घर की किस्त का हिसाब

Home Loan EMI Calculator

होम लोन की EMI, कुल ब्याज और साल-दर-साल मूलधन बनाम ब्याज — प्रीपेमेंट से कितनी बचत होगी, वह भी देखें।

  • मासिक EMI और कुल ब्याज
  • प्रोसेसिंग फ़ीस सहित असली लागत
  • साल-दर-साल मूलधन बनाम ब्याज
  • हर साल अतिरिक्त प्रीपेमेंट
  • अवधि में अतिरिक्त महीने
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहघर के लोन में ब्याज दर में थोड़ा सा फ़र्क़ भी कुल रकम में बड़ा अंतर डालता है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

होम लोन की EMI कैसे तय होती है?

होम लोन लंबी अवधि (अक्सर 15–30 साल) का होता है, इसलिए शुरुआती सालों में EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज होता है और मूलधन बहुत धीरे घटता है। साल में एक बार थोड़ा-सा अतिरिक्त प्रीपेमेंट करने से कुल ब्याज और अवधि दोनों काफ़ी घट सकते हैं — नीचे "हर साल अतिरिक्त प्रीपेमेंट" स्लाइडर से आज़माएँ। ब्याज दर फ्लोटिंग होती है और बदलती रहती है।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), with i = annual rate ÷ 12 ÷ 100 and n = years × 12 months; the schedule is run month by month (interest = balance × i, rest of the EMI repays principal), with the optional yearly prepayment taken off the balance at the end of each year. Car loan: loan = price − down payment. Education loan: simple interest during the course and moratorium is either paid during the course or added to the principal. Processing fee = fee % × loan, shown separately.

EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = साल × 12 महीने; भुगतान तालिका महीने-दर-महीने चलती है (ब्याज = बैलेंस × i, EMI का बाक़ी हिस्सा मूलधन चुकाता है), और वैकल्पिक सालाना प्रीपेमेंट हर साल के अंत में बैलेंस से घटता है। कार लोन: लोन = क़ीमत − डाउन पेमेंट। एजुकेशन लोन: कोर्स और मोरेटोरियम के दौरान साधारण ब्याज, जो या तो कोर्स के दौरान चुकाया जाता है या मूलधन में जुड़ जाता है। प्रोसेसिंग फ़ीस = फ़ीस % × लोन, अलग से दिखती है।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Home-loan rates are usually floating and change with the lender's benchmark; tax benefits on principal or interest depend on the tax regime and current law, so check them separately. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। होम लोन की दरें अक्सर फ्लोटिंग होती हैं और बदलती रहती हैं; मूलधन या ब्याज पर कर-छूट आपके कर-विकल्प और मौजूदा क़ानून पर निर्भर है, उसे अलग से जाँचें। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • होम लोन लंबा होता है, इसलिए शुरू की EMI में ज़्यादातर हिस्सा ब्याज होता है और मूलधन धीरे घटता है।
  • अवधि बढ़ाने से EMI घटती है, पर कुल ब्याज तेज़ी से बढ़ता है। दोनों को साथ देखकर ही अवधि चुनें।
  • साल में एक बार का छोटा-सा अतिरिक्त प्रीपेमेंट अवधि और ब्याज दोनों बहुत घटा सकता है।
  • यहाँ डाली गई ब्याज दर और फ़ीस उदाहरण हैं। अपने बैंक की ताज़ा दर और शर्तें उसी से लें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

सुनीता: पेज की शुरुआती संख्याओं वाला लोन

सुनीता ₹50,00,000 का होम लोन 8.5% (उदाहरण दर) पर 20 साल के लिए ले रही है, प्रोसेसिंग फ़ीस 0.5%।

मासिक EMI
₹43,391
कुल ब्याज
₹54,13,879
प्रोसेसिंग फ़ीस
₹25,000
कुल वापसी (मूलधन + ब्याज + फ़ीस)
₹1,04,38,879

₹50 लाख के लोन पर लगभग ₹54 लाख ब्याज बनता है, यानी मूलधन से भी ज़्यादा। लंबी अवधि की यही असली क़ीमत है।

रितेश: 15, 20 या 25 साल?

रितेश उसी ₹50 लाख पर तीन अवधियाँ तौलता है (8.5% उदाहरण दर, फ़ीस छोड़कर)।

15 साल
EMI ₹49,237, ब्याज ₹38,62,656
20 साल
EMI ₹43,391, ब्याज ₹54,13,879
25 साल
EMI ₹40,261, ब्याज ₹70,78,406
15 के बजाय 25 साल लेने पर
EMI ₹8,976 कम, ब्याज ₹32,15,750 ज़्यादा

हर महीने लगभग ₹9,000 की राहत के बदले ₹32 लाख से ऊपर अतिरिक्त ब्याज। बजट सँभलता हो तो छोटी अवधि का फ़ायदा साफ़ है।

अनिल: हर साल ₹1 लाख का प्रीपेमेंट

अनिल पेज के "हर साल अतिरिक्त प्रीपेमेंट" में ₹1,00,000 डालता है, बाक़ी शुरुआती संख्याएँ वही (₹50 लाख, 8.5%, 20 साल)।

प्रीपेमेंट के साथ कुल ब्याज
₹35,58,489
बचा हुआ ब्याज
₹18,55,389
लोन बंद होने में समय
168 महीने (14 साल)
जल्दी बंद
72 महीने (6 साल)

हर साल ₹1 लाख अतिरिक्त देने पर 20 साल का लोन 14 साल में निपट जाता है। प्रीपेमेंट शुरुआती सालों में सबसे असरदार होता है।

हर ₹1 लाख के लोन पर मासिक EMI (उदाहरण दरों पर, ₹ में)

हर ₹1 लाख के लोन पर मासिक EMI (उदाहरण दरों पर, ₹ में)
ब्याज दर10 साल15 साल20 साल25 साल30 साल
7.5%1,187927806739699
8.5%1,240985868805769
9.5%1,2941,044932874841

अपने लोन की EMI का मोटा अंदाज़ा: रकम (लाख में) × तालिका की संख्या। असली EMI के लिए ऊपर calculator चलाएँ।

₹50 लाख, 8.5% उदाहरण दर: अवधि बनाम ब्याज (फ़ीस छोड़कर)

₹50 लाख, 8.5% उदाहरण दर: अवधि बनाम ब्याज (फ़ीस छोड़कर)
अवधिमासिक EMI (₹)कुल ब्याज (₹)ब्याज, मूलधन का
10 साल61,99324,39,14148.8%
15 साल49,23738,62,65677.3%
20 साल43,39154,13,879108.3%
25 साल40,26170,78,406141.6%
30 साल38,44688,40,443176.8%

दर पूरी अवधि में एक-सी मानी गई है। फ्लोटिंग दर बदलने पर असली संख्या अलग होगी।

त्वरित संदर्भ: होम लोन की EMI

त्वरित संदर्भ: होम लोन की EMI
EMI का सूत्रP × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = कुल महीने
कुल ब्याजEMI × महीने − लोन की रकम
प्रोसेसिंग फ़ीसलोन × फ़ीस %। यह EMI में नहीं जुड़ती, कुल लागत में अलग से गिनी जाती है।
अवधि कैसे डालेंसाल और "अतिरिक्त महीने" मिलाकर, जैसे 17 साल 6 महीने
प्रीपेमेंट का तरीक़ापेज हर साल के अंत में तय रकम बैलेंस से घटाता है, EMI वही रहती है और लोन जल्दी बंद होता है
शुरू की EMI मेंब्याज का हिस्सा बड़ा, मूलधन का छोटा। हर महीने ब्याज घटता और मूलधन बढ़ता जाता है।
दर का स्वभावहोम लोन की दर अक्सर फ्लोटिंग होती है और बदलती रहती है। यहाँ एक-सी दर मानी गई है।
इस पेज में क्या नहींबीमा, GST, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, कर-छूट और दर बदलने का असर

Home Loan EMI Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

घर के लिए लोन ज़्यादातर परिवारों की ज़िंदगी का सबसे लंबा आर्थिक वादा होता है, अक्सर 15 से 30 साल का। Home Loan EMI Calculator आपको इस वादे की पूरी तस्वीर पहले से दिखा देता है: हर महीने की EMI कितनी होगी, पूरी अवधि में बैंक को कुल कितना ब्याज जाएगा, प्रोसेसिंग फ़ीस मिलाकर कुल कितनी रकम लौटानी होगी, और अगर आप हर साल कुछ अतिरिक्त रकम (प्रीपेमेंट) चुकाएँ तो लोन कितने महीने पहले बंद हो जाएगा और कितना ब्याज बचेगा।

इस पेज की सबसे काम की बात साल-दर-साल की तालिका और दो चार्ट हैं। वे दिखाते हैं कि शुरू के सालों में आपकी किस्त का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है और मूलधन बहुत धीरे घटता है। इस सच्चाई को देखकर ही कई लोग प्रीपेमेंट या छोटी अवधि का फ़ैसला लेते हैं।

ध्यान दें: यह calculator सामान्य "घटते बैलेंस" वाले ढंग से चलता है। आपके बैंक का असली स्टेटमेंट दिन-गिनती या अलग राउंडिंग के कारण थोड़ा अलग हो सकता है।

किसके काम का है

  • जो परिवार फ़्लैट या मकान ख़रीदने का बजट तय कर रहा है और जानना चाहता है कि कितनी EMI सहज रहेगी।
  • वह वेतनभोगी माता-पिता, जिन्हें बच्चों की पढ़ाई और घर की किस्त दोनों संभालनी हैं।
  • जो अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करना चाहते हैं (एक ही रकम पर 8.5% और 9% में कितना फ़र्क़ पड़ता है)।
  • जो पहले से लोन ले चुके हैं और अपने बोनस या सालाना बचत से प्रीपेमेंट का असर देखना चाहते हैं।
  • घर बनवाने वाले, जो निर्माण की लागत के लिए लोन का अनुमान लगाना चाहते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

इस पेज पर छह स्लाइडर हैं।

  • लोन की रकम (₹): ₹5 लाख से ₹10 करोड़ तक, ₹1 लाख के कदम में। शुरुआती मान ₹50 लाख। यहाँ वह रकम डालें जो बैंक आपको देगा, यानी घर की कीमत में से आपकी डाउन पेमेंट घटाकर।
  • ब्याज दर (% सालाना): 6% से 14%, 0.05 के कदम में, शुरुआती 8.5%। अपने बैंक के स्वीकृति पत्र या वेबसाइट से दर लें। होम लोन की दरें अक्सर फ़्लोटिंग होती हैं और बदलती रहती हैं।
  • लोन की अवधि (साल): 0 से 30 साल, शुरुआती 20।
  • अतिरिक्त महीने (साल के ऊपर): 0 से 11 महीने। इससे आप 20 साल 6 महीने जैसी अवधि भी डाल सकते हैं।
  • प्रोसेसिंग फ़ीस (लोन का %): 0% से 3%, शुरुआती 0.5%। यह एक बार लगने वाली फ़ीस है और कुल वापसी की रकम में अलग से जुड़ती है।
  • हर साल अतिरिक्त प्रीपेमेंट (₹): ₹0 से ₹30 लाख तक, ₹10,000 के कदम में, शुरुआती ₹0। यहाँ डाली गई रकम हर साल के अंत में बैलेंस से घटाई जाती है।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

ऊपर बड़ा आँकड़ा मासिक EMI है, साथ में लिखा होता है कि कितने साल (या साल और महीने) के लिए है, और अगर प्रीपेमेंट डाला है तो "प्रीपेमेंट से जल्दी बंद" भी दिखता है।

नीचे की पंक्तियाँ:

  • लोन की रकम: जो आपने डाली।
  • कुल ब्याज: पूरी अवधि में दिया जाने वाला ब्याज।
  • प्रोसेसिंग फ़ीस: लोन की रकम का तय प्रतिशत, अगर शून्य से ज़्यादा हो तभी दिखती है।
  • कुल वापसी (मूलधन + ब्याज + फ़ीस): लोन के बदले कुल कितनी रकम बैंक के पास जाएगी।
  • प्रीपेमेंट से बचा ब्याज और लोन इतना जल्दी बंद: ये दो पंक्तियाँ तभी आती हैं जब आपने प्रीपेमेंट शून्य से ज़्यादा रखा हो। पहली बताती है कि बिना प्रीपेमेंट की तुलना में कितना ब्याज बचा, और दूसरी महीनों में बताती है कि लोन कितना पहले चुक गया।

पाई चार्ट में मूलधन, ब्याज और फ़ीस का अनुपात दिखता है। पहला चार्ट हर साल चुकाया मूलधन बनाम ब्याज दिखाता है; दूसरा बकाया बैलेंस का ढलान। नीचे की तालिका में साल 1, साल 2... के हिसाब से चुकाया मूलधन, चुकाया ब्याज और साल के अंत का बैलेंस होता है।

पढ़ने का तरीका: अगर पाई चार्ट में ब्याज का हिस्सा मूलधन के आधे से ज़्यादा है, तो समझिए कि अवधि और दर का असर बहुत भारी है। 20-25 साल के लोन में यह आम बात है। तालिका में देखें कि पहले 5 सालों में बैलेंस कितना घटा; अक्सर वह उम्मीद से कम होता है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

EMI को आमदनी के हिसाब से परखें

एक सामान्य व्यावहारिक सोच यह है कि सारी EMI (सभी लोन मिलाकर) घर की मासिक आमदनी के एक सीमित हिस्से में रहें। सही प्रतिशत हर परिवार का अलग है, पर इसे इमरजेंसी फंड और बाक़ी लक्ष्यों के साथ देखें।

दर में छोटा बदलाव भी आज़माएँ

स्लाइडर को 0.25-0.5% ऊपर-नीचे करके देखें। 20-25 साल के लोन में थोड़ी-सी दर बड़ी रकम बन जाती है। इसी से बैंकों की तुलना करें।

अवधि बनाम EMI

लंबी अवधि से EMI घटती है, पर कुल ब्याज बढ़ता है। छोटी अवधि से उलटा। एक बीच का रास्ता यह है कि लंबी अवधि चुनें, पर प्रीपेमेंट का लक्ष्य रखें, इससे बुरे दिनों में किस्त कम रहेगी और अच्छे दिनों में लोन जल्दी बंद होगा।

प्रीपेमेंट की शुरुआत जल्दी करें

शुरुआती सालों में ब्याज का हिस्सा बड़ा होता है, इसलिए वहीं किया गया प्रीपेमेंट सबसे ज़्यादा ब्याज बचाता है। बोनस या टैक्स रिफ़ंड जैसी एकमुश्त रकम आए तो प्रीपेमेंट स्लाइडर में डालकर देखें।

साल-दर-साल तालिका को बैंक के स्टेटमेंट से मिलाएँ

लोन शुरू होने के बाद अपने बैंक के amortisation schedule से इस तालिका का मिलान करें। थोड़ा अंतर हो सकता है, पर बहुत बड़ा अंतर हो तो बैंक से पूछें।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • केवल EMI देखकर लोन चुन लेना। छोटी EMI अक्सर लंबी अवधि से आती है, और कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है।
  • डाउन पेमेंट को कम आँकना। लोन की रकम कीमत का सारा हिस्सा नहीं होती। बाक़ी खर्च जैसे स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, फ़र्निशिंग और ब्रोकरेज आपको अपनी जेब से देने होते हैं।
  • प्रोसेसिंग फ़ीस और अन्य शुल्क भूल जाना। कानूनी जाँच, बीमा और दूसरी फ़ीस अलग हो सकती हैं।
  • फ़्लोटिंग दर को स्थिर मानना। आज की 8.5% दर 10 साल बाद वही होगी, ऐसा नहीं है।
  • प्रीपेमेंट पर बैंक की शर्तें न पूछना। आम तौर पर फ़्लोटिंग दर के होम लोन पर प्रीपेमेंट शुल्क के नियम अलग होते हैं; अपने बैंक और RBI के मौजूदा निर्देश देखें।
  • सोचना कि 25 साल बाद ही मूलधन घटेगा। तालिका बताती है कि ऐसा नहीं, पर शुरुआती सालों में गति बहुत धीमी होती है।
  • टैक्स छूट को EMI घटाने वाली चीज़ मान लेना। टैक्स लाभ आपके कर-विकल्प और मौजूदा क़ानून पर निर्भर है। वह नतीजे का हिस्सा नहीं है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
  1. मासिक दर i = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100। कुल किस्तें n = साल × 12 + अतिरिक्त महीने।
  2. EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1)। अगर दर शून्य हो तो सीधे P ÷ n।
  3. फिर भुगतान महीने-दर-महीने चलाया जाता है। हर महीने ब्याज = बचा बैलेंस × i, और EMI का बाक़ी हिस्सा मूलधन में जाता है।
  4. अगर प्रीपेमेंट डाला है, तो हर 12वें महीने की किस्त के बाद वह रकम बैलेंस से घटा दी जाती है (बैलेंस से ज़्यादा नहीं)। EMI वही रहती है, इसलिए अवधि घटती है।
  5. जब बैलेंस ₹0.5 से नीचे आ जाता है तो लोन चुका हुआ माना जाता है।
  6. प्रोसेसिंग फ़ीस = लोन × फ़ीस %। कुल वापसी = मूलधन + कुल ब्याज + फ़ीस।

यह मान्यता है कि दर पूरी अवधि में वही रहेगी। फ़्लोटिंग दर बदलने पर असली EMI या अवधि बदल सकती है।

एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए नेहा और उनके पति इंदौर में ₹40 लाख का होम लोन 8.4% पर 25 साल के लिए लेने की सोच रहे हैं। बैंक 0.5% प्रोसेसिंग फ़ीस लेता है।

  1. i = 8.4 ÷ 1200 = 0.007, n = 300।
  2. EMI ≈ ₹31,940।
  3. कुल भुगतान EMI × 300 ≈ ₹95,81,992, इसलिए कुल ब्याज ≈ ₹55,81,992।
  4. फ़ीस = ₹20,000। कुल वापसी ≈ ₹96,01,992।
  5. पहले साल में चुकाया मूलधन लगभग ₹49,143 और ब्याज लगभग ₹3,34,137। यानी पहले साल की किस्तों का 87% से ज़्यादा हिस्सा ब्याज है।
  6. 25 साल के आख़िरी साल में चुकाया मूलधन ₹3,66,396 और ब्याज सिर्फ़ ₹16,884 है।

अब दो बदलाव देखें:

  • अवधि 15 साल करें: EMI लगभग ₹39,155 हो जाती है, कुल ब्याज घटकर ≈ ₹30,47,984 रह जाता है। यानी हर महीने ₹7,215 ज़्यादा देने से लगभग ₹25.3 लाख ब्याज कम।
  • 25 साल रखें, पर हर साल ₹1 लाख प्रीपेमेंट जोड़ें: लोन 300 की जगह 175 महीनों में बंद हो जाता है, यानी 125 महीने (10 साल से ज़्यादा) पहले। कुल ब्याज घटकर ≈ ₹29,64,802 और बचा ब्याज ≈ ₹26,17,190। कुल वापसी ≈ ₹69,84,802।

ये संख्याएँ मान्यता पर आधारित हैं। असल में दर बदल सकती है, और बैंक प्रीपेमेंट पर अलग शर्तें रख सकता है।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह नहीं बताता कि बैंक आपको कितना लोन देगा। इसके लिए बैंक आपकी आमदनी, क्रेडिट स्कोर और दस्तावेज़ देखता है।
  • फ़्लोटिंग दर के बदलाव शामिल नहीं हैं। दर बदलने का असर देखने के लिए Floating Rate Loan Reset Calculator इस्तेमाल करें।
  • टैक्स छूट, बीमा, कानूनी शुल्क, देरी के शुल्क और दूसरे ऊपरी खर्च शामिल नहीं हैं।
  • प्रीपेमेंट को सिर्फ़ साल के अंत में एकमुश्त मान लिया गया है, जबकि आप साल में कभी भी कर सकते हैं।
  • पूरी रकम का एक ही बार में वितरण माना गया है; निर्माणाधीन घर में किस्तों में वितरण (pre-EMI) का हिसाब नहीं है।
  • सभी आँकड़े अनुमान हैं और पूरे रुपये में राउंड किए गए हैं।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश, टैक्स, कर्ज़ या कानूनी सलाह नहीं है, और नतीजे अनुमान हैं। लोन लेने से पहले बैंक की शर्तें ध्यान से पढ़ें।

6 काम की बातें याद रखें

1
EMI को आमदनी के हिसाब से परखें

आम सुझाव यह है कि सारी EMI मिलाकर आपकी मासिक आमदनी का लगभग 40% से ऊपर न जाएँ। यह मोटा नियम है, अपना बजट देखकर तय करें।

2
छोटी अवधि चुनने की गुंजाइश परखें

आज की EMI थोड़ी बढ़ाने से कुल ब्याज में लाखों घट सकते हैं। पहले देखें कि बजट कितनी ऊँची EMI सँभाल सकता है।

3
बोनस या इन्क्रीमेंट से प्रीपेमेंट

हर साल बोनस का एक हिस्सा अतिरिक्त चुकाने में लगाएँ। शुरुआती सालों का प्रीपेमेंट सबसे ज़्यादा ब्याज बचाता है।

4
दर में आधा प्रतिशत भी मायने रखता है

दर 0.5% ऊपर-नीचे होने पर 20 साल में लाखों का फ़र्क़ आ जाता है। अलग-अलग दरें डालकर EMI तुलना करें।

5
फ़ीस और बाक़ी ख़र्च अलग जोड़ें

प्रोसेसिंग फ़ीस पेज में है, पर बीमा, क़ानूनी जाँच और स्टांप ड्यूटी जैसे ख़र्च नहीं हैं। अपनी तैयारी में इन्हें अलग रखें।

6
आपातकालीन निधि न तोड़ें

प्रीपेमेंट के लिए आपातकालीन निधि का पैसा न लगाएँ। कुछ महीनों के ख़र्च का भंडार पहले, फिर प्रीपेमेंट।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ज़्यादा down payment, लंबी अवधि (पर कुल ब्याज बढ़ता है), कम दर पर refinance, या साल में एक बार prepayment — हर तरीक़े के अपने फ़ायदे-नुक़सान हैं।

शुरुआती सालों में की गई prepayment सबसे ज़्यादा ब्याज बचाती है। calculator में "Extra prepayment" स्लाइडर से आज़माएँ।

क्योंकि ब्याज हर महीने बचे हुए पूरे मूलधन पर लगता है, जो शुरू में सबसे ज़्यादा होता है। जैसे-जैसे मूलधन घटता है, EMI में ब्याज का हिस्सा घटता और मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यह बैंक की नीति पर निर्भर है। कई बार EMI वही रहती है और अवधि घट-बढ़ जाती है, कई बार EMI बदलती है। अपने बैंक से पूछें और दर बदलने का असर अलग से जाँचें।

जब घर बनते समय लोन किस्तों में जारी होता है, तब आम तौर पर जारी रकम पर सिर्फ़ ब्याज देना होता है। इसे pre-EMI कहते हैं। यह calculator पूरी रकम एक साथ मिली मानकर चलता है।

नहीं। यहाँ पूरा लोन पहले दिन से EMI पर चलता मानते हैं। निर्माणाधीन घर में pre-EMI का ब्याज इससे अलग और ऊपर से लगेगा।

व्यक्तिगत फ्लोटिंग दर वाले लोन पर आम तौर पर प्रीपेमेंट शुल्क नहीं लगता, पर नियम और अपवाद बैंक के दस्तावेज़ में देखें। इस पेज में प्रीपेमेंट शुल्क नहीं जोड़ा गया है।

आम तौर पर अवधि घटाने से ज़्यादा ब्याज बचता है, क्योंकि मूलधन जल्दी घटता है। यह पेज वही दिखाता है: EMI वही रहती है और लोन जल्दी बंद होता है।

अवधि को साल की पूरी संख्या तक सीमित न रखने के लिए। मसलन 17 साल 6 महीने के लिए साल में 17 और अतिरिक्त महीनों में 6 डालें।

कोई क़ानूनी सीमा नहीं है। बैंक अक्सर कुल EMI को आय के लगभग 40-50% तक देखते हैं, पर घर चलाने के लिए अपने बजट में इससे कम रखना सुरक्षित रहता है।

आम तौर पर सेवा शुल्कों पर GST लगता है। यह पेज फ़ीस पर कर नहीं जोड़ता, इसलिए असली फ़ीस थोड़ी ज़्यादा हो सकती है। बैंक की फ़ीस-सूची देखें।

बैंक दिनों के हिसाब से ब्याज, EMI की तारीख़ और राउंडिंग का अपना तरीक़ा अपनाते हैं। फ़र्क़ आम तौर पर छोटा होता है, पर बैंक की स्वीकृति-पत्र वाली संख्या ही अंतिम मानें।

स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, लोन का बीमा, क़ानूनी जाँच, देरी का जुर्माना और रखरखाव। ये घर की असली लागत में अलग से जुड़ते हैं।

नहीं। पूरी अवधि में एक ही दर मानी गई है। फ्लोटिंग दर के लिए अलग-अलग दरें डालकर कई बार चलाएँ, या floating-rate reset calculator देखें।

नहीं। मूलधन और ब्याज पर मिलने वाली छूट आपके कर-विकल्प और मौजूदा क़ानून पर निर्भर है। उसके लिए Home Loan Tax Benefit calculator अलग से देखें।

हाँ, पेज हर 12वीं EMI के बाद तय रकम बैलेंस से घटाता है। असल में आप कभी भी प्रीपेमेंट कर सकते हैं, तो बचत इससे थोड़ी अलग आ सकती है।

ब्याज के हिसाब से जल्दी किया गया पैसा ज़्यादा बचाता है, चाहे एक बार हो या बँटा हुआ। पर आपातकालीन निधि न खाली करें। अपनी नक़दी की स्थिति देखकर तय करें।

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