मान लीजिए कानपुर में दुकान चलाने वाले संजय जी ने एक इक्विटी-ओरिएंटेड फ़ंड में ₹2,40,000 एक बार लगाए थे। ख़रीद के दिन NAV ₹48.00 था। 20 महीने बाद आज का NAV ₹61.20 है। यहाँ के सभी रिटर्न काल्पनिक हैं और असली रिटर्न अलग होंगे।
- Units = 2,40,000 ÷ 48 = 5,000 units
- मौजूदा मूल्य = 5,000 × 61.20 = ₹3,06,000
- लाभ = 3,06,000 − 2,40,000 = ₹66,000
- कुल रिटर्न = 66,000 ÷ 2,40,000 = 27.5%
- CAGR = (3,06,000 ÷ 2,40,000) की घात (12 ÷ 20) − 1 = (1.275 की घात 0.6) − 1 ≈ 15.69% सालाना
ध्यान दीजिए कि अगर यही 27.5% का कुल रिटर्न 36 महीने (3 साल) में मिलता तो CAGR लगभग 8.44% बैठता। रिटर्न वही, पर समय तीन गुना, तो सालाना रफ़्तार लगभग आधी।
Exit load का उदाहरण
अब मान लीजिए संजय जी ने 8 महीने बाद पैसा निकालना चाहा, जब NAV ₹52 था, और फ़ंड में 1% exit load है 12 महीने से पहले निकालने पर।
- मूल्य = 5,000 × 52 = ₹2,60,000
- Exit load = 1% = ₹2,600
- निकासी-राशि = ₹2,57,400
- शुल्क के बाद लाभ = ₹17,400, और कुल रिटर्न (शुल्क से पहले) लगभग 8.33%
- अवधि 12 महीने से कम है, इसलिए CAGR नहीं दिखेगा।
अगर NAV ₹44 पर आ जाए तो मूल्य ₹2,20,000, यानी ₹20,000 का घाटा (−8.33%)। ऐसे में कर की पंक्ति में कर नहीं बनता और नोट घाटे का ज़िक्र करता है।
ये उदाहरण सिर्फ़ गणना समझाने के लिए हैं। इनसे किसी फ़ंड के रिटर्न का संकेत न लें।