Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
Goal-based investing में आप पहले अपना आर्थिक लक्ष्य तय करते हैं, फिर पीछे की ओर गणना करते हैं कि कितना निवेश करना होगा। यह तरीका:
निवेश को उद्देश्यपूर्ण बनाता है — बस "निवेश करना है" से ज़्यादा ठोस लक्ष्य होता है
बाज़ार के उतार-चढ़ाव से भटकते नहीं — लक्ष्य याद रहता है
अनुशासन बना रहता है — SIP अपने-आप चलता रहता है
सूत्र (Formula): मासिक SIP = लक्ष्य / {[(1 + r)^n - 1] / r × (1 + r)}, जहाँ r = मासिक दर और n = कुल महीने
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Monthly SIP = target ÷ [((1+i)^n − 1) ÷ i × (1+i)], where i = annual rate ÷ 12 ÷ 100 and n = years × 12 months; the instalment is assumed to be invested at the start of each month and the result is rounded up to the next rupee. Amount invested = SIP × n and the rest of the target is shown as growth. The ±2% comparison repeats the formula at a lower and a higher return rate.
मासिक SIP = लक्ष्य ÷ [((1+i)^n − 1) ÷ i × (1+i)], जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = साल × 12 महीने; किस्त हर महीने की शुरुआत में लगी मानी गई है और नतीजा अगले रुपये तक ऊपर गोल किया गया है। निवेश की गई रकम = SIP × n और लक्ष्य का बाक़ी हिस्सा ग्रोथ के रूप में दिखता है। ±2% की तुलना में यही फ़ॉर्मूला कम और ज़्यादा रिटर्न दर पर दोहराया गया है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
आप बताते हैं कि कितनी रकम कितने साल में चाहिए। पेज बताता है कि मानी हुई सालाना दर पर हर महीने लगभग कितनी SIP लगेगी।
लक्ष्य जितना दूर, मासिक रकम उतनी छोटी। 25 साल में जो लक्ष्य थोड़ी SIP से पूरा हो, वही 5 साल में कई गुना ज़्यादा माँगता है।
लक्ष्य की रकम आज के पैसे में न डालें। कुछ साल बाद चीज़ें महँगी होंगी, इसलिए रकम को महँगाई के साथ बढ़ाकर डालना बेहतर है।
दर एक अनुमान है। असली रिटर्न कम रहा तो लक्ष्य के लिए ज़्यादा रकम या ज़्यादा समय चाहिए।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
नतीजा ऊपर की ओर पूर्ण रुपये में गोल होता है, ताकि लक्ष्य कम न पड़े
कुल निवेश
मासिक SIP × महीने
लाभ (अनुमान)
लक्ष्य − कुल निवेश
महँगाई के साथ लक्ष्य
आज की रकम × (1 + महँगाई)^साल
इस पेज में क्या नहीं
महँगाई, टैक्स, फंड का खर्च, और पहले से जमा रकम।
Goal SIP Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
ज़्यादातर SIP calculator इस सवाल का जवाब देते हैं कि "मैं हर महीने इतना लगाऊँ तो आगे कितना बनेगा?" Goal SIP Calculator यही सवाल उलटा पूछता है: "मुझे भविष्य में इतनी रकम चाहिए, तो आज से हर महीने कितना लगाना पड़ेगा?" आप अपना लक्ष्य (जैसे ₹30 लाख), उसके लिए बचे हुए साल और अपेक्षित सालाना रिटर्न डालते हैं, और calculator बताता है कि हर महीने कितनी SIP चाहिए, उसमें से कितना आपकी जेब से जाएगा और कितना बाज़ार के रिटर्न से आने की उम्मीद है।
इसे "पीछे की ओर गणना" भी कह सकते हैं। पहले मंज़िल तय होती है, फिर रास्ते का किराया निकलता है। इससे निवेश "कुछ भी लगा दो" वाली आदत से निकलकर किसी ठोस काम से जुड़ जाता है: बच्चे की फ़ीस, घर की डाउन पेमेंट, विदेश यात्रा, शादी, या रिटायरमेंट का एक हिस्सा।
इस पेज पर नीचे एक छोटा "आशुग्या की कहानी" कार्ड भी दिखता है। वह आपके नतीजे को आसान भाषा में कहानी की तरह समझाता है और "अगर... तो क्या होगा?" वाले बटन देता है, जैसे लक्ष्य की अवधि 3 साल बढ़ाने या घटाने पर, लक्ष्य रकम 20% बड़ी करने पर, या रिटर्न 2% कम मानने पर मासिक SIP कितनी बदलेगी। बटन दबाने से ऊपर के खाने बदल जाते हैं, इसलिए आप तुरंत तुलना कर सकते हैं।
ध्यान दें: यह calculator आपको कोई fund या योजना नहीं सुझाता। यह सिर्फ़ गणित है: अगर औसतन इतना रिटर्न मिले, तो इतनी मासिक किस्त से इतनी रकम बनेगी।
किसके काम का है
जिस व्यक्ति के सामने कोई तय तारीख़ वाला खर्च है, जैसे 5 साल बाद बच्चे का कॉलेज या 8 साल बाद फ़्लैट की डाउन पेमेंट।
जो नई नौकरी में हैं और समझना चाहते हैं कि अपनी बचत का कितना हिस्सा लक्ष्य के लिए अलग रखना होगा।
पति-पत्नी, जो मिलकर तय करना चाहते हैं कि एक साझा लक्ष्य के लिए दोनों कितना-कितना डालेंगे।
जो किसी एजेंट या दोस्त से "इतना लगाओ, इतना बनेगा" सुनकर उसे अपने हिसाब से जाँचना चाहते हैं।
जो अलग-अलग लक्ष्यों की तुलना करना चाहते हैं कि कौन-सा लक्ष्य महीने का कितना बजट खा रहा है।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
लक्ष्य के लिए रकम चाहिए (₹)
यह वह रकम है जो आपको भविष्य की तारीख़ पर चाहिए। इसमें न्यूनतम ₹10,000 की सीमा है। एक ज़रूरी बात: यह रकम उस दिन की क़ीमत में होनी चाहिए। अगर आज एक कोर्स ₹10 लाख का है और 8 साल बाद शुरू होगा, तो महँगाई के कारण तब वह ज़्यादा का होगा। यह calculator अपने आप महँगाई नहीं जोड़ता, इसलिए लक्ष्य की रकम आपको ख़ुद थोड़ी बढ़ाकर डालनी चाहिए।
अवधि (साल)
स्लाइडर 1 से 40 साल तक चलता है। इसके नीचे "साल" का एक अलग बॉक्स भी है जहाँ आप सीधे संख्या टाइप कर सकते हैं। दोनों जुड़े हुए हैं। कोड में टाइप किए गए बॉक्स की संख्या को पहले देखा जाता है, इसलिए अगर कभी लगे कि स्लाइडर और नतीजा मेल नहीं खा रहे, तो बॉक्स की संख्या जाँच लें।
अपेक्षित सालाना रिटर्न (%)
स्लाइडर 1% से 30% तक है, जिसमें 0.5 का कदम है, और "दर (%)" का टाइप करने वाला बॉक्स भी है। यह वह औसत सालाना दर है जो आप मानकर चल रहे हैं। यह कोई वादा नहीं है। इक्विटी वाले fund का रिटर्न साल-दर-साल बहुत ऊपर-नीचे होता है, और debt या बैंक जैसे साधनों में दर कम पर स्थिर होती है। अपनी अवधि के हिसाब से सावधान दर चुनें: 2-3 साल के लक्ष्य के लिए आम तौर पर कम और स्थिर दर, 10-15 साल के लिए थोड़ी ऊँची दर मानी जाती है।
तुरंत लक्ष्य (Quick Goals)
चार बटन पहले से बने हैं: इमरजेंसी फंड (₹5 लाख / 3 साल), विदेश यात्रा (₹10 लाख / 5 साल), घर की डाउन पेमेंट (₹50 लाख / 10 साल) और रिटायरमेंट (₹2 करोड़ / 20 साल)। बटन दबाने पर लक्ष्य की रकम और साल भर जाते हैं, रिटर्न की दर वही रहती है जो आपने चुनी थी।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
ज़रूरी मासिक SIP: सबसे बड़ा आँकड़ा। यह रुपये में ऊपर की ओर पूरा गोल किया जाता है, यानी अगर गणित से ₹19,447.3 आता है तो ₹19,448 दिखता है, ताकि आप लक्ष्य से थोड़ा भी कम न रहें।
कुल निवेश: मासिक SIP को कुल महीनों से गुणा करने पर मिलती है। यही आपकी असली जेब से जाने वाली रकम है।
बाज़ार से लाभ: लक्ष्य में से कुल निवेश घटाने पर बची रकम। अगर रिटर्न शून्य हो या निवेश लक्ष्य से बड़ा निकले, तो यह शून्य दिखता है।
लक्ष्य: वही रकम जो आपने डाली, ताकि तीनों आँकड़े एक नज़र में साथ दिखें।
पाई चार्ट: आपका निवेश बनाम बाज़ार से आने वाला हिस्सा।
साल-दर-साल चार्ट: हर साल के अंत में कितना निवेश हुआ और कितना लाभ जुड़ा। अधिकतम 40 साल तक दिखता है। शुरुआती सालों में नीली पट्टी (निवेश) बड़ी और हरी (लाभ) छोटी होती है; आख़िरी सालों में हरी पट्टी तेज़ी से बढ़ती है। यही compounding का असर है।
दर की तुलना वाली पंक्ति: आपकी चुनी दर से 2% कम और 2% ज़्यादा पर मासिक SIP कितनी होगी, यह एक वाक्य में दिखता है। यह आपको "अगर अनुमान ग़लत निकला" का अंदाज़ा देता है।
अच्छा संकेत यह है कि "बाज़ार से लाभ" वाला हिस्सा अवधि के साथ बड़ा होता जाए, पर उस पर पूरा भरोसा न करें। अगर आपकी योजना तभी चलती है जब रिटर्न बहुत ऊँचा मिले, तो उसे जोखिम भरा मानें। मासिक SIP आपके बजट के 20-30% से ज़्यादा निकल रही हो तो लक्ष्य, अवधि या दोनों पर दोबारा सोचना समझदारी है।
दो बटन भी हैं: "लिंक कॉपी करें" ताकि आप अपने डाले गए आँकड़ों वाला पेज किसी को भेज सकें (लक्ष्य, दर और साल पते में जुड़ जाते हैं), और "शेयर करें" जो WhatsApp के लिए तैयार संदेश बनाता है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
अवधि के साथ खेलें
अवधि बढ़ाने का असर सबसे बड़ा होता है। ₹30 लाख और 11% पर 8 साल में ₹19,448 चाहिए थे, पर 12 साल में लगभग ₹10,015 ही चाहिए। लक्ष्य 4 साल दूर करने से किस्त लगभग आधी रह गई। अगर तारीख़ लचीली है (जैसे फ़्लैट अगले साल ही लेना ज़रूरी नहीं), तो यह अंतर बहुत काम का है।
लक्ष्य को महँगाई से बढ़ाएँ
आज ₹20 लाख की क़ीमत वाला खर्च 10 साल बाद 6% महँगाई मानने पर लगभग ₹35.8 लाख का होगा। इसलिए लक्ष्य की रकम को पहले ख़ुद बढ़ाकर डालें, या महँगाई समेत पूरी तस्वीर के लिए Goal Planner देखें, जिसका बैनर इसी पेज पर है।
कई लक्ष्य, एक बजट
हर लक्ष्य के लिए अलग-अलग गणना करें और मासिक SIP जोड़ लें। अगर कुल रकम आपकी बचत से बड़ी है, तो सबसे कम ज़रूरी या सबसे दूर के लक्ष्य की अवधि बढ़ाएँ।
पाई और चार्ट को देखें
अगर चार्ट में अंत तक "लाभ" वाला हिस्सा कुल का आधे से भी ज़्यादा है, तो आपका लक्ष्य बाज़ार रिटर्न पर काफ़ी निर्भर है। ऐसे में दर 2-3% कम करके दोबारा देखें और तय करें कि क्या वह किस्त भी निभ जाएगी।
SIP Calculator पर वापस जाएँ
नीचे का नीला बैनर आपकी निकली हुई मासिक SIP, दर और साल उठाकर SIP Calculator में खोल देता है, ताकि आप देख सकें कि वही किस्त चलती रहे तो अंत में कितना बनेगा।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
ऊँचा रिटर्न मान लेना ताकि किस्त छोटी दिखे। 15-18% मानने से मासिक SIP बहुत कम दिखती है, पर वह दर टिकाऊ न हो तो लक्ष्य छूट जाएगा।
छोटे लक्ष्य के लिए भी इक्विटी की सोच। 2-3 साल के लक्ष्य में बाज़ार गिरे तो समय नहीं बचता। इस अवधि के लिए 12% जैसी दर मान लेना उलझन पैदा कर सकता है।
महँगाई भूल जाना। लक्ष्य की रकम को आज के भाव में रखने से भविष्य में कमी रह सकती है।
SIP बीच में रोक देना। गणना पूरी अवधि की नियमित किस्त मानकर होती है। बीच में रुकने या देर से शुरू करने पर नतीजा बदल जाएगा।
टैक्स और खर्च को शामिल न करना। निकासी पर कर और fund का सालाना खर्च असली हाथ में आने वाली रकम को घटाते हैं।
"बाज़ार से लाभ" को पक्का मान लेना। यह सिर्फ़ गणित की बची हुई रकम है, कोई वादा नहीं।
साल और स्लाइडर में अंतर न देखना। टाइप किए बॉक्स की संख्या को प्राथमिकता मिलती है, इसलिए दोनों एक जैसे रखें।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
कोड में मासिक दर r = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 ली जाती है और कुल महीने n = साल × 12। हर महीने की किस्त महीने की शुरुआत में जाती हुई मानी जाती है। सूत्र:
मासिक SIP = लक्ष्य ÷ { [ (1 + r)^n − 1 ] ÷ r × (1 + r) }
यानी पहले यह निकाला जाता है कि ₹1 की मासिक SIP n महीने बाद कितनी बनेगी, फिर लक्ष्य को उस संख्या से भाग दिया जाता है। अगर दर शून्य हो तो सीधे लक्ष्य ÷ महीने की संख्या ली जाती है।
इस गणना की मान्यताएँ:
रिटर्न पूरी अवधि में हर साल बराबर और स्थिर मानी गई है। असल में बाज़ार ऐसा नहीं चलता।
किस्त महीने की शुरुआत में जाती है। अगर आपकी SIP महीने के अंत में कटती है तो असली नतीजा थोड़ा कम रहेगा।
कोई खर्च अनुपात (expense ratio), एग्ज़िट लोड, टैक्स या महँगाई शामिल नहीं है।
सभी रकमें पूरे रुपये में दिखाई जाती हैं, इसलिए ₹1-2 का राउंडिंग अंतर हो सकता है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए रोहन और मीना एक पुराना दो कमरों का फ़्लैट लेना चाहते हैं और 8 साल बाद ₹30 लाख की डाउन पेमेंट चाहिए। वे मानते हैं कि औसत सालाना रिटर्न 11% मिल सकता है। (यह सिर्फ़ मान्यता है, गारंटी नहीं।)
मासिक दर: 11 ÷ 12 ÷ 100 = 0.009167।
कुल महीने: 8 × 12 = 96।
calculator ज़रूरी मासिक SIP निकालता है: लगभग ₹19,448।
कुल निवेश: 19,448 × 96 = ₹18,67,008।
बाज़ार से लाभ: 30,00,000 − 18,67,008 = ₹11,32,992।
अब तुलना वाली पंक्ति देखें। 9% रिटर्न मानें तो मासिक SIP लगभग ₹21,291 चाहिए (कुल निवेश ₹20,43,936), और 13% पर लगभग ₹17,730। यानी रिटर्न में 2% का फ़र्क़ महीने की किस्त में क़रीब ₹1,800-2,000 का फ़र्क़ ला देता है। अगर उन्होंने सिर्फ़ 9% को आधार बनाया होता, तो हर महीने ₹1,843 ज़्यादा बचाकर वे सुरक्षित रहते।
अब एक और स्थिति: अगर रिटर्न बिल्कुल शून्य रहे? तब ₹30,00,000 ÷ 96 = ₹31,250 प्रति माह चाहिए होंगे। यानी बाज़ार का साथ मिलने पर 11% वाली योजना में हर महीने ₹11,800 से ज़्यादा की बचत होती है, पर यह बचत तभी असली है जब रिटर्न मिले।
एक और छोटा उदाहरण: दीपा एक फ़्रीलांस डिज़ाइनर हैं और 5 साल बाद ₹12 लाख का स्टूडियो उपकरण का लक्ष्य रखती हैं। 10% रिटर्न मानने पर मासिक SIP ₹15,369 आती है और कुल निवेश ₹9,22,140 होता है। उनकी आय अनियमित है, इसलिए वे इसे थोड़ा कम, जैसे ₹10,000 की SIP और साल में एक बार बोनस जोड़ने के रूप में बाँट सकती हैं। यह फ़ैसला उनका है; calculator सिर्फ़ संख्या देता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह नहीं बताता कि किस fund या साधन में निवेश करें, या किसी fund का भविष्य का रिटर्न कितना होगा।
बाज़ार में गिरावट के वर्षों का असर नहीं दिखाता। असल में आपके 8 साल में बीच के साल शून्य या नकारात्मक भी हो सकते हैं।
महँगाई, टैक्स, एग्ज़िट लोड और fund के खर्च शामिल नहीं हैं।
आपकी आय बढ़ने पर SIP बढ़ाने (step-up) का हिसाब नहीं है। उसके लिए अलग calculator है।
पहले से जमा रकम का हिसाब नहीं होता। अगर आपके पास पहले से कुछ पैसा इस लक्ष्य के लिए है, तो उसे लक्ष्य में से घटाकर बची रकम डालें।
नतीजा अनुमान है; असली रकम आपके निवेश के साधन और बाज़ार पर निर्भर करेगी।
इसके साथ और कौन-से calculator देखें
SIP Calculator — जब आपको पहले से पता हो कि महीने में कितना लगा सकते हैं।
यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है, और नतीजे अनुमान हैं। कोई भी निवेश फ़ैसला लेने से पहले अपनी स्थिति देखें और ज़रूरत हो तो SEBI-पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
6 काम की बातें याद रखें
1
लक्ष्य को महँगाई के साथ बढ़ाएँ
आज का खर्च लिखने की जगह भविष्य की क़ीमत का अंदाज़ा लगाकर रकम डालें। इसके लिए Inflation Calculator काम आता है।
2
हर लक्ष्य का अलग हिसाब रखें
घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट की अवधि अलग होती है। हर लक्ष्य की अपनी SIP निकालें।
3
पास के लक्ष्य के लिए कम जोखिम सोचें
अगर पैसा 3-5 साल में चाहिए तो बाज़ार के उतार-चढ़ाव का जोखिम ज़्यादा चुभता है। यह चुनाव सोच-समझकर करें।
4
दर कम मानकर भी जाँचें
पहले 12% डालें, फिर 8% या 10% भी। जिस योजना में दोनों के बीच की रकम सँभल जाए, वह ज़्यादा मज़बूत है।
5
साल में एक बार लक्ष्य की समीक्षा करें
आमदनी बढ़े तो SIP बढ़ाएँ। Step-up SIP Calculator में देखें कि इससे कितना फ़र्क पड़ेगा।
6
पहले से जमा रकम अलग से जोड़ें
अगर कुछ रकम पहले से रखी है, तो उसका आगे का मूल्य Lumpsum Calculator से निकालकर लक्ष्य में से घटाएँ।
यह बताता है कि किसी लक्ष्य की रकम तय अवधि में पाने के लिए, माने गए रिटर्न पर, हर महीने लगभग कितनी SIP चाहिए होगी। यह अनुमान है, पक्का नतीजा नहीं।
कुछ साल बाद वही चीज़ ज़्यादा पैसे में आएगी। अगर लक्ष्य की रकम आज की कीमत पर रखेंगे, तो बचत कम पड़ सकती है। इसलिए लक्ष्य को महँगाई के हिसाब से बढ़ाकर डालना समझदारी है।
तब लक्ष्य तक पहुँचने के लिए ज़्यादा SIP या ज़्यादा समय चाहिए होगा। इसलिए कैलकुलेटर में कम रिटर्न डालकर भी देखें और बीच-बीच में अपनी योजना की समीक्षा करें।
हाँ, आमदनी बढ़ने पर SIP बढ़ाने से लक्ष्य जल्दी या कम बोझ में पूरा हो सकता है। इसे Step-up SIP कैलकुलेटर पर आज़माकर देखें।
भविष्य का, यानी महँगाई जोड़कर। आज के पैसे में डालने पर SIP कम निकलेगी और लक्ष्य की असली क़ीमत पूरी नहीं होगी।
ताकि लक्ष्य की रकम कम न पड़े। इसलिए असली संख्या एक-दो रुपये का फ़र्क दिखा सकती है।
यह पेज पहले से जमा रकम नहीं लेता। उस रकम का भविष्य मूल्य निकालकर लक्ष्य में से घटा दें, फिर बची रकम यहाँ डालें।
नहीं। यहाँ SIP पूरी अवधि में एक-सी रहती है। हर साल बढ़ाने के लिए Step-up SIP Calculator देखें।
हाँ, मानी हुई दर से कम रिटर्न मिले तो अंत में रकम लक्ष्य से कम बनेगी। इसलिए अलग-अलग दरें डालकर देखना और बीच-बीच में समीक्षा करना ठीक है।
नहीं। निकासी पर लगने वाला कैपिटल गेन्स टैक्स इसमें शामिल नहीं है, इसलिए हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है।
नहीं। एक्सपेंस रेशियो रिटर्न में से कटता है। दर थोड़ी कम डालकर इसका मोटा असर देख सकते हैं।
नहीं, एक बार में एक लक्ष्य। कई लक्ष्यों के लिए हर एक की अलग SIP निकालकर जोड़ें, या Composite Goal Planner देखें।
गणित चलेगा और SIP काफ़ी बड़ी निकलेगी। इतने कम समय में बाज़ार का जोखिम भारी पड़ सकता है, इसलिए दर बहुत ऊँची न मानें।
यह दिखाता है कि लक्ष्य का कितना हिस्सा आपकी जेब से और कितना मानी हुई बढ़त से आएगा। लाभ पक्का नहीं, अनुमान है।
कोई एक सही अवधि नहीं है। वह आपके लक्ष्य की तारीख़ से तय होती है। तारीख़ तय करके ही अवधि डालें।
यह calculator मानता है कि हर महीने किस्त जाएगी। आपात निधि होने से ऐसे समय में SIP चलती रखने में मदद मिलती है।
यह जोखिम भरा है। ऊँची दर मानना आसान है, पर मिलना तय नहीं। सावधानी के लिए मध्यम दर पर योजना बनाएँ।
नहीं। यह सिर्फ़ शैक्षणिक गणना है। कोई योजना चुनने से पहले अपनी स्थिति और जोखिम सहने की क्षमता देखें।