Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
Home loan eligibility कैसे निकलती है?
बैंक आम तौर पर दो चीज़ें देखते हैं। पहली, आपकी आय का कितना हिस्सा EMI में जा सकता है (इसे FOIR कहते हैं, अक्सर 40–50%); उसमें से पहले से चल रही EMI घटाकर जो रकम बचती है, उसी से नए लोन की EMI तय होती है और उस EMI से लोन की रकम निकलती है। दूसरी, लोन प्रॉपर्टी की क़ीमत का एक सीमित हिस्सा (LTV) ही हो सकता है — बाक़ी down payment आपको देना होता है। दोनों में जो रकम कम हो, वही अंदाज़न लोन बनता है। उम्र भी मायने रखती है: लोन की अवधि आम तौर पर तय अधिकतम उम्र तक ही मिलती है। यह पूरा हिसाब अनुमान है; हर बैंक के अपने नियम, क्रेडिट स्कोर और दस्तावेज़ी जाँच होती है।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Affordable EMI = (your + co-applicant net monthly income) x FOIR % - existing EMIs. The income-based loan is the present value of that EMI over the tenure at the monthly interest rate. The property-based loan is the property value x the LTV % for its price band. The indicative loan is the smaller of the two, and the down payment is the property value minus that loan. The tenure is cut short so that age + tenure does not go past the maximum age at maturity.
सक्षम EMI = (आपकी + सह-आवेदक की मासिक नेट आय) x FOIR % - चल रही EMI। आय के आधार पर लोन उस EMI का वर्तमान मूल्य है (अवधि और मासिक ब्याज दर पर)। प्रॉपर्टी के आधार पर लोन = प्रॉपर्टी की क़ीमत x उसकी क़ीमत-श्रेणी का LTV %। अंदाज़न लोन इन दोनों में कम वाला है, और down payment = प्रॉपर्टी की क़ीमत - वह लोन। अवधि इतनी घटाई जाती है कि उम्र + अवधि परिपक्वता की अधिकतम उम्र से आगे न जाए।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. This is an indicative estimate only. Each lender uses its own FOIR, age limit, income assessment, credit score, property and legal checks, and the LTV limits and other norms change over time, so the actual sanctioned amount can be lower, higher or declined. Please check with your lender and the official RBI website: rbi.org.in. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह सिर्फ़ अंदाज़ा है। हर बैंक/कर्ज़दाता अपना FOIR, उम्र की सीमा, आय का आकलन, क्रेडिट स्कोर और प्रॉपर्टी/क़ानूनी जाँच इस्तेमाल करता है, और LTV सीमाएँ व अन्य नियम समय के साथ बदलते हैं, इसलिए असली मंज़ूर राशि कम, ज़्यादा या मना भी हो सकती है। कृपया अपने कर्ज़दाता से पूछें और भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखें: rbi.org.in। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
पात्रता दो सीमाओं में से कम होती है: आपकी आय जितनी EMI उठा सके (FOIR से), और प्रॉपर्टी की क़ीमत का वह हिस्सा जो लोन बन सकता है (LTV से)।
चल रही EMI नई EMI की गुंजाइश घटाती है और सह-आवेदक की आय उसे बढ़ाती है। उम्र की सीमा से अवधि घट जाए तो लोन भी घटता है।
FOIR, ब्याज दर और LTV के स्तर पेज के संकेतात्मक उदाहरण हैं। हर कर्ज़दाता की नीति अलग होती है।
यह मंज़ूरी नहीं, अंदाज़ा है। वेतन-प्रकार, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता और प्रॉपर्टी की जाँच भी नतीजा बदलते हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
पेज का डिफ़ॉल्ट: ₹1 लाख नेट आय
अमित (30 साल) की मासिक नेट आय ₹1,00,000 है, कोई चल रही EMI नहीं। FOIR 45%, दर उदाहरण के तौर पर 9%, अवधि 20 साल, प्रॉपर्टी ₹70,00,000।
EMI में जा सकने वाली रकम (45%)
₹45,000
आय पर आधारित लोन
लगभग ₹50,01,523
LTV सीमा (80% पेज के हिसाब से)
₹56,00,000
अंदाज़न योग्य लोन
लगभग ₹50,01,523 (आय की सीमा लागू)
चाहिए down payment
लगभग ₹19,98,477 (28.5%)
प्रॉपर्टी ₹70 लाख की है, पर आय केवल लगभग ₹50 लाख का लोन सँभाल पाती है। बाक़ी रकम अपनी बचत से जुटानी होगी।
नेहा: आय ऊँची, पर LTV सीमा रोक देती है
नेहा की मासिक नेट आय ₹2,00,000 है और वह ₹50,00,000 की प्रॉपर्टी लेना चाहती है। बाक़ी मान्यताएँ वही (FOIR 45%, 9%, 20 साल, 30 साल की उम्र)।
आय पर आधारित लोन
लगभग ₹1,00,03,046
LTV सीमा (80%)
₹40,00,000
अंदाज़न योग्य लोन
₹40,00,000 (प्रॉपर्टी की सीमा लागू)
down payment
₹10,00,000 (20%)
लोन की EMI
लगभग ₹35,989 (आय का 18%)
यहाँ आय काफ़ी है, फिर भी प्रॉपर्टी की क़ीमत लोन को ₹40 लाख पर रोक देती है। यानी दूसरी सीमा भी देखनी पड़ती है।
सुरेंद्र: 50 की उम्र में, अवधि घट गई
सुरेंद्र 50 साल के हैं, नेट आय ₹1,00,000, लोन की अधिकतम उम्र 65, और 20 साल का लोन चाहते हैं। बाक़ी वही (45%, 9%, ₹70 लाख की प्रॉपर्टी)।
उपलब्ध अवधि
15 साल (उम्र की सीमा से घटी)
आय पर आधारित लोन
लगभग ₹44,36,703
अंदाज़न योग्य लोन
लगभग ₹44,36,703
down payment
लगभग ₹25,63,297 (36.6%)
अवधि 20 से 15 साल रह जाने से योग्य लोन लगभग ₹5.6 लाख घट गया। उम्र जितनी ज़्यादा, लोन उतना घटता है।
अवधि बदलने पर आय-आधारित लोन (उपलब्ध EMI ₹45,000, दर 9% उदाहरण)
अवधि बदलने पर आय-आधारित लोन (उपलब्ध EMI ₹45,000, दर 9% उदाहरण)
अवधि
आय पर आधारित लोन (≈)
10 साल
₹35,52,376
15 साल
₹44,36,703
20 साल
₹50,01,523
25 साल
₹53,62,273
30 साल
₹55,92,684
अवधि बढ़ाने से लोन बढ़ता है, पर कुल ब्याज भी बढ़ता है। हर अतिरिक्त 5 साल पर बढ़त घटती जाती है।
चल रही EMI का असर (आय ₹1,00,000, FOIR 45%, 9%, 20 साल)
चल रही EMI का असर (आय ₹1,00,000, FOIR 45%, 9%, 20 साल)
चल रही EMI
नई EMI के लिए बचे
आय पर आधारित लोन (≈)
₹0
₹45,000
₹50,01,523
₹5,000
₹40,000
₹44,45,798
₹10,000
₹35,000
₹38,90,073
₹15,000
₹30,000
₹33,34,349
₹20,000
₹25,000
₹27,78,624
हर ₹5,000 की पुरानी EMI लगभग ₹5.5 लाख का नया लोन घटा देती है।
त्वरित संदर्भ: Home Loan पात्रता
त्वरित संदर्भ: Home Loan पात्रता
गिनी गई आय
आपकी नेट आय + सह-आवेदक की नेट आय
EMI की अधिकतम रकम
आय × FOIR %
नई EMI के लिए बची रकम
अधिकतम EMI − चल रही EMI
आय पर आधारित लोन
बची EMI की वर्तमान क़ीमत (EMI, दर, अवधि से)
LTV सीमा
प्रॉपर्टी की क़ीमत × LTV % (पेज की सांकेतिक तालिका)
अंदाज़न योग्य लोन
दोनों में से कम रकम
उपयोग की अवधि
चाही अवधि और (अधिकतम उम्र − आज की उम्र) में से कम
इस पेज में क्या नहीं
क्रेडिट स्कोर, नौकरी का प्रकार, प्रोसेसिंग शुल्क, बीमा, प्रॉपर्टी की जाँच
Home Loan Eligibility Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
घर ख़रीदने की योजना बनाते समय दो सवाल सबसे पहले आते हैं: बैंक मुझे लगभग कितना होम लोन दे सकता है, और बाक़ी पैसा मुझे अपनी जेब से कितना लगाना पड़ेगा? Home Loan Eligibility Calculator इन्हीं दो सवालों का मोटा जवाब देता है। यह आपकी मासिक आय, पहले से चल रही EMI, FOIR, ब्याज दर, लोन की अवधि, उम्र और प्रॉपर्टी की क़ीमत को मिलाकर "अंदाज़न योग्य लोन" और "अंदाज़न down payment" निकालता है।
ध्यान रखें कि यह EMI calculator से अलग है। EMI calculator में आप लोन की रकम डालकर किस्त पाते हैं। यहाँ उल्टा चलता है: आप अपनी आय डालते हैं और calculator पूछता है कि इस आय पर कितनी किस्त सँभाली जा सकती है और उस किस्त से कितना लोन बनता है। फिर यह जाँचता है कि क्या वह लोन प्रॉपर्टी की क़ीमत के तय हिस्से (LTV) से ऊपर तो नहीं जा रहा। दोनों में से जो सीमा कम निकलती है, वही अंदाज़न लोन माना जाता है।
यह असली बैंक की मंज़ूरी नहीं है। हर कर्ज़दाता अपने FOIR, क्रेडिट स्कोर, आय के आकलन, प्रॉपर्टी की क़ानूनी जाँच और नियमों के हिसाब से फ़ैसला करता है। इसलिए इसे घर खोजने से पहले की तैयारी का औज़ार समझिए।
किसके काम का है
पहली बार घर ख़रीदने वाले, जो बजट तय करने से पहले जानना चाहते हैं कि कितनी क़ीमत तक के घर देखना ठीक रहेगा।
पति-पत्नी या दो भाई-बहन, जो सह-आवेदक बनकर लोन लेने की सोच रहे हैं और देखना चाहते हैं कि दूसरी आय जुड़ने से कितना फ़र्क़ पड़ता है।
वे लोग जिनकी कार लोन या पर्सनल लोन की EMI पहले से चल रही है और जो जानना चाहते हैं कि वह होम लोन की पात्रता को कितना घटाती है।
40 के आसपास की उम्र वाले लोग, जिन्हें लोन की अवधि उम्र की सीमा के कारण छोटी मिल सकती है।
वे परिवार जो देख रहे हैं कि down payment के लिए कितनी बचत चाहिए, ताकि घर की तलाश से पहले उतना पैसा जोड़ा जा सके।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर नौ इनपुट हैं, सब स्लाइडर वाले।
आपकी मासिक नेट (in-hand) आय (₹): ₹10,000 से ₹10 लाख, शुरुआती मान ₹1 लाख। यहाँ हाथ में आने वाली आय डालें, कटौतियों से पहले की नहीं।
सह-आवेदक की मासिक नेट आय (₹): ₹0 से ₹10 लाख। अगर कोई सह-आवेदक है तो उसकी आय जोड़ें; नहीं है तो 0 रहने दें।
जो EMI हर महीने पहले से भर रहे हैं (₹): ₹0 से ₹5 लाख। पेज की सलाह है कि कार, पर्सनल और एजुकेशन लोन की EMI, और हर महीने भरे जाने वाले credit card बकाए इसमें जोड़ें।
FOIR (%): आय का कितना हिस्सा सभी EMI में जा सकता है। 30% से 60%, शुरुआती मान 45%। पेज के अनुसार कर्ज़दाता के हिसाब से अक्सर 40–50% होता है; यह आपके बैंक की नीति पर निर्भर है।
Home loan की ब्याज दर (% सालाना): 6% से 14%, कदम 0.05%, शुरुआती मान 9%।
लोन की अवधि जो आप चाहते हैं (साल): 1 से 30, शुरुआती मान 20।
आपकी मौजूदा उम्र: 21 से 70, शुरुआती मान 30।
लोन पूरा होने पर अधिकतम उम्र: 55 से 75, शुरुआती मान 65। पेज के अनुसार यह कर्ज़दाता के हिसाब से आम तौर पर 60–70 होती है।
प्रॉपर्टी की क़ीमत (₹): ₹5 लाख से ₹10 करोड़, शुरुआती मान ₹70 लाख।
ध्यान दें: FOIR, अधिकतम उम्र और LTV की सीमाएँ बैंक-दर-बैंक बदलती हैं। यहाँ जो मान रखे गए हैं, उन्हें सिर्फ़ शुरुआती बिंदु समझें और अपने बैंक से मौजूदा नियम पूछ लें।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर "Home loan पात्रता का अनुमान" दिखता है, और उसके नीचे बताया जाता है कि यह आय पर आधारित सीमा और प्रॉपर्टी पर आधारित सीमा में से कम वाली है। उसके नीचे पंक्तियों की एक पूरी सीढ़ी है, जो गणना को क़दम-दर-क़दम दिखाती है।
गिनी गई मासिक नेट आय (आप + सह-आवेदक)।
EMI में जा सकने वाली अधिकतम रकम, यानी आय × FOIR।
घटाएँ: चल रही EMI।
नए लोन के लिए उपलब्ध EMI, यानी ऊपर के दोनों का अंतर।
इस्तेमाल की गई अवधि। अगर उम्र की सीमा के कारण अवधि घटी हो तो वह लाल रंग में और "उम्र की सीमा से घटाई गई" के साथ दिखती है।
आपकी आय जितना लोन सँभाल सकती है।
प्रॉपर्टी की क़ीमत पर लागू LTV सीमा, और उससे बनने वाला अधिकतम लोन।
अंदाज़न योग्य लोन, यानी दोनों में कम।
कौन-सी सीमा लागू है: "आय (FOIR)" या "प्रॉपर्टी की क़ीमत (LTV)"।
आपको कितना down payment चाहिए, रुपये और प्रतिशत दोनों में।
अंदाज़न लोन पर EMI।
सभी EMI (पुरानी + नई) नेट आय के प्रतिशत में।
इन पंक्तियों के साथ एक संदेश बताता है कि सीमा आय की है या प्रॉपर्टी की। "आय की सीमा" का मतलब है कि बड़ी क़ीमत का घर भी देखा जा सकता था, पर किस्त सँभालने की क्षमता लोन को रोक रही है। "LTV की सीमा" का मतलब है कि आपकी आय पर और लोन बनता, पर कर्ज़दाता प्रॉपर्टी की क़ीमत के सीमित हिस्से तक ही देगा; बाक़ी आपको अपनी जेब से देना है। नीचे LTV के स्तर भी लिखे दिखते हैं। एक बार चार्ट में तीन खंभे होते हैं: आय पर आधारित लोन, प्रॉपर्टी पर आधारित लोन और अंदाज़न लोन। आख़िर में एक तालिका बताती है कि वही आय, दर और उम्र रखकर अवधि 10, 15, 20, 25 और 30 साल होने पर लोन कैसे बदलता है। अगर उम्र की सीमा के कारण दो अवधियाँ एक जैसी निकलें, तो तालिका में वह पंक्ति दोहराई नहीं जाती।
पेज पर दो त्रुटि संदेश भी आ सकते हैं। अगर आपकी उम्र परिपक्वता की अधिकतम उम्र के बराबर या ज़्यादा है, तो पेज बताता है कि अवधि नहीं बचती। और अगर चल रही EMI पहले ही FOIR सीमा तक पहुँच गई है, तो पेज कहता है कि नई EMI की गुंजाइश नहीं है और ज़्यादा FOIR, सह-आवेदक की आय या कम चल रही EMI आज़माने को कहता है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
पहले देखें कि सीमा किसकी है
अगर "आय की सीमा" दिखे, तो आय बढ़ाने (सह-आवेदक जोड़ना), चल रही EMI घटाने या अवधि बढ़ाने से लोन बढ़ता है। अगर "LTV की सीमा" दिखे, तो आय बढ़ाने से लोन नहीं बढ़ेगा; तब देखना होगा कि down payment जुटाया जा सके या कम क़ीमत का घर चुना जाए।
चल रही EMI निपटाकर देखिए
चल रही EMI को शून्य करके नतीजा देखें। फिर देखिए कि लोन कितना बढ़ा। इससे अंदाज़ा मिलता है कि होम लोन से पहले छोटे क़र्ज़ चुकाना कितना असर डाल सकता है।
अवधि की तालिका से संतुलन खोजें
लंबी अवधि में पात्र लोन बढ़ता है, पर कुल ब्याज भी बढ़ता है। इसलिए तालिका की पंक्तियाँ देखकर तय करें कि अवधि कितनी रखनी है, और फिर अपनी चुनी रकम को EMI calculator में डालकर कुल ब्याज देखें।
सभी EMI का प्रतिशत जाँचें
"सभी EMI नेट आय के % में" वाली पंक्ति आपको सचेत करती है। FOIR सीमा पर पहुँच जाना और घर चलाने के लिए बचा पैसा काफ़ी होना, दो अलग बातें हैं। अपना मासिक बजट अलग से जाँचिए।
कई क़ीमतें आज़माएँ
प्रॉपर्टी की क़ीमत ₹30 लाख, ₹50 लाख और ₹80 लाख के आसपास रखकर देखें कि LTV का स्तर बदलने पर down payment का प्रतिशत कैसे बदलता है। सीमा के पार जाते ही प्रतिशत बदल सकता है।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
पात्रता को मंज़ूरी समझ लेना। यह सिर्फ़ अनुमान है; असली फ़ैसला बैंक करता है।
डाउन पेमेंट के अलावा ख़र्च भूल जाना। स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, ब्रोकरेज, इंटीरियर और मूविंग ख़र्च अलग से लगते हैं।
क्रेडिट कार्ड बकाया न गिनना। हर महीने भरे जाने वाले बकाए भी बैंक देखता है।
सिर्फ़ ज़्यादा लोन चाहना। ज़्यादा लोन ज़्यादा EMI है; पात्रता का मतलब यह नहीं कि पूरा लोन लेना ज़रूरी है।
उम्र की सीमा भूलना। 50 की उम्र में 25 साल की अवधि नहीं मिलती, और इससे लोन की पात्रता घट जाती है।
एक बैंक की सीमा सब पर लागू समझना। FOIR, LTV और आय की गणना बैंक के हिसाब से अलग हो सकती है।
सह-आवेदक जोड़ने के असर को बिना पूछे मान लेना। सह-आवेदक की ज़िम्मेदारी भी बराबर बनती है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
उपलब्ध EMI = (आपकी + सह-आवेदक की नेट आय) × FOIR ÷ 100 − चल रही EMI।
इस्तेमाल की अवधि = आपकी चाही अवधि और (अधिकतम उम्र − मौजूदा उम्र) में से छोटी।
आय पर आधारित लोन = उपलब्ध EMI का वर्तमान मूल्य, यानी EMI × [1 − (1 + i)^−n] ÷ i, जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = अवधि × 12। यह EMI फ़ॉर्मूले का उल्टा रूप है।
प्रॉपर्टी पर आधारित लोन = प्रॉपर्टी की क़ीमत × LTV%। इस calculator में Oct 2026 तक सांकेतिक तौर पर माना गया है: ₹30 लाख तक की क़ीमत पर 90%, ₹30 लाख से ₹75 लाख तक 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75%। ये स्तर बदल सकते हैं; मौजूदा नियम के लिए RBI की वेबसाइट और अपने बैंक से पुष्टि करें।
अंदाज़न लोन = दोनों में कम; down payment = प्रॉपर्टी की क़ीमत − अंदाज़न लोन।
बाक़ी पंक्तियाँ सीधे इन्हीं से निकलती हैं। मान्यताएँ ये हैं:
ब्याज दर पूरी अवधि में स्थिर है।
सारी नेट आय को बराबर माना गया है; बैंक अक्सर बोनस, किराया या अनियमित आय के हिस्सों को अलग तरह से गिनते हैं।
क्रेडिट स्कोर, नौकरी का प्रकार, प्रॉपर्टी की जाँच, प्रोसेसिंग फ़ीस, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का ख़र्च शामिल नहीं है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए सुनील और प्रीति पति-पत्नी हैं और सह-आवेदक बनकर लोन लेना चाहते हैं। सुनील की नेट आय ₹70,000 और प्रीति की ₹50,000 है। सुनील की बाइक लोन की EMI ₹12,000 चल रही है। वे ₹55 लाख का फ़्लैट देख रहे हैं। FOIR 45%, ब्याज दर 9%, चाही अवधि 20 साल, सुनील की उम्र 34 और अधिकतम उम्र 65 मानी गई है।
कुल आय = 70,000 + 50,000 = ₹1,20,000।
FOIR के हिसाब से अधिकतम EMI = 1,20,000 × 45% = ₹54,000।
चल रही EMI घटाने पर उपलब्ध EMI = 54,000 − 12,000 = ₹42,000।
उम्र की सीमा से बची अवधि 65 − 34 = 31 साल, इसलिए चाही हुई 20 साल की अवधि ही चलेगी।
42,000 की EMI से 20 साल (240 महीने) में 9% पर आय आधारित लोन ≈ ₹46.68 लाख।
फ़्लैट ₹55 लाख है, जो ₹30–75 लाख की श्रेणी में आता है, इसलिए LTV 80% माना गया। प्रॉपर्टी आधारित लोन = 55 लाख × 80% = ₹44 लाख।
दोनों में कम ₹44 लाख है, यानी सीमा प्रॉपर्टी (LTV) की है।
Down payment = 55 − 44 = ₹11 लाख, यानी क़ीमत का 20%।
₹44 लाख पर 9%, 20 साल की EMI ≈ ₹39,588।
सभी EMI का जोड़ = 12,000 + 39,588 = ₹51,588, जो नेट आय का लगभग 43.0% है।
अब तालिका की तरफ़ देखें। अवधि 10 साल करने पर आय पर आधारित लोन लगभग ₹33.16 लाख रह जाता है और 15 साल पर ₹41.41 लाख; इन दोनों में आय की सीमा लागू होती है, इसलिए अंदाज़न लोन भी उतना ही रहता है। 25 साल पर यह ₹50.05 लाख होता है, पर LTV की सीमा ₹44 लाख पर रोक देती है।
कुछ और परखें। अगर प्रीति की आय न जुड़े और केवल सुनील आवेदक हो, तो उपलब्ध EMI घटकर लगभग ₹19,500 रह जाती है और आय आधारित लोन लगभग ₹21.67 लाख। अगर कर्ज़दाता का FOIR 45% की जगह 40% निकले, तो आय आधारित लोन घटकर लगभग ₹40.01 लाख हो जाता है, और अब सीमा आय की बन जाती है। यह उदाहरण केवल समझाने के लिए है; किसी बैंक की असली मंज़ूरी इससे अलग हो सकती है।
उदाहरण: एक ही परिवार में सह-आवेदक की आय जुड़ने से अनुमानित लोन दोगुने से भी ज़्यादा हो गया, लेकिन बैंक सह-आवेदक की आय तभी गिनता है जब वह दस्तावेज़ों से साबित हो।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह calculator क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, कंपनी की श्रेणी, आय के दस्तावेज़, प्रॉपर्टी की क़ानूनी जाँच या बैंक की आंतरिक नीतियों का हिसाब नहीं रखता। यह कर लाभ भी नहीं बताता; होम लोन के ब्याज और मूलधन पर कर छूट के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए Income Tax Department की साइट देखें। यह प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा, फ़्लोटिंग दर में बदलाव, pre-EMI चरण और आंशिक भुगतान पर अलग से कुछ नहीं जोड़ता। LTV के स्तर और अन्य नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। इसलिए इन आँकड़ों से घर का बजट तय करें, पर भुगतान या सौदे से पहले बैंक से लिखित पात्रता लें।
पात्रता का अंदाज़ा आपको सही क़ीमत का घर खोजने और बैंक से सवाल पूछने की ताक़त देता है। यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी है, कोई वित्तीय, कर या क़ानूनी सलाह नहीं; अंतिम निर्णय से पहले अपने कर्ज़दाता से जाँच करें।
6 काम की बातें याद रखें
1
चल रही EMI घटाकर देखें
पर्सनल या कार लोन की छोटी EMI भी पात्रता बहुत घटा देती है। आवेदन से पहले किसी पुराने कर्ज़ को निपटाना फ़ायदेमंद हो सकता है।
2
सह-आवेदक के साथ तुलना करें
पात्र सह-आवेदक की आय जोड़ने से पात्रता बढ़ सकती है। उसकी भी देनदारियाँ और दस्तावेज़ देखे जाते हैं।
3
FOIR बैंक से पूछकर भरें
पेज का 45% एक संकेत है। अलग कर्ज़दाता अलग FOIR लगाते हैं, इसलिए बैंक की नीति पूछकर डालें।
4
क्षमता और EMI की सहजता अलग चीज़ें हैं
बैंक जितना दे सके, उतना लेना ज़रूरी नहीं। EMI इतनी रखें कि बाक़ी खर्च और बचत पर दबाव न पड़े।
5
Down payment के अलावा खर्च भी रखें
स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग शुल्क और फ़र्नीचर जैसे खर्च down payment से अलग होते हैं।
6
क्रेडिट स्कोर पहले सुधारें
स्कोर बेहतर हो तो आम तौर पर बेहतर शर्तों की संभावना रहती है। आवेदन से पहले रिपोर्ट देख लें।
बैंक आम तौर पर आपकी मासिक आय में से EMI के लिए तय हिस्सा (FOIR) देखते हैं, उसमें से पहले से चल रही EMI घटाते हैं, और बची रकम से लोन की अधिकतम राशि निकालते हैं। साथ ही लोन प्रॉपर्टी की क़ीमत के तय प्रतिशत (LTV) से ज़्यादा नहीं होता। दोनों में जो कम हो वही अंदाज़न लोन है।
FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) बताता है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा सभी EMI और तय देनदारियों में जा सकता है। कई कर्ज़दाता लगभग 40–50% तक मानते हैं, पर यह हर बैंक और आपकी आय के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए यहाँ आप इसे 30% से 60% के बीच बदलकर देख सकते हैं।
LTV (Loan to Value) का मतलब है कि लोन प्रॉपर्टी की क़ीमत का अधिकतम कितना प्रतिशत हो सकता है। आम तौर पर कम क़ीमत की प्रॉपर्टी पर ज़्यादा प्रतिशत और ज़्यादा क़ीमत पर कम प्रतिशत मिलता है, और बाक़ी रकम आपको अपनी जेब से (down payment) देनी होती है। यहाँ इस्तेमाल हुए प्रतिशत सिर्फ़ संकेत के लिए हैं, अपने कर्ज़दाता से पुष्टि करें।
ज़्यादातर कर्ज़दाता लोन की परिपक्वता पर एक अधिकतम उम्र (अक्सर 60–70 साल) तय रखते हैं। इसलिए आपकी मौजूदा उम्र + लोन की अवधि उस सीमा से ज़्यादा नहीं हो सकती और अवधि छोटी होने पर EMI पर मिलने वाला लोन भी कम हो जाता है।
पेज नेट (हाथ में आने वाली) मासिक आय माँगता है। बैंक अपनी नीति के अनुसार ग्रॉस, नेट या कुछ भत्ते ही गिन सकते हैं।
कार, पर्सनल, एजुकेशन लोन की EMI और ज़रूरत पर क्रेडिट कार्ड की न्यूनतम देनदारी भी, जिन्हें कर्ज़दाता गिनता है। जो बंद होने वाली हों, उन्हें बैंक अलग से देख सकता है।
आम तौर पर परिवार का सदस्य, जैसे पति/पत्नी या माता-पिता। कौन पात्र है, यह कर्ज़दाता की नीति पर निर्भर है।
नहीं, एक सीमा के बाद बढ़त कम हो जाती है। 25 से 30 साल की बढ़त बहुत छोटी है, जबकि कुल ब्याज काफ़ी बढ़ जाता है।
नतीजे में "कौन-सी सीमा लागू है" पंक्ति यह बताती है, और नीचे चार्ट में तीनों रकम साथ दिखती हैं।
पेज में संकेतात्मक स्तर रखे गए हैं (नोट में दिखते हैं)। असली स्तर कर्ज़दाता और नियमों पर निर्भर हैं।
पेज 55 से 75 के बीच की उम्र लेता है। 60 से 70 के बीच की उम्र आम संकेत है, पर अपने बैंक से पूछकर डालें।
नहीं। मंज़ूरी बैंक की जाँच पर होती है, जिसमें दस्तावेज़, स्कोर और प्रॉपर्टी की क़ानूनी जाँच शामिल है।
लोन आम तौर पर बैंक के मूल्यांकन या सौदे की क़ीमत (जो कम हो) पर आधारित हो सकता है। अपने बैंक से पूछें।
योग्य लोन, चुनी ब्याज दर और इस्तेमाल हुई अवधि से मानक EMI सूत्र से। नीचे आपकी कुल EMI का आय के % में बोझ भी दिखता है।
नहीं। प्रोसेसिंग शुल्क, बीमा और अन्य ख़र्च पेज में नहीं जुड़ते। इनका हिसाब आपको अलग से रखना होगा।
नहीं। अनियमित आय को बैंक अलग तरीक़े से गिनते हैं (जैसे औसत आय या ITR के आधार पर)। पेज सीधी नेट आय मानता है।
हाँ, पर पेज एक ही दर पर पूरी अवधि का हिसाब देता है। फ़्लोटिंग दर में आगे चलकर EMI या अवधि बदल सकती है।
नहीं। यह शिक्षा के लिए अंदाज़ा है। असली राशि, दर और शर्तें कर्ज़दाता से पक्की करें।