अगर आप सैलरी पर हैं और किराए के घर में रहते हैं, तो HRA (House Rent Allowance) पर टैक्स छूट आपका टैक्स घटा सकती है। पर यह छूट हर किसी को पूरी नहीं मिलती; इसकी एक तय गणना है। (यह जानकारी वित्त वर्ष 2026-27 के नियमों पर आधारित है; ताज़ा नियम आयकर विभाग की साइट पर जाँच लें।)
पहले यह जान लें: किसे मिलती है?
- सैलरी में HRA हिस्सा होना चाहिए।
- आप किराया चुका रहे हों।
- आप पुरानी कर-व्यवस्था चुनें। नई व्यवस्था में आम तौर पर HRA छूट नहीं मिलती।
गणना का फ़ॉर्मूला
तीन रकमें निकालें और जो सबसे कम हो, वही छूट है (बेसिक में DA शामिल मानें):
- कंपनी से सालाना मिला असली HRA
- सालाना चुकाया किराया − सालाना बेसिक का 10%
- सालाना बेसिक का 50% (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में) या 40% (अन्य शहरों में)
वित्त वर्ष 2026-27 से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50% वाली श्रेणी में जोड़ा गया है, पहले केवल चार महानगर इसमें थे।
उदाहरण (काल्पनिक)
मान लीजिए आपका सालाना बेसिक ₹6,00,000, सालाना HRA ₹3,00,000 है, और आप पुणे में ₹30,000 मासिक यानी ₹3,60,000 सालाना किराया देते हैं।
- (1) मिला HRA = ₹3,00,000
- (2) किराया − 10% बेसिक = 3,60,000 − 60,000 = ₹3,00,000
- (3) बेसिक का 50% = ₹3,00,000
तीनों बराबर हैं, इसलिए पूरी ₹3,00,000 की छूट मिल सकती है। अगर किराया ₹20,000 मासिक होता, तो (2) = 2,40,000 − 60,000 = ₹1,80,000 होता और छूट सिर्फ़ ₹1,80,000 रहती। इसलिए जैसे-जैसे किराया कम होता है, छूट घटती है।
ज़रूरी दस्तावेज़ और शर्तें
- किराए की रसीदें या रेंट एग्रीमेंट और बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड रखें।
- सालाना किराया ₹1 लाख से ज़्यादा हो तो मकान-मालिक का PAN देना ज़रूरी है।
- नकद में किराया देने के बजाय बैंक से भुगतान रखें, ताकि प्रमाण रहे।
- अपने माता-पिता को किराया दे सकते हैं, पर वह वास्तविक हो और उनकी आय में दिखाया जाए।
अगर HRA नहीं मिलता?
सैलरी में HRA न हो तो पुरानी व्यवस्था में धारा 80GG के तहत सीमित छूट का विकल्प है। शर्तें लागू हैं; इसके लिए अलग से जाँच करें।
कौन सी कर-व्यवस्था आपके लिए बेहतर है, यह जानने के लिए हमारी "नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था" गाइड भी देखें।
यह लेख शैक्षणिक है, टैक्स सलाह नहीं।
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