निवेश से हर महीने आमदनी

SWP Calculator (Systematic Withdrawal Plan)

corpus से हर महीने तय पैसा निकालना (SWP) — कितने साल चलेगा, और कितना बचेगा। स्लाइडर से तुरंत देखें।

  • corpus कितने साल चलेगा
  • हर साल निकासी बढ़ाना
  • अंत में बचा बैलेंस
  • निकासी दर % का संकेत
  • बैलेंस का चार्ट
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहSWP में रकम बीच-बीच में निकलती है पर बाक़ी निवेश बढ़ता रहता है। निकासी बहुत ज़्यादा न रखें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

SWP (Systematic Withdrawal Plan) कैसे काम करता है?

SWP में आप एकमुश्त corpus निवेश रखकर उसमें से हर महीने तय रकम निकालते हैं, जबकि बची रकम पर रिटर्न मिलता रहता है। अगर निकासी रिटर्न से कम है तो corpus लंबे समय तक चलता है; ज़्यादा है तो जल्दी ख़त्म हो सकता है। यहाँ आप निकासी हर साल कुछ प्रतिशत बढ़ाने (महँगाई के लिए) का विकल्प भी देख सकते हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Every month the planned withdrawal is taken out first (capped at the balance left), then the remaining balance grows by i = annual return ÷ 12 ÷ 100. The withdrawal is raised by the yearly step % at the start of each new year. If the balance drops to about zero the page shows how long the corpus lasted; otherwise it shows the balance left. Withdrawal rate = monthly withdrawal × 12 ÷ starting corpus.

हर महीने पहले तय निकासी की जाती है (बची रकम से ज़्यादा नहीं), फिर बचा हुआ बैलेंस i = सालाना रिटर्न ÷ 12 ÷ 100 से बढ़ता है। हर नए साल की शुरुआत में निकासी सालाना बढ़ोतरी % से बढ़ा दी जाती है। अगर बैलेंस लगभग शून्य हो जाए तो पेज बताता है कि corpus कितने समय चला; वरना बचा हुआ बैलेंस दिखता है। निकासी दर = मासिक निकासी × 12 ÷ शुरुआती corpus।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Withdrawals from mutual funds can attract capital-gains tax and exit loads, which are not included, and actual returns vary from year to year. A fixed withdrawal can drain the corpus quickly in a market fall. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। म्यूचुअल फ़ंड से निकासी पर पूँजीगत-लाभ कर और exit load लग सकता है, जो इसमें शामिल नहीं है, और असली रिटर्न हर साल बदलता है। बाज़ार गिरने पर तय निकासी से corpus तेज़ी से घट सकता है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • SWP में corpus से हर महीने तय रकम निकलती है, और बचा हुआ बैलेंस माने हुए रिटर्न पर बढ़ता रहता है।
  • अगर निकासी की सालाना दर माने हुए रिटर्न से कम है तो corpus लंबा चल सकता है; ज़्यादा है तो घटता जाता है।
  • महँगाई के हिसाब से निकासी हर साल बढ़ानी हो तो "हर साल निकासी इतने % बढ़ाएँ" भरें, और देखें कि corpus कब ख़त्म होता है।
  • रिटर्न हर साल एक-सा माना गया है, जबकि असली बाज़ार में नहीं होता। कर और exit load भी शामिल नहीं हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

बलबीर: पेज की शुरुआती संख्याएँ

बलबीर के पास ₹50,00,000 का corpus है। वह हर महीने ₹30,000 निकालता है, निकासी स्थिर, रिटर्न 8% (उदाहरण), अवधि 20 साल।

कुल निकाला
₹72,00,000
20 साल बाद बचा बैलेंस
₹68,45,597
निकासी दर (पहला साल)
7.2% corpus का
corpus को जस का तस रखने के लिए ज़रूरी रिटर्न
7.2% सालाना (माना हुआ रिटर्न 8%)

निकासी दर रिटर्न से कम रही, इसलिए ₹72 लाख निकालने के बाद भी corpus बढ़कर ₹68 लाख बचा। यह तभी होगा जब 8% हर साल मिले।

बलबीर महँगाई के साथ निकासी बढ़ाए तो

वही corpus और 8% रिटर्न, पर बलबीर अपनी निकासी हर साल 5% बढ़ाता है (₹30,000 से शुरू)।

corpus कितना चला
18 साल 8 महीने
कुल निकाला
₹1,07,03,822
निकासी दर (पहला साल)
7.2% corpus का

ऊपर से स्थिर दिखने वाला 7.2% हर साल बढ़ती निकासी के साथ भारी पड़ जाता है। 20 साल पूरे होने से पहले ही corpus ख़त्म हो गया।

शबनम: बड़ी निकासी का जोखिम

शबनम उसी ₹50 लाख के corpus से ₹60,000 प्रति माह निकालती है, रिटर्न 8% (उदाहरण)।

निकासी दर (पहला साल)
14.4% corpus का
corpus कितना चला
10 साल 1 महीना
कुल निकाला
₹72,48,261

निकासी दर रिटर्न से बहुत ज़्यादा थी, इसलिए corpus 10 साल में सिमट गया। निकासी दर पहली चेतावनी का संकेत है।

₹1 करोड़ का corpus, 8% उदाहरण रिटर्न, 25 साल, स्थिर निकासी

₹1 करोड़ का corpus, 8% उदाहरण रिटर्न, 25 साल, स्थिर निकासी
मासिक निकासीसालाना निकासी दर25 साल के अंत में
₹30,0003.6%बचा ₹4,46,80,763
₹40,0004.8%बचा ₹3,51,07,097
₹50,0006.0%बचा ₹2,55,33,431
₹60,0007.2%बचा ₹1,59,59,765
₹70,0008.4%बचा ₹63,86,100
₹80,0009.6%22 साल 1 महीने में ख़त्म

जैसे ही निकासी दर रिटर्न (8%) के ऊपर निकलती है, corpus घटने लगता है।

₹50 लाख, ₹30,000 मासिक निकासी, 20 साल: रिटर्न के हिसाब से बचा बैलेंस

₹50 लाख, ₹30,000 मासिक निकासी, 20 साल: रिटर्न के हिसाब से बचा बैलेंस
माना हुआ रिटर्न20 साल बाद बैलेंस (₹)
6%26,20,489
8%68,45,597
10%1,36,69,461
12%2,44,88,331

रिटर्न में 2 अंक का फ़र्क़ भी बचे बैलेंस को दुगना-तिगुना कर देता है। इसलिए असली रिटर्न पर निर्भरता सबसे बड़ा जोखिम है।

त्वरित संदर्भ: SWP की गणना

त्वरित संदर्भ: SWP की गणना
हर महीने की प्रक्रियापहले निकासी (बचे बैलेंस से ज़्यादा नहीं), फिर बचा बैलेंस × (1 + रिटर्न ÷ 12 ÷ 100)
निकासी में वृद्धिहर नए साल की शुरुआत में निकासी × (1 + वृद्धि %)
निकासी दरमासिक निकासी × 12 ÷ शुरुआती corpus (पहले साल की दर)
रिटर्न से तुलनानिकासी दर रिटर्न से ऊपर हो तो पेज उसे लाल चेतावनी में दिखाता है
corpus ख़त्मबैलेंस ₹0.5 या उससे कम हो जाए तो पेज बताता है कि corpus कितना चला
बचा बैलेंसअवधि पूरी होने पर बचा बैलेंस, अगर corpus ख़त्म नहीं हुआ
किसके लिएजिन्हें मौजूदा बड़े corpus से नियमित आय चाहिए, जैसे रिटायरमेंट के बाद
इस पेज में क्या नहींपूँजीगत लाभ कर, exit load, बाज़ार का उतार-चढ़ाव, जीवन-अवधि का अनिश्चित होना

SWP Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

SWP यानी Systematic Withdrawal Plan, एक ऐसा तरीका है जिसमें आप एक बड़ी रकम (corpus) निवेश में रखते हैं और उसमें से हर महीने एक तय रकम निकालते हैं, जबकि बची हुई रकम पर रिटर्न मिलता रहता है। यह कुछ-कुछ पेंशन जैसा मासिक हाथ-खर्च बनाने का तरीका है, जिसे आम तौर पर म्यूचुअल फंड के साथ जोड़कर समझा जाता है। यह calculator एक ही सवाल पूछता है: "मेरे पास इतना corpus है, मैं हर महीने इतना निकालना चाहता हूँ, और रिटर्न इतना माना है। तो यह रकम कितने साल चलेगी, या तय अवधि के बाद कितनी बचेगी?"

पेज में पाँच स्लाइडर हैं और हर बदलाव पर नतीजा तुरंत बदलता है। जवाब दो में से एक रूप में आता है: या तो "इतने साल बाद इतना corpus बचा", या "आपका corpus इतने साल-महीने चलेगा" (यानी रकम बीच में ही खत्म हो गई)।

ध्यान दें: SWP में निकासी का मतलब सिर्फ़ ब्याज या लाभ निकालना नहीं है। अगर निकासी रिटर्न से ज़्यादा है, तो आप मूल रकम भी खा रहे हैं। यही बात इस calculator में सबसे ज़्यादा देखने लायक है।

किसके काम का है

  • रिटायर होने वाले लोग: जिन्हें मासिक खर्च के लिए रकम चाहिए और जानना है कि जमा पूँजी कितने साल साथ देगी।
  • कारोबार बेचकर या एकमुश्त रकम पाने वाले: जैसे दुकान या ज़मीन की बिक्री के बाद मिली रकम को हर महीने की आय में बदलने की योजना।
  • फ्रीलांसर और कलाकार: जो किसी साल की बड़ी कमाई को अगले खराब सालों में समान मासिक आमदनी की तरह बाँटना चाहते हैं।
  • जो FIRE जैसी योजना सोच रहे हैं: यानी जल्दी काम बंद करके निवेश पर चलना, और जानना चाहते हैं कि यह कितना टिकाऊ है।
  • विद्यार्थी या शोधकर्ता: जो समझना चाहते हैं कि निकासी दर और रिटर्न का आपसी रिश्ता क्या होता है।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

स्लाइडर इस तरह हैं:

  • शुरुआती corpus (₹): ₹1 लाख से ₹10 करोड़, ₹1 लाख के कदम से, शुरू में ₹50 लाख। यह वह रकम है जो आप आज निवेश में रखते हैं।
  • हर महीने निकासी (₹): ₹1,000 से ₹10 लाख, ₹1,000 के कदम से, शुरुआत में ₹30,000। यह पहले साल की मासिक निकासी है।
  • हर साल निकासी इतने % बढ़ाएँ: 0% से 10%, 0.5 के कदम से, शुरू में 0%। अगर आप महँगाई के साथ निकासी बढ़ाना चाहते हैं, तो यहाँ कोई प्रतिशत डालें। हर नए साल की शुरुआत में निकासी इसी प्रतिशत से बढ़ जाती है।
  • अनुमानित रिटर्न (% सालाना): 3% से 15%, 0.5 के कदम से, शुरू में 8%। यह आपका माना हुआ औसत है, गारंटी नहीं।
  • अवधि (साल): 1 से 40 साल, शुरू में 20।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

  1. मुख्य नतीजा: अगर corpus पूरी अवधि चलता है तो "इतने साल बाद बचा corpus" और साथ में कुल निकासी का सार। अगर बीच में खत्म हो जाए, तो लाल रंग में "आपका corpus इतना चलेगा" के साथ साल और महीने दिखते हैं।
  2. शुरुआती corpus: आपकी डाली हुई रकम।
  3. कुल निकासी: पूरी अवधि में निकाली गई कुल रकम (बैलेंस से ज़्यादा कभी नहीं निकलती)।
  4. निकासी दर (पहला साल): पहले साल की निकासी (मासिक × 12) को corpus से भाग देकर प्रतिशत। अगर यह प्रतिशत आपके माने हुए रिटर्न से ज़्यादा हो, तो वह संख्या लाल रंग में आती है। यह चेतावनी का संकेत है।
  5. corpus को जस का तस रखने के लिए ज़रूरी रिटर्न: यहाँ भी निकासी दर के बराबर प्रतिशत दिखता है। मतलब, अगर आप सालाना इतने प्रतिशत की दर से कमाएँ, तो पहले साल में corpus घटेगा नहीं।
  6. अंत में बैलेंस: अवधि के बाद बचा पैसा। corpus खत्म हो जाए तो यह शून्य और लाल रंग में दिखता है।
  7. बैलेंस का chart: समय के साथ corpus की लाइन। हरी लाइन का मतलब रकम चल रही है, लाल का मतलब खत्म हो रही है।

पढ़ने का आसान नियम: अगर निकासी दर आपके माने हुए रिटर्न से कम है, तो पहले साल में corpus बढ़ने की संभावना रहती है, और अगर ज़्यादा है तो घटेगा। पर निकासी बढ़ाने (step-up) का विकल्प चुनने पर तस्वीर बदल जाती है, इसलिए पूरा chart देखें।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

पहले निकासी दर देखें

नतीजे की पाँचवीं पंक्ति पर नज़र डालें। निकासी दर आपके माने हुए रिटर्न के आसपास या उससे नीचे रखने का इरादा हो, तो corpus के टिकने की संभावना बेहतर दिखती है। पर यह सिर्फ़ गणित है, असली गारंटी नहीं।

कम रिटर्न पर भी परखें

रिटर्न को 8% से 6% या 5% पर खिसकाकर देखें। अगर तब भी योजना कारगर लगे, तो वह ज़्यादा मज़बूत है। एक अच्छी योजना वह है जो आपके अनुमान गलत होने पर भी टिके।

Step-up का असर समझें

महँगाई के कारण आज की ₹25,000 की ज़रूरत कुछ सालों में ज़्यादा होगी। step-up को 0 से 4 या 5 पर ले जाकर देखें कि कितने साल घटते हैं। यह वही चीज़ है जो अक्सर लोग भूल जाते हैं।

अवधि को लंबा करके देखें

60 की उम्र में रिटायर होने वाले के लिए 25 से 30 साल की अवधि देखना सुरक्षित हो सकता है, क्योंकि जीवन-प्रत्याशा बढ़ी है। अवधि बढ़ाते ही दिखता है कि corpus कितना दबाव झेल पाता है।

निकासी की रकम को दो भागों में बाँटें

अनिवार्य खर्च (राशन, दवा, बिल) और वैकल्पिक खर्च (यात्रा, शौक) अलग करके दो बार calculator चलाएँ। अनिवार्य खर्च के लिए सुरक्षित योजना बनाएँ और बाकी ज़रूरत पड़ने पर।

इमरजेंसी रकम अलग रखें

बाज़ार गिरने पर भी तुरंत पैसा चाहिए पड़ सकता है। इसके लिए अलग इमरजेंसी फंड रखने के बारे में सोचा जा सकता है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • "रिटर्न का हिस्सा ही निकालूँगा" मान लेना: अगर निकासी रिटर्न से ज़्यादा है तो मूल रकम घटती है। निकासी दर वाली पंक्ति इसे दिखाती है।
  • औसत रिटर्न पर आँख मूँदकर भरोसा: बाज़ार के बुरे दौर की शुरुआत में बड़ी निकासी होने पर corpus औसत से जल्दी घट सकता है, भले ही लंबी अवधि का औसत रिटर्न ठीक रहे। इसे अक्सर sequence का जोखिम कहा जाता है, और यह calculator इसे नहीं दिखाता क्योंकि रिटर्न हर साल बराबर माना गया है।
  • महँगाई भूल जाना: step-up 0 रखने का मतलब है कि निकासी की क्रय-शक्ति हर साल घटती जाएगी।
  • टैक्स और exit load भूल जाना: म्यूचुअल फंड से निकासी पर पूँजीगत लाभ पर कर लग सकता है और कुछ फंड में exit load होता है। ये इस calculator में नहीं हैं।
  • SWP को FD के ब्याज जैसा सुरक्षित मानना: SWP का रिटर्न बाज़ार पर निर्भर होता है और घट-बढ़ सकता है।
  • सारा corpus एक ही फंड में रखना: जोखिम बाँटने के बारे में सोचना चाहिए। यह सलाह नहीं, सिर्फ़ विचार है।
  • शुरू में ही बहुत ऊँची निकासी रखना: पहले कुछ सालों की ज़्यादा निकासी का असर पूरे जीवन पर रहता है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

हर महीने का क्रम यह है:

  1. जिस महीने की निकासी तय है, वह पहले निकल जाती है (बची रकम से ज़्यादा नहीं)।
  2. बचे हुए बैलेंस पर मासिक दर लगती है: बैलेंस = बैलेंस × (1 + सालाना रिटर्न ÷ 12 ÷ 100)।
  3. हर नए साल की पहली निकासी से पहले निकासी की रकम (हर साल का) step-up प्रतिशत से बढ़ा दी जाती है।
  4. जब बैलेंस लगभग शून्य (आधे रुपये या उससे कम) हो जाता है, तो corpus खत्म माना जाता है और बीते हुए महीनों को साल-महीनों में दिखाया जाता है।

यानी निकासी महीने की शुरुआत में मानी गई है और रिटर्न सब महीनों में एक सा, सीधी रफ़्तार से मिलता है। असल म्यूचुअल फंड रिटर्न हर महीने अलग होता है।

एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए लखनऊ के एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक, श्री वर्मा, के पास रिटायरमेंट के बाद ₹40 लाख का corpus है। वे हर महीने ₹25,000 निकालना चाहते हैं, रिटर्न 8% मानते हैं, और 20 साल की योजना देखते हैं।

  • निकासी दर: 25,000 × 12 = ₹3,00,000 सालाना, यानी 40 लाख का 7.5%।
  • चूँकि 7.5% रिटर्न (8%) से कम है, corpus अच्छी तरह चलता है। 20 साल बाद अनुमानित बैलेंस लगभग ₹48.84 लाख बचता है, जबकि इस दौरान कुल निकासी ₹60 लाख होती है।

अब कुछ बदलाव आज़माते हैं:

  • रिटर्न 6% हो तो: 20 साल बाद बैलेंस लगभग ₹16.32 लाख।
  • रिटर्न 10% हो तो: बैलेंस लगभग ₹1.017 करोड़।
  • निकासी हर साल 5% बढ़ाएँ (महँगाई के साथ चलने के लिए), रिटर्न 8% ही: तब corpus लगभग 17 साल 9 महीने (213 महीने) में खत्म हो जाता है, और कुल निकासी लगभग ₹82.1 लाख होती है।
  • शुरुआती निकासी ₹35,000 (निकासी दर 10.5%), कोई step-up नहीं: यह भी लगभग 17 साल 9 महीने में खत्म होता है।
  • निकासी ₹20,000 (दर 6.0%): 20 साल बाद बैलेंस लगभग ₹78.48 लाख।
उदाहरण: ₹25,000 से ₹20,000 पर आने से 20 साल बाद का बैलेंस लगभग ₹48.8 लाख से बढ़कर ₹78.5 लाख हो गया, यानी हर महीने ₹5,000 की कमी ने अंत में बहुत बड़ा अंतर डाला। ये सब काल्पनिक अनुमान हैं और असली बाज़ार नतीजे अलग हो सकते हैं।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • रिटर्न हर महीने एक जैसा माना गया है, जबकि असली बाज़ार ऊपर-नीचे होता है।
  • कर, exit load, expense ratio और ब्रोकरेज शामिल नहीं हैं, जो असली रकम घटा देंगे। कर नियम बदलते रहते हैं, इसलिए Income Tax Department की ताज़ा जानकारी देखें।
  • महँगाई तभी जुड़ती है जब आप step-up चुनें, और वह भी आपके डाले प्रतिशत से।
  • यह नहीं बताता कि आपको कौन-सा फंड चुनना चाहिए।
  • अगर corpus खत्म होता है तो आगे का कोई हिसाब नहीं, कोई वैकल्पिक आय स्रोत नहीं।
  • स्वास्थ्य खर्च, अचानक ज़रूरतें या अतिरिक्त आय (जैसे किराया या पेंशन) शामिल नहीं हैं।
  • सभी नतीजे अनुमान हैं और सलाह नहीं।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Retirement Corpus Calculator: रिटायरमेंट के लिए कुल कितना corpus चाहिए, यह अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • Annuity Pension Calculator: एकमुश्त रकम से पेंशन जैसी आमदनी बनाने का दूसरा तरीका समझने के लिए।
  • FIRE Calculator: जल्दी आर्थिक आज़ादी की योजना परखने के लिए।
  • Inflation Calculator: भविष्य में खर्च कितना बढ़ेगा, यह जानने के लिए।
  • Capital Gains Tax Calculator: निकासी पर पूँजीगत लाभ कर के असर का अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • STP Calculator: एक फंड से दूसरे में धीरे-धीरे पैसा ले जाने की योजना समझने के लिए।

आख़िर में

SWP का मक़सद है कि जमा की हुई रकम आपकी ज़रूरतों के साथ कितने साल चले, इसकी एक साफ़ तस्वीर मिले। निकासी, रिटर्न और अवधि का संतुलन ही सब कुछ तय करता है। इस calculator पर अलग-अलग परिस्थितियाँ आज़माइए, पर असली निर्णय से पहले अपनी ज़रूरत और जोखिम को परखिए।

यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, यह निवेश, कर या किसी भी तरह की व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं है। म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन होते हैं।

6 काम की बातें याद रखें

1
निकासी दर को रिटर्न से नीचे रखें

पेज की "निकासी दर (पहला साल)" वाली पंक्ति लाल हो तो सतर्क हो जाएँ। इसका मतलब है कि बैलेंस को हर साल घटना ही है।

2
महँगाई के लिए निकासी बढ़ाना जोड़ें

आज की ₹30,000 की ज़रूरत 20 साल बाद कहीं बड़ी होगी। निकासी में कुछ प्रतिशत वृद्धि डालकर देखें कि corpus टिकता है या नहीं।

3
कम रिटर्न पर भी जाँचें

रिटर्न 8% की जगह 6% करके देखें। ऊपर की तालिका में बचा बैलेंस आधे से भी कम हो जाता है।

4
उतार-चढ़ाव के लिए बफ़र रखें

बाज़ार गिरे तो तय निकासी से corpus तेज़ी से घट सकता है। कई लोग कुछ महीनों की निकासी सुरक्षित जगह रखते हैं।

5
कर और exit load अलग जोड़ें

पेज में कर नहीं है। निकासी पर पूँजीगत लाभ कर लग सकता है, जिससे हाथ में कम रकम आएगी।

6
साल में एक बार जाँचें

हर साल बैलेंस, निकासी और बाज़ार की स्थिति देखकर निकासी में बदलाव करें। एक बार की योजना हमेशा सही नहीं रहती।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कोई एक पक्की संख्या नहीं, पर शुरुआती निकासी रिटर्न से कम रखने से corpus लंबा चलता है। बाज़ार गिरे तो निकासी घटाने का लचीलापन रखें।

निकासी में पूँजीगत-लाभ का हिस्सा कर-योग्य हो सकता है। नियम बदलते हैं, इसलिए कर-विशेषज्ञ से पूछें।

SIP में आप हर महीने निवेश करते हैं, SWP में हर महीने निवेश से पैसे निकालते हैं। एक संचय का और दूसरा नियमित आय का तरीक़ा है।

FD में ब्याज की दर तय होती है। SWP में निकासी तय होती है पर रिटर्न बदलता है, इसलिए बैलेंस बढ़ या घट सकता है। इस पेज का 8% सिर्फ़ उदाहरण है।

पेज में हर महीने पहले निकासी मानी गई है, फिर बचे बैलेंस पर रिटर्न। असल में निकासी की तारीख़ के हिसाब से थोड़ा फ़र्क़ आ सकता है।

मुख्य संख्या में "कितना चला" (साल और महीने) दिखाता है और चार्ट की रंगत बदल जाती है। अंत का बैलेंस शून्य गिना जाता है।

हाँ, इसी हिसाब में। पर रिटर्न असल में बदलता है, इसलिए कुछ अच्छे सालों में अपवाद हो सकते हैं। जोखिम इसलिए बड़ा है।

कोई एक सार्वभौमिक संख्या नहीं है। यह रिटर्न, महँगाई और अवधि पर निर्भर है। पेज की तालिकाओं से अपनी स्थिति देखें और भरोसे का अंतर रखें।

नहीं। महँगाई के लिए आपको "हर साल निकासी इतने % बढ़ाएँ" में ख़ुद वृद्धि डालनी होगी।

नहीं। म्यूचुअल फ़ंड से निकासी पर पूँजीगत लाभ कर और exit load लग सकते हैं, जो पेज में नहीं हैं। उन्हें Capital Gains Tax calculator से जाँचें।

नहीं। इसमें स्वास्थ्य के बड़े ख़र्च, जीवन-अवधि का अनिश्चित होना और अन्य आय के स्रोत नहीं हैं। यह रिटायरमेंट की योजना का एक हिस्सा भर समझाता है।

स्लाइडर 1 से 40 साल तक जाता है। लंबी अवधि में छोटी धारणाओं का असर बहुत बढ़ जाता है, इसलिए नतीजे को मोटा अंदाज़ा समझें।

स्लाइडर 3% से 15% के बीच है। इससे कम में corpus का तेज़ी से ख़त्म होना साफ़ है, पर 3% पर भी जाँच कर सकते हैं।

हाँ, असल में आप रोक या घटा सकते हैं। पेज स्थिर निकासी मानता है, इसलिए रोकने के असर के लिए कम साल डालकर दोबारा चलाएँ।

हाँ। अवधि पूरी होने पर जो बैलेंस बचता है, वह पेज दिखाता है। पर रिटर्न अनिश्चित है, इसलिए इसे पक्की विरासत न मानें।

दोनों के अपने जोखिम और फ़ायदे हैं। Annuity में पेंशन तय होती है पर कई विकल्पों में पूँजी वापस नहीं मिलती; SWP में लचीलापन है पर बाज़ार का जोखिम भी। Annuity Pension calculator से तुलना करें।

आपके काम के और कैलकुलेटर

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