हर रुपये का हिसाब

50-30-20 Budget Calculator

अपनी आय को समझदारी से बाँटें — ज़रूरतें, चाहतें और बचत में

  • 50-30-20 बँटवारा
  • ज़रूरतें, चाहतें, बचत
  • अपना प्रतिशत बदलें
  • असली बनाम बजट
  • बजट का पाई चार्ट
  • शेयर करने लायक़ लिंक
आशुग्या की सलाहअपनी आय का एक हिस्सा ख़र्च करने से पहले ही बचत के लिए अलग रख दें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

आय की जानकारी
₹10,000 ₹60,000 ₹5 L
₹

अपना बँटवारा (%)
कुल 100% होना चाहिए
बजट का ब्योरा
ज़रूरतें 50% ₹30,000
किराया, EMI, राशन, बिल, बीमा, आना-जाना
चाहतें 30% ₹18,000
बाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग, शौक़, यात्रा
बचत 20% ₹12,000
इमरजेंसी फंड, निवेश (SIP), लक्ष्य, कर्ज़ चुकाना
अपनी बचत का हिस्सा निवेश करना है? SIP Calculator में देखें यह मासिक रकम कितनी बनेगी। देखें
असली बनाम बजट की तुलना
₹
₹
₹

50-30-20 नियम क्या है?

Elizabeth Warren ने मशहूर किया यह सीधा-सादा बजट नियम:

50% — ज़रूरतें

ज़रूरी ख़र्च जो जीवन के लिए ज़रूरी हैं: किराया, EMI, खाना, बिजली, आना-जाना, हेल्थ इंश्योरेंस।

30% — चाहतें

गैर-ज़रूरी लेकिन आनंद के लिए: Netflix, रेस्टोरेंट, शॉपिंग, यात्रा, कॉन्सर्ट।

20% — बचत

अपना भविष्य सुरक्षित करें: SIP, इमरजेंसी फंड, लोन चुकाना, रिटायरमेंट फंड।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Needs, Wants and Savings amounts = monthly income × the percentage chosen for each bucket (50-30-20 by default; the three shares are meant to add up to 100%). In the comparison box, difference = your actual spending − the budgeted amount for each bucket. The 50-30-20 split is a simple rule of thumb, not a rule that suits everyone.

ज़रूरतें, चाहतें और बचत की रकम = मासिक आमदनी × हर हिस्से के लिए चुना गया प्रतिशत (शुरू में 50-30-20; तीनों हिस्सों का जोड़ 100% होना चाहिए)। तुलना वाले बॉक्स में अंतर = आपका असली ख़र्च − हर हिस्से के लिए तय बजट की रकम। 50-30-20 एक सीधा-सादा अंदाज़ा है, हर किसी पर फ़िट होने वाला नियम नहीं।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • महीने की इन-हैंड आमदनी को तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: ज़रूरतें (शुरू में 50%), चाहतें (30%) और बचत (20%)। तीनों का जोड़ 100% रहना चाहिए।
  • यह एक मोटा नियम है, क़ानून नहीं। महँगे शहर या ज़्यादा EMI में ज़रूरतों का हिस्सा बड़ा और बचत का छोटा हो सकता है।
  • नीचे के तीन खानों में अपना असली खर्च भरें तो पेज बजट से अंतर दिखाता है। इससे पता चलता है कि पैसा कहाँ ज़्यादा जा रहा है।
  • इन-हैंड आमदनी यानी टैक्स और कटौती के बाद हाथ में आने वाली रकम डालें, कुल CTC नहीं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

पेज की शुरुआती संख्याएँ

मासिक इन-हैंड आमदनी ₹60,000, बँटवारा 50-30-20।

ज़रूरतें (50%)
₹30,000
चाहतें (30%)
₹18,000
बचत (20%)
₹12,000

हर 100 रुपये पर 50 ज़रूरी खर्च, 30 मनपसंद खर्च और 20 बचत। यह बातचीत शुरू करने का एक आसान ढाँचा है।

प्रकाश: EMI वाला बजट

प्रकाश की इन-हैंड आमदनी ₹40,000 है और घर की EMI चलती है, इसलिए वह 60-20-20 रखता है।

ज़रूरतें (60%)
₹24,000
चाहतें (20%)
₹8,000
बचत (20%)
₹8,000
50-30-20 होता तो ज़रूरतें
₹20,000

ज़रूरतें बढ़ीं तो प्रकाश ने बचत नहीं छुई, चाहतें घटाईं। अपनी स्थिति के हिसाब से प्रतिशत बदलना इसी लिए दिया गया है।

मीरा: बजट से असली खर्च की तुलना

मीरा की आमदनी ₹60,000 है। महीने के अंत में उसने असली खर्च जोड़ा: ज़रूरतें ₹34,000, चाहतें ₹21,000, बचत ₹5,000।

ज़रूरतें: बजट / असली / अंतर
₹30,000 / ₹34,000 / +₹4,000
चाहतें: बजट / असली / अंतर
₹18,000 / ₹21,000 / +₹3,000
बचत: बजट / असली / अंतर
₹12,000 / ₹5,000 / −₹7,000

ज़रूरतों और चाहतों में कुल ₹7,000 ज़्यादा गए और उतनी ही बचत कम हुई। पहले देखें कि कौन-सा खर्च अकेला सबसे बड़ा बढ़ा।

आमदनी के हिसाब से 50-30-20 की रकम

आमदनी के हिसाब से 50-30-20 की रकम
मासिक आमदनीज़रूरतें (50%)चाहतें (30%)बचत (20%)
₹20,000₹10,000₹6,000₹4,000
₹30,000₹15,000₹9,000₹6,000
₹40,000₹20,000₹12,000₹8,000
₹60,000₹30,000₹18,000₹12,000
₹80,000₹40,000₹24,000₹16,000
₹1,00,000₹50,000₹30,000₹20,000

रकम = आमदनी × प्रतिशत ÷ 100। यह सिर्फ़ एक शुरुआती ढाँचा है।

₹60,000 पर अलग-अलग बँटवारे (उदाहरण)

₹60,000 पर अलग-अलग बँटवारे (उदाहरण)
बँटवाराज़रूरतेंचाहतेंबचत
50-30-20₹30,000₹18,000₹12,000
60-20-20₹36,000₹12,000₹12,000
70-20-10₹42,000₹12,000₹6,000
40-30-30₹24,000₹18,000₹18,000
45-25-30₹27,000₹15,000₹18,000

कोई भी बँटवारा तभी चलेगा जब ज़रूरतें सच में पूरी हों। ऊपर के बँटवारे कोई सिफ़ारिश नहीं, बस उदाहरण हैं।

त्वरित संदर्भ: 50-30-20 बजट

त्वरित संदर्भ: 50-30-20 बजट
ज़रूरतेंकिराया, EMI, राशन, बिल, बीमा किस्त, आना-जाना, बच्चों की फ़ीस
चाहतेंबाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग, घूमना, शौक़
बचतआपात निधि, SIP, लक्ष्य के लिए बचत, अतिरिक्त कर्ज़ चुकाना
हर हिस्से की रकमइन-हैंड आमदनी × प्रतिशत ÷ 100
अंतरअसली खर्च − बजट की रकम
कुल प्रतिशततीनों का जोड़ 100% होना चाहिए
आमदनी कौन-सी लेंइन-हैंड आमदनी, यानी कटौतियों के बाद
इस पेज में क्या नहींअनियमित आमदनी, साल में एक बार के खर्च, या हर श्रेणी का अलग ब्योरा।

50-30-20 Budget Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

महीने के आख़िर में अक्सर एक ही सवाल रह जाता है: "तनख़्वाह गई कहाँ?" यह calculator इस सवाल को उलटकर पूछता है: "तनख़्वाह आने से पहले ही तय कर लें कि कितना कहाँ जाएगा।" आप अपनी मासिक इन-हैंड आमदनी डालते हैं, और calculator उसे तीन हिस्सों में बाँट देता है: ज़रूरतें, चाहतें और बचत। शुरुआत में बँटवारा 50-30-20 का होता है, यानी आधा हिस्सा ज़रूरतों के लिए, तीस प्रतिशत चाहतों के लिए और बीस प्रतिशत बचत के लिए। पर तीनों प्रतिशत आप अपनी स्थिति के हिसाब से बदल सकते हैं।

इस पेज का दूसरा हिस्सा "असली बनाम बजट की तुलना" वाला कार्ड है। यहाँ आप बताते हैं कि पिछले महीने आपने असल में ज़रूरतों, चाहतों और बचत पर कितना ख़र्च किया, और calculator बजट के सामने उसका अंतर दिखा देता है। यानी यह सिर्फ़ योजना बनाने का औज़ार नहीं, योजना और हक़ीक़त को आमने-सामने रखने का औज़ार भी है।

ध्यान दें: 50-30-20 एक सीधा-सादा अंदाज़ा है, कोई क़ानून या वैज्ञानिक नियम नहीं। महँगे शहर में किराया ही आमदनी का आधा खा सकता है, और छोटे शहर में ज़रूरतें 35-40% में निपट सकती हैं। इसीलिए यहाँ प्रतिशत बदलने की सुविधा दी गई है।

किसके काम का है

  • पहली नौकरी वाले युवा, जिन्हें पहली बार हाथ में नियमित तनख़्वाह मिली है और जो आदत डालना चाहते हैं कि पहले बचत, फिर ख़र्च।
  • परिवार का बजट सँभालने वाले पति-पत्नी, जो महीने की शुरुआत में ही किराया, राशन, बच्चों की फ़ीस और बचत का मोटा ख़ाका बनाना चाहते हैं।
  • फ्रीलांसर और छोटे दुकानदार, जिनकी आमदनी हर महीने बदलती है। वे अपनी औसत या सबसे कम आमदनी डालकर देख सकते हैं कि कमज़ोर महीने में भी बँटवारा कैसा दिखेगा।
  • जो कर्ज़ चुका रहे हैं: EMI "ज़रूरतों" में गिनी जाती है, इसलिए यह देखना आसान हो जाता है कि EMI के बाद चाहतों और बचत के लिए कितनी गुंजाइश बचती है।
  • वे सब, जो SIP शुरू करना चाहते हैं पर तय नहीं कर पा रहे कि हर महीने कितनी रकम निकालना ठीक रहेगा।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

मासिक इन-हैंड आय (₹)

यह वह रकम है जो हर महीने टैक्स, PF जैसी कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में आती है, यानी CTC या gross नहीं। एक स्लाइडर और उसके साथ एक नंबर बॉक्स है; दोनों जुड़े हुए हैं, एक बदलने पर दूसरा अपने-आप बदलता है। स्लाइडर ₹10,000 से ₹5 लाख तक चलता है और ₹5,000 के क़दम पर बढ़ता है; शुरुआती मान ₹60,000 रखा गया है। अगर आपकी आमदनी इससे बिल्कुल अलग है, तो नंबर बॉक्स में सीधे अपनी रकम लिख दें। अगर आमदनी महीने-दर-महीने बदलती है, तो पिछले छह-बारह महीनों का सबसे कम या औसत आँकड़ा लेना समझदारी है।

अपना बँटवारा (%)

यहाँ तीन बॉक्स हैं: ज़रूरतें, चाहतें और बचत। हर बॉक्स के नीचे 0 से 100 तक का स्लाइडर भी जुड़ा है। शुरुआती मान 50, 30 और 20 हैं। तीनों का जोड़ 100 होना चाहिए; अगर जोड़ 100 नहीं हुआ तो "कुल 100% होना चाहिए" की लाल चेतावनी दिख जाती है। ध्यान रहे कि चेतावनी सिर्फ़ चेताती है, गणना रोकती नहीं। अगर जोड़ 110 है तो आपको अपनी आमदनी से ज़्यादा रकम बँटी हुई दिखेगी।

असली ख़र्च वाले तीन बॉक्स (वैकल्पिक)

"असली बनाम बजट की तुलना" कार्ड में तीन बॉक्स हैं: ज़रूरतों पर असली ख़र्च, चाहतों पर असली ख़र्च और असली बचत। हर बॉक्स रुपये में भरना है और साथ में ₹0 से ₹1,00,000 तक का स्लाइडर भी है (₹500 के क़दम से)। जब तक आप इनमें कोई रकम नहीं डालते, तुलना की तालिका दिखती ही नहीं।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

बजट का ब्योरा

दाईं ओर तीन पट्टियाँ दिखती हैं। हर पट्टी में श्रेणी का नाम, उसका प्रतिशत वाला बैज, रुपये की रकम और एक प्रोग्रेस बार है। नीचे छोटे अक्षरों में उदाहरण लिखे हैं कि उस श्रेणी में क्या आता है: ज़रूरतों में किराया, EMI, राशन, बिल, बीमा और आना-जाना; चाहतों में बाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग, शौक़ और यात्रा; बचत में इमरजेंसी फंड, निवेश (SIP), लक्ष्य और कर्ज़ चुकाना। इन तीनों के नीचे एक पाई चार्ट है जो हिस्सेदारी एक नज़र में दिखाता है। रकमें नज़दीकी रुपये में गोल करके दिखाई जाती हैं।

SIP वाला बैनर

पेज पर एक नीला-बैंगनी बैनर है। बचत वाली रकम जब भी शून्य से ज़्यादा होती है, यह बैनर आपको SIP calculator पर ले जाता है और वही रकम वहाँ शुरुआती मासिक राशि के रूप में भर देता है। यह सुविधा सिर्फ़ आसानी के लिए है: इसका मतलब यह नहीं कि पूरी बचत SIP में ही जानी चाहिए। इमरजेंसी फंड या कर्ज़ चुकाना भी बचत की श्रेणी में आते हैं।

तुलना की तालिका

जब आप असली ख़र्च भरते हैं, तो चार कॉलम की तालिका बनती है: श्रेणी, बजट, असली और अंतर। अंतर की गणना सीधी है: असली ख़र्च घटा बजट। प्लस का निशान बताता है कि आपने बजट से ज़्यादा ख़र्च किया, माइनस का मतलब कम।

अब रंगों पर एक ज़रूरी बात। ज़रूरतों और चाहतों की पंक्तियों में अंतर पॉज़िटिव हो (बजट से ज़्यादा ख़र्च) तो लाल रंग आता है, और कम ख़र्च पर हरा। बचत की पंक्ति में उलटा है: बजट से ज़्यादा बचत हरी दिखती है। लेकिन कोड में बचत से कम बचाने की स्थिति में भी अंतर हरे रंग में ही दिखता है। इसलिए बचत की पंक्ति में सिर्फ़ रंग पर भरोसा न करें; माइनस का निशान देखें। माइनस का मतलब है कि आपने तय से कम बचाया।

ध्यान दें: अच्छा संकेत यह है कि ज़रूरतें और चाहतें बजट के अंदर रहें और बचत बजट के बराबर या उससे ऊपर रहे। हर महीने थोड़ा ऊपर-नीचे होना सामान्य है; चिंता की बात तब है जब एक ही श्रेणी लगातार कई महीने बजट से बाहर जाए।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • महीने की शुरुआत में बजट, आख़िर में तुलना। पहले हफ़्ते में प्रतिशत तय करें, और महीना ख़त्म होने पर बैंक या UPI स्टेटमेंट देखकर असली ख़र्च भरें। तीन महीने की तुलना से अपनेआप पैटर्न दिख जाता है।
  • अलग-अलग बँटवारे आज़माएँ। 50-30-20 के साथ 60-20-20 या 55-25-20 भी देखें। देखिए कि बचत वाली रकम कितनी घटती-बढ़ती है।
  • कमज़ोर महीने की आमदनी डालकर देखें। अगर आप फ्रीलांसर हैं, तो अपनी सबसे कम कमाई वाले महीने के आँकड़े से बजट बनाइए। जब कमाई ज़्यादा हो, तो अतिरिक्त रकम बचत में जोड़ें।
  • पहले इमरजेंसी फंड, फिर निवेश। अगर आपके पास तीन से छह महीने का ख़र्च अलग से रखा नहीं है, तो बचत वाले हिस्से का एक बड़ा भाग उसी में लगाना समझदारी है। इसके लिए Emergency Fund Calculator देखें।
  • EMI को ज़रूरतों में गिनें। अगर EMI और किराया मिलकर आधे से बहुत ऊपर चले जाते हैं, तो यह संकेत है कि कर्ज़ का बोझ भारी है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • Gross आमदनी डाल देना। CTC या कटौतियों से पहले की तनख़्वाह डालेंगे तो बजट आपके हाथ में आने वाली रकम से बड़ा दिखेगा।
  • हर "चाहत" को ग़लत मानना। चाहतों का हिस्सा इसलिए रखा गया है कि ज़िंदगी में मज़ा भी रहे। इसे शून्य करने वाले बजट अक्सर कुछ हफ़्तों में टूट जाते हैं।
  • बीमा की किस्त या स्वास्थ्य ख़र्च को चाहत में रखना। ये ज़रूरतों में आते हैं।
  • बचत को "जो बच जाए" समझना। ख़र्च के बाद जो बचता है, वह अक्सर कुछ नहीं बचता। बेहतर आदत यह है कि तनख़्वाह आते ही बचत वाली रकम अलग खाते या SIP में डाल दी जाए।
  • तीनों का जोड़ 100 न रखना। लाल चेतावनी को अनदेखा न करें।
  • तुलना में सिर्फ़ रंग देखना। जैसा ऊपर बताया, बचत की पंक्ति में माइनस का निशान ही असली संकेत है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

गणना बहुत सरल है। हर श्रेणी की रकम = मासिक आमदनी × उस श्रेणी का प्रतिशत ÷ 100। जैसे ₹60,000 की आमदनी पर 50% का मतलब ₹30,000। किसी जटिल फ़ॉर्मूले, ब्याज या महँगाई का इसमें कोई हाथ नहीं है। जो मान्यताएँ इस implementation में हैं, वे ये हैं:

  • आमदनी हर महीने एक-सी मानी गई है।
  • तीनों प्रतिशत आपके हाथ में हैं; calculator अपनी ओर से कुछ नहीं बदलता।
  • आमदनी का क्षेत्र अगर नंबर बॉक्स में भरा हो तो वही लिया जाता है, वरना स्लाइडर की रकम।
  • सभी रकमें नज़दीकी रुपये में गोल करके दिखाई जाती हैं।
  • पेज आपके भरे आँकड़े अपने खाते में सेव नहीं करता; "लिंक कॉपी करें" वाला बटन सिर्फ़ पेज का सामान्य लिंक देता है, आपके भरे हुए आँकड़े उसमें नहीं जुड़ते। "शेयर करें" बटन WhatsApp के लिए एक तैयार संदेश बनाता है जिसमें मासिक बचत की रकम लिखी होती है।
  • गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है; एक छोटा सार सिर्फ़ आपके अपने ब्राउज़र की "हाल की गणनाएँ" सूची में रखा जा सकता है।
एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए नेहा 24 साल की है, एक कंपनी में पहली नौकरी करती है और उसकी इन-हैंड तनख़्वाह ₹45,000 है। वह शुरुआती 50-30-20 से बँटवारा देखती है:

  1. ज़रूरतें: 45,000 × 50% = ₹22,500
  2. चाहतें: 45,000 × 30% = ₹13,500
  3. बचत: 45,000 × 20% = ₹9,000

पर नेहा का किराया और खाना-बिजली मिलाकर ₹27,000 बैठता है, यानी तनख़्वाह का 60%। इसलिए वह बँटवारा 60-25-15 कर देती है:

  1. ज़रूरतें: 45,000 × 60% = ₹27,000
  2. चाहतें: 45,000 × 25% = ₹11,250
  3. बचत: 45,000 × 15% = ₹6,750

जोड़ है 27,000 + 11,250 + 6,750 = ₹45,000, यानी पूरा 100%। महीना बीतने पर वह असली ख़र्च भरती है: ज़रूरतें ₹26,000, चाहतें ₹12,000 और बचत ₹7,000। तालिका में अंतर आएगा: ज़रूरतें 26,000 − 27,000 = −₹1,000 (बजट से कम), चाहतें 12,000 − 11,250 = +₹750 (थोड़ा ज़्यादा), और बचत 7,000 − 6,750 = +₹250 (बजट से थोड़ी ज़्यादा)। यानी चाहतों में ₹750 ऊपर गई, पर ज़रूरतों में बचे ₹1,000 ने बचत को भी हल्का सहारा दे दिया। यह एक काल्पनिक उदाहरण है; आपकी असली संख्याएँ अलग होंगी।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता

यह calculator आपके असली ख़र्चों को अपने-आप नहीं पढ़ता; आप जो रकम डालते हैं, वही गिनी जाती है। यह नहीं बताता कि किस चीज़ को ज़रूरत गिना जाए और किसे चाहत; यह फ़ैसला आपका है। यह सालाना या अनियमित ख़र्चों (बीमा, त्योहार, स्कूल की फ़ीस, यात्रा) को अलग से नहीं सँभालता, इसलिए उनके लिए हर महीने थोड़ी रकम अलग रखकर "ज़रूरतों" या "बचत" में गिनना बेहतर है। इसमें टैक्स, महँगाई या निवेश पर रिटर्न शामिल नहीं हैं। और 50-30-20 नियम सबके लिए बराबर फ़िट नहीं बैठता: बहुत कम आमदनी में ज़रूरतें 70-80% तक जा सकती हैं, और ऊँची आमदनी में बचत 40% से ऊपर भी रखी जा सकती है। इसलिए नतीजे को एक शुरुआती ख़ाका मानें, अंतिम फ़ैसला नहीं।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • SIP Calculator: बचत की रकम हर महीने निवेश करने पर संभावित कोष का अंदाज़ा देखने के लिए।
  • Emergency Fund Calculator: बचत का पहला पड़ाव तय करने के लिए।
  • Expense Tracker: असली ख़र्च रोज़ दर्ज करने के लिए।
  • Net Worth Calculator: संपत्ति और कर्ज़ का पूरा हिसाब देखने के लिए।
  • Spending Less Calculator: चाहतों में कटौती का लंबे समय का असर देखने के लिए।
  • Financial Health Ratio Calculator: बचत और कर्ज़ के अनुपात को परखने के लिए।

यह लेख और calculator सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी के लिए हैं; नतीजे अनुमान हैं और इन्हें वित्तीय, निवेश या कर सलाह न समझें। बड़े फ़ैसलों से पहले किसी योग्य सलाहकार से बात करें।

6 काम की बातें याद रखें

1
पिछले तीन महीने का असली खर्च देखें

अंदाज़े से नहीं, बैंक और UPI की एंट्री से खर्च जोड़ें। फिर उसे यहाँ तीन खानों में भरें।

2
बचत सबसे पहले अलग करें

वेतन आते ही बचत वाला हिस्सा अलग खाते या SIP में डाल दें। जो बचे, उसे खर्च मानें।

3
पहले ऊँची ब्याज वाला कर्ज़ घटाएँ

क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का बकाया बचत वाले हिस्से से चुकाने पर विचार करें।

4
साल में एक बार के खर्च बाँट दें

बीमा प्रीमियम या स्कूल फ़ीस जैसे खर्च 12 से भाग देकर हर महीने की ज़रूरतों में जोड़ें।

5
चाहतों में सीमा रखें, गिल्ट नहीं

थोड़ा मनोरंजन बजट का हिस्सा है। बस उसे तय सीमा में रखें।

6
हर तीन महीने में प्रतिशत जाँचें

आमदनी, किराया या EMI बदले तो बँटवारा भी बदलें, वरना बजट काग़ज़ पर ही रह जाएगा।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इसमें आमदनी का लगभग 50% ज़रूरतों (किराया, राशन, EMI), 30% इच्छाओं (घूमना, बाहर खाना) और 20% बचत व निवेश में बाँटा जाता है। यह शुरुआत के लिए एक मोटा ढाँचा है, कोई सख़्त नियम नहीं।

नहीं। महानगरों में किराया और EMI अक्सर 50% से ज़्यादा हो जाते हैं। अपनी स्थिति के हिसाब से अनुपात बदलें, मक़सद यह है कि बचत पहले अलग हो जाए।

घर या ज़रूरी वाहन की EMI ज़रूरतों में गिनी जाती है। जो लोन शौक या ऐशो-आराम के लिए लिए हों, उन्हें इच्छाओं में रखकर देखना ईमानदार तस्वीर देता है।

पहले इच्छाओं वाले खर्च घटाएँ और छोटी रकम से भी बचत शुरू करें, फिर आमदनी बढ़ने पर हिस्सा बढ़ाते जाएँ। आदत बनना रकम से ज़्यादा ज़रूरी है।

यह एक लोकप्रिय सरल ढाँचा है जो याद रखना आसान है। इसके पीछे कोई सरकारी नियम नहीं है, इसलिए अपनी स्थिति के हिसाब से बदलें।

पेज चेतावनी देता है कि कुल 100% होना चाहिए। जोड़ अलग हो तो रकमें आमदनी से कम या ज़्यादा बँटी हुई दिखेंगी।

इन-हैंड, यानी PF, टैक्स आदि कटने के बाद की रकम। वही असल में खर्च के लिए बचती है।

जीवन या स्वास्थ्य बीमा की किस्त आम तौर पर ज़रूरतों में गिनी जाती है। निवेश वाली पॉलिसी को आप बचत में गिन सकते हैं।

बचत वाले हिस्से में। इससे पता चलता है कि निवेश के लिए कितनी रकम बची है।

इस पेज में एक ही महीने की निश्चित आमदनी मानी गई है। अनियमित आमदनी में सबसे कम वाले महीने की रकम डालना एक सावधान तरीक़ा है।

नहीं। EMI ज़रूरतों में और अतिरिक्त कर्ज़ चुकाना बचत में गिना जा सकता है। पेज में अलग खाना नहीं है।

नहीं, सिर्फ़ तीन बड़े हिस्से दिखते हैं। किराया, राशन जैसे अलग-अलग मद देखने के लिए Expense Tracker बेहतर है।

अंतर = असली खर्च − बजट की रकम। ज़रूरतों और चाहतों में प्लस का मतलब बजट से ज़्यादा खर्च है, जबकि बचत में माइनस का मतलब कम बचत।

नहीं। बहुत कम आमदनी में ज़रूरतें ही 70-80% खा सकती हैं। तब पहले बचाने की छोटी आदत बनाना भी अच्छा क़दम है।

नहीं। टैक्स बचाने वाले निवेश के लिए Tax Saver Planner अलग से देखें।

यह पेज एक महीने का है और महँगाई नहीं जोड़ता। साल में एक बार आमदनी और खर्च अपडेट करके दोबारा हिसाब लगाएँ।

हाँ, दोनों की इन-हैंड आमदनी जोड़कर घर का साझा बजट बन सकता है। अलग-अलग निजी खर्च के लिए अलग हिसाब भी रखा जा सकता है।

नहीं। यह एक सरल शैक्षणिक ढाँचा है। अपनी ज़रूरतों और लक्ष्यों के हिसाब से इसे बदलें।

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