किराये से कितना रिटर्न

Rental Yield Calculator

प्रॉपर्टी के दाम और किराये से rental yield, किराया + भाव बढ़ने को मिलाकर कुल सालाना रिटर्न और FD से तुलना देखिए।

  • Gross rental yield
  • Net yield (ख़र्च घटाकर)
  • ख़ाली महीनों का असर
  • IRR बनाम FD
  • साल-दर-साल तालिका
  • PDF रिपोर्ट
आशुग्या की सलाहशहरों में rental yield अक्सर 2-4% रहता है - इसलिए कुल रिटर्न काफ़ी हद तक भाव बढ़ने पर टिका होता है, जो पक्का नहीं।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

Rental yield क्या बताता है?

  • Gross yield = सालाना किराया ÷ प्रॉपर्टी की क़ीमत × 100। Net yield में ख़ाली रहने के महीने और सालाना ख़र्च (प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत, सोसाइटी) घटाए जाते हैं, और क़ीमत में ख़रीद के ख़र्च भी जुड़ते हैं।
  • भारत में शहरों में आम तौर पर rental yield कम (अक्सर 2-4%) रहता है, इसलिए प्रॉपर्टी का कुल रिटर्न काफ़ी हद तक भाव बढ़ने पर टिका होता है - जो पक्का नहीं है।
  • कुल रिटर्न (IRR) किराये की कमाई और बेचने पर मिली रकम, दोनों को मिलाकर साल-दर-साल निकाला जाता है। इसकी तुलना FD जैसे सुरक्षित विकल्प से करके देखें।
  • किराये की आय पर आपके slab के हिसाब से टैक्स लगेगा (standard deduction और लोन ब्याज की कटौती के बाद); बेचने पर capital gains टैक्स भी लगता है। इन्हें यहाँ नहीं जोड़ा गया है।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Gross yield = yearly rent ÷ price. Net yield = (rent × (12 − vacant months) − yearly costs) ÷ (price + buying costs). Year k net rent = rent × (1 + rent growth)^(k−1) × (12 − vacant months) − costs. Sale value = price × (1 + appreciation)^years × (1 − selling cost). IRR = the yearly rate that makes the present value of all these cash flows equal to the money you put in.

Gross yield = सालाना किराया ÷ क़ीमत। Net yield = (किराया × (12 − ख़ाली महीने) − सालाना ख़र्च) ÷ (क़ीमत + ख़रीद का ख़र्च)। k-वें साल का net किराया = किराया × (1 + किराया-बढ़त)^(k−1) × (12 − ख़ाली महीने) − ख़र्च। बिक्री मूल्य = क़ीमत × (1 + भाव-वृद्धि)^साल × (1 − बिक्री ख़र्च)। IRR = वह सालाना दर जिस पर इन सारे cash flow का वर्तमान मूल्य आपके लगाए पैसे के बराबर हो।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 10 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. Illustrative projection using the rent, growth and appreciation you assume; actual rents, vacancies and prices vary and are not guaranteed. Income tax on rent, capital-gains tax, loan interest and brokerage on purchase are not included. Not investment advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह आपके माने हुए किराये, उसकी बढ़त और भाव-वृद्धि पर आधारित उदाहरण-स्वरूप अनुमान है; असली किराया, ख़ाली रहना और भाव अलग हो सकते हैं और गारंटीड नहीं हैं। किराये पर आयकर, capital-gains टैक्स, लोन का ब्याज और ख़रीद का ब्रोकरेज शामिल नहीं हैं। यह निवेश सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • Gross yield = सालाना किराया ÷ क़ीमत। यह सबसे मोटा पैमाना है और ख़ाली महीने या ख़र्च नहीं देखता।
  • Net yield में ख़ाली महीने, सालाना ख़र्च और ख़रीद के ख़र्च (stamp duty, registration) भी जुड़ते हैं, इसलिए वह gross से छोटा आता है।
  • किराया अक्सर क़ीमत का एक छोटा प्रतिशत होता है। प्रॉपर्टी का असली फ़ायदा काफ़ी हद तक भाव-वृद्धि पर टिका रहता है, जो पक्की नहीं।
  • IRR किराये और बिक्री को मिलाकर सालाना रिटर्न बताता है और FD से तुलना कराता है। किराये और बिक्री का टैक्स तथा लोन का ब्याज इसमें नहीं।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

पेज का शुरुआती उदाहरण

क़ीमत ₹80 लाख, ख़रीद ख़र्च ₹5 लाख, किराया ₹25,000 महीना, साल में 1 महीना ख़ाली, सालाना ख़र्च ₹30,000, किराया हर साल 5% बढ़े, भाव 6% सालाना बढ़े, 10 साल, बेचते समय 1% ख़र्च, FD की तुलना 7% पर।

Gross yield
3.75%
Net yield
2.88%
पहले साल का net किराया
₹2,45,000
10 साल में कुल net किराया
लगभग ₹31.59 लाख
10 साल बाद बिक्री मूल्य (ख़र्च घटाकर)
लगभग ₹1.42 करोड़
कुल लाभ
लगभग ₹88.42 लाख
कुल सालाना रिटर्न (IRR)
लगभग 8.17%

किराये से सिर्फ़ 2.88% आया, पर भाव की बढ़त ने कुल IRR को FD (7%) से ऊपर पहुँचाया। नीचे की तालिका में भाव की बढ़त घटाने पर फ़र्क़ दिखता है।

सुनीता: छोटा फ़्लैट, बेहतर किराया

क़ीमत ₹45 लाख, ख़रीद ख़र्च ₹3 लाख, किराया ₹28,000, 1 महीना ख़ाली, सालाना ख़र्च ₹24,000, किराया-बढ़त 4%, भाव-बढ़त 4%, 8 साल, बिक्री ख़र्च 1%, FD 7%।

Gross yield
7.47%
Net yield
5.92%
पहले साल का net किराया
₹2,84,000
किराये से कुल लागत निकलने में
लगभग 16.9 साल
कुल सालाना रिटर्न (IRR)
लगभग 9.19%
भाव बिलकुल न बढ़े तो IRR
लगभग 6.08%

यहाँ किराया क़ीमत के हिसाब से ऊँचा है, इसलिए भाव न बढ़ने पर भी रिटर्न FD (7%) के पास रहा। गणित कीमत और किराये के अनुपात का है।

अमन: महँगी प्रॉपर्टी, कम किराया

क़ीमत ₹1.2 करोड़, ख़रीद ख़र्च ₹9 लाख, किराया ₹30,000, 2 महीने ख़ाली, सालाना ख़र्च ₹60,000, किराया-बढ़त 5%, भाव-बढ़त 7%, 15 साल, बिक्री ख़र्च 1%, FD 7%।

Gross yield
3%
Net yield
1.86%
पहले साल का net किराया
₹2,40,000
15 साल में कुल net किराया
लगभग ₹55.74 लाख
बिक्री मूल्य (ख़र्च घटाकर)
लगभग ₹3.28 करोड़
कुल सालाना रिटर्न (IRR)
लगभग 8.23%

किराया छोटा होने पर भी माने हुए 7% भाव-वृद्धि ने रिटर्न ऊँचा कर दिया। पर सारा नतीजा भविष्य के भाव पर टिका है, जो पक्का नहीं।

भाव की सालाना बढ़त बदलने पर IRR (शुरुआती उदाहरण, FD 7%)

भाव की सालाना बढ़त बदलने पर IRR (शुरुआती उदाहरण, FD 7%)
भाव की सालाना बढ़त10 साल बाद बिक्री मूल्य (≈)कुल लाभ (≈)IRR (≈)
0%₹79.20 लाख₹25.79 लाख3.07%
3%₹1.06 करोड़₹53.03 लाख5.58%
6%₹1.42 करोड़₹88.42 लाख8.17%
9%₹1.87 करोड़₹1.34 करोड़10.82%

ये भाव-वृद्धि के उदाहरण-मान हैं, किसी शहर या प्रॉपर्टी का वादा नहीं।

किराया बदलने पर yield (क़ीमत ₹80 लाख, बाक़ी वही)

किराया बदलने पर yield (क़ीमत ₹80 लाख, बाक़ी वही)
किराया (महीना)Gross yieldNet yieldIRR (≈)
₹15,0002.25%1.59%6.89%
₹20,0003%2.24%7.53%
₹25,0003.75%2.88%8.17%
₹30,0004.5%3.53%8.81%
₹40,0006%4.82%10.09%

ख़ाली महीने 1, सालाना ख़र्च ₹30,000, भाव-बढ़त 6% पर।

त्वरित संदर्भ: किराये की कमाई के पैमाने

त्वरित संदर्भ: किराये की कमाई के पैमाने
Gross yieldसालाना किराया (महीना × 12) ÷ प्रॉपर्टी की क़ीमत × 100
Net yield(किराया × (12 − ख़ाली महीने) − सालाना ख़र्च) ÷ (क़ीमत + ख़रीद ख़र्च) × 100
पहले साल का net किरायाकिराया × (12 − ख़ाली महीने) − सालाना ख़र्च
k-वें साल का किरायाकिराया × (1 + किराया-बढ़त)^(k−1) × (12 − ख़ाली महीने) − ख़र्च
बिक्री मूल्यक़ीमत × (1 + भाव-बढ़त)^साल × (1 − बिक्री ख़र्च)
IRRवह सालाना दर जिस पर सारे cash flow का वर्तमान मूल्य आपकी लगाई रकम के बराबर हो
किराये से लागत वापसी(क़ीमत + ख़रीद ख़र्च) ÷ पहले साल का net किराया, यानी साल में
इस पेज में क्या नहींकिराये और पूँजीगत लाभ का टैक्स, लोन का ब्याज, किरायेदार बदलने का ख़र्च, नवीनीकरण की बड़ी लागत।

Rental Yield Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

बहुत से लोग सोचते हैं कि फ़्लैट या दुकान ख़रीदकर किराये पर चढ़ा देना बैंक FD से बेहतर रहेगा। यह सोच सही निकलेगी या नहीं, यह इस पर टिका है कि किराया कितना मिलता है, ख़र्च कितने होते हैं, घर कितने महीने ख़ाली रहता है और कुछ साल बाद क़ीमत कितनी बदलती है। Rental Yield Calculator इन सब चीज़ों को जोड़कर तीन सवालों के जवाब देता है।

  1. प्रॉपर्टी की क़ीमत के मुक़ाबले सालाना किराया कितने प्रतिशत है? इसे gross rental yield कहते हैं।
  2. ख़ाली रहने के महीने और सालाना ख़र्च घटाने के बाद असली कमाई कितने प्रतिशत है? यह net rental yield है।
  3. अगर आप इसे कुछ साल रखकर बेचें, तो किराये और क़ीमत की बढ़त मिलाकर कुल सालाना रिटर्न (IRR) कितना बैठता है, और वह उतने ही पैसे की FD से बेहतर है या कम?

इस तरह यह calculator सिर्फ़ किराये का प्रतिशत नहीं बताता, बल्कि "किराया + भाव-वृद्धि" वाला पूरा चित्र दिखाता है। पन्ने के अनुसार किराये और बिक्री पर लगने वाला टैक्स और लोन का ब्याज इसमें शामिल नहीं है।

किसके काम का है

  • पहली बार निवेश के लिए प्रॉपर्टी देख रहे लोग, जिन्हें ब्रोकर ने "8% किराया मिलेगा" कहा है और वे जाँचना चाहते हैं।
  • पहले से घर किराये पर देने वाले मकान-मालिक, जो देखना चाहते हैं कि उनकी असली कमाई क्या है।
  • रिटायर्ड लोग, जो एकमुश्त रकम से किराये की आय का इंतज़ाम सोच रहे हैं।
  • दुकान या ऑफ़िस ख़रीदने की सोच रहे छोटे कारोबारी, जो किराये पर चढ़ाना चाहते हैं।
  • FD बनाम प्रॉपर्टी पर सोचने वाले परिवार, जिन्हें एक ही पैमाने पर तुलना चाहिए।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पन्ने पर दस स्लाइडर हैं।

  • प्रॉपर्टी की क़ीमत (₹): ₹5 लाख से ₹20 करोड़, शुरुआती ₹80 लाख। यह सौदे की मूल क़ीमत है।
  • ख़रीद के ख़र्च (₹): स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, ब्रोकरेज वग़ैरह। शुरुआती ₹5 लाख। यह रकम कुल निवेश में जुड़ती है।
  • महीने का किराया (₹): ₹1,000 से ₹5 लाख, शुरुआती ₹25,000।
  • साल में ख़ाली रहने के महीने: 0 से 6, आधे महीने के कदम में। शुरुआती 1।
  • सालाना ख़र्च (₹): प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत, सोसाइटी का रखरखाव जो मकान-मालिक चुकाता है। शुरुआती ₹30,000।
  • किराये में सालाना बढ़त (%): 0 से 15, शुरुआती 5।
  • क़ीमत में अनुमानित सालाना बढ़त (%): 0 से 20, शुरुआती 6।
  • कितने साल रखेंगे: 1 से 30 साल, शुरुआती 10।
  • बेचते समय ख़र्च (% क़ीमत का): 0 से 5, शुरुआती 1।
  • तुलना के लिए FD की दर (% सालाना): 3 से 12, शुरुआती 7।
ध्यान दें: ये सभी शुरुआती संख्याएँ सिर्फ़ उदाहरण हैं। अपने शहर और इलाक़े के असली किराये और सौदों से मिलाकर बदलें। पूरे किराये पर टैक्स और बिक्री पर कर इसमें नहीं है, इसलिए असली कमाई कम भी हो सकती है।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में Gross rental yield है, और उसके नीचे Net yield व कुल सालाना रिटर्न (IRR)। उसके बाद नौ पंक्तियाँ:

  1. Gross yield = सालाना किराया ÷ क़ीमत।
  2. Net yield = (पहले साल का net किराया) ÷ (क़ीमत + ख़रीद ख़र्च)।
  3. पहले साल का net किराया: ख़ाली महीने और सालाना ख़र्च घटाकर।
  4. किराये से कुल लागत निकलने में लगभग साल: कुल लागत ÷ पहले साल का net किराया। यह भाव-वृद्धि को छोड़कर केवल किराये से पैसा वापस आने का समय है।
  5. कुल net किराया चुनी हुई अवधि का।
  6. बिक्री मूल्य (बिक्री ख़र्च घटाकर)।
  7. कुल लाभ = बिक्री मूल्य + कुल net किराया − कुल लागत।
  8. कुल सालाना रिटर्न (IRR): हरा अगर FD से ज़्यादा, लाल अगर कम, और साथ में लिखा आता है "प्रॉपर्टी का IRR FD से ज़्यादा" या "कम"।
  9. FD का सालाना रिटर्न (तुलना)।

नीचे चार्ट में दो रेखाएँ हैं: एक "प्रॉपर्टी + जमा किराया" और दूसरी उतने ही पैसे की FD (बिंदीदार)। तालिका में साल-दर-साल net किराया, प्रॉपर्टी का मूल्य और जमा किराया है। अगर IRR FD से कम निकला तो एक पीली चेतावनी आती है कि भाव-वृद्धि का अनुमान ऊँचा रखे बिना यह फ़ायदे का सौदा नहीं दिखता।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • पहले gross और net का फ़र्क देखें: ब्रोकर अक्सर gross बताते हैं। अपने ख़ाली महीने और ख़र्च डालकर net देखें।
  • भाव-वृद्धि की तीन स्थितियाँ चलाएँ: निराशावादी (2-3%), मध्यम और आशावादी। जो फ़ैसला केवल आशावादी स्थिति में टिकता है, उसे दोबारा सोचें।
  • ख़ाली महीने बढ़ाकर देखें: नए इलाक़ों या व्यावसायिक जगहों में किरायेदार मिलने में समय लग सकता है।
  • अवधि बदलकर देखें: बेचने तक कितने साल रखेंगे, इसका असर IRR और FD की तुलना पर पड़ता है।
  • FD की दर बदलकर देखें: तुलना की बाधा-दर जितनी ऊँची रखेंगे, प्रॉपर्टी उतनी कठिन परीक्षा से गुज़रेगी।
  • दूसरे औज़ार साथ चलाएँ: Rent vs Buy Calculator, Stamp Duty Calculator और Capital Gains Tax Calculator से ख़र्च और कर का अनुमान भी लगाएँ।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • gross yield को असली कमाई समझना: ख़ाली महीने, टैक्स, मरम्मत और रखरखाव घटाने के बाद नतीजा काफ़ी छोटा हो सकता है।
  • ख़रीद के ख़र्च भूल जाना: स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कुल लागत में जुड़ते हैं और net yield घटाते हैं।
  • सिर्फ़ किराये से तुलना करना: असली रिटर्न में भाव-वृद्धि का बड़ा हाथ होता है, पर वह पक्की नहीं।
  • टैक्स को शामिल मान लेना: किराये की आमदनी पर कर और बेचने पर पूँजीगत लाभ कर इस calculator में नहीं हैं।
  • लोन के ब्याज को अनदेखा करना: अगर घर लोन पर लिया है तो EMI का हिसाब अलग से करना होगा।
  • किरायेदार की क़ानूनी और प्रॉपर्टी की तरलता की समस्या: प्रॉपर्टी बेचना FD तोड़ने जितना आसान नहीं, पर यह बात संख्याओं में नहीं आती।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
  • Gross yield = मासिक किराया × 12 ÷ क़ीमत × 100।
  • पहले साल का net किराया = मासिक किराया × (12 − ख़ाली महीने) − सालाना ख़र्च। Net yield इसे (क़ीमत + ख़रीद ख़र्च) से भाग देकर निकलता है।
  • साल k का net किराया = मासिक किराया × (1 + किराया बढ़त)^(k−1) × (12 − ख़ाली महीने) − सालाना ख़र्च। यानी किराया हर साल बढ़ता है, पर सालाना ख़र्च और ख़ाली महीने स्थिर रहते हैं।
  • साल k में प्रॉपर्टी का मूल्य = क़ीमत × (1 + भाव-वृद्धि)^k।
  • बिक्री मूल्य = अंतिम साल का मूल्य × (1 − बिक्री ख़र्च%)।
  • IRR: शुरू में कुल लागत बाहर जाती है (ऋणात्मक), फिर हर साल net किराया आता है और अंतिम साल में बिक्री मूल्य जुड़ता है। इस प्रवाह के लिए वह दर निकाली जाती है जिस पर कुल वर्तमान मूल्य शून्य हो। नतीजा निकल न पाए तो चेतावनी आती है।
  • FD की तुलना: कुल लागत × (1 + FD दर)^साल, सालाना चक्रवृद्धि पर।

इसमें माना गया है कि किराया साल में एक बार बदलता है, और आपने प्रॉपर्टी बिना लोन के ख़रीदी है।

एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी ₹60 लाख का 2BHK ख़रीदते हैं, ख़रीद ख़र्च ₹4 लाख। मासिक किराया ₹18,000, साल में 1.5 महीने घर ख़ाली रहने की संभावना, सालाना ख़र्च ₹24,000, किराये की बढ़त 4%, भाव-वृद्धि 5%, 12 साल रखने की योजना, बिक्री ख़र्च 1%, FD की दर 7%।

  1. कुल लागत = 60,00,000 + 4,00,000 = ₹64,00,000।
  2. Gross yield = 18,000 × 12 ÷ 60,00,000 × 100 = 3.6%।
  3. पहले साल का net किराया = 18,000 × 10.5 − 24,000 = 1,89,000 − 24,000 = ₹1,65,000।
  4. Net yield = 1,65,000 ÷ 64,00,000 = लगभग 2.58%।
  5. केवल किराये से लागत निकलने में लगभग 38.8 साल।
  6. 12 साल में कुल net किराया लगभग ₹25.5 लाख।
  7. 12 साल बाद क़ीमत 60,00,000 × 1.05¹² ≈ ₹1.08 करोड़, बिक्री ख़र्च 1% घटाकर लगभग ₹1.067 करोड़।
  8. कुल लाभ = 1.067 करोड़ + 25.5 लाख − 64 लाख ≈ ₹68.2 लाख।
  9. IRR लगभग 6.95%।
  10. उसी ₹64 लाख को 7% की FD में रखने पर 12 साल बाद लगभग ₹1.44 करोड़।

यानी यहाँ IRR (6.95%) FD की 7% से मामूली कम निकला और calculator चेतावनी दिखाएगा। अब भाव-वृद्धि का अनुमान बदलें। 2% सालाना हो तो IRR लगभग 4.4%। 8% हो तो लगभग 9.6%। यही दिखाता है कि प्रॉपर्टी का नतीजा किराये से ज़्यादा भाव-वृद्धि के अनुमान पर टिका होता है, और वह अनुमान सबसे अनिश्चित हिस्सा है। ख़ाली महीने 1.5 से 3 करने पर IRR लगभग 6.5% पर आ जाता है। ये सभी मान लिए गए आँकड़े हैं, असली नतीजे अलग हो सकते हैं।

उदाहरण: Net yield 2.6% बहुत छोटा लगता है, और भारत के शहरों में किराये का प्रतिशत अक्सर कम ही रहता है। इसलिए निर्णय अकेले किराये से नहीं, किराये और भाव-वृद्धि दोनों से होता है, जैसा इस पन्ने की जानकारी भी कहती है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता

यह किराये की आय पर आयकर, बिक्री पर पूँजीगत लाभ कर, लोन का ब्याज और EMI, मरम्मत के अचानक बड़े ख़र्च, किरायेदार से विवाद और स्थानीय नियमों को शामिल नहीं करता। सालाना ख़र्च और ख़ाली महीने स्थिर माने गए हैं। भाव-वृद्धि और किराये की बढ़त हर साल एक-सी मानी गई है, जबकि असल में बाज़ार चक्रों में चलता है। IRR पूरी तरह आपकी मान्यताओं पर टिका है। प्रॉपर्टी की तरलता, इलाक़े का जोखिम, निर्माण में देरी जैसे जोखिम गणना में नहीं हैं। असली फ़ैसले से पहले स्थानीय बाज़ार का अध्ययन करें और कर सलाहकार से बात करें।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Rent vs Buy Calculator — ख़रीदने और किराये पर रहने की तुलना
  • Stamp Duty Calculator — ख़रीद के ख़र्च का अनुमान
  • Capital Gains Tax Calculator — बेचने पर लगने वाले कर का अनुमान
  • FD Calculator — तुलना के लिए FD का हिसाब
  • CAGR Calculator — क़ीमत की बढ़त की दर समझने के लिए
  • XIRR Calculator — अनियमित नक़दी-प्रवाह का रिटर्न

यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, निवेश, कर या क़ानूनी सलाह नहीं।

6 काम की बातें याद रखें

1
ख़ाली महीने ईमानदारी से रखें

किरायेदार बदलने में कुछ हफ़्ते-महीने लग ही जाते हैं। शून्य न रखें, एक-दो महीने जोड़कर देखें।

2
ख़रीद ख़र्च भूलें नहीं

stamp duty, registration और दलाली मिलाकर लगाई गई असली रकम बढ़ती है, इसलिए net yield घटता है।

3
सालाना ख़र्च में बड़ा मरम्मत-फंड भी रखें

प्रॉपर्टी टैक्स और सोसाइटी शुल्क के साथ रंग-रोगन, प्लंबिंग जैसी मरम्मत भी जोड़ें।

4
भाव-वृद्धि के कई मान आज़माएँ

बढ़त शून्य, कम और ज़्यादा, तीनों रखकर IRR देखें। जो सौदा सिर्फ़ ऊँची बढ़त पर चलता है, वह जोखिम भरा है।

5
आसानी से बिकने का ध्यान रखें

प्रॉपर्टी को ज़रूरत पर जल्दी बेचना मुश्किल हो सकता है। FD से तुलना करते समय यह कमी भी याद रखें।

6
लोन और टैक्स अलग से जोड़ें

अगर प्रॉपर्टी लोन पर है या किराये पर टैक्स बनता है, तो असली रिटर्न इस पेज से कम होगा। उन्हें अलग calculator में देखें।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Gross yield = सालाना किराया ÷ प्रॉपर्टी की क़ीमत × 100। Net yield में ख़ाली रहने के महीने और सालाना ख़र्च घटाए जाते हैं और क़ीमत में ख़रीद के ख़र्च जोड़े जाते हैं।

भारत के शहरों में rental yield अक्सर कम (लगभग 2-4%) रहता है। इसलिए अकेले किराये से नहीं, किराये और भाव-वृद्धि मिलाकर कुल रिटर्न देखना ज़्यादा सही है, और उसकी तुलना FD जैसे विकल्प से करें।

IRR किराये की कमाई और अंत में बिक्री से मिली रकम, दोनों को मिलाकर सालाना औसत रिटर्न दिखाता है, ताकि प्रॉपर्टी की तुलना दूसरे निवेश से हो सके।

नहीं। किराये की आय पर आयकर, बेचने पर capital gains टैक्स और लोन का ब्याज इसमें शामिल नहीं हैं, जो असली रिटर्न बदल सकते हैं।

Gross सिर्फ़ किराये को क़ीमत से भाग देता है। Net में ख़ाली महीने और सालाना ख़र्च घटाए जाते हैं और ख़रीद ख़र्च लगाई गई रकम में जोड़े जाते हैं।

क्योंकि असल में आपने उतनी रकम लगाई। stamp duty और registration के बिना घर आपका नहीं होता।

अगर सिर्फ़ किराया ही आए और भाव न बढ़े, तो पहले साल जितने ही net किराये पर पूरी लागत वापस आने में लगभग कितने साल लगेंगे। यह मोटा पैमाना है।

लंबे समय में किराया अक्सर बढ़ता है। पेज में आप अपनी बढ़त का प्रतिशत भरते हैं। शून्य रखकर भी देख सकते हैं।

क्योंकि किराया महीने का आता है। जितने महीने कोई किरायेदार न हो, उतने महीने का किराया नहीं मिलता।

आपकी लगाई रकम, हर साल के net किराये और आख़िर के बिक्री मूल्य पर। इनमें बिक्री मूल्य सबसे अनिश्चित है।

तुलना के लिए। यह दर आपकी अपनी माने हुई होती है, कोई मौजूदा बैंक दर नहीं। अपनी FD की असली दर डालें।

लोन का ब्याज कुल रिटर्न घटा सकता है, पर आपकी अपनी लगाई रकम घटने से आपके पैसे पर रिटर्न का प्रतिशत अलग दिख सकता है। यह पेज लोन नहीं गिनता।

नहीं। किराये की आमदनी पर कर आपके slab के हिसाब से लगता है। बिक्री पर पूँजीगत लाभ कर भी इसमें शामिल नहीं।

सिर्फ़ उतना जितना आप सालाना ख़र्च में डालें। एकमुश्त बड़ी मरम्मत ख़रीद ख़र्च में जोड़ सकते हैं।

तब औसत मासिक किराया डालें। पेज समान किराया मानता है।

गणित वही रहेगा, पर वहाँ ख़ाली रहने की अवधि और किराये की शर्तें अलग होती हैं। अपने आँकड़े सावधानी से भरें।

ज़रूरी नहीं। प्रॉपर्टी के और कारण भी हो सकते हैं, जैसे अपना उपयोग या परिवार के लिए। पर रिटर्न के हिसाब से देखें तो वह कमज़ोर दिखता है।

नहीं, यह शैक्षणिक अनुमान है। प्रॉपर्टी बड़ा फ़ैसला है, इसलिए किसी पंजीकृत सलाहकार या वकील से ज़रूर पूछें।

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