हर महीने की बँधी बचत

Post Office RD Calculator

पोस्ट ऑफ़िस RD: हर महीने की किस्त, दर और अवधि डालकर मैच्योरिटी की रकम और ब्याज देखें।

  • मासिक किस्त और दर
  • 5 या 10 साल की अवधि
  • तिमाही चक्रवृद्धि
  • कुल जमा बनाम ब्याज
  • साल-दर-साल बैलेंस
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहकिस्त समय पर जमा करें, देरी पर जुर्माना लगता है। 5 साल की RD आगे 5 साल बढ़ाई जा सकती है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

पोस्ट ऑफ़िस RD कैसे काम करती है?

पोस्ट ऑफ़िस रेकरिंग डिपॉज़िट (RD) में आप हर महीने एक तय रकम जमा करते हैं। मानक अवधि 5 साल (60 महीने) है, जिसे चाहें तो 5 साल और बढ़ाया जा सकता है। ब्याज हर तिमाही जुड़ता है। महीने की किस्त समय पर न दें तो जुर्माना लगता है। न्यूनतम किस्त ₹100 है और उसके बाद ₹10 के गुणांक में रकम चुन सकते हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Month by month: the instalment is deposited at the start of each month, interest of (rate ÷ 12) on the balance is collected every month and added to the balance every 3 months (quarterly compounding). Maturity = balance after all instalments.

महीने-दर-महीने: किस्त हर महीने की शुरुआत में जमा होती है, बैलेंस पर (दर ÷ 12) ब्याज हर महीने गिना जाता है और हर 3 महीने में बैलेंस में जुड़ता है (तिमाही चक्रवृद्धि)। मैच्योरिटी = सभी किस्तों के बाद का बैलेंस।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 9 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: अक्टूबर–दिसंबर 2026 तिमाही की दरें

Estimate only, for learning — not advice. Post Office rates are set by the Government every quarter and the default rate here may be out of date; check the latest rate with India Post. Interest is taxable. This assumes every instalment is paid on time and the account runs to maturity. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। पोस्ट ऑफ़िस की दरें सरकार हर तिमाही तय करती है और यहाँ की डिफ़ॉल्ट दर पुरानी हो सकती है; ताज़ा दर India Post से जाँच लें। ब्याज कर-योग्य है। यह मानता है कि हर किस्त समय पर जमा होती है और खाता अवधि तक चलता है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • हर महीने की शुरुआत में किस्त जमा मानी जाती है, बैलेंस पर हर महीने (दर ÷ 12) ब्याज गिना जाता है और हर 3 महीने में वह बैलेंस में जुड़ता है।
  • RD में पूरी रकम शुरू से नहीं लगती। पहली किस्त सबसे ज़्यादा समय तक ब्याज कमाती है, आख़िरी किस्त सबसे कम, इसलिए कुल ब्याज बराबर रकम की FD से कम बनता है।
  • पेज की डिफ़ॉल्ट दर 6.7% एक उदाहरण है। सरकार दरें हर तिमाही तय करती है, ताज़ा दर India Post से देखकर डालें।
  • यह मानता है कि हर किस्त समय पर जमा हुई। देरी पर जुर्माना या खाता बंद होने जैसे नियम इसमें शामिल नहीं हैं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

गीता: शुरुआती संख्याएँ

गीता हर महीने ₹5,000 की RD 5 साल के लिए चलाती है। उदाहरण दर 6.7%।

हर महीने की किस्त
₹5,000
किस्तों की संख्या
60
कुल जमा
₹3,00,000
कुल ब्याज
लगभग ₹56,836
मैच्योरिटी पर रकम
लगभग ₹3,56,836

पाँच साल में ₹3 लाख की जमा पर लगभग ₹56,836 ब्याज बना। यानी मैच्योरिटी की रकम का लगभग 16% हिस्सा ब्याज है।

इमरान: छोटी किस्त, बड़ी आदत

इमरान हर महीने सिर्फ़ ₹1,000 की RD 5 साल तक डालता है। उदाहरण दर 6.7%।

हर महीने की किस्त
₹1,000
कुल जमा
₹60,000
कुल ब्याज
लगभग ₹11,367
मैच्योरिटी पर रकम
लगभग ₹71,367

छोटी रकम भी नियमित हो तो एक ठोस जमा बन जाती है। किस्त बढ़ाने पर रकम उसी अनुपात में बढ़ती है।

अंजलि: 10 साल का विस्तार

अंजलि हर महीने ₹10,000 की RD 5 साल बाद विस्तार लेकर कुल 10 साल चलाती है। उदाहरण दर 6.7%।

हर महीने की किस्त
₹10,000
किस्तों की संख्या
120
कुल जमा
₹12,00,000
कुल ब्याज
लगभग ₹5,08,581
10 साल बाद रकम
लगभग ₹17,08,581

लंबी अवधि में चक्रवृद्धि का असर बढ़ता है: ब्याज कुल जमा का लगभग 42% हो जाता है। (यहाँ पूरी अवधि एक ही दर मानी गई है।)

मासिक किस्त बनाम 5 साल का नतीजा (6.7% उदाहरण दर)

मासिक किस्त बनाम 5 साल का नतीजा (6.7% उदाहरण दर)
हर महीने की किस्तकुल जमाकुल ब्याजमैच्योरिटी की रकम
₹500₹30,000₹5,684₹35,684
₹1,000₹60,000₹11,367₹71,367
₹2,000₹1,20,000₹22,735₹1,42,735
₹5,000₹3,00,000₹56,836₹3,56,836
₹10,000₹6,00,000₹1,13,673₹7,13,673

दर 6.7% सिर्फ़ उदाहरण है। हर किस्त समय पर जमा होने की मान्यता है।

₹5,000 की RD, 5 साल: दर बदलने पर

₹5,000 की RD, 5 साल: दर बदलने पर
सालाना दरकुल ब्याजमैच्योरिटी की रकम
5.5%₹45,759₹3,45,759
6.0%₹50,324₹3,50,324
6.7%₹56,836₹3,56,836
7.0%₹59,672₹3,59,672
7.5%₹64,458₹3,64,458

दर में 1 प्रतिशत अंक का फ़र्क़ पाँच साल में लगभग ₹9,000 से ₹10,000 का अंतर बनाता है। जमा के समय की दर पक्की कर लें।

त्वरित संदर्भ: पोस्ट ऑफ़िस RD

त्वरित संदर्भ: पोस्ट ऑफ़िस RD
यह क्या हैडाकघर की नियमित मासिक जमा योजना; हर महीने तय रकम जमा होती है।
इस पेज की गणनाहर महीने की शुरुआत में किस्त, मासिक (दर ÷ 12) ब्याज, हर 3 महीने में बैलेंस में जुड़ना
कुल जमाकिस्त × महीने
कुल ब्याजमैच्योरिटी की रकम − कुल जमा
अवधि के विकल्प5 साल (मानक) या 10 साल (5 साल का विस्तार)
दरपेज की 6.7% उदाहरण दर है; सरकार तिमाही बदल सकती है
समय पर किस्तचूक पर जुर्माना या खाता बंद होने के नियम होते हैं, जिन्हें यह पेज नहीं गिनता
इस पेज में क्या नहींकर, समय से पहले बंद करने की शर्तें, ऋण सुविधा और देरी का जुर्माना।

Post Office RD Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

हर किसी के पास एकमुश्त बड़ी रकम नहीं होती, पर हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाना ज़्यादातर लोग कर सकते हैं। पोस्ट ऑफ़िस रेकरिंग डिपॉज़िट, यानी RD, ठीक इसी के लिए है। इसमें आप हर महीने एक तय रकम जमा करते हैं, मानक अवधि 5 साल (60 महीने) की होती है, और अवधि पूरी होने पर आपकी सारी किस्तें ब्याज सहित एक साथ मिलती हैं। यह calculator बताता है कि आपकी मासिक किस्त पर मैच्योरिटी की रकम कितनी बनेगी।

आप हर महीने की किस्त, सालाना ब्याज दर और अवधि डालते हैं। calculator महीने-दर-महीने खाता चलाता है, ब्याज हर तिमाही जमा में जोड़ता है, और अंत में कुल जमा, कुल ब्याज, मैच्योरिटी रकम तथा किस्तों की संख्या दिखाता है। साथ में साल-दर-साल तालिका और चार्ट भी होते हैं।

ध्यान दें: इस पेज की डिफ़ॉल्ट दर एक खास तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2026) की मानी हुई है और पुरानी हो सकती है। पोस्ट ऑफ़िस की दरें सरकार हर तिमाही तय करती है, इसलिए निवेश से पहले India Post से ताज़ा दर पक्की करें।

किसके काम का है

  • कम और नियमित आय वाले लोग, जैसे घरेलू सहायक, ड्राइवर, कारीगर या छोटे दुकानदार, जो महीने में ₹500 या ₹1,000 भी निकाल सकें।
  • माता-पिता, जो बच्चे की कॉलेज फीस या किताबों के लिए पाँच साल की छोटी योजना बनाना चाहते हैं।
  • बचत की आदत डालने वाले युवा, जिन्हें अपनी पहली तनख्वाह से हर महीने कुछ अलग रखना है।
  • किसी तय अवधि के बाद बड़ा ख़र्च करने वाले लोग, जैसे दो पहिया वाहन, घर की मरम्मत या त्योहार का ख़र्च।
  • गाँव और कस्बों के लोग, जिनके लिए डाकघर में जाना बैंक से आसान है।
  • वे लोग जो बैंक RD और डाकघर RD की तुलना करना चाहते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर तीन फ़ील्ड हैं।

  1. हर महीने की किस्त (₹): ₹100 से ₹1,00,000 तक, ₹100 के कदम पर, शुरुआती मान ₹5,000। वह रकम डालें जो आप सचमुच हर महीने बिना तनाव के जमा कर सकते हैं। असली योजना में किस्त की न्यूनतम सीमा और गुणांक के अपने नियम हैं, जो डाकघर से पूछ लें।
  2. ब्याज दर (% सालाना): 4% से 10% तक, 0.05 के कदम पर, शुरुआती मान 6.7%। यह इस calculator में मानी हुई डिफ़ॉल्ट दर है। ताज़ा दर के लिए India Post देखें। चाहें तो इसे ऊपर-नीचे करके "क्या होगा" भी देख सकते हैं।
  3. अवधि: दो विकल्प, 5 साल (मानक) और 10 साल (5 साल का विस्तार)। 10 साल वाला विकल्प मानता है कि आप 5 साल पूरे होने पर खाता बढ़ाकर चलाते रहेंगे, और पूरे 120 महीने की किस्तें चलेंगी।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

मैच्योरिटी पर रकम

ऊपर का बड़ा आँकड़ा, और उसके नीचे लिखा आता है कि कितने साल, हर महीने कितनी किस्त और किस दर पर।

नीचे की पंक्तियाँ

  • कुल जमा: आपकी सारी किस्तों का जोड़।
  • कुल ब्याज: मैच्योरिटी रकम घटा कुल जमा।
  • किस्तों की संख्या: जैसे 5 साल पर 60 और 10 साल पर 120।
  • ध्यान दें कि इस पेज पर "असली सालाना दर" की अलग पंक्ति नहीं है। मोटा अंदाज़ा लेना हो तो कुल जमा और कुल ब्याज का अनुपात देखें।
  • डिफ़ॉल्ट दर किस तिमाही की: बताता है कि दर किस तिमाही की मानी गई है।

Pie chart, तालिका और रेखा-चार्ट

Pie chart में कुल जमा और ब्याज के दो हिस्से दिखते हैं। तालिका में हर साल की जमा, उस साल का ब्याज और साल के अंत का बैलेंस है। इसमें आप देखेंगे कि पहले साल का ब्याज सबसे कम और बाद के सालों का ज़्यादा है, क्योंकि बैलेंस बढ़ता जाता है। रेखा-चार्ट में बैलेंस धीरे-धीरे ऊपर उठता है, और अवधि बढ़ने पर उसका झुकाव तेज़ हो जाता है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

किस्त वह चुनें जो हर महीने टिक सके

पहले अपने बजट में देखें कि महीने के बाद कितना बचता है। उतनी ही किस्त चुनें जो मुश्किल समय में भी चल सके। ऊँची किस्त चुनकर बीच में छोड़ देना, छोटी किस्त पर टिके रहने से बदतर है। बजट देखने के लिए Budget Calculator खोल सकते हैं।

लक्ष्य से उलटा हिसाब लगाएँ

मान लीजिए आपको 5 साल बाद लगभग ₹4 लाख चाहिए। किस्त का स्लाइडर बदलकर देखें, ₹5,000, ₹5,500, ₹6,000, और जब मैच्योरिटी आपके लक्ष्य के क़रीब आ जाए, तब वही किस्त तय करें।

अवधि की तुलना

5 साल और 10 साल की अवधि पर वही किस्त चलाकर देखें। दस साल में जमा दोगुनी होती है, पर ब्याज का हिस्सा बढ़ जाता है। फिर सोचें कि क्या आप इतने लंबे समय तक किस्त निभा पाएँगे।

दर के दो परिदृश्य

दर को ताज़ा दर से कुछ कम पर भी चलाएँ, ताकि आपका लक्ष्य सिर्फ़ ऊँची दर पर निर्भर न रहे।

दूसरी योजनाओं से तुलना

वही मासिक रकम Recurring Deposit Calculator में (बैंक RD) और SIP Calculator में डालकर देखें। पर याद रखें कि SIP में रिटर्न तय नहीं होता और जोखिम अलग है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • ग़लती: किस्त भूल जाना। असली योजना में देरी पर शुल्क लग सकता है और लगातार किस्तें न देने पर खाते के नियम बदल सकते हैं। यह calculator मानता है कि हर किस्त समय पर जमा होती है।
  • भ्रम: "RD में मैच्योरिटी का मतलब सारा पैसा मेरा मुनाफ़ा है।" रकम में आपकी अपनी जमा का बड़ा हिस्सा है।
  • ग़लती: मैच्योरिटी रकम को अवधि पूरी होने से पहले पक्का मान लेना। समय से पहले खाता बंद करने के नियम अलग होते हैं।
  • भ्रम: "दर हर किस्त के लिए अलग लगती है।" यहाँ एक ही दर पूरी अवधि के लिए मानी गई है।
  • ग़लती: ब्याज को कर-मुक्त समझना। ब्याज आपकी आय का हिस्सा है और कर-योग्य हो सकता है। अपनी स्थिति के अनुसार नियम देखें।
  • ग़लती: 10 साल की अवधि को अपने-आप मिलने वाला समझना। पेज इसे "5 साल का विस्तार" बताता है, यानी इसके लिए नियम और प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
  • भ्रम: "ज़्यादा किस्त यानी हमेशा बेहतर।" अगर वह किस्त आपके आपातकालीन बचाव को खा जाए, तो यह बुद्धिमानी नहीं है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

calculator हर महीने के लिए यह करता है:

  1. महीने की शुरुआत में किस्त बैलेंस में जुड़ती है।
  2. उस महीने का ब्याज = बैलेंस गुना (सालाना दर भाग 12), भाग 100। यह ब्याज अभी बैलेंस में नहीं मिलता, अलग जमा होता है।
  3. हर तीन महीने के अंत में जमा हुआ ब्याज बैलेंस में जोड़ दिया जाता है। इसके बाद ब्याज इस बढ़े हुए बैलेंस पर बनता है। यही तिमाही चक्रवृद्धि है।
  4. अंतिम महीने के बाद का बैलेंस मैच्योरिटी रकम है।

मान्यताएँ:

  • हर किस्त समय पर, महीने की शुरुआत में जमा होती है। देरी पर जुर्माने और छूटी हुई किस्तों के नियम यहाँ नहीं गिने जाते।
  • दर पूरी अवधि में एक जैसी रहती है। असल में खाता खुलने के समय की दर आम तौर पर उस खाते पर लागू रहती है, पर यह भी योजना के नियमों पर निर्भर है।
  • खाता अवधि तक चलता है और बीच में बंद नहीं होता।
  • कोई कर या TDS नहीं घटाया जाता।
एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: ₹5,000 महीने की RD

मान लीजिए सविता, एक सरकारी दफ़्तर में काम करने वाली माँ, अपनी बेटी की कॉलेज फीस के लिए ₹5,000 महीना 5 साल तक जमा करना चाहती हैं। दर 6.7%।

  • किस्तों की संख्या = 60।
  • कुल जमा = 5,000 गुना 60 = ₹3,00,000।
  • कुल ब्याज = लगभग ₹56,836।
  • मैच्योरिटी रकम = लगभग ₹3,56,836।

साल-दर-साल: पहले साल जमा ₹60,000 और ब्याज लगभग ₹2,211, साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹62,211। दूसरे साल जमा ₹60,000 और ब्याज लगभग ₹6,485, साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹1,28,697। देखें कि ब्याज तीन गुना हो गया, जबकि जमा उतनी ही रही।

उदाहरण 2: दर बदलने का असर

वही ₹5,000 महीना, 5 साल, पर दर 7.2% हो, तो मैच्योरिटी लगभग ₹3,61,577 आती है। यानी 0.5 अंक की दर-बढ़त से लगभग ₹4,741 ज़्यादा। इससे समझ आता है कि RD में दर का असर होता तो है, पर बचत की मासिक रकम का असर उससे कहीं बड़ा है।

उदाहरण 3: बहुत छोटी किस्त

एक घरेलू सहायक हर महीने ₹1,500 जमा कर सकती है। 5 साल, दर 6.7%। कुल जमा ₹90,000, कुल ब्याज लगभग ₹17,051, मैच्योरिटी लगभग ₹1,07,051। यानी कुल रकम एक लाख के पार पहुँच जाती है।

उदाहरण 4: 10 साल का विस्तार

एक ड्राइवर हर महीने ₹2,000 जमा करता है, दर 6.7%, अवधि 10 साल (विस्तार वाली)। किस्तें 120, कुल जमा ₹2,40,000, कुल ब्याज लगभग ₹1,01,716 और मैच्योरिटी लगभग ₹3,41,716। देखें: अवधि लंबी होने पर ब्याज का हिस्सा बढ़ता है। पहले उदाहरण में ब्याज कुल जमा का लगभग 19% था, यहाँ लगभग 42%।

उदाहरण 5: मोटी किस्त

एक दुकानदार ₹10,000 महीना 5 साल, 6.7% पर रखता है। कुल जमा ₹6,00,000, ब्याज लगभग ₹1,13,673 और मैच्योरिटी लगभग ₹7,13,673।

उदाहरण: ₹5,000 की किस्त पर ₹3,00,000 जमा करके लगभग ₹3.57 लाख मिले। इसमें से लगभग 84% रकम आपकी अपनी जमा थी। यही कारण है कि RD में "आदत" ज़्यादा काम करती है और "दर" कम।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह ताज़ा दर नहीं बताता और दरें अपने-आप नहीं बदलता।
  • यह देरी के जुर्माने, छूटी किस्तों और खाते के पुनर्जीवन का हिसाब नहीं करता।
  • यह समय से पहले बंद करने या ऋण लेने की सुविधा का हिसाब नहीं करता।
  • यह कर या TDS नहीं घटाता।
  • यह महँगाई नहीं जोड़ता, इसलिए 5 या 10 साल बाद की रकम की असली ख़रीद-शक्ति कम होगी।
  • यह मान लेता है कि हर किस्त महीने की शुरुआत में जमा होती है। असल में जमा की तारीख़ का असर नियमों में अलग हो सकता है।
  • न्यूनतम और अधिकतम किस्त तथा गुणांक जैसे नियम यहाँ पूरी तरह लागू नहीं किए गए।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Recurring Deposit Calculator से बैंक की RD की तुलना करें।
  • Post Office Time Deposit Calculator से डाकघर की एकमुश्त जमा योजना देखें।
  • SIP Calculator से नियमित निवेश का दूसरा रास्ता देखें।
  • Goal SIP Calculator से किसी तय रकम के लिए मासिक रकम निकालें।
  • Budget Calculator से तय करें कि हर महीने कितना बचत में जा सकता है।
  • Inflation Calculator से जानें कि मैच्योरिटी रकम की असली ताक़त कितनी होगी।

यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है। यह निवेश, कर या कानूनी सलाह नहीं है, और ऊपर के सभी आँकड़े उदाहरण भर हैं। योजना के नियम और दरें बदल सकती हैं, इसलिए निर्णय से पहले India Post की आधिकारिक जानकारी देखें।

6 काम की बातें याद रखें

1
किस्त उतनी रखें जितनी निभ सके

चूकी हुई किस्त पर जुर्माना लग सकता है। इसलिए ऐसी रकम चुनें जो बिना खींचतान के हर महीने जा सके।

2
तारीख़ तय करके ऑटो-डेबिट सोचें

वेतन आने के तुरंत बाद की तारीख़ रखें ताकि किस्त भूलने की गुंजाइश कम रहे।

3
आमदनी बढ़े तो नई RD सोचें

आमदनी बढ़ने पर नई RD शुरू करके कुल बचत बढ़ाई जा सकती है। इस पेज पर अलग-अलग किस्त डालकर पहले असर देख लें।

4
कर का असर जोड़कर सोचें

ब्याज कर-योग्य है। अपनी कर-स्थिति के हिसाब से हाथ में आने वाली रकम इस पेज से कम हो सकती है।

5
दूसरे विकल्पों से तुलना करें

बैंक RD या SIP के साथ मिलाकर देखें कि लक्ष्य का समय, जोखिम और रिटर्न आपकी ज़रूरत से कैसे मेल खाते हैं।

6
लक्ष्य के साथ जोड़ें

हर RD को एक नाम दें, जैसे बच्चे की फ़ीस या स्कूटर की डाउन पेमेंट, ताकि बीच में तोड़ने का मन न हो।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

न्यूनतम किस्त ₹100 प्रति माह है और उसके बाद ₹10 के गुणांक में कोई भी रकम हो सकती है। मानक अवधि 5 साल (60 महीने) है, जिसे 5 साल और बढ़ाया जा सकता है।

ब्याज हर तिमाही जुड़ता है। यह कैलकुलेटर हर महीने की किस्त महीने की शुरुआत में मानता है और बैलेंस पर मासिक ब्याज गिनकर हर 3 महीने में बैलेंस में जोड़ता है।

पोस्ट ऑफ़िस RD में देरी पर जुर्माना लगता है, और लगातार किस्तें न देने पर खाता बंद भी हो सकता है। यह कैलकुलेटर मानता है कि हर किस्त समय पर जमा हुई।

RD का ब्याज आपकी आय में जुड़कर आपके स्लैब के हिसाब से कर-योग्य होता है। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए ताज़ा क़ानून देखें या टैक्स सलाहकार से पूछें।

RD में पैसा हर महीने किस्तों में जाता है, इसलिए हर किस्त कम समय ब्याज कमाती है। FD में पूरी रकम शुरू से लगती है, इसलिए बराबर कुल रकम पर FD ज़्यादा ब्याज देती है।

हाँ। इस पेज में हर किस्त उस महीने की शुरुआत में जमा मानी गई है। असल खाते में तारीख़ों के हिसाब से थोड़ा फ़र्क़ आ सकता है।

नहीं, असल RD में किस्त तय होती है। यह पेज नई किस्त डालकर नतीजा दिखाता है, यानी वह नई योजना जैसा है।

पेज में 5 साल का विस्तार मानकर कुल 10 साल का हिसाब एक ही दर पर किया जाता है। असल में विस्तार की दर और शर्तें अलग हो सकती हैं।

यह पेज पूरी अवधि में एक ही दर मानता है। दर बदलने की स्थिति में नया हिसाब बाक़ी अवधि के लिए दूसरी दर से करके अंदाज़ा लें।

नियम डाकघर की शर्तों पर निर्भर हैं। यह पेज ऋण की सुविधा को नहीं गिनता, इसलिए इसकी जानकारी डाकघर से लें।

नहीं। समय से पहले बंद करने पर दर और शर्तें अलग हो सकती हैं। पेज का नतीजा पूरी अवधि चलने पर है।

नहीं। दिखाई गई रकम कर से पहले की है। ब्याज पर कर की गणना अलग से होगी।

नहीं। रकम रुपयों में है। 5 या 10 साल बाद उन रुपयों की ख़रीद-शक्ति कम हो सकती है।

नहीं। पेज में किस्त ₹100 से ₹1,00,000 तक चुनी जा सकती है, पर असल नियम और ज़रूरी गुणांक डाकघर से पक्के कर लें।

पेज की 6.7% उदाहरण दर पर लगभग ₹56,836। दर बदली तो आँकड़ा बदलेगा, ऊपर की तालिका में अलग दरों के नतीजे दिए हैं।

RD में दर पहले से पता होती है और रकम सुरक्षित मानी जाती है। SIP में रिटर्न बाज़ार पर निर्भर है, तय नहीं, और जोखिम भी अलग है।

वह उस साल तक की जमा और जुड़े हुए ब्याज को मिलाकर की रकम है। आख़िरी पंक्ति का बैलेंस ही मैच्योरिटी की रकम है।

नहीं। यह सिर्फ़ शैक्षणिक गणना है। असली दर और शर्तें डाकघर से पक्की करके ही फ़ैसला लें।

आपके काम के और कैलकुलेटर

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