पेज की शुरुआती संख्याएँ: क़ीमत ₹60,00,000, ख़रीद के खर्च 7%, एक बार का खर्च ₹3,00,000, 5 साल, भाव की बढ़त 5%, किराया ₹18,000 (1 महीना खाली), सालाना खर्च ₹36,000, बिक्री खर्च 1%, लोन ₹35,00,000 पर 9% और 20 साल। (सब उदाहरण।)
- ख़रीद के खर्च = 60,00,000 × 7% = ₹4,20,000।
- शुरू की अपनी रकम = 60,00,000 + 4,20,000 + 3,00,000 − 35,00,000 = ₹32,20,000।
- EMI = 35,00,000 पर 9% और 240 महीनों पर लगभग ₹31,490।
- 5 साल में चुकाई EMI = 31,490.41 × 60 = लगभग ₹18,89,425।
- 60 महीने बाद बकाया लोन लगभग ₹31,04,747।
- बिक्री क़ीमत = 60,00,000 × (1.05)^5 = लगभग ₹76,57,689।
- बिक्री खर्च = 1% = ₹76,577। हाथ आई रकम = 76,57,689 − 76,577 − 31,04,747 = लगभग ₹44,76,366।
- कुल किराया = 18,000 × 11 × 5 = ₹9,90,000। चलते खर्च = 36,000 × 5 = ₹1,80,000।
- कुल फ़ायदा = 44,76,366 + 9,90,000 − 1,80,000 − 18,89,425 − 32,20,000 = लगभग ₹1,76,941।
- ROI = 1,76,941 ÷ (32,20,000 + 18,89,425) = 1,76,941 ÷ 51,09,425 = लगभग 3.46%।
- सालाना IRR लगभग 0.93%।
अब यही सौदा बिना लोन के सोचिए। तब शुरुआती रकम ₹67,20,000 होती, और कुल फ़ायदा लगभग ₹16,71,112। ROI लगभग 24.87% और सालाना IRR लगभग 4.79% आता। यानी इस उदाहरण में लोन ने रिटर्न बढ़ाया नहीं, घटाया, क्योंकि 9% का ब्याज प्रॉपर्टी की कुल कमाई (किराया लगभग 3.3% और भाव की बढ़त 5%) से भारी पड़ा।
भाव की बढ़त बदलकर देखिए। इसी लोन वाले सौदे में बढ़त 0% रहे तो कुल नतीजा लगभग −₹14,64,171 और ROI −28.66% बनता है। बढ़त 6% रहे तो फ़ायदा ₹5,44,889 और ROI 10.66% होता है। बढ़त 9% पर फ़ायदा ₹17,35,255 और ROI 33.96% है। यह तालिका दिखाती है कि लोन के साथ नतीजा भाव की बढ़त पर कितना निर्भर है।