ट्रेडिंग में छिपे ख़र्च

Brokerage & Trading Charges Calculator

इक्विटी डिलीवरी, इंट्राडे, फ़्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए STT, एक्सचेंज शुल्क, SEBI फ़ीस, स्टांप ड्यूटी, GST और ब्रोकरेज का पूरा हिसाब — break-even और नेट P&L के साथ।

  • डिलीवरी, इंट्राडे, F&O
  • ब्रोकरेज की अपनी योजना
  • STT, GST, स्टांप ड्यूटी
  • Break-even भाव
  • शुल्क का बँटवारा चार्ट
  • शुद्ध नफ़ा-नुकसान
आशुग्या की सलाहब्रोकरेज के साथ STT, GST और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। छोटे-छोटे सौदों में ख़र्च भारी पड़ता है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

ट्रेडिंग में कौन-कौन से शुल्क लगते हैं?

हर ख़रीद-बिक्री पर ब्रोकरेज के अलावा सरकार और एक्सचेंज के शुल्क भी लगते हैं: STT (securities transaction tax), एक्सचेंज ट्रांज़ैक्शन शुल्क, SEBI टर्नओवर फ़ीस, स्टांप ड्यूटी (सिर्फ़ ख़रीद पर) और इन पर लगने वाला GST। डिलीवरी की बिक्री पर DP शुल्क भी लगता है। छोटे-छोटे दिखने वाले ये शुल्क मिलकर आपके मुनाफ़े का अच्छा हिस्सा खा सकते हैं — इसीलिए "break-even" यानी मुनाफ़े में आने के लिए भाव कितना हिलना चाहिए, यह जानना काम आता है।

यह calculator कौन-सी दरें इस्तेमाल करता है तारीख़: Oct 2026

यह calculator कौन-सी दरें इस्तेमाल करता है तारीख़: Oct 2026
सेगमेंटSTT (ख़रीद / बिक्री)एक्सचेंज शुल्क (टर्नओवर पर)स्टांप ड्यूटी (ख़रीद पर)
इक्विटी डिलीवरी0.1% / 0.1%NSE 0.00307% · BSE 0.00375%0.015%
इक्विटी इंट्राडे— / 0.025%NSE 0.00307% · BSE 0.00375%0.003%
फ़्यूचर्स (NSE)— / 0.05%NSE 0.00183%0.002%
ऑप्शंस (NSE) — प्रीमियम पर— / 0.15%NSE 0.03553%0.003%
  • STT: दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी (प्रमुख ब्रोकरों की बताई दरें; Finance Act / CBDT देखें)।
  • एक्सचेंज ट्रांज़ैक्शन शुल्क: NSE का 27 फ़रवरी 2026 का सर्कुलर, 1 मार्च 2026 से प्रभावी। BSE कैश की दर ब्रोकरों की बताई दर है।
  • SEBI टर्नओवर फ़ीस ₹10 प्रति करोड़; स्टांप ड्यूटी एक समान राष्ट्रीय दरों के अनुसार (ख़रीद पर)। GST 18%, ब्रोकरेज + एक्सचेंज शुल्क + SEBI फ़ीस पर।

दरें दर्शाई गई तारीख़ की हैं और SEBI / एक्सचेंज / सरकार के सर्कुलर से बदल सकती हैं। ब्रोकरेज और DP शुल्क हर ब्रोकर का अलग होता है — अपने ब्रोकर की दर ख़ुद भरें। नीचे आधिकारिक स्रोत देखें।

ब्रोकर के शुल्क अलग-अलग होते हैं — हर ब्रोकर की ब्रोकरेज, DP शुल्क और प्लान अलग होते हैं।

Please check the official website · कृपया आधिकारिक वेबसाइट देखें: NSE circular on transaction charges (27 Feb 2026) · NSE India · BSE India · SEBI

ध्यान रखें
  • यहाँ मान लिया गया है कि पहले ख़रीद, फिर बिक्री (लॉन्ग ट्रेड); इंट्राडे में पहले बेचने पर भी स्टांप ड्यूटी ख़रीद वाले हिस्से पर ही लगती है।
  • ऑप्शंस में "ख़रीद / बिक्री भाव" प्रीमियम (प्रति यूनिट) है और मात्रा = लॉट साइज़ × लॉट की संख्या।
  • फ़्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए सिर्फ़ NSE की दरें मॉडल की गई हैं; BSE की दरें सिर्फ़ इक्विटी कैश के लिए हैं।
  • ऑप्शंस एक्सरसाइज़ होने पर लगने वाला STT और स्टांप ड्यूटी की प्रति-करोड़ सीमाएँ यहाँ मॉडल नहीं की गई हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Turnover = (buy price + sell price) × quantity. Brokerage is what you enter (flat per order, or a percentage of each order with an optional cap). STT, exchange transaction charges, SEBI fee and stamp duty are the listed percentages of the buy or sell value; stamp duty is on the buy side only. GST is charged on brokerage + exchange charges + SEBI fee, and the DP charge applies on a delivery sale. Break-even move = total charges ÷ quantity.

Turnover = (ख़रीद भाव + बिक्री भाव) × मात्रा। Brokerage वही है जो आप भरते हैं (प्रति order तय रकम, या हर order का प्रतिशत और वैकल्पिक सीमा)। STT, exchange charge, SEBI fee और stamp duty ख़रीद/बिक्री मूल्य के सूचीबद्ध प्रतिशत हैं; stamp duty सिर्फ़ ख़रीद पर है। GST, brokerage + exchange charge + SEBI fee पर लगता है, और delivery बिक्री पर DP charge। Break-even = कुल charges ÷ मात्रा।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. This is an illustrative estimate. Government and exchange charges are shown as per the rates listed on this page as of the date shown and can change by circular; brokerage, DP charge and any other fee depend on your broker and plan and are only what you enter. Rounding, per-crore caps on stamp duty, STT on exercise of options, platform fees and income tax on trading profit are not included. Please check the official NSE / SEBI websites and your broker's contract note. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह केवल उदाहरण-स्वरूप अनुमान है। सरकारी और exchange के charges इस पेज पर दर्शाई तारीख़ तक की दरों पर हैं और सर्कुलर से बदल सकते हैं; brokerage, DP charge और अन्य शुल्क आपके broker और plan पर निर्भर हैं और वही हैं जो आप भरते हैं। Rounding, stamp duty की प्रति-करोड़ सीमा, options exercise पर STT, platform fee और ट्रेडिंग मुनाफ़े पर आयकर शामिल नहीं हैं। कृपया NSE / SEBI की आधिकारिक वेबसाइट और अपने broker का contract note देखें। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • एक सौदे की लागत सिर्फ़ ब्रोकरेज नहीं होती: STT, एक्सचेंज शुल्क, SEBI फ़ीस, स्टांप ड्यूटी, GST और डिलीवरी में DP शुल्क भी जुड़ते हैं।
  • Break-even वह छोटी चाल है जो भाव को चाहिए ताकि शुल्क निकल आएँ। उसके बाद ही सौदा सचमुच नफ़े में गिना जाएगा।
  • ब्रोकरेज और DP शुल्क आपके ब्रोकर की योजना है, इसलिए उन्हें आप ख़ुद भरते हैं। सरकारी और एक्सचेंज की दरें पेज की तालिका की तारीख़ तक की हैं।
  • यह अनुमान है, contract note नहीं। दरें बदल सकती हैं; अंतिम रकम अपने ब्रोकर की contract note में देखें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

सीमा: डिलीवरी में छोटा सौदा (पेज का डिफ़ॉल्ट)

सीमा NSE पर ₹500 के शेयर की 100 इकाइयाँ डिलीवरी में ख़रीदती है और ₹510 पर बेचती है। ब्रोकरेज: ₹20 या 0.03%, जो कम हो। DP शुल्क ₹13.5 (GST से पहले)।

टर्नओवर
₹1,01,000
ब्रोकरेज (दोनों ऑर्डर)
₹30.30
STT
₹101.00
स्टांप ड्यूटी
₹7.50
DP शुल्क (GST के साथ)
₹15.93
कुल शुल्क
लगभग ₹163.96 (टर्नओवर का 0.162%)
शुल्क से पहले नफ़ा
₹1,000
शुद्ध नफ़ा
लगभग ₹836.04
Break-even
लगभग ₹1.64 प्रति शेयर

₹1,000 के नफ़े में से क़रीब 16% शुल्क में चला गया। इस सौदे में सबसे बड़ा हिस्सा STT का है, ब्रोकरेज का नहीं।

दीपक: इंट्राडे में बार-बार छोटा नफ़ा

दीपक इंट्राडे में ₹1,000 का शेयर 200 इकाई ख़रीदकर ₹1,005 पर उसी दिन बेचता है। वही ₹20 या 0.03% वाली योजना।

टर्नओवर
₹4,01,000
कुल शुल्क
लगभग ₹118.45
शुल्क से पहले नफ़ा
₹1,000
शुद्ध नफ़ा
लगभग ₹881.55
Break-even
लगभग ₹0.59 प्रति शेयर

इंट्राडे में STT सिर्फ़ बिक्री पर लगता है और DP शुल्क नहीं, इसलिए प्रतिशत में लागत कम रही। फिर भी रोज़ के कई सौदों में यह जुड़ता चला जाता है।

कविता: एक लॉट ऑप्शन, तय ब्रोकरेज

कविता NSE पर ₹100 के प्रीमियम पर 1 लॉट (75) ख़रीदती है और ₹120 पर बेचती है। ब्रोकरेज तय ₹20 प्रति ऑर्डर।

टर्नओवर
₹16,500
कुल शुल्क
लगभग ₹67.86
शुल्क से पहले नफ़ा
₹1,500
शुद्ध नफ़ा
लगभग ₹1,432.14
भाव न हिले तो घाटा (₹100 पर ख़रीद-बिक्री)
लगभग ₹64.98

ऑप्शन में प्रीमियम छोटा हो तो तय ब्रोकरेज का वज़न बढ़ जाता है। सौदे से पहले भाव की न्यूनतम ज़रूरी चाल देख लेना समझदारी है।

डिलीवरी सौदे का एक-एक शुल्क (सीमा का उदाहरण)

डिलीवरी सौदे का एक-एक शुल्क (सीमा का उदाहरण)
शुल्करकम (≈ ₹)कुल शुल्क का हिस्सा (≈)
ब्रोकरेज30.3018.5%
STT101.0061.6%
एक्सचेंज शुल्क3.101.9%
SEBI फ़ीस0.100.1%
स्टांप ड्यूटी7.504.6%
GST6.033.7%
DP शुल्क (GST के साथ)15.939.7%
कुल163.96100%

पेज की सूचीबद्ध दरों (Oct 2026 तक) पर। प्रतिशत के जोड़ में rounding से 0.1% का फ़र्क़ संभव है।

मात्रा बढ़ने पर प्रति शेयर Break-even (₹500 पर ख़रीद-बिक्री, ₹20 या 0.03% योजना)

मात्रा बढ़ने पर प्रति शेयर Break-even (₹500 पर ख़रीद-बिक्री, ₹20 या 0.03% योजना)
मात्राकुल शुल्क (≈ ₹)Break-even (≈ ₹ प्रति शेयर)ख़रीद भाव का
1030.593.060.61%
5089.251.790.36%
100162.571.630.33%
500619.331.240.25%

DP शुल्क जैसा तय हिस्सा छोटी मात्रा पर प्रति शेयर भारी पड़ता है। यहाँ डिलीवरी, NSE और पेज की दरें मानी गई हैं।

त्वरित संदर्भ: ट्रेडिंग के शुल्क

त्वरित संदर्भ: ट्रेडिंग के शुल्क
टर्नओवर(ख़रीद भाव + बिक्री भाव) × मात्रा
ब्रोकरेजआपके ब्रोकर की योजना: तय रकम, या ऑर्डर का % सीमा के साथ
STTसेगमेंट के हिसाब से ख़रीद और/या बिक्री मूल्य पर सरकारी कर
एक्सचेंज और SEBIटर्नओवर पर बहुत छोटी दर
स्टांप ड्यूटीसिर्फ़ ख़रीद मूल्य पर
GSTब्रोकरेज, एक्सचेंज शुल्क और SEBI फ़ीस पर; इस पेज में DP शुल्क पर भी
DP शुल्कसिर्फ़ डिलीवरी बिक्री पर, बिक्री के दिन एक बार
Break-evenकुल शुल्क ÷ मात्रा (प्रति यूनिट)

Brokerage और Trading Charges Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

शेयर बाज़ार में एक सौदा करने पर सिर्फ़ ब्रोकर का कमीशन नहीं लगता। हर ख़रीद-बिक्री के साथ कई छोटे-छोटे शुल्क जुड़ते चलते हैं: STT, एक्सचेंज का ट्रांज़ैक्शन शुल्क, SEBI की टर्नओवर फ़ीस, स्टांप ड्यूटी, इन पर GST और डिलीवरी बेचने पर DP शुल्क। हर शुल्क अकेले देखने पर मामूली लगता है, पर मिलकर कभी-कभी आपके मुनाफ़े का अच्छा-ख़ासा हिस्सा खा जाते हैं, ख़ासकर तब जब मुनाफ़ा थोड़ा हो।

यह calculator एक ही सवाल का जवाब देता है: "मेरे इस सौदे में कुल कितने शुल्क लगेंगे, और उन्हें निकालने के बाद मेरा असली मुनाफ़ा या नुक़सान कितना बचेगा?" साथ ही यह break-even बताता है, यानी भाव को ख़रीद भाव से कितना हिलना होगा ताकि आप न नफ़े में रहें न घाटे में।

यह चार तरह के सौदों को सँभालता है: इक्विटी डिलीवरी, इक्विटी इंट्राडे, फ़्यूचर्स और ऑप्शंस। यह आपको ट्रेड करना नहीं सिखाता और न बताता है कि कौन-सा शेयर लेना है। यह सिर्फ़ लागत का साफ़ हिसाब देता है।

किसके काम का है

  • नया ट्रेडर या निवेशक, जो पहली बार समझना चाहता है कि contract note पर इतने सारे शुल्क क्यों दिखते हैं।
  • इंट्राडे करने वाला व्यक्ति, जिसके लिए छोटे-छोटे सौदों में शुल्क ही मुनाफ़े को तय कर देते हैं।
  • डिलीवरी में निवेश करने वाला, जो जानना चाहता है कि बेचते समय कितना शुल्क कटेगा।
  • ब्रोकर बदलने की सोच रहा व्यक्ति, जो अलग-अलग ब्रोकरेज योजनाओं का असर अपने सौदों पर देखना चाहता है।
  • F&O में नया व्यक्ति, जिसे लॉट के हिसाब से लगने वाले शुल्क का अंदाज़ा नहीं है।
  • विद्यार्थी, जो कर और शुल्क की संरचना समझना चाहते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

"अपने ट्रेड की जानकारी" कार्ड में ये खाने हैं:

  • सेगमेंट: चार विकल्प हैं: इक्विटी डिलीवरी, इक्विटी इंट्राडे, फ़्यूचर्स (NSE) और ऑप्शंस (NSE), जिसमें हिसाब प्रीमियम पर होता है। सेगमेंट बदलते ही शुल्क के सारे नियम बदल जाते हैं।
  • एक्सचेंज: NSE या BSE। BSE सिर्फ़ इक्विटी कैश के लिए मॉडल किया गया है। फ़्यूचर्स और ऑप्शंस में BSE चुनने पर भी NSE की दरें ही लगती हैं और नतीजे में इसका नोट दिखता है।
  • ख़रीद भाव (₹): आपने जिस भाव पर ख़रीदा। ऑप्शंस में यहाँ प्रीमियम (प्रति यूनिट) डालना है। शुरुआती मान 500 है।
  • बिक्री भाव (₹): जिस भाव पर बेचा। ऑप्शंस में यह भी प्रीमियम है। शुरुआती मान 510 है।
  • मात्रा (इक्विटी शेयर): कितने शेयर। शुरुआती मान 100 है। यह सिर्फ़ इक्विटी में काम आता है।
  • लॉट साइज़ और लॉट की संख्या: फ़्यूचर्स और ऑप्शंस में मात्रा = लॉट साइज़ × लॉट की संख्या। लॉट साइज़ का मौजूदा मान NSE की वेबसाइट पर देखिए, क्योंकि वह बदलता रहता है।
  • ब्रोकरेज का प्रकार: दो तरीके हैं। एक "ऑर्डर मूल्य का %", जिसमें वैकल्पिक सीमा भी रख सकते हैं। दूसरा "हर पूरे हुए ऑर्डर पर तय ₹"।
  • ब्रोकरेज, ऑर्डर मूल्य का % और हर ऑर्डर पर ब्रोकरेज की सीमा (₹): प्रतिशत वाले तरीके में काम आते हैं। सीमा 0 रखने का मतलब कोई सीमा नहीं। शुरुआती प्रीसेट है "₹20 या 0.03%, जो कम हो", जो आम डिस्काउंट ब्रोकरों में दिखता है।
  • हर पूरे हुए ऑर्डर पर तय ब्रोकरेज (₹): तय शुल्क वाले तरीके में।
  • बिक्री के दिन DP शुल्क (₹, GST से पहले): सिर्फ़ डिलीवरी बिक्री पर लगता है। इसे आपका ब्रोकर या डिपॉज़िटरी तय करता है। शुरुआती मान ₹13.5 है।
ध्यान दें: ब्रोकरेज और DP शुल्क आपके ब्रोकर की योजना पर निर्भर हैं। यहाँ वही डालिए जो आपके ब्रोकर के चार्ज पेज या contract note पर लिखा है। पहले से भरा मान सिर्फ़ एक नमूना है।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर कुल शुल्क बड़े अक्षरों में दिखता है, और उसके नीचे यह कि वह कुल टर्नओवर का कितना प्रतिशत है। उसके बाद ये पंक्तियाँ आती हैं:

  • टर्नओवर (ख़रीद + बिक्री मूल्य): ख़रीद की कुल रकम और बिक्री की कुल रकम का जोड़। ज़्यादातर शुल्क इसी पर या इसके हिस्से पर लगते हैं।
  • कुल मुनाफ़ा/नुक़सान (शुल्क से पहले): (बिक्री भाव − ख़रीद भाव) × मात्रा।
  • शुद्ध मुनाफ़ा/नुक़सान (शुल्क के बाद): ऊपर वाली संख्या में से कुल शुल्क घटाने पर। यही आपकी असली कमाई है।
  • Break-even: भाव को प्रति यूनिट कितना हिलना होगा और वह ख़रीद भाव का कितना प्रतिशत है।
  • शुल्क, टर्नओवर के % में: कुल शुल्क का टर्नओवर से अनुपात।

इनके नीचे "शुल्क का मद-वार ब्योरा" तालिका है, जिसमें हर शुल्क की अलग पंक्ति और उसका आधार लिखा है: ब्रोकरेज, STT, एक्सचेंज शुल्क, SEBI फ़ीस, स्टांप ड्यूटी, GST और DP शुल्क। और एक गोल चार्ट शुल्क का बँटवारा दिखाता है।

अच्छा-बुरा संकेत कैसे पहचानें

  • अगर कुल शुल्क आपके कुल मुनाफ़े के बड़े हिस्से के बराबर है, तो उस तरह का सौदा आपके लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद नहीं है।
  • Break-even जितना छोटा, उतना आसान कि सौदा नफ़े में आए। लेकिन यह भी ध्यान रखिए कि शेयर का भाव कम समय में कितना हिल सकता है।
  • मद-वार तालिका में देखिए कि सबसे बड़ा हिस्सा किसका है। डिलीवरी में अक्सर STT सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जबकि बार-बार छोटे सौदे करने पर ब्रोकरेज का योग बढ़ने लगता है।
  • ऑप्शंस में प्रीमियम छोटा हो और लॉट बड़ा, तो शुल्क का अनुपात अलग ही दिख सकता है। हर बार हिसाब चलाइए।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

ट्रेड करने से पहले break-even देखें

कोई सौदा करने से पहले ख़रीद भाव, अनुमानित बिक्री भाव और मात्रा डालकर देखिए। अगर आपका अपेक्षित मुनाफ़ा break-even से बहुत थोड़ा ऊपर है, तो सौदे में जोखिम के मुक़ाबले बहुत कम गुंजाइश है।

ब्रोकरेज की योजनाएँ आज़माइए

ब्रोकरेज का प्रकार बदलकर एक ही सौदे पर तुलना कीजिए: तय ₹ बनाम प्रतिशत और सीमा। छोटे ऑर्डर पर तय ₹ अक्सर सस्ता और बड़े ऑर्डर पर सीमा वाली योजना ज़्यादा अनुकूल दिख सकती है। अपने ब्रोकर की असली शर्तें ज़रूर पढ़िए।

सौदे की संख्या का असर

एक बड़े सौदे की जगह कई छोटे सौदे करें, तो हर ऑर्डर पर ब्रोकरेज और GST जुड़ते हैं। एक दिन में 10 सौदे कर रहे हों तो यहाँ एक सौदे का हिसाब निकालकर 10 से गुणा करके देखिए कि कुल लागत कहाँ पहुँचती है।

सेगमेंट की तुलना

एक ही मूल्य के सौदे को डिलीवरी और इंट्राडे दोनों में चलाकर देखिए कि शुल्क कितना अलग आता है। पर इसका यह मतलब नहीं कि किसी एक को चुन लें, क्योंकि दोनों की प्रकृति, जोखिम और कर-व्यवहार अलग हैं।

Contract note से मिलान करें

सौदा होने के बाद ब्रोकर का contract note खोलकर इस calculator के आँकड़ों से मिलाइए। छोटा फ़र्क (पूर्णांक के कारण) सामान्य है। बड़ा फ़र्क दिखे तो अपना ब्रोकरेज या DP शुल्क फिर जाँचिए।

उदाहरण: अगर आपके अनुमानित मुनाफ़े का आधा हिस्सा शुल्क में चला जाता दिखे, तो या तो मात्रा बढ़ाकर प्रति-यूनिट लागत घटाइए, या सौदे की योजना ही पर दोबारा सोचिए।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "Zero brokerage" का मतलब zero charges समझना: ब्रोकरेज शून्य हो तब भी STT, एक्सचेंज शुल्क, स्टांप ड्यूटी और GST लगते हैं।
  • सिर्फ़ ब्रोकरेज की तुलना करना: दो ब्रोकरों के बीच सरकारी और एक्सचेंज शुल्क समान होते हैं, अंतर ब्रोकरेज, DP और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म शुल्क में होता है।
  • DP शुल्क भूलना: डिलीवरी बेचने पर यह हर बिक्री-दिन एक बार लगता है, चाहे आपने कितने भी शेयर बेचे हों।
  • ऑप्शंस में प्रीमियम की जगह स्ट्राइक प्राइस डालना: इस calculator में भाव का मतलब प्रीमियम है।
  • लॉट साइज़ पुराना डालना: लॉट साइज़ बदलता रहता है, NSE पर ताज़ा देखिए।
  • इसे कर की गणना समझना: यह सिर्फ़ लेन-देन के शुल्क गिनता है, ट्रेडिंग मुनाफ़े पर आपका आयकर इसमें शामिल नहीं है।
  • शुल्क को "छोटी रकम" मानकर नज़रअंदाज़ करना: लगातार सौदों में यह रकम साल के अंत में बड़ी बन जाती है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

Calculator इन कदमों से चलता है, और मानता है कि पहले ख़रीद फिर बिक्री हुई:

  1. ख़रीद मूल्य = ख़रीद भाव × मात्रा, बिक्री मूल्य = बिक्री भाव × मात्रा, और टर्नओवर इन दोनों का जोड़।
  2. ब्रोकरेज: अगर आपने तय रकम चुनी है, तो वह हर ऑर्डर पर लगती है, यानी ख़रीद और बिक्री दोनों पर। अगर प्रतिशत चुना है, तो हर ऑर्डर के मूल्य का वह प्रतिशत, और अगर सीमा रखी है तो हर ऑर्डर पर सीमा से ज़्यादा नहीं।
  3. STT: ख़रीद मूल्य पर और बिक्री मूल्य पर उस सेगमेंट की दरें अलग से लगती हैं। कुछ सेगमेंट में ख़रीद पर STT शून्य है।
  4. एक्सचेंज ट्रांज़ैक्शन शुल्क: टर्नओवर का एक छोटा प्रतिशत, सेगमेंट और एक्सचेंज के हिसाब से।
  5. SEBI टर्नओवर फ़ीस: टर्नओवर पर बहुत छोटी दर (पेज के कॉन्फ़िगरेशन में प्रति करोड़ एक छोटी रकम के बराबर)।
  6. स्टांप ड्यूटी: केवल ख़रीद मूल्य पर।
  7. GST: ब्रोकरेज, एक्सचेंज शुल्क और SEBI फ़ीस के जोड़ पर। DP शुल्क पर भी GST जोड़ा जाता है।
  8. DP शुल्क: केवल इक्विटी डिलीवरी में बिक्री के दिन, एक बार।
  9. कुल शुल्क सबका जोड़। शुद्ध P&L = (बिक्री भाव − ख़रीद भाव) × मात्रा − कुल शुल्क। Break-even = कुल शुल्क ÷ मात्रा (प्रति यूनिट)।

इस calculator में सरकारी और एक्सचेंज की दरें पेज पर लिखी तारीख़ (Oct 2026) तक की मानी गई हैं, और पेज के ऊपर वाली "दरों की तालिका" में दिखती हैं। ये दरें SEBI, एक्सचेंज या सरकार के सर्कुलर से बदल सकती हैं, इसलिए इस लेख में हम कोई दर नहीं दोहरा रहे। पेज पर दिए NSE, BSE और SEBI के आधिकारिक लिंक और अपने ब्रोकर का contract note ज़रूर देखिए।

एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए पुणे में कपड़े की दुकान चलाने वाले संजय जी शौक़ से इंट्राडे करते हैं। उन्होंने एक शेयर 400 की मात्रा में ₹250 पर ख़रीदा और ₹253 पर बेच दिया। उनके ब्रोकर का प्लान हर ऑर्डर पर तय ₹20 है। नीचे के आँकड़े इस पेज की मान्य दरों पर हैं और सिर्फ़ उदाहरण हैं।

चरण 1: मूल्य। ख़रीद मूल्य = 250 × 400 = ₹1,00,000। बिक्री मूल्य = 253 × 400 = ₹1,01,200। टर्नओवर = ₹2,01,200।

चरण 2: शुल्क (इंट्राडे सेगमेंट, NSE)।

  • ब्रोकरेज: ₹20 × 2 ऑर्डर = ₹40
  • STT: इंट्राडे में सिर्फ़ बिक्री पर, लगभग ₹25.30
  • एक्सचेंज शुल्क: लगभग ₹6.18
  • SEBI फ़ीस: लगभग ₹0.20
  • स्टांप ड्यूटी (ख़रीद पर): ₹3.00
  • GST (ब्रोकरेज + एक्सचेंज + SEBI पर): लगभग ₹8.35

चरण 3: कुल। सब जोड़ने पर कुल शुल्क लगभग ₹83.03 आता है, जो टर्नओवर का लगभग 0.0413% है।

चरण 4: मुनाफ़ा। शुल्क से पहले मुनाफ़ा = (253 − 250) × 400 = ₹1,200। शुद्ध मुनाफ़ा = 1,200 − 83.03 = लगभग ₹1,116.97।

चरण 5: break-even। 83.03 ÷ 400 = लगभग ₹0.21 प्रति शेयर। यानी भाव को कम से कम लगभग इतना ऊपर जाना था ताकि लागत निकल सके।

अब वही सौदा "इक्विटी डिलीवरी" पर चलाकर देखिए (₹13.5 का DP शुल्क जोड़कर)। कुल शुल्क लगभग ₹286.86 हो जाता है, जिसमें STT का हिस्सा लगभग ₹201.20 का है। शुद्ध मुनाफ़ा घटकर लगभग ₹913 रह जाता है और break-even लगभग ₹0.72 प्रति शेयर हो जाता है। एक ही ख़रीद-बिक्री, पर दो सेगमेंट में शुल्क का नतीजा बहुत अलग। यह फ़र्क इसलिए है कि दोनों सेगमेंट के नियम अलग हैं।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह मानता है कि सौदा पहले ख़रीद और फिर बिक्री का है (लॉन्ग ट्रेड)।
  • ब्रोकरेज और DP शुल्क वही हैं जो आप डालें। यह आपके ब्रोकर की वास्तविक योजना नहीं जानता।
  • डिपॉज़िटरी, प्लेटफ़ॉर्म या अन्य छिपे शुल्क शामिल नहीं हैं।
  • स्टांप ड्यूटी की प्रति-करोड़ सीमाएँ और ऑप्शंस एक्सरसाइज़ पर लगने वाला STT मॉडल नहीं किए गए हैं।
  • फ़्यूचर्स और ऑप्शंस में केवल NSE की दरें हैं।
  • ट्रेडिंग मुनाफ़े पर आयकर और अन्य कर शामिल नहीं हैं। उसके लिए आयकर विभाग की वेबसाइट या कर सलाहकार देखें।
  • दरें पेज पर दर्शाई तारीख़ तक की हैं और बदल सकती हैं।
  • यह कोई संकेत नहीं देता कि सौदा करना ठीक है या नहीं, और यह भी नहीं कि भाव आपके पक्ष में जाएगा।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

यह लेख सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी के लिए है, निवेश, ट्रेडिंग या कर सलाह नहीं। शेयर बाज़ार जोखिम के अधीन है, इसलिए फ़ैसले से पहले अपनी स्थिति देखें और ज़रूरत हो तो SEBI-पंजीकृत सलाहकार से पूछें।

6 काम की बातें याद रखें

1
अपने ब्रोकर की योजना ही भरें

डिफ़ॉल्ट ₹20 या 0.03% सिर्फ़ उदाहरण है। अपनी ब्रोकरेज और DP शुल्क contract note या प्लान से लेकर डालें।

2
छोटी मात्रा पर तय शुल्क का वज़न देखें

DP शुल्क और तय ब्रोकरेज छोटे सौदे में प्रति शेयर ज़्यादा लगते हैं। बहुत छोटे सौदे बार-बार करने से पहले Break-even देखें।

3
नफ़े का लक्ष्य शुल्क के बाद तय करें

अगर भाव में 0.3% की चाल की उम्मीद है और Break-even 0.33% है, तो सौदा घाटे में जाएगा। लक्ष्य शुल्क जोड़कर रखें।

4
सेगमेंट अलग, दरें अलग

डिलीवरी, इंट्राडे, फ़्यूचर्स और ऑप्शंस के STT और स्टांप ड्यूटी अलग होते हैं। सही सेगमेंट चुनकर ही नतीजा पढ़ें।

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Contract note से मिलान करें

हर सौदे के बाद ब्रोकर का contract note देखें और उसकी कुल रकम इस अनुमान से मिलाएँ। फ़र्क़ हो तो कारण पूछें।

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कर अलग से जोड़ें

यहाँ कमाई पर लगने वाला कर (capital gains) शामिल नहीं है। शुद्ध नफ़े को उसके calculator में डालकर कर देखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

STT (securities transaction tax), exchange transaction charge, SEBI turnover fee, stamp duty (सिर्फ़ ख़रीद पर), इन पर लगने वाला 18% GST, और delivery बेचने पर DP charge। हर segment (delivery, intraday, futures, options) में इनकी दरें अलग होती हैं।

Break-even वह न्यूनतम भाव-बदलाव है जो सारे charges निकालने के बाद आपको न नफ़ा न नुक़सान की स्थिति में लाए। यहाँ यह कुल charges को quantity से भाग देकर निकाला गया है; छोटे trade में charges का प्रतिशत ज़्यादा पड़ता है।

नहीं। STT, exchange charge और stamp duty जैसे सरकारी/exchange charges सबके लिए समान हैं, पर brokerage, DP charge और अन्य शुल्क हर broker और plan में अलग होते हैं। इसीलिए इस calculator में brokerage आप ख़ुद भरते हैं (डिफ़ॉल्ट: ₹20 या 0.03%, जो कम हो)।

ये दरें पेज पर दर्शाई तारीख़ तक की हैं और SEBI, exchange या सरकार के सर्कुलर से बदल सकती हैं। आख़िरी पुष्टि के लिए NSE/SEBI की वेबसाइट और अपने broker का contract note देखें।

STT यानी Securities Transaction Tax, सरकार का कर जो सेगमेंट के हिसाब से ख़रीद मूल्य या बिक्री मूल्य पर लगता है। इस पेज में दरें तालिका में दिखती हैं।

डिलीवरी में शेयर बेचने पर आपके demat खाते से शेयर निकलते हैं, उसके लिए लगने वाला शुल्क। यह बिक्री के दिन एक बार लगता है और ब्रोकर तय करता है।

क्योंकि उसी दिन ख़रीद-बिक्री होने पर शेयर demat खाते में आते ही नहीं। इसलिए इस पेज में DP शुल्क सिर्फ़ डिलीवरी में जुड़ता है।

इस पेज में GST ब्रोकरेज, एक्सचेंज शुल्क और SEBI फ़ीस पर लगाया गया है, और DP शुल्क पर भी। STT और स्टांप ड्यूटी पर GST नहीं माना गया है।

क्योंकि यह ख़रीदार पर लगती है। इसलिए इस हिसाब में सिर्फ़ ख़रीद मूल्य पर जोड़ी गई है।

अपने प्लान के अनुसार चुनें। तय रकम वाले प्लान में बड़े सौदे सस्ते पड़ते हैं, प्रतिशत वाले में छोटे सौदे। सीमा (cap) हो तो वह भी भरें।

तब ब्रोकरेज पर कोई ऊपरी सीमा नहीं मानी जाती और हर ऑर्डर पर पूरा प्रतिशत लगता है।

ऑप्शन के सौदे प्रीमियम पर होते हैं और मात्रा लॉट साइज़ × लॉट की संख्या होती है। इसलिए ख़रीद-बिक्री के खानों में प्रीमियम डालें।

उस भाव पर आपका नफ़ा सिर्फ़ शुल्क के बराबर होता है। उससे कम पर बेचें तो गणना में शुद्ध घाटा दिखता है।

कुल शुल्क का रोज़ और महीने का जोड़, क्योंकि बार-बार के छोटे शुल्क मिलकर बड़ी रकम बन जाते हैं। एक सौदे के बजाय पूरे महीने का हिसाब मिलाएँ।

क्योंकि सौदे के शुल्क और कमाई का कर अलग-अलग हैं। मुनाफ़े पर कर के लिए Capital Gains या संबंधित कर calculator अलग से देखें।

नहीं। एक्सरसाइज़ पर लगने वाला STT और स्टांप ड्यूटी की प्रति-करोड़ सीमाएँ मॉडल नहीं हैं, और F&O सिर्फ़ NSE की दरों पर है।

नहीं। उधार के साथ सौदे का ब्याज और जोखिम अलग है, जिसके लिए Margin calculator साथ में देखें।

नहीं, यहाँ पहले ख़रीद और फिर बिक्री (लॉन्ग) मानी गई है। इंट्राडे में पहले बेचने पर स्टांप ड्यूटी का आधार अलग हो सकता है।

contract note ही सही माना जाए। ब्रोकर का प्लान, न्यूनतम शुल्क और तारीख़ की दरें अलग हों तो फ़र्क़ आना सामान्य है।

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