उदाहरण 1: फ्रीलांस डिज़ाइनर (44ADA)
मान लीजिए एक फ्रीलांस डिज़ाइनर की साल भर की प्राप्ति ₹18,00,000 है, सारी बैंक के रास्ते (100% डिजिटल)।
- अनुमानित मुनाफ़ा = 18,00,000 × 50% = ₹9,00,000।
- अगर उसका असली खर्च (किराया, सॉफ़्टवेयर, इंटरनेट आदि) ₹5,50,000 है, तो असली मुनाफ़ा = 18,00,000 − 5,50,000 = ₹12,50,000।
- यहाँ अनुमानित मुनाफ़ा (₹9 लाख) असली मुनाफ़े (₹12.5 लाख) से कम है। इसलिए अनुमानित योजना में कर कम बनेगा, और बही-खातों का झंझट भी कम।
- अगर इसके उलट असली खर्च ₹11,00,000 होता, तो असली मुनाफ़ा सिर्फ़ ₹7,00,000 बनता, जो अनुमानित ₹9 लाख से कम है। तब असली खर्च दिखाने पर कर कम आता, पर बही-खाते रखने पड़ते और ऑडिट की शर्तें लग सकती थीं।
इस उदाहरण में कर की रकम पेज पर नई कर-व्यवस्था की स्लैब से दिखेगी। ऊपर के मुनाफ़े के आँकड़े आप खुद जाँच सकते हैं।
उदाहरण 2: कपड़े का दुकानदार (44AD)
मान लीजिए एक दुकानदार की साल भर की बिक्री ₹1.2 करोड़ है, जिसमें 70% पैसा UPI या बैंक के रास्ते आया और 30% नक़द।
- डिजिटल हिस्सा: ₹1.2 करोड़ का 70% = ₹84 लाख, उस पर 6% = ₹5.04 लाख।
- नक़द हिस्सा: ₹36 लाख, उस पर 8% = ₹2.88 लाख।
- कुल अनुमानित मुनाफ़ा = ₹7.92 लाख।
- अगर पूरी बिक्री पर 8% मानते, तो ₹9.6 लाख बनता। डिजिटल हिस्सा ज़्यादा होने से अनुमानित मुनाफ़ा कम हुआ।
- सीमा की जाँच: इस उदाहरण में नक़द 30% है, जो 5% से ज़्यादा है, इसलिए पेज की मान्यता के अनुसार ₹2 करोड़ की सीमा लागू होगी, और ₹1.2 करोड़ उसके भीतर है।
अगर इसी दुकानदार की बिक्री ₹2.5 करोड़ होती और नक़द 30% ही रहता, तो पेज "नहीं - योजना लागू नहीं" दिखाता, क्योंकि ₹2.5 करोड़ ₹2 करोड़ से ऊपर है।