Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
Debt-to-income ratio क्या बताता है?
Debt-to-income (DTI) = हर महीने कर्ज़ और किराये पर जाने वाली रकम ÷ मासिक आय x 100। यह बताता है कि आपकी आय का कितना हिस्सा पहले से बँधा हुआ है।
कर्ज़दाता लोन देते समय आमतौर पर ऐसा ही अनुपात देखते हैं, पर उनकी सीमा अलग-अलग और बदलती रहती है। इसलिए "सहज" और "अधिकतम" सीमाएँ यहाँ आपके डालने की चीज़ें हैं, तय नियम नहीं।
अनुपात कम होने पर नए ख़र्च, आपात स्थिति और बचत के लिए जगह बचती है। नतीजे को एक सुझाव की तरह देखें, बैंक के फ़ैसले की भविष्यवाणी की तरह नहीं।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
DTI = (rent or home EMI + vehicle EMI + personal/education EMI + card payments + other) / monthly income x 100. DTI after = (current + proposed EMI) / income x 100. Room at a limit L% = income x L% - current obligations. Loan supported = room x (1 - (1+r)^-N) / r, with r the monthly rate and N the months you enter.
DTI = (किराया या home EMI + वाहन EMI + पर्सनल/एजुकेशन EMI + कार्ड भुगतान + अन्य) ÷ मासिक आय x 100। नया EMI जुड़ने के बाद DTI = (मौजूदा + प्रस्तावित EMI) ÷ आय x 100। सीमा L% पर गुंजाइश = आय x L% - मौजूदा भुगतान। सँभल सकने वाला लोन = गुंजाइश x (1 - (1+r)^-N) / r, जहाँ r मासिक दर और N आपके डाले महीने।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 14 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Educational tool. The comfort and maximum limits are inputs with example values; lenders set their own limits, which change. Nothing you enter is stored. Not financial advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह शैक्षणिक टूल है। सहज और अधिकतम सीमाएँ उदाहरण के इनपुट हैं; कर्ज़दाता अपनी सीमा ख़ुद तय करते हैं और वह बदलती रहती है। आपकी डाली जानकारी सुरक्षित (store) नहीं की जाती। यह वित्तीय सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
DTI यानी हर महीने के कर्ज़ और किराये के भुगतान को मासिक आय से भाग देकर 100 से गुणा।
यहाँ "सहज" और "अधिकतम" सीमाएँ आप तय करते हैं। कर्ज़दाताओं की अपनी सीमाएँ अलग होती हैं और बदलती रहती हैं।
नया EMI जुड़ने पर अनुपात कहाँ पहुँचेगा, यह लोन लेने से पहले देख लेना सबसे काम की बात है।
यह अनुपात खाने-पीने, बिजली और स्कूल जैसे ख़र्च नहीं गिनता; इसलिए बची रकम और कम हो सकती है।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
रीता: बीच के रास्ते पर
रीता की आय ₹80,000। किराया/EMI ₹15,000, वाहन ₹6,000, पर्सनल ₹4,000, कार्ड ₹2,000, और प्रस्तावित नया EMI ₹8,000। (सहज 36%, अधिकतम 50%, उदाहरण)
मौजूदा भुगतान
₹27,000
आज का DTI
33.75%
नए EMI के बाद
43.75%
सहज सीमा तक गुंजाइश
₹1,800
अधिकतम सीमा तक गुंजाइश
₹13,000
सारे भुगतान के बाद बची आय
₹45,000
आज का अनुपात सहज सीमा के भीतर है, पर नया EMI उसे सहज से ऊपर ले जाता है। अधिकतम सीमा के भीतर रहने पर भी बजट में ढील कम बची।
सुरेश: कम आय, नया EMI भारी
सुरेश की आय ₹40,000। किराया ₹12,000, कार्ड ₹1,000, और नया EMI ₹6,000। (वही सीमाएँ)
मौजूदा भुगतान
₹13,000
आज का DTI
32.5%
नए EMI के बाद
47.5%
सहज सीमा तक गुंजाइश
₹1,400
अधिकतम सीमा तक गुंजाइश
₹7,000
सारे भुगतान के बाद बची आय
₹21,000
नया EMI अकेला आय का 15% है और अनुपात एक छलाँग में 32.5% से 47.5% पहुँच गया। छोटी आय पर एक EMI का असर बड़ा दिखता है।
अमित: ऊँची आय पर भी तंग
अमित की आय ₹1,20,000। घर की EMI ₹35,000, वाहन ₹10,000, कार्ड ₹5,000, और नया EMI ₹15,000। (वही सीमाएँ)
मौजूदा भुगतान
₹50,000
आज का DTI
41.67%
नए EMI के बाद
54.17%
सहज सीमा तक गुंजाइश
₹0
अधिकतम सीमा तक गुंजाइश
₹10,000
सारे भुगतान के बाद बची आय
₹55,000
आय ऊँची होने पर भी अगर EMI पहले से भारी हैं, तो नया EMI अनुपात को अधिकतम सीमा से ऊपर ले जा सकता है। ऊँची आय अपने आप गुंजाइश नहीं बनाती।
आय ₹80,000 पर अलग-अलग DTI का मतलब
आय ₹80,000 पर अलग-अलग DTI का मतलब
DTI
हर महीने कर्ज़/किराये में जाने वाली रकम
बाक़ी आय
20%
₹16,000
₹64,000
30%
₹24,000
₹56,000
36%
₹28,800
₹51,200
40%
₹32,000
₹48,000
50%
₹40,000
₹40,000
इसमें खाने-पीने, बिजली, स्कूल और बीमा जैसे ख़र्च नहीं गिने गए, जो बाक़ी आय में से जाते हैं।
हर ₹1,000 की मासिक EMI-गुंजाइश पर कितना लोन (11% उदाहरण दर)
हर ₹1,000 की मासिक EMI-गुंजाइश पर कितना लोन (11% उदाहरण दर)
अवधि
लोन की रकम (लगभग)
3 साल
₹30,545
5 साल
₹45,993
7 साल
₹58,403
10 साल
₹72,595
दर केवल उदाहरण है। लंबी अवधि से रकम बढ़ती है, पर कुल ब्याज भी बढ़ता है।
त्वरित संदर्भ: DTI
त्वरित संदर्भ: DTI
DTI
(किराया या home EMI + वाहन + पर्सनल/एजुकेशन + कार्ड + अन्य) / मासिक आय x 100
नया EMI जुड़ने के बाद
(मौजूदा भुगतान + प्रस्तावित EMI) / मासिक आय x 100
गुंजाइश
आय x सीमा % - मौजूदा भुगतान
सँभल सकने वाला लोन
गुंजाइश x (1 - (1+r)^-N) / r
सहज सीमा
आपकी अपनी पसंद; यहाँ उदाहरण 36%
अधिकतम सीमा
उदाहरण 50%; कर्ज़दाता की अपनी अलग हो सकती है।
आय के लिए क्या लें
हाथ में आने वाली मासिक आय। कर्ज़दाता कुल या कर-पूर्व आय भी देख सकते हैं।
इस पेज में क्या नहीं
रोज़मर्रा के ख़र्च, बचत, बीमा के प्रीमियम और अचानक के ख़र्च।
Debt-to-Income Ratio Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
हर महीने आपकी आय में से कितना हिस्सा पहले से बँधा हुआ है? किराया, घर की किस्त, गाड़ी की किस्त, पर्सनल लोन, कार्ड का नियमित भुगतान: ये सब मिलकर एक रकम बनाते हैं जो महीने की शुरुआत में ही आपकी जेब से निकलने के लिए तय है। उस रकम को आय से भाग देकर जो प्रतिशत आता है, उसे debt-to-income ratio, यानी DTI कहते हैं। Debt-to-Income Ratio Calculator यही अनुपात निकालता है और आगे की एक कड़ी जोड़ता है: अगर आप कोई नया EMI जोड़ें, तो अनुपात कहाँ पहुँचेगा?
आप अपनी मासिक आय, किराया या घर की किस्त, वाहन की किस्त, पर्सनल या एजुकेशन लोन की किस्त, कार्ड का नियमित भुगतान और बाक़ी भुगतान डालते हैं। साथ में प्रस्तावित नया EMI। calculator बताता है कि आज का DTI क्या है, नए EMI के बाद कितना होगा, आपकी सहज और अधिकतम सीमा तक अभी कितनी गुंजाइश बची है, और उस गुंजाइश में कितना नया लोन सँभल सकता है।
यहाँ "सहज सीमा" और "अधिकतम सीमा" दोनों आपके अपने चुने हुए इनपुट हैं। कर्ज़दाता अपनी अलग सीमाएँ रखते हैं और वे समय के साथ बदलती भी हैं, इसलिए यहाँ कोई एक संख्या नियम की तरह नहीं थोपी गई। शुरुआती 36% और 50% केवल उदाहरण हैं। आपकी डाली कोई भी जानकारी कहीं सुरक्षित (store) नहीं की जाती।
किसके काम का है
वे लोग जो नया लोन या कार्ड लेने से पहले देखना चाहते हैं कि उनकी आय में नए बोझ की जगह है या नहीं।
वे लोग जिन्हें लगता है कि "सब किस्तें चल रही हैं, पर महीने के अंत में कुछ नहीं बचता" और जो वजह जानना चाहते हैं।
नौकरी बदलने, किराये का घर लेने या नया घर ख़रीदने की सोचने वाले परिवार।
वे दंपती, जो आय और भुगतान जोड़कर साझा तस्वीर देखना चाहते हैं।
विद्यार्थी या नए कमाने वाले, जो पहली बार एजुकेशन लोन चुकाने की योजना बना रहे हैं और अपनी तनख़्वाह में उसकी जगह देखना चाहते हैं।
वे अभिभावक, जो घर के किसी सदस्य की ओर से लोन लेने की बात पर उसकी असली गुंजाइश आँकड़ों से समझाना चाहते हैं।
वे लोग जो किराये के घर से अपने घर में जाने की सोच रहे हैं और नई EMI के बाद का अनुपात पहले देखना चाहते हैं।
वे लोग जो अपने वित्तीय अनुशासन की जाँच के लिए साल में एक बार आय और भुगतान का अनुपात देखने की आदत डालना चाहते हैं।
वे लोग जो किसी बैंक के "आप पात्र हैं" संदेश से पहले अपनी सहज सीमा ख़ुद तय करना चाहते हैं।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर ग्यारह इनपुट हैं।
मासिक आय, हाथ में आने वाली: कर और कटौतियों के बाद जो रकम खाते में आती है। शुरुआती मान ₹80,000।
घर का किराया या home loan EMI: शुरुआती ₹15,000।
कार या बाइक की EMI: शुरुआती ₹6,000।
पर्सनल या एजुकेशन लोन की EMI: शुरुआती ₹4,000।
कार्ड का हर महीने का भुगतान: वह रकम जो आप हर महीने कार्ड में नियमित भरते हैं, शुरुआती ₹2,000।
अन्य नियमित कर्ज़ भुगतान: चिट-फंड, उधारी की किस्त आदि, शुरुआती ₹0।
प्रस्तावित नया EMI: जो नया लोन आप सोच रहे हैं उसकी किस्त। न हो तो 0। शुरुआती ₹8,000।
सहज सीमा: आपकी अपनी पसंद, शुरुआती 36%। यह कोई कानूनी या बैंक का नियम नहीं है।
अधिकतम सीमा: शुरुआती 50%, उदाहरण। कर्ज़दाता की सीमा अलग हो सकती है।
नए लोन की दर और अवधि: शुरुआती 11% और 5 साल, उदाहरण। इनसे निकलता है कि गुंजाइश में कितना लोन सँभल सकता है।
सुझाव: आय में वही रकम लीजिए जो हर महीने नियमित आती है। बोनस या अनियमित आमदनी पर टिके भुगतान को भरोसे से मत गिनिए। और भुगतानों में कुछ भी छोड़िए नहीं; एक छूटी हुई किस्त पूरे अनुपात को कम दिखा देती है।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
बड़े अंक में आज का DTI है और उसके नीचे लिखा आता है कि नया EMI जुड़ने पर वह कितना हो जाएगा और किस श्रेणी में आएगा: सहज, ध्यान दें या ऊँचा। नीचे की पंक्तियाँ ये हैं।
मौजूदा कुल मासिक भुगतान: किराया, सारी किस्तें और कार्ड का भुगतान, सब मिलाकर।
नया EMI जुड़ने के बाद कुल भुगतान: ऊपर की रकम में प्रस्तावित EMI जोड़कर।
नया EMI जुड़ने के बाद DTI: नई स्थिति का प्रतिशत। रंग हरा, सामान्य या लाल हो सकता है।
सहज सीमा तक और कितना EMI: आपकी सहज सीमा तक बची रकम। अगर यह शून्य है तो आप पहले ही सीमा पर या उससे ऊपर हैं।
अधिकतम सीमा तक और कितना EMI: यही गणना अधिकतम सीमा के लिए।
सहज सीमा में सँभल सकने वाला नया लोन: सहज सीमा तक की गुंजाइश को दिए गए दर और अवधि पर लोन की रकम में बदलकर।
सारे भुगतान के बाद बची आय: आय में से सारे भुगतान घटाने पर जो बचता है। इसी में से खाना, बिजली, स्कूल, इलाज और बचत होनी है।
रंगीन संदेश आपकी स्थिति के हिसाब से हरा, पीला या लाल होता है। तालिका में आपकी आय का बँटवारा है: हर मद का रुपया और आय का प्रतिशत, आख़िर में बाक़ी आय। चार्ट में चार स्तंभ हैं: आज, नए EMI के बाद, सहज सीमा और अधिकतम सीमा।
ध्यान दें: अगर नया EMI न हो और आप सिर्फ़ आज की स्थिति देखना चाहते हैं, तो उसे 0 रखिए। तब पहला और दूसरा अनुपात एक ही आएगा।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
नया EMI बदलकर देखिए। ₹8,000 की जगह ₹4,000 या ₹12,000 रखकर देखिए कि अनुपात कहाँ पहुँचता है। फिर उसी के हिसाब से लोन की रकम सोचिए।
अपनी सहज सीमा को ईमानदारी से तय कीजिए। अगर आपका घर बड़ा है और बच्चे पढ़ रहे हैं, तो सहज सीमा 30% भी हो सकती है। 36% सब पर लागू नहीं होता।
पहले मौजूदा बोझ घटाने का असर देखिए। कार्ड का भुगतान ₹2,000 से घटकर 0 हो जाए तो गुंजाइश उतनी बढ़ती है। छोटे कर्ज़ चुकाने का असर अनुपात में सीधा दिखता है।
तालिका से आय का बँटवारा पढ़िए। देखिए कि सबसे बड़ा हिस्सा किस मद में जा रहा है। अक्सर वही बदलने लायक़ हिस्सा होता है।
आय पर भी "क्या होगा अगर" लगाइए। आय 10% घटे तो अनुपात कहाँ पहुँचता है? यह देखकर आप अचानक के झटके को सोच सकते हैं।
दर और अवधि बदलकर देखिए। सँभल सकने वाला लोन लंबी अवधि पर बड़ा दिखता है, पर उसका कुल ब्याज भी बड़ा होता है। हर ₹1,000 की मासिक गुंजाइश पर 11% पर 3 साल में लगभग ₹30,545 और 10 साल में लगभग ₹72,595 का लोन बनता है।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"आय ऊँची है तो फ़िक्र की बात नहीं।" आय ऊँची होने पर भी अगर घर, गाड़ी और पर्सनल की किस्तें पहले से भारी हैं, तो नया EMI अनुपात को ऊपर धकेल सकता है।
"बैंक ने मंज़ूर कर दिया, तो मैं सँभाल लूँगा।" बैंक की सीमा उसके जोखिम का नियम है, आपके सुकून का नहीं। आपका परिवार, आपकी ज़िम्मेदारियाँ और आपके सपने अलग हैं।
छोटी किस्तों को छोड़ देना। ₹500-₹1,000 की दो-तीन किस्तें मिलकर बड़ा आँकड़ा बन जाती हैं।
किराये को गिनना भूल जाना। अगर आप किराये पर रहते हैं तो वह बँधा बोझ है, भले ही कर्ज़ न हो।
सँभल सकने वाले लोन को ज़रूरी लोन समझना। यह अधिकतम अंदाज़ा है। उतना लेना ज़रूरी नहीं।
आने वाली वेतन-वृद्धि पर भरोसा करके EMI बढ़ा देना। वृद्धि मिले न मिले, EMI तो हर महीने जाएगी।
DTI को पूरा बजट समझ लेना। DTI सिर्फ़ कर्ज़ और किराये का हिसाब है। बाक़ी ख़र्च अलग से बजट में देखने पड़ते हैं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
गणना सरल है और नीचे के सूत्रों से हो जाती है।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
बात
सूत्र
मौजूदा भुगतान
किराया/home EMI + वाहन + पर्सनल/एजुकेशन + कार्ड + अन्य
आज का DTI
मौजूदा भुगतान ÷ मासिक आय × 100
नए EMI के बाद DTI
(मौजूदा भुगतान + प्रस्तावित EMI) ÷ मासिक आय × 100
सीमा L% तक गुंजाइश
मासिक आय × L% ÷ 100 − मौजूदा भुगतान (शून्य से नीचे नहीं)
सँभल सकने वाला लोन
गुंजाइश × (1 − (1+r)^−N) ÷ r
बची आय
मासिक आय − मौजूदा भुगतान − प्रस्तावित EMI
यहाँ r = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 है और N = अवधि के महीने। अगर दर 0 हो तो सँभल सकने वाला लोन = गुंजाइश × N।
गणना में खाने-पीने, बिजली, स्कूल की फ़ीस, बीमा या इलाज जैसे ख़र्च शामिल नहीं हैं। DTI केवल कर्ज़ और किराये का बोझ मापता है, पूरा बजट नहीं।
एक पूरा उदाहरण
रीता की हाथ में आने वाली मासिक आय ₹80,000 है। किराया ₹15,000, वाहन की किस्त ₹6,000, पर्सनल लोन ₹4,000, कार्ड का नियमित भुगतान ₹2,000 और प्रस्तावित नया EMI ₹8,000। सहज सीमा 36% और अधिकतम सीमा 50% (दोनों उदाहरण)। नए लोन की दर 11% और अवधि 5 साल।
आज का DTI = 27,000 ÷ 80,000 × 100 = 33.75%। यह सहज सीमा (36%) के भीतर है।
नया EMI जुड़ने के बाद भुगतान = 27,000 + 8,000 = ₹35,000।
नए EMI के बाद DTI = 35,000 ÷ 80,000 × 100 = 43.75%। यह सहज सीमा से ऊपर और अधिकतम सीमा के भीतर है।
सहज सीमा तक गुंजाइश = 80,000 × 36% − 27,000 = 28,800 − 27,000 = ₹1,800।
अधिकतम सीमा तक गुंजाइश = 80,000 × 50% − 27,000 = 40,000 − 27,000 = ₹13,000।
सहज सीमा में सँभल सकने वाला नया लोन: r = 11 ÷ 1200 ≈ 0.009167, N = 60। गुणक (1 − (1+r)^−60) ÷ r ≈ 45.993। इसलिए 1,800 × 45.993 ≈ ₹82,787।
सारे भुगतान के बाद बची आय = 80,000 − 27,000 − 8,000 = ₹45,000।
इससे तस्वीर साफ़ होती है। रीता आज सहज दायरे में है, पर ₹8,000 की नई किस्त उसे उस दायरे से बाहर ले जाती है, क्योंकि सहज सीमा तक सिर्फ़ ₹1,800 की गुंजाइश थी। ₹45,000 की बची आय में से घर का राशन, बिजली, बच्चों की फ़ीस और बचत निकलनी है। अगर यह तंग लगे तो नया EMI घटाना या अवधि का हिसाब बदलना ठीक रहेगा।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
यह किसी कर्ज़दाता की असली सीमा या पात्रता नहीं बताता। सहज और अधिकतम सीमा आपके डाले उदाहरण हैं।
यह रोज़मर्रा के ख़र्च, बीमा, बचत और अचानक के ख़र्च को नहीं गिनता।
यह आय को स्थिर मानता है। नौकरी जाने या आय घटने की स्थिति इसमें नहीं है।
यह credit score या रिपोर्ट के इतिहास की जाँच नहीं करता।
यह मानता है कि दर स्थिर है। फ़्लोटिंग दर पर EMI बदल सकती है।