दिन 6: टैक्स की बुनियाद: सैलरी वालों के लिए
आज हम सैलरी पर टैक्स का मोटा ढाँचा, दो रिजीम का विचार और 80C का मतलब समझेंगे।
इस Lesson में क्या सीखेंगे
- आज हम सैलरी पर टैक्स का मोटा ढाँचा, दो रिजीम का विचार और 80C का मतलब समझेंगे।
आज हम सैलरी पर टैक्स का मोटा ढाँचा, दो रिजीम का विचार और 80C का मतलब समझेंगे।
टैक्स का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं, पर बुनियादी ढाँचा समझना मुश्किल नहीं है। आज हम सिर्फ़ मोटी तस्वीर देखेंगे। यह जानकारी सामान्य है, आपकी निजी स्थिति के लिए नहीं। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए आधिकारिक पेज incometax.gov.in पर नवीनतम जानकारी ज़रूर जाँचें।
टैक्स कैसे लगता है: स्लैब का विचार
भारत में आयकर स्लैब के हिसाब से लगता है, यानी आमदनी के अलग-अलग हिस्सों पर अलग दर। पूरी आमदनी पर एक ही ऊँची दर नहीं लगती। आम तौर पर कमाई के पहले हिस्से पर टैक्स नहीं लगता, फिर धीरे-धीरे दर बढ़ती है।
दो रिजीम: न्यू और ओल्ड
आयकर विभाग के अनुसार व्यक्तियों के लिए नई टैक्स व्यवस्था (नई रिजीम) डिफ़ॉल्ट है, पर पात्र करदाता चाहें तो पुरानी रिजीम चुन सकते हैं। दोनों के बीच बुनियादी फ़र्क यह माना जाता है:
- न्यू रिजीम: स्लैब की दरें अपेक्षाकृत कम और ज़्यादातर कटौतियाँ (Deductions) नहीं मिलतीं।
- ओल्ड रिजीम: स्लैब अलग हैं, पर 80C, 80D जैसी कई कटौतियाँ ली जा सकती हैं।
कौन सी रिजीम किसके लिए ठीक रहेगी, यह आपकी आमदनी और कटौतियों पर निर्भर करता है। इसे आँकड़ों से देखने के लिए Income Tax Calculator काम आ सकता है और न्यू बनाम ओल्ड रिजीम गाइड में विस्तार है।
कुछ आँकड़े जो आधिकारिक स्रोत में मिले
आयकर विभाग की जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए न्यू रिजीम में ₹4 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं है, और धारा 87A के तहत कुल आय ₹12 लाख तक होने पर अधिकतम ₹60,000 की छूट (रिबेट) मिलती है। PIB के अनुसार वेतनभोगियों के लिए न्यू रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 है। ये सीमाएँ बदल सकती हैं।
80C का विचार
पुराने कानून की धारा 80C में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1,50,000 तक की कटौती का प्रावधान है, जिसमें जीवन बीमा प्रीमियम, PF, कुछ बॉन्ड या जमा और बच्चों की ट्यूशन फ़ीस जैसे भुगतान आते हैं। नए आयकर अधिनियम 2025 में यह धारा 123 के रूप में है। आम तौर पर यह कटौती ओल्ड रिजीम में ही काम आती है। विस्तार के लिए Section 80C की परिभाषा देखें। हर भुगतान का टैक्स असर अलग होता है, इसलिए खर्च करने से पहले नियम पढ़ना ज़रूरी है।
आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है, इसलिए धाराओं के नए नंबर बने हैं। फिर भी वित्त वर्ष 2025-26 की रिटर्न (निर्धारण वर्ष 2026-27) में पुराने नंबर ही दिखेंगे। दोनों नंबर देख लेना अच्छा रहता है।
सैलरी वाले क्या देखें
- Form 16 और सैलरी स्लिप, TDS कितना कटा।
- AIS/Form 26AS में अपनी आमदनी और TDS मिलाना।
- ITR भरने की आख़िरी तारीख़ आधिकारिक पेज पर जाँचना।
ITR की प्रक्रिया पर और जानकारी के लिए ITR Filing Guide देखें।
एक सावधानी
ऑनलाइन बहुत सी 'टैक्स बचाने' की सलाहें घूमती हैं, जिनमें से कुछ अधूरी या पुरानी होती हैं। किसी भी भुगतान को सिर्फ़ टैक्स बचाने के लिए करने से पहले रुककर देखिए कि वह आपके बाकी लक्ष्यों से मेल खाता है या नहीं। जो पैसा बँधा रहेगा, उसकी शर्तें पहले पढ़ें। उलझन हो तो किसी योग्य टैक्स प्रोफ़ेशनल से पूछना ठीक रहता है।
टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता है और दो रिजीम का विकल्प होता है। 80C जैसी कटौतियाँ आम तौर पर ओल्ड रिजीम में मिलती हैं। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए आधिकारिक पेज पर जाँच लें।
अपनी सैलरी स्लिप या पिछले महीने के बैंक स्टेटमेंट में देखिए कि TDS के नाम से कितनी रकम कट रही है। अगर आपकी नौकरी नहीं है, तो अपने किसी आमदनी के स्रोत की सूची बनाइए।
काम के पेज
ये कोर्स सिर्फ़ शिक्षा के लिए हैं। यहाँ कुछ भी वित्तीय, कर, बीमा या निवेश सलाह नहीं है और किसी प्रोडक्ट, फंड, बैंक या ऐप की सिफ़ारिश नहीं की गई। नियम और दरें बदलती हैं; आधिकारिक स्रोत से जाँच लें। आपकी प्रगति सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में सेव होती है।
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