Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
एजुकेशन लोन और मोरेटोरियम
एजुकेशन लोन में आम तौर पर कोर्स की अवधि और उसके बाद 6–12 महीने तक EMI शुरू नहीं होती (मोरेटोरियम), पर ब्याज चलता रहता है। अगर आप इस दौरान ब्याज नहीं चुकाते तो वह मूलधन में जुड़ जाता है और फिर उसी पर EMI बनती है। नीचे का स्विच दोनों स्थितियाँ दिखाता है। कुछ योजनाओं में ब्याज पर सब्सिडी या कर-छूट मिल सकती है — बैंक और मौजूदा नियम जाँचें।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), with i = annual rate ÷ 12 ÷ 100 and n = years × 12 months; the schedule is run month by month (interest = balance × i, rest of the EMI repays principal), with the optional yearly prepayment taken off the balance at the end of each year. Car loan: loan = price − down payment. Education loan: simple interest during the course and moratorium is either paid during the course or added to the principal. Processing fee = fee % × loan, shown separately.
EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = साल × 12 महीने; भुगतान तालिका महीने-दर-महीने चलती है (ब्याज = बैलेंस × i, EMI का बाक़ी हिस्सा मूलधन चुकाता है), और वैकल्पिक सालाना प्रीपेमेंट हर साल के अंत में बैलेंस से घटता है। कार लोन: लोन = क़ीमत − डाउन पेमेंट। एजुकेशन लोन: कोर्स और मोरेटोरियम के दौरान साधारण ब्याज, जो या तो कोर्स के दौरान चुकाया जाता है या मूलधन में जुड़ जाता है। प्रोसेसिंग फ़ीस = फ़ीस % × लोन, अलग से दिखती है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Interest during the moratorium is shown as simple interest; banks differ in how they charge and capitalise it, and some schemes offer subsidies or tax deductions that are not included. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। मोरेटोरियम का ब्याज साधारण ब्याज की तरह दिखाया गया है; बैंक इसे अलग तरह से लगा और जोड़ सकते हैं, और सब्सिडी या कर-छूट इसमें शामिल नहीं हैं। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
एजुकेशन लोन में कोर्स और उसके बाद की छूट-अवधि (मोरेटोरियम) में EMI नहीं चलती, पर ब्याज चलता रहता है।
अगर उस दौरान ब्याज नहीं चुकाया तो वह मूलधन में जुड़ जाता है और फिर बड़ी रकम पर EMI बनती है।
पेज दोनों स्थितियाँ एक स्विच से दिखाता है, इसलिए फ़र्क़ अपनी आँख से देख सकते हैं।
ब्याज दर उदाहरण है। सब्सिडी, कर-छूट और बैंक की अपनी गणना इसमें शामिल नहीं हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
आरती: पेज की शुरुआती संख्याएँ, ब्याज जुड़ने दिया
आरती ₹10,00,000 का लोन 10% (उदाहरण दर) पर ले रही है। कोर्स 2 साल, छूट-अवधि 6 महीने, फिर 7 साल में चुकाना है। मोरेटोरियम में ब्याज नहीं भरा।
मोरेटोरियम (30 महीने) का ब्याज
₹2,50,000
EMI शुरू होने पर मूलधन
₹12,50,000
मासिक EMI
₹20,751
कुल ब्याज (मोरेटोरियम + EMI)
₹7,43,124
कुल वापसी
₹17,43,124
₹10 लाख का लोन EMI शुरू होने तक ₹12.5 लाख बन चुका था। इसी बड़ी रकम पर आगे ब्याज चला।
आरती का दूसरा रास्ता: कोर्स में ही ब्याज भरना
वही लोन, पर आरती (या परिवार) मोरेटोरियम में ब्याज हर महीने भरता है। स्विच "ब्याज चुकाना" चालू।
मूलधन EMI शुरू होने पर
₹10,00,000
मासिक EMI
₹16,601
कुल ब्याज (मोरेटोरियम + EMI)
₹6,44,499
कुल वापसी
₹16,44,499
पहले रास्ते की तुलना में बचत
₹98,625
कोर्स के दौरान 30 महीने लगभग ₹8,333 प्रति माह भरने से EMI ₹4,150 कम हो जाती है और कुल ब्याज ₹98,625 घटता है।
करण: लंबा कोर्स, बड़ा लोन
करण ₹20,00,000 का लोन 10.5% (उदाहरण दर) पर लेता है। कोर्स 4 साल, छूट-अवधि 12 महीने, चुकाना 10 साल में।
मोरेटोरियम (60 महीने) का ब्याज
₹10,50,000
ब्याज न भरने पर: मूलधन
₹30,50,000
ब्याज न भरने पर: EMI
₹41,155
ब्याज भरने पर: EMI
₹26,987
कुल वापसी: ब्याज न भरने पर बनाम भरने पर
₹49,38,621 बनाम ₹42,88,440
लंबे कोर्स में अनचुकाया ब्याज बड़ा हो जाता है। ₹20 लाख का लोन EMI शुरू होने तक ₹30.5 लाख हो चुका था।
मोरेटोरियम में जुड़ने वाला ब्याज (10% उदाहरण दर, साधारण ब्याज)
मोरेटोरियम में जुड़ने वाला ब्याज (10% उदाहरण दर, साधारण ब्याज)
लोन
18 महीने
30 महीने
42 महीने
54 महीने
₹5,00,000
₹75,000
₹1,25,000
₹1,75,000
₹2,25,000
₹10,00,000
₹1,50,000
₹2,50,000
₹3,50,000
₹4,50,000
₹20,00,000
₹3,00,000
₹5,00,000
₹7,00,000
₹9,00,000
मोरेटोरियम = कोर्स के महीने + कोर्स के बाद की छूट-अवधि। सूत्र: लोन × दर × महीने ÷ 12।
₹10 लाख, 10% उदाहरण दर, 30 महीने का मोरेटोरियम (ब्याज जुड़ने दिया)
₹10 लाख, 10% उदाहरण दर, 30 महीने का मोरेटोरियम (ब्याज जुड़ने दिया)
चुकाने की अवधि
मासिक EMI (₹)
कुल ब्याज (₹)
कुल वापसी (₹)
5 साल
26,559
5,93,528
15,93,528
7 साल
20,751
7,43,124
17,43,124
10 साल
16,519
9,82,261
19,82,261
कुल ब्याज में मोरेटोरियम का ₹2,50,000 भी शामिल है। प्रोसेसिंग फ़ीस इस तालिका में 0 मानी गई है।
त्वरित संदर्भ: एजुकेशन लोन और मोरेटोरियम
त्वरित संदर्भ: एजुकेशन लोन और मोरेटोरियम
मोरेटोरियम
कोर्स की अवधि + कोर्स के बाद की अतिरिक्त छूट-अवधि (महीनों में)
मोरेटोरियम का ब्याज
लोन × दर ÷ 100 × महीने ÷ 12 (पेज में साधारण ब्याज)
ब्याज जुड़ने दिया
EMI वाली मूल रकम = लोन + मोरेटोरियम का ब्याज
ब्याज चुकाया
EMI वाली मूल रकम = सिर्फ़ लोन; मोरेटोरियम का ब्याज आप अलग से भरते हैं
EMI का सूत्र
P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ P ऊपर वाली मूल रकम है
पूरी रकम शुरू में ही मिल गई मानी गई है। असल में रकम किस्तों में जारी हो सकती है।
इस पेज में क्या नहीं
सब्सिडी, कर-छूट, किस्तों में रकम जारी होने का असर, बैंक का ब्याज जोड़ने का अपना तरीक़ा
Education Loan EMI Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
एजुकेशन लोन बाक़ी लोन से एक बुनियादी बात में अलग है: उसकी EMI अक्सर तब शुरू नहीं होती जब पैसा मिलता है। विद्यार्थी पढ़ाई कर रहा होता है, कमाई नहीं है, इसलिए बैंक कोर्स की अवधि और उसके बाद कुछ महीनों तक किस्त नहीं माँगते। इस दौर को मोरेटोरियम या छूट-अवधि कहते हैं। पर ध्यान रहे, किस्त रुकने का मतलब ब्याज रुकना नहीं है। ब्याज इस दौरान भी चलता रहता है।
Education Loan EMI Calculator इसी बात को सामने रखता है। आप लोन की रकम, ब्याज दर, कोर्स की अवधि, कोर्स के बाद की छूट-अवधि और बाद में चुकाने की अवधि डालते हैं। calculator बताता है कि मोरेटोरियम के दौरान कितना ब्याज बनेगा, EMI शुरू होने पर आपका मूलधन कितना हो चुका होगा, EMI कितनी आएगी और पूरे लोन की कुल लागत क्या होगी। एक स्विच से आप यह भी चुन सकते हैं कि मोरेटोरियम के दौरान ब्याज भरेंगे या उसे लोन में जुड़ने देंगे।
ध्यान दें: जो ब्याज मोरेटोरियम में नहीं चुकाया जाता, वह लोन के मूलधन में जुड़ जाता है। फिर आगे की EMI इसी बड़े मूलधन पर बनती है और उस पर भी ब्याज लगता है। यही वजह है कि एजुकेशन लोन की असली लागत अक्सर शुरुआती अनुमान से ज़्यादा निकलती है।
किसके काम का है
12वीं के बाद इंजीनियरिंग, मेडिकल, MBA या विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहा विद्यार्थी और उसके माता-पिता।
जो पहले से लोन ले चुके हैं और समझना चाहते हैं कि कोर्स पूरा होने पर EMI कितनी आएगी।
अलग-अलग कोर्स या कॉलेज की फ़ीस की तुलना करने वाले परिवार, जो देखना चाहते हैं कि कितना लोन लेना ठीक रहेगा।
वे माता-पिता जो सोच रहे हैं कि पढ़ाई के दौरान सिर्फ़ ब्याज भरते रहें या नहीं।
ऐसे विद्यार्थी जो नौकरी लगने पर कितनी जल्दी लोन चुका पाएँगे, इसका अंदाज़ा लगाना चाहते हैं।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
यहाँ सात स्लाइडर और एक स्विच है।
लोन की रकम (₹): ₹1 लाख से ₹1.5 करोड़ तक, ₹50,000 के कदम में, शुरुआती ₹10 लाख। इसमें कुल लिया गया लोन डालें (फ़ीस, हॉस्टल और जो भी बैंक मंज़ूर करे)।
ब्याज दर (% सालाना): 7% से 15%, 0.1 के कदम में, शुरुआती 10%। बैंक, कोर्स, कॉलेज और सह-आवेदक की स्थिति के हिसाब से दर बदलती है।
कोर्स की अवधि (साल): 1 से 6 साल, शुरुआती 2।
कोर्स के बाद अतिरिक्त छूट-अवधि (महीने): 0 से 12 महीने, शुरुआती 6। यह वह समय है जो नौकरी खोजने के लिए कोर्स के बाद मिलता है।
मोरेटोरियम के बाद चुकाने की अवधि (साल): 0 से 15 साल, शुरुआती 7। यानी EMI कितने साल चलेगी।
अतिरिक्त महीने (साल के ऊपर): 0 से 11, ताकि चुकाने की अवधि 7 साल 6 महीने जैसी भी हो सके।
प्रोसेसिंग फ़ीस (लोन का %): 0% से 2%, शुरुआती 0%। कई शिक्षा लोन पर फ़ीस नहीं होती या कम होती है।
मोरेटोरियम के दौरान ब्याज चुकाना (स्विच): बंद हो तो ब्याज लोन में जुड़ता है; चालू हो तो आप उसे हर महीने ख़ुद भरते हैं।
इस पेज पर प्रीपेमेंट की कोई अलग स्लाइडर नहीं है। इसलिए यहाँ का नतीजा नियमित EMI की योजना दिखाता है।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर बड़ा आँकड़ा मासिक EMI है, और उसके साथ लिखा होता है कि वह "मोरेटोरियम (X महीने) के बाद शुरू" होगी। यह X कोर्स के साल × 12 में छूट-अवधि के महीने जोड़कर बनता है।
नीचे की पंक्तियाँ:
लोन की रकम: जो आपने डाली।
मोरेटोरियम (X महीने) के दौरान ब्याज: पूरे मोरेटोरियम का साधारण ब्याज।
EMI शुरू होने पर मूलधन: अगर आप ब्याज भर रहे हैं (स्विच चालू), तो यह मूल रकम ही रहती है। अगर स्विच बंद है, तो यहाँ लिखा होगा "ब्याज जुड़ने के बाद" का बढ़ा हुआ मूलधन।
कुल ब्याज (मोरेटोरियम + EMI): दोनों दौरों का ब्याज मिलाकर।
प्रोसेसिंग फ़ीस: अगर शून्य से ज़्यादा हो।
कुल वापसी (मूलधन + ब्याज + फ़ीस): पूरे शिक्षा लोन की असली लागत।
पाई चार्ट में मूलधन, ब्याज और फ़ीस दिखते हैं। साल-दर-साल का चार्ट और तालिका सिर्फ़ EMI वाले सालों को दिखाती है, यानी मोरेटोरियम के बाद का दौर।
पढ़ने का तरीका: स्विच बंद-चालू करके दो नतीजे बगल-बगल रखें। "EMI शुरू होने पर मूलधन" और "कुल वापसी" में जो अंतर दिखे, वही मोरेटोरियम का ब्याज न चुकाने की क़ीमत है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
सबसे पहले स्विच से खेलें
अपने कोर्स के आँकड़े डालकर स्विच चालू और बंद करके दोनों कुल वापसी देखें। अगर परिवार हर महीने थोड़ा-सा ब्याज भर सके, तो अक्सर कुल लागत काफ़ी घटती है। अगर नहीं भर सकते, तो भी दिखे कि बाद में बढ़ी हुई EMI के लिए तैयार रहना है।
लोन उतना ही लें जितना ज़रूरी हो
कुल फ़ीस, हॉस्टल और किताबों का हिसाब लगाकर लोन तय करें। जो हिस्सा परिवार की बचत या छात्रवृत्ति से आ सकता है, उसे लोन से बाहर रखें। इस calculator में रकम घटाकर देखें कि EMI कैसे बदलती है।
नौकरी के वेतन से तुलना करें
कोर्स के बाद आम तौर पर कितना वेतन मिल सकता है, इसका यथार्थवादी अंदाज़ा लगाएँ और देखें कि EMI उसके कितने प्रतिशत में आती है। अगर EMI वेतन का बहुत बड़ा हिस्सा खा रही हो, तो अवधि बढ़ाएँ या लोन घटाएँ।
कोर्स की अवधि के हिसाब से देखें
एक साल का कोर्स और चार साल का कोर्स मोरेटोरियम के ब्याज को बहुत अलग कर देते हैं। अलग-अलग विकल्पों को बगल-बगल रखकर तुलना करें।
सह-आवेदक और दर
सह-आवेदक (आम तौर पर माता-पिता) की आमदनी और क्रेडिट इतिहास दर पर असर डाल सकते हैं। अलग-अलग बैंक की दरें स्लाइडर में डालकर देखें कि 0.5-1% का फ़र्क़ कितना बड़ा बन जाता है।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"कोर्स के बाद EMI शुरू होगी" को "तब तक कोई खर्च नहीं" समझना। मोरेटोरियम में ब्याज चलता रहता है।
सिर्फ़ मूल लोन की रकम देखकर EMI का अंदाज़ा लगाना। अगर ब्याज जुड़ गया, तो EMI बढ़े हुए मूलधन पर बनती है।
छूट-अवधि को जोखिम-मुक्त समझना। नौकरी न लगे तब भी छूट-अवधि सीमित है; उसके बाद किस्त शुरू होनी ही है।
सिर्फ़ ब्याज दर देखना। फ़ीस, बीमा और अन्य शुल्क भी जोड़कर देखें।
लोन को पूरी फ़ीस के बराबर ले लेना। कई बार किस्तों में वितरण होता है, जिससे शुरुआती ब्याज कम बनता है। यह calculator पूरी रकम एक साथ मानता है, इसलिए असली मोरेटोरियम ब्याज कम हो सकता है।
ब्याज के कर-लाभ को मान लेना। शिक्षा लोन के ब्याज पर कर-लाभ का नियम बदलता रहता है और आपकी कर-व्यवस्था पर निर्भर है। इसे Income Tax Department की जानकारी से जाँचें, यह calculator इसे नहीं गिनता।
सरकारी सब्सिडी योजनाओं को शामिल मानना। कुछ योजनाएँ ब्याज पर अनुदान देती हैं, पर वे यहाँ शामिल नहीं हैं और पात्रता तथा नियम बदल सकते हैं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
मोरेटोरियम के महीने = कोर्स के साल × 12 + छूट-अवधि के महीने।
मोरेटोरियम का ब्याज साधारण ब्याज की तरह निकाला जाता है: लोन × दर ÷ 100 × महीने ÷ 12। यानी इस दौरान चक्रवृद्धि नहीं मानी गई है।
अगर स्विच बंद है: प्रभावी मूलधन = लोन + मोरेटोरियम का ब्याज। अगर चालू है: प्रभावी मूलधन = सिर्फ़ लोन (आप ब्याज ख़ुद भर रहे हैं)।
EMI = प्रभावी मूलधन × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 1200 और n = चुकाने के साल × 12 + अतिरिक्त महीने।
EMI वाले दौर का ब्याज महीने-दर-महीने चलाकर निकाला जाता है।
कुल ब्याज = EMI दौर का ब्याज + मोरेटोरियम का साधारण ब्याज। कुल वापसी = लोन + कुल ब्याज + फ़ीस।
फ़ीस = लोन की मूल रकम × फ़ीस %।
पेज पर साफ़ चेतावनी है कि मोरेटोरियम का ब्याज यहाँ साधारण ब्याज के रूप में दिखाया गया है; बैंक इसे अलग तरह से लगा और जोड़ सकते हैं। कुछ योजनाओं में सब्सिडी या कर-छूट भी होती है, जो इसमें शामिल नहीं है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए दीपक की बेटी अंजलि को देश के एक अच्छे संस्थान में दो साल के MBA में प्रवेश मिला है। पूरे कोर्स के लिए ₹18 लाख का लोन चाहिए, बैंक की दर 9.5% है। कोर्स 2 साल का है, कोर्स के बाद 6 महीने की छूट मिलती है, और अंजलि नौकरी लगने पर 8 साल में लोन चुकाना चाहती हैं।
मोरेटोरियम
मोरेटोरियम = 2 × 12 + 6 = 30 महीने।
साधारण ब्याज = 18,00,000 × 9.5% × 30 ÷ 12 = ₹4,27,500। यानी लगभग ₹14,250 हर महीने।
विकल्प 1: ब्याज लोन में जुड़ने दें (स्विच बंद)
प्रभावी मूलधन = 18,00,000 + 4,27,500 = ₹22,27,500।
96 महीनों की EMI ≈ ₹33,214।
EMI दौर का ब्याज ≈ ₹9,61,044; कुल ब्याज ≈ ₹13,88,544।
कुल वापसी ≈ ₹31,88,544।
विकल्प 2: पढ़ाई के दौरान ब्याज भरें (स्विच चालू)
माता-पिता 30 महीने तक हर महीने लगभग ₹14,250 भरते हैं (कुल ₹4,27,500)।
मूलधन ₹18,00,000 ही रहता है। EMI ≈ ₹26,840।
EMI दौर का ब्याज ≈ ₹7,76,601; कुल ब्याज ≈ ₹12,04,101।
कुल वापसी ≈ ₹30,04,101।
दोनों में फ़र्क़: विकल्प 2 में कुल लागत लगभग ₹1,84,443 कम है और बाद की EMI लगभग ₹6,374 प्रति माह कम। पर उसकी क़ीमत यह है कि पढ़ाई के दौरान हर महीने ₹14,250 का इंतज़ाम करना होगा।
दूसरे बदलाव
चुकाने की अवधि 8 की जगह 10 साल (विकल्प 1): EMI ≈ ₹28,823, पर कुल वापसी ≈ ₹34,58,797।
अवधि 6 साल: EMI ≈ ₹40,707, कुल वापसी ≈ ₹29,30,895।
दर 8.5% बनाम 10.5% (8 साल, विकल्प 1): EMI ≈ ₹31,411 बनाम ₹35,087; कुल वापसी ≈ ₹30,15,439 बनाम ₹33,68,394।
छूट-अवधि 6 की जगह 12 महीने: मोरेटोरियम 36 महीने हो जाता है, साधारण ब्याज ₹5,13,000 और EMI ≈ ₹34,489।
इन आँकड़ों से समझ आता है कि छूट-अवधि का हर अतिरिक्त महीना भी ब्याज के रूप में कीमत माँगता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह नहीं बताता कि कितना लोन मंज़ूर होगा, कौन-सा कॉलेज योग्य है या बैंक कौन-सी दर देगा।
मोरेटोरियम का ब्याज साधारण ब्याज माना गया है और लोन की पूरी रकम शुरू से बकाया मानी गई है।
किस्तों में वितरण, अलग-अलग सेमेस्टर की फ़ीस के हिसाब से ब्याज का बदलना शामिल नहीं है।
सब्सिडी, कर-छूट, बीमा, गारंटी शुल्क और देरी के शुल्क शामिल नहीं हैं।
प्रीपेमेंट का विकल्प इस पेज पर नहीं है।
विदेश में पढ़ाई के लिए विनिमय दर के बदलाव और दूसरी मुद्रा का असर शामिल नहीं है।
कोर्स के बाद नौकरी या वेतन की कोई गारंटी नहीं है; यह आपकी योजना बनाने की चीज़ है।
यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश, टैक्स, कर्ज़ या कानूनी सलाह नहीं है, और नतीजे अनुमान हैं। लोन लेने से पहले बैंक की शर्तें और योजना के नियम ध्यान से पढ़ें।
6 काम की बातें याद रखें
1
कोर्स के दौरान ब्याज भरने की गुंजाइश देखें
अगर पार्ट-टाइम कमाई या परिवार का सहारा हो तो मोरेटोरियम में ब्याज भरने से EMI और कुल ब्याज दोनों घटते हैं।
2
छूट-अवधि को लंबा न मान लें
छूट-अवधि के हर अतिरिक्त महीने में ब्याज जुड़ता है। नौकरी जल्दी मिलने की उम्मीद हो तो हिसाब कम महीनों से भी चलाकर देखें।
3
पहली नौकरी की तनख़्वाह से EMI परखें
EMI तब शुरू होगी जब आमदनी नई-नई होगी। अपेक्षित पहली तनख़्वाह के मुक़ाबले EMI कितनी बड़ी है, यह पहले से देख लें।
4
कुल लोन की रकम सोच-समझकर लें
सबसे ऊँची रकम का लोन लेना ज़रूरी नहीं। फ़ीस, हॉस्टल और किताबों का असली बजट बनाकर उतना ही लें जितना चाहिए।
5
सब्सिडी और कर-छूट अलग से देखें
कुछ योजनाओं में ब्याज पर सब्सिडी या कर-छूट मिल सकती है। यह पेज उन्हें नहीं गिनता, इसलिए बैंक और मौजूदा नियम से पुष्टि करें।
6
नौकरी लगने के बाद प्रीपेमेंट
तनख़्वाह बढ़ने पर अतिरिक्त चुकाने से लोन जल्दी निपटता है। पेज के प्रीपेमेंट स्लाइडर से इसका असर देखें।
आम तौर पर हाँ। कोर्स की अवधि और उसके बाद कुछ महीनों तक EMI नहीं देनी होती, पर ब्याज चलता है; न चुकाने पर वह मूलधन में जुड़ सकता है।
चुकाने पर मूलधन नहीं बढ़ता और कुल ब्याज कम रहता है, पर इसके लिए उस दौरान नक़दी चाहिए। calculator में दोनों स्थितियाँ दिखती हैं।
पेज में "कोर्स की अवधि" और "कोर्स के बाद अतिरिक्त छूट-अवधि" अलग डाले जाते हैं। इन दोनों का जोड़ ही कुल मोरेटोरियम है, जिसमें EMI नहीं चलती।
साधारण ब्याज की तरह: लोन × दर × महीने ÷ 12 ÷ 100। बैंक इसे महीने-दर-महीने या अलग तरीक़े से लगा और जोड़ सकते हैं, इसलिए उनकी संख्या थोड़ी अलग हो सकती है।
चालू करने पर माना जाता है कि आप मोरेटोरियम का ब्याज साथ-साथ भरते हैं, इसलिए EMI सिर्फ़ मूल लोन पर बनती है। बंद रखने पर ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है।
पेज में बीच का विकल्प नहीं है। मोटा अंदाज़ा पाने के लिए दोनों स्थितियाँ चलाएँ; आपकी असली EMI इन दोनों के बीच कहीं आएगी।
अक्सर नहीं। रकम सेमेस्टर या फ़ीस के हिसाब से किस्तों में जारी हो सकती है, तब ब्याज कम रकम पर लगता है। यह पेज पूरी रकम शुरू से मानकर थोड़ा ऊँचा ब्याज दिखा सकता है।
कई शिक्षा-ऋण योजनाओं में फ़ीस कम या शून्य होती है, इसलिए पेज 0 से शुरू होता है। अपने बैंक की फ़ीस हो तो स्लाइडर में डालें।
मोरेटोरियम ख़त्म होने के बाद अगले महीने से, यानी कोर्स की अवधि और छूट-अवधि पूरी होने पर। सटीक तारीख़ बैंक का स्वीकृति-पत्र बताता है।
पेज ऐसी स्थितियाँ नहीं जानता। कोर्स की अवधि बदलने पर उस नई अवधि के हिसाब से दोबारा चलाएँ और बैंक से शर्तें पूछें।
आम तौर पर कई योजनाओं में दर अन्य असुरक्षित कर्ज़ों से कम हो सकती है, पर यह संस्थान, देश, रकम और गारंटर पर निर्भर है। इसलिए यहाँ दर सिर्फ़ उदाहरण है।
गणित हाँ, चलेगा। पर विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और विदेश में अलग ख़र्च इसमें नहीं हैं, तो रुपये की रकम अंदाज़े से बड़ी रखना बेहतर है।
नहीं। मंज़ूरी, गारंटर, संपत्ति की शर्तें और सब्सिडी पात्रता बैंक और योजना के नियमों पर निर्भर हैं।
नहीं। शिक्षा-ऋण के ब्याज पर छूट का नियम आपके कर-विकल्प पर निर्भर है और बदलता रहता है। उसे कर-विशेषज्ञ या आधिकारिक वेबसाइट से जाँचें।
EMI शुरू होने के बाद हर साल के अंत में तय रकम बैलेंस से घटाता है। इससे लोन जल्दी बंद होता है और बचा ब्याज पेज में दिखता है।
EMI छोटी होती है, पर ब्याज बहुत बढ़ता है। ऊपर की तालिका में 5, 7 और 10 साल की तुलना है। पहली नौकरी की तनख़्वाह के हिसाब से संतुलन चुनें।
अक्सर बैंक सह-आवेदक माँगते हैं, पर यह योजना पर निर्भर है। इसका EMI के हिसाब पर असर नहीं पड़ता; यह पेज सिर्फ़ गणित है।