Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
क्या कम ब्याज दर पर शिफ़्ट करने से सच में फ़ायदा बैठता है?
Balance transfer में नया लेंडर आपका बकाया लोन पुराने लेंडर को चुका देता है और आप नए लेंडर को नई शर्तों पर EMI देने लगते हैं। दर थोड़ी कम दिखे तो भी processing fee, कानूनी और वैल्यूएशन खर्च, मॉर्गेज/स्टांप खर्च और (अगर लागू हो) पुराने लोन की प्रीपेमेंट फीस जैसे एकमुश्त खर्च जुड़ते हैं।
यह टूल इन खर्चों को जोड़कर बताता है कि मौजूदा लोन पर चलते रहने और नए पर जाने में EMI और कुल ब्याज में कितना फ़र्क़ बैठता है और खर्च निकलने में लगभग कितने महीने लगेंगे। आंकड़े आपकी डाली हुई संख्याओं पर आधारित उदाहरण हैं। यह कोई सलाह नहीं है।
छोटे अक्षरों में: टूल मानता है कि दरें पूरे समय स्थिर रहेंगी। असल में फ़्लोटिंग दर बदलती है, और रेट-रीसेट की शर्तें, चार्जेज़ और टेन्योर लेंडर के अनुसार अलग होते हैं। अंतिम शर्तें हमेशा Key Facts Statement (KFS) और लोन एग्रीमेंट में देखिए।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
EMI is worked out with the standard reducing-balance formula: EMI = P x r x (1+r)^n / ((1+r)^n - 1), where P is the outstanding principal, r the monthly rate (annual rate / 12) and n the remaining months. The tool computes the EMI and the total interest for the current loan and for the new loan (new rate, and your chosen tenure if you change it). Interest saved is current total interest minus new total interest. The one-time costs you enter (processing fee, legal/valuation, mortgage/stamp charges, foreclosure charge if any) are added up. Break-even months is those costs divided by the monthly EMI difference, shown only when the new EMI is lower; if the tenure is longer, the extra interest over the longer period is shown too. A constant rate is assumed.
EMI मानक घटते शेष (reducing balance) फ़ॉर्मूले से निकलती है: EMI = P x r x (1+r)^n / ((1+r)^n - 1), जहाँ P बकाया मूलधन, r मासिक दर (सालाना दर / 12) और n बची हुई महीनों की संख्या है। टूल मौजूदा लोन और नए लोन (नई दर, और अवधि बदली हो तो वह अवधि) की EMI व कुल ब्याज निकालता है। बचा हुआ ब्याज = मौजूदा कुल ब्याज घटा नया कुल ब्याज। आपके डाले एकमुश्त खर्च (processing fee, कानूनी/वैल्यूएशन, मॉर्गेज/स्टांप खर्च, फोरक्लोज़र चार्ज अगर हो) जोड़े जाते हैं। ब्रेक-ईवन महीने = ये खर्च भाग मासिक EMI का अंतर, और यह तभी दिखता है जब नई EMI कम हो; अवधि बढ़ाने पर लंबी अवधि का अतिरिक्त ब्याज भी दिखता है। दर स्थिर मानी गई है; किसी लेंडर का नाम या सिफ़ारिश नहीं है।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 5 Oct 2026Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026
Illustration only, not a recommendation to switch lenders. The results are estimates based on the numbers you type and assume a constant interest rate. Actual charges, rate-reset terms and eligibility depend on the lender and are shown in its Key Facts Statement and loan agreement. This tool does not recommend any lender or product, and rules can change.
सिर्फ़ उदाहरण, लेंडर बदलने की सलाह नहीं। नतीजे आपकी डाली संख्याओं पर आधारित अनुमान हैं और मानकर चलते हैं कि दर स्थिर रहेगी। असली चार्जेज़, रेट-रीसेट की शर्तें और पात्रता लेंडर पर निर्भर हैं और उनके Key Facts Statement व लोन एग्रीमेंट में दिखती हैं। यह टूल किसी लेंडर या प्रोडक्ट की सिफ़ारिश नहीं करता, और नियम बदल सकते हैं।
Balance transfer का असली फ़ायदा = बचा हुआ कुल ब्याज − एकमुश्त खर्च (processing fee, कानूनी खर्च और पुराने लोन का foreclosure charge)।
Break-even वह महीना है जब EMI में हुई मासिक बचत ने इन खर्चों को वसूल कर लिया। उससे पहले ट्रांसफ़र छोड़ने पर नुकसान रहता है।
नई अवधि पुरानी से लंबी हो तो EMI घटती दिखती है, पर कुल ब्याज बढ़ सकता है। पेज इसकी चेतावनी भी देता है।
पेज मानता है कि दर पूरे समय स्थिर रहेगी। फ़्लोटिंग दर में आगे बदलाव होंगे, और असली शुल्क लेंडर की शर्तों में देखें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
पेज का डिफ़ॉल्ट: 0.5% की कमी
मोहन का ₹50,00,000 का लोन बाक़ी है, मौजूदा दर 9%, बची अवधि 18 साल। नया लेंडर उदाहरण के तौर पर 8.5% पर 18 साल के लिए ले जाएगा। Processing आदि ₹25,000 और कानूनी खर्च ₹15,000।
मौजूदा EMI
लगभग ₹46,822
नई EMI
लगभग ₹45,273
मासिक बचत
लगभग ₹1,549
कुल ब्याज: मौजूदा बनाम नया
₹51,13,604 बनाम ₹47,78,941
बचा ब्याज
लगभग ₹3,34,664
एकमुश्त खर्च
₹40,000
खर्च के बाद शुद्ध बचत
लगभग ₹2,94,664
Break-even
लगभग 26 महीने
कुल बचत अच्छी दिखती है, पर वह 18 साल में फैली है। असली सवाल यह है कि आप कितने साल उसी लेंडर के साथ रहेंगे।
सरिता: दर का फ़र्क़ बहुत छोटा
सरिता का ₹25,00,000 का लोन 8.8% पर है, बची अवधि 12 साल। नया लेंडर उदाहरण के तौर पर 8.6% पर 12 साल देगा। Processing आदि ₹40,000 और कानूनी खर्च ₹20,000।
मौजूदा EMI
लगभग ₹28,170
नई EMI
लगभग ₹27,891
मासिक बचत
लगभग ₹279
बचा ब्याज
लगभग ₹40,231
एकमुश्त खर्च
₹60,000
खर्च के बाद शुद्ध नतीजा
लगभग −₹19,769 (घाटा)
Break-even
लगभग 215 महीने (अवधि 144 महीने से ज़्यादा)
दर थोड़ी ही घटी और खर्च ज़्यादा थे, इसलिए पूरी अवधि में भी खर्च वसूल नहीं होते। ऐसे में ट्रांसफ़र पर दोबारा सोचना बनता है।
पुराने लोन पर 1% foreclosure charge
मोहन वाला ही मामला (₹50 लाख, 9% से 8.5%, 18 साल, ₹40,000 खर्च), पर पुराने लेंडर के foreclosure/प्रीपेमेंट चार्ज को 1% मान लिया गया है।
बकाया पर 1% charge
₹50,000
कुल एकमुश्त खर्च
₹90,000
खर्च के बाद शुद्ध बचत
लगभग ₹2,44,664
Break-even
लगभग 59 महीने
एक अतिरिक्त शुल्क ने break-even 26 से 59 महीने कर दिया। इसलिए पुराने लेंडर की शर्तें पहले पूछ लेना ज़रूरी है।
नई दर बदलने पर (₹50 लाख, मौजूदा 9%, 18 साल, खर्च ₹40,000)
नई दर बदलने पर (₹50 लाख, मौजूदा 9%, 18 साल, खर्च ₹40,000)
नई दर (उदाहरण)
मासिक EMI बचत (≈)
खर्च के बाद शुद्ध बचत (≈)
Break-even
8.90%
₹312
₹27,351
129 महीने
8.75%
₹778
₹1,27,988
52 महीने
8.50%
₹1,549
₹2,94,664
26 महीने
8.25%
₹2,315
₹4,60,010
18 महीने
8.00%
₹3,074
₹6,24,008
14 महीने
सब दरें उदाहरण हैं, किसी लेंडर का ऑफ़र नहीं। दर के फ़र्क़ के साथ break-even तेज़ी से बदलता है।
एकमुश्त खर्च बदलने पर (₹50 लाख, 9% से 8.5%, 18 साल)
एकमुश्त खर्च बदलने पर (₹50 लाख, 9% से 8.5%, 18 साल)
कुल एकमुश्त खर्च
खर्च के बाद शुद्ध बचत (≈)
Break-even
₹0
₹3,34,664
तुरंत
₹20,000
₹3,14,664
13 महीने
₹40,000
₹2,94,664
26 महीने
₹80,000
₹2,54,664
52 महीने
₹1,50,000
₹1,84,664
97 महीने
Break-even = खर्च ÷ मासिक EMI बचत, ऊपर की ओर पूरे महीने में गोल किया गया।
त्वरित संदर्भ: Balance Transfer
त्वरित संदर्भ: Balance Transfer
EMI
मानक EMI सूत्र से, बकाया, दर और बची अवधि पर
कुल ब्याज
EMI × महीने − बकाया लोन
बचा ब्याज
मौजूदा लोन का कुल ब्याज − नए लोन का कुल ब्याज
एकमुश्त खर्च
processing + कानूनी/valuation/stamp + बकाया का foreclosure %
शुद्ध बचत
बचा ब्याज − एकमुश्त खर्च
Break-even
एकमुश्त खर्च ÷ (पुरानी EMI − नई EMI), ऊपर गोल
सावधानी
नई अवधि लंबी हो तो EMI घटेगी पर कुल ब्याज बढ़ सकता है
इस पेज में क्या नहीं
दर में बदलाव, कर कटौती, बीमा, टॉप-अप, मासिक प्रीपेमेंट
Home Loan Balance Transfer Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
जब किसी और बैंक या हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनी का ब्याज आपके मौजूदा लोन से कम दिखता है, तो मन में तुरंत आता है: "क्या लोन वहाँ शिफ़्ट कर लूँ?" दर कुछ कम होने पर भी शिफ़्ट करने में ख़र्च लगते हैं, जैसे processing fee, कानूनी और वैल्यूएशन शुल्क, मॉर्गेज या स्टांप का ख़र्च, और कभी-कभी पुराने लोन का फोरक्लोज़र चार्ज। यह calculator इन सबको एक तराज़ू पर रखकर एक सीधा सवाल पूछता है: "सारे ख़र्च निकालने के बाद भी क्या कुल ब्याज में बचत बचती है, और ख़र्च वसूल होने में कितने महीने लगेंगे?"
इसमें दो लोन आमने-सामने रखे जाते हैं: एक आपका मौजूदा लोन और दूसरा नया लोन, जिसमें वही बकाया रकम नई दर (और चाहें तो नई अवधि) पर चलती है। नतीजे में EMI, कुल ब्याज, एकमुश्त ख़र्च, शुद्ध अंतर और ब्रेक-ईवन के महीने दिखते हैं।
किसके काम का है
होम लोन के कुछ साल चल चुके परिवार, जिन्हें मौजूदा दर पर असंतोष है या जिन्हें कोई कम दर वाला प्रस्ताव मिला है।
पुरानी दर पर फँसे हुए कर्ज़दार, जिनके लोन की दर बाज़ार की मौजूदा दरों से ऊपर चल रही है और जो जानना चाहते हैं कि शिफ़्ट करना लायक़ है या नहीं।
दो प्रस्तावों में उलझे लोग, जो एक ही बकाया पर अलग-अलग दर और ख़र्चों की तुलना करना चाहते हैं (आप दोनों के लिए बारी-बारी से calculator चला सकते हैं)।
जो EMI घटाना चाहते हैं पर देखना चाहते हैं कि अवधि बढ़ाकर EMI घटाने की क़ीमत कुल ब्याज में कितनी चुकानी पड़ेगी।
सलाह देने वाले परिवारजन या दोस्त, जो किसी की मदद के लिए एक त्वरित गणित देखना चाहते हैं।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर आठ स्लाइडर हैं। हर एक के साथ आप सीधे संख्या भी लिख सकते हैं।
बकाया लोन (₹): आज की तारीख़ में आपके लोन खाते में बाक़ी मूलधन। बैंक के नवीनतम स्टेटमेंट या ऐप में देखें। ₹5 लाख से ₹5 करोड़; शुरुआती मान ₹50 लाख।
मौजूदा ब्याज दर (% सालाना): आपके लोन की आज की दर, 5% से 15%। शुरुआती मान 9%।
नए लेंडर की ब्याज दर (% सालाना): नए प्रस्ताव की दर। शुरुआती मान 8.5%।
बची हुई अवधि, मौजूदा लोन (साल): 1 से 30 साल, शुरुआती 18।
नए लोन की अवधि (साल): अगर वही अवधि रखनी है तो पहले वाली संख्या के बराबर रखें। लंबी अवधि चुनने पर EMI घटेगी पर कुल ब्याज बढ़ सकता है।
Processing fee और दूसरे शुल्क (₹): नए लेंडर की फ़ीस, जो शुरू में लगती है। ₹0 से ₹3 लाख; शुरुआती मान ₹25,000।
कानूनी, वैल्यूएशन, मॉर्गेज / स्टांप ख़र्च (₹): संपत्ति की जाँच और काग़ज़ी कार्रवाई का ख़र्च। शुरुआती मान ₹15,000।
पुराने लोन का फोरक्लोज़र / प्रीपेमेंट चार्ज (% बकाया पर, अगर लगे): 0% से 4%, शुरुआती मान 0। चार्ज लगता है या नहीं, यह आपके पुराने लोन के प्रकार और शर्तों पर निर्भर है, इसलिए अपने लोन एग्रीमेंट और बैंक से पुष्टि करें।
ध्यान दें: सारे ख़र्च नए लेंडर के Key Facts Statement (KFS) में लिखे होते हैं। प्रस्ताव मिलने पर उसे पढ़कर ही ये आँकड़े भरें। जो ख़र्च बाद में अचानक सामने आएँ, उन्हें भी जोड़कर देखें।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर: खर्च निकालने के बाद कुल ब्याज का अंतर
यह बड़ी संख्या कुल ब्याज की बचत है, एकमुश्त ख़र्च घटाने के बाद। अगर यह धनात्मक है तो शीर्षक में "बचत" लिखा आता है और नीचे लिखा होता है कि ख़र्च लगभग कितने महीनों में वसूल होंगे। अगर संख्या ऋणात्मक है तो शीर्षक "घाटा" बन जाता है, यानी इन आँकड़ों पर शिफ़्ट करने से कुल मिलाकर नुक़सान दिखता है।
विस्तृत पंक्तियाँ
मौजूदा EMI और नई EMI, और उनका हर महीने का अंतर।
ब्याज का अंतर (खर्च से पहले): मौजूदा लोन का कुल ब्याज घटा नए लोन का कुल ब्याज।
कुल एकमुश्त खर्च: processing fee + कानूनी/स्टांप ख़र्च + फोरक्लोज़र चार्ज (बकाया पर प्रतिशत के हिसाब से)।
खर्च के बाद कुल अंतर: ऊपर के दोनों का अंतर। हरा रंग फ़ायदा, लाल रंग घाटा।
ब्रेक-ईवन: ख़र्च वसूल होने में लगने वाले महीने, साल-महीनों में भी। अगर नई EMI कम नहीं है तो "नहीं बनता" दिखता है। अगर ब्रेक-ईवन के महीने नई अवधि से भी ज़्यादा हैं, तो साफ़ लिखा आता है कि वह नई अवधि से भी लंबा है।
हरा या पीला संदेश और तुलना की तालिका
ऊपर एक रंगीन संदेश आता है। नतीजा धनात्मक हो तो हरा, वरना पीला। अगर नई अवधि मौजूदा से लंबी रखी है तो साथ में चेतावनी भी आती है कि EMI कम दिखेगी पर कुल ब्याज बढ़ सकता है। नीचे "मौजूदा बनाम नया लोन" की तालिका में ब्याज दर, अवधि, EMI, कुल ब्याज और कुल भुगतान (मूलधन + ब्याज) आमने-सामने हैं, और एक लाइन चार्ट दोनों लोनों के साल-दर-साल बकाया दिखाता है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
पहले अवधि बराबर रखकर तुलना करें। दर का असर तभी साफ़ दिखता है जब अवधि वही हो। फिर अवधि बदलकर देखें।
ब्रेक-ईवन को अपने इरादे से मिलाएँ। अगर ब्रेक-ईवन 6 साल है और आप लोन 4 साल में प्रीपे करने की सोच रहे हैं, तो शायद शिफ़्ट का फ़ायदा न बैठे।
हर ख़र्च भरें। सबसे आम ग़लती है सिर्फ़ processing fee डालना और बाक़ी भूल जाना।
बकाया और दर बैंक से मिलाकर लें। पुरानी दर या पुराना बकाया डालेंगे तो नतीजा भी पुराना होगा।
पुराने लेंडर से बातचीत का रास्ता भी देखें। कई बार पुराना लेंडर दर कम करने का विकल्प देता है; तब आप इस calculator में नई दर डालकर बिना शिफ़्ट किए फ़र्क़ देख सकते हैं (ख़र्च शून्य रखकर)।
दो प्रस्ताव, दो रन। हर प्रस्ताव के आँकड़े बारी-बारी से डालकर नतीजे की तुलना करें।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
सिर्फ़ दर देखकर फ़ैसला। 0.3-0.5% का फ़र्क़ छोटा लगता है, पर लंबी अवधि और बड़े बकाया पर वह बड़ी रकम बनता है; दूसरी ओर ख़र्च भी बड़े होते हैं। दोनों को साथ देखना ही सही है।
कम EMI को बचत मान लेना। अवधि बढ़ाकर EMI घटाई जाए तो कुल ब्याज बढ़ता है। ऊपर के उदाहरण में यही दिखा।
फ्लोटिंग दर की शर्तें न पढ़ना। आज की कम दर कल कितनी बदलेगी, और दर किस बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है, इसकी जानकारी KFS और एग्रीमेंट में देखें।
टैक्स कटौती का असर भूल जाना। होम लोन के ब्याज और मूलधन पर मिलने वाली कटौतियों की शर्तें और सीमाएँ बदलती रहती हैं। आयकर विभाग की साइट या अपने CA से ताज़ा नियम पूछें। यह calculator टैक्स का हिसाब नहीं जोड़ता।
प्रीपेमेंट/फोरक्लोज़र चार्ज को हमेशा शून्य मान लेना। यह लोन के प्रकार और स्वीकृति की तारीख़ जैसी बातों पर निर्भर है। अपने बैंक से लिखित जानकारी लें और RBI के संबंधित निर्देश देखें।
एक लेंडर पर ही भरोसा। अलग-अलग प्रस्तावों के असली शुल्क अलग होते हैं; यह calculator किसी लेंडर की सिफ़ारिश नहीं करता।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
दोनों लोनों की EMI घटते शेष वाले मानक फ़ॉर्मूले से निकलती है: EMI = P × r × (1+r)^n ÷ ((1+r)^n − 1), जहाँ P बकाया मूलधन, r मासिक दर (सालाना ÷ 12) और n महीनों की संख्या है। कुल ब्याज = EMI × n − P।
ब्रेक-ईवन के महीने = एकमुश्त ख़र्च ÷ मासिक EMI का अंतर, ऊपर के पूर्णांक में। यह तभी निकलता है जब नई EMI कम हो।
मान्यताएँ: नए लोन में वही बकाया मूलधन जाता है (यानी ख़र्च आप अलग से जेब से देते हैं, लोन में नहीं जोड़े जाते); दरें पूरी अवधि में स्थिर हैं; टैक्स लाभ का असर नहीं जोड़ा गया है; और कोई लेंडर या प्रोडक्ट सुझाया नहीं गया है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए अनिल और सुनीता का होम लोन ₹42,00,000 बकाया है, मौजूदा दर 9.4% और 15 साल बचे हैं। कोई नया लेंडर 8.7% पर वही लोन ले लेने को तैयार है, 15 साल की वही अवधि, processing fee ₹30,000 और कानूनी/स्टांप ख़र्च ₹12,000, फोरक्लोज़र चार्ज शून्य। आँकड़े काल्पनिक हैं।
मौजूदा EMI लगभग ₹43,604; नई EMI लगभग ₹41,853; हर महीने का अंतर लगभग ₹1,751।
मौजूदा लोन का कुल ब्याज लगभग ₹36,48,784; नए का लगभग ₹33,33,526; अंतर लगभग ₹3,15,259।
अगर पुराने लोन पर 2% फोरक्लोज़र चार्ज लगे: चार्ज = 42,00,000 × 2% = ₹84,000, तो कुल ख़र्च बनता है ₹1,26,000। शुद्ध अंतर लगभग ₹1,89,259 रह जाता है, और ब्रेक-ईवन खिसककर लगभग 72 महीने (6 साल) हो जाता है। बचत अब भी है, पर सब्र लंबा चाहिए।
अगर नई अवधि 20 साल रखी जाए: EMI घटकर लगभग ₹36,982 आती है, पर नया कुल ब्याज बढ़कर लगभग ₹46,75,671 हो जाता है। शुद्ध अंतर बन जाता है लगभग −₹10,68,887, यानी घाटा। EMI कम दिखती है, पर कुल मिलाकर महँगा पड़ता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह calculator मानता है कि दर पूरे समय स्थिर रहेगी, जबकि फ्लोटिंग दर बदलती है। यह टॉप-अप लोन, बीमा, पुराने लोन की पूरी बंद-रसीद या नए लेंडर की पात्रता और मंज़ूरी की संभावना नहीं बताता। ब्रेक-ईवन का हिसाब सिर्फ़ मासिक EMI की बचत से होता है, जबकि ब्याज की बचत हर महीने बराबर नहीं होती। इसमें पैसे के समय-मूल्य और आपके वैकल्पिक निवेश का रिटर्न नहीं जुड़ा है। साथ ही अवधि पूरे सालों में ही ली जाती है, इसलिए बचे हुए सटीक महीनों के कारण थोड़ा अंतर आ सकता है। नतीजे को अनुमान मानें और अंतिम फ़ैसले से पहले दोनों लेंडरों से लिखित शर्तें, सटीक बकाया और amortisation schedule लें।
यह लेख और calculator सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी के लिए हैं; नतीजे अनुमान हैं और किसी लेंडर बदलने की सलाह नहीं हैं। लोन से जुड़े फ़ैसले से पहले बैंक की शर्तें, KFS और लोन एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें और ज़रूरत हो तो योग्य सलाहकार से बात करें।
6 काम की बातें याद रखें
1
अवधि बराबर रखकर तुलना करें
पहले दोनों लोन की अवधि बराबर रखकर देखें कि दर के फ़र्क़ से कितना बचता है। अवधि बदलने पर तुलना बिगड़ जाती है।
2
सभी शुल्क लिखित में लें
processing fee, कानूनी और valuation शुल्क, stamp/मॉर्गेज खर्च, और पुराने लेंडर का foreclosure charge सब पूछें और लिखवाएँ।
3
पहले अपने पुराने लेंडर से बात करें
कुछ लेंडर दर घटाने या शर्तें बदलने की सुविधा देते हैं। इसकी शर्तें और शुल्क पूछकर तुलना में जोड़ें।
4
कितने साल रुकेंगे, यह सोचें
अगर आप जल्दी लोन चुकाने या प्रॉपर्टी बेचने की सोच रहे हैं, तो break-even से पहले ही सब ख़त्म हो सकता है।
5
दर का प्रकार और रीसेट की शर्त पढ़ें
फ़्लोटिंग दर किस आधार पर बदलती है और रीसेट पर आपके पास क्या विकल्प हैं, यह नए लेंडर की शर्तों में देखें।
6
क्रेडिट स्कोर और दस्तावेज़ तैयार रखें
नए लेंडर की मंज़ूरी आपके स्कोर, भुगतान के रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों पर निर्भर है।
इसमें नया लेंडर आपका बकाया लोन पुराने लेंडर को चुका देता है और आप नए लेंडर को नए लोन एग्रीमेंट के तहत EMI देते हैं। इस दौरान आम तौर पर आवेदन, संपत्ति की वैल्यूएशन और कानूनी जाँच, पुराने लेंडर से NOC व संपत्ति के कागज़ात की वापसी और नए लेंडर के पास मॉर्गेज दर्ज होना जैसे कदम होते हैं। सटीक प्रक्रिया और दस्तावेज़ लेंडर के अनुसार अलग हो सकते हैं।
RBI के नियम के अनुसार 1 जनवरी 2026 या उसके बाद स्वीकृत या रिन्यू हुए, व्यक्तिगत और गैर-व्यावसायिक फ़्लोटिंग-रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगाया जा सकता। इससे पहले के लोन पर लेंडर के प्रकार और लोन की तारीख के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं, और फ़िक्स्ड-रेट लोन पर चार्ज लेंडर की नीति के अनुसार होता है। अपना लोन एग्रीमेंट और KFS ज़रूर पढ़ें।
Processing fee, कानूनी और वैल्यूएशन खर्च, मॉर्गेज/स्टांप खर्च, अवधि, फ़्लोटिंग दर किससे जुड़ी है (जैसे रेपो रेट जैसा बाहरी बेंचमार्क) और रेट-रीसेट व फ़िक्स्ड में बदलने की शर्तें देखना काम आता है। RBI के नियम के अनुसार KFS में सारे चार्जेज़ और APR दिखाना ज़रूरी है, और जो फीस KFS में नहीं है वह बाद में नहीं लगाई जा सकती। इसलिए कुल लागत KFS से मिलाइए।
RBI के निर्देश के अनुसार रेट बदलने पर लेंडर को आपको EMI बढ़ाने, अवधि बढ़ाने या दोनों का विकल्प देना होता है, और आप आंशिक या पूरा प्रीपेमेंट बिना फोरक्लोज़र चार्ज के कर सकते हैं। फ़िक्स्ड रेट में जाने का विकल्प देना लेंडर की अपनी नीति पर है, और उसके चार्जेज़ सैंक्शन लेटर में बताए जाने चाहिए।
आम तौर पर होम लोन का मूलधन 80C / 123 (₹1.5 लाख की सीमा में) और खुद के घर के ब्याज की कटौती 24(b) / 22 (₹2 लाख तक) Old Regime में मिलती रहती है, बशर्ते शर्तें पूरी हों और लेंडर का सर्टिफिकेट हो। नियम के अनुसार पुराना कर्ज़ चुकाने के लिए लिए गए नए लोन का ब्याज भी "उधार पूँजी पर ब्याज" में गिना जा सकता है। अपने मामले की जाँच CA या इनकम टैक्स पोर्टल पर कर लें।
वह महीना जब मासिक EMI बचत का जोड़ एकमुश्त खर्चों के बराबर हो जाए। उसके बाद की हर बचत असली फ़ायदा है।
पुराने लोन के कुल ब्याज में से नए लोन का कुल ब्याज घटाएँ, फिर उसमें से एकमुश्त खर्च घटाएँ। नतीजा नेगेटिव हो तो ट्रांसफ़र घाटे का दिखता है।
कि EMI घटी दिख सकती है, पर कुल ब्याज बढ़ सकता है। इसलिए बचत को सिर्फ़ EMI में देखकर फ़ैसला न करें।
तब break-even बनता ही नहीं, क्योंकि मासिक बचत नहीं है। पेज यह संदेश दिखाता है और खर्च वसूल होने की गुंजाइश नहीं मानता।
कानूनी जाँच, valuation, मॉर्गेज/stamp खर्च और पुराने लेंडर के दस्तावेज़ों का शुल्क। जो भी लिखित में बताया जाए, उसे पेज में जोड़ें।
लोन के प्रकार और शर्तों पर निर्भर है। इसलिए पेज में उसे वैकल्पिक % के रूप में रखा गया है; अपने लोन की शर्तों के अनुसार भरें।
पेज मानता है कि दर स्थिर रहेगी। असल में फ़्लोटिंग दर बदलेगी, तो फ़ायदा बढ़ या घट सकता है।
तब ब्याज की बचत इस पेज के अनुमान से अलग होगी। प्रीपेमेंट का असर देखने के लिए Loan Prepayment Calculator साथ में चलाएँ।
कुछ लेंडर देते हैं, पर पेज में टॉप-अप शामिल नहीं है। टॉप-अप की शर्तें नए लेंडर से पूछें और अलग calculator में देखें।
सिर्फ़ दर नहीं, शुल्क, रीसेट की शर्तें, ग्राहक सेवा और प्रीपेमेंट की शर्तें भी देखें। पेज किसी लेंडर की सिफ़ारिश नहीं करता।
नहीं। ब्याज और मूलधन की कर कटौती पर कर के नियम लागू होते हैं, जो इस पेज में शामिल नहीं हैं।
नहीं। यह दोनों लोन पर एक ही दर पूरी अवधि के लिए मानता है। रीसेट का हिसाब अलग calculator में देखें।
नहीं। लोन से जुड़ा बीमा, GST या अन्य शुल्क तभी जुड़ेंगे जब आप उन्हें "शुल्क" में भरें।
नहीं। यह आपके डाले आँकड़ों पर शिक्षा के लिए अनुमान है। असली शर्तें लेंडर की Key Facts Statement और समझौते में देखें।