उदाहरण 1: cash-flow mode। मान लीजिए प्रिया एक फ्रीलांस डिज़ाइनर है। उसने एक फंड में 10 अप्रैल 2023 को ₹60,000, 10 अक्टूबर 2024 को ₹40,000 लगाए, 10 अप्रैल 2025 को ₹15,000 निकाले, और 10 अक्टूबर 2026 को पूरी होल्डिंग का मूल्य ₹1,20,000 है।
- कुल निवेश = 60,000 + 40,000 = ₹1,00,000
- निकाली गई रकम = ₹15,000
- कुल लाभ = 1,20,000 + 15,000 − 1,00,000 = ₹35,000
- कुल रिटर्न = 35,000 ÷ 1,00,000 = 35%
- अवधि = 10 अप्रैल 2023 से 10 अक्टूबर 2026 = करीब 3.50 साल
XIRR लगभग 11.5% सालाना आता है। ध्यान दें कि मोटे तौर पर "35% ÷ 3.5 साल = 10% सालाना" निकालना एक कच्चा अंदाज़ा है; XIRR इसलिए बेहतर है कि उसमें देर से लगाए गए और बीच में निकाले गए पैसे का सही वज़न शामिल है।
उदाहरण 2: SIP quick mode। मान लीजिए करन हर महीने ₹5,000 की SIP 5 जनवरी 2024 से चला रहा है, कुल 24 किस्तें (आख़िरी 5 दिसंबर 2025), और 5 जनवरी 2026 को होल्डिंग का मूल्य ₹1,35,000 है। कुल निवेश ₹1,20,000, लाभ ₹15,000 और कुल रिटर्न 12.5%। XIRR आता है करीब 11.7% सालाना। अगर कोई भूल से मान ले कि पूरे ₹1,20,000 दो साल पहले एक साथ लगे थे, तो CAGR निकलता केवल लगभग 6.1%, जो भ्रामक रूप से कम है, क्योंकि ज़्यादातर किस्तों को पूरे दो साल मिले ही नहीं। यह फ़र्क़ ही बताता है कि SIP में CAGR की जगह XIRR क्यों चुना जाता है। दोनों उदाहरण काल्पनिक हैं और वास्तविक रिटर्न अलग होंगे।