Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
GST में देरी का हिसाब कैसे बनता है?
देरी की फ़ीस (late fee) रिटर्न की नियत तारीख़ के बाद हर दिन के हिसाब से लगती है, और रिटर्न के प्रकार तथा टर्नओवर के हिसाब से उसकी ऊपरी सीमा होती है। nil रिटर्न की दर कम होती है।
ब्याज बकाया टैक्स की रकम पर, नियत तारीख़ से भुगतान की तारीख़ तक, साल की दर से दिनों के हिसाब से चलता है। यहाँ उदाहरण के तौर पर 18% सालाना रखा है।
दरें और सीमाएँ सरकारी अधिसूचना से बदल सकती हैं, इसलिए यहाँ सारी संख्याएँ आप बदल सकते हैं। फ़ीस आम तौर पर CGST और SGST में आधी-आधी बँटती है।
कई बार अधिसूचना से माफ़ी या रियायत भी मिलती है; वह यहाँ नहीं जोड़ी गई है।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Late fee = min(days x fee per day, cap); nil returns use their own per-day rate and cap. Interest = tax due x annual rate x days / 365. Total = late fee + interest. Fee is shown split half CGST and half SGST. All rates and caps are inputs with example defaults.
देरी की फ़ीस = (दिन × रोज़ की फ़ीस) और सीमा में से कम; nil रिटर्न की अपनी रोज़ की दर और सीमा है। ब्याज = बकाया टैक्स × सालाना दर × दिन ÷ 365। कुल = फ़ीस + ब्याज। फ़ीस CGST और SGST में आधी-आधी दिखाई गई है। सारी दरें और सीमाएँ बदली जा सकती हैं (उदाहरण की संख्या)।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 14 Oct 2026Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Educational estimate. Late-fee rates, caps and the interest rate are editable examples, not confirmed current figures; waivers by notification are not included. Confirm with the GST portal or a professional. Not tax advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह शैक्षणिक अनुमान है। देरी की फ़ीस की दरें, सीमाएँ और ब्याज दर बदले जा सकने वाले उदाहरण हैं, पक्के मौजूदा आँकड़े नहीं; अधिसूचना से मिली माफ़ी शामिल नहीं है। GST पोर्टल या जानकार से पुष्टि करें। यह कर-सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
देरी का बोझ दो हिस्सों में बनता है: रोज़ के हिसाब की फ़ीस (जिसकी ऊपरी सीमा होती है) और बकाया टैक्स पर चलने वाला ब्याज।
फ़ीस सीमा पर रुक जाती है, पर ब्याज हर दिन बकाया रकम पर चलता है, इसलिए बड़ी रकम में देरी महँगी पड़ती है।
Nil रिटर्न की फ़ीस की दर और सीमा अलग रखी है, और उसमें बकाया टैक्स न होने से ब्याज शून्य है।
सारी दरें और सीमाएँ उदाहरण हैं। अधिसूचना से मिली माफ़ी या रियायत यहाँ नहीं जोड़ी गई।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
सुरेश: 20 दिन की देरी
सुरेश की दुकान का ₹1,50,000 GST 20 दिन देर से चुकाया गया। (उदाहरण: फ़ीस ₹50 प्रति दिन, सीमा ₹5,000, ब्याज 18%)
देरी की फ़ीस
₹1,000
CGST / SGST हिस्सा
₹500 / ₹500
ब्याज
₹1,479
कुल
₹2,479
सिर्फ़ 20 दिन में ₹2,479 अतिरिक्त गए। जितनी बड़ी बकाया रकम, ब्याज उतना भारी।
नीलम: nil रिटर्न में देरी
नीलम का कोई टैक्स देय नहीं था, फिर भी रिटर्न 40 दिन देर से भरा। (उदाहरण: फ़ीस ₹20 प्रति दिन, सीमा ₹500)
दिन × रोज़ की फ़ीस
40 × ₹20 = ₹800
सीमा लगने पर फ़ीस
₹500
ब्याज
₹0
कुल
₹500
Nil रिटर्न में भी फ़ीस लगती है, भले ही वह छोटी हो और सीमा पर रुक जाए।
इम्तियाज़: बड़ी रकम, लंबी देरी
इम्तियाज़ का ₹5,00,000 का GST 90 दिन देर से चुकाया गया।
देरी की फ़ीस (सीमा से नीचे)
₹4,500
ब्याज
₹22,192
रोज़ का ब्याज
लगभग ₹247
कुल
₹26,692
यहाँ फ़ीस छोटी और ब्याज बड़ा है। ब्याज रोकने का सबसे अच्छा तरीक़ा है जल्दी भुगतान करना।
सुरेश के मामले में देरी बढ़ने का असर (₹1,50,000 बकाया)
सुरेश के मामले में देरी बढ़ने का असर (₹1,50,000 बकाया)
देरी
फ़ीस
ब्याज
कुल
7 दिन
₹350
₹518
₹868
15 दिन
₹750
₹1,110
₹1,860
30 दिन
₹1,500
₹2,219
₹3,719
60 दिन
₹3,000
₹4,438
₹7,438
90 दिन
₹4,500
₹6,658
₹11,158
फ़ीस ₹50 प्रति दिन (सीमा ₹5,000) और ब्याज 18% सालाना के उदाहरण पर आधारित।
बकाया रकम के हिसाब से ब्याज (18% सालाना उदाहरण)
बकाया रकम के हिसाब से ब्याज (18% सालाना उदाहरण)
बकाया GST
रोज़ का ब्याज (≈)
30 दिन का ब्याज (≈)
₹50,000
₹25
₹740
₹1,00,000
₹49
₹1,479
₹5,00,000
₹247
₹7,397
₹10,00,000
₹493
₹14,795
ब्याज = बकाया × दर × दिन ÷ 365।
त्वरित संदर्भ: देरी का हिसाब
त्वरित संदर्भ: देरी का हिसाब
देरी की फ़ीस
दिन × रोज़ की फ़ीस, ऊपरी सीमा तक
Nil रिटर्न
अपनी रोज़ की दर और सीमा
ब्याज
बकाया टैक्स × सालाना दर × दिन ÷ 365
फ़ीस का बँटवारा
CGST और SGST में आधी-आधी
दिन कहाँ से गिनें
नियत तारीख़ के अगले दिन से भुगतान की तारीख़ तक
सीमा क्यों बदलती है
रिटर्न के प्रकार और टर्नओवर के हिसाब से
रियायत
अधिसूचना से मिल सकती है, यहाँ शामिल नहीं
इस पेज में क्या नहीं
ग़लत ITC लेने पर अलग ब्याज, जुर्माना और असली रिटर्न की जाँच।
GST Late Fee & Interest Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
GST में हर रिटर्न और हर भुगतान की एक नियत तारीख़ होती है। छोटे कारोबारी, दुकानदार और फ्रीलांसर अक्सर किसी महीने काम की भागदौड़ में तारीख़ चूक जाते हैं, और फिर सवाल उठता है: अब कितना जुर्माना लगेगा? असल में देरी की क़ीमत दो अलग हिस्सों से मिलकर बनती है। पहला है देरी की फ़ीस (late fee), जो रिटर्न देर से भरने पर हर दिन के हिसाब से बढ़ती है और एक ऊपरी सीमा पर रुक जाती है। दूसरा है ब्याज, जो उस टैक्स की रकम पर चलता है जो आपने समय पर जमा नहीं किया। GST Late Fee & Interest Calculator इन दोनों को अलग-अलग निकालकर जोड़ देता है।
आप बताते हैं कि रिटर्न nil है या नहीं, देर से चुकाया या बकाया GST कितना है, देरी के कितने दिन हुए, सामान्य रिटर्न की रोज़ की फ़ीस और ऊपरी सीमा, nil रिटर्न की रोज़ की फ़ीस और ऊपरी सीमा, और ब्याज की सालाना दर। calculator देरी की कुल क़ीमत, उसमें फ़ीस और ब्याज का हिस्सा, फ़ीस का CGST और SGST में बँटवारा, और रोज़ बढ़ने वाला ब्याज बताता है। नीचे की सारणी में 7, 15, 30, 60 और 90 दिन की देरी पर यही संख्याएँ दिखती हैं, ताकि आप देख सकें कि हर बीतता हफ़्ता कितना महँगा पड़ता है।
यहाँ सारी दरें और सीमाएँ उदाहरण के तौर पर पहले से भरी हैं और आप उन्हें बदल सकते हैं। कारण साफ़ है: ये अधिसूचना से बदल सकती हैं, कभी-कभी माफ़ी या रियायत भी मिलती है, और रिटर्न के प्रकार तथा टर्नओवर के हिसाब से सीमा अलग हो सकती है। पेज किसी चालू दर का दावा नहीं करता।
किसके काम का है
वे छोटे दुकानदार और व्यापारी, जो GSTR-1 या GSTR-3B देर से भरने वाले हैं और पहले से अंदाज़ा चाहते हैं कि भरते समय कितना अतिरिक्त देना होगा।
वे फ्रीलांसर और सेवा देने वाले, जिन्होंने कुछ महीनों का रिटर्न छोड़ दिया है और जानना चाहते हैं कि अब कितनी रकम का बोझ है।
अकाउंटेंट और बहीखाता सँभालने वाले लोग, जो ग्राहक को समझाना चाहते हैं कि देरी करना कितना महँगा पड़ता है।
वे लोग, जिनके पास nil रिटर्न है और जो जानना चाहते हैं कि बिना बिक्री वाले महीने की देरी भी क्यों मायने रखती है।
नए कारोबारी, जो अनुपालन-कैलेंडर बना रहे हैं और देरी की लागत को अपने बजट में रखना चाहते हैं।
अगर आपके पास अभी कोई देरी नहीं हुई है, तब भी पेज काम का है। उससे समझ आता है कि समय पर रिटर्न भरना क्यों सस्ता सौदा है।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर आठ इनपुट हैं।
यह nil रिटर्न है (चालू/बंद): nil रिटर्न का मतलब कोई टैक्स देय नहीं। इसे चालू करने पर nil की अलग रोज़ की फ़ीस और सीमा लगती है, और ब्याज शून्य रहता है।
देर से चुकाया / बकाया GST (₹): जिस टैक्स का भुगतान देर से हुआ या अभी बाकी है। शुरुआती मान ₹1,50,000।
देरी के दिन: 1 से 365। शुरुआती मान 20। यह नियत तारीख़ के बाद से गिने गए दिन हैं।
सामान्य रिटर्न: रोज़ की फ़ीस (₹): शुरुआती मान ₹50, जो उदाहरण है।
सामान्य रिटर्न: फ़ीस की ऊपरी सीमा (₹): शुरुआती मान ₹5,000, जो उदाहरण है। टर्नओवर के हिसाब से अलग हो सकती है।
Nil रिटर्न: रोज़ की फ़ीस (₹): शुरुआती मान ₹20।
Nil रिटर्न: फ़ीस की ऊपरी सीमा (₹): शुरुआती मान ₹500।
ब्याज दर (% सालाना): शुरुआती मान 18%, जो उदाहरण है। अधिसूचित दर से मिलाइए।
सुझाव: रोज़ की फ़ीस और सीमा अपने रिटर्न के प्रकार और टर्नओवर के हिसाब से GST पोर्टल की ताज़ा अधिसूचना देखकर बदल दीजिए। इसी से पेज का नतीजा आपके मामले का बनता है।
कुछ भी सहेजा नहीं जाता। आपकी बकाया रकम या दिन ब्राउज़र के बाहर कहीं नहीं जाते।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर देरी की कुल क़ीमत (अनुमान) दिखती है, और उसके नीचे "फ़ीस ₹… + ब्याज ₹…"। फिर छह पंक्तियाँ आती हैं।
देरी की फ़ीस: दिनों के हिसाब की फ़ीस, जो सीमा पर रुक चुकी हो सकती है।
CGST वाला हिस्सा और SGST वाला हिस्सा: फ़ीस के दो बराबर हिस्से, क्योंकि आम तौर पर यह आधी-आधी बँटती है।
ब्याज: बकाया टैक्स पर नियत तारीख़ से भुगतान तक के दिनों का।
रोज़ का ब्याज: बकाया टैक्स पर एक दिन का ब्याज। यह संख्या दिखाती है कि हर बीतता दिन कितना जोड़ रहा है।
देरी के दिन।
नीचे की रंगीन टिप्पणी दो स्थितियों में से एक दिखाती है। अगर फ़ीस अपनी ऊपरी सीमा पर पहुँच चुकी है, तो नीला संदेश बताता है कि फ़ीस आगे नहीं बढ़ेगी, पर ब्याज चलता रहेगा। अगर सीमा अभी नहीं आई, तो पीला संदेश याद दिलाता है कि हर दिन फ़ीस और ब्याज दोनों बढ़ते हैं।
फिर सारणी है: 7, 15, 30, 60 और 90 दिन की देरी पर फ़ीस, ब्याज और कुल। और बार चार्ट में फ़ीस, ब्याज और कुल की तुलना।
पढ़ने का तरीक़ा: सारणी में फ़ीस का कॉलम एक जगह जाकर रुक जाता है, पर ब्याज का कॉलम बढ़ता ही रहता है। इसका मतलब है कि सीमा लगने के बाद भी देरी सस्ती नहीं होती।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
सबसे पहले ब्याज और फ़ीस को अलग समझिए। फ़ीस रिटर्न न भरने की सज़ा है और सीमा पर रुकती है। ब्याज टैक्स न चुकाने की क़ीमत है और चलता रहता है।
टैक्स पहले चुका दीजिए। अगर रिटर्न भरने में समय लगना है, तो भी टैक्स की रकम जल्दी जमा करने से ब्याज रुक जाता है। रोज़ का ब्याज वाली पंक्ति इसी फ़ैसले की क़ीमत बताती है।
nil रिटर्न को हल्के में मत लीजिए। बिक्री न हो तब भी रिटर्न भरना होता है। देरी की फ़ीस की सीमा छोटी है, पर बार-बार छूटे तो जुड़ती जाती है।
अपनी दरें डालिए। पेज की दरें उदाहरण हैं। ताज़ा अधिसूचना से रोज़ की फ़ीस, सीमा और ब्याज दर मिलाकर बदल दीजिए।
माफ़ी की ख़बर पर नज़र रखिए। कभी-कभी सरकार अधिसूचना से फ़ीस में रियायत देती है। उस हालत में पेज की संख्या से कम देना पड़ सकता है।
कई महीनों का हिसाब जोड़कर कीजिए। हर छूटे महीने के लिए अलग-अलग दिन और रकम डालकर नतीजे जोड़िए।
कैलेंडर में तारीख़ें डालिए। समय पर रिटर्न भरने की आदत इस पेज की सारी संख्याओं को शून्य बना देती है।
उदाहरण: एक दुकानदार सोचता है "अभी बिक्री कम है, रिटर्न बाद में भर लूँगा।" पेज में देरी 60 दिन डालने पर ऊपर की सारणी के हिसाब से ₹7,438 निकलता है, जो एक महीने के किराने के ख़र्च से कम नहीं।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"देरी की फ़ीस ही पूरी सज़ा है।" नहीं। बकाया टैक्स पर ब्याज अलग से लगता है। ऊपर के उदाहरण में ब्याज फ़ीस से भी बड़ा था।
"फ़ीस सीमा पर पहुँच गई तो अब चिंता नहीं।" फ़ीस रुक जाती है, पर ब्याज बकाया टैक्स पर चलता रहता है।
"Nil रिटर्न में देरी पर भी ब्याज लगेगा।" ब्याज बकाया टैक्स पर चलता है। nil रिटर्न में टैक्स नहीं होता, इसलिए पेज में ब्याज शून्य है। फ़ीस फिर भी लगती है।
"सारी दरें हर साल एक-सी रहती हैं।" दरें और सीमाएँ अधिसूचना से बदल सकती हैं। इसीलिए पेज में सब बदलने योग्य हैं।
"फ़ीस CGST की है या SGST की, यह फ़र्क नहीं पड़ता।" आम तौर पर फ़ीस आधी-आधी बँटती है, इसलिए पेज दोनों हिस्से अलग दिखाता है। कुल रकम वही रहती है।
"देरी के दिन रिटर्न के महीने से गिनें।" दिन नियत तारीख़ के बाद से गिने जाते हैं, महीने की शुरुआत से नहीं।
"ब्याज चक्रवृद्धि होता है।" इस पेज में साधारण ब्याज गिना गया है। असली नियम अधिसूचना से देखिए।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
देरी की फ़ीस:
- सामान्य रिटर्न: कम(दिन × रोज़ की फ़ीस, ऊपरी सीमा)। - Nil रिटर्न: कम(दिन × nil की रोज़ की फ़ीस, nil की सीमा)।
ब्याज:
- सामान्य रिटर्न: बकाया GST × सालाना दर ÷ 100 × दिन ÷ 365। - Nil रिटर्न: शून्य, क्योंकि कोई टैक्स बकाया नहीं।
कुल क़ीमत = फ़ीस + ब्याज।
CGST/SGST का बँटवारा = फ़ीस ÷ 2 और फ़ीस ÷ 2।
रोज़ का ब्याज = बकाया GST × दर ÷ 100 ÷ 365।
सारणी: यही गणना 7, 15, 30, 60 और 90 दिन के लिए अलग-अलग दोहराई जाती है।
सीमा की जाँच: दिन × रोज़ की फ़ीस ≥ ऊपरी सीमा हो तो नीला संदेश दिखता है।
पेज की मान्यताएँ:
ब्याज साधारण (simple) है, दिन-गणना से, साल के 365 दिन मानकर।
फ़ीस हर दिन के हिसाब से एक सीधी रेखा में बढ़ती है और सीमा पर रुकती है।
अधिसूचना से मिली माफ़ी या रियायत शामिल नहीं।
एक ही रिटर्न की देरी का हिसाब है। कई रिटर्न बाकी हों तो हर एक अलग से डालना होगा।
एक पूरा उदाहरण
पेज के शुरुआती मान लेते हैं। एक व्यापारी का सामान्य रिटर्न 20 दिन देर से भरा गया। बकाया GST ₹1,50,000 था। रोज़ की फ़ीस ₹50, ऊपरी सीमा ₹5,000, ब्याज दर 18% (सब उदाहरण)।
फ़ीस अभी सीमा से काफ़ी दूर है, इसलिए पेज पीला संदेश दिखाएगा।
सारणी में यही व्यापारी, अलग-अलग देरी पर:
आम ग़लतियाँ और भ्रम
देरी
फ़ीस
ब्याज
कुल
7 दिन
₹350
₹518
₹868
15 दिन
₹750
₹1,110
₹1,860
30 दिन
₹1,500
₹2,219
₹3,719
60 दिन
₹3,000
₹4,438
₹7,438
90 दिन
₹4,500
₹6,658
₹11,158
कुछ और स्थितियाँ।
सीमा पर पहुँचना: फ़ीस ₹5,000 की सीमा 100 दिन में छूती है (100 × 50)। 120 दिन की देरी पर फ़ीस ₹5,000 पर रुक जाती है और ब्याज ₹8,877 हो जाता है, कुल ₹13,877। अब पेज नीला संदेश दिखाता है।
Nil रिटर्न: 40 दिन की देरी पर 40 × 20 = ₹800 बनता है, पर nil की सीमा ₹500 है। इसलिए कुल क़ीमत सिर्फ़ ₹500 (CGST ₹250 + SGST ₹250), ब्याज शून्य।
बड़ी बकाया रकम: बकाया ₹10,00,000 और देरी 45 दिन हो, तो फ़ीस ₹2,250 और ब्याज ₹22,192, कुल ₹24,442। यहाँ ब्याज फ़ीस से लगभग दस गुना है।
ऊँची ब्याज दर: दर 18% की जगह 24% डालिए, तो पहले उदाहरण में ब्याज ₹1,479 से बढ़कर ₹1,973 हो जाता है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
ताज़ा दर और सीमा का दावा नहीं। सब उदाहरण-मान हैं।
अधिसूचना से मिली माफ़ी या रियायत शामिल नहीं।
रिटर्न के सभी प्रकार नहीं। अलग रिटर्न की अलग फ़ीस हो सकती है, जिसे आपको खुद डालना होगा।
गलत भुगतान या ITC के ग़लत इस्तेमाल पर ब्याज नहीं। ऐसे मामलों की गणना अलग होती है।
कई रिटर्न का जोड़ नहीं। एक बार में एक ही रिटर्न की देरी का हिसाब है।
दंड या नोटिस नहीं। कर-अधिकारी की कार्रवाई, जाँच या दंड इस पेज का हिस्सा नहीं।
Cash ledger और ITC का समायोजन नहीं। बकाया रकम पर ब्याज कितना बनेगा, यह इस पर भी निर्भर हो सकता है कि भुगतान किस खाते से हुआ।
यह पेज शैक्षणिक है और कर-सलाह नहीं। आपका डाला डेटा कहीं सहेजा नहीं जाता। असली रकम के लिए GST पोर्टल या किसी जानकार से पुष्टि कीजिए।
इसके साथ और कौन-से calculator देखें
GST Calculator: किसी रकम पर GST जोड़ने या निकालने के लिए।