₹1 लाख, 12% सालाना, 10 साल, तिमाही कंपाउंडिंग। (उदाहरण दर)
- मूलधन
- ₹1,00,000
- सालाना दर
- 12%
- अवधि
- 10 साल
- आवृत्ति
- तिमाही
- कमाया ब्याज
- ₹2,26,204
- परिपक्वता रकम
- ₹3,26,204
मूलधन लगभग सवा तीन गुना हुआ। यह मानी हुई दर का नतीजा है, किसी योजना का वादा नहीं।
एक बार का निवेश कितना बढ़ेगा — कंपाउंडिंग का जादू देखें!
Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
| साल | शुरुआती बैलेंस | कमाया ब्याज | अंतिम बैलेंस |
|---|
साधारण बनाम चक्रवृद्धि: ₹1 लाख को 12% पर 10 साल के लिए निवेश करें:
यही है कंपाउंडिंग की ताक़त — आपका ब्याज भी ब्याज कमाता है!
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
Amount = P × (1 + r ÷ n)^(n × t), where P is the principal, r = annual rate ÷ 100, n = number of times interest is added in a year (the compounding choice) and t = years. Interest earned = amount − P. In the year-wise table each year's closing amount is taken from the same formula and the interest is the rise over the previous year's closing amount.
राशि = P × (1 + r ÷ n)^(n × t), जहाँ P मूलधन है, r = सालाना दर ÷ 100, n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (आपका चुना हुआ कंपाउंडिंग विकल्प) और t = साल। कमाया ब्याज = राशि − P। साल-दर-साल टेबल में हर साल की अंतिम राशि इसी फ़ॉर्मूले से निकाली गई है और ब्याज = पिछले साल की अंतिम राशि से हुई बढ़त।
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
₹1 लाख, 12% सालाना, 10 साल, तिमाही कंपाउंडिंग। (उदाहरण दर)
मूलधन लगभग सवा तीन गुना हुआ। यह मानी हुई दर का नतीजा है, किसी योजना का वादा नहीं।
गीता ₹1 लाख, 8% पर, 10 साल के लिए अलग-अलग आवृत्ति आज़माती है। (उदाहरण दर)
आवृत्ति सालाना से रोज़ाना करने पर भी फ़र्क लगभग ₹6,600 रहा। दर और अवधि का असर इससे कहीं ज़्यादा है।
हरीश के पास ₹50,000 हैं। वह 7% सालाना (सालाना कंपाउंडिंग, उदाहरण दर) पर छोड़ देता है।
आख़िरी दस सालों की बढ़त पहले दस सालों से लगभग चौगुनी रही। यही कंपाउंडिंग है, पर इसके लिए धैर्य और स्थिर दर चाहिए।
| अवधि | परिपक्वता रकम | कमाया ब्याज |
|---|---|---|
| 5 साल | ₹1,80,611 | ₹80,611 |
| 10 साल | ₹3,26,204 | ₹2,26,204 |
| 15 साल | ₹5,89,160 | ₹4,89,160 |
| 20 साल | ₹10,64,089 | ₹9,64,089 |
अवधि दोगुनी होने पर रकम दोगुनी से कहीं ज़्यादा बढ़ी है, क्योंकि ब्याज पर ब्याज जुड़ता है।
| सालाना दर | परिपक्वता रकम | कमाया ब्याज |
|---|---|---|
| 6% | ₹1,81,402 | ₹81,402 |
| 8% | ₹2,20,804 | ₹1,20,804 |
| 10% | ₹2,68,506 | ₹1,68,506 |
| 12% | ₹3,26,204 | ₹2,26,204 |
दरें सिर्फ़ उदाहरण हैं। किसी भी योजना की असली दर उसके नियमों से ही लें।
| फ़ॉर्मूला | A = P × (1 + r ÷ n)^(n × t) |
|---|---|
| P | मूलधन |
| r | सालाना दर ÷ 100 |
| n | साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (1, 2, 4, 12 या 365) |
| t | साल |
| कमाया ब्याज | A − P |
| 72 का नियम (मोटा अंदाज़ा) | रकम दोगुनी होने के साल ≈ 72 ÷ सालाना दर |
| इस पेज में क्या नहीं | टैक्स, महँगाई, बीच में निकासी, हर महीने की नई जमा। |
यह calculator एक सीधा सवाल हल करता है: "अगर मैं आज एक बार में कुछ रकम किसी ऐसी जगह रख दूँ जहाँ ब्याज पर भी ब्याज लगता है, तो कुछ साल बाद वह कितनी हो जाएगी?" आप मूलधन, सालाना ब्याज दर, अवधि और कंपाउंडिंग की आवृत्ति चुनते हैं, और पेज तुरंत बताता है कि कुल कितना ब्याज बना और अंत में परिपक्वता रकम कितनी होगी।
चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) का मतलब है कि ब्याज हर बार मूलधन में जुड़ता जाता है और अगली बार का ब्याज इस बढ़े हुए पैसे पर लगता है। इसलिए पहले कुछ साल में बढ़त धीमी दिखती है, पर समय बीतने के साथ वक्र ऊपर की तरफ़ मुड़ने लगता है। यही बात इस पेज पर चार्ट और साल-दर-साल टेबल में साफ़ दिखती है।
यह calculator सिर्फ़ एक बार के निवेश (एकमुश्त रकम) के लिए है। हर महीने की SIP या RD जैसी किस्तों के लिए अलग calculator हैं, जिनका ज़िक्र नीचे आख़िर में किया गया है।
पेज के बाएँ कार्ड "निवेश की जानकारी" में चार चीज़ें हैं।
आप जो भी बदलते हैं, पेज का पता (URL) भी साथ में बदल जाता है। इसलिए "लिंक कॉपी करें" दबाकर आप वही आँकड़े किसी को भेज सकते हैं, और "शेयर करें" से WhatsApp पर छोटा संदेश भेजा जा सकता है।
दाएँ कार्ड "नतीजा" में तीन रकम सबसे ऊपर दिखती हैं।
इसके नीचे एक पाई चार्ट है जो नीले (मूलधन) और हरे (ब्याज) हिस्से का अनुपात दिखाता है। जब अवधि लंबी होती है तो हरा हिस्सा नीले से बड़ा हो जाता है, और यही चक्रवृद्धि का असर है।
उसके बाद "साल-दर-साल" वाला स्टैक्ड चार्ट है, जिसमें हर साल के अंत में मूलधन के ऊपर जमा ब्याज की मीनार दिखती है। चार्ट अधिकतम 40 साल तक बनता है।
चार्ट के नीचे एक छोटी पंक्ति आती है जो आपकी दर से 2 प्रतिशत-अंक कम और 2 प्रतिशत-अंक ज़्यादा पर नतीजा दिखाती है। यह बताती है कि दर के अनुमान में थोड़ी सी गलती होने पर अंतिम रकम कितनी हिल सकती है।
नीचे की टेबल "साल-दर-साल बढ़त" में चार कॉलम हैं: साल, शुरुआती बैलेंस, कमाया ब्याज और अंतिम बैलेंस। टेबल अधिकतम 30 साल की पंक्तियाँ दिखाती है। इसमें आप देख सकते हैं कि हर साल कमाया ब्याज पिछले साल से थोड़ा बड़ा होता जाता है, क्योंकि शुरुआती बैलेंस बढ़ रहा है।
साधारण ब्याज में हर साल का ब्याज सिर्फ़ मूल रकम पर लगता है: P × r × t। चक्रवृद्धि में ब्याज पर भी ब्याज लगता है। जब अवधि छोटी हो (1-2 साल) तो दोनों के नतीजे लगभग पास-पास रहते हैं। जब अवधि 10-15 साल से ऊपर जाती है तो फ़र्क़ तेज़ी से बढ़ता है।
Rule of 72 एक आसान ठोकर-अंदाज़ा देता है: 72 को ब्याज दर से भाग दीजिए, तो मोटे तौर पर पता चलता है कि रकम दोगुनी होने में कितने साल लगेंगे। 9% पर लगभग 72 ÷ 9 = 8 साल। यह केवल मोटा अंदाज़ा है, सटीक गणना calculator से ही निकलती है।
इस पेज पर नतीजे के नीचे "आशुग्या की कहानी" वाला कार्ड भी दिखता है। इसमें आपके डाले हुए आँकड़ों के हिसाब से एक छोटी कहानी बताई जाती है, जैसे साधारण ब्याज की तुलना में चक्रवृद्धि से कितना ज़्यादा मिला। उसके नीचे "अगर... तो क्या होगा?" वाले बटन हैं, जैसे 5 साल और रुकें, दर 2% कम हो जाए, कंपाउंडिंग मासिक हो जाए, या रकम दोगुनी हो। बटन दबाने पर असल में ऊपर के इनपुट बदल जाते हैं और पूरा calculator नए नतीजे दिखाता है। "रीसेट" से पुरानी स्थिति वापस आ जाती है।
एक ही निवेश के लिए अपनी अपेक्षित दर, उससे थोड़ी कम और उससे थोड़ी ज़्यादा दर डालकर देखें। चार्ट के नीचे वाली पंक्ति यह काम अपने-आप ±2% पर कर देती है। अगर कम दर वाला नतीजा भी आपके लक्ष्य के लिए काफ़ी है, तो योजना मज़बूत है।
अवधि को 5, 10, 15, 20 साल करके देखें और हर बार केवल ब्याज वाला आँकड़ा लिखिए। आप पाएँगे कि हर अगले 5 साल में जुड़ने वाला ब्याज पिछले 5 साल से बड़ा है।
मान लीजिए दो जगह एक ही दर है, पर एक में तिमाही और दूसरी में मासिक कंपाउंडिंग है। दोनों बार calculator चलाइए और अंतिम रकम का फ़र्क़ देखिए। अक्सर यह फ़र्क़ छोटा निकलता है, और तब दूसरी बातें (सुरक्षा, लॉक-इन, निकासी के नियम) ज़्यादा मायने रखती हैं।
अगर आपके पास पुरानी FD की रसीद है, तो उसकी रकम, दर और अवधि डालकर देखें कि परिपक्वता रकम रसीद से मिलती है या नहीं। छोटे अंतर गोलाई से हो सकते हैं।
हर बार इनपुट बदलने पर पता बदलता है, इसलिए पसंदीदा परिदृश्य को ब्राउज़र में bookmark कर लें या लिंक कॉपी कर लें, ताकि बाद में वही आँकड़े दोबारा खुल जाएँ।
इस calculator का फ़ॉर्मूला वही मानक सूत्र है, जो पेज के नीचे भी लिखा है:
A = P × (1 + r/n)^(n×t)
यहाँ P मूलधन है, r सालाना दर दशमलव में (12% के लिए 0.12), n साल में कंपाउंडिंग की संख्या और t साल में समय। कमाया ब्याज = A − P।
इस implementation की कुछ बातें समझ लेना काम आएगा।
मान लीजिए मीरा नाम की एक freelancer डिज़ाइनर को एक बड़े प्रोजेक्ट से ₹2,50,000 मिले हैं और वह इसे 12 साल के लिए अलग रखना चाहती है। मान लीजिए उसकी स्कीम में 9% सालाना दर और तिमाही कंपाउंडिंग है। यह सिर्फ़ एक उदाहरण दर है, असली दर अलग हो सकती है।
अब साधारण ब्याज से तुलना करें: 2,50,000 × 9% × 12 = ₹2,70,000। यानी चक्रवृद्धि में लगभग ₹2,07,410 ज़्यादा बना, जो ब्याज पर ब्याज का हिस्सा है।
आवृत्ति बदलकर देखें, उसी दर और अवधि पर:
देखिए, सालाना से रोज़ाना तक का अंतर लगभग ₹33,000 है, जबकि दर बदलने का असर कहीं बड़ा है। यहीं 2% वाली तुलना काम आती है: उसी निवेश पर 7% पर लगभग ₹5,74,900 और 11% पर लगभग ₹9,19,322 बनते हैं। दर में दो अंक का फ़र्क़ आवृत्ति के फ़र्क़ से बहुत भारी पड़ता है।
साल-दर-साल टेबल में पहले साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹2,73,271 और छठे साल के अंत में लगभग ₹4,26,442 दिखेगा। यानी आधे समय में रकम दोगुनी तो नहीं हुई, पर आधे से ज़्यादा ब्याज आख़िरी छह सालों में बना। यही कंपाउंडिंग का असली चेहरा है।
यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है, निवेश, कर या क़ानूनी सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले अपनी स्थिति के हिसाब से प्रमाणित सलाहकार या संबंधित संस्था से पुष्टि कर लें।
दर में एक-दो प्रतिशत के फ़र्क से ज़्यादा असर अक्सर 5-10 साल और रुकने से होता है।
अपनी योजना की ब्याज जुड़ने की आवृत्ति (तिमाही, सालाना) पता करें और वही चुनें। तब हिसाब असली के क़रीब रहेगा।
दोनों में फ़र्क समझने के लिए Simple Interest Calculator भी चलाएँ। लंबी अवधि में अंतर साफ़ दिखता है।
कमाए ब्याज पर अक्सर कर लगता है। वास्तविक हाथ में आने वाली रकम कम होगी।
अगर दर 7% और महँगाई 5% हो, तो असली बढ़त लगभग 2% है। Real Return Calculator देखें।
क्रेडिट कार्ड जैसे ऊँची दर वाले कर्ज़ में भी ब्याज पर ब्याज चढ़ता है। इसलिए बकाया टालना महँगा पड़ता है।
शुक्रिया! आपका feedback मिल गया। 🙏