Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Each year: balance = (previous balance + yearly deposit) × (1 + interest rate ÷ 100), so the deposit is assumed to be made at the start of the year and interest is added once a year. Total deposited = deposit × years and interest earned = final balance − total deposited. This is a simplified yearly estimate: the government notifies the actual PPF rate every quarter and the rate you enter is only an assumption.
हर साल: बैलेंस = (पिछला बैलेंस + सालाना जमा) × (1 + ब्याज दर ÷ 100), यानी जमा साल की शुरुआत में हुई मानी गई है और ब्याज साल में एक बार जुड़ता है। कुल जमा = सालाना जमा × साल और कमाया ब्याज = अंतिम बैलेंस − कुल जमा। यह साल के हिसाब से एक सरल अनुमान है: असली PPF दर सरकार हर तिमाही घोषित करती है और आपकी डाली दर सिर्फ़ एक मान्यता है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026
Interest rate changes. The government notifies the PPF rate every quarter; the value used here is an assumption you can edit — please check the current rate. Maturity is shown assuming the full yearly deposit is made at the start of each year.
ब्याज दर बदलती रहती है। सरकार हर तिमाही PPF की दर तय करती है; यहाँ जो दर डाली गई है वह मान ली गई है, आप इसे बदल सकते हैं — कृपया मौजूदा दर जाँच लें। गणना इस मान्यता पर है कि पूरा सालाना जमा हर साल की शुरुआत में किया गया।
PPF की ख़ास बातें
लॉक-इन 15 साल; उसके बाद 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ा सकते हैं
सालाना जमा ₹500 से ₹1.5 लाख तक
EEE — जमा (पुराने रेजीम में 80C), ब्याज और परिपक्वता रकम तीनों टैक्स-फ्री
यहाँ हर साल की शुरुआत में पूरी सालाना रकम जमा मानी गई है और ब्याज साल में एक बार जुड़ता है: बैलेंस = (पिछला बैलेंस + जमा) × (1 + दर)।
अवधि बढ़ाने का असर सबसे बड़ा है। जमा सिर्फ़ सीधी रेखा में बढ़ती है, पर ब्याज का हिस्सा हर साल पहले से बड़ा जुड़ता जाता है।
ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है। पेज की 7.1% सिर्फ़ उदाहरण की संख्या है, अपनी योजना की ताज़ा दर India Post या बैंक से जाँचें।
नतीजा एक अनुमान है, गारंटी नहीं। असली रकम महीने के हिसाब से ब्याज, जमा की तारीख़ और दर में बदलाव से अलग हो सकती है।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
सुनीता: पूरी सीमा तक जमा (पेज की शुरुआती संख्या)
सुनीता सालाना ₹1,50,000 जमा करती है, 15 साल के लिए। (उदाहरण दर: 7.1% सालाना)
कुल जमा
₹22,50,000
पहले साल के अंत का बैलेंस
₹1,60,650
5वें साल के अंत का बैलेंस
₹9,25,701
परिपक्वता रकम
₹40,68,209
कुल कमाया ब्याज
₹18,18,209
ब्याज का हिस्सा
44.7%
क़रीब 15 साल में जमा की रकम से कुछ कम ब्याज जुड़ा। यह सीमा तक जमा का नतीजा है, हर किसी को इतना जमा करने की ज़रूरत नहीं।
इरफ़ान: छोटी जमा, पर लंबा समय
इरफ़ान सालाना ₹36,000 (लगभग ₹3,000 महीना) जमा करता है। (उदाहरण दर: 7.1% सालाना)
कुल जमा (20 साल)
₹7,20,000
परिपक्वता रकम (20 साल)
₹15,97,989
कुल ब्याज
₹8,77,989
ब्याज का हिस्सा
54.9%
दर 6.5% रहे तो
₹14,88,562
दर 8% रहे तो
₹17,79,225
छोटी रकम भी 20 साल में जमा से दुगुने से ज़्यादा बन गई। दर में डेढ़ प्रतिशत के आसपास का फ़र्क़ अंतिम रकम में क़रीब ₹3 लाख का फ़र्क़ बना देता है।
पूजा: जमा सीमा के बजाय अवधि बढ़ाना
पूजा सालाना ₹50,000 जमा करती है। वह देखती है कि 15 साल के बाद खाता 10 साल और चलाए तो क्या होगा। (उदाहरण दर: 7.1%)
15 साल पर रकम
₹13,56,070
15 साल की कुल जमा
₹7,50,000
25 साल पर रकम
₹34,36,005
25 साल की कुल जमा
₹12,50,000
जमा बढ़ी
₹5,00,000
रकम बढ़ी
लगभग ₹20.8 लाख
आख़िरी दस सालों में सिर्फ़ ₹5 लाख और जमा हुए, पर रकम क़रीब ₹20.8 लाख बढ़ी, क्योंकि पुराना बैलेंस ही ब्याज कमाता रहा।
अवधि बनाम रकम (सालाना ₹1,50,000 जमा, 7.1% उदाहरण दर)
अवधि बनाम रकम (सालाना ₹1,50,000 जमा, 7.1% उदाहरण दर)
अवधि (साल)
कुल जमा
परिपक्वता रकम
कुल ब्याज
रकम में ब्याज का %
15
₹22,50,000
₹40,68,209
₹18,18,209
44.7%
20
₹30,00,000
₹66,58,288
₹36,58,288
54.9%
25
₹37,50,000
₹1,03,08,015
₹65,58,015
63.6%
30
₹45,00,000
₹1,54,50,911
₹1,09,50,911
70.9%
35
₹52,50,000
₹2,26,97,857
₹1,74,47,857
76.9%
इस पेज पर अवधि 5 साल के कदम में चुनी जाती है। सारणी पेज के फ़ॉर्मूले का गणित है, किसी योजना की गारंटी नहीं।
दर बनाम रकम (सालाना ₹1,00,000 जमा, 15 साल)
दर बनाम रकम (सालाना ₹1,00,000 जमा, 15 साल)
मानी गई दर (%)
परिपक्वता रकम
कुल ब्याज
6.0
₹24,67,253
₹9,67,253
6.5
₹25,75,401
₹10,75,401
7.1
₹27,12,139
₹12,12,139
7.5
₹28,07,724
₹13,07,724
8.0
₹29,32,428
₹14,32,428
सभी दरें उदाहरण हैं। असली दर घोषणा के अनुसार बदलती है और पूरी अवधि में एक-सी नहीं रहती।
त्वरित संदर्भ: इस पेज का PPF हिसाब
त्वरित संदर्भ: इस पेज का PPF हिसाब
सालाना जमा
स्लाइडर में ₹500 से ₹1,50,000 तक, ₹500 के कदम में। शुरुआती मान ₹1,50,000।
ब्याज दर
स्लाइडर 5% से 9%। शुरुआती 7.1% सिर्फ़ उदाहरण की संख्या है।
अवधि
15 से 50 साल, 5 साल के कदम में। 15 साल बुनियादी अवधि है।
साल का फ़ॉर्मूला
नया बैलेंस = (पिछला बैलेंस + जमा) × (1 + दर ÷ 100)
कुल जमा
सालाना जमा × साल
कमाया ब्याज
अंतिम बैलेंस − कुल जमा
जमा का समय
हर साल की शुरुआत में पूरी रकम एक साथ मानी गई है।
इस पेज में क्या नहीं
महीने का ब्याज, आंशिक निकासी, ऋण, महँगाई, कर की व्यक्तिगत स्थिति और दर में तिमाही बदलाव।
PPF Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
PPF यानी Public Provident Fund भारत की एक लोकप्रिय सरकारी छोटी बचत योजना है, जिसमें लोग हर साल थोड़ी-थोड़ी रकम जमा करते हैं और लंबी अवधि के बाद एकमुश्त रकम पाते हैं। यह calculator एक ही सवाल का जवाब देता है: "अगर मैं हर साल इतनी रकम PPF में जमा करूँ और खाते पर यह मानी हुई ब्याज दर लागू रहे, तो इतने सालों बाद खाते में कुल कितना बैलेंस बनेगा?"
पेज पर तीन स्लाइडर हैं: सालाना जमा, मानी गई ब्याज दर, और अवधि। इन्हें हिलाते ही आपको परिपक्वता रकम, कुल जमा, कुल कमाया ब्याज, ब्याज का हिस्सा (प्रतिशत), एक pie chart, साल-दर-साल की stacked bar chart और पूरी तालिका दिखती है। पेज पर यह बात साफ़ लिखी है कि PPF की दर सरकार तय करती है और बदलती रहती है, इसलिए यहाँ की दर एक मानी हुई दर है, जिसे आप बदल सकते हैं।
ध्यान दें: इस calculator में शुरू में 7.1% की दर रखी गई है। यह सिर्फ़ शुरुआती मान है। PPF की असली दर के लिए हमेशा India Post, बैंक या National Savings Institute की ताज़ा अधिसूचना देखें।
किसके काम का है
पहली बार टैक्स-बचत के साधन खोजने वाला नौकरीपेशा: जो देखना चाहता है कि हर साल एक तय रकम जमा करने से 15 साल में क्या बन सकता है।
ऐसे माता-पिता या दंपति जो सुरक्षित, धीमी रफ़्तार वाला लंबा साधन समझना चाहते हैं: उनके लिए हर साल की तालिका से सीखना आसान है।
छोटे व्यवसायी और फ्रीलांसर: जिनके पास कंपनी का PF नहीं होता और जो अपने लिए रिटायरमेंट के लिए कुछ अलग रखना चाहते हैं।
वे लोग जो PPF की तुलना FD, NPS या SIP से करना चाहते हैं: यहाँ से PPF का अनुमानित नतीजा निकालकर दूसरे calculator से मिलाया जा सकता है।
जिन्हें लंबी अवधि के असर को देखना है: 15 साल और 25 साल के नतीजे में अंतर देखकर चक्रवृद्धि की ताक़त समझी जा सकती है।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
सालाना जमा (₹)
स्लाइडर की न्यूनतम सीमा ₹500 और अधिकतम ₹1,50,000 है, हर कदम ₹500 का। शुरुआत में ₹1,50,000 चुना रहता है। इस calculator में यही PPF की सालाना जमा सीमा मानी गई है। ये सीमाएँ बदल भी सकती हैं, इसलिए जमा करने से पहले आधिकारिक नियम देख लें।
मानी गई ब्याज दर (% सालाना)
स्लाइडर 5% से 9% के बीच चलता है, 0.1 के कदम पर। शुरू में 7.1 है। चूँकि सरकार हर तिमाही दर की घोषणा करती है, लंबी अवधि में दर ऊपर-नीचे हो सकती है। इसलिए अलग-अलग दरें आज़माना अच्छा तरीका है।
अवधि (साल)
स्लाइडर 15 साल से 50 साल तक, 5 साल के कदम पर चलता है। 15 साल PPF की बुनियादी लॉक-इन अवधि है, और उसके बाद 5-5 साल के ब्लॉक में खाता बढ़ाया जा सकता है। इसीलिए यहाँ 20, 25, 30 जैसे विकल्प हैं।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
परिपक्वता रकम (टैक्स-फ्री): मुख्य आँकड़ा, यानी चुने हुए सालों के बाद खाते का कुल बैलेंस। पेज इसे "टैक्स-फ्री" कहता है क्योंकि पेज के अनुसार PPF में जमा, ब्याज और परिपक्वता तीनों पर कर छूट मानी गई है। पर कर नियम बदल सकते हैं, इसलिए Income Tax Department की ताज़ा जानकारी देखें।
कुल जमा: सालाना जमा × सालों की संख्या।
कुल कमाया ब्याज: परिपक्वता रकम में से कुल जमा घटाने पर बचा हिस्सा।
परिपक्वता रकम में ब्याज का %: यह बताता है कि अंतिम रकम का कितना हिस्सा ब्याज से आया। जितनी लंबी अवधि, उतना यह प्रतिशत ऊपर जाता है।
Pie chart: जमा बनाम ब्याज का अनुपात।
साल-दर-साल तालिका: हर साल के लिए चार कॉलम: साल, अब तक की कुल जमा, अब तक का कुल ब्याज और बैलेंस।
Stacked chart: हर साल के लिए जमा (नीला) और ब्याज (हरा) का ढेर, जिससे दिखता है कि ब्याज का हरा हिस्सा आगे के सालों में तेज़ी से बढ़ता है।
अच्छा संकेत यह है कि आप तालिका में ब्याज वाले कॉलम को समय के साथ तेज़ी से बढ़ता देखें। इसका मतलब है कि लंबी अवधि में चक्रवृद्धि काम कर रही है। चिंता की बात तब है जब आप सिर्फ़ अंतिम रकम देखकर यह मान लें कि वह पक्का मिलेगी, जबकि दर बदल सकती है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
दर बदलकर देखें
क्योंकि PPF की दर सरकार बदल सकती है, एक ही जमा रकम पर 6%, 7.1% और 8% की रकम देखें। इससे समझ आता है कि दर में 1% का बदलाव लंबी अवधि में कितना बड़ा अंतर बना देता है।
जमा की रकम से खेलें
यह ज़रूरी नहीं कि आप अधिकतम सीमा तक ही जाएँ। ₹500 से लेकर अधिकतम तक कहीं भी रकम चुनी जा सकती है। अपने बजट के अनुसार रकम डालें और देखें कि वह कितने सालों में किस स्तर तक पहुँचती है।
अवधि को 5 के गुणकों में परखें
15, 20, 25 और 30 साल के नतीजे बगल-बगल रखें। तालिका में आपको दिखेगा कि 15वें साल के बाद ब्याज हर साल पहले से बड़ी रकम जोड़ता है।
दूसरे साधनों से तुलना
इसी रकम और अवधि के लिए FD या SIP के नतीजे अलग calculator में निकालें। सिर्फ़ अंतिम रकम नहीं, जोखिम, कर, लॉक-इन और निकासी के नियम भी तुलना में शामिल करें।
लक्ष्य के हिसाब से पीछे की ओर सोचें
अगर बेटी की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य के लिए एक रकम चाहिए, तो स्लाइडर चलाकर देखें कि कौन-सी सालाना जमा और अवधि उस रकम के करीब पहुँचाती है।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"दर हमेशा वही रहेगी" मान लेना: पेज पर साफ़ लिखा है कि दर बदलती है। इसलिए नतीजे को पक्का वादा न समझें।
पूरी सालाना रकम आख़िर में जमा करना: calculator साल की शुरुआत में जमा मानता है। अगर आप साल के अंत में जमा करते हैं, तो उस साल का ब्याज कम होगा।
लॉक-इन को भूल जाना: यह 15 साल का लंबा साधन है। जिस पैसे की ज़रूरत जल्दी पड़ सकती है, उसे इसमें रखने से पहले अच्छी तरह सोचें। समय से पहले निकासी या ऋण के नियम आधिकारिक स्रोत से देखें।
सिर्फ़ टैक्स छूट के लिए निवेश: कर लाभ एक पहलू है, पर आपका लक्ष्य, समय और बाकी निवेश भी मायने रखते हैं। टैक्स नियम बदल सकते हैं।
ज़्यादा जमा करने का मतलब हमेशा बेहतर समझना: आपातकालीन निधि और बीमा पहले ज़रूरी हो सकते हैं।
महँगाई भूल जाना: 30 साल बाद की ₹50 लाख की रकम आज के हिसाब से काफ़ी कम क्रय-शक्ति रख सकती है।
एक से ज़्यादा खाते खोलकर सीमा से अधिक जमा की उम्मीद: सीमाओं और खातों के नियम आधिकारिक रूप से देखें, यहाँ सिर्फ़ एक खाते की गणना होती है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
हर साल का नियम बहुत सीधा है:
नया बैलेंस = (पिछला बैलेंस + सालाना जमा) × (1 + ब्याज दर ÷ 100)
यानी calculator मानता है कि आप हर साल की शुरुआत में पूरी सालाना रकम एक साथ जमा करते हैं और ब्याज साल में एक बार जुड़ता है। यह एक सरल मान्यता है। असल PPF में ब्याज की गणना महीने के आधार पर होती है, जिसमें महीने की 5 तारीख़ तक जमा करने जैसे नियम होते हैं। इसलिए अगर आप किश्तों में या देर से जमा करते हैं तो असली रकम इस अनुमान से थोड़ी कम हो सकती है। इन नियमों का सही रूप India Post या आपके बैंक से पूछें।
साथ में आपको इन मान्यताओं का ध्यान रखना है:
दर पूरी अवधि में एक ही रहती है।
हर साल पूरी एक जैसी रकम जमा होती है।
कोई निकासी या ऋण नहीं लिया जाता।
कर या कोई शुल्क नहीं काटा गया है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए जयपुर का एक दुकानदार, मनोज, हर साल ₹60,000 PPF में जमा करना चाहता है। वह मान लेता है कि दर 7.1% रहेगी और अवधि 15 साल है।
पहले पाँच साल का हिसाब:
साल 1: (0 + 60,000) × 1.071 = ₹64,260
साल 2: (64,260 + 60,000) × 1.071 = ₹1,33,082
साल 3: (1,33,082 + 60,000) × 1.071 = ₹2,06,791
साल 4: (2,06,791 + 60,000) × 1.071 = ₹2,85,733
साल 5: (2,85,733 + 60,000) × 1.071 = ₹3,70,281
यही प्रक्रिया 15 साल तक चलाने पर:
कुल जमा = 60,000 × 15 = ₹9,00,000
परिपक्वता रकम लगभग ₹16,27,284
कुल ब्याज लगभग ₹7,27,284
ब्याज का हिस्सा लगभग 44.7%
अब मनोज दो बातें आज़माता है। पहली, अगर दर घटकर 6.5% रहे तो वही ₹60,000 सालाना और 15 साल में रकम लगभग ₹15,45,241 होगी, यानी करीब ₹82,000 कम। दूसरी, अगर वह अवधि 20 साल कर दे, तो 7.1% पर रकम लगभग ₹26,63,315 बनती है, जबकि जमा सिर्फ़ ₹12,00,000 है और ब्याज का हिस्सा बढ़कर करीब 54.9% हो जाता है। 25 साल पर यह रकम लगभग ₹41,23,206 और ब्याज का हिस्सा करीब 63.6% बनता है।
उदाहरण: यहाँ 5 साल और जोड़ने पर जमा सिर्फ़ 25% बढ़ी (₹9 लाख से ₹12 लाख के आसपास), पर अंतिम रकम लगभग 64% बढ़ गई। यही समय का असर है। ये सारे आँकड़े केवल काल्पनिक अनुमान हैं, असली नतीजा दर और जमा के तरीके पर निर्भर रहेगा।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह महीने के हिसाब से ब्याज की असली पद्धति नहीं अपनाता, बल्कि साल में एक बार ब्याज जोड़ता है।
यह मानता है कि दर पूरी अवधि में बराबर रहेगी, जबकि असल में हर तिमाही बदल सकती है।
इसमें खाते से आंशिक निकासी, ऋण सुविधा, समय से पहले बंद करने या बच्चों के नाम खाते के नियम शामिल नहीं हैं।
इसमें महँगाई का हिसाब नहीं है।
यह किसी व्यक्ति की कर स्थिति का हिसाब नहीं करता। छूट पुराने और नए कर विकल्प में अलग हो सकती है, इसलिए ITR भरते समय Income Tax Department के नियम देखें।
यह नहीं बताता कि PPF आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।
नतीजे अनुमान हैं और असली रकम इससे अलग हो सकती है।
इसके साथ और कौन-से calculator देखें
FD Calculator: बैंक की Fixed Deposit से मिलने वाली रकम की तुलना के लिए।
NPS Calculator: रिटायरमेंट के लिए एक और लंबी अवधि की योजना समझने के लिए।
SIP Calculator: बाज़ार से जुड़े निवेश के अनुमानित नतीजे को PPF के नतीजे से मिलाने के लिए।
आख़िर में
PPF जैसी लंबी योजनाओं में सबसे बड़ी ताक़त धैर्य और नियमितता होती है। यह calculator आपको सिर्फ़ यह दिखाता है कि अलग-अलग जमा, दर और अवधि पर रकम कैसी बन सकती है। असली योजना खोलने से पहले दर, नियम और अपनी ज़रूरत की पुष्टि India Post, अपने बैंक या सरकारी स्रोत से करें।
यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, यह निवेश, कर या किसी भी तरह की व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं है।
6 काम की बातें याद रखें
1
जमा की तारीख़ का ध्यान रखें
पेज साल की शुरुआत में जमा मानता है। अगर आप साल के अंत में या किश्तों में जमा करते हैं तो असली रकम इस अनुमान से कम रह सकती है। नियम India Post या बैंक से पूछ लें।
2
दर को तीन तरह से आज़माएँ
अपनी रकम और अवधि पर कम, मध्यम और ज़्यादा दर डालकर देखें। जो नतीजा सबसे कम दर पर भी आपके काम चल जाए, वही सुरक्षित आधार है।
3
लक्ष्य से पीछे की ओर चलें
पहले तय करें कि कितनी रकम किस साल चाहिए, फिर स्लाइडर से देखें कि कौन-सी जमा और अवधि वहाँ पहुँचाती है।
4
यह लंबी बंद अवधि वाला साधन है
जिस पैसे की 15 साल से पहले ज़रूरत पड़ सकती है, उसे यहाँ रखने से पहले निकासी के नियम देख लें। आपातकालीन निधि अलग रखें।
5
महँगाई से मिलाकर पढ़ें
तीस साल बाद की बड़ी रकम आज के हिसाब से कम क्रय-शक्ति रखती है। उसी अवधि का Inflation calculator साथ में चलाएँ।
6
नतीजे को निवेश सलाह न समझें
यह सिर्फ़ गणित है। PPF आपके लिए ठीक है या नहीं, यह आपके लक्ष्य, कर स्थिति और बाक़ी निवेश पर निर्भर है।