स्क्रीन पर शेयर का भाव हर सेकंड बदलता दिखता है। आख़िर यह कौन तय करता है? और कैसे समझें कि कोई शेयर महँगा है या सस्ता? इस लेख में बिना भारी शब्दावली के इन सवालों के उत्तर हैं।
भाव कैसे बनता है?
शेयर एक्सचेंज पर ऑर्डर-बुक के ज़रिए चलता है। खरीदार बताते हैं कि वे किस भाव तक देने को तैयार हैं (बिड) और विक्रेता कितने से कम पर नहीं बेचेंगे (आस्क)। जब ये दोनों मिलते हैं, सौदा होता है और वही ताज़ा भाव बन जाता है। अगर खरीदार ज़्यादा हैं तो भाव चढ़ता है, विक्रेता ज़्यादा हैं तो गिरता है। कंपनी के नतीजे, उद्योग की ख़बरें, ब्याज दरें और निवेशकों की भावना, सब इसी माँग-आपूर्ति पर असर डालते हैं।
मार्केट कैप
मार्केट कैप = शेयर का भाव × कंपनी के कुल शेयरों की संख्या। यह कंपनी के आकार का पैमाना है, न कि उसके पास मौजूद नकदी का। एक सस्ता दिखने वाला ₹20 का शेयर बड़ी कंपनी का हो सकता है, और ₹2,000 का शेयर छोटी कंपनी का, इसलिए केवल भाव देखकर कंपनी को "सस्ता" या "महँगा" नहीं कह सकते।
कुछ बुनियादी अनुपात
EPS (प्रति शेयर कमाई)
कंपनी के शुद्ध मुनाफ़े को कुल शेयरों से भाग दें। उदाहरण: मुनाफ़ा ₹100 करोड़, शेयर 10 करोड़ तो EPS = ₹10।
P/E रेशियो
P/E = शेयर का भाव ÷ EPS। अगर ऊपर के शेयर का भाव ₹200 है, तो P/E = 20। इसका मतलब बाज़ार उस कंपनी की एक रुपये की कमाई के लिए 20 रुपये दे रहा है। P/E की तुलना उसी उद्योग की दूसरी कंपनियों और उसके अपने इतिहास से करें; सीधे किसी एक संख्या को "अच्छा" नहीं कह सकते।
P/B रेशियो
भाव ÷ प्रति शेयर बुक वैल्यू। बैंकों और भारी संपत्ति वाली कंपनियों में ज़्यादा उपयोगी।
ROE (इक्विटी पर रिटर्न)
शुद्ध मुनाफ़ा ÷ शेयरधारकों की पूँजी। यह बताता है कि कंपनी निवेशकों के पैसे का कितना कुशल इस्तेमाल करती है।
डेट-टू-इक्विटी
कर्ज़ ÷ शेयरधारकों की पूँजी। कर्ज़ ज़्यादा हो तो ब्याज का बोझ और जोखिम भी ज़्यादा।
खुद से पूछने वाले सवाल
- कंपनी क्या बेचती है और उसके पैसे कैसे बनते हैं?
- पिछले 5-10 साल में बिक्री और मुनाफ़ा बढ़ा है या नहीं?
- कर्ज़ सँभलने लायक है या नहीं?
- प्रबंधन कैसा है, इरादे और पारदर्शिता कैसी है?
- मौजूदा भाव कमाई और विकास की संभावना के मुक़ाबले उचित है या नहीं?
सीमाएँ
फंडामेंटल एनालिसिस भविष्य की गारंटी नहीं देता। अच्छी कंपनी भी ऊँचे भाव पर खरीदने से कमज़ोर रिटर्न दे सकती है। बाज़ार छोटी अवधि में ख़बरों और भावनाओं पर चलता है, इसलिए धैर्य और विविधीकरण ज़रूरी हैं।
यह लेख केवल शिक्षा के लिए है। यह किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है। निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है।
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