Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
अपने मासिक खर्च डालें
₹
₹
₹
₹
₹
आपका Emergency Fund लक्ष्य
कुल मासिक खर्च
₹35,000
3 महीने
₹1.05 L
6 महीने
₹2.1 L
12 महीने
₹4.2 L
आपका लक्ष्य: ₹2.1 L
6 महीने के कवरेज पर आधारित
Emergency fund कहाँ रखें?
ज़्यादा ब्याज वाला बचत खाताLiquid म्यूचुअल फंडFD (Sweep-in)
Emergency fund एक आर्थिक सुरक्षा कवच है जो अनचाही परिस्थितियों में आपकी रक्षा करता है:
नौकरी जाना — 3-6 महीने का खर्च कवर हो जाता है
मेडिकल इमरजेंसी — बिना लोन के इलाज हो सकता है
घर की मरम्मत — अचानक आए खर्चे संभाले जा सकते हैं
मन की शांति — निवेश के फ़ैसले बेहतर और शांत मन से होते हैं
काम की बात: Emergency fund को निवेश से अलग रखें। Liquid म्यूचुअल फंड या बचत खाता अच्छा विकल्प है — तुरंत पैसा मिल जाता है।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Monthly expenses = rent + food + utilities + transport + other expenses you enter. Emergency fund goal = monthly expenses × the number of months you pick (6 by default); 3, 6 and 12 months of cover are shown side by side. Remaining = goal − savings you already hold, and months to fill = remaining ÷ your monthly saving, rounded up (no interest is assumed on the savings).
मासिक ख़र्च = आपके डाले किराया + खाना + बिजली-पानी आदि + आना-जाना + बाक़ी ख़र्च का जोड़। Emergency fund का लक्ष्य = मासिक ख़र्च × चुने गए महीने (शुरू में 6); 3, 6 और 12 महीने का कवर साथ-साथ दिखता है। बाक़ी रकम = लक्ष्य − आपकी मौजूदा बचत, और भरने में लगने वाले महीने = बाक़ी रकम ÷ आपकी मासिक बचत (ऊपर गोल); बचत पर कोई ब्याज नहीं माना गया है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
आपात निधि का लक्ष्य = मासिक ज़रूरी खर्च × कवर के महीने। यहाँ पाँच खर्च जोड़े जाते हैं: किराया/आवास, खाना, बिल, आना-जाना और अन्य।
पेज 3, 6 और 12 महीने का कवर एक साथ दिखाता है, और चुने हुए महीनों के हिसाब से आपका लक्ष्य बताता है।
मौजूदा बचत और हर महीने की बचत डालने पर पता चलता है कि लक्ष्य कितने साल-महीने में पूरा होगा। इस गणना में बचत पर कोई ब्याज नहीं जोड़ा गया है।
इसमें सिर्फ़ ज़रूरी खर्च गिनें। घूमना, शॉपिंग और शौक़ के खर्च लक्ष्य को बेवजह बड़ा कर देते हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
रोहित: अकेला कमाने वाला
रोहित किराये के कमरे में अकेला रहता है। (खर्च उदाहरण के हैं)
किराया / आवास
₹9,000
खाना और राशन
₹6,000
बिजली-पानी और बिल
₹2,500
आना-जाना
₹2,500
अन्य
₹4,000
कुल मासिक खर्च
₹24,000
3 / 6 / 12 महीने का कवर
₹72,000 / ₹1,44,000 / ₹2,88,000
अकेले व्यक्ति के लिए 6 महीने का कवर लगभग डेढ़ लाख बना। नौकरी की स्थिरता कम हो तो 9 या 12 महीने चुनने पर विचार करें।
सुनीता और परिवार: ज़िम्मेदारियाँ ज़्यादा
सुनीता के परिवार में बच्चे और माता-पिता हैं, घर की EMI भी चलती है। EMI को आवास वाले खाने में जोड़ा है।
किराया / आवास (EMI सहित)
₹18,000
खाना और राशन
₹14,000
बिजली-पानी और बिल
₹5,000
आना-जाना
₹6,000
अन्य (स्कूल फ़ीस, दवा)
₹12,000
कुल मासिक खर्च
₹55,000
6 महीने का कवर
₹3,30,000
12 महीने का कवर
₹6,60,000
आश्रित लोग हों तो लक्ष्य जल्दी बड़ा हो जाता है। ऐसे में पहले 3 महीने का पड़ाव (₹1,65,000) तय करके चलना आसान रहता है।
अंजलि: योजना पर अमल
अंजलि का मासिक खर्च ₹35,000 है (किराया 12,000, खाना 9,000, बिल 4,000, आना-जाना 3,000, अन्य 7,000)। 6 महीने का कवर चुना है।
लक्ष्य
₹2,10,000
अभी मौजूद
₹60,000
बाक़ी रकम
₹1,50,000
मासिक बचत
₹5,000
पूरा होने में
30 महीने (2 साल 6 महीने)
हर महीने ₹5,000 अलग रखने से ढाई साल में लक्ष्य पूरा होता है। बचत बढ़ाकर ₹10,000 करने पर यही काम 15 महीने में होता है।
मासिक खर्च के हिसाब से कवर (₹)
मासिक खर्च के हिसाब से कवर (₹)
मासिक खर्च
3 महीने
6 महीने
12 महीने
₹20,000
₹60,000
₹1,20,000
₹2,40,000
₹30,000
₹90,000
₹1,80,000
₹3,60,000
₹40,000
₹1,20,000
₹2,40,000
₹4,80,000
₹50,000
₹1,50,000
₹3,00,000
₹6,00,000
₹75,000
₹2,25,000
₹4,50,000
₹9,00,000
₹1,00,000
₹3,00,000
₹6,00,000
₹12,00,000
गुणा सीधा है: खर्च × महीने। EMI और बीमा की किस्त जैसे अनिवार्य खर्च भी मासिक खर्च में गिनें।
बाक़ी ₹1,50,000 भरने में कितने महीने (बचत पर ब्याज नहीं गिना)
बाक़ी ₹1,50,000 भरने में कितने महीने (बचत पर ब्याज नहीं गिना)
मासिक बचत
महीने
लगभग समय
₹2,500
60
5 साल
₹5,000
30
2 साल 6 महीने
₹7,500
20
1 साल 8 महीने
₹10,000
15
1 साल 3 महीने
₹15,000
10
10 महीने
यहाँ महीने = बाक़ी रकम ÷ मासिक बचत, ऊपर गोल किया हुआ।
त्वरित संदर्भ: आपात निधि का हिसाब
त्वरित संदर्भ: आपात निधि का हिसाब
मासिक खर्च
किराया + खाना + बिल + आना-जाना + अन्य
लक्ष्य
मासिक खर्च × चुने हुए महीने
बाक़ी रकम
लक्ष्य − अभी मौजूद आपात निधि
पूरा होने में लगे महीने
बाक़ी रकम ÷ मासिक बचत, ऊपर गोल
कवर के विकल्प
3, 6, 9 या 12 महीने (पेज पर ड्रॉप-डाउन)
क्या गिनें
सिर्फ़ ज़रूरी और अनिवार्य खर्च
क्या न गिनें
ऐच्छिक खर्च जो संकट में रोके जा सकते हैं
इस पेज में क्या नहीं
बचत का ब्याज, महँगाई, और बड़े इलाज का अलग इंतज़ाम।
Emergency Fund Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
ज़िंदगी में कुछ खर्चे बिना बताए आते हैं। नौकरी अचानक छूट जाए, घर के किसी सदस्य को अस्पताल में भर्ती करना पड़े, दुकान कुछ हफ़्ते बंद रहे या गाड़ी और घर में बड़ी मरम्मत निकल आए, तो ऐसे समय में काम आने वाला अलग रखा हुआ पैसा ही Emergency Fund कहलाता है। यह calculator एक सीधा सवाल हल करता है: "मेरे परिवार के रोज़मर्रा के खर्च को देखते हुए मुझे इमरजेंसी के लिए कुल कितना पैसा अलग रखना चाहिए, और वह रकम कितने समय में जमा हो जाएगी?"
आप अपने पाँच तरह के मासिक खर्च डालते हैं: किराया या आवास, खाना और राशन, बिजली-पानी और बिल, आना-जाना, और बाकी सब खर्च। calculator इन्हें जोड़कर कुल मासिक खर्च निकालता है, फिर उसे आपके चुने हुए महीनों से गुणा करके लक्ष्य बताता है। साथ ही 3, 6 और 12 महीनों का कवर एक साथ दिखाता है, ताकि आप तुलना कर सकें। नीचे "बचत योजना" वाले कार्ड में आप बताते हैं कि अभी कितना पैसा अलग रखा है और हर महीने कितना जोड़ सकते हैं, और पेज बताता है कि लक्ष्य तक पहुँचने में कितने साल-महीने लगेंगे।
ध्यान दें: यह calculator आपकी कमाई नहीं, आपका खर्च देखता है। इमरजेंसी में आमदनी रुक सकती है, लेकिन किराया, राशन और बिल नहीं रुकते। इसलिए लक्ष्य खर्च के आधार पर बनता है।
किसके काम का है
पहली नौकरी वाले युवा: जिन्होंने अभी बचत शुरू ही की है और जानना चाहते हैं कि SIP शुरू करने से पहले कितनी सुरक्षा जमा कर लें।
फ्रीलांसर और छोटे दुकानदार: जिनकी आमदनी हर महीने बराबर नहीं आती। उनके लिए ज़्यादा महीनों का कवर समझदारी की बात हो सकती है।
एक कमाने वाले परिवार: जहाँ एक ही व्यक्ति की आमदनी पर पूरा घर चलता है।
EMI वाले लोग: जिनके खर्च में लोन की किस्त भी है। ध्यान रखें कि इस calculator में EMI के लिए अलग खाना नहीं है, इसलिए किस्त को "अन्य मासिक खर्च" में जोड़ना ठीक रहेगा।
रिटायरमेंट के करीब पहुँचे लोग: जो चाहते हैं कि बाज़ार गिरने पर भी निवेश बेचने की नौबत न आए।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज के बाएँ कार्ड में पाँच खर्च-बॉक्स और एक drop-down है। हर बॉक्स के आगे ₹ का निशान है और सबकी न्यूनतम सीमा 0 है। पाँचों बॉक्स के साथ स्लाइडर भी हैं, जिनकी अधिकतम सीमा अलग-अलग है।
मासिक किराया / आवास (₹): घर का किराया, या अपना घर है तो उसकी EMI और मेंटेनेंस। स्लाइडर की सीमा ₹2 लाख है।
मासिक खाना और राशन (₹): सब्ज़ी, दूध, किराना, बाहर खाना। सीमा ₹1 लाख।
मासिक बिजली-पानी और बिल (₹): बिजली, पानी, गैस, मोबाइल, इंटरनेट, स्कूल या ट्यूशन की नियमित फीस भी यहाँ जोड़ सकते हैं। सीमा ₹50,000।
मासिक आना-जाना (₹): बस-मेट्रो का किराया, पेट्रोल, ऑटो। सीमा ₹50,000।
अन्य मासिक खर्च (₹): दवाइयाँ, बीमा की किस्त, लोन की EMI, रिश्तेदारों को भेजी जाने वाली रकम और बाकी नियमित खर्च। सीमा ₹1 लाख।
कवरेज के अनुशंसित महीने: चार विकल्प हैं: 3 महीने (न्यूनतम), 6 महीने (अनुशंसित), 9 महीने (सतर्क) और 12 महीने (बहुत सुरक्षित)। शुरू में 6 महीने चुना रहता है।
नीचे "बचत योजना" कार्ड में दो और बॉक्स हैं:
कितना emergency fund अभी है? (₹): आपके पास आज इमरजेंसी के नाम पर अलग रखी रकम। इसमें शेयर, सोना या ऐसा पैसा न गिनें जो आप आसानी से नहीं निकाल सकते।
मासिक बचत क्षमता (₹): हर महीने आप सच में कितना इस फंड में डाल सकते हैं।
खर्च का सही अंदाज़ा पाने का आसान तरीका है पिछले तीन महीनों का बैंक स्टेटमेंट, UPI ऐप की हिस्ट्री और क्रेडिट कार्ड बिल देखना। अनुमान से लिखा खर्च अक्सर असली खर्च से कम निकलता है।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
पेज के दाहिने कार्ड में नतीजे इस क्रम में आते हैं:
कुल मासिक खर्च: पाँचों बॉक्स का जोड़। बिना कुछ डाले शुरू में ₹35,000 का उदाहरण दिखता है।
3, 6 और 12 महीने के तीन कॉलम: हर कॉलम में कुल मासिक खर्च को 3, 6 या 12 से गुणा करके रकम दिखती है। इन्हें लाख (L) में छोटा करके दिखाया जाता है, जैसे ₹2.1 L।
"आपका लक्ष्य" वाला हरा बॉक्स: आपके चुने हुए महीनों के हिसाब से अंतिम लक्ष्य, और नीचे लिखा कि यह कितने महीनों के कवर पर आधारित है।
पैसा कहाँ रखें: ज़्यादा ब्याज वाला बचत खाता, Liquid म्यूचुअल फंड और Sweep-in FD जैसे विकल्पों के बैज। ये सिर्फ़ जानकारी के लिए सुझाव हैं, किसी एक को चुनने की सलाह नहीं।
खर्च का bar chart: "आपका मासिक पैसा कहाँ जाता है" शीर्षक से, जिसमें पाँचों खर्च अलग-अलग रंग में दिखते हैं। इससे समझ आता है कि कौन-सा खर्च सबसे बड़ा हिस्सा है।
बचत योजना का वाक्य: अगर लक्ष्य पूरा हो चुका है तो बधाई का संदेश आता है। नहीं हुआ, तो "बाकी रकम" और "इतने साल-महीने में पूरा हो जाएगा" लिखा आता है। मासिक बचत 0 हो तो सिर्फ़ बाकी रकम दिखती है और बचत डालने को कहा जाता है।
लिंक कॉपी और WhatsApp शेयर: अपना लक्ष्य किसी के साथ बाँटने के बटन।
अच्छा संकेत यह है कि "बाकी रकम" हर महीने घट रही हो और समय आपकी सहनशक्ति के भीतर हो। अगर समय बहुत लंबा दिखे, तो या तो मासिक बचत बढ़ाएँ, या शुरुआत 3 महीने के कवर से करें और बाद में बढ़ाएँ।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
अलग-अलग महीनों से तुलना करें
drop-down बदलकर 3, 6, 9 और 12 महीने देखें और हर बार "कितने साल-महीने लगेंगे" पढ़ें। अगर 12 महीने का लक्ष्य पाँच साल दूर दिखे, तो पहले 3 महीने पूरे करने को मील का पत्थर बना लें।
अपनी स्थिति के हिसाब से महीने चुनें
आमतौर पर जिनकी नौकरी पक्की है और घर में दो कमाने वाले हैं, वे कम महीनों से भी काम चला सकते हैं। जिनकी आमदनी हर महीने बदलती है, जिन पर आश्रित ज़्यादा हैं, या जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है, उनके लिए ज़्यादा महीनों का कवर तसल्ली दे सकता है। यह कोई नियम नहीं, सिर्फ़ सोचने का एक तरीका है।
"अगर खर्च घटे तो" वाला प्रयोग
किसी एक बॉक्स की रकम घटाकर देखें, जैसे बाहर खाने का खर्च कम करने पर "खाना और राशन" में कमी। bar chart तुरंत बदल जाता है और दिखता है कि बड़ा हिस्सा कहाँ जा रहा है।
साझा करने का फ़ायदा
पति-पत्नी साथ बैठकर आँकड़े डालें और WhatsApp बटन से एक-दूसरे को लक्ष्य भेज दें। साझा लक्ष्य पर बात करना अकेले सोचने से आसान होता है।
नियमित अंतराल पर दोबारा जाँचें
साल में एक बार या किराया बढ़ने, बच्चे के स्कूल में दाखिले, या नौकरी बदलने पर खर्च फिर से डालें। पुराना लक्ष्य नई ज़िंदगी पर फिट नहीं बैठता।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
सिर्फ़ आमदनी देखकर लक्ष्य बनाना: लक्ष्य का आधार खर्च है। जो बाद में कम हो सकता है, उसे भी इसमें न गिनें, जब तक वह पक्का न हो।
निवेश को ही इमरजेंसी फंड मान लेना: शेयर या equity फंड जिस दिन गिरे हुए हों, उसी दिन आपको पैसा चाहिए पड़ सकता है। इमरजेंसी फंड का मकसद कमाई नहीं, सुरक्षा है।
EMI और बीमा की किस्त भूल जाना: ये नियमित और टाले न जा सकने वाले खर्च हैं। इन्हें "अन्य" में जोड़ना न भूलें।
फंड को खर्च का दूसरा खाता बना लेना: छुट्टी, फोन या शादी की खरीदारी इमरजेंसी नहीं है। इसके लिए अलग बजट रखें।
सब कुछ एक साथ पूरा करने का दबाव: लक्ष्य बड़ा लगे तो घबराएँ नहीं। थोड़ा-थोड़ा जमा होना भी तब शुरू होता है जब आप शुरुआत करते हैं।
महँगाई भूल जाना: आज का ₹26,000 का खर्च कुछ सालों में ज़्यादा हो सकता है। इसलिए लक्ष्य की समय-समय पर समीक्षा करें।
सब पैसा एक ही जगह रखना: कुछ हिस्सा तुरंत निकलने वाली जगह (बचत खाते) में और बाकी थोड़ी कम तरलता वाले साधन में रखने के बारे में सोचा जा सकता है। यह जानकारी के लिए है, सलाह नहीं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
गणित सीधा है और इसमें ब्याज नहीं जोड़ा जाता:
कुल मासिक खर्च = किराया + खाना + बिजली-पानी + आना-जाना + अन्य।
लक्ष्य = कुल मासिक खर्च × चुने गए महीने।
बाकी रकम = लक्ष्य − अभी की बचत (यह शून्य से नीचे नहीं जाती)।
लगने वाले महीने = बाकी रकम ÷ मासिक बचत, जिसे ऊपर की ओर गोल किया जाता है।
कुल महीनों को साल और महीनों में तोड़कर लिखा जाता है, जैसे 15 महीने = 1 साल 3 महीने।
मान्यताएँ ध्यान में रखें: बचत पर कोई ब्याज या महँगाई नहीं जोड़ी गई है, और आपका खर्च भविष्य में वही रहेगा जो आज डाला है। असल में दोनों बातें बदलती हैं, इसलिए इसे एक शुरुआती अनुमान मानें।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए पुणे में रहने वाला एक फ्रीलांस ग्राफ़िक डिज़ाइनर, ऋषभ, अपने खर्च इस तरह डालता है:
किराया: ₹12,000
खाना और राशन: ₹6,500
बिजली-पानी और बिल: ₹2,200
आना-जाना: ₹1,800
अन्य: ₹3,500
जोड़ हुआ ₹26,000 प्रति माह। अब तीनों कवर:
3 महीने: 26,000 × 3 = ₹78,000
6 महीने: 26,000 × 6 = ₹1,56,000
12 महीने: 26,000 × 12 = ₹3,12,000
ऋषभ की आमदनी अनियमित है, इसलिए वह 9 महीने चुनता है: 26,000 × 9 = ₹2,34,000। मगर समझने की सरलता के लिए 6 महीने वाले लक्ष्य ₹1,56,000 पर आगे का हिसाब देखते हैं। उसके पास अभी ₹40,000 अलग रखे हैं।
बाकी रकम = 1,56,000 − 40,000 = ₹1,16,000
₹8,000 प्रति माह बचाए तो 1,16,000 ÷ 8,000 = 14.5, यानी ऊपर गोल करके 15 महीने, जो 1 साल 3 महीने हुए।
₹5,000 प्रति माह पर 1,16,000 ÷ 5,000 = 23.2, यानी 24 महीने (2 साल)।
₹12,000 प्रति माह पर 1,16,000 ÷ 12,000 = 9.67, यानी 10 महीने।
इस उदाहरण से दिखता है कि बचत की रकम दोगुनी से थोड़ी ज़्यादा करने से समय आधे से भी कम हो गया। यह सिर्फ़ एक काल्पनिक उदाहरण है; आपके आँकड़े अलग होंगे और असली बचत पर थोड़ा ब्याज भी मिल सकता है, जो यहाँ नहीं जोड़ा गया।
उदाहरण: अगर ऋषभ खर्च में से ₹2,000 कम कर पाए, तो मासिक खर्च ₹24,000 होगा और 6 महीने का लक्ष्य ₹1,44,000। यानी खर्च घटाने से लक्ष्य भी छोटा होता है और बचत की गुंजाइश भी बढ़ती है। दोहरा फ़ायदा।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह आपके पैसे पर मिलने वाला ब्याज या रिटर्न नहीं जोड़ता, इसलिए असली समय कुछ कम भी हो सकता है।
यह महँगाई नहीं मानता। आने वाले सालों में खर्च बढ़ेगा तो लक्ष्य भी बढ़ेगा।
यह इलाज, बीमा या टैक्स की कोई जानकारी नहीं देता। स्वास्थ्य और जीवन बीमा इमरजेंसी फंड का विकल्प नहीं, पूरक होते हैं।
यह आपकी आमदनी में उतार-चढ़ाव, कर्ज़ के बोझ या परिवार में बदलाव का हिसाब नहीं रखता।
"कितने महीने सही हैं" का कोई एक सही जवाब नहीं है। 3, 6, 9, 12 के विकल्प सिर्फ़ तुलना के लिए हैं।
बचत खाते, Liquid फंड या FD की शर्तें, ब्याज दरें और निकासी के नियम बदलते रहते हैं। निवेश या जमा करने से पहले बैंक या फंड हाउस की आधिकारिक जानकारी देखें।
यहाँ सब नतीजे अनुमान हैं और अलग-अलग लोगों के लिए अलग निकलेंगे।
इसके साथ और कौन-से calculator देखें
Budget Calculator: मासिक आमदनी और खर्च का पूरा ब्योरा समझने के लिए, ताकि पता चले कि बचत की गुंजाइश कितनी है।
Emergency fund बनाना कोई दौड़ नहीं है। पहले 3 महीने का खर्च अलग रखें, फिर धीरे-धीरे लक्ष्य बढ़ाएँ। यह calculator आपको सिर्फ़ दिशा दिखाता है; रकम आपकी असल ज़रूरत, आपकी नौकरी की स्थिति और परिवार की ज़िम्मेदारियों के हिसाब से तय होनी चाहिए।
यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, यह निवेश, कर या किसी भी तरह की व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं है; निर्णय लेने से पहले किसी योग्य सलाहकार से बात करें।
6 काम की बातें याद रखें
1
लक्ष्य को पड़ावों में तोड़ें
पहले एक महीने, फिर तीन, फिर छह महीने का कवर बनाएँ। हर पड़ाव पर मन को राहत मिलती है।
2
निधि अलग खाते में रखें
ऐसी जगह जहाँ से पैसा जल्दी निकल सके, पर रोज़ के खर्च में घुल न जाए।
3
EMI और बीमा किस्त जोड़ना न भूलें
आमदनी रुकने पर भी ये बंद नहीं होतीं। इन्हें मासिक खर्च में ज़रूर गिनें।
4
साल में एक बार लक्ष्य दोबारा देखें
किराया या बच्चों की फ़ीस बढ़े तो लक्ष्य भी बढ़ना चाहिए। आँकड़े बदलकर फिर से जाँचें।
5
निधि इस्तेमाल हो तो दोबारा भरें
असली संकट में पैसा निकालना ठीक है। बाद में पहले की तरह मासिक बचत से उसे फिर पूरा करें।
6
स्वास्थ्य बीमा को साथ रखें
बड़े इलाज का खर्च आपात निधि अकेले नहीं उठा पाती। बीमा और निधि एक-दूसरे के पूरक हैं।
आम तौर पर 3 से 6 महीने के ज़रूरी खर्च का सुझाव दिया जाता है। अगर आमदनी अनियमित है, परिवार में कमाने वाले कम हैं या सेहत से जुड़ा जोखिम ज़्यादा है, तो ज़्यादा महीने का फंड रखना बेहतर माना जाता है।
किराया या EMI, राशन, बिजली-पानी, बच्चों की फ़ीस, बीमा की किस्तें और दवाइयाँ जैसे वे खर्च जो नौकरी या आमदनी रुकने पर भी करने ही पड़ेंगे। घूमना-फिरना जैसे वैकल्पिक खर्च शामिल न करें।
ऐसी जगह जहाँ से ज़रूरत पड़ने पर पैसा जल्दी निकल सके और मूल रकम पर जोखिम कम हो, जैसे बचत खाता या लिक्विड विकल्प। कौन-सा विकल्प आपके लिए ठीक है, यह अपनी स्थिति देखकर तय करें।
सिर्फ़ अचानक आई ज़रूरी स्थिति में, जैसे नौकरी जाना, बड़ा इलाज या ज़रूरी मरम्मत। त्योहार की ख़रीदारी या शौक के लिए इसे न छुएँ। इस्तेमाल करने के बाद उसे दोबारा भरने की योजना बनाएँ।
आवास वाले खाने में जोड़ दें, या अन्य में। मक़सद सिर्फ़ यह है कि कुल मासिक खर्च में वह ज़रूर गिनी जाए।
आश्रित लोग हों या आमदनी अनियमित हो तो आम तौर पर ज़्यादा महीने का कवर बेहतर माना जाता है। 9 या 12 महीने का विकल्प इसीलिए दिया गया है।
अपने सबसे कमज़ोर महीनों को ध्यान में रखकर ज़्यादा महीने का कवर चुनें, और ज़रूरी खर्च ही गिनें।
आमदनी स्थिर हो तो कम महीनों से शुरू कर सकते हैं, पर बीमारी और अचानक खर्च का ख़तरा फिर भी रहता है। यह चुनाव आपका अपना है।
नहीं। समय = बाक़ी रकम ÷ मासिक बचत है। असल में ब्याज थोड़ा मदद कर सकता है, पर यहाँ उसे जानबूझकर नहीं गिना गया।
नहीं। आज के खर्च के हिसाब से लक्ष्य बना है। कुछ साल बाद खर्च बढ़ेंगे, इसलिए साल में एक बार लक्ष्य अपडेट करें।
नहीं। यह रोज़मर्रा के खर्च के महीने गिनता है। बड़े अस्पताल के खर्च के लिए स्वास्थ्य बीमा अलग से देखना चाहिए।
तब पेज सिर्फ़ बाक़ी रकम बताता है, पूरा होने का समय नहीं निकाल सकता। समय देखने के लिए कोई मासिक रकम डालें।
आम सलाह यह है कि थोड़ी न्यूनतम निधि पहले बनाएँ, ताकि संकट में नया महँगा कर्ज़ न लेना पड़े। फिर कर्ज़ और निधि दोनों साथ चलाएँ।
आम तौर पर नहीं, क्योंकि ज़रूरत के वक़्त उनका भाव गिरा हो सकता है। निधि ऐसी जगह हो जहाँ से रकम घटे बिना और जल्दी मिल सके।
मोटे तौर पर हाँ, घर का कुल खर्च जोड़कर, पर एक की आमदनी रुकने पर घर कैसे चलेगा, यह सोचकर महीने चुनें।
यह आपकी सुविधा पर है। असली ज़रूरत यह है कि पैसा सुरक्षित हो और ज़रूरत पर तुरंत मिल सके। ब्याज दर बाद की चीज़ है।
ज़रूरी नहीं। कई लोग आमदनी का एक हिस्सा निधि और एक हिस्सा SIP में बाँट लेते हैं। प्राथमिकता और बजट देखकर अनुपात तय करें।
नहीं। यह सिर्फ़ शैक्षणिक गणना है। आपकी स्थिति के हिसाब से महीने कम-ज़्यादा हो सकते हैं।