न्यू टैक्स रिजीम vs ओल्ड टैक्स रिजीम — कम्प्लीट गाइड

न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम का फ़र्क़ बिल्कुल शुरू से समझें: slabs, standard deduction, 87A rebate, 4% cess, पूरी arithmetic वाले उदाहरण, break-even आँकड़े, आम गलतियाँ, FAQs और 30 दिन का plan।

यह guide किसके लिए है और आप क्या सीखेंगे

हर साल अप्रैल में लगभग हर salaried व्यक्ति के सामने HR का एक form आता है: "New Tax Regime चुनें या Old Tax Regime?" ज़्यादातर लोग या तो पुराने साल वाला option दोहरा देते हैं, या किसी सहकर्मी की सलाह पर कुछ भी भर देते हैं। नतीजा यह कि कई बार हज़ारों रुपये का टैक्स बिना ज़रूरत कट जाता है, और कई बार सिर्फ़ "टैक्स बचाने" के नाम पर ऐसी जगह पैसा फँस जाता है जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी।

यह guide 25 से 45 साल के उन salaried लोगों के लिए है जो पहली या दूसरी बार यह फैसला समझकर लेना चाहते हैं। सारी गणना FY 2026-27 (assessment year 2027-28) के नियमों से की गई है।

इस guide में आप सीखेंगे:

  • दोनों regime असल में क्या हैं और किसमें क्या मिलता है और क्या नहीं मिलता
  • टैक्स की गणना step-by-step कैसे होती है, 87A rebate और 4% cess समेत
  • ₹8 lakh, ₹13 lakh, ₹15 lakh और ₹25 lakh की salary पर पूरी arithmetic के साथ तुलना
  • वह "break-even" आँकड़ा जिससे आप खुद तय कर सकते हैं कि Old regime कब फ़ायदे में है
  • आम गलतियाँ, myths, FAQs, एक checklist और 30 दिन का plan

शुरू करने से पहले अपना अंदाज़ा देख लेना हो तो Income Tax Calculator साथ में खोलकर रखें। इस पूरे guide में एक बात बार-बार आएगी: फैसला भावना से नहीं, दोनों regime में गणना करके होता है।

दो regime क्या हैं: बिल्कुल शुरू से

आपकी कमाई पर टैक्स "taxable income" पर लगता है, यानी आपकी कुल आय में से कुछ छूट और कटौतियाँ घटाने के बाद जो बचे। सरकार ने इसे गणना के दो अलग रास्ते दिए हैं।

  • Old Tax Regime: टैक्स की दरें ऊँची हैं, लेकिन बदले में कई तरह की छूट और कटौतियाँ (जैसे HRA, 80C, 80D, home-loan का ब्याज) मिलती हैं।
  • New Tax Regime: दरें कम हैं और slabs चौड़े हैं, लेकिन ज़्यादातर छूट और कटौतियाँ नहीं मिलतीं। इसके साथ ₹12 lakh तक की taxable income पर पूरा टैक्स माफ़ हो जाता है।

New regime अब "default" है। यानी अगर आप कुछ भी नहीं चुनते तो आपका टैक्स New regime के हिसाब से ही गिना जाता है। Old regime में रहना हो तो उसे सोच-समझकर चुनना पड़ता है।

एक ज़रूरी बात: यह चुनाव हर साल दोहराया जा सकता है

अगर आपकी आय सिर्फ़ salary, ब्याज या किराये जैसे स्रोतों से है, तो आप हर साल अलग regime चुन सकते हैं। इस साल New और अगले साल Old चुनने पर कोई रोक नहीं है। जिन लोगों की आय में business या profession की कमाई शामिल है, उनके लिए Old regime में लौटने के नियम ज़्यादा सख़्त हैं और सीमित बार ही संभव है। ऐसे में अपने CA से पूछ लेना बेहतर है।

नाम और सेक्शन नंबरों के बारे में

Income-tax Act 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है और इसमें सेक्शन नंबर नए सिरे से लगाए गए हैं। फिर भी आम बोलचाल में लोग 80C, 80D, 87A जैसे पुराने नाम ही इस्तेमाल करते हैं और इस guide में भी हम वही नाम लिखेंगे। इन छूटों की सीमाएँ वही हैं जो नीचे बताई गई हैं, पर नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फ़ाइल करने से पहले आधिकारिक स्रोत ज़रूर जाँचें।

New regime: slabs, standard deduction और rebate

New regime के slabs (FY 2026-27)

  • ₹4 lakh तक: कोई टैक्स नहीं
  • ₹4 lakh से ₹8 lakh: 5%
  • ₹8 lakh से ₹12 lakh: 10%
  • ₹12 lakh से ₹16 lakh: 15%
  • ₹16 lakh से ₹20 lakh: 20%
  • ₹20 lakh से ₹24 lakh: 25%
  • ₹24 lakh से ऊपर: 30%

ध्यान दें कि यह दर हर rupee पर नहीं, सिर्फ़ उस हिस्से पर लगती है जो उस slab में आता है। इसे "marginal rate" कहते हैं। अगर आपकी taxable income ₹9 lakh है तो पूरे ₹9 lakh पर 10% नहीं लगेगा। ₹4 से ₹8 lakh वाले हिस्से पर 5% और ₹8 से ₹9 lakh वाले हिस्से पर 10% लगेगा।

Standard deduction

Salaried लोगों को New regime में ₹75,000 की standard deduction मिलती है और Old regime में ₹50,000। इसके लिए कोई bill या proof नहीं देना होता। यह सीधे आपकी gross salary में से घट जाती है।

Section 87A rebate और ₹12 lakh का नियम

New regime में अगर आपकी taxable income ₹12 lakh तक है, तो 87A rebate के कारण आपका टैक्स शून्य हो जाता है। Salaried व्यक्ति के लिए इसका मतलब है कि ₹12.75 lakh तक की gross salary पर (₹75,000 standard deduction घटाने के बाद ₹12 lakh) कोई income tax नहीं बनता, बशर्ते और कोई आय या कटौती न हो।

₹12 lakh के ठीक ऊपर जाने पर पूरा टैक्स अचानक नहीं टूट पड़ता। वहाँ "marginal relief" काम करता है, जिसका मतलब है कि टैक्स उस रकम से ज़्यादा नहीं हो सकता जितनी आपकी आय ₹12 lakh से ऊपर है। नीचे हम इसका एक उदाहरण देखेंगे।

Cess

दोनों regime में टैक्स के ऊपर 4% "health and education cess" लगता है। यानी जो टैक्स slab और rebate के बाद निकला, उसका 1.04 गुना आपको असल में चुकाना होता है।

Old regime: slabs और वे कटौतियाँ जो काम की हैं

Old regime के slabs

  • ₹2.5 lakh तक: कोई टैक्स नहीं
  • ₹2.5 lakh से ₹5 lakh: 5%
  • ₹5 lakh से ₹10 lakh: 20%
  • ₹10 lakh से ऊपर: 30%

Old regime में 87A rebate ₹12,500 तक है और तभी मिलता है जब taxable income ₹5 lakh या उससे कम हो। इसका मतलब है कि ₹5 lakh तक की taxable income पर टैक्स शून्य, लेकिन ₹5 lakh से ऊपर जाते ही rebate चला जाता है।

आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली कटौतियाँ

  • 80C: ₹1.5 lakh तक। इसमें EPF में आपका हिस्सा, PPF, ELSS, जीवन बीमा का premium, बच्चों की tuition fees और home loan का principal जैसी चीज़ें आती हैं।
  • NPS (80CCD(1B)): 80C के ऊपर अतिरिक्त ₹50,000।
  • 80D (health insurance): खुद और परिवार के लिए ₹25,000, और वरिष्ठ नागरिक के लिए ₹50,000 तक। माता-पिता का premium अलग से गिना जाता है।
  • Home loan का ब्याज: जिस घर में आप खुद रहते हैं, उस पर ₹2 lakh तक।
  • HRA: किराये पर रहने वालों को, नीचे के तीन आँकड़ों में से जो सबसे कम हो उतनी छूट। (1) असल में मिला HRA, (2) चुकाया गया किराया घटा basic का 10%, (3) basic का 50% (metro शहरों में) या 40% (बाकी में); metro की सूची और ये प्रतिशत बदल सकते हैं, इसलिए मौजूदा नियम जाँचें। अपना आँकड़ा HRA Exemption Calculator से निकालें।

इनके अलावा LTA, कुछ भत्तों की छूट आदि भी Old regime में काम आती हैं। New regime में आम तौर पर ये सब नहीं मिलतीं। हाँ, employer अगर आपके NPS खाते में योगदान करता है तो उस पर छूट New regime में भी मिलती है, पर उसकी सीमा बदलती रहती है, इसलिए HR या tax professional से मौजूदा सीमा पूछ लें।

टैक्स की गणना step-by-step

चाहे कोई भी regime हो, गणना इन्हीं चरणों में होती है। आप इन्हें एक कागज़ पर खुद दोहरा सकते हैं।

  1. Gross salary लिखें। यानी CTC नहीं, बल्कि वह रकम जो आपके salary slip पर कुल कमाई के रूप में दिखती है (employer का PF हिस्सा CTC में अलग से हो सकता है, उसे सावधानी से देखें)।
  2. Standard deduction घटाएँ। New में ₹75,000, Old में ₹50,000।
  3. सिर्फ़ Old regime में: HRA की छूट और 80C, 80D, NPS, home-loan ब्याज जैसी कटौतियाँ घटाएँ।
  4. जो बचा, वही taxable income है।
  5. Slab के हिसाब से टैक्स निकालें। हर slab पर सिर्फ़ उसके हिस्से की रकम पर दर लगाएँ।
  6. Rebate देखें। New में taxable income ₹12 lakh तक हो तो टैक्स शून्य। Old में ₹5 lakh तक हो तो ₹12,500 तक का rebate।
  7. 4% cess जोड़ें और अंतिम टैक्स देखें।
  8. दोनों regime के आँकड़े आमने-सामने रखें और जिसमें कम टैक्स है, उसे अपनी असल खर्च-बचत की स्थिति के साथ मिलाकर देखें।

Worked examples: पूरी arithmetic के साथ

नीचे के सभी उदाहरण rounded और सरल हैं। इनमें मान लिया गया है कि आय सिर्फ़ salary है, और कोई surcharge लागू नहीं है।

उदाहरण 1: ₹8 lakh की salary

New regime: ₹8,00,000 - ₹75,000 = ₹7,25,000 taxable। ₹4 lakh के ऊपर के ₹3,25,000 पर 5% = ₹16,250। लेकिन taxable income ₹12 lakh से कम है, इसलिए 87A rebate से टैक्स शून्य। कुल टैक्स: ₹0।

Old regime: ₹8,00,000 - ₹50,000 = ₹7,50,000। अगर 80C में पूरे ₹1.5 lakh लगाए तो taxable = ₹6,00,000। टैक्स: ₹2.5 से ₹5 lakh पर 5% = ₹12,500, और ₹5 से ₹6 lakh पर 20% = ₹20,000, कुल ₹32,500। Rebate नहीं मिलेगा क्योंकि taxable income ₹5 lakh से ऊपर है। 4% cess (₹1,300) जोड़कर कुल टैक्स: ₹33,800।

यानी इस आय पर New regime में ₹33,800 का टैक्स बचता है, और ऊपर से ₹1.5 lakh कहीं लॉक भी नहीं करने पड़ते।

उदाहरण 2: ₹15 lakh की salary

New regime: ₹15,00,000 - ₹75,000 = ₹14,25,000 taxable।

  • ₹4 से ₹8 lakh (₹4 lakh) पर 5% = ₹20,000
  • ₹8 से ₹12 lakh (₹4 lakh) पर 10% = ₹40,000
  • ₹12 lakh से ₹14.25 lakh (₹2,25,000) पर 15% = ₹33,750
  • कुल = ₹93,750, और 4% cess ₹3,750 जोड़ने पर ₹97,500

Old regime, अलग-अलग स्थिति में: यहाँ तीन स्थितियाँ देखते हैं। पहले ₹15,00,000 - ₹50,000 standard deduction = ₹14,50,000 लें।

  • (क) सिर्फ़ 80C ₹1.5 lakh: taxable ₹13,00,000। टैक्स = ₹12,500 (₹2.5 से ₹5 lakh पर 5%) + ₹1,00,000 (₹5 से ₹10 lakh पर 20%) + ₹90,000 (₹10 से ₹13 lakh पर 30%) = ₹2,02,500। 4% cess (₹8,100) जोड़कर ₹2,10,600।
  • (ख) 80C + NPS ₹50,000 + 80D ₹25,000 + home-loan ब्याज ₹2 lakh = ₹4.25 lakh की कटौती: taxable ₹10,25,000। टैक्स = ₹12,500 + ₹1,00,000 + ₹7,500 (₹25,000 पर 30%) = ₹1,20,000। Cess के साथ ₹1,24,800। यह भी New regime के ₹97,500 से ज़्यादा है।
  • (ग) (ख) के ऊपर HRA की छूट ₹1.5 lakh भी हो: taxable ₹8,75,000। टैक्स = ₹12,500 + ₹75,000 = ₹87,500। Cess के साथ ₹91,000। अब Old regime ₹6,500 सस्ता पड़ा।

सबक यह है कि ₹15 lakh की salary पर Old regime तभी जीतता है जब standard deduction के अलावा कुल कटौतियाँ और छूट मिलाकर लगभग ₹5.4 lakh से ऊपर निकलें। सिर्फ़ 80C, NPS और 80D से यह आँकड़ा बहुत कम लोगों में पहुँचता है।

उदाहरण 3: ₹13 lakh की salary और marginal relief

₹13,00,000 - ₹75,000 = ₹12,25,000 taxable, यानी ₹12 lakh से सिर्फ़ ₹25,000 ज़्यादा। अगर rebate या relief न होता, तो slab के हिसाब से टैक्स ₹20,000 + ₹40,000 + ₹3,750 = ₹63,750 बनता। Marginal relief के कारण टैक्स उतना ही रहेगा जितनी आय ₹12 lakh से ऊपर है, यानी ₹25,000। Cess जोड़कर कुल ₹26,000। यानी ₹63,750 नहीं, सिर्फ़ ₹25,000 की सीमा।

उदाहरण 4: कितनी कटौती पर Old regime बराबरी पर आता है?

नीचे का आँकड़ा बताता है कि हर salary स्तर पर standard deduction के अलावा कितनी कटौती और छूट (HRA समेत) चाहिए ताकि Old regime का टैक्स New regime के बराबर या उससे कम हो जाए। आँकड़े लगभग हैं।

  • ₹10 lakh salary: New regime में टैक्स ₹0, Old को बराबर आने के लिए लगभग ₹4.5 lakh की कटौती चाहिए
  • ₹12 lakh salary: New में ₹0, Old को लगभग ₹6.5 lakh चाहिए
  • ₹15 lakh salary: New में ₹97,500, Old को लगभग ₹5.4 lakh चाहिए
  • ₹20 lakh salary: New में ₹1,92,400, Old को लगभग ₹7.1 lakh चाहिए
  • ₹25 lakh salary: New में ₹3,19,800, Old को लगभग ₹8 lakh चाहिए

अब अपनी कटौतियों का जोड़ लगाइए। 80C (₹1.5 lakh) + NPS (₹50,000) + 80D (₹25,000) + home-loan ब्याज (₹2 lakh) = अधिकतम ₹4.25 lakh। इसमें HRA की छूट जोड़ दें। अगर आपका कुल इससे कम पड़ता है, तो ऊपर के आँकड़ों में Old regime अक्सर पीछे रहेगा। ध्यान रहे कि यह सब मान्यताएँ हैं और आपकी असल स्थिति (surcharge, दूसरी आय आदि) अलग हो सकती है।

अपने लिए सही regime कैसे चुनें

तीन सवाल जो पूछने चाहिए

  1. मेरी कुल कटौतियाँ और छूट कितनी हैं? HRA की छूट, 80C, NPS, 80D और home-loan ब्याज का जोड़ निकालें। इसे ऊपर के break-even आँकड़ों से मिलाएँ।
  2. क्या मैं ये निवेश और खर्च वैसे भी करता/करती? अगर आपको emergency fund, retirement या health cover के लिए यह सब करना ही था, तो Old regime की कटौती एक बोनस है। लेकिन अगर आप सिर्फ़ टैक्स बचाने के लिए पैसा बाँध रहे हैं, तो यह उलटा पड़ सकता है।
  3. क्या यह अगले साल भी वैसा ही रहेगा? नौकरी बदलना, किराया बदलना या home loan शुरू होना जैसी घटनाएँ गणित को पलट सकती हैं।

मोटा नियम, पर हमेशा गणना करें

  • जिनकी गिनी-चुनी कटौतियाँ हैं और किराया कम है, उनके लिए New regime अक्सर सरल और सस्ता पड़ता है।
  • जो कई कटौतियाँ ले रहे हैं (बड़ा HRA, home loan ब्याज, NPS, 80D), उनके लिए Old regime कभी-कभी आगे निकल सकता है।
  • ₹12.75 lakh तक की salary वाले लोग New regime में टैक्स शून्य पा सकते हैं, इसलिए वहाँ Old regime के लिए बहुत बड़ी कटौतियाँ चाहिए।

मोटा नियम सिर्फ़ शुरुआती अंदाज़ा है। अंतिम फैसला हमेशा दोनों regime की गणना के बाद करें।

Employer को बताना बनाम ITR में चुनना

यह वह जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा उलझन होती है। दो अलग चीज़ें हैं।

  • Employer को घोषणा: साल की शुरुआत में आप employer को बताते हैं कि आप कौन-सा regime चुन रहे हैं। इसी के आधार पर हर महीने की salary से TDS कटता है। अगर आपने कुछ नहीं बताया, तो आम तौर पर New regime के हिसाब से TDS कटता है।
  • ITR में असली चुनाव: आपका अंतिम टैक्स और regime आपके ITR में तय होता है। Salaried लोग आम तौर पर employer को बताए regime से अलग regime ITR में चुन सकते हैं। अगर TDS ज़्यादा कट गया हो, तो फ़र्क़ refund के रूप में लौटता है, पर refund आने में समय लगता है और वह समय बदलता रहता है।

इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि गलत regime से TDS कट जाए तो दुनिया खत्म नहीं होती, पर आपका हर महीने का cash flow ज़रूर दबता है। इसलिए बेहतर है कि अप्रैल में ही गणना करके सही घोषणा दे दें। अगर आपके employer की revision window साल के बीच में खुलती है तो उसका इस्तेमाल करें।

आम गलतियाँ और myths

Myth 1: "Old regime हमेशा बेहतर है क्योंकि छूट मिलती है"

छूट तभी फ़ायदेमंद है जब उसका कुल योग break-even से ऊपर हो। ₹8 lakh की salary वाले उदाहरण में हमने देखा कि Old regime में ₹33,800 टैक्स देना पड़ा, जबकि New में शून्य। छूट मिलना और टैक्स कम होना दो अलग बातें हैं।

Myth 2: "New regime में सब कुछ बिना tax-saving के चलता है, इसलिए बचत करने की ज़रूरत नहीं"

टैक्स की बचत और धन की बचत एक चीज़ नहीं है। New regime में 80C की कटौती नहीं मिलती, लेकिन retirement, emergency fund और goals के लिए निवेश करना अब भी ज़रूरी है। फ़र्क़ इतना है कि अब आप निवेश अपनी ज़रूरत के हिसाब से चुनते हैं, टैक्स की मजबूरी के हिसाब से नहीं।

Myth 3: "अप्रैल में चुना तो साल भर बदल नहीं सकता"

Salaried आय वालों के लिए ITR में regime फिर से चुना जा सकता है। अगली साल भी नया चुनाव करने की आज़ादी रहती है। हाँ, business आय वालों पर पाबंदियाँ हैं।

गलती 4: March में हड़बड़ी में 80C भरना

साल के अंत में पता चलता है कि 80C कम पड़ा है, और लोग किसी भी योजना में एकमुश्त पैसा डाल देते हैं। इससे ऐसी जगह पैसा लॉक हो सकता है जिसकी अवधि या जोखिम आपने समझा ही नहीं। उदाहरण के लिए ELSS में 3 साल का lock-in होता है और वह market से जुड़ा है, यानी इसका मूल्य गिर भी सकता है।

गलती 5: CTC को salary मान लेना

CTC में employer का PF हिस्सा, bonus या insurance जैसी चीज़ें शामिल हो सकती हैं जो आपके हाथ में नहीं आतीं। गणना हमेशा taxable salary से करें, जो आपकी salary slip या Form 16 में दिखती है।

गलती 6: HRA का दावा बिना सही दस्तावेज़ के

HRA की छूट के लिए किराये की रसीदें और मकान मालिक का PAN (किराया एक सीमा से ऊपर हो तो) जैसे दस्तावेज़ चाहिए होते हैं। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए employer के निर्देश देखें। रसीदें सही न हों तो notice का जोखिम रहता है।

गलती 7: सिर्फ़ इस साल की गणना देखना

Increment, job switch या नया home loan आने पर गणित बदल जाता है। हर साल अप्रैल में, या जब आय या खर्च का ढाँचा बदले, तब दोबारा गणना करें।

गलती 8: Rebate की सीमा का गलत मतलब निकालना

₹12 lakh का मतलब taxable income है, gross salary नहीं। Salaried व्यक्ति के लिए यह लगभग ₹12.75 lakh की gross salary बैठती है, पर अगर आपकी ब्याज या अन्य आय भी है तो वह जुड़ेगी।

जाँच-सूची (checklist)

  • मैंने अपनी gross salary और standard deduction लिख ली है
  • मैंने HRA की छूट का सही आँकड़ा निकाला है
  • मैंने 80C, NPS, 80D और home-loan ब्याज का सही जोड़ किया है
  • मैंने दोनों regime की गणना 4% cess के साथ की है
  • मैंने खुद से पूछा कि क्या मैं ये निवेश बिना टैक्स लाभ के भी करता/करती
  • मैंने employer को अपना choice समय पर बता दिया है
  • मैंने Form 16, AIS और 26AS की जानकारी मिलाई है
  • मैंने किराये की रसीदें और निवेश के proof संभाले हैं
  • मैंने तय किया है कि अगली गणना कब करूँगा/करूँगी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या New regime में 80C का फ़ायदा बिल्कुल नहीं मिलता?

आम तौर पर नहीं। 80C, 80D, HRA जैसी ज़्यादातर कटौतियाँ New regime में नहीं मिलतीं। इसके बावजूद आप PPF, ELSS या बीमा में निवेश कर सकते हैं, पर वह टैक्स की बचत के लिए नहीं, अपने goals के लिए होना चाहिए।

2. मेरी salary ₹12 lakh है, क्या मुझे बिल्कुल टैक्स नहीं देना होगा?

अगर आय सिर्फ़ salary है, तो ₹12 lakh की gross salary पर New regime में standard deduction के बाद taxable income ₹11.25 lakh होती है, जो ₹12 lakh की rebate सीमा के अंदर है। इसलिए टैक्स शून्य रहेगा। ध्यान रहे कि दूसरी आय (जैसे FD का ब्याज) जुड़ने पर तस्वीर बदल सकती है।

3. क्या मैं हर साल regime बदल सकता/सकती हूँ?

Salaried आय वाले आम तौर पर हाँ। Business या profession की आय वालों के लिए Old regime में लौटना सीमित है, इसलिए CA से पूछें।

4. अगर employer ने गलत regime से TDS काट लिया तो?

आप ITR में सही regime चुनकर अतिरिक्त कटा हुआ टैक्स refund के रूप में माँग सकते हैं। Refund आने का समय बदलता रहता है, इसलिए धैर्य रखें और ITR समय पर भरें।

5. क्या home loan वाले के लिए Old regime ही सही है?

ज़रूरी नहीं। जिस घर में आप खुद रहते हैं उसके ब्याज पर Old regime में ₹2 lakh तक की कटौती मिलती है, पर यह अकेली कटौती अक्सर break-even तक नहीं पहुँचाती। अपनी EMI का ब्याज हिस्सा देखकर दोनों regime में गणना करें। EMI को समझने के लिए EMI Calculator काम आएगा।

6. 4% cess किस पर लगता है?

Cess slab और rebate लगने के बाद निकले टैक्स पर लगता है, आपकी आय पर नहीं। इसलिए अगर टैक्स शून्य है तो cess भी शून्य है।

7. क्या ज़्यादा आय वालों पर कुछ और भी लगता है?

बहुत ज़्यादा आय पर surcharge लगता है, जिसकी दरें और सीमाएँ इस guide में शामिल नहीं हैं। उन्हें अपने CA या आधिकारिक स्रोत से जाँचें।

8. कितने समय में टैक्स की गणना दोबारा करनी चाहिए?

साल में कम से कम एक बार अप्रैल में, और जब भी increment, नौकरी, किराया या loan में बड़ा बदलाव हो।

शुरू करने का 30 दिन का plan

  1. पहले 5 दिन: पिछले साल का Form 16 और इस साल की salary slip निकालें। Gross salary, basic, HRA, EPF और अब तक कटा TDS लिखें।
  2. दिन 6 से 10: अपनी सभी संभावित कटौतियाँ गिनें: किराया, 80C के निवेश, health insurance premium, home-loan ब्याज, NPS।
  3. दिन 11 से 15: Income Tax Calculator में दोनों regime की गणना करें और इस guide के आँकड़ों से मिलाएँ।
  4. दिन 16 से 20: अपने आप से पूछें कि कौन-से निवेश आप वैसे भी करते। अगर नहीं, तो उन्हें Old regime के गणित से बाहर रखकर फिर तुलना करें।
  5. दिन 21 से 25: अगर New regime बेहतर निकला तो बची रकम किसी लक्ष्य के लिए तय करें, जैसे emergency fund या एक नियमित SIP।
  6. दिन 26 से 30: अपना फैसला employer के portal में दर्ज करें, और अगली समीक्षा की तारीख calendar में डालें।

सारांश

New regime में दरें कम हैं, ₹75,000 की standard deduction है और ₹12 lakh तक की taxable income पर टैक्स शून्य है। Old regime में दरें ऊँची हैं, पर HRA, 80C, NPS, 80D और home-loan ब्याज जैसी छूट मिलती हैं। ₹15 lakh की salary पर New regime में ₹97,500 टैक्स बनता है, जबकि Old regime में कुल कटौतियाँ लगभग ₹5.4 lakh से ऊपर हों तभी वह बराबरी पर आता है। इसलिए कोई एक regime सबके लिए सही नहीं है। हर साल अपने आँकड़ों से दोनों की गणना करें, यह देखें कि कौन-से निवेश आप टैक्स के बिना भी करते, और तब फैसला करें।

Educational use only. This guide is general information, not financial, tax, legal or investment advice. Rules, rates and limits change; check official sources and consult a SEBI-registered investment adviser, a qualified tax professional or your insurer before acting.
सिर्फ़ शैक्षणिक उपयोग के लिए। यह guide सामान्य जानकारी है, वित्तीय, टैक्स, कानूनी या निवेश सलाह नहीं। नियम, दरें और सीमाएँ बदलती रहती हैं; कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक स्रोत देखें और SEBI-registered investment adviser, योग्य tax professional या अपने बीमाकर्ता से सलाह लें।

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