RCM का हिसाब

GST Reverse Charge (RCM) Calculator

Reverse charge में GST आपको चुकाना है। रकम और दर डालिए: देय GST, ITC और नक़दी का असर देखिए।

  • RCM में देय GST
  • CGST-SGST या IGST
  • ITC का असर
  • नक़दी कितनी फँसी
  • साल भर का हिसाब
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहRCM में पहले आपको चुकाना है, फिर ITC मिल सकता है; बीच में नक़दी फँसती है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

Reverse charge (RCM) क्या होता है?

  • सामान्यतः GST बेचने वाला जमा कराता है। Reverse charge में कुछ तय मामलों में (जैसे बिना पंजीकरण वाले आपूर्तिकर्ता से तय वस्तुएँ/सेवाएँ) देय GST ख़रीदार को स्वयं जमा कराना पड़ता है।
  • RCM का GST पहले नक़द खाते (cash ledger) से चुकाना होता है। उसके बाद, अगर आप ITC के पात्र हैं, तो वही रकम ITC के रूप में ले सकते हैं।
  • कौन-सी वस्तु या सेवा RCM में आती है और कौन-सी दर लगती है, यह अधिसूचना पर निर्भर है; इसलिए दर यहाँ आपको भरनी है।
  • ITC की पात्रता इस पर निर्भर है कि ख़रीद कारोबार के लिए है या नहीं और कोई रोक (blocked credit) तो नहीं है। यह calculator सिर्फ़ आपके चुने विकल्प के अनुसार गणित दिखाता है।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

RCM tax = taxable value x GST rate. Inside one state it splits equally into CGST and SGST; across states it is IGST. It is paid in cash first; if input credit is allowed, the same amount can be claimed as ITC afterwards, so net cost is zero, otherwise the full tax is a cost. Annual figures = per-occasion amount x number of occasions. The rate is an input.

RCM का कर = कर-योग्य मूल्य × GST दर। एक ही राज्य में यह CGST और SGST में बराबर बँटता है; दूसरे राज्य से हो तो IGST। पहले नक़द में चुकाया जाता है; ITC की अनुमति हो तो वही रकम बाद में ITC के रूप में ली जा सकती है और शुद्ध लागत शून्य रहती है, वरना पूरा कर लागत है। सालाना आँकड़े = एक बार की रकम × बार की गिनती। दर आपको भरनी है।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 14 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Educational estimate. The GST rate and whether the purchase falls under reverse charge or qualifies for input credit depend on notifications and your facts; confirm with the GST portal or a professional. Not tax advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह शैक्षणिक अनुमान है। GST दर, और ख़रीद RCM में आती है या नहीं तथा ITC मिलेगा या नहीं, अधिसूचना और आपके तथ्यों पर निर्भर है; GST पोर्टल या जानकार से पुष्टि करें। यह कर-सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • Reverse charge में बेचने वाले की जगह ख़रीदार को GST चुकाना होता है। रकम = कर-योग्य मूल्य × GST दर।
  • यह GST पहले नक़द खाते से चुकाना होता है; पात्र हों तो बाद में वही रकम ITC के रूप में मिल सकती है।
  • ITC न मिले तो पूरी रकम आपकी लागत बन जाती है, इसलिए पहले पात्रता जाँचें।
  • कौन-सी ख़रीद RCM में आती है और दर क्या है, यह अधिसूचना से तय होता है। दर यहाँ आप भरते हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

सरिता: हर महीने की ख़रीद, ITC मिलता है

सरिता हर महीने ₹1,00,000 की ऐसी सेवा लेती है जिस पर RCM लगता है, अपने ही राज्य से। (उदाहरण दर: 18%)

RCM का GST
₹18,000
CGST / SGST
₹9,000 / ₹9,000
ITC
₹18,000
शुद्ध लागत
₹0
साल में नक़द चुकाना (12 बार)
₹2,16,000

शुद्ध लागत शून्य है, पर हर महीने ₹18,000 पहले चुकाना और ITC बाद में मिलना नक़दी पर असर डालता है।

जावेद: दूसरे राज्य की ख़रीद, ITC नहीं

जावेद साल में 4 बार दूसरे राज्य से ₹50,000 की ख़रीद करता है जिस पर ITC नहीं मिलता। (उदाहरण दर: 18%)

एक बार का RCM GST (IGST)
₹9,000
ITC
₹0
शुद्ध लागत
₹9,000
साल में कुल लागत
₹36,000

ITC न मिलने पर RCM सीधा ख़र्च बन जाता है। ख़रीद की क़ीमत तय करते समय इसे जोड़ें।

कविता: कम दर वाली सेवा

कविता हर महीने ₹2,00,000 की सेवा लेती है जिस पर (उदाहरण के तौर पर) 5% दर मानी गई है, अपने राज्य से।

RCM का GST
₹10,000
CGST / SGST
₹5,000 / ₹5,000
ITC
₹10,000
साल में नक़द चुकाना (12 बार)
₹1,20,000

दर कम हो तो रकम छोटी रहती है। इसीलिए दर सही भरना सबसे ज़रूरी है; अपनी सेवा की दर अधिसूचना से देखें।

मूल्य बनाम RCM का GST (18% उदाहरण दर)

मूल्य बनाम RCM का GST (18% उदाहरण दर)
कर-योग्य मूल्यRCM का GSTCGSTSGST
₹50,000₹9,000₹4,500₹4,500
₹1,00,000₹18,000₹9,000₹9,000
₹2,00,000₹36,000₹18,000₹18,000
₹5,00,000₹90,000₹45,000₹45,000

दूसरे राज्य की आपूर्ति में पूरी रकम IGST होती है।

RCM में नक़दी का क्रम

RCM में नक़दी का क्रम
चरणक्या होता है
ख़रीदआपूर्तिकर्ता से सेवा / वस्तु मिली, बिल में GST नहीं
भुगतानआप GST नक़द खाते से चुकाते हैं
ITCपात्र हों तो चुकाई रकम ITC के रूप में मिलती है
असरनक़दी कुछ समय फँसी, शुद्ध लागत शून्य (ITC मिले तो)

तारीख़ और शर्तें रिटर्न के नियमों से तय होती हैं।

त्वरित संदर्भ: Reverse charge

त्वरित संदर्भ: Reverse charge
किसे चुकानाख़रीदार (RCM के मामलों में)
रकमकर-योग्य मूल्य × GST दर
एक राज्य मेंCGST + SGST बराबर
दूसरे राज्य सेIGST
चुकाने का खातानक़द खाता (cash ledger)
ITCपात्र हों तो बाद में मिल सकता है
दरवस्तु / सेवा की अधिसूचना के हिसाब से, आप भरते हैं
इस पेज में क्या नहींकौन-सी ख़रीद RCM में आती है इसकी जाँच, समय-सीमा, रिटर्न में दिखाने का तरीक़ा और ITC की रोकें।

GST Reverse Charge Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

आम तौर पर GST का नियम सीधा है: जो बेचता है, वही ग्राहक से GST वसूलता है और सरकार को जमा करता है। पर कुछ तय मामलों में यह उल्टा हो जाता है। वहाँ बेचने वाला GST नहीं वसूलता, और जमा करने की ज़िम्मेदारी ख़रीदार पर आ जाती है। इसे reverse charge mechanism, यानी RCM, कहते हैं। जिन कारोबारियों को पहली बार RCM की ख़रीद का सामना करना पड़ता है, उनके मन में तीन सवाल उठते हैं: मुझे कितना GST चुकाना है, वह रकम मुझे वापस कैसे मिलेगी, और इस बीच मेरी नक़दी पर क्या असर पड़ेगा? GST Reverse Charge Calculator इन्हीं तीनों का जवाब देता है।

आप ख़रीद का कर-योग्य मूल्य, GST दर, आपूर्ति अपने राज्य से है या दूसरे राज्य से, इस ख़रीद पर ITC (input tax credit) मिल सकता है या नहीं, और साल में ऐसी ख़रीद कितनी बार होती है, यह डालते हैं। calculator बताता है कि RCM का GST कितना बनेगा, वह CGST + SGST में कैसे बँटेगा या IGST होगा, बाद में कितना ITC मिलने का अनुमान है, शुद्ध लागत कितनी रही, और पूरे साल में आपको कुल कितना नक़द चुकाना पड़ेगा।

पेज की सबसे काम की सीख यह है कि ITC मिलने पर भी RCM "मुफ़्त" नहीं होता। GST पहले नक़द खाते से चुकाना पड़ता है, और ITC उसके बाद, रिटर्न की प्रक्रिया पूरी होने पर मिलता है। इस बीच की नक़दी थोड़े समय के लिए फँस जाती है। छोटे कारोबारी के लिए यही सबसे बड़ा असर है।

यह शैक्षणिक अनुमान है। कौन-सी वस्तु या सेवा RCM में आती है और कौन-सी दर लगती है, यह अधिसूचना पर निर्भर है, इसलिए दर आपको खुद भरनी होती है।

किसके काम का है

  • वे छोटे और मध्यम कारोबारी, जिन्हें ऐसे आपूर्तिकर्ता से ख़रीद करनी पड़ती है जो GST में पंजीकृत नहीं है और जिनकी वस्तु या सेवा RCM की सूची में आती है।
  • वे दुकानदार और कंपनियाँ, जो किराए पर दफ़्तर, वाहन या कोई सेवा लेते हैं और RCM की ज़िम्मेदारी का अंदाज़ा लगाना चाहते हैं।
  • बहीखाता और अनुपालन सँभालने वाले लोग, जो हर महीने का नक़दी-प्रवाह बनाते समय RCM की रकम जोड़ना चाहते हैं।
  • वे फ्रीलांसर और प्रोफ़ेशनल, जिन्हें पंजीकरण के बाद ऐसी ख़रीद मिलती है जिसमें GST उन्हें स्वयं जमा करना है।
  • वे विद्यार्थी और नए अकाउंटेंट, जिन्हें RCM की बुनियादी बात संख्याओं के साथ समझनी है।

अगर आपकी सारी ख़रीद पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से होती है और उनके बिल पर GST पहले से जुड़ा होता है, तो RCM आपके लिए शायद लागू नहीं होगा। पर यह पक्का करने के लिए अपने मामले में अधिसूचना देखनी पड़ती है।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर पाँच इनपुट हैं।

  • ख़रीद का कर-योग्य मूल्य (₹): GST जोड़ने से पहले की रकम। शुरुआती मान ₹1,00,000।
  • GST दर (%): शुरुआती मान 18%, जो उदाहरण है। अपनी वस्तु या सेवा पर लागू दर अधिसूचना से देखकर डालिए।
  • आपूर्ति कहाँ से: "अपने ही राज्य से (CGST + SGST)" या "दूसरे राज्य से (IGST)"। यह चुनाव सिर्फ़ यह तय करता है कि कर किस नाम से चुकाना है। कुल रकम वही रहती है।
  • इस ख़रीद पर ITC मिल सकता है (चालू/बंद): अगर ख़रीद आपके कारोबार के लिए है और कोई रोक नहीं है, तो चालू रखिए। निजी इस्तेमाल की ख़रीद या ऐसे ख़र्च, जिन पर क्रेडिट की रोक है, के लिए बंद कीजिए।
  • साल में कितनी बार ऐसी ख़रीद: 1 से 52। शुरुआती मान 12, यानी महीने में एक बार।
सुझाव: ITC वाला बटन सोच-समझकर चुनिए। पेज सिर्फ़ आपके चुने हुए विकल्प के हिसाब से गणित दिखाता है। वह यह नहीं जाँचता कि आपको क्रेडिट मिलेगा या नहीं।

कृपया ध्यान रखें कि "कर-योग्य मूल्य" वही रकम है जिस पर GST लगना है। इसमें GST शामिल करके मत डालिए।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर "RCM में आपको चुकाना है" दिखता है और उसके नीचे यह टूटकर: "CGST ₹… + SGST ₹…" या "IGST ₹…"। फिर सात पंक्तियाँ आती हैं।

  • कर-योग्य मूल्य: आपकी डाली रकम।
  • RCM का GST: मूल्य × दर।
  • CGST / SGST या IGST: राज्य के भीतर की आपूर्ति में CGST और SGST आधे-आधे, दूसरे राज्य की आपूर्ति में सारा IGST।
  • बाद में ITC मिलने का अनुमान: चालू होने पर चुकाई गई रकम के बराबर, वरना शून्य।
  • शुद्ध लागत: ITC मिलने पर शून्य, नहीं मिलने पर पूरा GST।
  • साल में नक़द चुकाना: एक बार का GST × बार की गिनती।

नीचे की रंगीन टिप्पणी दो स्थितियों के लिए अलग संदेश देती है। ITC मिलने पर नीला संदेश कहता है कि शुद्ध लागत शून्य है, पर GST पहले नक़द में जाता है और ITC बाद में मिलता है, इसलिए नक़दी थोड़े समय फँसती है। ITC न मिलने पर पीला संदेश कहता है कि पूरा GST आपकी लागत बन गया और साल भर में कितना होगा।

फिर एक सारणी है, जिसमें ख़रीद का मूल्य आधा, उतना ही और दोगुना करने पर RCM का GST, ITC और शुद्ध लागत दिखते हैं। साथ में एक बार चार्ट है: नक़द चुकाया, ITC और शुद्ध लागत।

पढ़ने का तरीक़ा: सबसे पहले "साल में नक़द चुकाना" देखिए। यह संख्या बताती है कि साल भर में नक़दी के रूप में कितनी रकम बाहर जाएगी। चाहे ITC पूरा मिल जाए, इसी रकम का इंतज़ाम पहले करना पड़ता है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • पहले जानिए कि ख़रीद RCM में आती है या नहीं। यह पेज इसका जवाब नहीं देता। अपनी वस्तु या सेवा के लिए GST पोर्टल की अधिसूचना या जानकार से पक्का कीजिए, फिर यहाँ संख्या डालिए।
  • दर अधिसूचना से डालिए। पेज की 18% सिर्फ़ उदाहरण है। हर वस्तु या सेवा की दर अलग हो सकती है।
  • साल का नक़द अपने बजट में रखिए। "साल में नक़द चुकाना" को 12 से भाग देकर महीने की ज़रूरत देखिए। ऊपर के उदाहरण में हर महीने ₹18,000।
  • ITC को भरोसे का नहीं, शर्तों का मामला समझिए। ख़रीद कारोबार के लिए हो, रिकॉर्ड पूरा हो और कोई रोक न हो, तभी क्रेडिट मिलता है। पेज के ITC वाले बटन को इसी सोच से चुनिए।
  • दोनों विकल्प चलाकर देखिए। ITC चालू और बंद करके देखिए कि सबसे बुरे हाल में लागत कितनी बैठेगी।
  • रकम बदलकर संवेदनशीलता देखिए। ख़रीद दोगुनी होने पर नक़द भी दोगुना जाता है। सारणी यही दिखाती है।
  • रिकॉर्ड व्यवस्थित रखिए। RCM की ख़रीद के बिल, भुगतान का सबूत और जमा किए GST की रसीद सँभालकर रखिए। ITC के लिए यही काग़ज़ काम आते हैं।
उदाहरण: एक छोटी फर्म हर महीने ₹40,000 के किराए पर RCM का GST ₹7,200 (18% पर) नक़द चुकाती है। साल भर में ₹86,400। पेज में मूल्य ₹40,000 और बार 12 डालकर यही संख्या मिल जाती है, और फिर फर्म तय कर सकती है कि इतनी नक़दी का इंतज़ाम कैसे हो।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "RCM में GST मुझे नहीं देना, आपूर्तिकर्ता देगा।" RCM का मतलब ही यह है कि जमा करने की ज़िम्मेदारी ख़रीदार की है। आपूर्तिकर्ता उस बिल पर GST नहीं जोड़ता।
  • "ITC मिलता है तो नुकसान शून्य है।" शुद्ध लागत शून्य होती है, पर नक़दी पहले जाती है और बाद में लौटती है। बीच का समय असली बोझ है।
  • "RCM का GST ITC के खाते से चुका दूँगा।" आम तौर पर RCM का कर नक़द खाते से चुकाना होता है। ITC उसके बाद लिया जाता है।
  • "ITC अपने-आप मिल जाता है।" नहीं। कर चुकाने के बाद भी पात्रता की शर्तें पूरी होनी चाहिए। निजी इस्तेमाल की ख़रीद पर क्रेडिट नहीं मिलता।
  • "दूसरे राज्य से ख़रीद पर कर ज़्यादा लगता है।" कुल रकम वही रहती है। फ़र्क बस इतना है कि वह CGST + SGST की जगह IGST कहलाती है।
  • "सारी वस्तुओं पर RCM लगता है।" नहीं। यह सिर्फ़ अधिसूचना में बताए तय मामलों में लागू होता है।
  • "कर-योग्य मूल्य में GST शामिल करके डालूँ।" नहीं। पेज GST जोड़ने से पहले की रकम माँगता है और उसी पर दर लगाता है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

गणना कुल पाँच क़दम की है।

  1. RCM का GST = कर-योग्य मूल्य × GST दर ÷ 100।
  2. बँटवारा:

- अपने राज्य में: CGST = GST ÷ 2 और SGST = GST ÷ 2। - दूसरे राज्य से: पूरा IGST।

  1. ITC (अनुमान) = RCM का GST, अगर ITC वाला विकल्प चालू है; वरना 0।
  2. शुद्ध लागत = RCM का GST − ITC। ITC मिलने पर यह 0 है, नहीं मिलने पर पूरा GST।
  3. साल का नक़द = RCM का GST × साल में बार की गिनती।

सारणी में यही गणना ख़रीद के आधे, उतने और दोगुने मूल्य पर दोहराई जाती है।

पेज की मान्यताएँ:

  • RCM का GST पहले नक़द खाते से चुकाया जाता है। ITC के खाते से RCM का कर चुकाने की अनुमति आम तौर पर नहीं मानी जाती।
  • ITC की पात्रता का फ़ैसला पेज नहीं करता। जो विकल्प आप चुनेंगे, वही मान लिया जाएगा।
  • ITC मिलने के समय की देरी का अलग हिसाब नहीं है। पेज केवल अंतिम नतीजा और साल भर का नक़द दिखाता है।
  • RCM किन वस्तुओं और सेवाओं पर लागू है, यह नियम पेज में नहीं है।
एक पूरा उदाहरण

पेज के शुरुआती मान लेते हैं। एक कारोबारी हर महीने ₹1,00,000 की एक सेवा किसी ऐसे आपूर्तिकर्ता से लेता है जो GST में पंजीकृत नहीं है, और वह सेवा RCM में आती है। अनुमानित दर 18% (उदाहरण), आपूर्ति अपने ही राज्य से, ITC मिल सकता है, साल में 12 बार।

  1. RCM का GST = 1,00,000 × 18% = ₹18,000।
  2. बँटवारा: CGST ₹9,000 + SGST ₹9,000।
  3. ITC (अनुमान) = ₹18,000।
  4. शुद्ध लागत = 18,000 − 18,000 = ₹0।
  5. साल का नक़द = 18,000 × 12 = ₹2,16,000।

अब देखिए कि ख़रीद की रकम बदलने पर क्या होता है, जैसा पेज की सारणी में दिखता है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम
मूल्यRCM का GSTITCशुद्ध लागत
₹50,000₹9,000₹9,000₹0
₹1,00,000₹18,000₹18,000₹0
₹2,00,000₹36,000₹36,000₹0

इस उदाहरण का सार: कारोबार की जेब से साल भर में ₹2,16,000 नक़द बाहर जाता है और बाद में उतना ही ITC के रूप में लौटता है। पर इन दो घटनाओं के बीच का फ़ासला कारोबारी की नक़दी पर बोझ बनता है।

कुछ और स्थितियाँ।

  • ITC न मिले: वही ख़रीद लेकिन ITC वाला बटन बंद। अब शुद्ध लागत ₹18,000 हर बार, और साल भर में लगभग ₹2,16,000 सीधी लागत। पेज पीला संदेश दिखाएगा।
  • दूसरे राज्य से: आपूर्ति दूसरे राज्य से हो तो ₹18,000 पूरा IGST होगा। CGST/SGST की पंक्ति में "—" दिखेगा। कुल रकम वही रहती है।
  • कम दर, कम बार: ₹2,50,000 की ख़रीद, 5% दर, साल में 4 बार। एक बार का GST ₹12,500 (CGST ₹6,250 + SGST ₹6,250), और साल का नक़द ₹50,000।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • RCM की सूची नहीं। पेज नहीं बताता कि कौन-सी वस्तु या सेवा RCM में आती है।
  • ITC की पात्रता की जाँच नहीं। आपके चुने विकल्प को मान लिया जाता है।
  • ITC मिलने की देरी और ब्याज नहीं। बीच के दिनों में नक़दी का ब्याज-ख़र्च या कारोबार पर असर पेज में नहीं गिना गया।
  • दर की पुष्टि नहीं। दर आपकी डाली संख्या है। पेज उसे जाँचता नहीं।
  • एक ही दर पर सारी ख़रीद। अलग-अलग दरों की कई ख़रीदें हों तो उन्हें अलग-अलग डालकर जोड़ना होगा।
  • अन्य शर्तें नहीं। समय-सीमा, इनवॉइस के नियम और अनुपालन के बाकी कदम इस पेज का हिस्सा नहीं।
  • आयकर पर असर नहीं। अगर ITC नहीं मिलता और GST लागत बनता है, तो उसका आयकर में ख़र्च की तरह इस्तेमाल अलग विषय है।

यह पेज शैक्षणिक है और कर-सलाह नहीं। आपका डाला डेटा कहीं सहेजा नहीं जाता। अपने मामले की पुष्टि GST पोर्टल या किसी योग्य जानकार से कीजिए।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • GST Calculator: किसी रकम पर GST जोड़ने या निकालने का सीधा हिसाब देखने के लिए।
  • Freelance GST Calculator: पंजीकरण की सीमा, वसूले GST और ITC का अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • GST Late Fee & Interest Calculator: GST या रिटर्न देर से भरने की क़ीमत देखने के लिए।
  • TDS on Rent Calculator: किराए के भुगतान पर बनने वाले TDS का अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • Invoice Generator: GST सहित इनवॉइस तैयार करने के लिए।

6 काम की बातें याद रखें

1
पहले जाँचें कि RCM लगता है या नहीं

हर ख़रीद पर RCM नहीं लगता। अधिसूचना या जानकार से पुष्टि करें, फिर यह calculator इस्तेमाल करें।

2
नक़दी का इंतज़ाम रखें

RCM का GST नक़द चुकाना होता है, इसलिए कर-चुकाने के दिन के लिए रकम अलग रखें।

3
बिल और रिकॉर्ड रखें

RCM की ख़रीद का रिकॉर्ड और भुगतान की रसीद रखें; ITC के लिए ज़रूरी होती है।

4
ITC की पात्रता जाँचें

निजी इस्तेमाल या रोक वाली ख़रीद पर ITC नहीं मिलता। ऐसे में पूरी रकम लागत है।

5
क़ीमत तय करते समय जोड़ें

अगर ITC न मिले तो RCM का GST अपनी लागत में जोड़कर आगे की क़ीमत तय करें।

6
नियम बदलते हैं

सूची और दरें बदल सकती हैं, इसलिए पुराने अनुभव पर न चलें; ताज़ा देखें।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

आम तौर पर नक़द खाते (cash ledger) से। ITC के खाते से RCM का कर चुकाने की अनुमति नहीं मानी जाती।

नहीं। कर चुकाने के बाद पात्रता की शर्तों पर वह लिया जा सकता है। ख़रीद निजी इस्तेमाल की हो तो नहीं मिलता।

अपनी वस्तु या सेवा की अधिसूचना या GST पोर्टल से। इसीलिए यहाँ दर आपको भरनी है।

सामान्य में बेचने वाला GST जमा करता है, RCM में ख़रीदार। बिल में अक्सर GST अलग से नहीं जोड़ा जाता।

आम तौर पर नहीं; पहले नक़द खाते से चुकाना होता है, फिर पात्र होने पर ITC लिया जा सकता है।

यह ख़रीद के प्रकार और ख़रीदार के पंजीकरण पर निर्भर है। अपने मामले की पुष्टि करें।

RCM की ख़रीद में ऐसे बिल पर स्थिति अलग हो सकती है। जानकार से पूछें; यह calculator ऐसे मामले नहीं जाँचता।

नहीं। यह सिर्फ़ रकम का गणित दिखाता है, पात्रता की जाँच नहीं करता।

नहीं। आप ITC वाला खाना ख़ुद चुनते हैं।

एक बार का GST × साल में बार की गिनती। मूल्य हर बार अलग हो तो औसत डालें।

नहीं। यह सिर्फ़ उदाहरण है; अपनी ख़रीद की दर भरें।

नहीं। देरी का असर देखने के लिए GST Late Fee & Interest calculator देखें।

नहीं, यह अनुमान है। असली रकम रिटर्न में दिखती है।

कुछ मामलों में हाँ। उसके नियम अलग हैं और यहाँ शामिल नहीं हैं।

नहीं।

आपूर्तिकर्ता का स्थान आपके राज्य में है तो CGST-SGST, दूसरे राज्य में है तो IGST।

क्योंकि पैसा पहले जाता है और ITC बाद में मिलता है; नक़दी का प्रवाह प्रभावित होता है।

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