आईपीओ गाइड
25 जरूरी सवाल — आसान हिंदी में जवाब
यह सारे FAQs इस article से बने हैं
आईपीओ क्या है? कैसे अप्लाई करें — पूरी गाइड
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इस पेज के सभी सवाल (25)
- IPO क्या होता है और कंपनियाँ इसे क्यों लाती हैं?
- Fresh issue और Offer for Sale (OFS) में क्या फर्क होता है?
- DRHP और RHP क्या होते हैं और दोनों में क्या अंतर है?
- IPO में पैसा लगाने से पहले RHP के कौन से हिस्से पढ़ने चाहिए?
- IPO में अप्लाई करने के लिए कौन-कौन सी चीज़ें चाहिए?
- UPI से IPO का आवेदन कैसे किया जाता है?
- ASBA क्या है और क्या IPO में अप्लाई करते ही पैसा कट जाता है?
- Price band और cut-off price का मतलब क्या होता है?
- IPO में lot size क्या होता है और न्यूनतम निवेश कैसे निकलता है?
- Retail, sNII, bNII और QIB श्रेणियाँ क्या होती हैं?
- IPO में रिटेल, NII और QIB के लिए कितना हिस्सा आरक्षित रहता है?
- रिटेल श्रेणी में अधिकतम कितने lot की बिड लग सकती है?
- क्या एक ही IPO में एक PAN से कई आवेदन कर सकते हैं?
- IPO कितने दिन खुला रहता है और T+3 लिस्टिंग टाइमलाइन क्या है?
- IPO में शेयर किसे मिलेंगे, यह कैसे तय होता है?
- IPO का allotment status कहाँ और कैसे देखें?
- IPO में शेयर न मिलें या कम मिलें तो बचा हुआ पैसा कब और कैसे वापस आता है?
- IPO का subscription 20 गुना होने का क्या मतलब है?
- IPO का आवेदन किन कारणों से रिजेक्ट हो सकता है?
- Anchor investors कौन होते हैं और उनकी भूमिका क्या है?
- IPO में lock-in क्या होता है और किसके शेयर कितने समय बँधे रहते हैं?
- लिस्टिंग के बाद IPO के शेयर बेचने पर टैक्स कैसे लगता है?
- क्या IPO में शेयर मिल जाने का मतलब पक्का फायदा होता है?
- SME IPO क्या होता है और मेनबोर्ड IPO से कैसे अलग है?
- SME IPO में न्यूनतम निवेश कितना है और इसमें क्या खास जोखिम हैं?
IPO यानी Initial Public Offering वह मौका है जब कोई कंपनी पहली बार आम जनता को अपने शेयर बेचती है और उसके बाद NSE या BSE पर लिस्ट हो जाती है। कंपनियाँ आम तौर पर कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या शुरुआती निवेशकों और प्रमोटरों को आंशिक निकासी देने के लिए यह रास्ता चुनती हैं। IPO में शेयर तय प्रक्रिया से मिलते हैं, जबकि लिस्टिंग के बाद वही शेयर एक्सचेंज पर रोज़ खरीदे-बेचे जाते हैं। यह निवेश भी शेयर बाज़ार के जोखिम से मुक्त नहीं होता।
Fresh issue में कंपनी नए शेयर जारी करती है, इसलिए निवेशकों का पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है और उसका उपयोग Objects of the Issue में बताए कामों में होता है। Offer for Sale में मौजूदा शेयरधारक, जैसे प्रमोटर या शुरुआती निवेशक, अपने पुराने शेयर बेचते हैं, इसलिए रकम कंपनी को नहीं, बेचने वालों को मिलती है। कई IPO में दोनों हिस्से होते हैं। उदाहरण: ₹1,000 करोड़ के IPO में ₹600 करोड़ fresh और ₹400 करोड़ OFS हो सकता है; यह बँटवारा RHP में साफ लिखा रहता है।
DRHP यानी Draft Red Herring Prospectus वह शुरुआती मसौदा है जो कंपनी अपने मर्चेंट बैंकर के ज़रिए SEBI और एक्सचेंज में जमा करती है। इसे जनता की टिप्पणियों के लिए कम से कम 21 दिन सार्वजनिक रखा जाता है, और इसमें price band या खुलने की तारीख़ें तय नहीं होतीं। SEBI की जाँच के बाद कंपनी RHP यानी Red Herring Prospectus फाइल करती है, जिसमें price band, issue की तारीख़ें और lot size जैसे ब्योरे आते हैं। आवेदन से पहले RHP पढ़ना सबसे ज़रूरी माना जाता है।
पूरा RHP सैकड़ों पन्नों का होता है, इसलिए नए निवेशक आम तौर पर इन हिस्सों से शुरू करते हैं:
1) Objects of the Issue, यानी पैसा कहाँ खर्च होगा
2) Risk Factors
3) कारोबार का मॉडल और कुछ ग्राहकों या सप्लायरों पर निर्भरता
4) पिछले सालों की बिक्री, मुनाफा और कर्ज
5) प्रमोटर, चल रहे मुकदमे और related-party लेन-देन
6) Fresh issue और OFS का अनुपात
इसके अलावा Abridged Prospectus में मुख्य जानकारी संक्षेप में मिल जाती है, पर अंतिम स्रोत RHP ही है।
1) Objects of the Issue, यानी पैसा कहाँ खर्च होगा
2) Risk Factors
3) कारोबार का मॉडल और कुछ ग्राहकों या सप्लायरों पर निर्भरता
4) पिछले सालों की बिक्री, मुनाफा और कर्ज
5) प्रमोटर, चल रहे मुकदमे और related-party लेन-देन
6) Fresh issue और OFS का अनुपात
इसके अलावा Abridged Prospectus में मुख्य जानकारी संक्षेप में मिल जाती है, पर अंतिम स्रोत RHP ही है।
तीन बातें मुख्य हैं: PAN से जुड़ा demat खाता, जिसमें शेयर आएँगे; एक बैंक खाता, जिसमें आवेदन की रकम हो; और UPI या नेट बैंकिंग, जिससे ASBA के ज़रिए रकम ब्लॉक होती है। KYC पूरी होनी चाहिए और PAN, demat व बैंक के विवरण आपस में मेल खाने चाहिए, वरना आवेदन रद्द हो सकता है। आवेदन ब्रोकर ऐप, बैंक की नेट बैंकिंग या अधिकृत माध्यम से किया जा सकता है। पैसा आपके अपने खाते या अपनी UPI ID का होना चाहिए; किसी तीसरे व्यक्ति के फंड की अनुमति नहीं है।
आम तौर पर क्रम यह रहता है:
1) ब्रोकर या बैंक ऐप में खुला IPO चुनें
2) lot की संख्या और price भरें, cut-off का विकल्प केवल रिटेल के लिए है
3) अपनी UPI ID डालें
4) UPI ऐप में आया mandate request स्वीकार करके PIN डालें
इससे रकम सिर्फ ब्लॉक होती है, कटती नहीं। UPI के ज़रिए व्यक्तिगत निवेशक ₹5 लाख तक की बिड लगा सकते हैं। Mandate समय पर स्वीकार न हुआ तो आवेदन आगे नहीं बढ़ता, इसलिए ऐप की सूचनाएँ चालू रखना उपयोगी है।
1) ब्रोकर या बैंक ऐप में खुला IPO चुनें
2) lot की संख्या और price भरें, cut-off का विकल्प केवल रिटेल के लिए है
3) अपनी UPI ID डालें
4) UPI ऐप में आया mandate request स्वीकार करके PIN डालें
इससे रकम सिर्फ ब्लॉक होती है, कटती नहीं। UPI के ज़रिए व्यक्तिगत निवेशक ₹5 लाख तक की बिड लगा सकते हैं। Mandate समय पर स्वीकार न हुआ तो आवेदन आगे नहीं बढ़ता, इसलिए ऐप की सूचनाएँ चालू रखना उपयोगी है।
ASBA यानी Application Supported by Blocked Amount में आवेदन की रकम आपके खाते में ही रहती है, बस उतनी राशि पर होल्ड लग जाता है, और बचत खाते का ब्याज आम तौर पर मिलता रहता है। उदाहरण: ₹15,000 की बिड पर खाते में ₹15,000 ब्लॉक होंगे। शेयर अलॉट होने पर सिर्फ अलॉट शेयरों की रकम कटेगी और बाकी अनब्लॉक हो जाएगी। अलॉटमेंट न मिले तो पूरी रकम अपने आप अनब्लॉक होती है, अलग से refund नहीं माँगना पड़ता।
Book-building IPO में कंपनी एक price band घोषित करती है, जैसे ₹95 से ₹100, यानी बिड इसी दायरे में लगती है। नियम के अनुसार upper price, floor price के 120% से ज़्यादा और 105% से कम नहीं हो सकता। Cut-off price का अर्थ है कि आप बुक-बिल्डिंग के बाद तय होने वाले अंतिम इश्यू प्राइस पर शेयर लेने को तैयार हैं। यह विकल्प सिर्फ Retail Individual Investors को मिलता है, और रकम upper price के हिसाब से ब्लॉक होती है। अंतिम इश्यू प्राइस इसी band के भीतर तय होता है।
IPO में शेयर अलग-अलग नहीं, एक न्यूनतम समूह यानी lot में माँगे जाते हैं। मेनबोर्ड IPO में lot आम तौर पर ऐसा रखा जाता है कि upper price पर उसकी कीमत ₹10,000 से ₹15,000 के दायरे में बैठे। उदाहरण: upper price ₹100 और lot 150 शेयर का हो तो न्यूनतम निवेश 150 × ₹100 = ₹15,000 होगा, और दो lot के लिए ₹30,000 लगेंगे। हर IPO का सही lot size और price RHP तथा ब्रोकर ऐप में लिखा होता है, इसलिए वही अंतिम माना जाता है।
IPO का हिस्सा निवेशक-समूहों में बँटा होता है। Retail Individual Investor वह व्यक्ति है जो कुल ₹2 लाख तक की बिड लगाए। इससे ऊपर वाले व्यक्ति या संस्थाएँ Non-Institutional Investors (NII) कहलाते हैं, जिनमें ₹2 लाख से ₹10 लाख वाले sNII और ₹10 लाख से ऊपर वाले bNII आते हैं। QIB यानी Qualified Institutional Buyers में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ, बैंक और विदेशी संस्थागत निवेशक जैसी बड़ी संस्थाएँ आती हैं। हर श्रेणी का कोटा अलग रहता है और अलॉटमेंट भी अपनी श्रेणी के भीतर होता है।
सामान्य book-built मेनबोर्ड IPO में, जहाँ कंपनी मुनाफे की शर्त पूरी करती है, नियम के अनुसार QIB को अधिकतम 50%, NII को कम से कम 15% और रिटेल को कम से कम 35% नेट ऑफर मिलता है। NII हिस्से का एक-तिहाई ₹2 से ₹10 लाख वालों के लिए और दो-तिहाई ₹10 लाख से ऊपर वालों के लिए रखा जाता है। उदाहरण: ₹1,000 करोड़ के नेट ऑफर में रिटेल का न्यूनतम हिस्सा ₹350 करोड़ बनेगा। कुछ कंपनियों के लिए अनुपात अलग हो सकता है, इसलिए RHP देखना ज़रूरी है।
रिटेल श्रेणी में कुल बिड ₹2 लाख से ज़्यादा नहीं हो सकती, और हिसाब upper price पर लगता है। उदाहरण: upper price ₹100 और lot 150 शेयर यानी एक lot ₹15,000 का है। ₹2,00,000 ÷ ₹15,000 = 13.33, इसलिए रिटेल में अधिकतम 13 lot (₹1,95,000) आएँगे। 14 lot (₹2,10,000) की बिड NII श्रेणी में गिनी जाएगी, जहाँ अलॉटमेंट का तरीका अलग है। ज़्यादा subscribe हुए रिटेल हिस्से में आम तौर पर लॉटरी एक न्यूनतम lot के आधार पर होती है, इसलिए ज़्यादा lot माँगने से मिलने की संभावना अपने-आप नहीं बढ़ती।
नहीं, एक IPO में आम तौर पर एक PAN से एक ही आवेदन गिना जाता है। अलग-अलग ब्रोकर या बैंक से एक ही PAN पर कई बिड लगाने पर डुप्लिकेट पाए जाने से आवेदन रद्द हो सकते हैं। परिवार के हर सदस्य का अपना PAN, demat और बैंक खाता होना चाहिए, और हर किसी की रकम उसके अपने खाते से जानी चाहिए। उदाहरण: पति और पत्नी अपने-अपने PAN और खातों से अलग आवेदन करें तो वे अलग आवेदन गिने जाते हैं।
मेनबोर्ड IPO आम तौर पर 3 कार्य दिवस खुला रहता है; price band बदलने जैसी स्थिति में अवधि बढ़ सकती है, पर कुल 10 कार्य दिवस से ज़्यादा नहीं। SEBI के नियम के अनुसार 1 दिसंबर 2023 से सभी पब्लिक इश्यू की लिस्टिंग इश्यू बंद होने के T+3 कार्य दिवस के भीतर होती है, जहाँ T इश्यू बंद होने का दिन है। उदाहरण: इश्यू बुधवार को बंद हो तो गुरुवार को अलॉटमेंट का आधार तय होता है, शुक्रवार को शेयर demat में आते हैं और अनब्लॉकिंग होती है, और सोमवार को लिस्टिंग होती है। बीच में छुट्टी पड़ी तो तारीख़ें खिसकेंगी।
अलॉटमेंट का आधार तय होने के बाद आप इश्यू के रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर, जिसका नाम RHP और ब्रोकर ऐप में दिया रहता है, अपने PAN, application number या demat ID से स्टेटस देख सकते हैं। ब्रोकर ऐप में भी स्टेटस दिख सकता है। शेयर मिलने पर वे सामान्यतः T+2 कार्य दिवस तक demat खाते में आ जाते हैं। सिर्फ इन आधिकारिक साइटों या अपने ब्रोकर ऐप का इस्तेमाल करें, और किसी अनजान लिंक पर PAN या UPI PIN कभी न डालें।
Subscription बताता है कि कुल कितने शेयरों की बिड आई, ऑफर किए गए शेयरों की तुलना में। उदाहरण: 10 लाख शेयर ऑफर हों और 2 करोड़ शेयरों की बिड आए तो इश्यू 20 गुना subscribe हुआ। यह आँकड़ा रिटेल, NII और QIB के लिए अलग-अलग आता है। ज़्यादा subscription का मतलब सिर्फ ज़्यादा माँग है; इससे अलॉटमेंट मिलना मुश्किल होता है, पर यह कंपनी की गुणवत्ता या लिस्टिंग के बाद के भाव के बारे में कुछ तय नहीं करता। कम subscription को भी अपने-आप खराब संकेत मानना सही नहीं है।
आम कारण ये हैं:
1) PAN, नाम या demat विवरण का मेल न खाना
2) UPI mandate तय समय तक स्वीकार न करना
3) खाते में पर्याप्त राशि न होना
4) एक ही PAN से कई आवेदन
5) NII या QIB का cut-off price चुनना, क्योंकि यह विकल्प केवल रिटेल के लिए है
6) किसी और के खाते या UPI से भुगतान
UPI में mandate समय पर स्वीकार न करना सबसे आम चूक है। आवेदन से पहले KYC और demat विवरण जाँच लें, और mandate मंज़ूर करने के बाद ऐप में रकम "blocked" दिख रही है या नहीं, यह देख लें।
1) PAN, नाम या demat विवरण का मेल न खाना
2) UPI mandate तय समय तक स्वीकार न करना
3) खाते में पर्याप्त राशि न होना
4) एक ही PAN से कई आवेदन
5) NII या QIB का cut-off price चुनना, क्योंकि यह विकल्प केवल रिटेल के लिए है
6) किसी और के खाते या UPI से भुगतान
UPI में mandate समय पर स्वीकार न करना सबसे आम चूक है। आवेदन से पहले KYC और demat विवरण जाँच लें, और mandate मंज़ूर करने के बाद ऐप में रकम "blocked" दिख रही है या नहीं, यह देख लें।
Anchor investors बड़े QIB होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ या विदेशी संस्थागत निवेशक, जो आम जनता के लिए IPO खुलने से एक कार्य दिवस पहले बिड लगाते हैं। मेनबोर्ड में एक anchor की न्यूनतम बिड ₹10 करोड़ होनी चाहिए, और QIB हिस्से का अधिकतम 60% anchor को दिया जा सकता है। 30 नवंबर 2025 से anchor हिस्से का 40% घरेलू संस्थाओं के लिए आरक्षित है: 33% म्यूचुअल फंड और 7% बीमा कंपनियाँ व पेंशन फंड। हर anchor को कम से कम ₹5 करोड़ का अलॉटमेंट मिलता है।
नहीं। IPO की कीमत बुक-बिल्डिंग से तय होती है, जबकि लिस्टिंग के बाद भाव बाज़ार की माँग-आपूर्ति, कंपनी के नतीजों और माहौल से चलता है, और वह इश्यू प्राइस के ऊपर या नीचे, दोनों दिशा में जा सकता है। ऊँचा subscription भी किसी तरह की गारंटी नहीं देता। उदाहरण: ₹100 पर मिले 150 शेयरों का भाव ₹90 हो जाए तो नुकसान 150 × ₹10 = ₹1,500 होगा। इसलिए RHP के जोखिम, कंपनी का कारोबार और कीमत का औचित्य समझना, और सिर्फ उतनी रकम पर सोचना जिसका जोखिम सहा जा सके, एक संतुलित नज़रिया माना जाता है।
SME IPO छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए होता है, जो मुख्य बोर्ड के बजाय NSE Emerge या BSE SME जैसे अलग प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होती हैं। इनकी post-issue paid-up capital आम तौर पर ₹25 करोड़ तक रहती है, और कंपनियाँ अक्सर छोटी तथा कम ट्रैक रिकॉर्ड वाली होती हैं। मेनबोर्ड से फर्क यह है कि न्यूनतम आवेदन ज़्यादा है, लिस्टिंग के बाद market maker तय होता है और ट्रेडिंग कम हो सकती है। आवेदन की प्रक्रिया वही रहती है, यानी demat, ASBA और UPI।
मार्च 2025 के SEBI संशोधनों के बाद SME IPO में न्यूनतम आवेदन आकार ₹2 लाख है, जो पहले ₹1 लाख था। इसमें कुछ खास जोखिम हैं: खरीदार-विक्रेता कम होने से liquidity की कमी, भाव में तेज़ उतार-चढ़ाव, कंपनी का छोटा आकार और ग्राहकों या प्रमोटर पर निर्भरता। Market maker आम तौर पर लिस्टिंग के बाद 3 साल तक दोनों तरफ के भाव देता है, पर इससे नुकसान का जोखिम खत्म नहीं होता। प्रमोटर का न्यूनतम 20% योगदान locked रहता है, और कंपनी की पूँजी बढ़ने पर वह मेनबोर्ड में जा सकती है।
और Topics
SIP
25
50-30-20 बजट रूल
25
इमरजेंसी फंड
25
एसआईपी या लंपसम
25
म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टिंग
25
होम लोन लेने से पहले 7 बातें
25
क्रेडिट कार्ड डेट से बाहर निकलना
25
सेक्शन 80सी टैक्स बचाना
25
न्यू टैक्स रिजीम vs ओल्ड टैक्स रिजीम
25
टर्म इंश्योरेंस
25
हेल्थ इंश्योरेंस गलतियां
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शेयर मार्केट इन्वेस्ट कैसे करें
25
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