मान लीजिए मीना एक निजी कंपनी में नौकरी करती हैं और उन पर तीन कर्ज़ हैं। (ये सिर्फ़ काल्पनिक आँकड़े हैं।)
- कर्ज़ 1: क्रेडिट कार्ड, बकाया ₹60,000, ब्याज 36% सालाना, न्यूनतम किस्त ₹3,000
- कर्ज़ 2: पर्सनल लोन, बकाया ₹2,50,000, ब्याज 15%, किस्त ₹8,000
- कर्ज़ 3: बाइक लोन, बकाया ₹40,000, ब्याज 11%, किस्त ₹3,000
वे हर महीने ₹4,000 अतिरिक्त दे सकती हैं। कुल मासिक बजट = 3,000 + 8,000 + 3,000 + 4,000 = ₹18,000।
आधार: बिना अतिरिक्त रकम। अगर वे सिर्फ़ न्यूनतम किस्तें देती रहें (और बंद होने वाले कर्ज़ की किस्त आगे नहीं घुमाएँ), तो सारे कर्ज़ चुकने में लगभग 40 महीने और कुल ब्याज लगभग ₹1,04,847 लगता है।
Avalanche। अतिरिक्त ₹4,000 पहले क्रेडिट कार्ड (36%) पर जाता है। कार्ड 11वें महीने में बंद होता है, बाइक लोन 15वें महीने में और पर्सनल लोन 23वें महीने में। कुल समय 23 महीने और कुल ब्याज लगभग ₹59,898।
Snowball। अतिरिक्त रकम पहले सबसे छोटे बकाये, यानी बाइक लोन (₹40,000), पर जाती है। वह 6वें महीने में बंद होता है, क्रेडिट कार्ड 12वें महीने में और पर्सनल लोन 24वें महीने में। कुल समय 24 महीने, कुल ब्याज लगभग ₹64,246।
तुलना। Avalanche, Snowball से लगभग ₹4,348 कम ब्याज और एक महीना कम लेता है। आधार की तुलना में अतिरिक्त ₹4,000 महीना देने से ब्याज में लगभग ₹44,949 की बचत और लगभग 17 महीने की जल्दी दिखती है।
इस नतीजे से तीन बातें निकलती हैं। पहली: सबसे ज़्यादा फ़र्क इस बात से पड़ा कि अतिरिक्त रकम दी गई, न कि तरीक़े से। दूसरी: बाइक लोन 6ठे महीने में बंद होने से मीना को एक ठोस जीत मिलती, जो Snowball का मनोवैज्ञानिक फ़ायदा है। तीसरी: उनके पास क्रेडिट कार्ड का 36% वाला कर्ज़ है, जो सबसे महँगा है, इसलिए Avalanche तर्क के हिसाब से स्वाभाविक चुनाव है।
अगर यही अतिरिक्त रकम ₹10,000 हो जाए, तो Avalanche में कर्ज़-मुक्ति लगभग 17 महीने में और ब्याज लगभग ₹41,517 हो जाता है। यानी रकम दोगुनी से ज़्यादा करने पर समय छह महीने और घटता है। हर अतिरिक्त रुपये का असर देखने के लिए कई बार खाना बदलकर देखिए।