Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice. नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।
हेल्थ कवर की "कमी" का मतलब क्या है?
बड़े बिल का जो हिस्सा बीमा नहीं देता, वह आपकी जेब से जाता है। यही हिस्सा यहाँ "कमी" है। यह co-pay, कवर की सीमा और बिल के आकार से बनता है।
ऑफ़िस का ग्रुप कवर नौकरी बदलने या छूटने पर ख़त्म हो सकता है। इसलिए पेज दोनों स्थितियाँ दिखाता है: ग्रुप कवर के साथ और उसके बिना।
मेडिकल ख़र्च महँगाई से तेज़ बढ़ सकता है। अगर आज का कवर आज के बिल के लिए ठीक है, तो सालों बाद वही कवर कम पड़ सकता है। महँगाई का % यहाँ आपका अनुमान है।
For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।
How this is calculated / यह कैसे निकाला गया
Insurer pays base = min(bill x (1 - co-pay %), cover). A super top-up with deductible equal to the base cover pays min(top-up cover, max(0, bill x (1 - co-pay %) - base cover)). Out of pocket = bill - base - top-up. Future bill = bill x (1 + medical inflation %)^years. Additional own cover needed = max(0, future bill x (1 - co-pay %) - (own cover + top-up)). All bills, inflation and co-pay are user inputs (flagged examples).
बीमा कंपनी का भुगतान (बेस) = min(बिल x (1 - co-pay %), कवर)। बेस कवर के बराबर deductible वाला super top-up min(top-up कवर, max(0, बिल x (1 - co-pay %) - बेस कवर)) देता है। जेब से = बिल - बेस - top-up। आगे का बिल = बिल x (1 + मेडिकल महँगाई %)^साल। अतिरिक्त ज़रूरी अपना कवर = max(0, आगे का बिल x (1 - co-pay %) - (अपना कवर + top-up))। बिल, महँगाई और co-pay आपके इनपुट हैं (उदाहरण के साथ)।
Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 14 Oct 2026
Estimate only, for learning — not advice. Educational tool. Hospital bills, medical inflation and co-pay are user-entered examples. Real claims depend on room-rent limits, sub-limits, waiting periods, exclusions and non-payable items, none of which are modelled. Not insurance advice. Returns are not guaranteed and actual results will differ; this is not investment, tax or financial advice. Please speak to a SEBI-registered adviser or a qualified professional before you decide.
सिर्फ़ अनुमान, सीखने के लिए — सलाह नहीं। यह शैक्षणिक टूल है। अस्पताल के बिल, मेडिकल महँगाई और co-pay आपके डाले उदाहरण हैं। असली क्लेम कमरे के किराये की सीमा, उप-सीमाओं, प्रतीक्षा अवधि, अपवाद और non-payable मदों पर निर्भर होता है; ये यहाँ नहीं गिने गए। यह बीमा सलाह नहीं है। रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और असली नतीजे अलग होंगे; यह निवेश, कर या वित्तीय सलाह नहीं है। फ़ैसला लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से बात करें।
संक्षेप में
कमी वही हिस्सा है जो बिल में से बीमा नहीं देता: co-pay, कवर की सीमा से ऊपर का बिल और बाक़ी सब।
ऑफ़िस का ग्रुप कवर नौकरी के साथ चलता है। इसलिए अपना कवर कितना है, यह उसे अलग करके देखिए।
सालों बाद का बिल आज से कई गुना हो सकता है। महँगाई का % यहाँ अनुमान है, तथ्य नहीं।
Super top-up अक्सर कम प्रीमियम में ऊँचा कवर देने का तरीक़ा होता है, पर शर्तें पढ़ना ज़रूरी है।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।
उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात
नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।
नेहा: ग्रुप कवर के सहारे
नेहा का अपना कवर ₹5,00,000, ऑफ़िस का ₹5,00,000, co-pay 10%; आज के हिसाब से ₹8,00,000 का बिल (सब उदाहरण)।
ग्रुप के साथ जेब से
₹80,000
ग्रुप के बिना जेब से
₹3,00,000
10 साल बाद का बिल (10% महँगाई)
₹20,74,994
10 साल बाद अपने कवर पर जेब से
₹15,74,994
अतिरिक्त कवर की ज़रूरत (लगभग)
₹13,67,495
ग्रुप कवर के साथ सब ठीक दिखता है, पर नौकरी छूटते ही कमी चार गुना हो जाती है। अपना कवर बढ़ाने का सवाल यहीं से शुरू होता है।
परिवार: ₹10 लाख का super top-up जोड़ा
वही बिल और कवर, पर परिवार ने ₹10,00,000 का super top-up भी ले रखा है।
ग्रुप के बिना आज जेब से
₹80,000
10 साल बाद का बिल
₹20,74,994
10 साल बाद अपने कवर पर जेब से
₹5,74,994
अब भी कमी (लगभग)
₹3,67,495
top-up से कमी बहुत घटी, पर आगे के बिल पर थोड़ी बची रही। इसलिए कवर को समय-समय पर दोबारा जाँचते रहना अच्छा है।
अरुण: स्वरोज़गार, कोई ग्रुप कवर नहीं
अरुण का अपना कवर ₹10,00,000, co-pay नहीं; आज के हिसाब से ₹15,00,000 का बिल, 8% महँगाई, 15 साल आगे।
आज जेब से
₹5,00,000
15 साल बाद का बिल
₹47,58,254
15 साल बाद जेब से
₹37,58,254
₹20 लाख का top-up जोड़ने पर 15 साल बाद जेब से
₹17,58,254
लंबे समय में बिल इतना बढ़ सकता है कि आज का "ठीक-ठाक" कवर बहुत कम पड़े। top-up मदद करता है, पर कमी पूरी तरह तभी जाती है जब कवर बिल के हिसाब से बढ़ता रहे।
अलग-अलग बिल पर जेब से (अपना कवर ₹5 लाख, ग्रुप ₹5 लाख, co-pay 10%, top-up नहीं)
अलग-अलग बिल पर जेब से (अपना कवर ₹5 लाख, ग्रुप ₹5 लाख, co-pay 10%, top-up नहीं)
अस्पताल का बिल
ग्रुप के साथ जेब से
ग्रुप के बिना जेब से
₹3,00,000
₹30,000
₹30,000
₹5,00,000
₹50,000
₹50,000
₹8,00,000
₹80,000
₹3,00,000
₹15,00,000
₹5,00,000
₹10,00,000
₹25,00,000
₹15,00,000
₹20,00,000
छोटे बिल पर सिर्फ़ co-pay दिखता है। कवर की सीमा पार होते ही जेब का हिस्सा तेज़ी से बढ़ता है।
नौकरी के साथ चलता है; पॉलिसी में परिवार, अवधि और कवर अलग देखें
Co-pay
हर क्लेम में आपका तय हिस्सा, कुछ पॉलिसी में
कमरे के किराये की सीमा
ज़्यादा किराये का कमरा लेने पर पूरे बिल में कटौती हो सकती है
इस पेज में क्या नहीं
कमरे का किराया, उप-सीमा, प्रतीक्षा अवधि, non-payable मदें
Health Insurance Gap Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?
सरल व्याख्या
यह calculator क्या करता है
ज़्यादातर लोग हेल्थ इंश्योरेंस इस सोच से लेते हैं कि "कवर है, तो अस्पताल का बिल बीमा भर देगा।" असल में बिल का एक हिस्सा अक्सर जेब से भी जाता है। कभी कवर की सीमा कम पड़ जाती है, कभी co-pay कट जाता है, और कभी नौकरी का कवर साथ छोड़ देता है। Health Insurance Gap Calculator इसी बचे हुए हिस्से को, यानी "कवर में कमी" को, संख्या में दिखाता है।
आप अपना निजी कवर, ऑफ़िस का ग्रुप कवर, अगर कोई super top-up है तो उसकी रकम, co-pay का प्रतिशत, एक सोचा हुआ बड़ा अस्पताल बिल और मेडिकल ख़र्च की सालाना बढ़त डालते हैं। calculator बताता है कि आज के बिल पर, ग्रुप कवर के साथ और उसके बिना, आपकी जेब से कितना जाएगा। फिर वह वही बिल कुछ साल आगे बढ़ाकर दिखाता है और बताता है कि तब आपके अपने कवर में कितनी कमी रह सकती है। साथ में एक तालिका अलग-अलग बिलों के लिए वही हिसाब देती है, और एक चार्ट कवर और बिल को आमने-सामने रखता है।
एक ज़रूरी बात। यहाँ दिखने वाले बिल, co-pay और महँगाई सब उदाहरण हैं। असली अस्पताल का बिल शहर, इलाज और अस्पताल के हिसाब से बहुत अलग हो सकता है। इसलिए पेज आपको वही संख्या डालने देता है जो आपके परिवार और शहर के लिए ठीक लगे।
किसके काम का है
नौकरीपेशा लोग जिनका मुख्य कवर ऑफ़िस से मिलता है और जो नहीं जानते कि नौकरी बदलने पर क्या बचेगा।
स्वरोज़गार, दुकानदार और फ्रीलांसर, जिनके पास ग्रुप कवर है ही नहीं और जो अपना कवर ख़ुद तय करते हैं।
वे परिवार जो पुराने, कम राशि के कवर पर चल रहे हैं और जानना चाहते हैं कि क्या वह आज के बिलों के लिए काफ़ी है।
बेटे-बेटियाँ जो माता-पिता का कवर देख रहे हैं और top-up की ज़रूरत समझना चाहते हैं।
जो लोग नया कवर लेने से पहले यह जानना चाहते हैं कि कितनी रकम का कवर लेना ठीक रहेगा।
विद्यार्थी और शिक्षक जो co-pay, deductible और top-up जैसे शब्दों को संख्याओं में समझना चाहते हैं।
कौन-सी जानकारी डालनी होती है
पेज पर सात इनपुट हैं।
आपका अपना हेल्थ कवर (₹): वह कवर जो आपकी अपनी पॉलिसी से मिलता है और नौकरी पर निर्भर नहीं करता। फ़्लोटर हो तो पूरे परिवार का साझा कवर डालें। शुरुआती मान ₹5,00,000।
ऑफ़िस / ग्रुप का कवर (₹): नियोक्ता की ओर से मिला कवर। शुरुआती मान ₹5,00,000। नौकरी छूटने पर यह नहीं रहता, इसीलिए इसे अलग रखा गया है। न हो तो 0 डालें।
अपना super top-up कवर (₹): अगर आपने ऐसा अतिरिक्त कवर लिया है जो बेस कवर के ख़त्म होने पर शुरू होता है। शुरुआती मान 0। माना गया है कि उसकी deductible आपके अपने कवर के बराबर है।
Co-pay %: हर क्लेम में आपका तय हिस्सा, अगर आपकी पॉलिसी में हो। शुरुआती उदाहरण 10%। कई पॉलिसी में co-pay नहीं होता, तब 0 रखें।
सोचा हुआ बड़ा अस्पताल बिल, आज के भाव पर: एक गंभीर बीमारी या ऑपरेशन के संभावित बिल का आपका अनुमान। शुरुआती मान ₹8,00,000 सिर्फ़ उदाहरण है।
मेडिकल ख़र्च की सालाना बढ़त: आगे के बिल निकालने के लिए। शुरुआती मान 10% अनुमान है, तथ्य नहीं।
कितने साल आगे का बिल देखना है: शुरुआती मान 10 साल।
इन सबमें से "ग्रुप कवर" और "बिल" की संख्या वही डालिए जो आपके पास सचमुच हो या जिसके बारे में आपने पूछताछ की हो। ज़रूरत हो तो बिल की संख्या बदल-बदलकर कई तरह के हालात देख सकते हैं।
नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें
सबसे ऊपर की बड़ी संख्या है ग्रुप कवर के बिना, आज के बिल पर जेब से। उसके नीचे बताया जाता है कि ग्रुप कवर के साथ यही संख्या क्या होती। फिर सात पंक्तियाँ आती हैं।
अपना कवर + top-up: आपका वह कवर जो नौकरी से जुड़ा नहीं है।
ग्रुप कवर सहित कुल कवर: अपना कवर, ग्रुप कवर और top-up तीनों मिलाकर।
आज के बिल पर जेब से (ग्रुप कवर के साथ): वह हिस्सा जो अभी बिल आने पर आपको देना पड़ेगा, जब नौकरी चल रही हो।
आज के बिल पर जेब से (ग्रुप कवर के बिना): वही हिस्सा, जब ग्रुप कवर न हो। शून्य न हो तो लाल दिखता है।
आगे का अनुमानित बिल: आज का बिल, महँगाई के साथ चुने गए सालों तक बढ़ाकर।
आगे के बिल पर जेब से (अपने कवर पर): इस बढ़े बिल पर आपके अपने कवर की कमी।
आगे के लिए अतिरिक्त कवर, लगभग: अपने कवर को कितना बढ़ाना पड़ सकता है, ताकि co-pay छोड़कर बिल निपट जाए।
नीचे एक सूचना आती है। कमी हो तो वह चेतावनी के रूप में बताती है, नहीं हो तो साधारण सूचना देती है। फिर एक तालिका आती है जो ₹3 लाख, ₹5 लाख, ₹8 लाख, ₹15 लाख और ₹25 लाख के बिलों पर जेब से लगने वाली रकम ग्रुप कवर के साथ और बिना दिखाती है।
ध्यान दें: तालिका में छोटे बिलों पर दोनों कॉलम बराबर आएँगे, क्योंकि वहाँ सिर्फ़ co-pay दिखता है। फ़र्क़ तब उभरता है जब बिल आपके अपने कवर से ऊपर निकलता है।
इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके
पहले ग्रुप कवर शून्य करके देखिए। अगर ग्रुप कवर शून्य करने पर कमी बहुत बड़ी आती है, तो अपना कवर बढ़ाने की ज़रूरत मज़बूत है। यही पेज की सबसे काम की जाँच है।
बिल की कई संख्याएँ आज़माइए। एक ही बिल पर भरोसा न करें। तालिका की पाँच पंक्तियाँ बताती हैं कि छोटे, मध्यम और बड़े बिल पर आपकी स्थिति कैसे बदलती है।
अपने शहर के हिसाब से बिल का अनुमान लगाइए। मेट्रो शहर और छोटे शहर में एक जैसी बीमारी का बिल अलग हो सकता है। अपने अस्पताल की पूछताछ से अंदाज़ा लें।
महँगाई के दो अनुमान डालकर देखिए। एक कम और एक ज़्यादा। नतीजे की रेंज से आपको अपनी सुरक्षा का पैमाना मिलेगा।
top-up की रकम के साथ खेलिए। ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹20 लाख रखने पर कमी कैसे घटती है, यह देखकर तय करें कि कितना कवर आपके बजट में आता है।
परिवार के हर बड़े सदस्य के लिए अलग-अलग हिसाब करें। बुज़ुर्गों के लिए बड़े बिल का अनुमान रखें।
नतीजे को पॉलिसी के काग़ज़ से मिलाइए। कमरे के किराये की सीमा और प्रतीक्षा अवधि पढ़कर देखें कि असली कमी यहाँ दिखे अंकों से ज़्यादा तो नहीं।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
"ऑफ़िस का कवर है, तो मुझे और कुछ नहीं चाहिए।" ग्रुप कवर नौकरी बदलने, छूटने या रिटायरमेंट पर आम तौर पर ख़त्म हो जाता है। उसके बाद नया कवर लेना महँगा और कठिन हो सकता है, ख़ासकर अगर तब तक कोई बीमारी हो चुकी हो।
"कवर ₹10 लाख है, तो ₹10 लाख तक का बिल पूरा भरा जाएगा।" Co-pay, कमरे की सीमा और non-payable मदों की वजह से असली भुगतान कम हो सकता है। इसलिए यहाँ co-pay अलग से डाला जाता है।
"महँगाई बहुत कम है, सो आज का कवर हमेशा चलेगा।" मेडिकल ख़र्च अक्सर आम महँगाई से तेज़ बढ़ने की बात कही जाती है। यहाँ आप अपना अनुमान डालकर देख सकते हैं, पर उसे तय तथ्य न मानें।
"Top-up से सारी कमी चली जाएगी।" Top-up असरदार है, पर उसकी deductible और शर्तें होती हैं। यह सिर्फ़ तभी काम करता है जब बेस कवर की सीमा पार हो।
"फ़्लोटर का कवर हर सदस्य को पूरा मिलता है।" फ़्लोटर में कवर साझा होता है। एक सदस्य का बड़ा क्लेम बाक़ी के लिए कवर घटा सकता है।
"बिल की संख्या पक्की है।" यह सिर्फ़ अनुमान है। असली बिल बहुत ऊपर या नीचे हो सकता है। इसलिए कई संख्याएँ आज़माएँ।
"कमी शून्य है तो अब कुछ नहीं करना।" शून्य कमी इस सरल मॉडल में दिखती है। असली पॉलिसी में अपवाद और उप-सीमाएँ होती हैं, इसलिए पॉलिसी पढ़ते रहना ज़रूरी है।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है
हिसाब कुछ सरल चरणों में होता है।
बीमा-योग्य बिल = बिल x (1 − co-pay %)।
बेस कवर का भुगतान = बीमा-योग्य बिल और कवर में जो छोटा हो।
Top-up का भुगतान = top-up कवर और max(0, बीमा-योग्य बिल − बेस कवर) में जो छोटा हो।
जेब से = बिल − बेस भुगतान − top-up भुगतान।
आगे का बिल = आज का बिल x (1 + महँगाई %)^साल।
अतिरिक्त कवर की ज़रूरत = max(0, आगे का बिल x (1 − co-pay %) − (अपना कवर + top-up))।
ग्रुप कवर के साथ वाले हिसाब में बेस कवर के रूप में अपना और ग्रुप कवर दोनों जोड़ दिए जाते हैं।
आम ग़लतियाँ और भ्रम
क़दम
सूत्र
मान (शुरुआती उदाहरण)
बीमा-योग्य बिल
8,00,000 x 0.90
₹7,20,000
ग्रुप के साथ बेस भुगतान
min(7,20,000, 10,00,000)
₹7,20,000
ग्रुप के साथ जेब से
8,00,000 − 7,20,000
₹80,000
ग्रुप के बिना बेस भुगतान
min(7,20,000, 5,00,000)
₹5,00,000
ग्रुप के बिना जेब से
8,00,000 − 5,00,000
₹3,00,000
मान्यताएँ: कमरे के किराये की सीमा, उप-सीमा, प्रतीक्षा अवधि और non-payable मदें नहीं गिनी गईं। Co-pay पूरे बिल पर लगाया गया है। Top-up की deductible बेस कवर के बराबर मानी गई है।
एक पूरा उदाहरण
नेहा 34 साल की है। उसका अपना कवर ₹5,00,000 है और ऑफ़िस से भी ₹5,00,000 का ग्रुप कवर मिलता है। उसकी पॉलिसी में 10% co-pay है। उसने एक गंभीर बीमारी का काल्पनिक बिल ₹8,00,000 माना है। मेडिकल ख़र्च की सालाना बढ़त उसने 10% मानी (यह सिर्फ़ अनुमान है), और 10 साल आगे देखना चाहती है।
आज की स्थिति (ग्रुप कवर के साथ):
बीमा-योग्य बिल = 8,00,000 x 0.90 = ₹7,20,000।
कुल कवर ₹10,00,000, तो बेस भुगतान ₹7,20,000।
जेब से = ₹80,000, जो पूरा co-pay है।
ग्रुप कवर के बिना:
बेस भुगतान सिर्फ़ ₹5,00,000 पर रुक जाता है।
जेब से = 8,00,000 − 5,00,000 = ₹3,00,000।
10 साल बाद:
आगे का बिल = 8,00,000 x 1.10^10 = लगभग ₹20,74,994।
अपने कवर पर जेब से = 20,74,994 − 5,00,000 = ₹15,74,994 (top-up नहीं है)।
अतिरिक्त कवर की ज़रूरत = 20,74,994 x 0.90 − 5,00,000 = लगभग ₹13,67,495।
इस उदाहरण से नेहा को तीन बातें दिखती हैं। पहली, ग्रुप कवर के होते हुए चिंता कम है। दूसरी, उसके छूटते ही कमी लगभग चार गुना हो जाती है। तीसरी, समय के साथ बिल बढ़ने से वही कवर काफ़ी नहीं रह जाएगा। अब वह देख सकती है कि ₹10 लाख का super top-up जोड़ने पर तस्वीर कैसे बदलती है। इसी इनपुट को बदलकर वह तुरंत नतीजा देख सकती है।
सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
इस पेज का मॉडल जानबूझकर सरल रखा गया है, ताकि आप कमी का मोटा अंदाज़ा आसानी से देख सकें। इसलिए कई असली बातें इसमें नहीं हैं।
कमरे के किराये की सीमा और उसके अनुपात में घटने वाला पूरा बिल।
बीमारी-वार उप-सीमाएँ, जैसे मोतियाबिंद या घुटना बदलने की अलग सीमा।
प्रतीक्षा अवधि और पहले से मौजूद बीमारियों के अपवाद।
Non-payable मदें, जैसे कुछ उपभोग्य सामग्री, जो बीमा नहीं देता।
OPD और डे-केयर के ख़र्च का अलग हिसाब।
प्रीमियम का हिसाब। यह calculator सिर्फ़ कवर की कमी दिखाता है।
कर में राहत का असर। उसके लिए अलग calculator देखें।
आपके शहर या अस्पताल के असली बिल। सारे बिल आपके डाले अनुमान हैं।
ज़रूरी: यह शैक्षणिक टूल है, बीमा की सलाह नहीं। कवर चुनने या बदलने से पहले पॉलिसी की शर्तें पूरी पढ़ें या भरोसेमंद सलाहकार से बात करें।