उदाहरण 1: दुकानदार की मशीन, Flat → Reducing
मान लीजिए रमेश एक छोटा दुकानदार है और उसे ₹3,00,000 की आटा-चक्की मशीन के लिए 2.5 साल का फ़ाइनेंस ऑफ़र मिला है। डीलर कहता है "8% flat"। ये आँकड़े सिर्फ़ उदाहरण हैं।
- कुल ब्याज = 3,00,000 × 8% × 2.5 = ₹60,000।
- कुल चुकाई रकम = ₹3,60,000।
- महीने = 2.5 × 12 = 30। EMI = 3,60,000 ÷ 30 = ₹12,000।
- अब वह दर खोजिए जिस पर ₹3,00,000 को 30 महीने में ₹12,000 की EMI से चुकता किया जा सके। नतीजा लगभग 14.63% reducing आता है।
- अनुपात = 14.63 ÷ 8 ≈ 1.83 गुना।
यानी "सिर्फ़ 8%" वाला ऑफ़र असल में लगभग 14.63% सालाना reducing दर का लोन है। अगर बैंक से 12-13% reducing पर लोन मिल रहा हो, तो रमेश के लिए बैंक का विकल्प सस्ता पड़ेगा, चाहे उसकी संख्या बड़ी दिखे।
उदाहरण 2: Reducing → Flat
अब मान लीजिए सुनीता को ₹6,00,000 के लोन पर 4 साल के लिए 14% reducing दर का प्रस्ताव मिला है। पूछना है कि यह कितनी flat के बराबर है।
- मासिक दर = 14 ÷ 1200 ≈ 0.011667।
- 48 महीनों के लिए EMI लगभग ₹16,396।
- कुल चुकाई रकम = 16,396 × 48 ≈ ₹7,87,003, यानी कुल ब्याज ≈ ₹1,87,003।
- बराबर flat दर = 1,87,003 ÷ (6,00,000 × 4) × 100 ≈ 7.79%।
यहाँ अनुपात लगभग 1.80 है। मतलब अगर कोई आपको "7.8% flat" बताए, तो वह 14% reducing के आसपास है।
शुरुआती मान पर क्या दिखता है
अगर आप पेज खोलकर कुछ न बदलें, यानी 10% flat, 3 साल, ₹5,00,000, तो EMI ₹18,055.56 बनती है, कुल ब्याज ₹1,50,000 और reducing दर लगभग 17.92%। यानी "10%" देखने में हल्का है, पर वास्तविक लागत क़रीब 18% के आसपास है।
उदाहरण का सबक: संख्या एक है, पर flat और reducing की दो अलग भाषाएँ हैं। तुलना हमेशा एक ही भाषा में करें, और वह भाषा reducing होनी चाहिए।