मासिक इन-हैंड आमदनी ₹60,000, बँटवारा 50-30-20।
- ज़रूरतें (50%)
- ₹30,000
- चाहतें (30%)
- ₹18,000
- बचत (20%)
- ₹12,000
हर 100 रुपये पर 50 ज़रूरी खर्च, 30 मनपसंद खर्च और 20 बचत। यह बातचीत शुरू करने का एक आसान ढाँचा है।
अपनी आय को समझदारी से बाँटें — ज़रूरतें, चाहतें और बचत में
Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
Elizabeth Warren ने मशहूर किया यह सीधा-सादा बजट नियम:
ज़रूरी ख़र्च जो जीवन के लिए ज़रूरी हैं: किराया, EMI, खाना, बिजली, आना-जाना, हेल्थ इंश्योरेंस।
गैर-ज़रूरी लेकिन आनंद के लिए: Netflix, रेस्टोरेंट, शॉपिंग, यात्रा, कॉन्सर्ट।
अपना भविष्य सुरक्षित करें: SIP, इमरजेंसी फंड, लोन चुकाना, रिटायरमेंट फंड।
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Needs, Wants and Savings amounts = monthly income × the percentage chosen for each bucket (50-30-20 by default; the three shares are meant to add up to 100%). In the comparison box, difference = your actual spending − the budgeted amount for each bucket. The 50-30-20 split is a simple rule of thumb, not a rule that suits everyone.
ज़रूरतें, चाहतें और बचत की रकम = मासिक आमदनी × हर हिस्से के लिए चुना गया प्रतिशत (शुरू में 50-30-20; तीनों हिस्सों का जोड़ 100% होना चाहिए)। तुलना वाले बॉक्स में अंतर = आपका असली ख़र्च − हर हिस्से के लिए तय बजट की रकम। 50-30-20 एक सीधा-सादा अंदाज़ा है, हर किसी पर फ़िट होने वाला नियम नहीं।
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
मासिक इन-हैंड आमदनी ₹60,000, बँटवारा 50-30-20।
हर 100 रुपये पर 50 ज़रूरी खर्च, 30 मनपसंद खर्च और 20 बचत। यह बातचीत शुरू करने का एक आसान ढाँचा है।
प्रकाश की इन-हैंड आमदनी ₹40,000 है और घर की EMI चलती है, इसलिए वह 60-20-20 रखता है।
ज़रूरतें बढ़ीं तो प्रकाश ने बचत नहीं छुई, चाहतें घटाईं। अपनी स्थिति के हिसाब से प्रतिशत बदलना इसी लिए दिया गया है।
मीरा की आमदनी ₹60,000 है। महीने के अंत में उसने असली खर्च जोड़ा: ज़रूरतें ₹34,000, चाहतें ₹21,000, बचत ₹5,000।
ज़रूरतों और चाहतों में कुल ₹7,000 ज़्यादा गए और उतनी ही बचत कम हुई। पहले देखें कि कौन-सा खर्च अकेला सबसे बड़ा बढ़ा।
| मासिक आमदनी | ज़रूरतें (50%) | चाहतें (30%) | बचत (20%) |
|---|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹10,000 | ₹6,000 | ₹4,000 |
| ₹30,000 | ₹15,000 | ₹9,000 | ₹6,000 |
| ₹40,000 | ₹20,000 | ₹12,000 | ₹8,000 |
| ₹60,000 | ₹30,000 | ₹18,000 | ₹12,000 |
| ₹80,000 | ₹40,000 | ₹24,000 | ₹16,000 |
| ₹1,00,000 | ₹50,000 | ₹30,000 | ₹20,000 |
रकम = आमदनी × प्रतिशत ÷ 100। यह सिर्फ़ एक शुरुआती ढाँचा है।
| बँटवारा | ज़रूरतें | चाहतें | बचत |
|---|---|---|---|
| 50-30-20 | ₹30,000 | ₹18,000 | ₹12,000 |
| 60-20-20 | ₹36,000 | ₹12,000 | ₹12,000 |
| 70-20-10 | ₹42,000 | ₹12,000 | ₹6,000 |
| 40-30-30 | ₹24,000 | ₹18,000 | ₹18,000 |
| 45-25-30 | ₹27,000 | ₹15,000 | ₹18,000 |
कोई भी बँटवारा तभी चलेगा जब ज़रूरतें सच में पूरी हों। ऊपर के बँटवारे कोई सिफ़ारिश नहीं, बस उदाहरण हैं।
| ज़रूरतें | किराया, EMI, राशन, बिल, बीमा किस्त, आना-जाना, बच्चों की फ़ीस |
|---|---|
| चाहतें | बाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग, घूमना, शौक़ |
| बचत | आपात निधि, SIP, लक्ष्य के लिए बचत, अतिरिक्त कर्ज़ चुकाना |
| हर हिस्से की रकम | इन-हैंड आमदनी × प्रतिशत ÷ 100 |
| अंतर | असली खर्च − बजट की रकम |
| कुल प्रतिशत | तीनों का जोड़ 100% होना चाहिए |
| आमदनी कौन-सी लें | इन-हैंड आमदनी, यानी कटौतियों के बाद |
| इस पेज में क्या नहीं | अनियमित आमदनी, साल में एक बार के खर्च, या हर श्रेणी का अलग ब्योरा। |
महीने के आख़िर में अक्सर एक ही सवाल रह जाता है: "तनख़्वाह गई कहाँ?" यह calculator इस सवाल को उलटकर पूछता है: "तनख़्वाह आने से पहले ही तय कर लें कि कितना कहाँ जाएगा।" आप अपनी मासिक इन-हैंड आमदनी डालते हैं, और calculator उसे तीन हिस्सों में बाँट देता है: ज़रूरतें, चाहतें और बचत। शुरुआत में बँटवारा 50-30-20 का होता है, यानी आधा हिस्सा ज़रूरतों के लिए, तीस प्रतिशत चाहतों के लिए और बीस प्रतिशत बचत के लिए। पर तीनों प्रतिशत आप अपनी स्थिति के हिसाब से बदल सकते हैं।
इस पेज का दूसरा हिस्सा "असली बनाम बजट की तुलना" वाला कार्ड है। यहाँ आप बताते हैं कि पिछले महीने आपने असल में ज़रूरतों, चाहतों और बचत पर कितना ख़र्च किया, और calculator बजट के सामने उसका अंतर दिखा देता है। यानी यह सिर्फ़ योजना बनाने का औज़ार नहीं, योजना और हक़ीक़त को आमने-सामने रखने का औज़ार भी है।
यह वह रकम है जो हर महीने टैक्स, PF जैसी कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में आती है, यानी CTC या gross नहीं। एक स्लाइडर और उसके साथ एक नंबर बॉक्स है; दोनों जुड़े हुए हैं, एक बदलने पर दूसरा अपने-आप बदलता है। स्लाइडर ₹10,000 से ₹5 लाख तक चलता है और ₹5,000 के क़दम पर बढ़ता है; शुरुआती मान ₹60,000 रखा गया है। अगर आपकी आमदनी इससे बिल्कुल अलग है, तो नंबर बॉक्स में सीधे अपनी रकम लिख दें। अगर आमदनी महीने-दर-महीने बदलती है, तो पिछले छह-बारह महीनों का सबसे कम या औसत आँकड़ा लेना समझदारी है।
यहाँ तीन बॉक्स हैं: ज़रूरतें, चाहतें और बचत। हर बॉक्स के नीचे 0 से 100 तक का स्लाइडर भी जुड़ा है। शुरुआती मान 50, 30 और 20 हैं। तीनों का जोड़ 100 होना चाहिए; अगर जोड़ 100 नहीं हुआ तो "कुल 100% होना चाहिए" की लाल चेतावनी दिख जाती है। ध्यान रहे कि चेतावनी सिर्फ़ चेताती है, गणना रोकती नहीं। अगर जोड़ 110 है तो आपको अपनी आमदनी से ज़्यादा रकम बँटी हुई दिखेगी।
"असली बनाम बजट की तुलना" कार्ड में तीन बॉक्स हैं: ज़रूरतों पर असली ख़र्च, चाहतों पर असली ख़र्च और असली बचत। हर बॉक्स रुपये में भरना है और साथ में ₹0 से ₹1,00,000 तक का स्लाइडर भी है (₹500 के क़दम से)। जब तक आप इनमें कोई रकम नहीं डालते, तुलना की तालिका दिखती ही नहीं।
दाईं ओर तीन पट्टियाँ दिखती हैं। हर पट्टी में श्रेणी का नाम, उसका प्रतिशत वाला बैज, रुपये की रकम और एक प्रोग्रेस बार है। नीचे छोटे अक्षरों में उदाहरण लिखे हैं कि उस श्रेणी में क्या आता है: ज़रूरतों में किराया, EMI, राशन, बिल, बीमा और आना-जाना; चाहतों में बाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग, शौक़ और यात्रा; बचत में इमरजेंसी फंड, निवेश (SIP), लक्ष्य और कर्ज़ चुकाना। इन तीनों के नीचे एक पाई चार्ट है जो हिस्सेदारी एक नज़र में दिखाता है। रकमें नज़दीकी रुपये में गोल करके दिखाई जाती हैं।
पेज पर एक नीला-बैंगनी बैनर है। बचत वाली रकम जब भी शून्य से ज़्यादा होती है, यह बैनर आपको SIP calculator पर ले जाता है और वही रकम वहाँ शुरुआती मासिक राशि के रूप में भर देता है। यह सुविधा सिर्फ़ आसानी के लिए है: इसका मतलब यह नहीं कि पूरी बचत SIP में ही जानी चाहिए। इमरजेंसी फंड या कर्ज़ चुकाना भी बचत की श्रेणी में आते हैं।
जब आप असली ख़र्च भरते हैं, तो चार कॉलम की तालिका बनती है: श्रेणी, बजट, असली और अंतर। अंतर की गणना सीधी है: असली ख़र्च घटा बजट। प्लस का निशान बताता है कि आपने बजट से ज़्यादा ख़र्च किया, माइनस का मतलब कम।
अब रंगों पर एक ज़रूरी बात। ज़रूरतों और चाहतों की पंक्तियों में अंतर पॉज़िटिव हो (बजट से ज़्यादा ख़र्च) तो लाल रंग आता है, और कम ख़र्च पर हरा। बचत की पंक्ति में उलटा है: बजट से ज़्यादा बचत हरी दिखती है। लेकिन कोड में बचत से कम बचाने की स्थिति में भी अंतर हरे रंग में ही दिखता है। इसलिए बचत की पंक्ति में सिर्फ़ रंग पर भरोसा न करें; माइनस का निशान देखें। माइनस का मतलब है कि आपने तय से कम बचाया।
गणना बहुत सरल है। हर श्रेणी की रकम = मासिक आमदनी × उस श्रेणी का प्रतिशत ÷ 100। जैसे ₹60,000 की आमदनी पर 50% का मतलब ₹30,000। किसी जटिल फ़ॉर्मूले, ब्याज या महँगाई का इसमें कोई हाथ नहीं है। जो मान्यताएँ इस implementation में हैं, वे ये हैं:
मान लीजिए नेहा 24 साल की है, एक कंपनी में पहली नौकरी करती है और उसकी इन-हैंड तनख़्वाह ₹45,000 है। वह शुरुआती 50-30-20 से बँटवारा देखती है:
पर नेहा का किराया और खाना-बिजली मिलाकर ₹27,000 बैठता है, यानी तनख़्वाह का 60%। इसलिए वह बँटवारा 60-25-15 कर देती है:
जोड़ है 27,000 + 11,250 + 6,750 = ₹45,000, यानी पूरा 100%। महीना बीतने पर वह असली ख़र्च भरती है: ज़रूरतें ₹26,000, चाहतें ₹12,000 और बचत ₹7,000। तालिका में अंतर आएगा: ज़रूरतें 26,000 − 27,000 = −₹1,000 (बजट से कम), चाहतें 12,000 − 11,250 = +₹750 (थोड़ा ज़्यादा), और बचत 7,000 − 6,750 = +₹250 (बजट से थोड़ी ज़्यादा)। यानी चाहतों में ₹750 ऊपर गई, पर ज़रूरतों में बचे ₹1,000 ने बचत को भी हल्का सहारा दे दिया। यह एक काल्पनिक उदाहरण है; आपकी असली संख्याएँ अलग होंगी।
यह calculator आपके असली ख़र्चों को अपने-आप नहीं पढ़ता; आप जो रकम डालते हैं, वही गिनी जाती है। यह नहीं बताता कि किस चीज़ को ज़रूरत गिना जाए और किसे चाहत; यह फ़ैसला आपका है। यह सालाना या अनियमित ख़र्चों (बीमा, त्योहार, स्कूल की फ़ीस, यात्रा) को अलग से नहीं सँभालता, इसलिए उनके लिए हर महीने थोड़ी रकम अलग रखकर "ज़रूरतों" या "बचत" में गिनना बेहतर है। इसमें टैक्स, महँगाई या निवेश पर रिटर्न शामिल नहीं हैं। और 50-30-20 नियम सबके लिए बराबर फ़िट नहीं बैठता: बहुत कम आमदनी में ज़रूरतें 70-80% तक जा सकती हैं, और ऊँची आमदनी में बचत 40% से ऊपर भी रखी जा सकती है। इसलिए नतीजे को एक शुरुआती ख़ाका मानें, अंतिम फ़ैसला नहीं।
यह लेख और calculator सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी के लिए हैं; नतीजे अनुमान हैं और इन्हें वित्तीय, निवेश या कर सलाह न समझें। बड़े फ़ैसलों से पहले किसी योग्य सलाहकार से बात करें।
अंदाज़े से नहीं, बैंक और UPI की एंट्री से खर्च जोड़ें। फिर उसे यहाँ तीन खानों में भरें।
वेतन आते ही बचत वाला हिस्सा अलग खाते या SIP में डाल दें। जो बचे, उसे खर्च मानें।
क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का बकाया बचत वाले हिस्से से चुकाने पर विचार करें।
बीमा प्रीमियम या स्कूल फ़ीस जैसे खर्च 12 से भाग देकर हर महीने की ज़रूरतों में जोड़ें।
थोड़ा मनोरंजन बजट का हिस्सा है। बस उसे तय सीमा में रखें।
आमदनी, किराया या EMI बदले तो बँटवारा भी बदलें, वरना बजट काग़ज़ पर ही रह जाएगा।
शुक्रिया! आपका feedback मिल गया। 🙏