बैंक से कोई दिक्कत हो जाए, जैसे खाते से बिना बताए पैसा कट जाना, ATM से पैसा न निकलना पर खाते से कट जाना, UPI या net-banking का charge ग़लत लगना, या cheque/loan सेवा में देरी, तो अक्सर समझ नहीं आता कि बात कहाँ से शुरू करें। इस पेज में एक सीढ़ी (ladder) की तरह बताया गया है कि पहले कहाँ जाएँ, कितना इंतज़ार करें और कब RBI के ombudsman तक पहुँचें। ये सामान्य जानकारी है; नियम बदल सकते हैं, इसलिए आख़िरी में official पेज पर जाँच लें।
अगर आपके खाते से बिना आपकी जानकारी के पैसा गया है, तो शिकायत की बाक़ी तैयारी बाद में कर लें। सबसे पहले बैंक को बताएँ, क्योंकि नियमों में रिपोर्ट करने की समय-सीमा का सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि नुकसान किसके हिस्से आएगा।
शिकायत की सीढ़ी: चरण दर चरण
बैंक की अपनी शिकायत व्यवस्था
सबसे पहले अपने बैंक में लिखित शिकायत दें: branch, बैंक का customer care, app/net-banking का complaint सेक्शन या ईमेल। शिकायत की acknowledgement या complaint number ज़रूर लें। RBI के ombudsman तक पहुँचने के लिए यही पहली शर्त है कि आपने बैंक को पहले शिकायत दी हो और उसका सबूत आपके पास हो।
बैंक का Grievance Redressal / Nodal Officer
अगर branch या customer care से बात नहीं बनी, तो बैंक की website पर दिए गए grievance redressal officer या nodal officer को वही शिकायत दोबारा भेजें, पहली शिकायत का नंबर लिखकर। बैंकों की website पर इन अधिकारियों का नाम और संपर्क आम तौर पर दिया होता है।
RBI Ombudsman (RB-IOS, 2026)
बैंक ने 30 दिन में जवाब नहीं दिया, या जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप RBI के Integrated Ombudsman के पास जा सकते हैं। ये मुफ़्त है और शिकायत RBI की CMS portal (cms.rbi.org.in) पर online की जा सकती है। टोल-फ़्री नंबर 14448 पर भी जानकारी मिलती है। नीचे विस्तार से पूरी बात दी गई है।
rbi.org.in
अदालत या दूसरे क़ानूनी रास्ते (सिर्फ़ सामान्य जानकारी)
कुछ मामलों में उपभोक्ता आयोग या अदालत जैसे क़ानूनी रास्ते भी होते हैं। इनकी शर्तें, फ़ीस और समय-सीमा अलग होती हैं और इस पेज में उनकी पुष्टि नहीं की गई है। ध्यान रहे कि अगर वही मामला पहले से किसी अदालत या अधिकरण में चल रहा है, तो ombudsman उसे आम तौर पर नहीं लेता। कोई भी क़दम उठाने से पहले किसी योग्य वकील या संबंधित official स्रोत से जानकारी लें।
पहले ये सबूत इकट्ठा करें
- खाता संख्या (पूरा नंबर शिकायत में लिखें, पर किसी को OTP, PIN या password न बताएँ)
- Transaction की तारीख, समय, रक़म और transaction ID / UTR / reference number
- बैंक का SMS या ईमेल alert, जिसमें transaction दिखा हो (screenshot भी रखें)
- Passbook या statement का वह हिस्सा, जिसमें ग़लत entry या charge दिख रहा हो
- बैंक को शिकायत देने की तारीख, complaint number और बैंक का जवाब (अगर आया हो)
- अगर फ़ोन या कार्ड खोया था: खोने की जानकारी बैंक को कब दी, उसका सबूत
- धोखाधड़ी की स्थिति में: cybercrime.gov.in पर की गई शिकायत की acknowledgement
- आपका पूरा पता, मोबाइल नंबर और ईमेल, जो बैंक के रिकॉर्ड से मेल खाएँ
कितना इंतज़ार करें / कहाँ जाएँ
नीचे वही समय-सीमाएँ दी गई हैं जो RBI के official दस्तावेज़ों में देखी गईं। कुछ मामलों में RBI या NPCI की अलग, लंबी समय-सीमा भी लागू होती है, इसलिए बैंक से पूछ लें।
| स्थिति | कितना इंतज़ार करें | कहाँ जाएँ |
|---|---|---|
| आम सेवा की शिकायत (charge, cheque, खाता, loan सेवा) | बैंक को शिकायत देने के बाद 30 दिन (या RBI/NPCI की तय उससे लंबी समय-सीमा, जो ज़्यादा हो) | 30 दिन बाद, या असंतोषजनक जवाब पर, RBI Ombudsman |
| Ombudsman के पास शिकायत दर्ज करने की आख़िरी सीमा | बैंक की समय-सीमा पूरी होने या बैंक के आख़िरी जवाब (जो बाद में हो) से 90 दिन के भीतर | cms.rbi.org.in, ईमेल या डाक से CRPC, चंडीगढ़ |
| ATM में पैसा न मिला पर खाते से कट गया | RBI की 2019 की TAT व्यवस्था में समय T+5 दिन, उसके बाद ₹100 प्रति दिन की क्षतिपूर्ति | पहले बैंक; समय पर हल न हो तो ombudsman |
| UPI (व्यक्ति से व्यक्ति) या IMPS में पैसा कटा पर पहुँचा नहीं | उसी TAT व्यवस्था में T+1 दिन, उसके बाद ₹100 प्रति दिन | पहले बैंक/ऐप की शिकायत; फिर ombudsman |
| अनधिकृत (unauthorised) electronic transaction | 2017 के RBI circular के अनुसार बैंक को शिकायत मिलने के बाद 10 working days में amount का shadow reversal; पूरा निपटारा 90 दिन में | तुरंत बैंक, फिर cybercrime.gov.in; हल न हो तो ombudsman |
अनधिकृत transaction: रिपोर्ट कब करें
RBI के 6 जुलाई 2017 के circular के अनुसार, अगर नुकसान बैंक की लापरवाही या कमी से हुआ है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य (zero liability) है, चाहे ग्राहक ने कब रिपोर्ट किया हो। अगर गड़बड़ी तीसरे पक्ष की है (न बैंक की, न ग्राहक की), तो बैंक से मिली सूचना के 3 working days के भीतर रिपोर्ट करने पर देनदारी शून्य है। 4 से 7 working days में रिपोर्ट करने पर देनदारी सीमित होती है, जैसे BSBD खातों में अधिकतम ₹5,000 और आम बचत खातों में अधिकतम ₹10,000। उसके बाद का फ़ैसला बैंक की Board-approved policy के अनुसार होता है।
RBI ने 24 जून 2026 को बैंकों के लिए नए Directions जारी किए हैं, जिनमें तीसरे पक्ष की गड़बड़ी में zero liability के लिए रिपोर्टिंग की सीमा 5 calendar days बताई गई है, और ₹50,000 तक के नुकसान पर ₹25,000 या net loss के 85% (जो कम हो) तक की क्षतिपूर्ति, ग्राहक को जीवन में एक बार। ये Directions 1 जनवरी 2027 या उसके बाद के transactions पर लागू होने बताए गए हैं। तब तक कौन सा ढाँचा आपके मामले पर लगेगा, ये बैंक से पूछें और RBI के official पेज पर देखें।
cybercrime.gov.in
RBI Ombudsman: क्या जानना ज़रूरी है
- कौन सी योजना: Reserve Bank - Integrated Ombudsman Scheme, 2026 (RB-IOS, 2026), जो 1 जुलाई 2026 से लागू है और 2021 वाली योजना की जगह आई है। उससे पहले मिली शिकायतें पुराने नियमों से चलती हैं।
- खर्च: शिकायत करने या निपटाने का कोई शुल्क नहीं। किसी तीसरी एजेंसी को पैसे देने की ज़रूरत नहीं।
- कौन से बैंक आते हैं: सभी commercial banks, regional rural banks और 50 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा जमा वाले co-operative banks।
- कैसे दर्ज करें: cms.rbi.org.in पर online, ईमेल (crpc@rbi.org.in) से, या हस्ताक्षर किया हुआ शिकायत फ़ॉर्म और दस्तावेज़ डाक से CRPC, RBI, सेक्टर 17, चंडीगढ़ भेजकर।
- Helpline: टोल-फ़्री 14448 पर IVRS 24x7 उपलब्ध बताया गया है, और व्यक्ति से बात सोमवार से शनिवार सुबह 8 से रात 10 बजे तक (राष्ट्रीय छुट्टियाँ छोड़कर), हिंदी, अंग्रेज़ी और कई क्षेत्रीय भाषाओं में।
- Status देखना: शिकायत दर्ज होने पर complaint number मिलता है, जिससे CMS portal या 14448 पर status देखा जा सकता है।
- मुआवज़ा: विवाद की रक़म की कोई सीमा नहीं। परिणामी नुकसान पर अधिकतम ₹30 लाख और समय, खर्च व मानसिक परेशानी के लिए अधिकतम ₹3 लाख तक का मुआवज़ा दिलाया जा सकता है।
- कब शिकायत नहीं टिकती: बैंक से पहले शिकायत नहीं की हो; 30 दिन से पहले आ गए हों; 90 दिन की सीमा निकल गई हो; वही मामला अदालत या अधिकरण में हो; शिकायत अधूरी, अपमानजनक या बेबुनियाद हो।
शिकायत में क्या लिखें
अच्छी शिकायत छोटी, तथ्य वाली और तारीख़ों के क्रम में होती है। इसमें ये बातें हों: आप कौन हैं और खाता/कार्ड का विवरण; क्या हुआ (तारीख, समय, रक़म, reference number); आपने बैंक को कब और कैसे बताया, और complaint number; बैंक ने क्या जवाब दिया या नहीं दिया; आपका नुकसान या असुविधा कितनी है; और आप क्या समाधान चाहते हैं, जैसे amount की वापसी, ग़लत charge का reversal या लिखित जवाब। भाषा सीधी रखें, गुस्सा या आरोप नहीं, सिर्फ़ तथ्य।
उदाहरण (काल्पनिक, सिर्फ़ समझाने के लिए): "मेरा नाम रमेश कुमार है और मेरा बचत खाता आपकी XYZ शाखा में है (खाता संख्या के अंतिम 4 अंक 1234)। 12 सितंबर 2026 को शाम 6:10 बजे मेरे खाते से ₹4,500 का एक UPI transaction कटा (reference number: 000000000000), जिसे मैंने नहीं किया। मुझे SMS alert 6:11 बजे मिला और मैंने उसी दिन 6:30 बजे customer care पर शिकायत की (complaint number: ABC123)। आज 20 सितंबर तक मुझे कोई समाधान नहीं मिला है। कृपया इस transaction की जाँच करके राशि वापस करें और मुझे लिखित जवाब दें। संबंधित SMS और statement संलग्न हैं।"
कौन सी शिकायतें यहाँ नहीं आतीं
- वे शिकायतें जो बैंक को बिना बताए सीधे ombudsman से की जाएँ
- वे मामले जो पहले से अदालत, अधिकरण या मध्यस्थ (arbitrator) के पास हों, या जिन पर पहले फ़ैसला हो चुका हो
- बैंक के व्यावसायिक फ़ैसले, जैसे loan मंज़ूर करना या न करना, या ब्याज दर तय करना
- बैंक और उसके कर्मचारियों के बीच के या vendor के विवाद
- ऐसी संस्थाएँ जो इस योजना में शामिल नहीं हैं (जैसे 50 करोड़ रुपये से कम जमा वाले छोटे co-operative banks), इसलिए शिकायत से पहले RBI की FAQ में देख लें कि आपकी संस्था आती है या नहीं
- साइबर ठगी जैसे अपराध, जिनके लिए पुलिस और cybercrime.gov.in की अलग प्रक्रिया है, ombudsman सेवा की कमी (deficiency in service) की शिकायतें देखता है, अपराध की जाँच नहीं करता
पहले लिखित शिकायत और उसका complaint number, फिर 30 दिन का इंतज़ार, और उसके बाद 90 दिन के भीतर ombudsman, यही मूल क्रम है। सारे SMS, screenshot और जवाब संभालकर रखें। Helpline नंबर, समय-सीमाएँ और रक़म की सीमाएँ बदल सकती हैं, इसलिए शिकायत करने से पहले RBI के official पेज पर एक बार देख लें।