उदाहरण 1: ₹5,000 महीने की RD
मान लीजिए सविता, एक सरकारी दफ़्तर में काम करने वाली माँ, अपनी बेटी की कॉलेज फीस के लिए ₹5,000 महीना 5 साल तक जमा करना चाहती हैं। दर 6.7%।
- किस्तों की संख्या = 60।
- कुल जमा = 5,000 गुना 60 = ₹3,00,000।
- कुल ब्याज = लगभग ₹56,836।
- मैच्योरिटी रकम = लगभग ₹3,56,836।
साल-दर-साल: पहले साल जमा ₹60,000 और ब्याज लगभग ₹2,211, साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹62,211। दूसरे साल जमा ₹60,000 और ब्याज लगभग ₹6,485, साल के अंत में बैलेंस लगभग ₹1,28,697। देखें कि ब्याज तीन गुना हो गया, जबकि जमा उतनी ही रही।
उदाहरण 2: दर बदलने का असर
वही ₹5,000 महीना, 5 साल, पर दर 7.2% हो, तो मैच्योरिटी लगभग ₹3,61,577 आती है। यानी 0.5 अंक की दर-बढ़त से लगभग ₹4,741 ज़्यादा। इससे समझ आता है कि RD में दर का असर होता तो है, पर बचत की मासिक रकम का असर उससे कहीं बड़ा है।
उदाहरण 3: बहुत छोटी किस्त
एक घरेलू सहायक हर महीने ₹1,500 जमा कर सकती है। 5 साल, दर 6.7%। कुल जमा ₹90,000, कुल ब्याज लगभग ₹17,051, मैच्योरिटी लगभग ₹1,07,051। यानी कुल रकम एक लाख के पार पहुँच जाती है।
उदाहरण 4: 10 साल का विस्तार
एक ड्राइवर हर महीने ₹2,000 जमा करता है, दर 6.7%, अवधि 10 साल (विस्तार वाली)। किस्तें 120, कुल जमा ₹2,40,000, कुल ब्याज लगभग ₹1,01,716 और मैच्योरिटी लगभग ₹3,41,716। देखें: अवधि लंबी होने पर ब्याज का हिस्सा बढ़ता है। पहले उदाहरण में ब्याज कुल जमा का लगभग 19% था, यहाँ लगभग 42%।
उदाहरण 5: मोटी किस्त
एक दुकानदार ₹10,000 महीना 5 साल, 6.7% पर रखता है। कुल जमा ₹6,00,000, ब्याज लगभग ₹1,13,673 और मैच्योरिटी लगभग ₹7,13,673।
उदाहरण: ₹5,000 की किस्त पर ₹3,00,000 जमा करके लगभग ₹3.57 लाख मिले। इसमें से लगभग 84% रकम आपकी अपनी जमा थी। यही कारण है कि RD में "आदत" ज़्यादा काम करती है और "दर" कम।