शेयर या म्यूचुअल फंड बेचकर मुनाफ़ा कमाना अच्छी बात है, पर उस मुनाफ़े पर टैक्स भी लगता है। इसे कैपिटल गेन्स टैक्स कहते हैं। नियम समय के साथ बदले हैं, इसलिए यहाँ अक्टूबर 2026 तक लागू दरें समझाई गई हैं। (टैक्स नियम बदलते रहते हैं; फाइल करने से पहले आयकर विभाग की साइट पर ताज़ा जाँच लें।)
होल्डिंग अवधि: शॉर्ट टर्म बनाम लॉन्ग टर्म
- लिस्टेड शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड: 12 महीने या उससे कम रखने पर शॉर्ट टर्म, 12 महीने से ज़्यादा रखने पर लॉन्ग टर्म।
- अनलिस्टेड शेयर: 24 महीने की सीमा।
टैक्स की दरें (लिस्टेड शेयर और इक्विटी फंड)
- STCG: 20%
- LTCG: 12.5%, पर एक वित्त वर्ष में कुल LTCG के पहले ₹1.25 लाख पर कोई टैक्स नहीं। केवल उससे ऊपर के हिस्से पर टैक्स।
ऊपर की दरों पर लागू सेस अलग से जुड़ता है। पुरानी इंडेक्सेशन सुविधा अब इन पर उपलब्ध नहीं है।
उदाहरण
मान लीजिए आपने एक वित्त वर्ष में एक शेयर पर 8 महीने बाद ₹30,000 का मुनाफ़ा और एक इक्विटी फंड पर 2 साल बाद ₹2,25,000 का मुनाफ़ा कमाया।
- STCG: ₹30,000 × 20% = ₹6,000
- LTCG: ₹2,25,000 − ₹1,25,000 = ₹1,00,000 पर 12.5% = ₹12,500
- कुल टैक्स (सेस छोड़कर): ₹18,500
डेट म्यूचुअल फंड पर क्या?
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड (जिनमें इक्विटी का हिस्सा 35% से कम है) का मुनाफ़ा होल्डिंग अवधि की परवाह किए बिना आपकी आय में जुड़ता है और आपके स्लैब की दर से कटता है। गोल्ड, इंटरनेशनल फंड और हाइब्रिड फंड के नियम उनकी संरचना पर निर्भर हैं; खरीद से पहले जाँच लें।
नुकसान का सेट-ऑफ
- शॉर्ट टर्म नुकसान को शॉर्ट और लॉन्ग टर्म दोनों मुनाफ़ों से घटाया जा सकता है।
- लॉन्ग टर्म नुकसान केवल लॉन्ग टर्म मुनाफ़े से घटता है।
- जो नुकसान उसी साल घट न सके, उसे अगले 8 साल तक आगे ले जा सकते हैं, पर इसके लिए समय पर ITR भरना ज़रूरी है।
रिटर्न में कैसे दिखाएँ?
पूँजीगत लाभ होने पर आम तौर पर ITR-2 (या कारोबारी आय हो तो ITR-3) भरा जाता है। ब्रोकर और फंड हाउस से मिलने वाली कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट को AIS से मिलाकर ही दर्ज करें। कुछ सीमित मामलों में ₹1.25 लाख तक के LTCG के लिए ITR-1 की सुविधा है; अपनी स्थिति के हिसाब से फ़ॉर्म चुनें।
टैक्स बचाने के वैध तरीके
- हर साल ₹1.25 लाख तक के LTCG का लाभ उठाने के लिए ज़रूरत हो तो चरणों में मुनाफ़ा बुक करना।
- नुकसान वाले निवेश को बेचकर उसे मुनाफ़े से सेट-ऑफ करना (टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग), पर इसमें लेन-देन की लागत और निवेश-रणनीति का भी ध्यान रखें।
यह लेख शैक्षणिक है, टैक्स सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।
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