मान लीजिए एक वरिष्ठ नागरिक के पास एक बैंक में FD है, जिस पर साल भर में ₹1,90,000 का ब्याज बना, और बचत खाते में ₹30,000 का। उनकी PAN बैंक में दर्ज है, कोई 15H नहीं भरा है, पुराना regime है और slab 10% है। (संख्याएँ सिर्फ़ उदाहरण हैं।)
- कुल ब्याज = 1,90,000 + 30,000 = ₹2,20,000।
- TDS की सीमा (वरिष्ठ, इस पेज के अनुसार) ₹1,00,000 है। कुल ब्याज उससे ज़्यादा है।
- TDS = 2,20,000 × 10% = ₹22,000।
- 80TTB की कटौती = कुल ब्याज और ₹50,000 में से कम = ₹50,000।
- कर-योग्य ब्याज = 2,20,000 − 50,000 = ₹1,70,000।
- टैक्स = 1,70,000 × 10% × 1.04 = ₹17,680।
- बाक़ी = 17,680 − 22,000 = −₹4,320, यानी लगभग ₹4,320 का रिफ़ंड बन सकता है।
अब एक दूसरी स्थिति देखिए। एक सामान्य नागरिक का FD ब्याज ₹60,000 और बचत ब्याज ₹8,000 है, कुल ₹68,000। यह सामान्य सीमा ₹50,000 से ऊपर है, इसलिए पेज की मान्यता पर TDS = 68,000 × 10% = ₹6,800। अगर उसकी कुल आय पर टैक्स असल में शून्य बनता हो (slab 0%), तो पेज 15G/15H का सुझाव दिखाएगा, क्योंकि पहले से फ़ॉर्म जमा करने पर TDS रुक सकता है। फ़ॉर्म भरे बिना कटे हुए TDS को ITR से वापस लेना पड़ता है, जिसमें कुछ समय लगता है।