मान लीजिए एक ट्रेडर किसी शेयर के 250 शेयर ख़रीदना चाहता है, जिसका भाव ₹1,200 है। उसका ब्रोकर इस सौदे के लिए 15% margin बताता है। (यह सिर्फ़ उदाहरण है; असली margin आपके ब्रोकर पर निर्भर है।)
- एक्सपोज़र = 1,200 × 250 = ₹3,00,000।
- Margin = 3,00,000 × 15% = ₹45,000।
- उधार वाला हिस्सा = 3,00,000 − 45,000 = ₹2,55,000।
- Leverage = 100 ÷ 15 = लगभग 6.67 गुना।
- भाव में 1% की चाल = ₹3,000। यह ₹45,000 की margin का लगभग 6.7% है।
- भाव में 5% की चाल = ₹15,000, जो margin का लगभग 33.3% है।
- भाव में 15% की प्रतिकूल चाल = ₹45,000, यानी पूरी margin का सफ़ाया।
इसी सौदे में अगर भाव 5% बढ़ जाए, तो ₹15,000 का फ़ायदा होता है, यानी अपनी ₹45,000 पर लगभग 33% का। पर अगर भाव 5% गिर जाए, तो उतना ही नुकसान, यानी अपनी रकम का लगभग 33%। अगर बिना leverage के सिर्फ़ ₹45,000 से शेयर ख़रीदे जाते, तो 5% की चाल का असर सिर्फ़ ₹2,250 होता।
एक छोटा-सा बिकवाली का उदाहरण: यही सौदा "बिकवाली" चुनने पर उल्टा चलता है। भाव गिरने पर फ़ायदा होता है और भाव बढ़ने पर नुकसान। नुकसान की सीमा यहाँ और भी सोचने वाली है, क्योंकि भाव सैद्धांतिक रूप से बढ़ता जा सकता है। इसलिए बिकवाली में असली नुकसान margin से बड़ा भी हो सकता है।