| All Academies / पर्सनल फाइनेंस बेसिक्स
Beginner 4 min read 131 views Free Lesson

बजट कैसे बनाएं — 50-30-20 Rule Step by Step

अपनी income को तीन हिस्सों में बांटकर बजट बनाने का सबसे आसान तरीका — step by step, अपनी असली numbers के साथ।

Reviewed by ASHA PaisaGyan Editorial Team · Last Updated: 03 Nov 2026
इस Lesson में क्या सीखेंगे
  • 50-30-20 Rule से अपनी Income को Needs, Wants और Savings में बांटना सीखेंगे।
  • अपना पहला Practical Monthly Budget खुद बनाना सीखेंगे।
Key Takeaways
  • Income का 50% ज़रूरतों पर, 30% चाहतों पर, और 20% savings पर रखें
  • बजट एक बार का काम नहीं, हर महीने track करने की आदत है
  • पहला महीना perfect नहीं होगा — बस शुरुआत करें और adjust करते रहें

इस lesson में आप सीखेंगे कि अपनी salary या income को तीन हिस्सों में बांटकर एक practical और टिकने वाला बजट कैसे बनाएं — 50-30-20 rule का इस्तेमाल करके। यह rule अमेरिकी Senator Elizabeth Warren की किताब से आया था, लेकिन भारतीय salaried और freelance दोनों तरह की income पर बराबर लागू होता है। चलिए step by step, real numbers के साथ शुरू करते हैं।

Step 1: अपनी Monthly Take-Home Income पता करें

सबसे पहले अपनी in-hand salary यानी टैक्स, PF, professional tax जैसे सभी deductions के बाद हाथ में आने वाला असली पैसा नोट करें — CTC (Cost to Company) नहीं, बैंक अकाउंट में आने वाला अमाउंट। मान लीजिए आपकी monthly in-hand income ₹40,000 है। अगर आप freelancer या business owner हैं जिनकी income हर महीने बदलती है, तो पिछले 3-6 महीनों का average निकालें और उसी को base मानें — इससे budget ज़्यादा realistic बनता है।

Step 2: 50% ज़रूरतों (Needs) के लिए अलग करें

अपनी income का करीब 50% उन खर्चों के लिए रखें जो टाले नहीं जा सकते — Rent, Groceries, बिजली-पानी का बिल, Loan EMI, Transport, Insurance Premium। ₹40,000 की income में यह हिस्सा लगभग ₹20,000 होगा। उदाहरण के लिए: Rent ₹10,000, Groceries ₹5,000, बिजली-पानी-गैस ₹2,000, Transport ₹2,000, Phone/Internet ₹1,000 — कुल ₹20,000। अगर आपके शहर में Rent ज़्यादा है और यह हिस्सा 50% से बढ़कर 60-65% हो रहा है, तो घबराएं नहीं — पहले Wants वाले हिस्से को थोड़ा कम करके एडजस्ट करें, फिर धीरे-धीरे इसे 50% के करीब लाने की कोशिश करें।

Step 3: 30% चाहतों (Wants) के लिए रखें

बाकी लगभग 30% उन चीज़ों पर खर्च करें जो life को बेहतर और मज़ेदार बनाती हैं पर ज़रूरी नहीं हैं — बाहर खाना, Shopping, Netflix/OTT subscriptions, Movies, Hobbies, Weekend outings। ₹40,000 की income में यह हिस्सा लगभग ₹12,000 होगा। यह "guilt-free spending" वाला हिस्सा है — इसे पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं, बस एक तय limit के अंदर रखना है ताकि यह ज़रूरतों और savings को न खा जाए।

Step 4: 20% Savings और Investment में डालें

बचे हुए लगभग 20% को इस क्रम में लगाएं: पहले Emergency Fund (जब तक वह पूरा न हो जाए), फिर Term और Health Insurance Premium (अगर 50% वाले हिस्से में न रखा हो), और उसके बाद SIP के ज़रिए Mutual Funds या Retirement के लिए Investments। ₹40,000 की income में यह लगभग ₹8,000 होगा — उदाहरण के लिए ₹3,000 Emergency Fund में, ₹5,000 SIP में। यही हिस्सा आपकी financial freedom और भविष्य को बनाता है, इसलिए सैलरी आते ही सबसे पहले इसे अलग कर दें (auto-debit लगाकर), बाकी खर्च बचे हुए पैसे से करें — इसे "Pay Yourself First" तरीका कहा जाता है।

Step 5: हर महीने Track करें

एक simple Excel Sheet, Google Sheet, या notebook बनाएं जिसमें तीन columns हों — Needs, Wants, Savings। हर हफ्ते अपने खर्चों को इन तीन categories में लिखें, और महीने के आखिर में actual खर्च की तुलना planned budget से करें। अगर किसी category में लगातार ज़्यादा खर्च हो रहा है, तो अगले महीने का target उसी हिसाब से realistic बनाएं — बजट कोई एक बार बनाकर भूल जाने वाली चीज़ नहीं है, यह हर महीने थोड़ा सुधरने वाला process है।

पूरा उदाहरण: ₹40,000 Salary का 50-30-20 Budget

नीचे पूरा महीने का उदाहरण देखें ताकि सारे steps एक साथ समझ आ जाएं:


अगर आपकी income इससे अलग है, तो बस यही percentages अपनी salary पर apply करें — सिद्धांत वही रहेगा, सिर्फ numbers बदलेंगे।

Quick Recap (चेकलिस्ट)

  • अपनी Monthly Take-Home Income पता कर ली?
  • 50% ज़रूरतों (Needs) के लिए अलग कर दिया?
  • 30% चाहतों (Wants) के लिए तय कर लिया?
  • 20% Savings और Investment में डाल दिया?
  • हर महीने Track करने की आदत बना ली?
Common Mistakes to Avoid
  • सिर्फ एक बार Budget बनाकर भूल जाना — बजट को हर महीने Review करना ज़रूरी है।
  • Needs और Wants को मिला देना — जैसे रोज़ बाहर खाना खाने को "ज़रूरत" मान लेना।

इस lesson में कोई गलती या confusion?

Comments (0)

Comment करने के लिए login करें।

सबसे पहले comment करें!