कर्ज़ और लोन

क्रेडिट कार्ड डेट से कैसे बाहर निकलें? पूरी स्ट्रैटेजी

How to Get Out of Credit Card Debt: A Complete Strategy

ASHA PaisaGyan Editorial Team 20 Sep 2026 Updated: 02 Nov 2026 8 min read 27 views
क्रेडिट कार्ड डेट से कैसे बाहर निकलें? पूरी स्ट्रैटेजी
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क्रेडिट कार्ड डेट में फंस गए हैं? जानें अवलांच और स्नोबॉल मेथड, बैलेंस ट्रांसफर, और डेट-फ्री होने की प्रैक्टिकल स्टेप-बाय-स्टेप स्ट्रैटेजी।

Contents

क्रेडिट कार्ड डेट भारत में तेज़ी से बढ़ती हुई एक समस्या है। शुरुआत में यह "सिर्फ मिनिमम ड्यू पे कर देता हूं" जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसे चक्र में बदल जाता है जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है — क्योंकि क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट रेट्स आमतौर पर 30-46% सालाना तक होती हैं, जो किसी भी दूसरे लोन से कहीं ज़्यादा है। इस आर्टिकल में हम प्रैक्टिकल, स्टेप-बाय-स्टेप तरीके देखेंगे जिनसे आप क्रेडिट कार्ड डेट से बाहर निकल सकते हैं और भविष्य में इससे बच सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड डेट इतनी खतरनाक क्यों है?

क्रेडिट कार्ड डेट की सबसे बड़ी समस्या है उसकी कंपाउंडिंग नेचर। अगर आप सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करते हैं (जो आमतौर पर टोटल आउटस्टैंडिंग का 5% होता है), तो बाकी अमाउंट पर अगले महीने भी भारी इंटरेस्ट लगता रहता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका आउटस्टैंडिंग ₹50,000 है और आप सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करते रहें, तो पूरा अमाउंट चुकाने में सालों लग सकते हैं, और आप इंटरेस्ट के रूप में ओरिजिनल अमाउंट से भी ज़्यादा पे कर सकते हैं।

इसके अलावा, अगर आप ड्यू डेट पर पूरा पेमेंट नहीं करते, तो आपका क्रेडिट स्कोर भी गिरना शुरू हो जाता है, जो भविष्य में होम लोन या किसी और ज़रूरी लोन को मुश्किल बना सकता है।

डेट ट्रैप में फंसने की सबसे आम वजहें

ज़्यादातर लोग जानबूझकर डेट में नहीं फंसते — यह धीरे-धीरे, छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है। कुछ सबसे कॉमन कारण हैं: ईएमआई पर सामान खरीदने की आदत (जिससे हर महीने की कमिटेड पेमेंट्स बढ़ती जाती हैं), लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन (सैलरी बढ़ने के साथ खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ जाना), बिना ज़रूरत के इंपल्स शॉपिंग (खासकर ऑनलाइन सेल्स के दौरान), और किसी इमरजेंसी के लिए तैयार ना होना (जिससे इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड ही एकमात्र सहारा बन जाता है)। इन पैटर्न्स को पहचानना ही पहला कदम है बदलाव की तरफ, क्योंकि जब तक आप उस मूल आदत को नहीं बदलते जिसने डेट पैदा किया, तब तक डेट क्लियर करने के बाद भी उसमें दोबारा फंसने का खतरा बना रहता है।

क्रेडिट कार्ड डेट से बाहर निकलने के स्टेप-बाय-स्टेप तरीके

स्टेप 1: पूरी स्थिति को साफ-साफ समझें

सबसे पहले अपने सारे क्रेडिट कार्ड्स की टोटल आउटस्टैंडिंग अमाउंट, इंटरेस्ट रेट, और मिनिमम ड्यू लिख लें। बहुत बार लोग सिर्फ एक कार्ड पर फोकस करते हैं जबकि उनके 2-3 अलग कार्ड्स में डेट फैला होता है। पूरी पिक्चर देखे बिना सही स्ट्रैटेजी नहीं बनाई जा सकती।

स्टेप 2: नया खर्च रोकें

जब तक आप अपना एक्ज़िस्टिंग डेट क्लियर नहीं कर लेते, नए खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बंद कर दें। हो सके तो कार्ड को टेम्पररिली फ्रीज़ कर दें या घर पर कहीं रख दें ताकि इंपल्स स्पेंडिंग ना हो।

स्टेप 3: डेट रीपेमेंट स्ट्रैटेजी चुनें

दो पॉपुलर स्ट्रैटेजीज़ हैं:

  1. अवलांच मेथड: सबसे पहले उस कार्ड को पे करें जिसका इंटरेस्ट रेट सबसे ज़्यादा है, बाकी कार्ड्स पर सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करते रहें। यह तरीका मैथमेटिकली सबसे ज़्यादा पैसा बचाता है।
  2. स्नोबॉल मेथड: सबसे पहले सबसे छोटे आउटस्टैंडिंग अमाउंट वाले कार्ड को पूरा क्लियर करें, फिर अगले पर जाएं। यह तरीका साइकोलॉजिकली मोटिवेटिंग होता है क्योंकि आपको जल्दी-जल्दी "विन्स" मिलते रहते हैं।

दोनों में से कोई भी तरीका काम करता है — जो आपको ज़्यादा सस्टेनेबल लगे, वही चुनें।

स्टेप 4: बैलेंस ट्रांसफर या पर्सनल लोन पर विचार करें

अगर आपका क्रेडिट कार्ड डेट बहुत बड़ा है, तो एक पर्सनल लोन लेकर उससे क्रेडिट कार्ड डेट क्लियर करना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि पर्सनल लोन की इंटरेस्ट रेट (आमतौर पर 10-18%) क्रेडिट कार्ड की रेट (30-46%) से काफी कम होती है। कई बैंक्स क्रेडिट कार्ड डेट को दूसरे कार्ड पर "बैलेंस ट्रांसफर" करने की सुविधा भी देते हैं, अक्सर कुछ महीनों के लिए कम या ज़ीरो इंटरेस्ट के साथ — लेकिन इसकी टर्म्स ध्यान से पढ़ें।

स्टेप 5: एक रियलिस्टिक बजट बनाएं

अपनी मंथली इनकम में से एक फिक्स्ड अमाउंट डेट रीपेमेंट के लिए अलग रखें। हमारे 50-30-20 बजट कैलकुलेटर का इस्तेमाल करके देखें कि आप अपनी इनकम को कैसे बेहतर तरीके से अलोकेट कर सकते हैं ताकि डेट रीपेमेंट के लिए ज़्यादा पैसा बचे।

स्टेप 6: एक्स्ट्रा इनकम सोर्सेज़ ढूंढें

अगर संभव हो, तो कुछ समय के लिए एक साइड इनकम या फ्रीलांस वर्क शुरू करें, और उस एक्स्ट्रा पैसे को सीधे डेट रीपेमेंट में लगाएं। इससे आप अपने डेट-फ्री होने के टाइम को काफी कम कर सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल कैसे करें

  1. हर महीने पूरा बिल पे करें, सिर्फ मिनिमम ड्यू नहीं: अगर आप हर महीने पूरा आउटस्टैंडिंग क्लियर करते हैं, तो आपको कभी कोई इंटरेस्ट नहीं देना पड़ता।
  2. क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन 30% से कम रखें: अगर आपकी क्रेडिट लिमिट ₹1 लाख है, तो कोशिश करें कि किसी भी समय आउटस्टैंडिंग ₹30,000 से ज़्यादा ना हो — इससे क्रेडिट स्कोर भी अच्छा रहता है।
  3. ड्यू डेट से पहले पेमेंट करें: ऑटो-डेबिट या रिमाइंडर सेट करें ताकि कभी भी ड्यू डेट मिस ना हो।
  4. कितने कार्ड्स रखने हैं, सोच-समझकर डिसाइड करें: बहुत सारे कार्ड्स रखने से ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है और गलती की संभावना बढ़ जाती है।

इंटरेस्ट कैसे कैलकुलेट होता है — एक डिटेल्ड उदाहरण

बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि क्रेडिट कार्ड इंटरेस्ट असल में कैसे कैलकुलेट होता है, और यही वजह है कि वे इसे हल्के में ले लेते हैं। मान लीजिए आपका आउटस्टैंडिंग ₹50,000 है और इंटरेस्ट रेट 3.5% प्रति महीना (यानी लगभग 42% सालाना) है। अगर आप सिर्फ 5% यानी ₹2,500 मिनिमम ड्यू पे करते हैं, तो बाकी ₹47,500 पर अगले महीने फिर से 3.5% इंटरेस्ट लगेगा — यानी लगभग ₹1,662 का एक्स्ट्रा चार्ज। यह सिलसिला हर महीने चलता रहता है, और चूंकि इंटरेस्ट पूरे आउटस्टैंडिंग अमाउंट पर लगता है (ना कि सिर्फ बचे हुए प्रिंसिपल पर), यह बहुत तेज़ी से बढ़ता है।

इसके अलावा, एक ज़रूरी बात यह भी समझनी चाहिए — अगर आपने अपना पिछला बिल पूरा पे नहीं किया, तो अगली खरीदारी पर भी वह "इंटरेस्ट-फ्री पीरियड" (जो आमतौर पर 45-50 दिन का होता है) खत्म हो जाता है, और नई खरीदारी पर भी दिन 1 से ही इंटरेस्ट लगना शुरू हो जाता है। यही वजह है कि एक बार पार्शियल पेमेंट करने के बाद डेट इतनी तेज़ी से बढ़ने लगता है।

क्या आप डेट ट्रबल में हैं? — वॉर्निंग साइंस

कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे डेट ट्रैप में फंसते जा रहे हैं, जब तक स्थिति काफी गंभीर ना हो जाए। कुछ वॉर्निंग साइंस जिन पर ध्यान देना चाहिए:

  1. आप लगातार कई महीनों से सिर्फ मिनिमम ड्यू पे कर रहे हैं
  2. आप एक कार्ड का बिल पे करने के लिए दूसरे कार्ड से कैश विड्रॉ या खर्च कर रहे हैं
  3. आपकी टोटल मंथली ईएमआई/डेट पेमेंट्स आपकी इनकम के 50% से ज़्यादा हो गई हैं
  4. आप अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट खोलने से भी डरने लगे हैं
  5. आपने अपनी इमरजेंसी फंड या इन्वेस्टमेंट्स को डेट चुकाने के लिए तोड़ना शुरू कर दिया है

अगर इनमें से दो या ज़्यादा बातें आप पर लागू होती हैं, तो यह समय है कि आप एक स्ट्रक्चर्ड डेट रीपेमेंट प्लान बनाना शुरू करें, ताकि स्थिति और बिगड़ने से पहले कंट्रोल में आ जाए।

अपने बैंक से नेगोशिएट करना — एक अंडरयूज़्ड ऑप्शन

बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर आप अपने बैंक से सीधे बात करें, तो कई बार वे आपकी मदद करने को तैयार हो जाते हैं — खासकर अगर आपका पुराना पेमेंट हिस्ट्री ठीक रहा हो। आप निम्न चीज़ों के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं:

  1. इंटरेस्ट रेट कम करना: कुछ बैंक्स लॉयल कस्टमर्स के लिए थोड़ी कम रेट पर राज़ी हो जाते हैं।
  2. ईएमआई कन्वर्ज़न: बड़ा आउटस्टैंडिंग अमाउंट कई बैंक्स आपके लिए फिक्स्ड ईएमआई में कन्वर्ट कर देते हैं, जिससे इंटरेस्ट रेट क्रेडिट कार्ड की तुलना में कम हो जाती है।
  3. पेमेंट प्लान रीस्ट्रक्चरिंग: अगर आप जेन्युइनली मुश्किल स्थिति में हैं, तो बैंक एक एक्सटेंडेड पेमेंट प्लान भी ऑफर कर सकता है।

इस बातचीत से हिचकिचाएं नहीं — बैंक्स भी चाहते हैं कि आप डिफॉल्ट ना करें, इसलिए वे अक्सर रीज़नेबल सॉल्यूशंस के लिए तैयार रहते हैं।

एक काल्पनिक (समझाने के लिए) उदाहरण — संजय की डेट-फ्री जर्नी

संजय के पास 3 अलग-अलग क्रेडिट कार्ड्स थे, जिनका टोटल आउटस्टैंडिंग लगभग ₹2.5 लाख हो गया था। शुरुआत में वो सिर्फ हर कार्ड पर मिनिमम ड्यू पे कर रहे थे, जिससे डेट लगातार बढ़ता जा रहा था। जब उन्होंने कैलकुलेट किया कि इस तरीके से पूरा डेट क्लियर करने में उन्हें 8-9 साल लग सकते हैं और वो इंटरेस्ट में ही ₹3 लाख से ज़्यादा पे कर देंगे, तो उन्होंने अपनी स्ट्रैटेजी बदली।

उन्होंने एक पर्सनल लोन लिया (12% इंटरेस्ट रेट पर) जिससे उन्होंने सारे क्रेडिट कार्ड्स का आउटस्टैंडिंग क्लियर कर दिया। फिर उन्होंने पर्सनल लोन की फिक्स्ड ईएमआई पर फोकस किया, साथ ही कुछ महीनों के लिए फ्रीलांस काम भी शुरू किया जिससे एक्स्ट्रा पैसे से प्रीपेमेंट करते रहे। 2.5 साल के अंदर संजय पूरी तरह डेट-फ्री हो गए — जो पुरानी स्ट्रैटेजी से 6+ साल जल्दी था, और उन्होंने लाखों रुपये इंटरेस्ट में बचाए।

क्रेडिट कार्ड डेट को लेकर आम गलतफहमियां

  1. "सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करना सेफ है": यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। मिनिमम ड्यू पे करते रहने से आप टेक्निकली "डिफॉल्ट" नहीं होते, लेकिन बाकी अमाउंट पर भारी इंटरेस्ट लगता रहता है।
  2. "एक नया कार्ड लेकर पुराने का डेट चुका देता हूं तो सब ठीक है": यह सिर्फ प्रॉब्लम को आगे धकेलता है, सॉल्व नहीं करता — जब तक आप नए खर्च ना रोकें।
  3. "क्रेडिट कार्ड कैंसिल कर देने से मेरा डेट खत्म हो जाएगा": कार्ड कैंसिल करने से एक्ज़िस्टिंग आउटस्टैंडिंग अमाउंट खत्म नहीं होता, आपको फिर भी पे करना पड़ता है।


निष्कर्ष / Conclusion

क्रेडिट कार्ड डेट से बाहर निकलना मुश्किल लग सकता है, लेकिन एक क्लियर स्ट्रैटेजी, डिसिप्लिन, और थोड़े पेशेंस के साथ यह पूरी तरह संभव है। सबसे ज़रूरी कदम है समस्या को ऑनेस्टली स्वीकार करना, नया खर्च रोकना, और एक स्ट्रक्चर्ड रीपेमेंट प्लान के साथ आगे बढ़ना। एक बार आप डेट-फ्री हो जाएं, तो क्रेडिट कार्ड को एक टूल की तरह रिस्पॉन्सिबली इस्तेमाल करना सीखें — ना कि एक ऐसी चीज़ जो आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम को पीछे धकेल दे। हर महीने पूरा बिल समय पर पे करने की आदत डालें, अपनी स्पेंडिंग लिमिट्स खुद तय करें, और याद रखें — क्रेडिट कार्ड एक अच्छा फाइनेंशियल टूल तभी है जब इसे आप कंट्रोल करें, ना कि यह आपको कंट्रोल करे।

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English Summary

How to Get Out of Credit Card Debt: A Complete Strategy

This article explains why credit card debt is so dangerous due to compounding high interest rates, and lays out a step-by-step plan to pay it down using the avalanche or snowball method. It also covers warning signs that you're in financial trouble, how to negotiate with your bank, and common misconceptions about credit card debt, illustrated through a real person's journey to becoming debt-free.

Quick Summary
• क्रेडिट कार्ड पर 30-46% सालाना तक इंटरेस्ट लगता है • सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करना डेट ट्रैप की तरफ ले जाता है • अवलांच या स्नोबॉल मेथड से स्ट्रक्चर्ड रीपेमेंट करें • पर्सनल लोन या बैलेंस ट्रांसफर से भी इंटरेस्ट बचा सकते हैं
😄 एक हंसी का तड़का!

दोस्त: यार, तेरा क्रेडिट कार्ड बिल कितना आया?

दूसरा: पूछ मत भाई, बिल देखकर लगा जैसे मैंने कार्ड नहीं, कार्ड ने मुझे स्वाइप कर दिया! 😂
🧩 दिमाग़ की बत्ती जलाओ — पहेली!

पहले आसान लगता हूं, स्वाइप करते ही खुशी मिलती है। पर समय पर ना चुकाओ तो, ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है। बताओ तो सही, मैं हूं कौन?

💡 Hint: यह वह कर्ज़ है जो credit card को समय पर पूरा ना चुकाने से बढ़ता जाता है — इसी से बाहर निकलने का तरीका यह article बताता है।

✅ क्रेडिट कार्ड डेट (Credit Card Debt)
🧠 Quick Quiz — कितना याद रहा?
00:00
Question 1/5

1. क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर कितना सालाना इंटरेस्ट लग सकता है?

क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर 30-46% तक सालाना इंटरेस्ट लग सकता है, जो बहुत ज़्यादा है।

2. सिर्फ मिनिमम ड्यू पे करते रहने से क्या होता है?

मिनिमम ड्यू पे करने पर बाकी बकाया अमाउंट पर भारी इंटरेस्ट लगता रहता है, जिससे डेट बढ़ता जाता है।

3. "अवलांच मेथड" में डेट रीपेमेंट किस क्रम में की जाती है?

अवलांच मेथड में सबसे ज़्यादा इंटरेस्ट रेट वाले डेट को पहले चुकाया जाता है, जिससे टोटल इंटरेस्ट सबसे कम लगता है।

4. "स्नोबॉल मेथड" का क्या फायदा है?

स्नोबॉल मेथड में छोटे डेट पहले खत्म होते हैं, जिससे मनोवैज्ञानिक मोटिवेशन बना रहता है।

5. क्रेडिट कार्ड डेट कम करने के लिए एक और उपाय क्या हो सकता है?

कम इंटरेस्ट वाला पर्सनल लोन लेकर हाई-इंटरेस्ट क्रेडिट कार्ड डेट चुकाने से टोटल इंटरेस्ट कम हो सकता है।
⚠️ Common Mistakes vs Best Practices
❌ सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहना
✅ जितना हो सके उतना एक्स्ट्रा पेमेंट करें ताकि प्रिंसिपल जल्दी कम हो
❌ डेट चुकाते हुए भी नए खर्चे कार्ड पर करते रहना
✅ जब तक डेट पूरी तरह ना चुक जाए, नए खर्चों के लिए कार्ड इस्तेमाल ना करें
❌ बिना प्लान के, रैंडम तरीके से पेमेंट करना
✅ अवलांच या स्नोबॉल जैसी स्ट्रक्चर्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं
❌ हाई-इंटरेस्ट विकल्पों को नज़रअंदाज़ करना
✅ कम इंटरेस्ट वाले पर्सनल लोन या बैलेंस ट्रांसफर के विकल्पों पर भी विचार करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नहीं। एक बार आप अपना डेट क्लियर कर लें और आगे समय पर पेमेंट्स करते रहें, तो आपका स्कोर धीरे-धीरे सुधरने लगता है। आमतौर पर 6-12 महीनों के अच्छे पेमेंट हिस्ट्री के बाद स्कोर में सुधार दिखने लगता है।

ज़रूरी नहीं, खासकर अगर वह आपका सबसे पुराना कार्ड है (क्योंकि क्रेडिट हिस्ट्री की लेंथ भी स्कोर को प्रभावित करती है)। बेहतर है कि कार्ड को इस्तेमाल तो करें लेकिन रिस्पॉन्सिबली — हर महीने पूरा बिल पे करके।

डेट सेटलमेंट (जहाँ बैंक से बातचीत करके कम अमाउंट में डेट सेटल किया जाता है) आखिरी रिज़ॉर्ट होना चाहिए, क्योंकि यह आपके क्रेडिट रिपोर्ट में "सेटल्ड" के रूप में दिखता है, जो भविष्य के लोन पर नकारात्मक असर डाल सकता है। पहले खुद रीपेमेंट स्ट्रैटेजी ट्राई करना बेहतर है।

ज़्यादातर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पहले एक छोटा इमरजेंसी फंड (1 महीने का खर्च जितना) बनाएं ताकि कोई नई इमरजेंसी आपको फिर से क्रेडिट कार्ड पर निर्भर ना करे, फिर बाकी सारा एक्स्ट्रा पैसा हाई-इंटरेस्ट डेट क्लियर करने में लगाएं।

ज़रूरी नहीं। सही तरीके से मैनेज किए जाएं तो कई कार्ड्स रखने से आपका ओवरऑल क्रेडिट लिमिट बढ़ता है और क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन रेशियो भी बेहतर रहता है, जो स्कोर के लिए अच्छा है। समस्या तब आती है जब आप उन कार्ड्स को ट्रैक नहीं कर पाते और खर्च पर कंट्रोल खो देते हैं। अगर आप एक डिसिप्लिन्ड ट्रैकिंग सिस्टम नहीं बना सकते, तो 1-2 कार्ड्स तक सीमित रहना बेहतर है।

अगर आपका क्रेडिट कार्ड डेट बहुत ज़्यादा हो गया है, तो एक ऑप्शन यह भी है कि आप एक पर्सनल लोन लेकर पूरा क्रेडिट कार्ड डेट एक साथ चुका दें। चूंकि पर्सनल लोन की इंटरेस्ट रेट आमतौर पर क्रेडिट कार्ड के 36-45% सालाना ब्याज से काफी कम (18-24% के आसपास) होती है, इससे आपकी मंथली पेमेंट और कुल इंटरेस्ट कॉस्ट दोनों घट सकते हैं। कुछ क्रेडिट कार्ड्स खुद भी "बैलेंस ट्रांसफर" या ईएमआई कन्वर्ज़न जैसी सुविधाएं ऑफर करते हैं, जिसमें बकाया रकम को कम ब्याज दर पर ईएमआई में बदला जा सकता है। हालांकि यह तरीका सिर्फ तभी फायदेमंद है जब आप साथ ही अपनी स्पेंडिंग हैबिट्स भी सुधारें — वरना आप एक नए लोन के साथ-साथ फिर से क्रेडिट कार्ड पर भी डेट बढ़ा सकते हैं।

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💬 आज का विचार

“कर्ज़ चुकाना भी एक निवेश है — यह आपके भविष्य की मानसिक शांति में निवेश है।”

Contents
🖋️ पैसा वाली शायरी

क्रेडिट कार्ड की चमक में मत खो जाना,
मिनिमम ड्यू के फेर में मत पड़ जाना,
जो उधार लिया है, समय पर चुकाना,
यही है असली आज़ादी, यही समझदार का पैमाना।

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📜 कर्ज़ का जाल

मिनिमम ड्यू भरकर सोचा राहत मिल गई,
पर ब्याज़ की आग अंदर ही अंदर सुलग गई,
कार्ड का कर्ज़ा है मीठा ज़हर सा,
समय पर ना चुकाओ तो बने बड़ा कहर सा।

स्नोबॉल या अवलांच, कोई भी तरीका अपनाओ,
छोटे कर्ज़ से या ज़्यादा ब्याज़ से, राह बनाओ,
हर महीने थोड़ा ज़्यादा चुकाते जाओ,
आज़ादी की तरफ धीरे-धीरे बढ़ते जाओ।

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