दुकान का मुनाफ़ा, margin और markup

Profit, Margin & Markup Calculator

ख़रीद और बिक्री भाव से मुनाफ़ा-नुकसान, margin और markup निकालें — या मनचाहे margin/markup के लिए बिक्री भाव तय करें।

  • मुनाफ़ा या नुकसान
  • Markup % (लागत पर)
  • Margin % (बिक्री पर)
  • मनचाहे % से बिक्री भाव
  • भाव और margin से लागत
  • कुल मात्रा का हिसाब
आशुग्या की सलाहलागत पर 25% चढ़ाने से margin 25% नहीं, 20% बनता है - भाव तय करते समय markup और margin का फ़र्क़ याद रखें।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Profit = selling price − cost price (negative = loss). Profit % / markup = profit ÷ cost × 100. Margin % = profit ÷ selling price × 100. Selling price for a markup = cost × (1 + markup ÷ 100); for a margin = cost ÷ (1 − margin ÷ 100). Cost from a price and margin = price × (1 − margin ÷ 100). Totals multiply the per-unit figures by the quantity.

मुनाफ़ा = बिक्री भाव − लागत भाव (ऋण = नुकसान)। Profit % / markup = मुनाफ़ा ÷ लागत × 100। Margin % = मुनाफ़ा ÷ बिक्री भाव × 100। markup के लिए बिक्री भाव = लागत × (1 + markup ÷ 100); margin के लिए = लागत ÷ (1 − margin ÷ 100)। भाव और margin से लागत = भाव × (1 − margin ÷ 100)। कुल रकम = प्रति यूनिट रकम × मात्रा।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 11 Oct 2026

Profit, margin और markup में फ़र्क़ क्या है?

  • मुनाफ़ा (Profit) = बिक्री भाव − लागत भाव। नतीजा ऋण में हो तो वह नुकसान (Loss) है।
  • Profit % (या markup) = मुनाफ़ा ÷ लागत × 100। यानी लागत पर कितना चढ़ाया गया।
  • Margin % = मुनाफ़ा ÷ बिक्री भाव × 100। यानी बिक्री की रकम का कितना हिस्सा मुनाफ़ा है — इसलिए margin हमेशा markup से कम होता है। 25% markup का margin 20% बनता है।
  • मनचाहे markup के लिए बिक्री भाव = लागत × (1 + markup ÷ 100); मनचाहे margin के लिए बिक्री भाव = लागत ÷ (1 − margin ÷ 100)।
  • GST और दूसरे ख़र्च (किराया, बिजली, तनख्वाह) अलग से जोड़ें — यह टूल सिर्फ़ चीज़ की लागत और बिक्री भाव पर गणित करता है।

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How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

Profit = selling price − cost price (negative = loss). Profit % / markup = profit ÷ cost × 100. Margin % = profit ÷ selling price × 100. Selling price for a markup = cost × (1 + markup ÷ 100); for a margin = cost ÷ (1 − margin ÷ 100). Cost from a price and margin = price × (1 − margin ÷ 100). Totals multiply the per-unit figures by the quantity.

मुनाफ़ा = बिक्री भाव − लागत भाव (ऋण = नुकसान)। Profit % / markup = मुनाफ़ा ÷ लागत × 100। Margin % = मुनाफ़ा ÷ बिक्री भाव × 100। markup के लिए बिक्री भाव = लागत × (1 + markup ÷ 100); margin के लिए = लागत ÷ (1 − margin ÷ 100)। भाव और margin से लागत = भाव × (1 − margin ÷ 100)। कुल रकम = प्रति यूनिट रकम × मात्रा।

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 11 Oct 2026

Estimate only, for learning — not advice. This tool does plain arithmetic on the cost and price you enter. It ignores GST, discounts, returns and overheads, so real profit can be lower. It is not accounting or tax advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह टूल आपके डाले लागत और भाव पर सीधा गणित करता है। GST, डिस्काउंट, रिटर्न और ऊपरी ख़र्च इसमें शामिल नहीं हैं, इसलिए असली मुनाफ़ा कम हो सकता है। यह अकाउंटिंग या टैक्स सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
  • Markup मुनाफ़े को लागत से भाग देकर निकलता है और margin बिक्री भाव से। इसीलिए एक ही सौदे में markup हमेशा margin से बड़ा दिखता है।
  • चार तरीक़े हैं: लागत और भाव से मुनाफ़ा, मनचाहे markup का भाव, मनचाहे margin का भाव, और भाव व margin से लागत।
  • प्रति यूनिट के साथ मात्रा से कुल लागत, कुल बिक्री और कुल मुनाफ़ा या नुकसान भी दिखता है।
  • यह सिर्फ़ चीज़ की लागत और भाव का गणित है। किराया, बिजली, तनख़्वाह, GST और छूट अलग से घटाने होंगे।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

लता: किराना दुकान, 50 पैकेट

लता एक पैकेट ₹800 में ख़रीदती है और ₹1,000 में बेचती है। उसने 50 पैकेट बेचे। (पेज के पहले मोड का डिफ़ॉल्ट भाव)

प्रति यूनिट मुनाफ़ा
₹200
Profit % (markup)
25%
Margin %
20%
कुल लागत
₹40,000
कुल बिक्री
₹50,000
कुल मुनाफ़ा
₹10,000

यही सौदा एक ओर 25% और दूसरी ओर 20% दिखता है, क्योंकि हर बार भाग की रकम अलग है। दुकानदार किसकी बात कर रहा है, यह पहले साफ़ करें।

जावेद: 30% margin चाहिए, 30% markup नहीं

जावेद की एक चीज़ की लागत ₹600 है। वह 30% margin चाहता है, पर आदत में लागत पर 30% जोड़ने की सोच रहा था।

लागत × 1.30 रखने पर भाव
₹780
तब असली margin
लगभग 23.08%
30% margin के लिए भाव
लगभग ₹857.14
यानी असल में markup
लगभग 42.86%
प्रति यूनिट मुनाफ़ा (₹857.14 पर)
लगभग ₹257.14

30% margin चाहिए तो लागत पर लगभग 43% जोड़ना पड़ता है, 30% नहीं। इसी भ्रम से कई दुकानदारों का margin अनजाने में कम रह जाता है।

सुरेश: घाटे का सौदा

सुरेश ने एक चीज़ ₹450 में ख़रीदी और सेल में ₹400 में बेची। कुल 20 यूनिट बिकीं।

प्रति यूनिट नुकसान
₹50
Profit % (लागत पर)
लगभग −11.11%
Margin % (बिक्री पर)
−12.5%
कुल लागत / कुल बिक्री
₹9,000 / ₹8,000
कुल नुकसान
₹1,000

पेज नुकसान को भी साफ़ दिखाता है। घाटे का सौदा भी कई बार ठीक होता है (बचा माल निकालना), पर उसका असर कुल रकम में देख लेना चाहिए।

Markup से margin का रिश्ता

Markup से margin का रिश्ता
Markup (लागत पर)Margin (बिक्री पर)लागत ₹800 हो तो भाव
10%9.09%₹880
20%16.67%₹960
25%20.00%₹1,000
30%23.08%₹1,040
40%28.57%₹1,120
50%33.33%₹1,200
100%50.00%₹1,600

Margin = markup ÷ (100 + markup) × 100। लागत ₹800 मानी गई है; प्रतिशत लागत की रकम पर निर्भर नहीं करते।

मनचाहे margin के लिए भाव और markup (लागत ₹800)

मनचाहे margin के लिए भाव और markup (लागत ₹800)
चाहा हुआ marginबिक्री भावप्रति यूनिट मुनाफ़ायानी markup
10%₹888.89₹88.8911.11%
20%₹1,000.00₹200.0025.00%
25%₹1,066.67₹266.6733.33%
30%₹1,142.86₹342.8642.86%
40%₹1,333.33₹533.3366.67%
50%₹1,600.00₹800.00100.00%

बिक्री भाव = लागत ÷ (1 − margin ÷ 100)। 100% या उससे ज़्यादा margin संभव नहीं, इसलिए पेज उसे स्वीकार नहीं करता।

त्वरित संदर्भ: मुनाफ़े के चार हिसाब

त्वरित संदर्भ: मुनाफ़े के चार हिसाब
मुनाफ़ाबिक्री भाव − लागत भाव (ऋण हो तो नुकसान)
Profit % / markupमुनाफ़ा ÷ लागत × 100
Margin %मुनाफ़ा ÷ बिक्री भाव × 100
मनचाहे markup का भावलागत × (1 + markup ÷ 100)
मनचाहे margin का भावलागत ÷ (1 − margin ÷ 100)
भाव और margin से लागतभाव × (1 − margin ÷ 100)
कुल रकमप्रति यूनिट रकम × मात्रा
इस पेज में क्या नहींGST, किराया, बिजली, तनख़्वाह, ढुलाई, छूट, वापसी और अन्य संचालन ख़र्च।

Profit, Margin और Markup Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

छोटे कारोबार में सबसे आम सवाल यही है: "मैंने माल इस भाव पर लिया, इस भाव पर बेचा, तो कितना बचा?" और उतना ही आम दूसरा सवाल: "मुझे 25% कमाना है, तो भाव क्या रखूँ?" Profit, Margin और Markup Calculator इन दोनों सवालों को चार अलग तरीक़ों से हल करता है। यह दुकानदारों, थोक व्यापारियों, ऑनलाइन विक्रेताओं, कारीगरों और घर से सामान बेचने वालों के लिए बना है।

पेज के ऊपर एक चुनाव है, "आप क्या निकालना चाहते हैं?", जिसमें चार विकल्प हैं:

  1. लागत और बिक्री भाव से मुनाफ़ा या नुकसान: आप दोनों भाव बताते हैं, टूल मुनाफ़ा (या नुकसान), markup और margin बताता है।
  2. मनचाहे markup % के लिए बिक्री भाव: आप लागत और चाहा हुआ markup बताते हैं, टूल बिक्री भाव बताता है।
  3. मनचाहे margin % के लिए बिक्री भाव: आप लागत और चाहा हुआ margin बताते हैं, टूल बिक्री भाव बताता है।
  4. बिक्री भाव और margin से लागत: आप बिक्री भाव और margin बताते हैं, टूल बताता है कि लागत कितनी रही होगी।

एक ही पेज पर तीनों शब्द, यानी profit, markup और margin, साथ-साथ दिखाई देते हैं, और यहीं से इनका फ़र्क़ समझ आता है, जो आगे विस्तार से बताया गया है।

किसके काम का है

  • किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स या हार्डवेयर के दुकानदार, जिन्हें हर नए माल पर बिक्री भाव तय करना होता है।
  • थोक व्यापारी और वितरक, जो ख़ुदरा विक्रेता को देने का भाव तय करते हैं और अपने margin का हिसाब रखते हैं।
  • ऑनलाइन विक्रेता और घर से सामान बेचने वाले, जिन्हें पैकिंग और लागत के बाद मुनाफ़ा देखना है।
  • कारीगर और छोटे उत्पादक, जैसे अचार, मिठाई, हस्तशिल्प बनाने वाले, जो अपनी लागत पर कितना चढ़ाएँ यह जानना चाहते हैं।
  • वाणिज्य के विद्यार्थी, जो margin और markup का फ़र्क़ संख्याओं से देखना चाहते हैं।
  • फ्रीलांसर, जो अपनी सेवा की लागत पर एक निश्चित margin रखना चाहते हैं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर तीन संख्या वाले बॉक्स हैं और ऊपर वाला चुनाव। पहले दो बॉक्स के नाम चुनाव के हिसाब से अपने आप बदलते हैं।

  • पहला बॉक्स "a": पहले तीन विकल्पों में यह "लागत भाव प्रति यूनिट (₹)" है। चौथे विकल्प में यह "बिक्री भाव प्रति यूनिट (₹)" बन जाता है।
  • दूसरा बॉक्स "b": पहले विकल्प में "बिक्री भाव प्रति यूनिट (₹)"; दूसरे में "चाहा हुआ markup (%)"; तीसरे में "चाहा हुआ margin (%)"; चौथे में "margin (%)"।
  • मात्रा (यूनिट): आपने कितनी इकाइयाँ ख़रीदीं या बेचीं। कम से कम 1। पूर्णांक में गिनी जाती है। इससे प्रति यूनिट के आँकड़े कुल आँकड़ों में बदलते हैं।

जब आप ऊपर का चुनाव बदलते हैं, तो टूल उस चुनाव के उदाहरण वाले आँकड़े अपने आप भर देता है (जैसे पहले विकल्प के लिए लागत 800, बिक्री भाव 1,000; दूसरे के लिए लागत 800, markup 25%)। इसलिए चुनाव बदलने के बाद अपने असली आँकड़े दोबारा भरना न भूलें।

ध्यान दें: लागत भाव में वही चीज़ें जोड़ें जो उस चीज़ को आप तक लाने में लगीं, जैसे ख़रीद भाव, ढुलाई और पैकिंग। किराया, बिजली और तनख्वाह जैसे ऊपरी ख़र्च इस टूल में अलग से नहीं जुड़ते।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में चुने हुए सवाल का जवाब आता है।

  • पहले विकल्प में: "मुनाफ़ा" या "नुकसान" की कुल रकम, उसके नीचे प्रति यूनिट और कुल।
  • दूसरे और तीसरे में: बिक्री भाव (प्रति यूनिट)।
  • चौथे में: लागत भाव (प्रति यूनिट)।

उसके नीचे आठ पंक्तियाँ हर बार आती हैं:

  1. लागत (प्रति यूनिट)
  2. बिक्री भाव (प्रति यूनिट)
  3. मुनाफ़ा या नुकसान (प्रति यूनिट): नुकसान हो तो ऋण चिह्न के साथ और लाल रंग में।
  4. Profit % (markup), लागत पर: मुनाफ़ा भाग लागत x 100।
  5. Margin %, बिक्री पर: मुनाफ़ा भाग बिक्री भाव x 100।
  6. कुल लागत: लागत x मात्रा।
  7. कुल बिक्री: बिक्री भाव x मात्रा।
  8. कुल मुनाफ़ा या नुकसान।

अगर मुनाफ़ा है, तो एक पाई चार्ट बिक्री की रकम में लागत और मुनाफ़े का हिस्सा दिखाता है। साथ में नतीजे का सार लिंक या WhatsApp पर भेजा जा सकता है। पेज में एक भरोसा-बॉक्स भी है जहाँ सूत्र लिखे हैं।

Markup और margin का फ़र्क़

दोनों में मुनाफ़ा एक ही होता है, पर भाग देने वाली रकम अलग होती है। Markup में मुनाफ़ा लागत से भाग दिया जाता है, यानी "लागत पर कितना चढ़ाया।" Margin में मुनाफ़ा बिक्री भाव से भाग दिया जाता है, यानी "बिक्री की हर सौ रुपये की रकम में कितना बचा।" इसलिए margin हमेशा markup से कम होता है। 25% markup का मतलब 20% margin, और 50% markup का मतलब सिर्फ़ 33.33% margin।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • पहले लागत की सच्चाई जानें। लागत में ढुलाई, पैकिंग, टूट-फूट और क्रेडिट कार्ड के शुल्क जैसी चीज़ें जोड़कर ही लागत भाव डालें।
  • margin से भाव तय करें, markup से नहीं। अगर आपका लक्ष्य "बिक्री की रकम का इतना प्रतिशत बचे" है, तो तीसरा विकल्प चुनें। इससे आप अपने ऊपरी ख़र्चों से सीधे तुलना कर पाते हैं।
  • मात्रा बदलकर कुल लाभ देखें। कम margin पर ज़्यादा बिक्री और ज़्यादा margin पर कम बिक्री की तुलना कुल मुनाफ़े से करें।
  • GST अलग से जोड़ें। टूल जो भाव देता है, उस पर GST चालान में अलग दिखाना होता है। उसके लिए GST Calculator देखें।
  • छूट देने से पहले जाँचें। 10% छूट का मतलब है कि बिक्री भाव घटा, और margin उससे ज़्यादा घट सकता है। छूट वाले भाव को पहले विकल्प में डालकर नया margin देखें।
  • हर नए माल पर चारों विकल्प न चलाएँ। आम तौर पर तीसरा (भाव तय करना) और पहला (जाँच करना) काफ़ी हैं।
  • रिपोर्ट सहेजें। हर प्रोडक्ट के आँकड़े का सार बनाकर नोटबुक या शीट में रखें।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • markup और margin को एक समझना। सबसे आम ग़लती। 50% markup और 50% margin बिल्कुल अलग हैं: 50% markup में लागत ₹100 पर बिक्री ₹150 होती है, जबकि 50% margin में बिक्री ₹200 होती है।
  • मुनाफ़े को ही बचत समझ लेना। यह सिर्फ़ माल पर कमाई है। इसमें से किराया, बिजली, मज़दूरी और टैक्स देने के बाद जो बचे वही असली कमाई है।
  • GST को लागत या बिक्री में मिलाकर देखना। अगर बिक्री भाव में GST शामिल है तो असली बिक्री भाव उससे कम है। पहले GST अलग करें, फिर margin निकालें।
  • छूट और रिटर्न भूल जाना। कई दुकानों में ग्राहक बिना बिल के कुछ छूट माँगते हैं या माल वापस करते हैं, जिससे असली margin घटता है।
  • नुकसान को सिर्फ़ ऋण चिह्न में देखना। नुकसान वाले आँकड़े में markup और margin दोनों ऋणात्मक आते हैं, और दोनों का अनुपात अलग होता है।
  • margin 100% पर या उससे ऊपर माँगना। यह गणित के हिसाब से संभव नहीं (बिक्री भाव लागत से अनंत गुना), इसलिए टूल इस पर चेतावनी देता है।
  • प्रति यूनिट और कुल को गड़बड़ाना। मात्रा बदलने पर कुल रकमें बदलती हैं, प्रति यूनिट वाला प्रतिशत नहीं।
  • हर चीज़ पर एक-सा margin रखना। तेज़ बिकने वाली चीज़ों पर कम और धीमी चीज़ों पर ज़्यादा margin रखना आम रणनीति है, पर यह आपके कारोबार की स्थिति पर निर्भर है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

हर प्रति यूनिट के लिए:

  • मुनाफ़ा = बिक्री भाव - लागत भाव (ऋणात्मक हो तो नुकसान)
  • Markup % = मुनाफ़ा / लागत x 100
  • Margin % = मुनाफ़ा / बिक्री भाव x 100

चार विकल्पों के सूत्र:

  1. मुनाफ़ा/नुकसान: लागत और बिक्री भाव सीधे आपके दिए हुए। बाक़ी सब ऊपर के सूत्रों से।
  2. मनचाहे markup के लिए: बिक्री भाव = लागत x (1 + markup / 100)
  3. मनचाहे margin के लिए: बिक्री भाव = लागत / (1 - margin / 100)
  4. बिक्री भाव और margin से लागत: लागत = बिक्री भाव x (1 - margin / 100)

कुल आँकड़े प्रति यूनिट के आँकड़ों को मात्रा से गुणा करके बनते हैं। सीमाएँ: लागत शून्य से ज़्यादा होनी चाहिए, margin 100% से कम होना चाहिए (वरना बिक्री भाव अनंत बन जाएगा या लागत ऋणात्मक), और मात्रा कम से कम 1 रहेगी। प्रतिशत दो दशमलव तक गोल किए जाते हैं।

इस टूल की मान्यताएँ: जो भाव आप डालते हैं वही अंतिम माने जाते हैं, GST, छूट, रिटर्न और अन्य शुल्क इसमें अलग से नहीं घटते या जुड़ते।

एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: सामान्य मुनाफ़ा

मान लीजिए रमेश की स्टेशनरी की दुकान है। उन्होंने एक बैग प्रति नग ₹640 की लागत (ढुलाई समेत) पर लिया और ₹800 में बेचते हैं। इस हफ़्ते उन्होंने 25 बैग बेचे। पहला विकल्प चुनें: लागत 640, बिक्री भाव 800, मात्रा 25।

  • प्रति यूनिट मुनाफ़ा = 800 - 640 = ₹160
  • Markup = 160 / 640 x 100 = 25%
  • Margin = 160 / 800 x 100 = 20%
  • कुल लागत = 640 x 25 = ₹16,000
  • कुल बिक्री = 800 x 25 = ₹20,000
  • कुल मुनाफ़ा = ₹4,000

यानी वही 25% markup बिक्री पर 20% margin है। यानी ₹20,000 की बिक्री में से ₹4,000 माल पर बचत है, और किराया-बिजली जैसे ख़र्च इसी में से निकलेंगे।

उदाहरण 2: नुकसान

ज़रीना ने त्योहार के बाद बचा हुआ सजावटी सामान ₹450 की लागत वाला ₹420 में निकाला, 30 नग। पहला विकल्प चुनने पर:

  • प्रति यूनिट = 420 - 450 = -₹30 (नुकसान)
  • Markup = -30 / 450 x 100 = लगभग -6.67%
  • Margin = -30 / 420 x 100 = लगभग -7.14%
  • कुल = -₹900

टूल "नुकसान" लिखेगा और रकम लाल रंग में दिखाएगा।

उदाहरण 3: मनचाहा भाव तय करना

मान लीजिए एक मिठाई-निर्माता की लागत ₹350 प्रति नग है।

  • 30% markup चाहिए: बिक्री भाव = 350 x 1.30 = ₹455। मुनाफ़ा = ₹105।
  • 30% margin चाहिए: बिक्री भाव = 350 / (1 - 0.30) = ₹500। मुनाफ़ा = ₹150, जो लागत का लगभग 42.86% है।

यानी वही "30%" शब्द, पर बिक्री भाव ₹455 बनाम ₹500। इसीलिए हमेशा साफ़ पूछिए कि सामने वाला markup की बात कर रहा है या margin की।

उदाहरण 4: लागत का अंदाज़ा

एक विक्रेता ₹1,200 पर वस्तु बेचता है और बताता है कि उसका margin 35% है। चौथा विकल्प चुनें: लागत = 1,200 x (1 - 0.35) = ₹780। मुनाफ़ा ₹420, जो लागत पर लगभग 53.85% markup है।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह केवल सीधा गणित करता है। GST, डिस्काउंट, रिटर्न, कमीशन और ऊपरी ख़र्च इसमें शामिल नहीं हैं, इसलिए असली मुनाफ़ा कम हो सकता है।
  • यह आपकी कुल कमाई, ब्रेक-ईवन बिंदु या सालाना टैक्स का हिसाब नहीं करता।
  • यह बाज़ार की प्रतिस्पर्धा या ग्राहक कितना भाव मानेगा, यह नहीं बताता।
  • एक ही भाव पर पूरी मात्रा मान ली गई है। अलग-अलग भाव पर बिक्री के लिए अलग हिसाब करना होगा।
  • गोलाई के कारण आख़िरी अंक में थोड़ा अंतर आ सकता है।
  • यह अकाउंटिंग या टैक्स सलाह नहीं है। बही-खाते और टैक्स के लिए योग्य सलाहकार से मिलें।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Break-even Margin Calculator: कारोबार में न नफ़ा न नुकसान का बिंदु।
  • GST Calculator: भाव में GST जोड़ने या हटाने के लिए।
  • Invoice Generator: ग्राहक के लिए बिल बनाने के लिए।
  • Percentage Calculator: छूट और प्रतिशत की सरल गणना।
  • Presumptive Tax Calculator: छोटे कारोबार पर आयकर का एक पहलू।
  • Budget Calculator: घर और कारोबार के ख़र्चों का हिसाब।

भाव तय करना एक कला है, पर उसके नीचे गणित होना ज़रूरी है। जब आप जानते हैं कि आपका margin कितना है, तब छूट, मोलभाव और नए माल पर फ़ैसला आत्मविश्वास से हो पाता है।

यह सामग्री केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है, अकाउंटिंग, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। अपने कारोबार के बही-खाते और टैक्स के लिए योग्य सलाहकार से परामर्श लें।

6 काम की बातें याद रखें

1
शब्द पहले तय करें

किसी से "25% मुनाफ़ा" सुनें तो पूछें: लागत पर या बिक्री पर। दोनों में बड़ा फ़र्क़ है और नतीजे अलग निकलते हैं।

2
छूट देने से पहले देखें

लागत ₹800 और भाव ₹1,000 पर 10% छूट देने से भाव ₹900 हो जाता है। तब markup 12.5% और margin लगभग 11.11% रह जाता है, यानी मुनाफ़ा आधे से कम।

3
ख़र्च अलग से जोड़ें

दुकान का किराया, कर्मचारी और बिजली इस हिसाब के बाहर हैं। पूरा मुनाफ़ा जानने के लिए प्रति यूनिट इनका हिस्सा भी लागत में जोड़कर देखें।

4
GST को अलग रखें

भाव GST सहित है या GST के बिना, यह साफ़ रखें। GST वाली रकम आपकी कमाई नहीं होती।

5
मात्रा के साथ चलाएँ

प्रति यूनिट छोटा मुनाफ़ा भी बड़ी मात्रा में बड़ी रकम बनता है, और घाटा भी। मात्रा बदलकर कुल असर देखें।

6
भाव तय करने में margin का तरीक़ा

अगर कुल बिक्री का एक तय हिस्सा मुनाफ़े में चाहिए तो margin वाला मोड चुनें; इससे ग़लती से कम भाव रखने का जोखिम घटता है।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Markup मुनाफ़े को लागत से भाग देकर निकलता है, जबकि margin उसे बिक्री भाव से भाग देकर। इसलिए एक ही सौदे में markup हमेशा margin से ज़्यादा दिखता है; 25% markup का margin 20% होता है।

Profit % = (बिक्री भाव − लागत भाव) ÷ लागत भाव × 100। जैसे लागत ₹800 और बिक्री ₹1,000 हो तो मुनाफ़ा ₹200 और profit % 25% है।

बिक्री भाव = लागत ÷ (1 − margin ÷ 100)। लागत ₹800 और 20% margin चाहिए तो भाव ₹1,000 रखना होगा। लागत × 1.20 रखने से सिर्फ़ 16.7% margin मिलेगा।

नहीं। यह सिर्फ़ चीज़ की लागत और बिक्री भाव पर गणित करता है। असली मुनाफ़े के लिए किराया, बिजली, तनख्वाह और GST जैसे ख़र्च अलग से घटाने होंगे।

दोनों। भाव तय करते समय markup सहज लगता है, पर कुल बिक्री में मुनाफ़े का हिस्सा margin बताता है। इसलिए दोनों साथ देखना ठीक है।

Markup (लागत पर) 100% से ऊपर जा सकता है, जैसे लागत ₹100 और भाव ₹300 पर 200%। पर margin (बिक्री पर) कभी 100% या उससे ज़्यादा नहीं हो सकता।

पेज संदेश देगा कि margin 100% से कम होना चाहिए, क्योंकि 100% margin का मतलब लागत शून्य होना होगा।

पेज भाव 0 से ज़्यादा डालने को कहेगा, क्योंकि लागत पर प्रतिशत शून्य से भाग देकर नहीं निकल सकता।

हेडलाइन में "नुकसान" दिखता है, प्रतिशत ऋण में आते हैं और कुल रकम भी ऋण में दिखती है।

मोड बदलने पर पेज उस मोड का उदाहरण भर देता है ताकि कोई बॉक्स खाली न रहे। चाहें तो अपनी संख्या डाल दें।

क्योंकि कुल मुनाफ़ा प्रति यूनिट की रकम को गिनी हुई इकाइयों से गुणा करके निकलता है। आधी यूनिट की स्थिति में भाव का पैमाना बदलकर डालें।

नहीं। जो भाव आप डालेंगे, उसे वैसे ही लिया जाता है। GST शामिल है या नहीं, यह आपको तय करके एकसमान भाव डालना है।

हाँ, गणित वही है। पर थोक में मात्रा-छूट, भुगतान की अवधि और उधार की लागत अलग असर डालते हैं, जो इसमें नहीं हैं।

नहीं। यह एक चीज़ या सौदे का सकल (gross) मुनाफ़ा बताता है। किराया, तनख़्वाह, कर्ज़ का ब्याज और कर घटाने के बाद ही शुद्ध लाभ बनता है।

पेज इन्हें नहीं गिनता। ऐसे नुकसान को लागत में जोड़कर, यानी असली प्रभावी लागत डालकर, हिसाब लगाया जा सकता है।

नहीं। आयात शुल्क, ढुलाई और विनिमय की लागत लागत भाव में जोड़कर ही डालें, तभी नतीजा सही बनेगा। शुल्क के लिए Import Duty Calculator देखें।

नहीं। यह सिर्फ़ गणित है। प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों की माँग और बाज़ार की स्थिति देखकर आप ख़ुद भाव तय करें।

यह वस्तु या सेवा बेचने के हिसाब के लिए है। शेयर में खरीद-बिक्री का लाभ-हानि, ब्रोकरेज और कर के साथ अलग calculator में देखें।

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