फ्रीलांसर और GST

Freelancer GST Calculator

फ्रीलांसर हैं? सालाना कमाई डालिए और देखिए कि GST पंजीकरण कब ज़रूरी बनता है और कितना GST जमा करना होगा।

  • पंजीकरण की सीमा से दूरी
  • वसूला GST
  • ITC घटाकर शुद्ध GST
  • GST शामिल / अलग क़ीमत
  • इनवॉइस की तालिका
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहसीमा के पास पहुँचने से पहले योजना बनाएँ; इनवॉइस की क़ीमत में GST कैसे जुड़ेगा, यह तय कर लें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

फ्रीलांसर पर GST कब लगता है?

  • सेवाएँ देने वाले का कुल सालाना टर्नओवर पंजीकरण की तय सीमा (यहाँ उदाहरण के तौर पर ₹20 लाख) से ऊपर जाए तो GST पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है। कुछ राज्यों/मामलों में सीमा अलग है, इसलिए सीमा आप बदल सकते हैं।
  • पंजीकरण के बाद आप अपने इनवॉइस पर GST वसूल सकते हैं और अपने कारोबारी ख़र्च पर चुकाए GST का ITC ले सकते हैं। जमा करना होता है: वसूला GST − ITC।
  • अगर आपके ग्राहक पहले से GST-पंजीकृत कंपनियाँ हैं तो वे आपके इनवॉइस पर GST का ITC ले सकते हैं, इसलिए उनके लिए यह अतिरिक्त बोझ कम होता है। निजी ग्राहकों के लिए GST पूरा बोझ बनता है।
  • विदेशी ग्राहकों को निर्यात की गई सेवाओं और दूसरे राज्य के ग्राहकों के नियम अलग हो सकते हैं; वह यहाँ नहीं जोड़े गए हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Headroom = threshold - annual turnover; registration may be needed once turnover exceeds the threshold. GST collected = fees x rate if prices exclude GST, or fees - fees / (1 + rate) if prices include it. ITC = business purchases x purchase GST rate. Net GST to deposit = collected - ITC. Threshold and rates are inputs. Nothing you type is stored.

सीमा से दूरी = सीमा − सालाना टर्नओवर; टर्नओवर सीमा पार करे तो पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है। वसूला GST = फ़ीस × दर (क़ीमत में GST अलग हो), या फ़ीस − फ़ीस ÷ (1 + दर) (क़ीमत में GST शामिल हो)। ITC = कारोबारी ख़रीद × ख़रीद पर GST दर। जमा करने वाला GST = वसूला − ITC। सीमा और दरें बदली जा सकती हैं। आपकी जानकारी कहीं जमा नहीं होती।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 14 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Educational estimate. The registration threshold and the GST rate are editable examples; the rule for your state, service type, exports and inter-state supply may differ. Confirm with the GST portal or a professional. Not tax advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह शैक्षणिक अनुमान है। पंजीकरण की सीमा और GST दर बदले जा सकने वाले उदाहरण हैं; आपके राज्य, सेवा के प्रकार, निर्यात और दूसरे राज्य की आपूर्ति के नियम अलग हो सकते हैं। GST पोर्टल या जानकार से पुष्टि करें। यह कर-सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • सेवाओं के टर्नओवर के लिए पंजीकरण की एक सीमा होती है (यहाँ उदाहरण ₹20 लाख, इनपुट में बदलें)। उसे पार करने पर पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है।
  • पंजीकरण के बाद इनवॉइस पर GST वसूला जाता है और कारोबारी ख़रीद पर चुकाए GST का ITC लिया जा सकता है; जमा करना होता है वसूला − ITC।
  • तय फ़ीस में GST शामिल हो तो आपकी असली फ़ीस घटती है; अलग से जोड़ें तो ग्राहक पर बोझ बढ़ता है।
  • सीमा और दरें उदाहरण हैं। अपने राज्य, सेवा और निर्यात जैसे मामलों में नियम अलग हो सकते हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

तन्वी: अभी सीमा से काफ़ी नीचे

तन्वी की सालाना फ़ीस ₹12 लाख है, कारोबारी ख़रीद ₹1 लाख। (उदाहरण: सीमा ₹20 लाख, दर 18%)

सीमा का इस्तेमाल
60%
गुंजाइश
₹8,00,000
पंजीकृत होने पर वसूला GST
₹2,16,000
ITC
₹18,000
शुद्ध GST
₹1,98,000

अभी पंजीकरण अनिवार्य नहीं दिखता, पर अगर आपके ग्राहक कंपनियाँ हैं तो वे पंजीकृत सप्लायर को पसंद कर सकती हैं।

कबीर: सीमा के क़रीब

कबीर की सालाना फ़ीस ₹18 लाख है, कारोबारी ख़रीद ₹2 लाख।

सीमा का इस्तेमाल
90%
गुंजाइश
₹2,00,000
वसूला GST
₹3,24,000
ITC
₹36,000
शुद्ध GST
₹2,88,000

सीमा के पास हों तो पंजीकरण की तैयारी, इनवॉइस का ढाँचा और क़ीमत पहले से सोच लें।

मीरा: सीमा के पार, फ़ीस में GST शामिल

मीरा की सालाना फ़ीस ₹25 लाख है और उसकी तय फ़ीस में GST पहले से शामिल है। कारोबारी ख़रीद ₹2 लाख।

सीमा से ऊपर
₹5,00,000
वसूला GST (शामिल में से)
₹3,81,356
ITC
₹36,000
जमा करने वाला GST
₹3,45,356
GST हटाने के बाद असली फ़ीस
₹21,18,644

GST शामिल हो तो असली कमाई ₹25 लाख से घटकर लगभग ₹21.19 लाख रह जाती है। क़ीमत में GST अलग से जोड़ना बेहतर रहता है।

सीमा (₹20 लाख उदाहरण) के हिसाब से स्थिति

सीमा (₹20 लाख उदाहरण) के हिसाब से स्थिति
सालाना टर्नओवरसीमा का हिस्सास्थिति
₹10 लाख50%काफ़ी नीचे
₹15 लाख75%नीचे
₹18 लाख90%सीमा के क़रीब
₹20 लाख100%सीमा पर
₹25 लाख125%सीमा पार

सीमा उदाहरण है; अपने राज्य और मामले की सीमा जाँचकर बदलें।

एक इनवॉइस पर GST (18% उदाहरण, फ़ीस बिना GST)

एक इनवॉइस पर GST (18% उदाहरण, फ़ीस बिना GST)
फ़ीसGSTग्राहक का कुल
₹25,000₹4,500₹29,500
₹50,000₹9,000₹59,000
₹1,00,000₹18,000₹1,18,000
₹2,00,000₹36,000₹2,36,000

GST शामिल क़ीमत हो तो ऊपर के कुल से GST वापस घटता है।

त्वरित संदर्भ: फ्रीलांसर और GST

त्वरित संदर्भ: फ्रीलांसर और GST
सीमा से दूरीसीमा − सालाना टर्नओवर
वसूला GST (अलग)फ़ीस × दर
वसूला GST (शामिल)फ़ीस − फ़ीस ÷ (1 + दर)
ITCकारोबारी ख़रीद × उस पर की GST दर
जमा करनावसूला GST − ITC
पंजीकरण की सीमाउदाहरण ₹20 लाख; राज्य और मामले के हिसाब से बदलती है
दरसेवा के SAC कोड के हिसाब से; आप भरते हैं
इस पेज में क्या नहींनिर्यात, दूसरे राज्य की सेवा, RCM, कंपोज़िशन जैसी योजनाएँ, अग्रिम में मिले पैसों का नियम।

Freelance GST Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

फ्रीलांसर की कमाई आम तौर पर अलग-अलग ग्राहकों से अलग-अलग समय पर आती है, और साल के अंत में एक सवाल अचानक बड़ा हो जाता है: क्या मुझे अब GST पंजीकरण कराना पड़ेगा? पंजीकरण के बाद इनवॉइस पर GST वसूलना होता है, हर महीने रिटर्न भरना होता है और वसूले हुए GST में से कारोबारी ख़र्च पर चुकाया GST घटाकर बाकी सरकार को जमा करना होता है। Freelance GST Calculator इस पूरे चक्र को संख्या में दिखाता है।

आप सालाना कुल फ़ीस (टर्नओवर), पंजीकरण की सीमा, अपनी सेवा पर GST की दर, यह कि आपकी तय फ़ीस में GST पहले से शामिल है या नहीं, और साल भर की कारोबारी ख़रीद तथा उन पर लगे GST की औसत दर डालते हैं। calculator बताता है कि आप सीमा के कितने प्रतिशत पर हैं, कितनी गुंजाइश बची है या कितना ऊपर निकल गए हैं, पंजीकरण के बाद आप कितना GST वसूलेंगे, कितना ITC (input tax credit) मिल सकता है, और अंत में सरकार को कितना शुद्ध GST जमा करना होगा।

एक बात इस पेज की खासियत है: उसमें दो अलग-अलग तस्वीरें अपने-आप बदल जाती हैं। अगर आप सीमा के नीचे हैं, तो बड़ा आँकड़ा "सीमा तक की गुंजाइश" होता है। अगर सीमा पार कर चुके हैं, तो वही जगह "पंजीकरण के बाद जमा करने वाला GST" ले लेता है।

यह शैक्षणिक अनुमान है। सीमा और GST दर आपके बदलने लायक़ उदाहरण-मान हैं, क्योंकि राज्य, सेवा के प्रकार, निर्यात और दूसरे राज्य की आपूर्ति के नियम अलग हो सकते हैं।

किसके काम का है

  • वे स्वतंत्र पेशेवर, जैसे लेखक, डिज़ाइनर, प्रोग्रामर, अनुवादक, वीडियो एडिटर, कंसल्टेंट और ट्यूटर, जो अपनी सेवाएँ ग्राहकों को देते हैं और अभी GST पंजीकृत नहीं हैं।
  • वे लोग, जिनकी सालाना कमाई पंजीकरण की सीमा के आसपास पहुँच रही है और जो समय रहते तैयारी करना चाहते हैं।
  • वे फ्रीलांसर, जिन्हें कंपनी ग्राहक कहते हैं कि "GST इनवॉइस दीजिए" और जो सोच रहे हैं कि स्वेच्छा से पंजीकरण कराना फ़ायदे का सौदा है या नहीं।
  • वे लोग, जो फ़ीस तय कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि GST जोड़ने पर ग्राहक का बिल कितना बनेगा।
  • जिनके पास कारोबारी ख़र्च, जैसे सॉफ़्टवेयर सब्सक्रिप्शन, लैपटॉप, इंटरनेट या कोवर्किंग का किराया, काफ़ी है और जो देखना चाहते हैं कि ITC से कितना घटेगा।

अगर आप सामान बेचते हैं, तो सीमा अलग हो सकती है। यह पेज सेवाएँ देने वाले के उदाहरण पर चलता है, पर सीमा आप बदल सकते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर छह इनपुट हैं।

  • सालाना कुल फ़ीस / टर्नओवर (₹): साल भर में आपके सभी ग्राहकों से मिली या मिलने वाली कुल फ़ीस। शुरुआती मान ₹18,00,000।
  • पंजीकरण की सीमा (₹): शुरुआती मान ₹20,00,000, जो सेवाओं के लिए उदाहरण है। कुछ राज्यों या मामलों में सीमा अलग हो सकती है, इसलिए अपने मामले की सीमा देखकर बदल दें।
  • अपनी सेवा पर GST दर (%): शुरुआती मान 18%, जो उदाहरण है। सेवा के SAC कोड के हिसाब से अपनी दर देखें।
  • मेरी तय फ़ीस में GST पहले से शामिल है (चालू/बंद): बंद रखने पर माना जाता है कि GST फ़ीस के ऊपर से जुड़ेगा। चालू करने पर माना जाता है कि जो आप लेते हैं उसी में GST छिपा है।
  • सालाना कारोबारी ख़रीद, GST से पहले (₹): सॉफ़्टवेयर, उपकरण, इंटरनेट, किराया आदि पर साल भर का ख़र्च। शुरुआती मान ₹2,00,000।
  • इन ख़रीद पर औसत GST दर (%): शुरुआती मान 18%।
सुझाव: "फ़ीस में GST शामिल है" वाला बटन सोच-समझकर चुनिए। अगर आपने ग्राहक को ₹1,00,000 कहा था और GST का ज़िक्र नहीं किया, तो पंजीकरण के बाद आपको ₹18,000 अपनी जेब से देना पड़ सकता है, जबकि ग्राहक ने बस ₹1,00,000 दिया।

कृपया ध्यान रखें कि आप जो टर्नओवर डालते हैं, वही सीमा से तुलना के लिए इस्तेमाल होता है। असल में कौन-सी कमाई गिनी जाएगी, यह नियम पर निर्भर है।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर का बड़ा आँकड़ा आपकी स्थिति के अनुसार बदलता है। सीमा से नीचे हों तो "सीमा तक की गुंजाइश"। पार हों तो "पंजीकरण के बाद जमा करने वाला GST (अनुमान)"। उसके नीचे सालाना टर्नओवर लिखा आता है। फिर छह पंक्तियाँ हैं।

  • सीमा का कितना हिस्सा इस्तेमाल हुआ: टर्नओवर ÷ सीमा × 100।
  • पंजीकरण की स्थिति: "सीमा से नीचे" या "सीमा पार"।
  • पंजीकृत होने पर वसूला GST: आपके इनवॉइस पर साल भर में जितना GST जुड़ेगा।
  • ख़रीद पर ITC (अनुमान): ख़रीद × ख़रीद की GST दर।
  • जमा करने वाला शुद्ध GST: वसूला GST − ITC, और नकारात्मक हो तो शून्य।
  • अंतिम पंक्ति: शुद्ध GST नकारात्मक हो तो "अतिरिक्त ITC जो आगे रहेगा"। नहीं तो "GST हटाने के बाद आपकी असली फ़ीस"।

नीचे की रंगीन टिप्पणी में तीन स्थितियाँ हैं। सीमा से ऊपर हों तो बताया जाता है कि आप कितना ऊपर हैं और पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है। सीमा के 80% या उससे ज़्यादा पर हों तो कितनी गुंजाइश बची है यह लिखा आता है और तैयारी की याद दिलाई जाती है। उससे नीचे हों तो बताया जाता है कि चाहें तो स्वेच्छा से पंजीकरण पर भी विचार कर सकते हैं।

फिर एक छोटी सारणी है: ₹25,000, ₹50,000, ₹1,00,000 और ₹2,00,000 की एक इनवॉइस फ़ीस पर GST कितना जुड़ेगा और ग्राहक का कुल बिल कितना बनेगा। साथ में एक बार चार्ट है, जिसमें आपका टर्नओवर और सीमा आमने-सामने दिखती हैं।

पढ़ने का तरीक़ा: "सीमा का कितना हिस्सा" का प्रतिशत देखिए। 80% पार करते ही मान लीजिए कि पंजीकरण नज़दीक है। साल के आख़िरी महीनों में बड़े प्रोजेक्ट मिलने पर यह प्रतिशत तेज़ी से बढ़ सकता है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • हर तिमाही दोबारा चलाइए। टर्नओवर साल के बीच बढ़ता है। हर तीन महीने में अब तक की कमाई और अगले महीनों का अनुमान जोड़कर देखिए कि 80% की रेखा कब पार होगी।
  • फ़ीस का ढाँचा पहले तय कीजिए। ग्राहक से बातचीत में साफ़ कहिए कि फ़ीस GST के साथ है या GST अलग से जुड़ेगा। बाद में GST अपनी जेब से देना सबसे कड़वा अनुभव है।
  • ग्राहक का प्रकार देखिए। कंपनी जैसे GST-पंजीकृत ग्राहक अक्सर आपके GST का ITC ले लेते हैं, इसलिए उन्हें यह बोझ कम लगता है। निजी ग्राहकों के लिए GST पूरा ख़र्च बनता है। इस आधार पर तय कीजिए कि स्वेच्छा से पंजीकरण फ़ायदेमंद है या नहीं।
  • कारोबारी ख़रीद का हिसाब रखिए। बिल पर आपके GST नंबर का होना और सही बिल मिलना ITC की शर्तों में आता है। ख़रीद की रकम जितनी पक्की होगी, ITC का अंदाज़ा उतना सही।
  • सीमा खुद जाँचिए। पेज की ₹20 लाख की सीमा एक उदाहरण है। अपने राज्य और सेवा के प्रकार की सीमा GST पोर्टल से पक्की करके बदल दीजिए।
  • नक़दी का इंतज़ाम रखिए। वसूला GST आपकी कमाई नहीं, सरकार की अमानत है। उसे अलग खाते में रखने की आदत बनाइए, ताकि जमा करते समय नक़दी की तंगी न हो।
  • जानकार से पुष्टि कीजिए। पंजीकरण के फ़ैसले का असर लंबे समय तक रहता है। सीमा के आसपास हों तो किसी GST जानकार से बात कर लीजिए।
उदाहरण: दो फ्रीलांसर, दोनों की फ़ीस ₹18 लाख। एक के ग्राहक सब कंपनियाँ हैं, दूसरे के ज़्यादातर निजी लोग। पहले के लिए GST का बोझ ग्राहक आराम से उठा लेते हैं, दूसरे को अपनी फ़ीस घटानी या GST अपनी जेब से देना पड़ सकता है। संख्या वही, असर अलग।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "सीमा से नीचे हूँ तो GST का कोई मतलब नहीं।" सीमा से नीचे आम तौर पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं, पर कुछ मामलों में, जैसे दूसरे राज्य को सेवा देने के कुछ प्रकार में, नियम अलग हो सकते हैं। पुष्टि कीजिए।
  • "टर्नओवर यानी मुनाफ़ा।" सीमा से तुलना कुल फ़ीस से होती है, मुनाफ़े से नहीं। ख़र्च घटाने के बाद की रकम सीमा की गिनती में नहीं आती।
  • "वसूला GST मेरी कमाई है।" नहीं। वसूले GST में से ITC घटाकर बाकी सरकार को जाता है। ऊपर के उदाहरण में ₹3,24,000 में से ₹2,88,000 जमा करना है।
  • "सारी ख़रीद पर पूरा ITC मिलेगा।" कुछ ख़र्च पर ITC की रोक होती है और बिल, भुगतान जैसी शर्तें हैं। पेज पूरी रकम पर सरल अनुमान लगाता है।
  • "फ़ीस में GST शामिल है तो मेरा नुकसान नहीं।" शामिल होने पर ₹18 लाख में से ₹2,74,576 GST बन जाता है और आपकी असली फ़ीस ₹15,25,424 रह जाती है।
  • "पंजीकरण के बाद सब ग्राहक GST देंगे ही।" ग्राहक की बजट सीमा हो तो वे फ़ीस घटाने की माँग कर सकते हैं। यह बातचीत का मामला है।
  • "सारी दरें हमेशा 18% होंगी।" अलग सेवाओं पर अलग दर हो सकती है। इसीलिए पेज में दर बदलने योग्य है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
  1. सीमा से तुलना: अगर टर्नओवर > सीमा, तो "सीमा पार"। गुंजाइश = सीमा − टर्नओवर, और उपयोग = टर्नओवर ÷ सीमा × 100।
  2. वसूला GST:

- अगर फ़ीस में GST शामिल नहीं: टर्नओवर × दर ÷ 100। - अगर शामिल है: टर्नओवर − टर्नओवर ÷ (1 + दर ÷ 100)।

  1. ITC = कारोबारी ख़रीद × ख़रीद की GST दर ÷ 100।
  2. जमा करने वाला शुद्ध GST = वसूला GST − ITC (न्यूनतम शून्य)। नकारात्मक आए तो अंतर आगे के लिए ITC के रूप में बचा माना जाता है।
  3. असली फ़ीस = अगर GST शामिल नहीं तो टर्नओवर ही; अगर शामिल है तो टर्नओवर − वसूला GST।
  4. एक इनवॉइस की सारणी: फ़ीस × दर = GST, और फ़ीस + GST = ग्राहक का कुल।

पेज की मान्यताएँ:

  • पूरे साल की कमाई पर पंजीकृत होने जैसा हिसाब लगाया गया है। असल में पंजीकरण सीमा पार करने के बाद से लागू होता है, पूरे साल से नहीं।
  • पूरी ख़रीद पर ITC मिलने का सरल अनुमान है।
  • निर्यात, दूसरे राज्य को सेवा, RCM और composition जैसी योजनाएँ शामिल नहीं।
एक पूरा उदाहरण

पेज के शुरुआती मान लेते हैं। एक डिज़ाइनर की सालाना फ़ीस ₹18,00,000 है। पंजीकरण की सीमा ₹20,00,000 (उदाहरण), GST दर 18% (उदाहरण), फ़ीस में GST शामिल नहीं। साल भर की कारोबारी ख़रीद ₹2,00,000 है, जिस पर औसत 18% GST लगा।

  1. सीमा का उपयोग = 18,00,000 ÷ 20,00,000 = 90%।
  2. गुंजाइश = 20,00,000 − 18,00,000 = ₹2,00,000। स्थिति: "सीमा से नीचे"।
  3. वसूला GST (अगर पंजीकृत होतीं) = 18,00,000 × 18% = ₹3,24,000।
  4. ITC = 2,00,000 × 18% = ₹36,000।
  5. शुद्ध GST = 3,24,000 − 36,000 = ₹2,88,000।
  6. असली फ़ीस = ₹18,00,000, क्योंकि GST ऊपर से जुड़ता है।

90% होने के कारण पेज की टिप्पणी बताती है कि ₹2,00,000 की गुंजाइश बची है और तैयारी अभी से कर लेनी चाहिए।

अब एक इनवॉइस का उदाहरण। ₹1,00,000 की फ़ीस पर GST ₹18,000 जुड़ेगा और ग्राहक का कुल बिल ₹1,18,000 होगा। ₹25,000, ₹50,000 और ₹2,00,000 की फ़ीस पर GST क्रमशः ₹4,500, ₹9,000 और ₹36,000 बनेगा।

आम ग़लतियाँ और भ्रम
फ़ीसGST (18%)ग्राहक का कुल
₹25,000₹4,500₹29,500
₹50,000₹9,000₹59,000
₹1,00,000₹18,000₹1,18,000
₹2,00,000₹36,000₹2,36,000

कुछ बदलाव आज़माइए।

  • फ़ीस में GST शामिल: यही ₹18,00,000 अगर GST समेत हों, तो वसूला GST ₹2,74,576 रह जाता है, शुद्ध GST ₹2,38,576 और GST हटाने के बाद असली फ़ीस सिर्फ़ ₹15,25,424। ग्राहक को उतना ही बिल गया, पर आपकी असली कमाई ₹2,74,576 कम हो गई।
  • सीमा पार: टर्नओवर ₹25,00,000 करें, तो सीमा से ₹5,00,000 ऊपर, वसूला GST ₹4,50,000, ITC ₹36,000 और जमा करने वाला शुद्ध GST ₹4,14,000। पेज लाल-पीली चेतावनी दिखाएगा।
  • ITC ज़्यादा: टर्नओवर ₹10,00,000 और ख़रीद ₹20,00,000 करें, तो वसूला GST ₹1,80,000, ITC ₹3,60,000, शुद्ध GST शून्य और ₹1,80,000 का अतिरिक्त ITC आगे बचा रहता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • पंजीकरण का कानूनी फ़ैसला नहीं। पेज सिर्फ़ संख्या दिखाता है। आपको पंजीकरण कराना ज़रूरी है या नहीं, यह आपके राज्य, सेवा और तथ्यों पर निर्भर है।
  • निर्यात और दूसरे राज्य की आपूर्ति नहीं। विदेशी ग्राहक को दी गई सेवाओं और दूसरे राज्य के ग्राहकों के नियम अलग हो सकते हैं।
  • RCM और composition योजना नहीं।
  • पूरे साल पर पंजीकृत होने जैसा हिसाब। असल में सीमा पार करने के बाद की आपूर्ति पर GST बनता है।
  • ITC की शर्तें नहीं। पेज मानकर चलता है कि पूरी ख़रीद पर ITC मिल जाएगा।
  • रिटर्न की फ़ीस और अनुपालन का ख़र्च नहीं। हर महीने के रिटर्न और जानकार की फ़ीस का ख़र्च भी असली लागत में जुड़ता है।
  • आयकर नहीं। GST अलग कर है। आपकी कमाई पर आयकर का हिसाब अलग calculator में है।

यह पेज शैक्षणिक है और कर सलाह नहीं। आपका डाला डेटा कहीं सहेजा नहीं जाता। निर्णय से पहले GST पोर्टल या किसी जानकार से पुष्टि कीजिए।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • GST Calculator: किसी भी रकम पर GST जोड़ने या निकालने का सीधा हिसाब देखने के लिए।
  • GST Reverse Charge Calculator: जब GST ख़रीदार को चुकाना हो, तब उसका असर देखने के लिए।
  • GST Late Fee & Interest Calculator: रिटर्न या GST देर से भरने की क़ीमत का अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • Presumptive Tax Calculator: छोटे कारोबारी या पेशेवर की आयकर की सरल योजना समझने के लिए।
  • Advance Tax Calculator: कमाई पर आयकर की किस्तों की योजना बनाने के लिए।
  • Invoice Generator: GST सहित इनवॉइस तैयार करने के लिए।

6 काम की बातें याद रखें

1
टर्नओवर पर नज़र रखें

हर महीने कुल फ़ीस जोड़ते चलें। सीमा के 80% पर पहुँचते ही तैयारी शुरू करें।

2
सारे स्रोत जोड़ें

अगर एक से ज़्यादा काम या ग्राहक हैं तो कुल आय जोड़कर देखें; सीमा कुल पर लगती है।

3
इनवॉइस में GST अलग दिखाएँ

पंजीकृत होने पर GST को फ़ीस से अलग लिखें, ताकि ग्राहक ITC ले सकें और आपकी कमाई न घटे।

4
ITC के लिए बिल सँभालें

कारोबारी ख़रीद के GST वाले बिल रखें; ITC उन्हीं पर मिलता है।

5
कंपनी ग्राहक हों तो

GST-पंजीकृत कंपनियाँ आम तौर पर पंजीकृत सप्लायर चाहती हैं, इसलिए स्वेच्छा से पंजीकरण भी विचार का विषय है।

6
जानकार से मिलकर पुष्टि करें

सीमा का नियम राज्य और सेवा के हिसाब से बदलता है। पंजीकरण से पहले CA से बात करें।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

आम तौर पर कुल कारोबार गिना जाता है। अपने सभी स्रोत मिलाकर देखें और जानकार से पुष्टि करें।

सीमा से नीचे आम तौर पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं, पर कुछ मामलों में (जैसे दूसरे राज्य के कुछ मामले) अलग नियम हो सकते हैं। पुष्टि करें।

नहीं, कुछ ख़र्च पर ITC की रोक होती है और बिल, भुगतान जैसी शर्तें हैं। यहाँ पूरी रकम पर सरल अनुमान है।

नहीं। यह राज्य, सेवा और मामले के हिसाब से अलग हो सकती है, इसलिए सीमा का खाना बदला जा सकता है।

आम तौर पर समय-सीमा के भीतर पंजीकरण कराना होता है। सही तारीख़ें जानकार से पूछें।

निर्यात के नियम अलग हैं और यहाँ शामिल नहीं हैं। अपने CA से पूछें।

नहीं। GST वसूलने के लिए पंजीकरण चाहिए, और पंजीकरण के बाद ही ITC मिलता है।

नहीं, बिना पंजीकरण GST वसूलना ठीक नहीं माना जाता। इस बारे में जानकार से पूछें।

नहीं, कुछ ख़रीद पर रोक होती है और बिल-भुगतान की शर्तें भी हैं। यहाँ पूरी ख़रीद पर सरल अनुमान है।

नहीं। उसकी शर्तें और दर अलग हैं।

यह नियम इस पेज में नहीं है; पोर्टल या जानकार से देखें।

तब अतिरिक्त ITC आगे ले जाया जाता है। calculator ऐसे में शुद्ध GST शून्य और बचा ITC दिखाता है।

पंजीकृत होने पर GST अलग रकम है, आपकी आय नहीं, पर फ़ीस में शामिल हो तो असली फ़ीस घटती है। आयकर के लिए Presumptive Tax calculator देखें।

नहीं। यह अनुमान है; असली रकम रिटर्न में बनेगी।

नहीं, कुछ भी जमा नहीं होता।

औसत दर डालें या हर सेवा के लिए अलग-अलग हिसाब देखें।

जब ग्राहक GST वाला बिल माँगें या ख़रीद पर ITC की रकम बड़ी हो। नफ़ा-नुकसान पहले जोड़ लें।

आपके काम के और कैलकुलेटर

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घर और प्रॉपर्टी

बीमा और सुरक्षा

अब आगे क्या करें?

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