ब्याज पर ब्याज का जादू

Compound Interest Calculator

एक बार का निवेश कितना बढ़ेगा — कंपाउंडिंग का जादू देखें!

  • चक्रवृद्धि राशि
  • कमाया ब्याज
  • पाँच आवृत्ति विकल्प
  • साल-दर-साल तालिका
  • दर बदलकर तुलना
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहचक्रवृद्धि में समय सबसे बड़ी ताक़त है। साल बढ़ाकर देखें कि रकम कैसे उछलती है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

निवेश की जानकारी
₹
1% 12% 30%
1 साल 10 साल 40 साल
नतीजा
मूलधन
₹1 L
कमाया ब्याज
₹2.27 L
परिपक्वता रकम
₹3.27 L
 मूलधन  ब्याज
म्यूचुअल फंड या शेयरों में एकमुश्त निवेश करने की सोच रहे हैं? Lumpsum Calculator आज़माएँ — रिटर्न का गुना भी दिखेगा। देखें
साल-दर-साल बढ़त
साल-दर-साल बढ़त
सालशुरुआती बैलेंसकमाया ब्याजअंतिम बैलेंस

चक्रवृद्धि ब्याज का फ़ॉर्मूला

A = P × (1 + r/n)^(n×t) A = परिपक्वता रकम P = मूलधन r = सालाना दर (दशमलव में, जैसे 12% के लिए 0.12) n = साल में कंपाउंडिंग की संख्या t = समय (साल में)

साधारण बनाम चक्रवृद्धि: ₹1 लाख को 12% पर 10 साल के लिए निवेश करें:

  • साधारण ब्याज: ₹2,20,000 (सिर्फ ₹1.2L मुनाफ़ा)
  • चक्रवृद्धि ब्याज (तिमाही): ₹3,26,204 (₹2.26L मुनाफ़ा!)

यही है कंपाउंडिंग की ताक़त — आपका ब्याज भी ब्याज कमाता है!

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Amount = P × (1 + r ÷ n)^(n × t), where P is the principal, r = annual rate ÷ 100, n = number of times interest is added in a year (the compounding choice) and t = years. Interest earned = amount − P. In the year-wise table each year's closing amount is taken from the same formula and the interest is the rise over the previous year's closing amount.

राशि = P × (1 + r ÷ n)^(n × t), जहाँ P मूलधन है, r = सालाना दर ÷ 100, n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (आपका चुना हुआ कंपाउंडिंग विकल्प) और t = साल। कमाया ब्याज = राशि − P। साल-दर-साल टेबल में हर साल की अंतिम राशि इसी फ़ॉर्मूले से निकाली गई है और ब्याज = पिछले साल की अंतिम राशि से हुई बढ़त।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • चक्रवृद्धि ब्याज में पिछले ब्याज पर भी ब्याज लगता है। इसलिए रकम समय के साथ सीधी रेखा में नहीं, तेज़ होती वक्र में बढ़ती है।
  • आप कंपाउंडिंग की आवृत्ति चुन सकते हैं: सालाना, छमाही, तिमाही, मासिक या रोज़ाना। आवृत्ति बढ़ने पर फ़र्क होता है, पर बहुत बड़ा नहीं।
  • दर से भी ज़्यादा असर आम तौर पर अवधि का होता है। आख़िरी सालों में ब्याज की कमाई सबसे बड़ी बनती है।
  • यह एकमुश्त रकम का हिसाब है और दर उदाहरण है। हर महीने की किस्तों के लिए SIP Calculator देखें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

पेज की शुरुआती संख्याएँ

₹1 लाख, 12% सालाना, 10 साल, तिमाही कंपाउंडिंग। (उदाहरण दर)

मूलधन
₹1,00,000
सालाना दर
12%
अवधि
10 साल
आवृत्ति
तिमाही
कमाया ब्याज
₹2,26,204
परिपक्वता रकम
₹3,26,204

मूलधन लगभग सवा तीन गुना हुआ। यह मानी हुई दर का नतीजा है, किसी योजना का वादा नहीं।

गीता: आवृत्ति से कितना फ़र्क?

गीता ₹1 लाख, 8% पर, 10 साल के लिए अलग-अलग आवृत्ति आज़माती है। (उदाहरण दर)

सालाना
₹2,15,892
छमाही
₹2,19,112
तिमाही
₹2,20,804
मासिक
₹2,21,964
रोज़ाना
₹2,22,535
सालाना से रोज़ाना का फ़र्क
लगभग ₹6,643

आवृत्ति सालाना से रोज़ाना करने पर भी फ़र्क लगभग ₹6,600 रहा। दर और अवधि का असर इससे कहीं ज़्यादा है।

हरीश: समय का जादू

हरीश के पास ₹50,000 हैं। वह 7% सालाना (सालाना कंपाउंडिंग, उदाहरण दर) पर छोड़ देता है।

10 साल बाद
₹98,358
20 साल बाद
₹1,93,484
30 साल बाद
₹3,80,613
पहले 10 साल में बढ़त
₹48,358
आख़िरी 10 साल में बढ़त
₹1,87,129

आख़िरी दस सालों की बढ़त पहले दस सालों से लगभग चौगुनी रही। यही कंपाउंडिंग है, पर इसके लिए धैर्य और स्थिर दर चाहिए।

₹1 लाख, 12%, तिमाही (उदाहरण): अवधि के साथ रकम

₹1 लाख, 12%, तिमाही (उदाहरण): अवधि के साथ रकम
अवधिपरिपक्वता रकमकमाया ब्याज
5 साल₹1,80,611₹80,611
10 साल₹3,26,204₹2,26,204
15 साल₹5,89,160₹4,89,160
20 साल₹10,64,089₹9,64,089

अवधि दोगुनी होने पर रकम दोगुनी से कहीं ज़्यादा बढ़ी है, क्योंकि ब्याज पर ब्याज जुड़ता है।

₹1 लाख, 10 साल, तिमाही (उदाहरण): दर बदलने पर

₹1 लाख, 10 साल, तिमाही (उदाहरण): दर बदलने पर
सालाना दरपरिपक्वता रकमकमाया ब्याज
6%₹1,81,402₹81,402
8%₹2,20,804₹1,20,804
10%₹2,68,506₹1,68,506
12%₹3,26,204₹2,26,204

दरें सिर्फ़ उदाहरण हैं। किसी भी योजना की असली दर उसके नियमों से ही लें।

त्वरित संदर्भ: चक्रवृद्धि का हिसाब

त्वरित संदर्भ: चक्रवृद्धि का हिसाब
फ़ॉर्मूलाA = P × (1 + r ÷ n)^(n × t)
Pमूलधन
rसालाना दर ÷ 100
nसाल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (1, 2, 4, 12 या 365)
tसाल
कमाया ब्याजA − P
72 का नियम (मोटा अंदाज़ा)रकम दोगुनी होने के साल ≈ 72 ÷ सालाना दर
इस पेज में क्या नहींटैक्स, महँगाई, बीच में निकासी, हर महीने की नई जमा।

Compound Interest Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

यह calculator एक सीधा सवाल हल करता है: "अगर मैं आज एक बार में कुछ रकम किसी ऐसी जगह रख दूँ जहाँ ब्याज पर भी ब्याज लगता है, तो कुछ साल बाद वह कितनी हो जाएगी?" आप मूलधन, सालाना ब्याज दर, अवधि और कंपाउंडिंग की आवृत्ति चुनते हैं, और पेज तुरंत बताता है कि कुल कितना ब्याज बना और अंत में परिपक्वता रकम कितनी होगी।

चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) का मतलब है कि ब्याज हर बार मूलधन में जुड़ता जाता है और अगली बार का ब्याज इस बढ़े हुए पैसे पर लगता है। इसलिए पहले कुछ साल में बढ़त धीमी दिखती है, पर समय बीतने के साथ वक्र ऊपर की तरफ़ मुड़ने लगता है। यही बात इस पेज पर चार्ट और साल-दर-साल टेबल में साफ़ दिखती है।

यह calculator सिर्फ़ एक बार के निवेश (एकमुश्त रकम) के लिए है। हर महीने की SIP या RD जैसी किस्तों के लिए अलग calculator हैं, जिनका ज़िक्र नीचे आख़िर में किया गया है।

किसके काम का है

  • जो व्यक्ति FD, बचत खाते या किसी निश्चित ब्याज वाली स्कीम में एक बार रकम रखने की सोच रहा है और मोटा अंदाज़ा चाहता है।
  • विद्यार्थी, जिन्हें स्कूल-कॉलेज में चक्रवृद्धि ब्याज का सवाल हल करना है और जवाब की जाँच करनी है।
  • जो लोग साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज का फ़र्क़ अपनी आँखों से देखना चाहते हैं।
  • माता-पिता, जो बच्चे के नाम पर रखी रकम को लंबे समय में बढ़ते हुए देखना चाहते हैं।
  • कोई भी, जो यह जानना चाहता है कि ब्याज दर में थोड़ा सा फ़र्क़ या कुछ साल की देरी अंतिम रकम को कितना बदल देती है।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज के बाएँ कार्ड "निवेश की जानकारी" में चार चीज़ें हैं।

  • मूलधन रकम (₹): वह रकम जो आप आज एक बार लगाएँगे। इसमें कम से कम ₹1,000 की सीमा रखी गई है। यहाँ सीधे संख्या टाइप की जाती है।
  • सालाना ब्याज दर (%): स्लाइडर 1% से 30% तक चलता है और हर कदम 0.5% का है। शुरुआत में 12% दिखता है, पर यह सिर्फ़ एक नमूना है। अपनी असली स्कीम की दर बैंक या संस्था के दस्तावेज़ से देखकर ही डालें।
  • अवधि (साल): 1 से 40 साल तक, हर कदम 1 साल का। शुरुआती मान 10 साल है।
  • कंपाउंडिंग की आवृत्ति: यहाँ पाँच विकल्प हैं: सालाना, छमाही, तिमाही, मासिक और रोज़ाना। शुरुआत में तिमाही चुना होता है। इसका मतलब है कि साल में कितनी बार ब्याज मूलधन में जोड़ा जाएगा।
ध्यान दें: आवृत्ति आपकी चुनी हुई स्कीम की शर्त के हिसाब से होनी चाहिए। बैंक की कई FD में तिमाही कंपाउंडिंग होती है, पर कहीं सालाना या मासिक भी हो सकती है। अंदाज़े से कुछ भी न चुनें।

आप जो भी बदलते हैं, पेज का पता (URL) भी साथ में बदल जाता है। इसलिए "लिंक कॉपी करें" दबाकर आप वही आँकड़े किसी को भेज सकते हैं, और "शेयर करें" से WhatsApp पर छोटा संदेश भेजा जा सकता है।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

दाएँ कार्ड "नतीजा" में तीन रकम सबसे ऊपर दिखती हैं।

  1. मूलधन: वही रकम जो आपने डाली थी।
  2. कमाया ब्याज: अंतिम रकम में से मूलधन घटाने पर जो बचे।
  3. परिपक्वता रकम: मूलधन और ब्याज का जोड़, यानी अवधि के अंत में मिलने वाली कुल रकम का अनुमान।

इसके नीचे एक पाई चार्ट है जो नीले (मूलधन) और हरे (ब्याज) हिस्से का अनुपात दिखाता है। जब अवधि लंबी होती है तो हरा हिस्सा नीले से बड़ा हो जाता है, और यही चक्रवृद्धि का असर है।

उसके बाद "साल-दर-साल" वाला स्टैक्ड चार्ट है, जिसमें हर साल के अंत में मूलधन के ऊपर जमा ब्याज की मीनार दिखती है। चार्ट अधिकतम 40 साल तक बनता है।

चार्ट के नीचे एक छोटी पंक्ति आती है जो आपकी दर से 2 प्रतिशत-अंक कम और 2 प्रतिशत-अंक ज़्यादा पर नतीजा दिखाती है। यह बताती है कि दर के अनुमान में थोड़ी सी गलती होने पर अंतिम रकम कितनी हिल सकती है।

नीचे की टेबल "साल-दर-साल बढ़त" में चार कॉलम हैं: साल, शुरुआती बैलेंस, कमाया ब्याज और अंतिम बैलेंस। टेबल अधिकतम 30 साल की पंक्तियाँ दिखाती है। इसमें आप देख सकते हैं कि हर साल कमाया ब्याज पिछले साल से थोड़ा बड़ा होता जाता है, क्योंकि शुरुआती बैलेंस बढ़ रहा है।

अच्छा संकेत क्या है और चेतावनी क्या है

  • अगर हरा हिस्सा मूलधन के बराबर या उससे ज़्यादा हो जाए, तो रकम "अपने ही ब्याज से बढ़ने" वाले दौर में पहुँच चुकी है।
  • अगर आप बहुत ऊँची दर (जैसे 25-30%) डालकर बड़ी रकम देख रहे हैं, तो रुककर सोचें। ऊँचे रिटर्न के साथ आम तौर पर जोखिम भी बहुत ऊँचा होता है, और पक्की दर कहीं नहीं मिलती।
  • टेबल में पहले साल का ब्याज ही सबसे छोटा होगा। धैर्य की कमी से बीच में पैसा निकालना इस पूरे गणित को बिगाड़ देता है।

साधारण बनाम चक्रवृद्धि ब्याज: असली फ़र्क़

साधारण ब्याज में हर साल का ब्याज सिर्फ़ मूल रकम पर लगता है: P × r × t। चक्रवृद्धि में ब्याज पर भी ब्याज लगता है। जब अवधि छोटी हो (1-2 साल) तो दोनों के नतीजे लगभग पास-पास रहते हैं। जब अवधि 10-15 साल से ऊपर जाती है तो फ़र्क़ तेज़ी से बढ़ता है।

Rule of 72 एक आसान ठोकर-अंदाज़ा देता है: 72 को ब्याज दर से भाग दीजिए, तो मोटे तौर पर पता चलता है कि रकम दोगुनी होने में कितने साल लगेंगे। 9% पर लगभग 72 ÷ 9 = 8 साल। यह केवल मोटा अंदाज़ा है, सटीक गणना calculator से ही निकलती है।

आशुग्या की कहानी

इस पेज पर नतीजे के नीचे "आशुग्या की कहानी" वाला कार्ड भी दिखता है। इसमें आपके डाले हुए आँकड़ों के हिसाब से एक छोटी कहानी बताई जाती है, जैसे साधारण ब्याज की तुलना में चक्रवृद्धि से कितना ज़्यादा मिला। उसके नीचे "अगर... तो क्या होगा?" वाले बटन हैं, जैसे 5 साल और रुकें, दर 2% कम हो जाए, कंपाउंडिंग मासिक हो जाए, या रकम दोगुनी हो। बटन दबाने पर असल में ऊपर के इनपुट बदल जाते हैं और पूरा calculator नए नतीजे दिखाता है। "रीसेट" से पुरानी स्थिति वापस आ जाती है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

दर के तीन परिदृश्य बनाइए

एक ही निवेश के लिए अपनी अपेक्षित दर, उससे थोड़ी कम और उससे थोड़ी ज़्यादा दर डालकर देखें। चार्ट के नीचे वाली पंक्ति यह काम अपने-आप ±2% पर कर देती है। अगर कम दर वाला नतीजा भी आपके लक्ष्य के लिए काफ़ी है, तो योजना मज़बूत है।

अवधि बदलकर देखें

अवधि को 5, 10, 15, 20 साल करके देखें और हर बार केवल ब्याज वाला आँकड़ा लिखिए। आप पाएँगे कि हर अगले 5 साल में जुड़ने वाला ब्याज पिछले 5 साल से बड़ा है।

दो विकल्पों की तुलना

मान लीजिए दो जगह एक ही दर है, पर एक में तिमाही और दूसरी में मासिक कंपाउंडिंग है। दोनों बार calculator चलाइए और अंतिम रकम का फ़र्क़ देखिए। अक्सर यह फ़र्क़ छोटा निकलता है, और तब दूसरी बातें (सुरक्षा, लॉक-इन, निकासी के नियम) ज़्यादा मायने रखती हैं।

पुराने निवेश की जाँच

अगर आपके पास पुरानी FD की रसीद है, तो उसकी रकम, दर और अवधि डालकर देखें कि परिपक्वता रकम रसीद से मिलती है या नहीं। छोटे अंतर गोलाई से हो सकते हैं।

URL से सहेजें

हर बार इनपुट बदलने पर पता बदलता है, इसलिए पसंदीदा परिदृश्य को ब्राउज़र में bookmark कर लें या लिंक कॉपी कर लें, ताकि बाद में वही आँकड़े दोबारा खुल जाएँ।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "आवृत्ति बढ़ाने से मेरा रिटर्न बहुत बढ़ जाएगा": आवृत्ति का असर होता है, पर सीमित। दर और समय का असर कहीं ज़्यादा है।
  • दर को सालाना की जगह मासिक मान लेना: स्लाइडर में हमेशा सालाना दर डालें। अगर आपको मासिक दर पता है तो उसे 12 से गुणा करके सालाना बनाएँ और फिर मासिक कंपाउंडिंग चुनें।
  • कर भूल जाना: FD जैसे साधनों का ब्याज आपकी आय में जुड़कर कर के दायरे में आ सकता है। calculator की रकम कर से पहले की है।
  • महँगाई को नज़रअंदाज़ करना: ₹7 लाख भविष्य में उतनी चीज़ें नहीं ख़रीदेंगे जितनी आज ख़रीदते हैं। असली क्रय-शक्ति के लिए महँगाई वाला calculator भी देखें।
  • बीच में पैसा निकाल लेना: कंपाउंडिंग तभी काम करती है जब ब्याज जुड़ने दिया जाए। बीच में निकासी और जुर्माना पूरे गणित को बदल देते हैं।
  • बाज़ार-आधारित निवेश पर इसे पक्की गारंटी समझना: म्यूचुअल फंड या शेयर में हर साल एक जैसा रिटर्न नहीं आता। यहाँ की दर केवल एक मान ली गई औसत है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

इस calculator का फ़ॉर्मूला वही मानक सूत्र है, जो पेज के नीचे भी लिखा है:

A = P × (1 + r/n)^(n×t)

यहाँ P मूलधन है, r सालाना दर दशमलव में (12% के लिए 0.12), n साल में कंपाउंडिंग की संख्या और t साल में समय। कमाया ब्याज = A − P।

इस implementation की कुछ बातें समझ लेना काम आएगा।

  • हर आवृत्ति पर दर बराबर बाँटी जाती है। मासिक चुनने पर r/12 हर महीने लगता है, रोज़ाना चुनने पर साल को 365 दिन माना जाता है।
  • साल-दर-साल टेबल की हर पंक्ति उसी सूत्र से निकाली जाती है, यानी साल y का अंतिम बैलेंस P × (1 + r/n)^(n×y)। कमाया ब्याज उस साल का अंतिम बैलेंस घटा शुरुआती बैलेंस है।
  • नतीजे नज़दीकी पूरे रुपये में गोल किए जाते हैं। इसलिए बैंक की रसीद से एक-दो रुपये का अंतर आ सकता है।
  • इसमें कोई कर (टैक्स), TDS, शुल्क या महँगाई नहीं जोड़ी गई है। दर पूरी अवधि में एक जैसी मानी गई है।
एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए मीरा नाम की एक freelancer डिज़ाइनर को एक बड़े प्रोजेक्ट से ₹2,50,000 मिले हैं और वह इसे 12 साल के लिए अलग रखना चाहती है। मान लीजिए उसकी स्कीम में 9% सालाना दर और तिमाही कंपाउंडिंग है। यह सिर्फ़ एक उदाहरण दर है, असली दर अलग हो सकती है।

  1. P = 2,50,000, r = 0.09, n = 4, t = 12।
  2. हर तिमाही की दर = 0.09 ÷ 4 = 0.0225।
  3. कुल तिमाहियाँ = 4 × 12 = 48।
  4. A = 2,50,000 × (1.0225)^48 ≈ ₹7,27,410।
  5. कमाया ब्याज = 7,27,410 − 2,50,000 ≈ ₹4,77,410।

अब साधारण ब्याज से तुलना करें: 2,50,000 × 9% × 12 = ₹2,70,000। यानी चक्रवृद्धि में लगभग ₹2,07,410 ज़्यादा बना, जो ब्याज पर ब्याज का हिस्सा है।

आवृत्ति बदलकर देखें, उसी दर और अवधि पर:

  • सालाना: लगभग ₹7,03,166
  • छमाही: लगभग ₹7,19,003
  • तिमाही: लगभग ₹7,27,410
  • मासिक: लगभग ₹7,33,209
  • रोज़ाना: लगभग ₹7,36,072

देखिए, सालाना से रोज़ाना तक का अंतर लगभग ₹33,000 है, जबकि दर बदलने का असर कहीं बड़ा है। यहीं 2% वाली तुलना काम आती है: उसी निवेश पर 7% पर लगभग ₹5,74,900 और 11% पर लगभग ₹9,19,322 बनते हैं। दर में दो अंक का फ़र्क़ आवृत्ति के फ़र्क़ से बहुत भारी पड़ता है।

साल-दर-साल टेबल में पहले साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹2,73,271 और छठे साल के अंत में लगभग ₹4,26,442 दिखेगा। यानी आधे समय में रकम दोगुनी तो नहीं हुई, पर आधे से ज़्यादा ब्याज आख़िरी छह सालों में बना। यही कंपाउंडिंग का असली चेहरा है।

उदाहरण का सबक: मीरा अगर चाहे तो 12 साल की जगह 14 साल की अवधि डालकर देख सकती है कि दो साल और रुकने से कितना फ़र्क़ पड़ता है। समय अक्सर दर से ज़्यादा ताक़तवर साबित होता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह नियमित बचत (हर महीने की SIP) नहीं जोड़ता। केवल एक बार की रकम पर काम करता है।
  • पूरी अवधि में दर स्थिर मानी गई है। असल में FD दर, बचत खाते की दर और बाज़ार रिटर्न बदलते रहते हैं।
  • कर, TDS, एक्ज़िट लोड, बैंक शुल्क या पेनल्टी शामिल नहीं हैं।
  • रोज़ाना कंपाउंडिंग में साल को 365 दिन माना गया है, लीप वर्ष अलग से नहीं गिना जाता।
  • बैंक कभी-कभी दिनों के हिसाब से ब्याज निकालते हैं या अलग तरीक़ा अपनाते हैं, इसलिए रसीद पर रकम थोड़ी अलग हो सकती है।
  • नतीजे अनुमान हैं, गारंटी नहीं। अंतिम फ़ैसले से पहले संबंधित संस्था के नियम और दरें ख़ुद जाँचें।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Lumpsum Calculator: उसी एकमुश्त निवेश को "कितने गुना" के रूप में देखने के लिए।
  • FD Calculator: बैंक FD के लिए अलग-अलग भुगतान विकल्पों के साथ।
  • SIP Calculator: हर महीने की नियमित बचत के लिए।
  • CAGR Calculator: बीते निवेश की औसत सालाना बढ़त निकालने के लिए।
  • Inflation Calculator: भविष्य की रकम की असली क़ीमत समझने के लिए।
  • Double Your Money Calculator: रकम दोगुनी होने का समय देखने के लिए।

यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है, निवेश, कर या क़ानूनी सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले अपनी स्थिति के हिसाब से प्रमाणित सलाहकार या संबंधित संस्था से पुष्टि कर लें।

6 काम की बातें याद रखें

1
पहले अवधि पर ध्यान दें

दर में एक-दो प्रतिशत के फ़र्क से ज़्यादा असर अक्सर 5-10 साल और रुकने से होता है।

2
आवृत्ति बदलकर देखें

अपनी योजना की ब्याज जुड़ने की आवृत्ति (तिमाही, सालाना) पता करें और वही चुनें। तब हिसाब असली के क़रीब रहेगा।

3
साधारण और चक्रवृद्धि की तुलना करें

दोनों में फ़र्क समझने के लिए Simple Interest Calculator भी चलाएँ। लंबी अवधि में अंतर साफ़ दिखता है।

4
टैक्स के बाद की रकम सोचें

कमाए ब्याज पर अक्सर कर लगता है। वास्तविक हाथ में आने वाली रकम कम होगी।

5
महँगाई घटाकर पढ़ें

अगर दर 7% और महँगाई 5% हो, तो असली बढ़त लगभग 2% है। Real Return Calculator देखें।

6
कर्ज़ पर भी यही लागू होता है

क्रेडिट कार्ड जैसे ऊँची दर वाले कर्ज़ में भी ब्याज पर ब्याज चढ़ता है। इसलिए बकाया टालना महँगा पड़ता है।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इसमें ब्याज सिर्फ़ मूलधन पर नहीं, बल्कि पहले जुड़ चुके ब्याज पर भी लगता है। इसलिए समय बढ़ने के साथ रकम की बढ़ने की रफ़्तार भी बढ़ती जाती है।

साधारण ब्याज हर साल सिर्फ़ मूल रकम पर लगता है, इसलिए हर साल बराबर ब्याज जुड़ता है। चक्रवृद्धि में ब्याज पर भी ब्याज लगता है, इसलिए लंबी अवधि में फ़र्क काफ़ी बड़ा हो जाता है।

कंपाउंडिंग जितनी बार होती है, उतनी जल्दी ब्याज पर ब्याज लगना शुरू होता है। इसलिए उसी दर पर मासिक कंपाउंडिंग का नतीजा सालाना कंपाउंडिंग से थोड़ा ज़्यादा आता है। असली दर और कंपाउंडिंग की आवृत्ति अपनी स्कीम के दस्तावेज़ में जाँचें।

नहीं, यह आपकी डाली हुई दर मानकर गणित का अनुमान देता है। बाज़ार से जुड़े निवेश में असली रिटर्न हर साल बदलता है और गारंटी नहीं होता। टैक्स और खर्च भी इसमें शामिल नहीं हैं।

क्योंकि आवृत्ति बढ़ाने पर फ़ायदा घटता जाता है। सालाना से मासिक में जितना फ़र्क पड़ता है, मासिक से रोज़ाना में उससे बहुत कम पड़ता है।

अपनी योजना या बैंक के नियम देखें। बहुत-सी FD में तिमाही कंपाउंडिंग चलती है, पर यह हर जगह अलग हो सकता है।

एक मोटा अंदाज़ा कि रकम कितने साल में दोगुनी होगी: 72 को सालाना दर से भाग दें। 8% पर लगभग 9 साल।

यह एकमुश्त रकम का हिसाब है। हर महीने की जमा के लिए SIP Calculator या Recurring Deposit Calculator बेहतर हैं।

नहीं। यह मानता है कि रकम पूरी अवधि तक छुई नहीं गई। बीच में निकासी का असर अलग से जोड़ना होगा।

नहीं। कमाया ब्याज कर-योग्य हो सकता है, पर यहाँ कोई कर नहीं घटाया गया।

नहीं। नतीजा सीधी रकम में है, ख़रीदने की ताक़त के हिसाब से नहीं।

यहाँ पूरी अवधि के लिए एक ही दर मानी जाती है। असली योजनाओं में दर बदल सकती है।

मोटी समझ के लिए हाँ, पर लोन में EMI कटती रहती है, इसलिए असली लोन के लिए EMI Calculator सही है।

नहीं। यह सिर्फ़ आपकी डाली हुई दर पर आधारित गणित है। असली रिटर्न दर के बदलने पर बदलेगा।

हाँ, गणित वही रहता है। न्यूनतम सीमा सिर्फ़ पेज की है।

रोज़ाना कंपाउंडिंग के लिए साल को 365 बराबर हिस्सों में बाँटा गया है। लीप साल जैसे बारीक फ़र्क इसमें नहीं गिने।

पेज की साल-दर-साल तालिका और चार्ट में, जहाँ हर साल के अंत की रकम और ब्याज दिखता है।

दर घटने पर बाद के सालों की बढ़त धीमी होगी। इसे परखने के लिए कम दर डालकर अलग से जाँचें।

आपके काम के और कैलकुलेटर

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