उदाहरण 1: रिटायर हो रहे रमेश जी
मान लीजिए रमेश जी एक फैक्ट्री में 24 साल से काम कर रहे हैं, उनका आख़िरी बेसिक + DA ₹62,000 है, और कंपनी Act के दायरे में आती है।
- 15 दिन के हिसाब से: 62,000 × 15 = 9,30,000।
- 26 दिन से भाग: 9,30,000 ÷ 26 = लगभग ₹35,769 प्रति साल।
- 24 साल से गुणा: ₹35,769 × 24 = लगभग ₹8,58,462।
यह पूरी रकम ₹20 लाख से कम है, इसलिए calculator के हिसाब से पूरा हिस्सा टैक्स-फ्री दिखेगा और कर-योग्य हिस्सा शून्य।
उदाहरण 2: Act के बाहर की छोटी दुकान
मान लीजिए एक कर्मचारी की बेसिक + DA ₹40,000 है और उसने 8 साल 7 महीने काम किया। Act का दायरा नहीं है, इसलिए सिर्फ़ 8 पूरे साल गिने जाएँगे।
- 40,000 × 15 ÷ 30 × 8 = ₹1,60,000।
अगर वही व्यक्ति 9 साल पूरे कर ले, तो रकम ₹1,80,000 हो जाएगी, यानी एक साल में ₹20,000 की बढ़त। यह दिखाता है कि 30 दिन वाले नियम में आधे-अधूरे साल का फ़ायदा नहीं जुड़ता।
उदाहरण 3: बहुत ऊँची सैलरी
अगर किसी वरिष्ठ प्रबंधक का आख़िरी बेसिक + DA ₹3,00,000 है और वह 35 साल की सेवा के बाद रिटायर होता है (Act के दायरे में), तो रकम 3,00,000 × 15 ÷ 26 × 35 = लगभग ₹60,57,692 बनती है। Calculator इसमें से ₹20 लाख टैक्स-फ्री दिखाएगा और बाक़ी लगभग ₹40,57,692 कर-योग्य। इस हिस्से पर असली टैक्स आपकी कुल आय और नियमों पर निर्भर करेगा।