मान लीजिए अनीता एक फ्रीलांस आर्किटेक्ट हैं (आम करदाता)। उनका पूरे साल का अनुमानित टैक्स ₹4,20,000 है, और ₹60,000 TDS पहले ही कट चुका है। उन्होंने साल में यह भरा: 15 जून तक ₹20,000, अगली अवधि में ₹70,000, फिर ₹60,000 और 15 मार्च तक की अवधि में ₹90,000। 16–31 मार्च में कुछ नहीं भरा। बचा टैक्स वे 1 अप्रैल के 3 महीने बाद भरने की सोचती हैं।
- Net टैक्स = 4,20,000 − 60,000 = ₹3,60,000।
- ज़रूरी संचयी: 15% = ₹54,000; 45% = ₹1,62,000; 75% = ₹2,70,000; 100% = ₹3,60,000।
- भरा संचयी: ₹20,000; ₹90,000; ₹1,50,000; ₹2,40,000।
- कमी: ₹34,000; ₹72,000; ₹1,20,000; ₹1,20,000।
- सीमा की जाँच: पहली किस्त की 12% सीमा = ₹43,200 है, पर उन्होंने ₹20,000 भरे, इसलिए छूट नहीं। दूसरी की 36% सीमा = ₹1,29,600, उन्होंने ₹90,000 भरे, तो छूट नहीं।
- 234C: पहली किस्त 34,000 × 1% × 3 = ₹1,020; दूसरी 72,000 × 1% × 3 = ₹2,160; तीसरी 1,20,000 × 1% × 3 = ₹3,600; चौथी 1,20,000 × 1% × 1 = ₹1,200। जोड़ ₹7,980।
- 234B: कुल भरा ₹2,40,000, जबकि net टैक्स का 90% ₹3,24,000 है, इसलिए लागू। बची रकम 1,20,000 × 1% × 3 महीने = ₹3,600।
- कुल अनुमानित ब्याज = 7,980 + 3,600 = ₹11,580।
- बाक़ी देय = 1,20,000 + 11,580 = ₹1,31,580।
अब वही हालत लें, अगर अनीता सही समय पर पूरी किस्तें भरतीं: ₹54,000, ₹1,08,000, ₹1,08,000, ₹90,000 (अवधि-वार), तो संचयी रकम ज़रूरी रकम से बराबर बैठती और ब्याज शून्य आता। दोनों हालात का फ़र्क़ ₹11,580 ब्याज का है, जो सिर्फ़ किस्तों के समय का है।
Presumptive का उदाहरण: एक दुकानदार का net टैक्स ₹3,00,000 है और उसने 15 मार्च तक की अवधि में सिर्फ़ ₹1,50,000 भरे। 234C = 1,50,000 × 1% × 1 = ₹1,500। 234B (6 महीने बाद भरने पर) = 1,50,000 × 1% × 6 = ₹9,000। कुल ₹10,500 और बाक़ी देय ₹1,60,500। ये सब अनुमान हैं, असली रकम चालान भरते समय या CA से जाँचें।