मान लीजिए मीरा, 34 साल की फ्रीलांस डिज़ाइनर हैं। उन्होंने रविवार की शाम बैठकर अपनी सूची बनाई:
संपत्ति:
- नकद और बैंक बैलेंस: ₹80,000
- बचत और FD: ₹2,20,000
- म्यूचुअल फंड (मौजूदा मूल्य): ₹4,50,000
- शेयर: ₹1,20,000
- PPF / PF / NPS: ₹6,00,000
- सोना: ₹3,00,000
- प्रॉपर्टी (अपना फ़्लैट): ₹45,00,000
- वाहन: ₹3,50,000
कुल संपत्ति = 80,000 + 2,20,000 + 4,50,000 + 1,20,000 + 6,00,000 + 3,00,000 + 45,00,000 + 3,50,000 = ₹66,20,000।
देनदारियाँ:
- होम लोन बकाया: ₹28,00,000
- कार लोन बकाया: ₹2,10,000
- पर्सनल लोन: ₹0
- एजुकेशन लोन: ₹1,50,000
- क्रेडिट कार्ड: ₹25,000
कुल देनदारियाँ = 28,00,000 + 2,10,000 + 1,50,000 + 25,000 = ₹31,85,000।
Net worth = 66,20,000 − 31,85,000 = ₹34,35,000।
Equity % = 34,35,000 ÷ 66,20,000 × 100 = लगभग 51.9%, यानी "अच्छा" वाली श्रेणी।
अब इस नतीजे को पढ़िए। मीरा की संपत्ति का 45 लाख, यानी लगभग 68%, सिर्फ़ फ़्लैट में है, जो न आसानी से बिकता है और न रोज़ के काम आता है। नकद, FD, म्यूचुअल फंड और शेयर मिलाकर सिर्फ़ ₹8.5 लाख हैं। यानी कागज़ पर net worth ₹34 लाख से ऊपर है, पर आपात स्थिति में काम आने वाली रकम कम है। यह जानकारी सिर्फ़ ऊपर की संख्या से नहीं मिलती, बार चार्ट देखने से मिलती है।
मीरा ने अगला क़दम यह उठाया कि पहले ₹25,000 का क्रेडिट कार्ड बकाया चुकाया। इससे उनकी संपत्ति और देनदारी दोनों ₹25,000 घट गए, net worth वही ₹34,35,000 रहा, पर equity 52.1% हो गई। सबक़: कर्ज़ चुकाने से net worth सीधा नहीं बढ़ता (क्योंकि आपने नकद दिया), पर अनुपात सुधरता है और ब्याज का रिसाव बंद होता है।