खाते में पड़े पैसे की कमाई

Savings Account Interest Calculator

सेविंग्स अकाउंट में पड़े पैसे पर ब्याज कितना बनेगा — हर महीने की जमा के साथ, तिमाही ब्याज जुड़ने के हिसाब से।

  • खाते की रकम + मासिक जमा
  • तिमाही ब्याज का हिसाब
  • असली सालाना दर
  • साल-दर-साल बैलेंस
  • कुल ब्याज बनाम जमा
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहबेकार पड़े पैसे पर सेविंग्स दर कम मिलती है। ज़रूरत से ज़्यादा रकम FD या लिक्विड फ़ंड जैसे विकल्पों में रखने का सोचें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

सेविंग्स अकाउंट का ब्याज कैसे मिलता है?

ज़्यादातर बैंक रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनते हैं और उसे तिमाही में खाते में जोड़ देते हैं, इसलिए ब्याज पर भी ब्याज बनने लगता है। बैलेंस पर मिलने वाली दर बैंक और बैलेंस के स्लैब के हिसाब से अलग होती है (अक्सर 2.5% से 7% के बीच)। नीचे दिया हिसाब मान लेता है कि आप शुरुआती रकम रखते हैं और हर महीने की शुरुआत में निश्चित रकम जमा करते हैं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

The balance is run month by month: the monthly deposit is added at the start of each month, interest at (rate ÷ 12) of the balance is collected every month and credited to the account every 3 months (quarterly), the way most banks do. Result = balance after the chosen number of years.

बैलेंस महीने-दर-महीने चलाया जाता है: हर महीने की शुरुआत में जमा जुड़ती है, बैलेंस पर (दर ÷ 12) ब्याज हर महीने गिना जाता है और हर 3 महीने में खाते में जुड़ता है, जैसा ज़्यादातर बैंक करते हैं। नतीजा चुने हुए सालों के बाद का बैलेंस है।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 9 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Banks compute interest on the daily balance and rates vary by bank and balance slab; this tool uses an average balance and a single rate, so treat the result as an estimate. Interest is taxable income; check the current deduction limits (Sections 80TTA / 80TTB, old tax regime) before relying on any tax benefit. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। बैंक रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनते हैं और दरें बैंक व बैलेंस स्लैब से बदलती हैं; यह टूल औसत बैलेंस और एक ही दर मानता है, इसलिए नतीजा अनुमान है। ब्याज कर-योग्य आय है; कर-छूट (धारा 80TTA / 80TTB, पुरानी कर-व्यवस्था) की ताज़ा सीमाएँ अलग से जाँचें। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • यहाँ ब्याज हर महीने गिना जाता है और हर 3 महीने (तिमाही) में बैलेंस में जुड़ता है, इसलिए ब्याज पर भी ब्याज बनने लगता है।
  • बचत खाते की दर कम होती है, इसलिए असली ताक़त आपकी हर महीने की जमा में होती है, दर में नहीं। कुल बैलेंस का बड़ा हिस्सा आपकी अपनी जमा ही रहता है।
  • डाली गई दर और रकम औसत मानी जाती है। असली बैंक रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनता है और दर बैलेंस के स्लैब से बदल सकती है।
  • ब्याज कर-योग्य आय है। यहाँ की दर एक उदाहरण है, अपने बैंक की ताज़ा दर वहीं से देखें।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

सीमा: पेज की शुरुआती संख्याएँ

सीमा के खाते में ₹1,00,000 हैं और वह हर महीने ₹5,000 जमा करती है। उदाहरण दर 3% सालाना, 5 साल।

शुरुआती रकम
₹1,00,000
कुल मासिक जमा (60 × ₹5,000)
₹3,00,000
कुल ब्याज
लगभग ₹40,099
5 साल बाद कुल रकम
लगभग ₹4,40,099
असली सालाना दर
3.03%

कुल रकम का क़रीब 91% हिस्सा सीमा की अपनी रकम (शुरुआती + जमा) है, ब्याज सिर्फ़ लगभग 9% है। बचत खाता सुरक्षित ठिकाना है, पर पैसा बढ़ाने का तेज़ ज़रिया नहीं।

हरीश: बिना नई जमा के सिर्फ़ ब्याज

हरीश के पास ₹50,000 पड़े हैं और वह कुछ और जमा नहीं करता। उदाहरण दर 3.5%, 10 साल।

शुरुआती रकम
₹50,000
कुल मासिक जमा
₹0
कुल ब्याज
लगभग ₹20,845
10 साल बाद कुल रकम
लगभग ₹70,845
असली सालाना दर
3.55%

तिमाही जुड़ने से 3.5% की दर असल में 3.55% बन गई। दस साल में रकम लगभग 1.42 गुना हुई, महँगाई इससे तेज़ भी चल सकती है।

नेहा: अलग बचत खाते में धीरे-धीरे आपातकालीन निधि

नेहा ₹2,00,000 से शुरू करती है और हर महीने ₹10,000 जोड़ती है। उदाहरण दर 2.7%, 3 साल।

शुरुआती रकम
₹2,00,000
कुल मासिक जमा (36 × ₹10,000)
₹3,60,000
कुल ब्याज
लगभग ₹32,167
3 साल बाद कुल रकम
लगभग ₹5,92,167
असली सालाना दर
2.73%

तीन साल में लगभग ₹5.9 लाख का तकिया बन गया। यहाँ ब्याज से ज़्यादा काम नियमित जमा की आदत ने किया।

₹1,00,000 पर कुल ब्याज: दर बनाम साल (कोई नई जमा नहीं, तिमाही जुड़ना)

₹1,00,000 पर कुल ब्याज: दर बनाम साल (कोई नई जमा नहीं, तिमाही जुड़ना)
दर (% सालाना)1 साल3 साल5 साल10 साल
2.5%₹2,524₹7,763₹13,271₹28,303
3%₹3,034₹9,381₹16,118₹34,835
3.5%₹3,546₹11,020₹19,034₹41,691
4%₹4,060₹12,683₹22,019₹48,886
5%₹5,095₹16,075₹28,204₹64,362

सभी दरें सिर्फ़ उदाहरण हैं। असली दर बैंक और बैलेंस के स्लैब से तय होती है। रकम पूरे समय खाते में रहने की मान्यता है।

घोषित दर बनाम तिमाही जुड़ने के बाद असली सालाना दर

घोषित दर बनाम तिमाही जुड़ने के बाद असली सालाना दर
घोषित दरअसली सालाना दर
2.5%2.52%
3%3.03%
3.5%3.55%
4%4.06%
5%5.09%
6%6.14%
7%7.19%

असली दर = (1 + दर ÷ 400)^4 − 1। दर जितनी ऊँची, तिमाही जुड़ने का फ़र्क़ उतना बड़ा, पर बचत खाते की दरों पर यह फ़र्क़ बहुत छोटा है।

त्वरित संदर्भ: बचत खाते का ब्याज

त्वरित संदर्भ: बचत खाते का ब्याज
यह क्या हैखाते में पड़े पैसे पर बैंक का दिया ब्याज, जो आम तौर पर रोज़ के बैलेंस पर गिनकर तिमाही में खाते में जोड़ा जाता है।
महीने का ब्याजबैलेंस × सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
जुड़ने का तरीक़ाहर 3 महीने में जमा हुआ ब्याज बैलेंस में जुड़ता है
असली सालाना दर(1 + दर ÷ 400)^4 − 1
इस पेज की मान्यतामहीने की शुरुआत में जमा, पूरे समय एक ही दर, कोई निकासी नहीं
करब्याज आय में जुड़कर कर-योग्य है। छूट के नियम बदलते रहते हैं, ताज़ा नियम देख लें।
दर कहाँ से लेंअपने बैंक की वेबसाइट या ऐप से, अपने बैलेंस स्लैब की दर
इस पेज में क्या नहींनिकासी, न्यूनतम बैलेंस जुर्माना, शुल्क, कर और महँगाई का असर।

Savings Account Interest Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

सेविंग्स अकाउंट वह खाता है जिसमें ज़्यादातर लोग अपनी तनख्वाह, घर का खर्च और थोड़ी-बहुत बचत एक साथ रखते हैं। बैंक इस पैसे पर थोड़ा ब्याज देता है, जो खाते में चुपचाप जुड़ता रहता है। पर सवाल उठता है: अगर मैं हर महीने इसमें कुछ रकम डालता रहूँ और पैसे को यूँ ही पड़ा रहने दूँ, तो कुछ साल में खाते में कितना हो जाएगा, और उसमें ब्याज का हिस्सा कितना होगा?

यह calculator इसी सवाल का जवाब देता है। आप खाते में अभी की रकम, हर महीने की जमा, सालाना ब्याज दर और साल बताते हैं। calculator महीने-दर-महीने बैलेंस चलाता है, ब्याज को उसी तरह जोड़ता है जैसे ज़्यादातर बैंक करते हैं (हर तिमाही), और अंत में कुल रकम, कुल ब्याज और "असली सालाना दर" बताता है। यह पेज बचत खाते के लिए बना है, इसलिए यहाँ किसी FD या योजना की अवधि जैसी बातें नहीं हैं।

ध्यान दें: बैंक असल में रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनते हैं और दर बैंक तथा बैलेंस के हिसाब से अलग हो सकती है। यह टूल एक औसत मान लेता है, इसलिए नतीजा अनुमान है, पासबुक का हिसाब नहीं।

किसके काम का है

  • नौकरी की शुरुआत करने वाले युवा, जो हर महीने अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा खाते में छोड़ना शुरू कर रहे हैं।
  • गृहिणियाँ और घर संभालने वाले लोग, जो घरेलू बचत को खाते में जोड़ते रहते हैं और देखना चाहते हैं कि वह कहाँ पहुँचेगी।
  • फ्रीलांसर और दुकानदार, जिनकी आमदनी अनियमित है और जो कारोबार का पैसा बचत खाते में रखते हैं।
  • वे लोग, जिनके पास खाते में बड़ी रकम बेकार पड़ी है, और जो देखना चाहते हैं कि उसे सेविंग्स में छोड़ने का कितना लाभ है।
  • आपातकालीन निधि बनाने वाले, जो अपनी निधि को आसानी से निकल सकने वाली जगह रखना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि इस पर क्या मिलेगा।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर चार स्लाइडर हैं।

  1. अभी खाते में रकम (₹): ₹0 से ₹5 करोड़ तक, ₹10,000 के कदम पर, शुरुआती मान ₹1,00,000। अपनी पासबुक या बैंकिंग ऐप में दिख रहा औसत बैलेंस डालें, कोई एक बहुत ऊँचा या बहुत नीचा दिन नहीं।
  2. हर महीने की जमा (₹): ₹0 से ₹5 लाख तक, ₹1,000 के कदम पर, शुरुआती मान ₹5,000। यह वह रकम है जो आप नियमित रूप से हर महीने जोड़ते हैं। अगर आप कुछ नहीं जोड़ते, तो 0 रखें।
  3. ब्याज दर (% सालाना): 1% से 8% तक, 0.05 के कदम पर, शुरुआती मान 3%। इसमें अपने बैंक की सेविंग्स दर डालें। यह बैंक और बैलेंस के स्लैब के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए बैंक की वेबसाइट या ऐप से पक्का करें। यहाँ दिया शुरुआती मान केवल एक उदाहरण है, किसी बैंक की दर नहीं।
  4. कितने साल: 1 से 30 साल, शुरुआती मान 5।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

कुल रकम (चुने हुए साल बाद)

बड़ा आँकड़ा, और उसके नीचे लिखा आता है कि ब्याज हर तिमाही जुड़ता है। यह खाते का अनुमानित बैलेंस है।

नीचे की पंक्तियाँ

  • शुरुआती रकम: जो आपने पहले खाने में डाली।
  • कुल मासिक जमा: आने वाले सालों में आपने कुल कितना जोड़ा।
  • कुल ब्याज: बैंक से कुल मिला ब्याज।
  • कुल रकम: शुरुआती रकम, जमा और ब्याज का जोड़।
  • असली सालाना दर (तिमाही जुड़ने के बाद): कहने को दर 3% है, पर क्योंकि ब्याज तिमाही जुड़ता है और ब्याज पर भी ब्याज बनता है, असल में सालाना बढ़त थोड़ी ज़्यादा होती है। 3% की सालाना दर पर यह लगभग 3.03% होती है।

तीन हिस्सों वाला pie chart, रेखा-चार्ट और तालिका

Pie chart तीन हिस्से दिखाता है: शुरुआती रकम, मासिक जमा और ब्याज। इससे साफ़ दिखता है कि आपकी अंतिम रकम में आपका अपना पैसा कितना है और ब्याज कितना। तालिका में हर साल की जमा, उस साल का ब्याज और साल के अंत का बैलेंस है। नीचे एक छोटा नोट भी है कि ब्याज कर-योग्य है और पुरानी कर-व्यवस्था में सीमित छूट मिल सकती है।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

दर और जमा दोनों बदलकर देखें

पहले दर 3% से 4% करके देखें, फिर मासिक जमा ₹3,000 से ₹4,000 करके। आप पाएँगे कि जमा बढ़ाने का असर दर बढ़ाने से कई गुना ज़्यादा है। इसलिए ब्याज के पीछे भागने की जगह बचत बढ़ाने पर ध्यान देना अक्सर ज़्यादा काम का होता है।

तुलना के लिए अपना बैलेंस दो हिस्सों में बाँटें

मान लीजिए आपके पास ₹6 लाख हैं। देखें कि पूरा सेविंग्स में रखने पर कितना ब्याज बनता है। फिर FD Calculator में ₹4 लाख डालकर वही अवधि देखें, और ₹2 लाख सेविंग्स में रखें। पर यह फैसला तरलता की ज़रूरत, लॉक-इन और जोखिम देखकर करें, केवल ब्याज देखकर नहीं।

आपातकालीन निधि की तैयारी

अपने कुछ महीनों के खर्च का लक्ष्य रखकर देखें कि कितने साल में खाते में उतनी रकम बन जाएगी। लक्ष्य का हिसाब Emergency Fund Calculator से निकालें।

बैंकों की दर की तुलना

अगर दो बैंकों की सेविंग्स दर अलग हैं, तो दोनों दर डालकर अंतिम रकम का फ़र्क़ निकालें। देखें कि यह फ़र्क़ बैंक बदलने की झंझट के बराबर है या नहीं।

निष्क्रिय रकम खोजें

कई लोगों के खाते में महीनों से अनदेखा पैसा पड़ा रहता है। पहली बार हिसाब लगाने पर पता चलता है कि उसका उपयोग बेहतर हो सकता है।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • भ्रम: "ब्याज ही मेरी असली बचत है।" ऊपर के उदाहरणों में ज़्यादातर रकम आपकी अपनी जमा थी, ब्याज कम।
  • ग़लती: ब्याज दर को पूरे साल की गारंटी मान लेना। बैंक दर बदल सकते हैं।
  • ग़लती: न्यूनतम बैलेंस और शुल्क भूल जाना। कई बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर शुल्क लगाते हैं। यह calculator उसे नहीं गिनता।
  • भ्रम: "ब्याज कर-मुक्त है।" पेज के नोट के अनुसार यह कर-योग्य आय है। पुरानी कर-व्यवस्था में सेविंग्स ब्याज पर सीमित छूट (धारा 80TTA / 80TTB) मिल सकती है। सीमाएँ बदल सकती हैं, इसलिए Income Tax Department की साइट देखें।
  • ग़लती: बहुत बड़ी रकम सिर्फ़ सेविंग्स में रखना। तुरंत ज़रूरत वाली रकम के अलावा बाकी पैसे के लिए कम रिटर्न और महँगाई का असर देखना ज़रूरी है।
  • भ्रम: "ब्याज रोज़ जुड़ता है।" अधिकतर बैंक रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनते हैं, पर खाते में तिमाही या छमाही जोड़ते हैं। अपने बैंक की नीति देखें।
  • ग़लती: मासिक जमा की तारीख़ पर ध्यान न देना। महीने की शुरुआत में जमा करने का बैलेंस पर थोड़ा अलग असर होता है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

calculator महीने-दर-महीने चलता है:

  1. हर महीने की शुरुआत में मासिक जमा बैलेंस में जुड़ती है।
  2. उस महीने का ब्याज = बैलेंस गुना (सालाना दर भाग 12), भाग 100। यह रकम अभी बैलेंस में नहीं मिलती, बल्कि अलग जमा होती रहती है।
  3. हर तीन महीने के अंत में जमा हुआ ब्याज बैलेंस में जोड़ दिया जाता है। इसके बाद के महीनों में ब्याज इस बढ़े हुए बैलेंस पर बनता है। यही तिमाही चक्रवृद्धि है।
  4. यह सिलसिला चुने हुए सालों के सारे महीनों तक चलता है। अंतिम बैलेंस ही नतीजा है।

असली सालाना दर = (1 + दर भाग 400) की घात 4, घटा 1, गुना 100।

मान्यताएँ: एक ही दर पूरी अवधि में रहती है, खाते में न्यूनतम बैलेंस या शुल्क की कोई समस्या नहीं है, और बीच में कोई निकासी नहीं होती। बैंकों के रोज़ के बैलेंस का हिसाब यहाँ महीने के बैलेंस से बदला हुआ है।

एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: एक नई नौकरी वाले का खाता

मान लीजिए नेहा के खाते में अभी ₹50,000 हैं। वह हर महीने ₹3,000 और जोड़ेगी। बैंक की दर 3% है और वह 4 साल का हिसाब देखना चाहती है।

  • शुरुआती रकम = ₹50,000।
  • कुल मासिक जमा = 3,000 गुना 48 = ₹1,44,000।
  • कुल ब्याज = लगभग ₹15,502।
  • कुल रकम = लगभग ₹2,09,502।

साल-दर-साल बैलेंस: पहले साल के अंत में लगभग ₹88,106, दूसरे साल के अंत में लगभग ₹1,27,368, तीसरे में लगभग ₹1,67,821 और चौथे में लगभग ₹2,09,502। ब्याज हर साल बढ़ता है: पहले साल लगभग ₹2,106, दूसरे में ₹3,262, तीसरे में ₹4,453 और चौथे में ₹5,681। ऐसा इसलिए कि बैलेंस बड़ा होता जाता है।

उदाहरण 2: केवल बड़ी रकम, कोई मासिक जमा नहीं

एक सेवानिवृत्त शिक्षक के खाते में ₹2,00,000 पड़े हैं और वे कुछ नहीं जोड़ते। दर 3.5%, अवधि 5 साल। कुल ब्याज लगभग ₹38,068, कुल रकम लगभग ₹2,38,068। यहाँ असली सालाना दर लगभग 3.55% बनेगी, क्योंकि ब्याज हर तिमाही जुड़ता है।

उदाहरण 3: लंबी अवधि की आदत

एक दुकानदार हर महीने ₹10,000 जोड़ता है, खाते में शुरुआत में कुछ नहीं, और दर 2.7% है। अवधि 10 साल। कुल जमा ₹12,00,000 और कुल ब्याज लगभग ₹1,78,516। कुल रकम लगभग ₹13,78,516। देखें कि 10 साल में खाते में ब्याज का हिस्सा कुल का लगभग 13% है, यानी ज़्यादातर रकम आपकी अपनी जमा है।

उदाहरण: तीनों उदाहरणों में "सबसे ज़्यादा असर" किसने डाला? जवाब है नियमित जमा ने। सेविंग्स की दर कम होती है, इसलिए बचत की आदत ब्याज से कहीं ज़्यादा बड़ी भूमिका निभाती है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह रोज़ के बैलेंस की बारीकी नहीं पकड़ता। बैंक असल में हर दिन की क्लोज़िंग बैलेंस पर हिसाब लगाते हैं।
  • यह एक ही दर मानता है। असल में बैलेंस के स्लैब के हिसाब से दरें बदल सकती हैं।
  • यह कर नहीं घटाता। टैक्स के बाद का नतीजा आपकी आय पर निर्भर है।
  • यह निकासी, न्यूनतम बैलेंस के शुल्क, SMS या डेबिट कार्ड के शुल्क को नहीं गिनता।
  • महँगाई को नहीं जोड़ता। अगर महँगाई ब्याज दर से ज़्यादा है, तो असल में आपकी रकम की ख़रीद-शक्ति घट सकती है। इसे Inflation Calculator से जाँचें।
  • मासिक जमा में अनियमितता या बोनस जैसी बड़ी एकमुश्त रकम को नहीं पकड़ता।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • FD Calculator से तय अवधि की जमा से तुलना करें।
  • Recurring Deposit Calculator से हर महीने जमा वाली योजना देखें।
  • Emergency Fund Calculator से आपातकालीन निधि का लक्ष्य तय करें।
  • Interest Income Tax Calculator से ब्याज की आय पर कर का अनुमान देखें।
  • Inflation Calculator से महँगाई के सामने ब्याज की स्थिति परखें।
  • Budget Calculator से तय करें कि हर महीने कितना बचत में डालना है।

यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है। यह निवेश, कर या कानूनी सलाह नहीं है, और ऊपर के आँकड़े काल्पनिक उदाहरण हैं। अपने बैंक की वर्तमान दरें और शर्तें उसकी आधिकारिक वेबसाइट या शाखा से पक्का करें।

6 काम की बातें याद रखें

1
अपने बैंक की दर खुद देखें

यहाँ की दर उदाहरण है। अलग-अलग बैंकों और बैलेंस स्लैब में दरें अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने खाते की दर डालकर देखें।

2
जमा की आदत ब्याज से बड़ी है

कम दर पर नतीजा मुख्यतः आपकी जमा से बनता है। हर महीने तय रकम अलग करना ही असली ताक़त है।

3
आपातकालीन निधि का हिस्सा यहाँ रखें

कुछ महीनों के ख़र्च जितनी रकम आसानी से निकलने वाली जगह रखना ठीक रहता है। बाक़ी लंबी अवधि की रकम के लिए दूसरे विकल्प देखें।

4
महँगाई से तुलना करें

अगर ब्याज दर महँगाई से कम है तो रकम बढ़ते हुए भी असल क्रय-शक्ति में घट सकती है।

5
खाते के शुल्क भी देखें

न्यूनतम बैलेंस न रखने का जुर्माना या अन्य शुल्क ब्याज का हिस्सा खा सकते हैं। यह पेज उन्हें नहीं जोड़ता।

6
साल के अंत में ब्याज का हिसाब रखें

खाते के विवरण में ब्याज की प्रविष्टियाँ देख लें ताकि कर भरते समय वह आय छूट न जाए।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ज़्यादातर बैंक रोज़ के बैलेंस पर ब्याज गिनते हैं और उसे हर तिमाही खाते में जोड़ते हैं। यह कैलकुलेटर औसत बैलेंस और एक ही दर मानकर हिसाब लगाता है, इसलिए असली राशि थोड़ी अलग हो सकती है।

यह बैंक और बैलेंस के स्लैब के हिसाब से अलग-अलग होती है, अक्सर 2.5% से 7% के बीच। अपने बैंक की ताज़ा दर वहीं से देख लें और कैलकुलेटर में डालें।

हाँ, यह ब्याज आपकी आय में जुड़कर कर-योग्य है। पुरानी कर-व्यवस्था में धारा 80TTA (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80TTB) के तहत सीमित कटौती मिल सकती है। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए ताज़ा क़ानून देखें।

आम सलाह यह है कि इमरजेंसी के लिए कुछ महीनों के ख़र्च जितनी रकम आसानी से निकल सकने वाली जगह रखें, और उससे ज़्यादा पैसे को बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों में लगाने का सोचें। यह निजी निर्णय है, सलाह नहीं।

फ़ायदा बहुत छोटा है। 3% की घोषित दर तिमाही जुड़ने के बाद लगभग 3.03% बन जाती है, इसलिए असली फ़र्क़ पैसों में बहुत मामूली रहता है।

नहीं। यहाँ हर महीने की शुरुआत की जमा मानकर महीने के बैलेंस पर ब्याज गिना गया है। रोज़ के उतार-चढ़ाव से असली बैंक का आँकड़ा थोड़ा अलग आ सकता है।

इस पेज में निकासी का विकल्प नहीं है। निकासी होने पर बैलेंस घटेगा और ब्याज कम बनेगा, इसलिए नतीजा यहाँ से कम आएगा।

तब सिर्फ़ मौजूदा रकम पर तिमाही चक्रवृद्धि से ब्याज बनेगा। पहले उदाहरण-तालिका में इसी तरह के आँकड़े दिए हैं।

हाँ। यहाँ पूरे समय एक ही दर मानी जाती है। असल में बैंक दर बदल सकते हैं, इसलिए अलग-अलग दरें डालकर कम से कम और ज़्यादा से ज़्यादा का अंदाज़ा लें।

बचत खाते में पैसा कभी भी निकल सकता है पर दर कम होती है। FD में तय अवधि तक पैसा बंधा रहता है और दर आम तौर पर ऊँची रहती है।

नहीं। दिखाया गया ब्याज कर से पहले का है। आपकी कर-स्थिति के हिसाब से असली हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है।

नहीं। न्यूनतम बैलेंस जुर्माना, डेबिट कार्ड शुल्क और अन्य शुल्क इसमें शामिल नहीं हैं।

नहीं। नतीजा मौजूदा रुपयों में है। भविष्य में उतने रुपयों की ख़रीद-शक्ति कम हो सकती है, इसे अलग से Inflation Calculator में देखें।

यह खाते की शर्तों और कर नियमों पर निर्भर है, इसलिए यह पेज कोई जवाब नहीं देता। कर सलाहकार या ताज़ा नियमों से पुष्टि करें।

बचत खाते की दरें आम तौर पर कम रहती हैं, इसलिए स्लाइडर सीमित रखा गया है। ऊँची दर के लिए FD या दूसरे calculator देखें।

नहीं। यह सिर्फ़ शैक्षणिक गणना है। कहाँ पैसा रखना है, यह आपके लक्ष्य, समय और जोखिम पर निर्भर है।

पहले एक अवधि पर पुरानी दर से हिसाब करें, फिर उसके अंत की रकम को नई शुरुआती रकम बनाकर नई दर से दोबारा हिसाब करें।

बैंक रोज़ के बैलेंस, ब्याज जुड़ने की तारीख़ और अपने तरीक़े से गिनता है। यह पेज एक सरल अनुमान देता है, पासबुक का सटीक विकल्प नहीं है।

आपके काम के और कैलकुलेटर

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बीमा और सुरक्षा

अब आगे क्या करें?

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