 लाख के loan पर), तो बैंक की सेवा, loan का लचीलापन और prepayment की शर्तें ज़्यादा मायने रख सकती हैं।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  1. सबसे कम EMI को सबसे सस्ता मान लेना। EMI कम होने की सबसे आम वजह लंबी अवधि है, और लंबी अवधि मतलब ज़्यादा ब्याज।
  2. सिर्फ़ ब्याज दर देखना, fees नहीं। 0.25% की छूट वाला ऑफ़र अगर ऊँची फ़ीस माँगता है, तो छोटे loan पर असल में महँगा पड़ सकता है।
  3. अलग रकम पर तुलना करना। एक ऑफ़र ₹30 लाख का और दूसरा ₹32 लाख का (बीमा जोड़कर) हो, तो तुलना बेमानी है। यहाँ सब ऑफ़र एक ही रकम पर तुलते हैं।
  4. Floating दर को fixed मान लेना। असली floating loan में दर बदलती है। यह calculator दर को स्थिर मानता है, इसलिए नतीजे सिर्फ़ आज की दर का नक़्शा हैं।
  5. Prepayment penalty भूल जाना। कई fixed-rate या कारोबारी loan पर extra भुगतान पर शुल्क लगता है। इस calculator में ऐसा कोई शुल्क नहीं जोड़ा गया है, इसलिए sanction letter में ज़रूर पढ़ें।
  6. बीमा और ऊपरी योजनाओं को नज़रअंदाज़ करना। loan के साथ पैकेज की तरह जुड़ा बीमा अक्सर लागत बढ़ाता है। चाहें तो उसकी प्रीमियम रकम fees वाले डिब्बे में जोड़ें।
  7. Prepayment की बचत को पूरा मुनाफ़ा समझना। extra रकम आपकी जेब से निकलती है, इसलिए असल सवाल यह है कि वही पैसा कहीं और लगता तो क्या मिलता। उसके लिए Prepay vs Invest Calculator देखें।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

हर ऑफ़र के लिए calculator ये चरण अपनाता है:

  1. मासिक दर i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100, और महीनों की संख्या n = साल × 12।
  2. EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1)। यह reducing-balance (घटते बैलेंस) वाला मानक सूत्र है। अगर दर 0 हो तो EMI = P ÷ n।
  3. कुल ब्याज loan को महीने-दर-महीने चलाकर निकाला जाता है: हर महीने ब्याज = बचा हुआ बैलेंस × i, EMI में से जो हिस्सा ब्याज से बचा वह मूलधन घटाता है।
  4. कुल लागत = कुल ब्याज + fees।
  5. असरदार दर: वह दर जिस पर EMI की धारा उस रकम को चुकाए जो fee कटने के बाद असल में मिली। इसे बार-बार आधा करके (bisection, IRR जैसा) खोजा जाता है।
  6. Prepayment: हर 12वें महीने के अंत में आपकी अतिरिक्त रकम बैलेंस में से घटाई जाती है, EMI वही रहती है, और loan तब तक चलता है जब तक बैलेंस लगभग शून्य न हो जाए। सुरक्षा के लिए अधिकतम 1,200 महीने (100 साल) तक ही चलाया जाता है।

मान्यताएँ: दर पूरी अवधि में स्थिर मानी गई है (यानी fixed जैसा हिसाब), fees शुरुआत में कटती हैं, और कोई prepayment penalty नहीं जोड़ी गई है।

एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए रोहित और स्नेहा, दोनों नौकरीपेशा, ₹30 लाख का loan लेना चाहते हैं। उन्हें तीन ऑफ़र मिले:

  • ऑफ़र A: 9.00% दर, 15 साल, fees ₹15,000
  • ऑफ़र B: 8.75% दर, 20 साल, fees ₹30,000
  • ऑफ़र C: 9.25% दर, 10 साल, fees ₹0

(ये दरें सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं, किसी बैंक की असली दर नहीं।) Prepayment के लिए उन्होंने ₹60,000 प्रति वर्ष रखा।

EMI: A लगभग ₹30,428, B लगभग ₹26,511, C लगभग ₹38,410।

कुल ब्याज: A लगभग ₹24,77,040, B लगभग ₹33,62,717, C लगभग ₹16,09,178।

कुल लागत (ब्याज + fees): A लगभग ₹24,92,040, B लगभग ₹33,92,717, C लगभग ₹16,09,178।

पहली नज़र में B सबसे आकर्षक लगता है, क्योंकि उसकी दर सबसे कम (8.75%) और EMI सबसे कम (₹26,511) है। लेकिन कुल लागत देखें तो B सबसे महँगा निकलता है: C से लगभग ₹17.8 लाख और A से लगभग ₹9 लाख ज़्यादा। कारण साफ़ है: 20 साल तक पैसे का बड़ा हिस्सा बैंक के पास रहता है।

इस उदाहरण में calculator ऑफ़र C को "★ सबसे सस्ता" दिखाएगा, पर साथ में यह भी दिखेगा कि C की EMI सबसे ज़्यादा है, ₹38,410 महीना। अगर जोड़े की मासिक बचत में इतनी EMI नहीं बैठती, तो C व्यावहारिक नहीं है। यहाँ A बीच का रास्ता बन सकता है।

Prepayment का असर (हर साल ₹60,000 अतिरिक्त): A लगभग 11 साल 5 महीने में ख़त्म और लगभग ₹6.5 लाख का ब्याज बचता है; B लगभग 13 साल 11 महीने में और लगभग ₹11.6 लाख की बचत; C लगभग 8 साल 5 महीने में और लगभग ₹2.8 लाख की बचत। ध्यान दें कि B में बचत सबसे ज़्यादा दिखती है क्योंकि उसमें ब्याज ही सबसे ज़्यादा बनता है। यह मत समझिए कि prepayment के बाद B सबसे अच्छा हो गया, क्योंकि उसकी कुल लागत अब भी बाक़ियों से ज़्यादा रह सकती है।

इस पर रोहित-स्नेहा ने सोचा: अगर A चुनें और EMI वही रखें, तो वे बीच-बीच में बोनस से extra देकर 15 साल का loan लगभग 11.5 साल में ख़त्म कर सकते हैं, पर ज़रूरत पड़ने पर extra रोकने की आज़ादी भी रहेगी। ऊँची EMI (C) की तुलना में यह लचीला रास्ता है।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह केवल फ़िक्स्ड दर वाला साफ़ हिसाब है। Floating दर में बदलाव, rate reset और spread का असर नहीं लेता।
  • कर लाभ (जैसे होम लोन पर ब्याज या मूलधन की कटौती) शामिल नहीं हैं, और वे नियमों के अनुसार बदल सकते हैं। ताज़ा नियम Income Tax Department की साइट पर जाँचें।
  • Prepayment penalty, foreclosure शुल्क, लेट पेमेंट और बीमा अलग से नहीं जोड़े गए, सिवाय उसके जो आप fees के डिब्बे में डालें।
  • EMI की तारीख़ और दिनों की गिनती: बैंक रोज़ाना बैलेंस पर ब्याज लगाते हैं और पहली EMI से पहले का pre-EMI ब्याज अलग हो सकता है। इसलिए बैंक के schedule से कुछ रुपये का अंतर आ सकता है।
  • प्रति वर्ष prepayment मॉडल: यहाँ extra भुगतान साल के अंत (हर 12वें महीने) पर माना गया है। असल में आप कभी भी कर सकते हैं, और जल्दी करने पर बचत थोड़ी बढ़ जाती है।
  • पात्रता: आपको loan मिलेगा या नहीं, कितना मिलेगा, यह नहीं बताता। उसके लिए Home Loan Eligibility Calculator देखें।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • EMI Calculator — किसी एक loan की EMI और ब्याज की विस्तृत तस्वीर के लिए।
  • Loan Prepayment Calculator — एक loan पर extra भुगतान का गहरा असर देखने के लिए।
  • Flat vs Reducing Rate Calculator — जब कोई ऑफ़र "flat rate" में बताया गया हो।
  • Home Loan Balance Transfer Calculator — चल रहे loan को सस्ते बैंक में ले जाना सोच रहे हों तो।
  • Prepay vs Invest Calculator — extra पैसा loan में डालें या निवेश करें, इसकी तुलना के लिए।

कर्ज़ का फ़ैसला बड़ा होता है, इसलिए हर ऑफ़र को कम से कम एक बार इस तरह आमने-सामने रखकर देखना समझदारी है। आख़िर में हर संख्या अपने बैंक के लिखित काग़ज़ से मिलाएँ।

यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है; नतीजे अनुमान हैं और यह वित्तीय, कर या क़ानूनी सलाह नहीं है।

6 काम की बातें याद रखें

1
सभी ऑफ़र पर एक-सी लोन रकम रखें

तुलना तभी ठीक है जब रकम एक हो। अलग-अलग रकम के ऑफ़र के लिए अलग-अलग बार हिसाब चलाएँ।

2
EMI के साथ कुल लागत भी पढ़ें

तालिका की सबसे दाईं कुल लागत वाला कॉलम आपका असली मार्गदर्शक है, सबसे कम EMI वाला नहीं।

3
फीस में सारे शुल्क जोड़ें

प्रोसेसिंग फीस के साथ कानूनी जाँच, वैल्यूएशन और जो भी एकमुश्त शुल्क हो, सब जोड़कर डालें।

4
बीमा की शर्त अलग से पूछें

कुछ लोन के साथ बीमा जुड़ा आता है। उसकी क़िस्त इस पेज में नहीं है, इसलिए उसे अलग से कुल लागत में जोड़ें।

5
Floating दर का जोखिम समझें

पेज पूरी अवधि में एक ही दर मानता है। बदलती दर पर EMI या अवधि बदल सकती है।

6
प्रीपेमेंट की छूट परखें

जिस लोन में हर साल अतिरिक्त भुगतान की बिना शुल्क छूट हो, वह लंबे समय में सस्ता पड़ सकता है। planner में यही देख सकते हैं।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ज़रूरी नहीं। कम EMI अक्सर लंबी अवधि से आती है, जिसमें कुल ब्याज ज़्यादा लगता है। EMI के साथ कुल लागत (ब्याज + fees) देखें।

Processing fee और charges जोड़ने के बाद आप असल में जो सालाना दर चुकाते हैं। दो offers की तुलना के लिए यह सिर्फ़ ब्याज दर से बेहतर पैमाना है।

क्योंकि असरदार दर सालाना चक्रवृद्धि रूप में दिखती है, जबकि लोन की दर मासिक ब्याज के आधार पर बताई जाती है। फीस जुड़ने पर यह और बढ़ जाती है।

उसकी ब्याज दर 0 रहने दें। तब पेज सिर्फ़ A और B की तुलना करेगा।

तब अंतर सीधे दर और फीस का होगा। यह तुलना का सबसे साफ़ तरीक़ा है।

दोनों को कुल लागत में देखें। पेज ब्याज और फीस जोड़कर दिखाता है, इसलिए सबसे कम कुल लागत वाला निशान वही पकड़ता है।

हर 12वें महीने के अंत में, यानी साल के आख़िर में। EMI वही रहती है और अवधि घटती है।

हर ऑफ़र के लिए घटी हुई अवधि और बचा हुआ ब्याज। फीस एकमुश्त है, इसलिए prepayment से उस पर कोई असर नहीं पड़ता।

नहीं। हर ऑफ़र के लिए पूरी अवधि में एक ही दर मानी जाती है। असली लोन में दर बदलने पर EMI या अवधि बदल सकती है।

नहीं। फीस पर लगने वाला कोई कर आप फीस की रकम में ख़ुद जोड़कर डालें।

नहीं। अगर लोन के साथ बीमा लेना पड़ता है तो उसकी रकम फीस वाले खाने में जोड़ सकते हैं, पर बीमा हर साल की क़िस्त हो तो सटीक तस्वीर अलग से बनानी होगी।

हाँ, जब तक EMI घटते बैलेंस पर बनती हो। फ़्लैट रेट वाले लोन की EMI अलग तरह से बनती है।

जब मासिक बजट की सीमा सबसे ऊपर हो। तब कम EMI चुन सकते हैं, पर पेज की कुल लागत देखकर जानें कि इसके लिए कितना ज़्यादा ब्याज देंगे, और बाद में prepayment की योजना रखें।

पेज में ₹1,00,000 से ₹5,00,00,000 तक की रकम और 1 से 30 साल की अवधि चुनी जा सकती है।

फीस घटाकर असल में मिली रकम को EMI की धारा से बराबर करने वाली मासिक दर खोजी जाती है, फिर उसे सालाना रूप में बदला जाता है।

नहीं। आपके डाले आँकड़े ही गणना में जाते हैं। असली दर और शर्तें सैंक्शन लेटर में देखें।

नहीं। यह शैक्षणिक तुलना है। निर्णय से पहले अपनी आय, जोखिम और लोन की शर्तें पूरी तरह देख लें।

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