"किराया देना पैसे फेंकना है" या "घर खरीदना हमेशा सही फ़ैसला है", ये दोनों बातें आधी सच हैं। सही उत्तर आपके शहर, आय, नौकरी की स्थिरता और घर की कीमत पर निर्भर करता है। यहाँ एक साधारण हिसाब दिया गया है, जिसे आप अपने आँकड़ों से दोहरा सकते हैं।
एक काल्पनिक उदाहरण
मान लें एक फ़्लैट की कीमत ₹80 लाख है और वैसा ही फ़्लैट ₹25,000 मासिक किराए पर मिलता है (किराया कीमत का लगभग 3.75% सालाना, जो कई शहरों में 2-4% के आसपास रहता है)।
- खरीदने पर: 20% डाउन पेमेंट = ₹16 लाख; लोन ₹64 लाख, 8.5% पर 20 साल। EMI लगभग ₹55,540, यानी 20 साल में कुल भुगतान लगभग ₹1.33 करोड़।
- किराए पर: किराया ₹25,000 प्रति माह। EMI और किराए का अंतर ₹30,540 प्रति माह है।
अगर किराएदार रहकर आप ₹16 लाख को निवेश करें और हर महीने के ₹30,540 के अंतर को भी SIP में डालें, तो 20 साल बाद वह निवेश-पूँजी बड़ी हो सकती है। दूसरी ओर, घर की कीमत भी बढ़ेगी और किराए की जगह आपके पास संपत्ति होगी। यहाँ मायने रखता है कि दोनों की सालाना बढ़त कितनी निकलती है, जिसे कोई पहले से पक्का नहीं बता सकता।
ध्यान देने वाले छिपे खर्च
- रजिस्ट्री, स्टाम्प ड्यूटी और ब्रोकरेज: कुल कीमत के कई प्रतिशत तक।
- सोसाइटी मेंटेनेंस, मरम्मत और प्रॉपर्टी टैक्स हर साल।
- डाउन पेमेंट में बँधा पैसा, जो और जगह निवेश हो सकता था।
- नौकरी या शहर बदलने पर घर बेचने या किराए पर देने की झंझट।
टैक्स का फ़ायदा
होम लोन पर पुरानी टैक्स व्यवस्था में ब्याज और मूलधन पर कटौती के प्रावधान हैं (ब्याज पर स्व-अधिवासित घर के लिए सीमा के साथ)। नई व्यवस्था में आम तौर पर यह छूट नहीं मिलती। अपनी कर-व्यवस्था के अनुसार हिसाब लगाएँ और ताज़ा नियम जाँचें।
कब खरीदना ठीक रहता है?
- आप कम-से-कम 7-10 साल उसी शहर में रहने वाले हैं।
- EMI आपकी आय का 35-40% के भीतर रहती है और इमरजेंसी फंड बचा रहता है।
- डाउन पेमेंट के बाद भी बाक़ी निवेश और बीमा प्रभावित नहीं होते।
कब किराया बेहतर?
- नौकरी या शहर बदलने की संभावना है।
- किराया प्रॉपर्टी कीमत के मुक़ाबले बहुत कम (2% के आसपास) है।
- आप बचे पैसे को अनुशासन से निवेश कर पाते हैं।
हमारे EMI कैलकुलेटर से अपने आँकड़ों से हिसाब देखें।
यह लेख शैक्षणिक है, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं। उदाहरण की दरें काल्पनिक हैं।
Comments (0)
Comment करने के लिए login करें।
सबसे पहले comment करें!