Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
फ़्लोटिंग रेट बदलने पर क्या होता है?
बैंक जब फ़्लोटिंग रेट (जैसे रेपो-लिंक्ड दर) बदलता है, तो आम तौर पर या तो आपकी EMI वही रहती है और लोन की अवधि बदल जाती है, या अवधि वही रखकर EMI बदली जाती है। यह आपके बैंक की नीति और आपके चुनाव पर निर्भर है।
दर बढ़ने पर अगर EMI वही रहे तो अवधि लंबी होती है और कुल ब्याज काफ़ी बढ़ सकता है; दर घटने पर EMI वही रखने से लोन जल्दी ख़त्म होता है और ब्याज बचता है।
यह calculator बकाया लोन, मौजूदा दर, नई दर और बची अवधि से दोनों स्थितियाँ दिखाता है, ताकि आप बैंक से आने वाले नोटिस को समझ सकें।
आपकी असली EMI बैंक के हिसाब (दिन-आधारित ब्याज, स्टेप्स आदि) से थोड़ी अलग हो सकती है। सही आँकड़े के लिए बैंक का लोन स्टेटमेंट देखें।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Current EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), i = old rate ÷ 12, n = remaining months. Option 1 (same EMI): the new number of months solves P = EMI × (1 − (1+j)^−m) ÷ j with j = new rate ÷ 12. Option 2 (same tenure): new EMI = the same formula with j and n. Interest = total paid − outstanding.
मौजूदा EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), i = पुरानी दर ÷ 12, n = बचे महीने। विकल्प 1 (EMI वही): नए महीने m इस समीकरण से निकलते हैं P = EMI × (1 − (1+j)^−m) ÷ j, j = नई दर ÷ 12। विकल्प 2 (अवधि वही): नई EMI = वही सूत्र j और n के साथ। ब्याज = कुल चुकाई रकम − बकाया।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 10 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Estimate using standard monthly-reducing-balance maths. Your bank's actual EMI, tenure and interest may differ because of day-count, rounding, processing rules and its reset policy. Check your loan statement or ask your lender. Not financial advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह सामान्य मासिक घटते-बैलेंस वाले गणित का अनुमान है। आपके बैंक की असली EMI, अवधि और ब्याज दिन-गिनती, राउंडिंग, प्रोसेसिंग नियमों और रीसेट नीति के कारण अलग हो सकते हैं। अपना लोन स्टेटमेंट देखें या बैंक से पूछें। यह वित्तीय सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
फ़्लोटिंग दर बदलने पर बैंक या तो EMI बदलता है या अवधि। यह पेज दोनों रास्ते साथ-साथ दिखाता है।
दर थोड़ी भी बढ़े और EMI वही रहे तो अवधि लंबी होती है और कुल ब्याज उससे कहीं ज़्यादा बढ़ता है जितना EMI बदलने पर बढ़ता।
बची अवधि जितनी लंबी और बकाया जितना बड़ा, एक छोटा-सा दर-बदलाव उतना भारी पड़ता है।
यहाँ की सारी दरें उदाहरण हैं। अपनी असली बकाया रकम, दर और बची अवधि बैंक के लोन स्टेटमेंट से लें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
पेज का शुरुआती उदाहरण
बकाया ₹40,00,000, दर 8.5% से 9% हुई, बची अवधि 15 साल।
मौजूदा EMI
₹39,390
विकल्प 1: EMI वही रहे तो नई अवधि
16 साल (1 साल ज़्यादा)
विकल्प 2: अवधि वही रहे तो नई EMI
₹40,571 (₹1,181 ज़्यादा)
पुरानी दर पर कुल ब्याज
₹30,90,125
विकल्प 1 में कुल ब्याज
₹35,62,800
विकल्प 2 में कुल ब्याज
₹33,02,719
आधा प्रतिशत की बढ़त पर EMI वही रखने से ब्याज करीब ₹4.73 लाख बढ़ा, जबकि EMI बढ़ाने पर करीब ₹2.13 लाख। दोनों में ब्याज बढ़ता है, पर EMI बढ़ाना सस्ता पड़ा।
अंजलि: दर घटी तो EMI वही रखी
बकाया ₹25,00,000, दर 9% से 8.25% हुई, बची अवधि 10 साल।
मौजूदा EMI
₹31,669
EMI वही रखी तो नई अवधि
9 साल 7 महीने
अवधि वही रखी तो नई EMI
₹30,663 (₹1,006 कम)
पुरानी दर पर कुल ब्याज
₹13,00,273
EMI वही रखने पर ब्याज
₹11,41,928
EMI घटाने पर ब्याज
₹11,79,579
EMI कम होने की जगह वही रखने पर लोन 5 महीने जल्दी ख़त्म होता है और ब्याज लगभग ₹37,600 और कम रहता है।
राजेश: बड़ा लोन, लंबी अवधि, 1% की बढ़त
बकाया ₹60,00,000, दर 8.5% से 9.5%, बची अवधि 20 साल।
मौजूदा EMI
₹52,069
EMI वही रही तो नई अवधि
25 साल 9 महीने (5 साल 9 महीने ज़्यादा)
अवधि वही रखी तो नई EMI
₹55,928 (₹3,858 ज़्यादा)
पुरानी दर पर कुल ब्याज
₹64,96,655
EMI वही रही तो ब्याज
₹1,00,89,443
EMI बढ़ाई तो ब्याज
₹74,22,689
बिना कुछ किए EMI वही छोड़ देने से ब्याज ₹35 लाख से ज़्यादा बढ़ गया। बड़ी रकम और लंबी अवधि में चुप बैठना सबसे महँगा पड़ता है।
नई दर बनाम EMI (बकाया ₹40,00,000, बची अवधि 15 साल, मौजूदा 8.5%)
नई दर बनाम EMI (बकाया ₹40,00,000, बची अवधि 15 साल, मौजूदा 8.5%)
नई दर
EMI वही रहे तो अवधि
अवधि वही रहे तो EMI
EMI में बदलाव
7.5%
13 साल 6 महीने
₹37,080
−₹2,309
8%
14 साल 3 महीने
₹38,226
−₹1,163
8.5%
15 साल
₹39,390
0
9%
16 साल
₹40,571
+₹1,181
9.5%
17 साल 3 महीने
₹41,769
+₹2,379
10%
18 साल 10 महीने
₹42,984
+₹3,595
11%
24 साल 5 महीने
₹45,464
+₹6,074
ये दरें सिर्फ़ तुलना के उदाहरण हैं। बैंक की असली दर और उसकी गणना की विधि अलग हो सकती है।
हर ₹10 लाख बकाया पर EMI का असर (15 साल, मौजूदा 8.5%)
हर ₹10 लाख बकाया पर EMI का असर (15 साल, मौजूदा 8.5%)
नई दर
EMI (प्रति ₹10 लाख)
मौजूदा से फ़र्क़
7.5%
₹9,270
−₹577
8%
₹9,557
−₹291
8.5%
₹9,847
0
9%
₹10,143
+₹295
9.5%
₹10,442
+₹595
10%
₹10,746
+₹899
अपने बकाया को ₹10 लाख के गुणक में बाँटकर मोटा अंदाज़ा लगाया जा सकता है: ₹40 लाख पर फ़र्क़ चार गुना।
त्वरित संदर्भ: दर बदलने पर EMI/अवधि
त्वरित संदर्भ: दर बदलने पर EMI/अवधि
मौजूदा EMI
P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = पुरानी दर ÷ 12, n = बचे महीने
विकल्प 1 (EMI वही)
नई दर पर वही EMI कितने महीने में बकाया चुकाएगी
विकल्प 2 (अवधि वही)
वही n, पर नई दर पर नई EMI
कुल ब्याज
कुल चुकाई रकम − बकाया
दर बढ़ी, EMI वही
अवधि लंबी होती है, ब्याज बढ़ता है
दर घटी, EMI वही
लोन जल्दी ख़त्म, ब्याज की बचत
"कभी ख़त्म नहीं" का मतलब
वही EMI नए ब्याज को भी नहीं चुका पा रही, या अवधि 100 साल से ऊपर है
इस पेज में क्या नहीं
शुल्क, बीमा, प्रीपेमेंट की तारीख़ें और बैंक के MCLR/EBLR वाले नियम।
Floating Rate Loan Reset Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
फ़्लोटिंग रेट वाले लोन में ब्याज दर स्थिर नहीं रहती। बैंक की बेंचमार्क दर (जैसे रेपो से जुड़ी दर) बदलती है तो आपके लोन की दर भी तय समय पर बदल जाती है, जिसे "रीसेट" कहते हैं। तब बैंक का संदेश आता है कि दर बढ़ गई या घट गई, और आपके मन में दो सवाल उठते हैं: क्या मेरी EMI बदलेगी, या EMI वही रहेगी और लोन की अवधि बदल जाएगी?
Floating Rate Loan Reset Calculator इन दोनों संभावनाओं को साथ-साथ दिखाता है। आप बकाया लोन, मौजूदा दर, नई दर और बची अवधि डालते हैं। calculator दो विकल्प निकालता है:
विकल्प 1, EMI वही: आप किस्त उतनी ही रखते हैं जितनी अब तक थी, और देखते हैं कि लोन कितने महीने लंबा या छोटा हो गया और कुल ब्याज कितना बदला।
विकल्प 2, अवधि वही: आप चाहते हैं कि लोन उसी तारीख़ को ख़त्म हो, तो नई EMI कितनी होगी।
साथ में एक तुलना तालिका है जिसमें "मौजूदा", "EMI वही" और "अवधि वही" तीनों स्थितियाँ एक नज़र में दिखती हैं।
ध्यान दें: बैंक अपनी नीति के अनुसार तय करता है कि दर बदलने पर EMI बदलेगी या अवधि। कई बार आपको चुनने का अवसर भी मिलता है। यह calculator उसे चुनने में मदद करता है, पर आख़िरी निर्णय बैंक की शर्तों से जुड़ा है।
किसके काम का है
वह कोई भी जिसने होम लोन, कार लोन या कोई और फ़्लोटिंग दर वाला लोन लिया है और बैंक से दर बदलने का नोटिस आया है।
जो लोन लेने से पहले यह समझना चाहता है कि दर 1% बढ़ने पर बोझ कितना बढ़ेगा (एक तरह का तनाव-परीक्षण)।
जो यह तय करना चाहते हैं कि दर घटने पर EMI कम करवाएँ या EMI वही रखकर लोन जल्दी बंद करें।
जो अपने बजट में EMI बढ़ने की गुंजाइश पहले से देखना चाहते हैं।
वे लोग जो बैंक से बात करते समय सही सवाल पूछना चाहते हैं, जैसे "मेरी अवधि कितनी बढ़ी?"
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर पाँच स्लाइडर हैं।
बकाया लोन (₹): ₹1 लाख से ₹10 करोड़ तक, ₹50,000 के कदम में, शुरुआती ₹40 लाख। यहाँ मूल लोन नहीं, आज की तारीख़ में जो मूलधन बाक़ी है वह डालें। यह आपके लोन स्टेटमेंट में "outstanding principal" के नाम से मिलेगा।
मौजूदा ब्याज दर (% सालाना): 5% से 18%, 0.05 के कदम में, शुरुआती 8.5%। यानी रीसेट से पहले की दर।
नई ब्याज दर (% सालाना): उसी दायरे में, शुरुआती 9%। बैंक के नोटिस में जो नई दर लिखी हो वह डालें, या कुछ काल्पनिक दरें आज़माएँ।
बची हुई अवधि (साल): 0 से 30, शुरुआती 15।
और अतिरिक्त महीने: 0 से 11, ताकि आप 17 साल 6 महीने जैसी बची अवधि डाल सकें।
यहाँ मौजूदा EMI अलग से नहीं पूछी जाती। calculator बकाया रकम, मौजूदा दर और बची अवधि से EMI ख़ुद निकाल लेता है। इसलिए ज़रूरी है कि आप बकाया रकम और बची अवधि सही डालें। अगर आपकी असली EMI कुछ अलग है (क्योंकि पहले की दर बदलती रही हो या आपने प्रीपेमेंट किया हो), तो अंतर आ सकता है।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर बड़ा आँकड़ा है: दर बढ़ने पर EMI में बदलाव (अगर आप अवधि वही रखें), जैसे "+ ₹1,477 / माह", और उसके नीचे "EMI ₹29,133 से ₹30,610" जैसा विवरण। दर घटने पर यही आँकड़ा घटाव दिखाता है। अगर दोनों दरें बराबर हों तो "दर में कोई बदलाव नहीं" लिखा आता है।
नीचे की पंक्तियाँ:
मौजूदा EMI और बची अवधि: रीसेट से पहले की स्थिति।
विकल्प 1, EMI वही: नई अवधि और अवधि में बदलाव: नई दर पर वही EMI देने पर लोन कितने साल-महीने में चुकेगा, और वह पहले से कितना ज़्यादा या कम है।
विकल्प 2, अवधि वही: नई EMI और EMI में बदलाव: अवधि बाँधे रखने पर नई किस्त और उसमें फ़र्क़।
पुरानी दर पर कुल ब्याज, विकल्प 1 में कुल ब्याज, विकल्प 2 में कुल ब्याज: तीनों स्थितियों में बची अवधि का कुल ब्याज।
दर बढ़ने पर एक रंगीन संदेश आता है कि अगर EMI वही रखेंगे तो अवधि और ब्याज दोनों बढ़ेंगे। दर घटने पर संदेश कहता है कि EMI वही रखने से लोन जल्दी बंद होता है। और अगर दर इतनी बढ़ गई कि मौजूदा EMI नए ब्याज को भी नहीं ढक पाती, तो लाल चेतावनी दिखती है कि "लोन कभी ख़त्म नहीं होगा"। इसी तरह अगर अवधि 100 साल (1,200 महीने) से ज़्यादा निकले तो भी यही संदेश आता है।
पाई चार्ट विकल्प 1 के मूलधन और ब्याज का अनुपात दिखाता है। नीचे तुलना तालिका में पाँच पंक्तियाँ हैं: ब्याज दर, EMI, अवधि, कुल ब्याज और कुल चुकाई रकम, तीन कॉलम (मौजूदा, EMI वही, अवधि वही) में।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
नोटिस आने से पहले ही तनाव-परीक्षण करें
नई दर में काल्पनिक +0.5%, +1% और +2% डालकर देखें कि EMI या अवधि कितनी बदलेगी। इससे पता चलता है कि आपका बजट कितना झटका सह सकता है।
छोटे बदलाव का असर भी देखें
₹32 लाख, 210 महीने के उसी लोन पर दर 8.4% से 8.65% हो तो EMI में सिर्फ़ ₹489 का फ़र्क़ पड़ता है और EMI वही रखने पर अवधि 219 महीने हो जाती है, यानी 9 महीने ज़्यादा। 8.9% पर EMI ₹981 अधिक और अवधि 229 महीने। छोटे बदलाव अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, पर साल-दर-साल जुड़ते जाते हैं।
दर घटे तो EMI वही रखने पर विचार करें
अगर बजट कसा हुआ नहीं है, तो दर घटने पर EMI पहले जितनी रखने से लोन जल्दी बंद होता है और ब्याज बचता है। पर यदि इमरजेंसी फंड कमज़ोर हो, तो पहले उसे मज़बूत करना ज़्यादा ज़रूरी हो सकता है।
दर बढ़े तो प्रीपेमेंट का हिसाब लगाएँ
बकाया घटाकर आप ब्याज का आधार घटाते हैं। बोनस जैसी रकम से थोड़ा प्रीपेमेंट करने पर क्या होगा, इसके लिए Loan Prepayment Calculator देखें।
बैंक का स्टेटमेंट साथ रखें
बकाया मूलधन और बची अवधि अपने नवीनतम लोन स्टेटमेंट से लें। अनुमान की जगह असली आँकड़े डालेंगे, तो नतीजा भी ज़्यादा भरोसेमंद होगा।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
पूरा मूल लोन डाल देना। यहाँ "बकाया" रकम चाहिए। शुरू में लिया गया ₹50 लाख आज ₹32 लाख बचा है तो ₹32 लाख डालें।
सोचना कि दर बढ़ी तो EMI ही बढ़ेगी। कई बैंकों में अवधि चुपचाप बढ़ जाती है, जिसका पता सालों बाद चलता है। स्टेटमेंट में बची अवधि ज़रूर देखें।
अवधि के बढ़ने को छोटी बात मानना। ऊपर के उदाहरण में 30 महीने की बढ़त ने लगभग ₹8.7 लाख अतिरिक्त ब्याज जोड़ा।
फ़्लोटिंग और फ़िक्स्ड दर को एक जैसा मानना। फ़िक्स्ड दर तय अवधि तक नहीं बदलती, फ़्लोटिंग दर बदलती है।
दर घटने पर EMI अपने-आप घट जाएगी, ऐसा मान लेना। यह बैंक की नीति और आपके अनुरोध पर निर्भर है।
नई दर के नोटिस को अनदेखा करना। अगर बैंक ने सूचना दी है, तो उसके लिए जवाब या विकल्प चुनने की समय सीमा हो सकती है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
मौजूदा EMI = P × i × (1+i)^n ÷ ((1+i)^n − 1), जहाँ i = पुरानी दर ÷ 12 ÷ 100 और n = बचे महीने।
विकल्प 2 (अवधि वही): नई EMI इसी सूत्र से, पर i की जगह नई दर j = नई दर ÷ 12 ÷ 100।
विकल्प 1 (EMI वही): नए महीने m इस समीकरण से निकलते हैं: P = EMI × (1 − (1+j)^−m) ÷ j। यानी m = − ln(1 − P × j ÷ EMI) ÷ ln(1+j)। सबसे नज़दीकी ऊपर के पूरे महीने तक गोल किया जाता है।
अगर EMI ≤ P × j, यानी किस्त सिर्फ़ मासिक ब्याज के बराबर या उससे कम है, तो लोन कभी नहीं चुकेगा, इसलिए "कभी ख़त्म नहीं होगा" दिखाया जाता है।
कुल ब्याज = EMI × महीने − P।
मान्यताएँ: बकाया रकम और बची अवधि सही हैं, नई दर बची हुई पूरी अवधि में एक जैसी रहेगी, और हर बार किस्त समय पर जाती है। फ़्लोटिंग दर आगे फिर से बदल सकती है।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए सरिता और राजीव ने पुणे में फ़्लैट के लिए होम लोन लिया है। आज ₹32 लाख बकाया है, मौजूदा दर 8.4% है और बची अवधि 17 साल 6 महीने (यानी 210 महीने) है। बैंक का नोटिस आता है कि दर 9.15% हो गई है।
मौजूदा EMI ≈ ₹29,133 (8.4% पर, 210 महीने)।
विकल्प 2 (अवधि वही): 9.15% पर नई EMI ≈ ₹30,610, यानी लगभग ₹1,477 प्रति माह ज़्यादा।
विकल्प 1 (EMI वही): ₹29,133 की किस्त पर अवधि बढ़कर 240 महीने यानी 20 साल हो जाती है, यानी 30 महीने (2 साल 6 महीने) ज़्यादा।
कुल ब्याज: पुरानी दर पर ≈ ₹29,17,878; विकल्प 1 में ≈ ₹37,91,861; विकल्प 2 में ≈ ₹32,28,083।
यानी EMI वही रखना आज की जेब को हल्का रखता है, पर कुल ब्याज में लगभग ₹8.7 लाख का बोझ जोड़ देता है, जबकि EMI थोड़ी बढ़ाने पर बोझ लगभग ₹3.1 लाख ही बढ़ता है। फ़ैसला उनके बजट पर है, पर संख्याएँ अब सामने हैं।
दर घटने की स्थिति
इसी लोन पर अगर दर 8.4% से घटकर 7.65% होती है:
नई EMI (अवधि वही) ≈ ₹27,691, यानी लगभग ₹1,442 प्रति माह कम।
EMI वही रखें (₹29,133) तो लोन 210 की जगह 190 महीने में बंद होगा, यानी 20 महीने जल्दी, और कुल ब्याज ≈ ₹23,35,223 रह जाएगा, जबकि अवधि वही रखने पर ≈ ₹26,15,039।
जब "कभी ख़त्म नहीं" का संदेश आए
एक रेस्तराँ मालिक के ₹60 लाख बकाया लोन पर 8.5% दर और 20 साल बचे हैं। EMI ≈ ₹52,069। अगर दर अचानक 10.5% हो जाए और वे EMI वही रखें, तो मासिक ब्याज ही 60,00,000 × 10.5% ÷ 12 = ₹52,500 है, जो किस्त से ज़्यादा है। इसलिए बकाया रकम घटने के बजाय बढ़ेगी, और calculator चेतावनी देता है। इस स्थिति में बैंक से EMI बढ़वाना या प्रीपेमेंट करना ज़रूरी हो जाता है। (अवधि वही रखने पर नई EMI ≈ ₹59,903 होगी।) अगर दर 10% होती, तो EMI वही रखने पर भी लोन 389 महीने यानी 32 साल से ज़्यादा चलता।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह नहीं बताता कि दर भविष्य में कहाँ जाएगी, या बैंक कब रीसेट करेगा।
बैंक की दिन-गिनती, राउंडिंग और रीसेट की अपनी नीति के कारण असली आँकड़े कुछ अलग हो सकते हैं।
पहले से किया गया प्रीपेमेंट या भुगतान की छूट का इतिहास इसमें अलग से नहीं पूछा जाता।
मान लिया गया है कि दर एक ही बार बदली है और आगे स्थिर रहेगी, जबकि वास्तव में कई बार बदल सकती है।
प्रोसेसिंग या रीसेट शुल्क, बीमा और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।
टैक्स छूट का असर शामिल नहीं है।
यह तय नहीं करता कि आपको कौन-सा विकल्प चुनना चाहिए; वह आपके बजट और लक्ष्यों पर निर्भर है।
यह लेख केवल शिक्षा और जानकारी के लिए है। यह निवेश, टैक्स, कर्ज़ या कानूनी सलाह नहीं है, और नतीजे अनुमान हैं। अपने लोन की असली स्थिति के लिए बैंक का स्टेटमेंट देखें या सीधे बैंक से पूछें।
6 काम की बातें याद रखें
1
लोन स्टेटमेंट से बकाया लें
बैंक की साइट या ऐप पर "outstanding principal" देखें और वही यहाँ डालें, मूल लोन की रकम नहीं।
2
बैंक का पत्र या SMS पढ़ें
दर बदलने पर बैंक आम तौर पर बताता है कि उसने EMI बदली या अवधि बढ़ाई। उसी के आधार पर तुलना करें।
3
छोटी EMI-बढ़त भी अवधि बचाती है
दर बढ़ने पर EMI थोड़ी बढ़ा देना अक्सर कई साल का ब्याज बचा देता है।
4
प्रीपेमेंट का पहले हिसाब लगाएँ
अगर कुछ रकम एकमुश्त चुका सकें तो बकाया घटाकर नई EMI या अवधि दोबारा यहाँ चलाएँ।
5
अवधि की ऊपरी सीमा देखें
बैंक की अपनी उम्र या अवधि की सीमा हो सकती है, जिससे अवधि अनिश्चित नहीं बढ़ाई जा सकती।
6
साल में एक बार जाँच
दर बदले या नहीं, साल में एक बार बकाया और बची अवधि का मिलान करते रहें।
यह बैंक की नीति और आपके चुनाव पर निर्भर है। कई बार EMI वही रहती है और अवधि बदल जाती है; कई बार अवधि वही रखकर EMI बदली जाती है। यह calculator दोनों स्थितियाँ दिखाता है।
EMI वही रखने पर अवधि और कुल ब्याज बढ़ता है। अगर बजट अनुमति दे तो EMI थोड़ी बढ़वाएँ या कुछ प्रीपेमेंट करें, ताकि अवधि न बढ़े। अपने बैंक से विकल्प पूछ लें।
अक्सर हाँ, क्योंकि इससे लोन जल्दी ख़त्म होता है और कुल ब्याज बचता है। पर अपने बजट और अन्य लक्ष्यों के हिसाब से तय करें।
बैंक दिन-आधारित ब्याज, राउंडिंग और अपने रीसेट नियम इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए आँकड़े थोड़े अलग हो सकते हैं। सही आँकड़े के लिए लोन स्टेटमेंट देखें।
फ़्लोटिंग दर वाले लोन में बैंक अपने बेंचमार्क के हिसाब से समय-समय पर आपकी ब्याज दर बदलता है। इसी बदलाव को reset कहते हैं।
लोन स्टेटमेंट पर दिखने वाला outstanding principal, यानी अब तक की किस्तों के बाद बचा मूलधन। मूल स्वीकृत रकम नहीं।
ज़्यादातर लोन में बची अवधि पूरे साल में नहीं होती। इसलिए साल के साथ अतिरिक्त 0 से 11 महीने जोड़ने का स्लाइडर है।
क्योंकि नई दर पर मौजूदा EMI सिर्फ़ ब्याज भी नहीं चुका पा रही, या अवधि 100 साल से ऊपर जा रही है। तब EMI बढ़वानी या प्रीपेमेंट करनी होगी।
क्योंकि एक में अवधि लंबी हो जाती है और ब्याज ज़्यादा महीनों तक चलता है, जबकि दूसरे में EMI बड़ी होकर जल्दी मूलधन घटाती है।
नहीं। EMI बढ़ाने पर ब्याज कम रहता है, पर हर महीने का बजट तंग हो सकता है। अपनी आमदनी और खर्च देखकर चुनें।
ग़लत नहीं, यह आपकी ज़रूरत पर निर्भर है। EMI वही रखने से ब्याज ज़्यादा बचता है, EMI घटाने से मासिक बोझ हल्का होता है।
यह बैंक की नीति पर निर्भर है। इस पेज में कोई शुल्क नहीं जोड़ा गया, इसलिए बैंक से अलग से पूछना होगा।
नहीं। इसमें सिर्फ़ मूलधन, ब्याज दर और अवधि हैं। प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा या दूसरे शुल्क शामिल नहीं हैं।
नहीं। यह पेज सिर्फ़ पुरानी और नई दर लेता है। बेंचमार्क कौन-सा है और कब बदलेगा, यह आपको लोन के कागज़ात में देखना होगा।
यह पेज एक ही बदलाव दिखाता है। अगले बदलाव के बाद नया बकाया और नई बची अवधि डालकर फिर चलाएँ।
बैंक कभी पूरे पैसों में गोल करता है, या महीनों के दिन गिनता है। इसलिए कुछ रुपये का अंतर संभव है, पर ढाँचा वही रहता है।
नहीं। जो प्रीपेमेंट हो चुकी है, वह बकाया रकम में पहले ही घट चुकी होनी चाहिए। यहाँ बकाया ही अंतिम आँकड़ा माना जाता है।
नहीं, यह शैक्षणिक गणना है। असली फ़ैसला लेने से पहले अपने बैंक से शर्तें पक्की कर लें।