ITR देर से भरने का जुर्माना

Late ITR Filing Penalty Calculator (234A / 234F)

ITR देर से भरने पर ब्याज (234A) और लेट फ़ीस (234F) कितनी बनेगी और कुल कितना चुकाना पड़ेगा - देखिए।

  • 234A का ब्याज
  • 234F की लेट फ़ीस
  • देर के महीनों का असर
  • कुल अतिरिक्त ख़र्च
  • टैक्स + जुर्माना कुल
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहदेर से ITR भरने पर लेट फ़ीस (234F) तुरंत लग जाती है, चाहे टैक्स बाक़ी न भी हो - ब्याज (234A) हर महीने बढ़ता है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

ITR देर से भरने पर क्या लगता है?

  • धारा 234A: अगर टैक्स बाक़ी है (TDS और advance tax घटाने के बाद), तो अंतिम तारीख़ के बाद से रिटर्न भरने की तारीख़ तक बाक़ी टैक्स पर 1% प्रति माह ब्याज लगता है; अधूरा महीना भी पूरा गिना जाता है।
  • धारा 234F: अंतिम तारीख़ के बाद रिटर्न भरने पर लेट फ़ीस - कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा हो तो ₹5,000, और ₹5 लाख तक हो तो ₹1,000। यह फ़ीस तब भी लगती है जब कोई टैक्स बाक़ी न हो।
  • देर से (belated) रिटर्न भरने की एक आख़िरी तारीख़ भी होती है (आम तौर पर उस मूल्यांकन वर्ष के 31 दिसंबर तक); उसके बाद सिर्फ़ अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता बचता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है।
  • देर से भरने पर कुछ नुक़सान भी होते हैं - जैसे कुछ मामलों में नुक़सान को आगे ले जाने (carry forward) का हक़ और कुछ कटौतियाँ/छूट चली जा सकती हैं। इसलिए जितनी जल्दी हो सके रिटर्न भरें।
  • अंतिम तारीख़ हर साल और श्रेणी के हिसाब से अलग और कभी-कभी बढ़ाई भी जाती है। अपनी असली तारीख़ आयकर विभाग की साइट पर जाँच लें।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

234A interest = 1% × months late (part month = full month) × tax due after TDS / advance tax (rounded down to ₹100). 234F fee = ₹5,000 if total income is above ₹5 lakh, else ₹1,000, when the return is filed after the due date. Total extra = 234A + 234F.

234A ब्याज = 1% × देर के महीने (अधूरा महीना पूरा) × TDS / advance tax के बाद बाक़ी टैक्स (₹100 तक घटाकर)। 234F फ़ीस = कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा हो तो ₹5,000, नहीं तो ₹1,000, जब रिटर्न अंतिम तारीख़ के बाद भरा जाए। कुल अतिरिक्त = 234A + 234F।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 10 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: FY 2026-27

Estimate only, for learning — not advice. Illustrative estimate using the rates and fee limits stored for the current rules. Actual interest depends on the exact filing date, rounding and any extension of the due date; section numbers differ under the Income-tax Act, 2025. Check the Income Tax Department's site or consult a CA. Not tax advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह मौजूदा नियमों की रखी दर और फ़ीस-सीमा पर आधारित उदाहरण-स्वरूप अनुमान है। असली ब्याज रिटर्न भरने की सही तारीख़, राउंडिंग और अंतिम तारीख़ बढ़ने पर निर्भर है; Income-tax Act, 2025 में धाराओं के नंबर अलग हैं। आयकर विभाग की साइट देखें या CA से पूछें। यह टैक्स सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • ITR अंतिम तारीख़ के बाद भरने पर दो अलग चीज़ें लग सकती हैं: बाक़ी टैक्स पर 1% प्रति माह का ब्याज (234A) और एक तय लेट फ़ीस (234F)।
  • ब्याज तभी बनता है जब TDS और advance tax घटाने के बाद टैक्स बाक़ी हो। फ़ीस टैक्स बाक़ी न होने पर भी लगती है।
  • इस पेज की मान्यता: कुल आय ₹5 लाख से ऊपर हो तो फ़ीस ₹5,000, नहीं तो ₹1,000। अधूरा महीना पूरा गिना जाता है और बाक़ी टैक्स ₹100 तक घटाकर लिया जाता है।
  • अंतिम तारीख़ और बढ़ाई गई तारीख़ हर साल बदल सकती है। असली तारीख़ आयकर विभाग की साइट पर जाँचें, यह पेज सिर्फ़ मोटा अनुमान है।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

पेज का शुरुआती उदाहरण

बाक़ी टैक्स ₹50,000, कुल आय ₹8,00,000, रिटर्न अंतिम तारीख़ के 2 महीने बाद भर रहे हैं।

234A का ब्याज
₹1,000
234F की लेट फ़ीस
₹5,000
कुल अतिरिक्त ख़र्च
₹6,000
बाक़ी टैक्स
₹50,000
कुल चुकाना होगा
₹56,000

ब्याज सिर्फ़ ₹1,000 बना, पर फ़ीस ₹5,000 तुरंत लग गई। छोटी बाक़ी रकम पर भी फ़ीस का हिस्सा बड़ा लगता है।

सीमा: कोई टैक्स बाक़ी नहीं, आय कम

बाक़ी टैक्स ₹0 (पूरा TDS कट चुका), कुल आय ₹3,00,000, रिटर्न 3 महीने देर से भर रहे हैं।

234A का ब्याज
₹0
234F की लेट फ़ीस
₹1,000
कुल अतिरिक्त ख़र्च
₹1,000
कुल चुकाना होगा
₹1,000

टैक्स बाक़ी न हो तब भी लेट फ़ीस लगी। कम आय वाले के लिए फ़ीस ₹1,000 मानी गई।

विनोद: ज़्यादा टैक्स, लंबी देर

बाक़ी टैक्स ₹1,50,000, कुल आय ₹15,00,000, रिटर्न 4 महीने देर से।

234A का ब्याज (1% × 4 महीने)
₹6,000
234F की लेट फ़ीस
₹5,000
कुल अतिरिक्त ख़र्च
₹11,000
कुल चुकाना होगा
₹1,61,000

टैक्स की रकम जितनी बड़ी और देर जितनी लंबी, ब्याज उतना ज़्यादा। हर महीने की देरी की क़ीमत बाक़ी टैक्स का 1% है।

देर के महीने बनाम अतिरिक्त ख़र्च (बाक़ी टैक्स ₹1,00,000, कुल आय ₹12,00,000)

देर के महीने बनाम अतिरिक्त ख़र्च (बाक़ी टैक्स ₹1,00,000, कुल आय ₹12,00,000)
देर (महीने)234A का ब्याज234F की फ़ीसकुल अतिरिक्त
1₹1,000₹5,000₹6,000
2₹2,000₹5,000₹7,000
3₹3,000₹5,000₹8,000
6₹6,000₹5,000₹11,000
12₹12,000₹5,000₹17,000

अधूरे महीने को भी पूरा गिना जाता है, इसलिए 2 दिन की देरी का भी 1 महीने का ब्याज बनता है।

कुल आय की रेखा पर फ़ीस (पेज की मान्यता)

कुल आय की रेखा पर फ़ीस (पेज की मान्यता)
कुल आयलेट फ़ीस 234F
₹3,00,000₹1,000
₹4,50,000₹1,000
₹5,00,000₹1,000
₹5,00,001₹5,000
₹8,00,000₹5,000
₹15,00,000₹5,000

आय ठीक ₹5 लाख हो तो कम वाली फ़ीस (₹1,000)। ₹5 लाख से एक रुपया भी ऊपर जाते ही ₹5,000।

त्वरित संदर्भ: देर से ITR भरने पर (पेज की मान्यताएँ)

त्वरित संदर्भ: देर से ITR भरने पर (पेज की मान्यताएँ)
234A ब्याज1% × देर के महीने × बाक़ी टैक्स (₹100 तक घटाकर)
बाक़ी टैक्सकुल टैक्स − TDS − advance tax − पहले से भरा टैक्स
महीना गिनने का तरीक़ाअधूरा महीना भी पूरा गिना जाता है
234F फ़ीस₹5,000 अगर कुल आय ₹5 लाख से ऊपर, वरना ₹1,000
टैक्स बाक़ी न हो तोब्याज नहीं बनता, पर फ़ीस लग सकती है
समय पर भरने परन 234A, न 234F
देर से भरने की सीमाइस पेज में लगभग 5 महीने मानी गई; उसके बाद अपडेटेड रिटर्न का रास्ता
इस पेज में क्या नहींअंतिम तारीख़ बढ़ना, 234B/234C का ब्याज, नुक़सान को आगे ले जाने का असर, नई धाराओं के नंबर।

Late ITR Filing Penalty Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

आयकर रिटर्न भरने की एक अंतिम तारीख़ होती है। कई वजहों से कुछ लोग उसे चूक जाते हैं: काग़ज़ समय पर नहीं मिले, Form 16 देर से आया, बीमारी रही, या बस टालमटोल हो गई। तब सवाल उठता है कि "अब देर से भरूँ तो कितना अतिरिक्त पैसा लगेगा?" यह calculator इसी सवाल का अनुमान देता है। इसमें दो चीज़ें गिनी जाती हैं: धारा 234A का ब्याज (बाक़ी टैक्स पर महीने-दर-महीने) और धारा 234F की लेट फ़ीस (एक तय रकम)। दोनों जोड़कर "कुल अतिरिक्त ख़र्च" बनता है, और फिर बाक़ी टैक्स के साथ मिलाकर "कुल चुकाना होगा" भी दिखता है।

इस पेज में धारा के नंबर वही हैं जो Income-tax Act, 1961 में थे। पेज की अपनी चेतावनी बताती है कि Income-tax Act, 2025 में धाराओं के नंबर अलग हैं, इसलिए पोर्टल पर नया नाम या नंबर देखकर पुष्टि कर लें।

किसके काम का है

  • वेतनभोगी, जिनका TDS कट चुका है पर जो रिटर्न भरना भूल गए, या जिनके पास थोड़ा बाक़ी टैक्स भी है।
  • फ्रीलांसर और पेशेवर, जिनकी आमदनी अनियमित है और जिन्हें हिसाब मिलाने में देर हो गई।
  • पहली बार रिटर्न भरने वाले, जिन्हें पता ही नहीं था कि भरना ज़रूरी है।
  • परिवार के बुज़ुर्गों की मदद करने वाले, जिन्हें माता-पिता का रिटर्न भरना था पर देर हो गई।
  • जो तय नहीं कर पा रहे कि अभी भरें या और इंतज़ार करें, उन्हें यह देखने में मदद मिलती है कि हर बीतता महीना कितना महँगा पड़ता है।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर तीन इनपुट हैं।

  • TDS / advance tax घटाने के बाद बाक़ी टैक्स (₹): आपकी कुल टैक्स देनदारी में से जो TDS और अग्रिम कर पहले ही जमा हो चुके हैं, उन्हें घटाने के बाद जो रकम चुकानी बची है। अगर TDS ही पूरा टैक्स चुका चुका है तो यहाँ 0 रखें। अगर रिफ़ंड बनता है तो भी 0 रखें। यह रकम आपके Form 26AS / AIS और Income Tax Calculator के नतीजे से मिलती है। शुरुआती मान ₹50,000।
  • कुल आय (₹, सालाना): आपकी वार्षिक कुल आय। इसी से तय होता है कि लेट फ़ीस की कौन-सी सीमा लगेगी। शुरुआती मान ₹8,00,000। यह वही कुल आय है जो आप रिटर्न में दिखाएँगे, न कि सिर्फ़ तनख़्वाह।
  • अंतिम तारीख़ के बाद कितने महीने देर से भर रहे हैं: 0 से 12 महीने का स्लाइडर। अधूरा महीना भी पूरा गिनें। यानी अगर तारीख़ के 10 दिन बाद भर रहे हैं, तो 1 महीना चुनें। 0 का मतलब है कि आप समय पर भर रहे हैं। शुरुआती मान 2।
ध्यान दें: अंतिम तारीख़ हर साल और श्रेणी के हिसाब से अलग होती है और कभी-कभी बढ़ाई भी जाती है। इस calculator में तारीख़ नहीं माँगी जाती, महीनों की गिनती आप ख़ुद करके डालते हैं। इसलिए आयकर विभाग की साइट से अपनी असली तारीख़ देख लें।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर: लेट फ़ाइलिंग का अनुमानित अतिरिक्त ख़र्च

बड़ी संख्या 234A का ब्याज और 234F की फ़ीस का जोड़ है, और उसके नीचे दोनों अलग-अलग लिखे होते हैं। अगर आपने महीने 0 चुने हैं तो संख्या शून्य और संदेश "समय पर भरने पर कोई ब्याज या फ़ीस नहीं" दिखता है।

पंक्तियाँ

  • बाक़ी टैक्स: जो आपने डाला।
  • धारा 234A का ब्याज: अगर टैक्स बाक़ी है तो लाल, वरना शून्य।
  • धारा 234F की लेट फ़ीस: लाल में।
  • कुल अतिरिक्त ख़र्च: दोनों का जोड़।
  • कुल चुकाना होगा (टैक्स + अतिरिक्त): बाक़ी टैक्स और अतिरिक्त ख़र्च मिलाकर।

संदेश और टिप्पणी

अगर देरी के महीने 5 से ज़्यादा चुने जाएँ तो पीला चेतावनी संदेश आता है कि देर से भरने (belated) की सामान्य अंतिम तारीख़ आम तौर पर लगभग इतने महीनों की होती है, और उससे ज़्यादा देर पर सिर्फ़ अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता बचता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स लगता है। इस calculator में यह सीमा 5 महीने रखी गई है; आपकी असली सीमा अलग हो सकती है। 5 महीने या उससे कम पर नीला संदेश आता है: "जल्दी भरें: हर अतिरिक्त महीने के साथ 234A का ब्याज बढ़ता है। फ़ीस तो देर होते ही लग जाती है।" नीचे एक टिप्पणी यह भी याद दिलाती है कि कुछ नुक़सान को आगे ले जाने का हक़ भी देर से भरने पर जा सकता है, जिसका कोई रुपयों में हिसाब यहाँ नहीं है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • महीने 1 से 6 तक खिसकाकर देखें। 234A रैखिक रूप से बढ़ता है, पर फ़ीस एक झटके में लगती है। इसलिए देर होते ही बड़ी रकम जुड़ जाती है, और आगे हर महीना कम से कम ब्याज के बराबर जोड़ता है।
  • बाक़ी टैक्स की सही संख्या पाने के लिए पहले टैक्स निकालें। अपना टैक्स Income Tax Calculator में निकालें, फिर Form 26AS या AIS से TDS और अग्रिम कर घटाएँ।
  • आय की सीमा के पास हों तो दोनों तरफ़ आज़माएँ। आय ₹5 लाख के आसपास हो तो देखें कि फ़ीस ₹1,000 बनेगी या ₹5,000।
  • देरी से बचने के उपाय पहले से करें। अग्रिम कर और काग़ज़ों की तैयारी के लिए ITR Documents Checklist साथ में चलाएँ।
  • अपडेटेड रिटर्न का विकल्प अंतिम रास्ता है। उसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है, इसलिए पहले belated रास्ता इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "टैक्स बाक़ी नहीं तो कुछ नहीं लगेगा।" इस calculator के नियम के अनुसार फ़ीस टैक्स बाक़ी न होने पर भी लगती है।
  • पूरा टैक्स डाल देना, TDS घटाए बिना। इससे ब्याज बढ़ा-चढ़ाकर दिखेगा। सिर्फ़ वही रकम डालें जो TDS और अग्रिम कर घटाकर बची है।
  • दिनों को महीनों में न बदलना। अधूरा महीना भी पूरा गिना जाता है; 3 महीने 1 दिन का मतलब 4 महीने।
  • "रिफ़ंड बनता है तो देरी से फ़र्क़ नहीं पड़ता।" इस calculator के हिसाब से रिफ़ंड वाले मामले में भी देर से भरने पर लेट फ़ीस जुड़ती है।
  • नुक़सान आगे ले जाने का हक़ भूल जाना। शेयर या कारोबार का नुक़सान आगे ले जाने की शर्त अक्सर समय पर रिटर्न भरना होती है, और यह नुक़सान रुपयों में इस calculator में नहीं दिखता।
  • सोचना कि यह जुर्माना हमेशा इतना ही होगा। ब्याज और फ़ीस के नियम और सीमाएँ बदल सकती हैं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

इस calculator के नियम पेज की सेटिंग से ये हैं:

  1. 234A का ब्याज = बाक़ी टैक्स (सौ रुपये के नीचे घटाकर) × 1% × देरी के महीने। यानी पहले टैक्स को नीचे की ओर नज़दीकी ₹100 तक गोल किया जाता है, फिर 1% प्रति माह से गुणा किया जाता है।
  2. 234F की फ़ीस = ₹5,000 अगर कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा है; वरना ₹1,000। यह फ़ीस तब भी जुड़ती है जब टैक्स बाक़ी न हो, बशर्ते कि आप 1 महीना या उससे ज़्यादा देर से भर रहे हों।
  3. कुल अतिरिक्त = 234A + 234F।
  4. कुल चुकाना = बाक़ी टैक्स + कुल अतिरिक्त।

पेज की सेटिंग में दर, फ़ीस-सीमाएँ और आय की सीमा FY 2026-27 के हिसाब से रखी गई हैं। ये नियम बदल सकते हैं, इसलिए ये अंक सिर्फ़ इस calculator की मान्यताएँ हैं, पक्की जानकारी आयकर विभाग की साइट पर देखें।

मान्यताएँ और सरलीकरण: असली ब्याज रिटर्न भरने की सटीक तारीख़ पर निर्भर करता है; यहाँ महीनों की गिनती आपके हाथ में है। तारीख़ बढ़ाई गई हो तो गिनती उसी के हिसाब से करें। अन्य धाराओं के ब्याज (जैसे अग्रिम कर न भरने से बना ब्याज) इसमें शामिल नहीं हैं।

एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: बाक़ी टैक्स के साथ देरी। मान लीजिए विजय एक फ्रीलांस वीडियो एडिटर है। उसकी कुल आय ₹6,50,000 है, TDS और अग्रिम कर घटाने के बाद ₹18,000 बाक़ी हैं, और वह अंतिम तारीख़ के 3 महीने बाद रिटर्न भर रहा है।

  1. 234A = 18,000 × 1% × 3 = ₹540।
  2. आय ₹5 लाख से ज़्यादा, इसलिए 234F = ₹5,000।
  3. कुल अतिरिक्त = 540 + 5,000 = ₹5,540।
  4. कुल चुकाना = 18,000 + 5,540 = ₹23,540।

ध्यान दें कि लेट फ़ीस ब्याज से कई गुना बड़ी है, इसलिए इस उदाहरण में देरी की ज़्यादातर क़ीमत एक बार लगने वाली फ़ीस की है।

उदाहरण 2: कोई टैक्स बाक़ी नहीं। कविता एक ट्यूशन टीचर है, कुल आय ₹3,50,000, कोई टैक्स बाक़ी नहीं (शायद रिफ़ंड बने), और वह 1 महीना देर से भर रही है। 234A शून्य; 234F = ₹1,000, क्योंकि आय ₹5 लाख से कम। कुल अतिरिक्त ₹1,000। यानी टैक्स न होने पर भी फ़ीस लग सकती है।

उदाहरण 3: सौ रुपये का गोल करना। किसी का बाक़ी टैक्स ₹45,678, कुल आय ₹14,00,000 और देरी 5 महीने है। टैक्स को नीचे गोल करने पर ₹45,600 बनता है। 234A = 45,600 × 1% × 5 = ₹2,280। 234F = ₹5,000। कुल अतिरिक्त = ₹7,280।

उदाहरण 4: लंबी देरी। उदाहरण 1 वाला ही विजय अगर 8 महीने देर करता, तो 234A = 18,000 × 1% × 8 = ₹1,440, और 234F वही ₹5,000, यानी कुल ₹6,440। पर तब पेज चेतावनी देता कि 5 महीने से ज़्यादा देर पर सामान्य belated रास्ता शायद बंद हो चुका हो और ITR-U का रास्ता ही बचे, जिसमें अतिरिक्त टैक्स लगता है। ये सब काल्पनिक आँकड़े हैं।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता

यह calculator सिर्फ़ 234A और 234F का अनुमान देता है। यह 234B, 234C, 270A जैसी दूसरी धाराओं के ब्याज या जुर्माने नहीं गिनता, न ही नोटिस, जाँच या विलंब-माफ़ी के मामलों को। यह आपका टैक्स ख़ुद नहीं निकालता; बाक़ी टैक्स आपको डालना होता है। महीनों की गिनती आपकी है, और असली ब्याज रिटर्न भरने की सटीक तारीख़ और आयकर विभाग के गोल करने के तरीक़े से थोड़ा अलग हो सकता है। अंतिम तारीख़ बढ़ने पर या किसी विशेष श्रेणी (ऑडिट वाले, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन वाले) में सीमाएँ अलग हो सकती हैं। इसलिए नतीजा अनुमान है; सही रकम के लिए आयकर पोर्टल के गणना-अनुमान या अपने CA की सलाह लें।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • ITR Documents Checklist: रिटर्न से पहले ज़रूरी काग़ज़ों की सूची के लिए।
  • Income Tax Calculator: बाक़ी टैक्स का अनुमान निकालने के लिए।
  • Advance Tax Calculator: अग्रिम कर की किस्तें समझने के लिए।
  • TDS Calculator: कटे हुए TDS को समझने के लिए।
  • Presumptive Tax Calculator: फ्रीलांसर या छोटे कारोबार की presumptive योजना समझने के लिए।
  • Interest Income Tax Calculator: बैंक और FD के ब्याज पर टैक्स का अंदाज़ा लगाने के लिए।

यह लेख और calculator सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी के लिए हैं; नतीजे अनुमान हैं, और इन्हें कर, क़ानूनी या वित्तीय सलाह न समझें। असली रकम और तारीख़ों के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक साइट देखें या किसी योग्य CA से पूछें।

6 काम की बातें याद रखें

1
पहले बाक़ी टैक्स भरें

देर हो भी जाए तो सबसे पहले बाक़ी टैक्स जमा कर दें, ताकि हर महीने का ब्याज और न बढ़े।

2
AIS और 26AS से बाक़ी टैक्स निकालें

आपके नाम पर कितना TDS और advance tax जमा है, यह वहीं दिखता है। इसी से बाक़ी टैक्स सही निकलेगा।

3
तारीख़ याद रखने का इंतज़ाम करें

कैलेंडर में अंतिम तारीख़ से 15 दिन पहले की याद लगा लें, ताकि कागज़ात जुटाने का समय मिले।

4
रिफ़ंड वाले भी देर न करें

टैक्स बाक़ी न हो तो भी फ़ीस लग सकती है और रिफ़ंड आने में देर होती है।

5
नुक़सान आगे ले जाने का हक़ देखें

शेयर या व्यवसाय के नुक़सान को आगे ले जाने के लिए समय पर रिटर्न भरना ज़रूरी हो सकता है। CA से पूछें।

6
दस्तावेज़ों की सूची बनाएँ

ITR checklist से देखें कि कौन-कौन से कागज़ चाहिए, ताकि भरने में और देर न हो।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

दो चीज़ें: बाक़ी टैक्स पर 1% प्रति माह ब्याज (234A, अधूरा महीना पूरा गिना जाता है) और लेट फ़ीस (234F) - कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा हो तो ₹5,000, नहीं तो ₹1,000।

हाँ, 234F की लेट फ़ीस अंतिम तारीख़ के बाद रिटर्न भरने पर तब भी लगती है जब कोई टैक्स बाक़ी न हो। ब्याज (234A) सिर्फ़ तब बनता है जब टैक्स बाक़ी हो।

आम तौर पर belated रिटर्न उस मूल्यांकन वर्ष के 31 दिसंबर तक भरा जा सकता है; उसके बाद अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता है जिसमें अतिरिक्त टैक्स देना होता है। असली तारीख़ आयकर विभाग की साइट पर जाँचें।

हाँ - कुछ मामलों में नुक़सान को आगे ले जाने का हक़ और कुछ कटौतियाँ या छूट जा सकती हैं। इसलिए समय पर भरना सबसे अच्छा है।

234A बाक़ी टैक्स पर महीनेवार ब्याज है, जबकि 234F देर से रिटर्न भरने की तय फ़ीस है। ब्याज रकम पर निर्भर करता है, फ़ीस आय की श्रेणी पर।

अंतिम तारीख़ के 1 दिन बाद भी भरें तो 1 महीने का ब्याज बनेगा। 31 दिन बाद 2 महीने का।

पेज बाक़ी टैक्स को पूरे सौ में नीचे गोल करता है, जैसे ₹50,450 को ₹50,400। ब्याज इसी पर निकलता है।

पेज मानता है कि रिटर्न समय पर भरा गया, इसलिए 234A और 234F दोनों शून्य दिखते हैं।

कटौतियों से पहले की कुल आय जैसा आप अपने रिटर्न में देखेंगे। अपनी स्थिति में कौन-सी आय मानी जाएगी, इसके लिए CA से पूछें।

किसी regime पर निर्भर नहीं। आप सीधे बाक़ी टैक्स और कुल आय भरते हैं, इसलिए पहले अपने regime में टैक्स निकाल लें।

नहीं। अंतिम तारीख़ करदाता की श्रेणी के अनुसार अलग हो सकती है और कभी बढ़ाई भी जाती है। आयकर विभाग की साइट देखें।

पेज चेतावनी देता है कि सामान्य देर से भरने की अवधि निकल सकती है और अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता बचता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स लगता है।

नहीं। advance tax न भरने या कम भरने पर लगने वाला 234B/234C का ब्याज इस पेज में शामिल नहीं है।

नहीं। यह सिर्फ़ 234A और 234F का अनुमान है। नोटिस के बाद बनने वाली रकम अलग होती है।

नए आयकर क़ानून में धाराओं के नंबर बदल सकते हैं। पेज पुराने जाने-पहचाने नाम 234A/234F इस्तेमाल करता है, गणना का सार वही मानता है।

तब बाक़ी टैक्स शून्य है, इसलिए ब्याज नहीं बनता। पर देर से भरने की फ़ीस लग सकती है, जो रिफ़ंड में से घट सकती है।

कुछ कटौतियों और नुक़सान को आगे ले जाने का हक़ समय पर रिटर्न भरने पर निर्भर हो सकता है। इसका असर इस पेज में नहीं जुड़ा।

नहीं, यह शैक्षणिक अनुमान है। असली रकम और तारीख़ के लिए आयकर विभाग की साइट देखें या CA से पूछें।

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