Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
EV कब सस्ती पड़ती है?
EV की ख़रीद क़ीमत अक्सर ज़्यादा होती है, पर चलाने का ख़र्च (बिजली) पेट्रोल/डीज़ल से काफ़ी कम पड़ता है। जितना ज़्यादा चलाएँगे, उतनी जल्दी ऊँची क़ीमत वसूल होगी।
EV का प्रति किमी ख़र्च = बिजली की दर ÷ किमी प्रति kWh। पेट्रोल का प्रति किमी ख़र्च = ईंधन की दर ÷ माइलेज (किमी/लीटर)। घर पर चार्जिंग सस्ती पड़ती है; पब्लिक फ़ास्ट चार्जिंग महँगी, इसलिए "औसत बिजली दर" सोच-समझकर डालें।
यहाँ ईंधन और बिजली की दर में सालाना बढ़ोतरी, सर्विसिंग का अलग ख़र्च और दोनों कारों की ख़रीद क़ीमत जोड़कर कुल ख़र्च निकाला गया है। बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी बदलने का ख़र्च और सब्सिडी शामिल नहीं हैं।
अपनी असल माइलेज, बिजली की दर और मासिक किमी डालकर देखें - नतीजा इन्हीं पर सबसे ज़्यादा निर्भर है।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Yearly fuel cost = yearly km ÷ mileage × fuel price (rising by the yearly increase); yearly electricity cost = yearly km ÷ (km per kWh) × electricity rate (rising by its own increase). Total cost = purchase price + running cost + servicing for each year. The break-even is the first year-point where the EV's cumulative cost is at or below the petrol car's.
सालाना ईंधन ख़र्च = सालाना किमी ÷ माइलेज × ईंधन दर (सालाना बढ़ोतरी के साथ); सालाना बिजली ख़र्च = सालाना किमी ÷ (किमी प्रति kWh) × बिजली दर (अपनी बढ़ोतरी के साथ)। कुल ख़र्च = ख़रीद क़ीमत + चलाने का ख़र्च + सर्विसिंग, हर साल के लिए। Break-even वह पहला समय है जब EV का जमा ख़र्च पेट्रोल कार के बराबर या कम हो जाए।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 10 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Illustrative estimate using the prices, mileage and rates you enter. Insurance, resale value, battery replacement, subsidies and road-tax differences are not included; actual running costs vary. Not financial advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह आपके डाले हुए दाम, माइलेज और दरों पर आधारित उदाहरण-स्वरूप अनुमान है। बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी बदलना, सब्सिडी और रोड-टैक्स का अंतर शामिल नहीं हैं; असली ख़र्च अलग हो सकता है। यह वित्तीय सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
पेट्रोल/डीज़ल कार का ख़र्च प्रति किमी = ईंधन दर ÷ माइलेज। EV का = बिजली दर ÷ किमी प्रति kWh। EV में यह अक्सर कई गुना कम निकलता है।
पर EV की क़ीमत ज़्यादा हो सकती है। इसलिए असली सवाल यह है कि ऊँची क़ीमत का फ़र्क़ चलाने के ख़र्च की बचत से कितने साल में वसूल होगा।
जितने किमी ज़्यादा चलेंगे, उतनी जल्दी वसूली। कम चलाने वालों के लिए EV कुल मिलाकर महँगी भी पड़ सकती है।
क़ीमत, ईंधन व बिजली की दरें सब उदाहरण हैं। बीमा, रीसेल, बैटरी और सब्सिडी इसमें नहीं जुड़े।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
रोज़ का चलना बहुत हो तो ऊँची क़ीमत जल्दी वसूल हो जाती है। जितने ज़्यादा किमी, उतना बड़ा फ़ायदा।
महीने के किमी बदलने पर (शुरुआती उदाहरण की बाक़ी मान्यताएँ, 8 साल)
महीने के किमी बदलने पर (शुरुआती उदाहरण की बाक़ी मान्यताएँ, 8 साल)
महीने के किमी
EV से 8 साल की कुल बचत (≈)
क़ीमत वसूल होने में
500
−₹0.86 लाख (EV महँगी)
8 साल में नहीं
1,000
₹1.89 लाख
5 साल 8 महीने
1,500
₹4.63 लाख
4 साल
2,000
₹7.38 लाख
3 साल 1 महीना
चलना जितना बढ़ेगा, EV की ऊँची क़ीमत उतनी जल्दी वसूल होगी।
ईंधन या बिजली की दर बदलने पर (महीने 1,000 किमी, 8 साल)
ईंधन या बिजली की दर बदलने पर (महीने 1,000 किमी, 8 साल)
बदला हुआ मान
EV से कुल बचत (≈)
क़ीमत वसूल होने में
ईंधन ₹90/लीटर
₹1.20 लाख
6 साल 4 महीने
ईंधन ₹100/लीटर (शुरुआती)
₹1.89 लाख
5 साल 8 महीने
ईंधन ₹110/लीटर
₹2.58 लाख
5 साल 2 महीने
बिजली ₹12/kWh
₹1.18 लाख
6 साल 5 महीने
बिजली ₹16/kWh
₹0.47 लाख
7 साल 3 महीने
सार्वजनिक चार्जिंग घर की चार्जिंग से महँगी पड़ती है, इसलिए बिजली की औसत दर अपने असली मिश्रण से भरें।
त्वरित संदर्भ: EV बनाम पेट्रोल/डीज़ल
त्वरित संदर्भ: EV बनाम पेट्रोल/डीज़ल
पेट्रोल का सालाना ईंधन ख़र्च
सालाना किमी ÷ माइलेज × ईंधन दर (हर साल बढ़ोतरी के साथ)
EV का सालाना बिजली ख़र्च
सालाना किमी ÷ (किमी/kWh) × बिजली दर (अपनी बढ़ोतरी के साथ)
सालाना किमी
महीने के किमी × 12
कुल ख़र्च
ख़रीद क़ीमत + हर साल का चलाने का ख़र्च + सर्विसिंग
Break-even
पहला समय जब EV का जमा ख़र्च पेट्रोल कार के बराबर या कम हो जाए
EV सस्ती हो तो
ऊँची क़ीमत नहीं, इसलिए शुरू से सस्ती दिखती है
किस बात पर सबसे ज़्यादा टिका
सालाना किमी, क़ीमत का फ़र्क़ और ईंधन-बिजली की दर
इस पेज में क्या नहीं
बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी बदलने का ख़र्च, सब्सिडी/टैक्स-छूट, चार्जर लगवाने का ख़र्च, लोन का ब्याज।
EV vs Petrol Car Running Cost Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
नई कार लेते समय आजकल एक सवाल लगभग हर घर में उठता है: "इलेक्ट्रिक कार (EV) लें या पेट्रोल/डीज़ल वाली?" EV की ख़रीद क़ीमत अक्सर ज़्यादा होती है, पर चलाने का खर्च कम बताया जाता है। यह calculator इस बहस को अंदाज़ों की जगह आँकड़ों में बदल देता है। यह आपके अपने इस्तेमाल के हिसाब से दिखाता है कि दोनों कारों का साल-दर-साल कुल खर्च कैसा रहेगा और EV की ऊँची क़ीमत कितने समय में चलाने की बचत से वसूल हो सकती है।
इसका मुख्य सवाल है: "मैं जितना चलाता हूँ, उतने किलोमीटर के हिसाब से EV मेरे लिए कब सस्ती पड़ेगी, और पड़ेगी भी या नहीं?" यह किसी कार का नाम या मॉडल नहीं देखता। आप अपनी पसंद की दोनों कारों की क़ीमत, माइलेज, ईंधन-बिजली की दर वग़ैरह ख़ुद भरते हैं, और नतीजा उन्हीं संख्याओं से बनता है।
किसके काम का है
जो परिवार पहली बार कार लेने की सोच रहा है और EV या पेट्रोल/डीज़ल में उलझा है।
नौकरीपेशा, जिसे रोज़ दफ़्तर आना-जाना पड़ता है और महीने के किलोमीटर काफ़ी हैं।
कैब या डिलीवरी में गाड़ी चलाने वाला, जिसके लिए प्रति किलोमीटर लागत सबसे अहम है।
वह व्यक्ति, जो कम चलाता है (शहर में छोटी दूरी) और जानना चाहता है कि क्या फिर भी EV का फ़ायदा है।
जो लोग अलग-अलग ईंधन-दर और बिजली-दर पर नतीजा परखकर देखना चाहते हैं।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर 12 स्लाइडर हैं। पहले इस्तेमाल के बारे में चार, फिर पेट्रोल/डीज़ल कार के बारे में, फिर EV के बारे में, और आख़िर में दो वृद्धि दरें।
आपके इस्तेमाल के बारे में
महीने में कितने किमी चलाते हैं: 200 से 5,000 किमी, 100 के कदम में। शुरुआती मान 1,000।
कितने साल रखेंगे: 1 से 15 साल। शुरुआती मान 8। यह वह अवधि है जिसके लिए कुल खर्च जोड़ा जाएगा।
पेट्रोल/डीज़ल कार
कार की क़ीमत (₹): ₹3 लाख से ₹50 लाख। शुरुआती मान ₹11 लाख। ऑन-रोड क़ीमत डालना बेहतर है।
माइलेज (किमी प्रति लीटर): 5 से 30। शुरुआती मान 16। असल सड़क का माइलेज लिखे हुए से कम होता है, अपने अनुभव के हिसाब से डालें।
ईंधन की दर (₹ प्रति लीटर): 60 से 150। शुरुआती मान 100। यह नमूना है, अपने शहर की मौजूदा दर डालें।
सालाना सर्विसिंग (₹): शुरुआती मान ₹8,000।
EV
EV की क़ीमत (₹): शुरुआती मान ₹15 लाख। सब्सिडी या छूट मिली हो तो उसके बाद की क़ीमत डालें।
EV की दक्षता (किमी प्रति kWh): 3 से 10। शुरुआती मान 6। यह बताता है कि एक यूनिट बिजली में कार कितने किमी चलती है।
औसत बिजली दर (₹ प्रति kWh): 3 से 20। शुरुआती मान 8। यह चार्जिंग का मिश्रण है, यानी घर पर चार्जिंग सस्ती और पब्लिक फ़ास्ट चार्जिंग महँगी होती है। अपना औसत सोचकर डालें।
सालाना सर्विसिंग (₹): शुरुआती मान ₹3,000।
बढ़ोतरी की दरें
ईंधन दर में सालाना बढ़ोतरी (%): 0 से 10। शुरुआती मान 4।
बिजली दर में सालाना बढ़ोतरी (%): 0 से 10। शुरुआती मान 3।
ध्यान दें: ये शुरुआती मान केवल नमूने हैं। असली नतीजे के लिए अपनी गाड़ियों, अपने शहर की दरों और अपनी ड्राइविंग की आदत से मिलती-जुलती संख्याएँ डालें।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर एक बड़ा आँकड़ा आता है: "EV से कुल बचत (X साल में)"। अगर EV कुल मिलाकर महँगी पड़ रही हो, तो इसी जगह लिखा आता है "EV कुल मिलाकर ज़्यादा महँगी (X साल में)", और रकम उसी अंतर की होती है। नीचे पेट्रोल/डीज़ल कार का कुल खर्च और EV का कुल खर्च दिखता है।
इसके नीचे आठ पंक्तियाँ हैं।
पेट्रोल/डीज़ल: प्रति किमी चलाने का खर्च, यानी ईंधन दर ÷ माइलेज।
EV: प्रति किमी चलाने का खर्च, यानी बिजली दर ÷ दक्षता।
पहले साल का चलाने और सर्विस का खर्च, पेट्रोल/डीज़ल।
पहले साल का चलाने और सर्विस का खर्च, EV।
पहले साल की बचत, जो चलाने के खर्च में होती है। हरा रंग बचत और लाल रंग घाटा दर्शाता है।
X साल का कुल खर्च, पेट्रोल/डीज़ल, यानी ख़रीद क़ीमत और सारे सालों का चलाने तथा सर्विस का खर्च।
X साल का कुल खर्च, EV।
EV की ऊँची क़ीमत वसूल होने में लगभग: यह वह समय है जब EV का जमा कुल खर्च पहली बार पेट्रोल/डीज़ल कार के जमा कुल खर्च के बराबर या कम हो जाता है। अगर चुनी हुई अवधि में ऐसा नहीं होता, तो "X साल में वसूल नहीं होती" लिखा आता है। अगर EV की क़ीमत ही कम या बराबर है, तो "शुरू से सस्ती" दिखता है।
इसके साथ एक लाइन चार्ट है जिसमें दो रेखाएँ हैं (पेट्रोल/डीज़ल और EV) और हर साल का जमा खर्च दिखता है। जहाँ दोनों रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, वही वसूली का बिंदु है। नीचे साल-दर-साल की तालिका में "EV की बचत" भी लिखी होती है, जो शुरुआती सालों में नेगेटिव होती है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
अपनी असली दूरी जाँचें
पिछले तीन महीने का ओडोमीटर या ऐप का रिकॉर्ड देखकर औसत महीने के किमी निकालिए। कई लोग यात्रा के किमी बढ़ा-चढ़ाकर अंदाज़ा लगाते हैं, जबकि असल में कम चलते हैं।
चार्जिंग की जगह के हिसाब से बिजली दर चुनें
अगर घर पर चार्जिंग की सुविधा है, तो औसत दर कम रखी जा सकती है। अगर अधिकांश चार्जिंग सार्वजनिक स्टेशन पर होगी, तो दर ऊँची डालें। दोनों के बीच का फ़र्क़ अक्सर नतीजे को पलट देता है।
रखने की अवधि को बदलकर देखें
3, 5, 8 और 10 साल के परिदृश्य चलाइए। इससे दिखेगा कि EV का फ़ायदा किस साल के बाद शुरू होता है। जो परिवार हर 3-4 साल में कार बदल लेता है, उसके लिए यह नतीजा अलग हो सकता है।
ईंधन-वृद्धि और बिजली-वृद्धि दोनों आज़माएँ
0% वृद्धि पर और ऊँची वृद्धि पर, दोनों पर नतीजा देखिए। अगर EV दोनों ही स्थितियों में फ़ायदेमंद है, तो नतीजा ज़्यादा मज़बूत है।
सब्सिडी और डिस्काउंट को क़ीमत में शामिल करें
यह calculator सब्सिडी अलग से नहीं जोड़ता, इसलिए अगर कोई छूट उपलब्ध है तो EV की क़ीमत उसके बाद वाली डालिए। छूट की ताज़ा शर्तें सरकारी या डीलर स्रोत से जाँचिए।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"EV में चलाने का खर्च लगभग शून्य है": शून्य नहीं, कम होता है। बिजली का दर और चार्जिंग की जगह पर निर्भर है।
सिर्फ़ माइलेज की कंपनी की संख्या मान लेना: कंपनी का आँकड़ा आदर्श स्थिति में निकलता है। सड़क पर वह कम मिलता है, ख़ासकर पेट्रोल/डीज़ल कार में।
शून्य किमी वालों के लिए भी EV को बेहतर बताना: अगर आप बहुत कम चलाते हैं, तो ऊँची ख़रीद क़ीमत की वसूली मुश्किल है।
बैटरी के बाद के खर्च को भूल जाना: वारंटी के बाद बैटरी का खर्च बड़ा हो सकता है, और यह इस calculator में नहीं गिना गया है।
रीसेल वैल्यू की उपेक्षा: पुरानी कार बेचते समय क्या मिलेगा, यह दोनों में अलग होता है। इसका असर कुल लागत पर पड़ सकता है।
बीमा और रोड-टैक्स का अंतर नज़रअंदाज़ करना: दोनों कारों में ये अलग हो सकते हैं।
दरें स्थिर मान लेना: यहाँ वृद्धि दर डालने का विकल्प इसीलिए है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
पेज का सूत्र सीधा है।
सालाना किमी = महीने के किमी × 12।
पेट्रोल/डीज़ल का k-वें साल का खर्च = (सालाना किमी ÷ माइलेज) × ईंधन दर × (1 + ईंधन वृद्धि)^(k−1) + सालाना सर्विसिंग।
EV का k-वें साल का खर्च = (सालाना किमी ÷ दक्षता) × बिजली दर × (1 + बिजली वृद्धि)^(k−1) + सालाना सर्विसिंग।
जमा कुल खर्च = ख़रीद क़ीमत + हर साल के खर्च का योग।
वसूली का समय उस साल में निकाला जाता है जब EV की जमा लागत पेट्रोल/डीज़ल की जमा लागत से नीचे आ जाए। साल के भीतर का हिस्सा दोनों रेखाओं के अंतर के सीधे अनुमान (linear interpolation) से निकाला जाता है और महीनों में बदला जाता है।
इस calculator में बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी बदलने का खर्च, सब्सिडी और रोड-टैक्स का अंतर शामिल नहीं हैं। कर्ज़ का ब्याज भी इसमें नहीं गिना गया है, यानी माना गया है कि दोनों कारें अपनी पूरी क़ीमत देकर ख़रीदी गईं।
एक पूरा उदाहरण
मान लीजिए सुमन एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं और रोज़ क़रीब 50 किमी आना-जाना करती हैं, यानी महीने के लगभग 1,500 किमी। वे 7 साल तक कार रखना चाहती हैं। ये सब सिर्फ़ उदाहरण के आँकड़े हैं।
पहले साल के अंत में: पेट्रोल ₹10,52,000 बनाम EV ₹13,27,923, यानी EV अभी ₹2,75,923 पीछे।
7 साल के अंत में: पेट्रोल लगभग ₹17,72,491, EV लगभग ₹15,11,972।
EV से कुल बचत ≈ ₹2,60,519।
वसूली का समय: लगभग 52 महीने, यानी 4 साल 4 महीने।
कुछ और परिदृश्य
अगर सुमन महीने में सिर्फ़ 600 किमी चलातीं (और बाक़ी सब वही रहता), तो 7 साल में पेट्रोल लगभग ₹13,08,396 और EV लगभग ₹13,97,389 रहता। यानी EV लगभग ₹88,993 महँगी रहती और वसूली नहीं होती।
अगर बिजली की औसत दर ₹9 की जगह ₹16 होती (ज़्यादातर पब्लिक चार्जिंग पर), तो 7 साल में बचत घटकर लगभग ₹1,11,985 रह जाती और वसूली में लगभग 67 महीने, यानी 5 साल 7 महीने, लगते।
अगर वे कार सिर्फ़ 3 साल रखतीं, तो EV लगभग ₹1,15,547 पीछे रहती।
उदाहरण का सबक: EV का फ़ायदा चलाने की मात्रा, चार्जिंग कहाँ होती है और कार कितने साल रखी जाती है, इन तीनों पर टिका है। तीनों में से एक भी कमज़ोर हो तो EV का हिसाब पलट सकता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी बदलना, सब्सिडी और रोड-टैक्स का अंतर शामिल नहीं हैं।
कर्ज़ का ब्याज या EMI शामिल नहीं हैं।
हर साल एक जैसी दूरी चलने की मान्यता है।
मौसम, एसी, ट्रैफ़िक और ड्राइविंग शैली जैसे असली माइलेज को प्रभावित करने वाले कारक सीधे नहीं जोड़े गए, आपको उन्हें अपने माइलेज में ख़ुद शामिल करना है।
चार्जिंग की सुविधा, सर्विस नेटवर्क और सुविधा के फ़र्क़ का मूल्य नहीं निकलता।
यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी है, निवेश, ख़रीद या क़ानूनी सलाह नहीं है। कार ख़रीदने से पहले असली क़ीमत, बीमा, वारंटी और सब्सिडी की शर्तें डीलर और आधिकारिक स्रोत से जाँच लें।
6 काम की बातें याद रखें
1
सालाना किमी ईमानदारी से लें
पिछले साल की ओडोमीटर रीडिंग से असली औसत निकालें। अंदाज़ा अक्सर ज़्यादा ही निकलता है।
2
घर पर चार्जिंग की सुविधा देखें
अगर घर या दफ़्तर पर चार्ज कर सकते हैं तो बिजली दर कम पड़ेगी। केवल सार्वजनिक चार्जिंग पर निर्भर रहने पर ख़र्च बढ़ता है।
3
माइलेज असली सड़क का लें
कंपनी का दावा और शहर की भीड़ में असली माइलेज अलग होता है। अपनी गाड़ी का औसत डालें।
4
रीसेल और बैटरी अलग से सोचें
EV की पुनर्विक्रय क़ीमत और बैटरी की वारंटी/बदलने की लागत इस हिसाब में नहीं हैं, पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
5
दरों की बढ़त का परीक्षण करें
ईंधन की बढ़त 0% और 6% दोनों पर चलाकर देखें कि फ़ैसला टिकता है या नहीं।
6
क़ीमत में सब्सिडी जोड़कर देखें
अगर आपको कोई छूट या सब्सिडी मिल रही हो तो EV की क़ीमत उतनी घटाकर डालें। असली योजना की जानकारी ख़ुद जाँचें।
जब चलाने के ख़र्च में बचत इतनी जमा हो जाए कि वह EV की ऊँची ख़रीद क़ीमत की भरपाई कर दे। यह मासिक किमी, माइलेज, ईंधन-बिजली की दरों और क़ीमत के अंतर पर निर्भर है; ज़्यादा चलाने वालों के लिए जल्दी वसूल होती है।
प्रति किमी ख़र्च = बिजली की दर (₹/kWh) ÷ दक्षता (किमी/kWh)। घर पर चार्जिंग सस्ती और पब्लिक फ़ास्ट चार्जिंग महँगी पड़ती है, इसलिए औसत दर सोच-समझकर डालें।
बीमा, रीसेल वैल्यू, बैटरी की वारंटी के बाद का ख़र्च, सब्सिडी और रोड-टैक्स का अंतर शामिल नहीं हैं, जो असली तुलना बदल सकते हैं।
हाँ, आप ईंधन और बिजली की दर में सालाना बढ़ोतरी अलग-अलग डाल सकते हैं।
वह समय जब EV पर अब तक का कुल ख़र्च (क़ीमत सहित) पेट्रोल कार के कुल ख़र्च के बराबर या उससे कम हो जाए। उसके बाद हर साल की बचत सीधी बचत है।
EV की दक्षता: एक यूनिट बिजली से गाड़ी कितने किलोमीटर चलती है। यह जितनी ज़्यादा, चलाने का ख़र्च उतना कम।
अगर कुछ चार्जिंग घर पर और कुछ बाहर करते हैं तो दोनों का भारित औसत लें। जैसे 80% घर पर ₹6 और 20% बाहर ₹18 हो तो औसत लगभग ₹8.4 प्रति kWh बनेगा।
पेज इसे सरल रखने के लिए स्थिर मानता है। असल में उम्र के साथ मरम्मत बढ़ सकती है, इसलिए उसे थोड़ा ऊपर रखकर परख लें।
तब "शुरू से सस्ती" लिखा आता है, क्योंकि ऊँची क़ीमत वसूलनी नहीं है। उस हालत में कुल बचत ही देखने लायक होती है।
हाँ। ईंधन की दर और माइलेज अपने डीज़ल वाहन के हिसाब से भरें, गणित वही है।
चुने हुए सालों में EV का जमा ख़र्च पेट्रोल कार से कम नहीं हुआ। ज़्यादा साल रखने या ज़्यादा किमी चलाने पर नतीजा बदल सकता है।
नहीं। EV और पेट्रोल कार का बीमा अलग होता है और अक्सर कीमत के अनुपात में। उसे दोनों के लिए अलग से जोड़कर देखें।
नहीं। यह पेज सिर्फ़ ख़रीद और चलाने के ख़र्च गिनता है। बेचते समय मिलने वाली रकम इसमें नहीं है, जो EV और पेट्रोल के लिए अलग हो सकती है।
नहीं। बैटरी की वारंटी और बदलने की लागत मॉडल के हिसाब से अलग होती है, जो आपको सालाना सर्विसिंग में अंदाज़े से जोड़नी होगी।
नहीं। जो छूट आपको मिलती हो, उसे EV की क़ीमत में से घटाकर डालें। योजना और पात्रता अपने स्तर पर जाँचें।
नहीं। घर पर चार्जर और वायरिंग का ख़र्च EV की क़ीमत में जोड़कर डालें।
ताकि तुलना सिर्फ़ गाड़ी और चलाने की हो। लोन लेने पर EV का ब्याज ज़्यादा होगा, उसे EV Loan और Car Loan calculator में देखें।
नहीं, यह शैक्षणिक तुलना है। गाड़ी चुनते समय अपनी ज़रूरत, चार्जिंग सुविधा और बजट देखें।