सालों की सेवा का इनाम

Gratuity Calculator

नौकरी छोड़ते समय कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी? आख़िरी बेसिक और सेवा के सालों से तुरंत जानें।

  • अनुमानित ग्रेच्युटी
  • सेवा के हर साल पर रकम
  • टैक्स-फ्री बनाम कर-योग्य
  • Act के तहत या बाहर
  • सालों के साथ बढ़त का चार्ट
  • पात्रता का संकेत
आशुग्या की सलाहग्रेच्युटी आम तौर पर एक ही कंपनी में लगातार कम से कम 5 साल की सेवा पर मिलती है।
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Results are estimates for educational use only — not financial, tax or investment advice.
नतीजे सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान हैं — वित्तीय, कर या निवेश सलाह नहीं।

For education only; verify with official sources. / सिर्फ़ शिक्षा के लिए; आधिकारिक स्रोतों से जाँच लें।

How this is calculated / यह कैसे निकाला गया

If covered by the Payment of Gratuity Act: gratuity = last drawn (basic + DA) × 15 ÷ 26 × years of service. If not covered: gratuity = last drawn (basic + DA) × 15 ÷ 30 × completed years only. The part up to the tax-free limit set on the page is shown as exempt and anything above it as taxable. The page marks you eligible from the minimum years of service set on the page (normally 5).

अगर Payment of Gratuity Act लागू है: ग्रेच्युटी = आख़िरी (बेसिक + DA) × 15 ÷ 26 × सेवा के साल। लागू नहीं है तो: ग्रेच्युटी = आख़िरी (बेसिक + DA) × 15 ÷ 30 × सिर्फ़ पूरे हुए साल। पेज पर तय कर-मुक्त सीमा तक का हिस्सा छूट वाला और उससे ऊपर का हिस्सा कर-योग्य दिखाया जाता है। पेज पर तय न्यूनतम सेवा-वर्ष (आम तौर पर 5) पूरे होने पर आपको पात्र दिखाया जाता है।

Sources / स्रोत

Reviewed on / समीक्षा की तारीख़: 4 Oct 2026 Rules as of / नियम किस तारीख़ तक के: Oct 2026

Check eligibility with HR. Gratuity is usually payable after 5 years of continuous service (rules for some categories, such as fixed-term employees, were changed by the new Labour Codes). The tax-exempt limit used here is ₹20 lakh for private-sector employees; government employees are fully exempt. This is an estimate, not legal or tax advice.
पात्रता HR से ज़रूर जाँचें। ग्रेच्युटी आम तौर पर 5 साल की लगातार नौकरी के बाद मिलती है (तय अवधि वाले जैसे कुछ कर्मचारियों के लिए नए लेबर कोड में नियम बदले हैं)। यहाँ निजी क्षेत्र के लिए टैक्स-फ्री सीमा ₹20 लाख मानी गई है; सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यह सिर्फ़ अनुमान है, कानूनी या कर सलाह नहीं।

ग्रेच्युटी का फ़ॉर्मूला

ग्रेच्युटी एक्ट के तहत आने वाले: (आख़िरी बेसिक + DA) × 15 / 26 × साल एक्ट के बाहर (निजी, नहीं आते): (आख़िरी बेसिक + DA) × 15 / 30 × पूरे साल

6 महीने से ज़्यादा का हिस्सा अगले पूरे साल में गिना जाता है (एक्ट के तहत आने वालों के लिए) — इसलिए 9 साल 8 महीने = 10 साल।

संक्षेप में
  • ग्रेच्युटी आख़िरी बेसिक + DA और सेवा के सालों से निकलती है। Payment of Gratuity Act के तहत आने वालों के लिए: वेतन × 15 ÷ 26 × साल। बाहर वालों के लिए: वेतन × 15 ÷ 30 × पूरे हुए साल।
  • पेज तीन चीज़ें दिखाता है: कुल अनुमानित रकम, सेवा के हर साल पर औसत रकम, और उसमें से कितनी टैक्स-फ्री सीमा (पेज पर निजी क्षेत्र के लिए ₹20 लाख) के अंदर है।
  • ग्रेच्युटी आम तौर पर 5 साल की लगातार नौकरी के बाद मिलती है। पेज कम सालों पर चेतावनी देता है, पर कुछ श्रेणियों में नियम अलग हैं, इसलिए HR से पात्रता ज़रूर पूछें।
  • यह अनुमान है, कानूनी या कर सलाह नहीं। असली रकम आपके नियोक्ता की गणना से तय होती है।
खुलने वाली विंडो में “PDF के रूप में सेव करें” चुनें। रिपोर्ट में आपके डाले हुए आँकड़े, नतीजा और चार्ट आते हैं।

उदाहरण: तीन अलग-अलग हालात

नीचे के पात्र और संख्याएँ काल्पनिक हैं; मक़सद सिर्फ़ यह दिखाना है कि अलग हालात में नतीजा कैसे बदलता है।

पेज की शुरुआती संख्याएँ

आख़िरी बेसिक + DA ₹50,000 प्रति माह, 10 साल की सेवा, Payment of Gratuity Act के तहत।

सूत्र
50,000 × 15 ÷ 26 × 10
अनुमानित ग्रेच्युटी
₹2,88,462
सेवा के हर साल पर
लगभग ₹28,846
टैक्स-फ्री हिस्सा
₹2,88,462
कर-योग्य हिस्सा (₹20 L से ऊपर)
₹0

पेज की ₹20 लाख की सीमा के भीतर यह पूरी रकम टैक्स-फ्री दिखती है। यानी हर साल की सेवा पर आख़िरी वेतन का आधे महीने से थोड़ा ज़्यादा जुड़ता है।

फ़ैज़ल: Act के बाहर

फ़ैज़ल की कंपनी Payment of Gratuity Act के तहत नहीं आती। आख़िरी बेसिक + DA ₹40,000, पूरे हुए साल 8।

सूत्र
40,000 × 15 ÷ 30 × 8
अनुमानित ग्रेच्युटी
₹1,60,000
सेवा के हर साल पर
₹20,000

Act वाले सूत्र में 26 दिन का महीना गिनते हैं और बाहर वाले में 30 दिन का, इसलिए बाहर वालों को प्रति साल थोड़ी कम रकम निकलती है।

सविता: लंबी सेवा, बड़ा वेतन

सविता का आख़िरी बेसिक + DA ₹1,50,000 है और सेवा 25 साल की है, Act के तहत।

सूत्र
1,50,000 × 15 ÷ 26 × 25
अनुमानित ग्रेच्युटी
₹21,63,462
टैक्स-फ्री हिस्सा (पेज की सीमा तक)
₹20,00,000
कर-योग्य हिस्सा
₹1,63,462

पेज की ₹20 लाख सीमा पार होने पर ऊपर का हिस्सा कर-योग्य दिखता है। असली कर-छूट आपके वर्ग और नियमों पर निर्भर है, इसलिए नियोक्ता या CA से पक्का करें।

आख़िरी बेसिक + DA ₹50,000: सेवा के साल के साथ रकम

आख़िरी बेसिक + DA ₹50,000: सेवा के साल के साथ रकम
सेवा के सालAct के तहत (15÷26)Act के बाहर (15÷30)
5 साल₹1,44,231₹1,25,000
10 साल₹2,88,462₹2,50,000
15 साल₹4,32,692₹3,75,000
20 साल₹5,76,923₹5,00,000
25 साल₹7,21,154₹6,25,000
30 साल₹8,65,385₹7,50,000

रकम सेवा के सालों के सीधे अनुपात में बढ़ती है। Act वाले सूत्र में आधे साल से ज़्यादा को पूरा साल माना जाता है, बाहर वाले में सिर्फ़ पूरे हुए साल।

10 साल की सेवा (Act के तहत): आख़िरी वेतन के हिसाब से रकम

10 साल की सेवा (Act के तहत): आख़िरी वेतन के हिसाब से रकम
आख़िरी बेसिक + DA (मासिक)अनुमानित ग्रेच्युटी
₹20,000₹1,15,385
₹30,000₹1,73,077
₹50,000₹2,88,462
₹80,000₹4,61,538
₹1,00,000₹5,76,923

रकम आख़िरी बेसिक + DA के अनुपात में बढ़ती है। भत्ते, बोनस और ओवरटाइम आम तौर पर इसमें नहीं गिने जाते।

त्वरित संदर्भ: ग्रेच्युटी का सूत्र

त्वरित संदर्भ: ग्रेच्युटी का सूत्र
Act के तहत(आख़िरी बेसिक + DA) × 15 ÷ 26 × सेवा के साल
Act के बाहर(आख़िरी बेसिक + DA) × 15 ÷ 30 × पूरे हुए साल
साल कैसे गिनेंAct के तहत 6 महीने से ज़्यादा का हिस्सा अगले पूरे साल में गिना जाता है
वेतन कौन-साआख़िरी महीने का बेसिक + महँगाई भत्ता (DA)
पात्रता का संकेतआम तौर पर 5 साल की लगातार सेवा (पेज यही मानता है)
टैक्स-फ्री सीमा (पेज पर)₹20 लाख (निजी क्षेत्र); पेज के अनुसार सरकारी कर्मचारियों की पूरी तरह टैक्स-फ्री
हर साल पर रकमकुल ग्रेच्युटी ÷ सेवा के साल
इस पेज में क्या नहींमृत्यु या विकलांगता के विशेष नियम, ऊपरी सीमा के अन्य कानूनी पहलू, मौजूदा नियोक्ता की अपनी नीति।

Gratuity Calculator क्या करता है और कैसे काम आता है?

सरल व्याख्या

यह calculator क्या करता है

ग्रेच्युटी वह रकम है जो नियोक्ता किसी कर्मचारी को लंबी सेवा के बदले में नौकरी छोड़ते समय या रिटायरमेंट पर एकमुश्त देता है। Gratuity Calculator एक ही सवाल का जवाब देता है: मेरी आख़िरी बेसिक सैलरी और सेवा के सालों के हिसाब से ग्रेच्युटी की अनुमानित रकम क्या बनेगी, और उसमें से कितना हिस्सा टैक्स-फ्री और कितना कर-योग्य माना जाएगा?

आप आख़िरी बेसिक और महँगाई भत्ता (DA) जोड़कर डालते हैं, सेवा के साल चुनते हैं, और बताते हैं कि आप Payment of Gratuity Act के दायरे में आते हैं या नहीं। Calculator इसी आधार पर रकम निकालता है, प्रति साल की ग्रेच्युटी दिखाता है और एक चार्ट बनाता है कि सालों के साथ रकम कैसे बढ़ती है।

किसके काम का है

  • जो कर्मचारी नौकरी बदलने की सोच रहे हैं और जानना चाहते हैं कि अभी छोड़ने पर कितनी रकम छूट सकती है, और कुछ साल रुकने पर कितना फ़र्क़ पड़ेगा।
  • रिटायरमेंट के करीब पहुँचे लोग, जो फ़ाइनल सेटलमेंट की मोटी योजना बनाना चाहते हैं, जैसे लोन का बकाया चुकाना या घर की मरम्मत।
  • छोटे कारोबारी, जो अपने स्टाफ़ के लिए भविष्य की देनदारी का अंदाज़ा लगाना चाहते हैं।
  • HR और अकाउंट्स से जुड़े लोग, जिन्हें किसी कर्मचारी को समझाना है कि रकम कैसे निकलती है।
  • वे परिवार, जिनमें नौकरी कर रहे सदस्य को पता नहीं कि उसकी कंपनी में ग्रेच्युटी का नियम लागू है या नहीं।

कौन-सी जानकारी डालनी होती है

पेज पर दो स्लाइडर और एक स्विच है।

आख़िरी बेसिक + DA (मासिक, ₹)

यहाँ आख़िरी महीने की मूल तनख्वाह (Basic) और उसमें मिलने वाला महँगाई भत्ता (DA), यानी दोनों का जोड़ डालना है। HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और ट्रैवल जैसे भत्ते आम तौर पर इस हिसाब में नहीं जुड़ते। यह रकम आपकी सैलरी स्लिप में दिखती है। स्लाइडर ₹10,000 से ₹5,00,000 तक चलता है, ₹1,000 के कदम से, और शुरुआती मान ₹50,000 है।

सेवा के साल (राउंड करने के बाद)

स्लाइडर 1 से 45 साल तक है और शुरुआती मान 10 साल। "राउंड करने के बाद" का मतलब है कि आपको पहले अपनी सेवा को पूरे सालों में बदलना है। Act के दायरे में आने वाले कर्मचारी के लिए 6 महीने से ज़्यादा का हिस्सा अगले पूरे साल में गिना जाता है। इसलिए 9 साल 8 महीने को 10 साल, और 9 साल 4 महीने को 9 साल लिखिए। जो कर्मचारी Act के दायरे में नहीं आते, उनके लिए calculator सिर्फ़ पूरे हो चुके साल गिनता है।

Payment of Gratuity Act के तहत आता हूँ (स्विच)

यह स्विच चालू होने पर महीने के 26 दिन माने जाते हैं, और बंद होने पर 30 दिन। आम तौर पर 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान इस Act के दायरे में आते हैं, पर आपके मामले में क्या लागू है, यह अपने HR या नियुक्ति पत्र से पक्का करें।

नतीजे में क्या दिखता है और उसे कैसे पढ़ें

  • अनुमानित ग्रेच्युटी: बड़ी संख्या के रूप में कुल रकम। अगर सेवा के साल 5 से कम हैं तो उसके नीचे चेतावनी दिखती है कि आम तौर पर इतनी सेवा पर ग्रेच्युटी नहीं मिलती।
  • सेवा के हर साल पर: कुल रकम को सेवा के सालों से भाग देने पर निकली औसत। इससे अंदाज़ा होता है कि एक अतिरिक्त साल रुकने पर लगभग कितना जुड़ेगा।
  • टैक्स-फ्री हिस्सा: इस calculator में निजी क्षेत्र के लिए ₹20 लाख तक का हिस्सा टैक्स-फ्री माना गया है।
  • कर-योग्य हिस्सा: ₹20 लाख से ऊपर की रकम। अगर यह शून्य है तो कुछ नहीं दिखता, और शून्य से ज़्यादा है तो लाल रंग में दिखता है।
  • चार्ट: हर साल के लिए एक स्तंभ, जिसमें हरा हिस्सा टैक्स-फ्री और लाल हिस्सा कर-योग्य रकम है। इससे दिखता है कि सेवा बढ़ने के साथ रकम सीढ़ी की तरह बढ़ती है।
ध्यान दें: टैक्स-फ्री सीमा और ग्रेच्युटी के नियम बदलते रहते हैं। इस पेज पर ₹20 लाख की सीमा सिर्फ़ इस calculator की मान्यता है। नया लेबर कोड भी कुछ श्रेणियों के लिए नियम बदल चुका है, इसलिए अंतिम जानकारी के लिए आयकर विभाग की वेबसाइट और अपने HR से पुष्टि कीजिए।

इसे समझदारी से इस्तेमाल करने के तरीके

  • "अगर एक साल और रुकूँ" वाला हिसाब लगाइए। सेवा के साल एक-एक बढ़ाकर देखिए कि हर अतिरिक्त साल पर रकम कितनी बढ़ती है। कई बार 4 साल 10 महीने पर नौकरी छोड़ने वाला व्यक्ति पाँच साल की सीमा से बस ज़रा पहले रह जाता है, और वहाँ दो महीने का फ़र्क़ बड़ी रकम का फ़र्क़ बन सकता है।
  • स्विच दोनों तरफ़ करके देखिए। अगर आपको पक्का नहीं पता कि Act लागू है या नहीं, तो स्विच चालू और बंद करके दोनों रकम देखिए। फिर HR से पूछते समय आपके पास सटीक सवाल होगा।
  • बेसिक का भविष्य का अनुमान लगाइए। अगर रिटायरमेंट में अभी कुछ साल बाकी हैं, तो अनुमानित आख़िरी बेसिक डालकर देखिए, न कि आज की बेसिक। इससे योजना ज़्यादा यथार्थवादी बनती है।
  • चार्ट देखकर सोचिए। चार्ट बताता है कि रकम सेवा के साथ सीधी रेखा में बढ़ती है। इसलिए नौकरी बदलते समय सिर्फ़ ग्रेच्युटी के लिए रुकना कितना सार्थक है, यह आप नई नौकरी के वेतन से तुलना करके तय कर सकते हैं।
  • रकम का इस्तेमाल पहले से सोचिए। जैसे लोन के बकाए की जाँच के लिए EMI और Loan Prepayment calculator देखिए, या रिटायरमेंट के लिए Retirement Corpus calculator।

आम ग़लतियाँ और भ्रम

  • पूरी CTC पर हिसाब लगाना। ग्रेच्युटी सिर्फ़ बेसिक और DA पर बनती है, पूरी CTC पर नहीं। CTC डाल देने से रकम बहुत बढ़ी दिखेगी।
  • "मेरी कंपनी हर हाल में देगी" मान लेना। पात्रता कंपनी की नीति, Act की लागू होने की स्थिति और सेवा की अवधि पर निर्भर करती है।
  • सेवा के महीनों का गलत राउंड। Act के तहत 6 महीने से ऊपर का हिस्सा अगला साल माना जाता है, पर 6 महीने ठीक-ठीक हो तो नहीं। इसे अपने मामले में HR से पक्का कीजिए।
  • इसे हर कंपनी का एक जैसा नियम समझना। कुछ कंपनियाँ ज़्यादा या अलग फ़ॉर्मूला अपनाती हैं।
  • टैक्स-फ्री सीमा को स्थायी मानना। सीमा सरकार बदल सकती है।
  • नौकरी छोड़ते समय दूसरी रकमों को भूल जाना। छुट्टियों का नकदीकरण, नोटिस पीरियड और पीएफ़ अलग होते हैं और इस calculator में शामिल नहीं हैं।
विस्तृत गणना (पढ़ने के लिए खोलें)
गणना कैसे होती है

ग्रेच्युटी का आधार यह है कि हर साल की सेवा पर 15 दिन का वेतन मिलता है। दिन का वेतन निकालने के लिए महीने को 26 या 30 दिन का माना जाता है।

  • Act के दायरे में आने वालों के लिए: (आख़िरी बेसिक + DA) × 15 ÷ 26 × सेवा के साल।
  • Act के बाहर वालों के लिए: (आख़िरी बेसिक + DA) × 15 ÷ 30 × सिर्फ़ पूरे हुए साल।

इसके बाद रकम की तुलना ₹20 लाख की सीमा से होती है। उससे कम या बराबर हिस्सा टैक्स-फ्री दिखता है और ऊपर का हिस्सा कर-योग्य। पात्रता के लिए 5 साल की न्यूनतम सेवा मानी गई है और उससे कम पर चेतावनी दिखती है।

इस implementation की मान्यताएँ:

  • आख़िरी बेसिक और DA ही आधार है; पिछले सालों की सैलरी का औसत नहीं लिया गया।
  • सेवा के साल आपने खुद पहले से राउंड करके डालने हैं।
  • कंपनी अपनी तरफ़ से जो अलग या ज़्यादा ग्रेच्युटी देती है, वह नहीं गिनी गई।
  • कर्मचारी को पहले मिली छूट, या अलग-अलग नियोक्ताओं की ग्रेच्युटी का जोड़, इस calculator में शामिल नहीं है।
  • सरकारी कर्मचारियों के लिए पूरी छूट होती है, जबकि यहाँ निजी क्षेत्र वाली सीमा लगाई गई है।
एक पूरा उदाहरण

उदाहरण 1: रिटायर हो रहे रमेश जी

मान लीजिए रमेश जी एक फैक्ट्री में 24 साल से काम कर रहे हैं, उनका आख़िरी बेसिक + DA ₹62,000 है, और कंपनी Act के दायरे में आती है।

  1. 15 दिन के हिसाब से: 62,000 × 15 = 9,30,000।
  2. 26 दिन से भाग: 9,30,000 ÷ 26 = लगभग ₹35,769 प्रति साल।
  3. 24 साल से गुणा: ₹35,769 × 24 = लगभग ₹8,58,462।

यह पूरी रकम ₹20 लाख से कम है, इसलिए calculator के हिसाब से पूरा हिस्सा टैक्स-फ्री दिखेगा और कर-योग्य हिस्सा शून्य।

उदाहरण 2: Act के बाहर की छोटी दुकान

मान लीजिए एक कर्मचारी की बेसिक + DA ₹40,000 है और उसने 8 साल 7 महीने काम किया। Act का दायरा नहीं है, इसलिए सिर्फ़ 8 पूरे साल गिने जाएँगे।

  • 40,000 × 15 ÷ 30 × 8 = ₹1,60,000।

अगर वही व्यक्ति 9 साल पूरे कर ले, तो रकम ₹1,80,000 हो जाएगी, यानी एक साल में ₹20,000 की बढ़त। यह दिखाता है कि 30 दिन वाले नियम में आधे-अधूरे साल का फ़ायदा नहीं जुड़ता।

उदाहरण 3: बहुत ऊँची सैलरी

अगर किसी वरिष्ठ प्रबंधक का आख़िरी बेसिक + DA ₹3,00,000 है और वह 35 साल की सेवा के बाद रिटायर होता है (Act के दायरे में), तो रकम 3,00,000 × 15 ÷ 26 × 35 = लगभग ₹60,57,692 बनती है। Calculator इसमें से ₹20 लाख टैक्स-फ्री दिखाएगा और बाक़ी लगभग ₹40,57,692 कर-योग्य। इस हिस्से पर असली टैक्स आपकी कुल आय और नियमों पर निर्भर करेगा।

सीमाएँ: यह calculator क्या नहीं बताता
  • यह आपकी कंपनी का वास्तविक नियम या आपके अनुबंध की शर्तें नहीं जानता।
  • यह आपके व्यक्तिगत आयकर का हिसाब नहीं करता। कर-योग्य हिस्सा दिखाता है, पर उस पर कितना टैक्स लगेगा यह कुल आय पर निर्भर है।
  • यह मृत्यु या अपंगता की स्थिति के अलग नियमों को अलग से नहीं दिखाता।
  • यह मानता है कि आख़िरी बेसिक में DA जोड़कर ही आपने सही संख्या डाली है।
  • ₹20 लाख की सीमा और 5 साल की न्यूनतम अवधि इस पेज की मान्यताएँ हैं, जो बदल सकती हैं। कुछ श्रेणियों, जैसे तय अवधि वाले कर्मचारियों के लिए नए लेबर कोड में नियम अलग हो सकते हैं।
  • नतीजा एक अनुमान है, कंपनी का असली भुगतान अलग हो सकता है। पक्की जानकारी आयकर विभाग की वेबसाइट, श्रम विभाग या अपने HR से लीजिए।

इसके साथ और कौन-से calculator देखें

  • Income Tax Calculator: कर-योग्य हिस्से का असर कुल टैक्स पर देखने के लिए।
  • EPF Calculator: नौकरी के दौरान जमा हुए भविष्य निधि का अंदाज़ा लगाने के लिए।
  • CTC Breakdown Calculator: समझने के लिए कि CTC में बेसिक और बाक़ी हिस्से क्या हैं।
  • Retirement Corpus Calculator: रिटायरमेंट पर कितनी रकम चाहिए, यह देखने के लिए।
  • Salary Calculator: वेतन के हिस्सों को समझने के लिए।
  • SWP Calculator: मिली रकम से हर महीने निकासी की योजना बनाने के लिए।

यह लेख सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी है, कानूनी, कर या निवेश की सलाह नहीं। अपनी ग्रेच्युटी की पात्रता और टैक्स के लिए नियोक्ता, आयकर विभाग या किसी योग्य CA से पुष्टि कीजिए।

6 काम की बातें याद रखें

1
आख़िरी वेतन की अपनी salary slip देखें

बेसिक और DA अलग-अलग लिखे होते हैं। दोनों जोड़कर ही पेज में डालें।

2
नौकरी छोड़ने की तारीख़ से सालों का असर समझें

Act के तहत आधे साल से ऊपर का हिस्सा पूरा साल बन जाता है। तारीख़ थोड़ी आगे-पीछे होने पर रकम में फ़र्क आ सकता है।

3
पात्रता की शर्त पहले जाँचें

पाँच साल पूरे होने से पहले नौकरी बदलने की सोच रहे हों तो HR से पूछें कि आपके मामले में नियम क्या हैं।

4
कंपनी की नीति और offer letter पढ़ें

कुछ कंपनियाँ कानून से बेहतर शर्तें भी देती हैं। इसलिए अपना appointment letter देखें।

5
रकम का उपयोग पहले से सोच लें

अचानक बड़ी रकम मिलने पर कर्ज़ घटाना, आपात निधि और लंबे लक्ष्य, इन सबके बीच क्रम तय करके रखें।

6
बड़ी रकम पर टैक्स की जाँच करवाएँ

अगर रकम पेज की सीमा से ऊपर जा रही है, तो कर-छूट की सही स्थिति CA से पक्की कर लें।

इसके साथ ये लेख भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Gratuity = (आख़िरी basic + DA) × 15/26 × पूरे किए हुए साल। आम तौर पर कम से कम 5 साल की सेवा ज़रूरी है।

कानून में एक महीने को 26 कार्य-दिवस माना गया है। इसलिए 15 दिन की मज़दूरी का हिसाब वेतन ÷ 26 × 15 से निकलता है।

जिन पर Act लागू नहीं होता उनके लिए 30 दिन का महीना माना जाता है, जिससे प्रति साल रकम थोड़ी कम आती है। पेज इसी के अनुसार चलता है।

पेज रकम तो निकाल देता है पर साथ में चेतावनी दिखाता है कि आम तौर पर 5 साल से कम पर ग्रेच्युटी नहीं मिलती।

पेज में पूरे साल डालने होते हैं। Act के तहत छह महीने से ऊपर के हिस्से को अगले पूरे साल में गिनकर डालें।

आम तौर पर सिर्फ़ बेसिक और महँगाई भत्ता (DA)। HRA, बोनस और विशेष भत्ते अलग रखें, पर अपनी कंपनी की परिभाषा HR से पूछ लें।

हाँ, गणना आख़िरी वेतन पर पूरी सेवा के लिए होती है। इसलिए आख़िरी बेसिक जितना ऊँचा, कुल ग्रेच्युटी भी उतनी ऊँची।

कानून में एक अधिकतम रकम तय है और बदलती रह सकती है। यह पेज कानूनी ऊपरी सीमा नहीं लगाता, सिर्फ़ टैक्स-फ्री सीमा दिखाता है। असली रकम HR से पक्की करें।

नहीं, उनके लिए अलग नियम हैं। पेज के अनुसार उनकी ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है, पर हिसाब उनके सेवा-नियमों से होता है।

ऐसे मामलों के लिए विशेष प्रावधान हो सकते हैं जो यहाँ शामिल नहीं हैं। नियोक्ता या कानूनी सलाह लें।

नहीं। पेज सिर्फ़ एक सीमा से तुलना करता है। असली छूट कई शर्तों पर निर्भर है, इसलिए CA या नियोक्ता की पुष्टि लें।

पेज के अनुसार तय अवधि वाले कर्मचारियों जैसी कुछ श्रेणियों के नियम बदले हैं। अपने मामले की स्थिति HR से जाँचें।

यह calculator ब्याज नहीं गिनता। देर से भुगतान होने पर क्या मिलेगा, यह कानून और परिस्थिति पर निर्भर है।

अक्सर कंपनी का गणित वही रहता है, पर अंतिम रकम नियोक्ता की गणना से तय होती है। फ़र्क दिखे तो HR से पूछें।

नहीं। यह सिर्फ़ शैक्षणिक अनुमान है। अपने अधिकार जानने के लिए नियोक्ता और अधिकृत सलाहकार से बात करें।

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